अंकल ने माँ को बहलाकर चोद दिए

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मेरा नाम आदित्य है और मैं आज आपको अपनी माँ की चुदाई की सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।

यह कहानी उस समय की है जब मैंने अपनी माँ को पहली बार किसी और मर्द के साथ देखा था और मेरे जीवन की सोच ही बदल गई थी।

कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको अपने घर के बारे में बता देता हूँ।

मेरे घर में हम तीन लोग रहते हैं – मैं, मेरी माँ, और मेरे पिता।

मेरे पिता एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं और अक्सर टूर पर बाहर रहते हैं।

मेरी माँ पूजा एक गृहिणी हैं और घर संभालती हैं।

मेरी माँ की उम्र 42 साल है लेकिन वो दिखने में 35 की भी नहीं लगतीं।

उनका फिगर बस कातिलाना है – 38-32-40 का।

उनके बूब्स 38 इंच के पूर्ण गोल और उभरे हुए हैं, कमर 32 इंच की पतली और सुडौल, और गांड 40 इंच की भारी और मोटी।

उनकी गांड देखकर कोई भी मर्द पागल हो जाए।

वो गोरी हैं, बिल्कुल दूध जैसी सफेद त्वचा, और उनकी आंखें हल्की भूरी।

बाल लंबे और काले, जो उनकी कमर तक आते हैं।

मेरी माँ थोड़ी पुराने ख्यालात की हैं। उनका मानना है कि पति भगवान का रूप होता है, चाहे वो कुछ भी करे।

जब नई-नई शादी हुई थी, तो कुछ ही महीनों में माँ ने पापा को किसी और औरत के साथ देख लिया था।

लेकिन वो कुछ नहीं कर पाईं, सिर्फ रोती रहीं। फिर धीरे-धीरे सब ठीक हो गया था।

कुछ साल बाद माँ ने फिर से पापा को किसी और के साथ देखा, और उसके बाद से दोनों अलग-अलग सोने लगे थे।

लेकिन माँ का फिर भी मानना था कि अगर पति सेक्स मांगे तो पत्नी मना नहीं कर सकती।

इसलिए जब भी पापा का मन होता, वो माँ के साथ सेक्स करते थे।

मैंने एक बार रात को बाथरूम के लिए उठा तो देखा कि पापा माँ के ऊपर चढ़े हुए थे और धक्के मार रहे थे।

लेकिन माँ के चेहरे पर कोई रिएक्शन नहीं था।

जैसे उन्हें कुछ फील ही नहीं हो रहा हो, बस नीचे लेटी थीं।

पापा का भी जल्दी हो गया और वो उठकर अपने कमरे में सोने चले गए।

उनके चेहरे से लग रहा था कि वो बहुत अनसैटिस्फाइड थीं।

ऐसा कुछ महीने चलता रहा।

पापा जल्दी झड़ जाते थे और माँ बस लेटी रहती थीं।

उनके सेक्स में बिल्कुल रोमांस ही नहीं था।

फिर एक दिन पापा बोले कि कुछ काम से एक हफ्ते के लिए बाहर जाना है उन्हें।

उन्होंने मुझसे कहा कि घर का ध्यान रखना और माँ का ख्याल रखना। माँ ने भी ठीक है बोल दिया।

अगले दिन सुबह-सुबह हमारे पड़ोस में रहने वाले विकास अंकल आ गए।

वो पापा के दोस्त थे और अक्सर घर आते-जाते रहते थे।

माँ ने उन्हें चाय के लिए बुलाया। मैं भी घर पे ही था।

फिर हमने नाश्ता किया और अंकल ने माँ से बोला – “कुछ जरूरत होगी तो बताइएगा।”

ऐसा दो दिन चला। तीसरे दिन मैं सामने वाले घर में खेल रहा था जब अंकल आए।

मैं थोड़ी देर बाद जब घर के अंदर गया तो कोई हॉल में नहीं दिखा।

मुझे किचन से आवाज आ रही थी तो मैं किचन की तरफ बढ़ा, और देखा कि अंकल माँ को पीछे से हग किए हुए थे।

माँ खुद को छुड़वाने की कोशिश कर रही थीं।

अंकल: पूजा, आपको जब से देखा है कंट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ।

माँ: भैया छोड़ दीजिए, कोई देख लेगा।

अंकल: घर में कोई नहीं है। आदित्य भी बाहर खेल रहा है।

माँ: मैं आपके दोस्त की वाइफ हूँ। प्लीज ये सब मत कीजिए।

अंकल: तो क्या हुआ? मुझे पता है वो आपको संतुष्ट नहीं कर पाते हैं।

माँ: हां, आपको बड़ा पता है।

अंकल: और नहीं तो क्या।

माँ: और क्या पता है आपको?

अंकल: यही कि वो इतनी खूबसूरत बीवी होते हुए भी बाहर मुंह मारता है।

जब अंकल ने ये बोला, माँ को बहुत गुस्सा आया।

सारी बात वापस माँ के दिमाग में आ गई, और माँ चुप हो गईं।

अंकल भी समझ गए कि तीर सही निशाने पर लगा था।

अंकल: और नहीं तो क्या, इतनी खूबसूरत बीवी के होते हुए भी बाहर कोई कुछ करता है क्या?

माँ: छोड़िए ये सब बातें।

अंकल: अरे क्यों छोड़ें? कल रात को उसका फोन आया था, वो कल भी किसी लड़की के साथ था रात में।

माँ रोने लगीं तो अंकल चुप कराने की एक्टिंग करने लगे।

अंकल: पूजा जी, आपको भी तो हक है अपनी खुशी को देखने का।

माँ: लेकिन मैं ये सब नहीं कर सकती। वो मेरे पति हैं।

अंकल: कैसा पति? जो अपनी बीवी को हर वक्त धोखा देता रहता है।

माँ और जोर-जोर से रोने लगीं, तो अंकल माँ के आंसू पोंछते हुए उन्हें आगे घुमा के हग करने लगे।

फिर अंकल ने माँ के चेहरे को ऊपर किया और किस करने लगे।

माँ पहले-पहले तो रेसिस्ट कर रही थीं, फिर शांत हो गईं। अंकल को भी ग्रीन सिग्नल मिल गया।

2-3 मिनट तक किस करने के बाद अंकल माँ के बूब्स के ऊपर हाथ घुमाने लगे।

बता दूं दोस्तों, माँ साड़ी पहनती थीं हमेशा घर में। धीरे से अंकल ने माँ की साड़ी के अंदर हाथ डाला और दबाने लगे।

माँ को भी मजा आने लगा। फिर अंकल ने माँ के कपड़े उतार दिए।

माँ अब उनके सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थीं, जिसको अंकल उतार रहे थे।

माँ ने भी उनकी शर्ट उतार दी और पैंट खोलने लगीं।

फिर अंकल के अंडरवियर में तंबू देख के बोलीं – ये तो उनसे काफी बड़ा लग रहा है। उनका तो 4 इंच का ही है, और जल्दी ढल जाते हैं।

अंकल हंसने लगे और बोले – आज आपको पता चलेगा संतुष्ट होना किसे कहते हैं।

और इतना कहते ही माँ को पीछे घुमाया और बोले किचन की स्लैब में सपोर्ट लेके झुकने को।

माँ जैसे ही झुकीं, अंकल अपना लौड़ा सटाके माँ की चूत में डाल दिए और जोर-जोर से धक्के मारने लगे।

माँ: उई मां मर गई। आह आह, धीरे-धीरे कीजिए। मैं कहां भागी जा रही हूँ।

अंकल कुछ सुन नहीं रहे थे। वो धक्का लगाए जा रहे थे। 5 मिनट में माँ भी पूरा मजा लेने लगीं।

फिर बोलीं: बेडरूम में चलो।

और अंकल का लौड़ा पकड़ के अंकल को अंदर ले गईं।

फिर माँ ने अंकल को लिटा दिया और उनका लौड़ा चूसने लगीं।

3-4 मिनट बाद अंकल उठे और माँ को बेड में पटक दिया और उनके ऊपर चढ़ गए।

अंकल ने अपना लौड़ा सेट किया और एक ही झटके में अंदर डाल दिया।

माँ धीरे-धीरे आह आह की आवाज निकाल रही थीं, तो अंकल को और भी मजा आने लगा।

करीब 5-7 मिनट उसी पोज में चोदने के बाद अंकल बोले – घोड़ी बन जाओ।

माँ तुरंत घूम के घोड़ी बन गईं और अंकल पीछे से चूत में डालने लगे।

उनके बड़े-बड़े बूब्स जोर-जोर से हिल रहे थे। उस रूम का नजारा ही कुछ और था।

अंकल पीछे से माँ के बूब्स पकड़ के धक्के लगाने लगे।

माँ: स्पीड बढ़ाओ, मेरा होने वाला है।

तो अंकल बोले: मेरा भी होने वाला है, कहां डालूं?

माँ: अंदर डाल दो।

अंकल: कुछ हो गया तो?

माँ: नहीं मैंने बच्चा होने के बाद नसबंदी करा ली थी।

अंकल: अरे अब तो मजा ही आ जाएगा। हर बार तेरे अंदर ही डालूंगा।

माँ: हां बाबा, डाल लेना।

3-4 मिनट में माँ ने जोर से बेडशीट को पकड़ लिया और ढीली पड़ गईं।

अंकल समझ गए माँ का निकल गया।

अंकल स्पीड बढ़ा दिए और 2-3 मिनट में वो भी माँ के अंदर अपना वीर्य डाल दिए। फिर दोनों थक के बिस्तर पर लेट गए।

माँ: आज कितने सालों बाद लगा जैसे चुदाई की मैंने।

अंकल: अब आप जब चाहोगे तब होगा ये।

माँ: आप रुक जाइए ना आज रात को।

अंकल: आदित्य भी तो है, उसका क्या करोगी?

माँ: वो तो जल्दी सो जाता है। उसके सोने के बाद हम फिर से एंजॉय करेंगे।

अंकल: ठीक है मैं डिनर के टाइम पे आता हूँ।

माँ: ओके, आपके लिए एक सरप्राइज रेडी रहेगा।

अंकल: ठीक है।

फिर अंकल अपने कपड़े पहन के निकलने लगे और माँ भी उठके फ्रेश होने चली गईं वॉशरूम।

मैं दौड़ के बाहर आ गया ताकि किसी को पता ना चले।

अंकल रात को डिनर के टाइम पे आते हैं और एकदम हंस-हंस के माँ से बात कर रहे थे।

बीच-बीच में प्यार से शोल्डर से धक्का दे रहे थे और माँ भी बस हंस रही थीं।

डिनर के बाद मैं अपने रूम में चला गया और माँ ने अंकल को हॉल में रुकने को बोला।

थोड़ी देर बाद माँ अपने कमरे से निकली लाल साड़ी में, जो उन्होंने शादी के टाइम पे पहनी थी।

क्योंकि माँ घर में हमेशा साड़ी में ही रहती थीं।

उनके पास नए ब्लाउज नहीं थे और जो पुराने थे, वो काफी टाइट हो गए थे।

और उनके बूब्स बाहर आने के लिए तड़प रहे थे।

माँ ने झुमके, मंगलसूत्र, कंगन सब पहना हुआ था, जैसे कोई नई दुल्हन हो।

अंकल तो माँ को देखते ही पागल हो गए। 5 मिनट तक तो अंकल बस माँ को निहारते ही रहे ऊपर से नीचे।

माँ: क्या हुआ? सुहागरात नहीं मनानी है?

अंकल: कोई पागल ही होगा जो मना करेगा।

माँ: तो चलो।

अंकल तुरंत माँ के रूम में चले गए और दोनों किस करना चालू किए।

माँ ने फिर उन्हें दूध का गिलास दिया और बोलीं – आज तो रुकना नहीं है।

अंकल अपने साथ वियाग्रा की टैबलेट लाए थे, जो उन्होंने दूध के साथ ले ली।

फिर अंकल ने माँ का पल्लू नीचे किया और क्लीवेज एरिया में मुंह घुसाने लगे।

थोड़ी देर ऐसे ही माँ के बूब्स से खेलने के बाद अंकल ने ब्लाउज खोल के उन्हें आजाद कर दिया।

फिर अंकल ब्रा भी खोल के माँ के बूब्स जोर-जोर से चूसने लगे।

एक-दो बार उन्होंने माँ के निप्पल्स भी काट दिए, तो माँ के मुंह से आह की चीख निकल गई।

10 मिनट तक यही चलता रहा। फिर अंकल माँ को अपना लंड चूसने बोले। माँ भी नीचे बैठ के चूसने लगीं।

क्या नजारा था। एकदम माँ के बाल खुले हुए थे। दो बड़े-बड़े बूब्स के बीच में मंगलसूत्र लटक रहा था और नीचे पेटीकोट पहना हुआ था और लंड चूस रही थीं।

5 मिनट तक चुसवाने के बाद अंकल ने माँ को उठाया, पेटीकोट खोला और बिस्तर पर पटक दिया। बहुत देर तक पैंटी के ऊपर से ही चूत सूंघते रहे और रगड़ते रहे।

माँ: बस सहलाओगे ही या डालोगे भी? अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है।

अंकल: रुक जा मेरी जान, आज तो पूरा मजा दूंगा तुझे मैं।

ये कह कर अंकल ने माँ की पैंटी उतारी और चूत चाटने लगे।

माँ एकदम से तड़पने लगीं और एक हाथ से बस अंकल का सिर दबा रही थीं अपनी चूत के ऊपर।

5 मिनट बाद अंकल उठे और अपना लंड माँ की चूत से सटाके धीरे से डालने लगे और माँ आह आह करने लगीं।

माँ: हां चोद भोंसड़ी के। इसका बाप तो चोद ही नहीं पाता है। 5 मिनट में झड़ जाता है।

अंकल: आज तेरी सालों की गर्मी मिटा दूंगा मेरी जान।

करीब 10 मिनट तक मिशनरी पोजीशन में चोदने के बाद अंकल माँ को अपने ऊपर आने को बोले।

माँ भी झट से उठ के अंकल के लंड पे बैठ गईं और उछलने लगीं और साथ ही साथ माँ के दोनों बड़े बूब्स भी उछलने लगे।

अंकल ने माँ को झुकाया और एक बूब को अपने मुंह में डाल के चूसने लगे।

और इतने में ही माँ एकदम से रुक गईं। अंकल समझ गए कि माँ का हो गया था।

अंकल ने माँ को नीचे उतारा और फिर से मिशनरी में आ गए।

उन्होंने माँ की टांगें उठाईं और अपना लंड अंदर डाल दिया।

करीब 5 मिनट में अंकल ने भी अपना माल माँ की चूत में छोड़ दिया और बगल में लेट गए।

रूम में एसी चल रहा था लेकिन दोनों जबरदस्त चुदाई के बाद पसीने से भीग गए थे और हांफ रहे थे।

अंकल: मजा आया मेरी रानी?

माँ: वो जाए, जिसे चोदना है चोदे। मैं तो बस तुमसे ही चुदूंगी अब से।

अंकल ये सुनकर हंसने लगे। फिर थोड़ी देर बात करके दोनों सो गए।

सुबह जब मैं उठा और माँ के रूम में झांका तो देखा माँ अंकल के लंड पे बैठ के उछल रही थीं और कह रही थीं – जल्दी करो, इससे पहले आदित्य उठ जाए।

अंकल: अरे वो आराम से सो रहा है। तुम मजा खराब मत करो।

माँ: ठीक है।

अंकल ने फिर स्पीड बढ़ा दी और माँ भी जोर-जोर से उछलने लगीं।

उन्होंने अभी भी मंगलसूत्र उतारा नहीं था। इतने बड़े-बड़े बूब्स और उनके बीच में मंगलसूत्र उछल रहा था।

क्या कमाल का ही नजारा था। फिर अंकल माँ को नीचे उतारे और बोले डॉगी स्टाइल में आने को।

माँ भी तुरंत बेड से उतरीं और झुक गईं। अंकल ने फिर चूत में लंड सटाया और जोर-जोर से धक्का देने लगे। माँ भी चिल्लाने लगीं।

माँ: चोद मादरचोद, शांत कर दे अंदर की आग को।

उनके मुंह से ये सब सुनके अंकल को और जोश आ गया और उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

5 मिनट बाद अंकल बोले – मेरा निकलने वाला है।

माँ: मुझे टेस्ट करना है।

अंकल ने फिर लंड निकाला और माँ को झुका के उनके मुंह में डाल दिया।

माँ भी जोर-जोर से चूसने लगीं। पूरे रूम में चप-चप की आवाज गूंज रही थी।

माँ साथ ही साथ अंकल के टट्टे भी सहला रही थीं।

अंकल ने माँ का सिर पकड़ के जोर से दबा दिया और सारा माल माँ के मुंह में डाल दिया।

माँ उस वक्त किसी पोर्नस्टार से कम नहीं लग रही थीं।

माँ अंकल का लंड चाट-चाट के साफ किया और थोड़ा वीर्य जो बाहर था वो अपने बूब्स पे मसलने लगीं और दोनों जोर-जोर से हंस रहे थे।

फिर थोड़ी देर बाद दोनों ने कपड़े पहने और बाहर आए।

फिर अंकल नाश्ता करके घर से चले गए और बोले – कल आता हूं फिर से।

माँ ने भी स्माइल दी और बोलीं – ठीक है, मैं इंतजार करूंगी।

यह थी मेरी माँ की चुदाई की पहली कहानी। अगले भाग में मैं बताऊंगा कि कैसे मैं भी माँ के साथ शामिल हो गया और हम तीनों मिलकर मजे करने लगे।

NEXT PART: मैं और अंकल मिलकर माँ को चोदे

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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