शादी की सालगिरह पर डिलीवरी बॉय से चुदवाई

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नमस्कार दोस्तों, मैं आज आपके सामने एक ऐसी कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ जो एक असली आंटी ने मुझे बताई थी।

यह कहानी राजस्थान के जोधपुर शहर की है, जहाँ एक खूबसूरत औरत अपनी जिंदगी के सबसे यादगार पलों को जीती है।

मैं पहले उनके बारे में विस्तार से बताना चाहूँगा। उनका नाम अलका शर्मा है, उम्र 35 साल, और वो जोधपुर के एक पॉश इलाके में रहती हैं।

उनका फिगर है 34-30-36। उनके बूब्स 34 इंच के गोल और उभरे हुए हैं, कमर 30 इंच की पतली और सुडौल, और गांड 36 इंच की गोल और मोटी।

वो रंग से गोरी हैं, लंबे काले बाल उनकी कमर तक आते हैं, और आँखें हल्की भूरी हैं। वो दिखने में इतनी खूबसूरत हैं कि कोई भी उन्हें देखकर उनकी तरफ आकर्षित हो जाए।

अब मैं कहानी पर आता हूँ जो उनकी ही ज़ुबानी लिखी गई है।

मैं अलका शर्मा, आज अपनी जिंदगी की सबसे खास रात की कहानी सुनाने जा रही हूँ।

यह घटना आज से करीब आठ महीने पहले की है, जब मेरी शादी की सालगिरह थी और मेरे पति राकेश शर्मा, जो एक बड़ी कंपनी में मैनेजर हैं, को अचानक दिल्ली के एक ज़रूरी काम से जाना पड़ा।

उस दिन सुबह से ही मेरा मूड खराब था। मैंने सोचा था कि इस बार हम कहीं घूमने जाएँगे, शाम को डिनर करेंगे, रोमांस करेंगे।

लेकिन सुबह ही राकेश का फोन आया कि उन्हें तुरंत निकलना होगा।

मैंने रोते हुए कहा, “आज हमारी सालगिरह है, तुम मुझे अकेला छोड़कर जा रहे हो?”

लेकिन उन्होंने कहा, “जानू, यह बहुत ज़रूरी मीटिंग है, मैं परसों वापस आ जाऊँगा, फिर हम सेलिब्रेट कर लेंगे।”

मैं पूरे दिन अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी रोती रही। मेरे पति और मेरे बीच पिछले कुछ सालों से सेक्स लाइफ ठंडी पड़ चुकी थी।

वो हफ्ते में एक बार आते, थकान की वजह से जल्दी सो जाते, या फिर 5-10 मिनट में अपना काम निपटाकर सो जाते।

मेरी जवानी बेकार जा रही थी, मेरी चूत प्यासी थी, लेकिन कोई उसकी प्यास बुझाने वाला नहीं था।

मैं घर में अक्से नाइटी पहनती हूँ। जब अकेली रहती हूँ तो मैं ब्रा और पैंटी भी नहीं पहनती, क्योंकि मुझे आज़ादी पसंद है।

उस दिन भी मैंने हल्की सी पारदर्शी नाइटी पहनी हुई थी, नीचे कुछ नहीं था। मेरे बूब्स और गांड साफ झलक रहे थे, लेकिन मुझे क्या पता था कि आज कोई आने वाला है।

शाम को करीब पाँच बजे डोरबेल बजी। मैंने सोचा शायद कोई पड़ोसी होगा।

मैं उठी और दरवाज़ा खोला। सामने एक 22 साल का जवान लड़का खड़ा था, हाथ में एक पैकेट लिए हुए।

वो देखने में स्मार्ट था, हाइट करीब 5 फुट 10 इंच, बॉडी सेहतमंद, और चेहरे पर हल्की दाढ़ी थी। उसने टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी।

मैंने पूछा, “क्या है? कौन हो तुम?”

वो मुझे देखकर थोड़ा चौंका, शायद मेरी नाइटी देखकर।

उसकी नज़रें मेरे बूब्स पर टिकीं, फिर वो शर्माते हुए बोला, “मैम, क्या यह राकेश शर्मा जी का घर है?”

मैंने कहा, “हाँ, लेकिन वो घर पर नहीं हैं। वो दिल्ली गए हैं।”

वो बोला, “मैम, सर ने ऑर्डर किया था। मैं डिलीवरी लेकर आया हूँ।”

मैंने पूछा, “क्या है इस पैकेट में?”

वो मुझे घूरते हुए बोला, “मैम, यह आपका फेवरेट पाइनेप्पल केक है और एक बोतल इम्पोर्टेड वाइन भी है। मैम, आज कोई खास मौका है क्या?”

मैं दुखी होकर बोली, “हाँ, आज हमारी शादी की सालगिरह है, लेकिन मेरे पति मेरे साथ नहीं हैं।”

उसने कहा, “ओह, सॉरी मैम। वैसे हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी!”

मैंने धीरे से कहा, “क्या हैप्पी! आज मेरे पति को मेरे लिए टाइम नहीं है। इन सब चीजों का कोई मतलब नहीं मेरे लिए अब।”

मेरी आँखों में आँसू थे। वो लड़का मुझे देख रहा था, उसकी आँखों में सहानुभूति थी।

अचानक वो बोला, “मैम, अगर आपको दिक्कत न हो तो मैं आपकी एनिवर्सरी आपके साथ मना सकता हूँ। मैं अभी फ्री हूँ।”

मैंने उसे हैरानी से देखा। एक अजनबी लड़का, डिलीवरी बॉय, मुझे ऐसा ऑफर दे रहा था।

मैंने सोचा, क्यों नहीं? आखिर मैं भी तो इंसान हूँ, मेरी भी तो ज़रूरतें हैं।

थोड़ी देर सोचने के बाद मैंने पूछा, “इसके बाद तुम्हें और कहाँ जाना है?”

वो बोला, “यह मेरी लास्ट डिलीवरी थी मैम। अब मेरी ड्यूटी ऑफ हो गई है। मैं घर जाने वाला था, लेकिन अगर आप इजाज़त दें तो आपके साथ कुछ समय बिता सकता हूँ।”

मैंने कहा, “ठीक है, चलो अंदर आ जाओ।”

मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने बताया, “मेरा नाम समीर है मैम।”

मैंने कहा, “समीर, अंदर आओ।”

वो अंदर आया और मैंने पीछे से दरवाज़ा बंद कर दिया।

मैंने उसे ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठने को कहा और खुद अपने रूम में चली गई।

मैंने सोचा, आज तो यह लड़का मेरे साथ है, क्यों ना इसे इंप्रेस किया जाए।

मैंने उससे कहा, “समीर, तुम फ्रेश होकर आ जाओ। गेस्ट बाथरूम वहाँ है।”

मैंने उसे अपने रूम में जाने दिया और खुद बाथरूम में चली गई।

मैंने तेज़ गर्म पानी से नहाया, अपने शरीर पर सुगंधित साबुन लगाया, खासकर अपनी चूत और गांड पर ध्यान दिया।

मैंने सोचा, आज इस जवान लड़के से अपनी प्यास बुझाऊँगी।

नहाने के बाद मैंने तौलिया लपेटा और बाहर आ गई। समीर ड्राइंग रूम में बैठा था।

जब मैं तौलिये में निकली तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। तौलिया मेरे बूब्स को ढक रहा था लेकिन मेरी गांड का ऊपरी हिस्सा और मेरी पिंडलियाँ साफ दिख रही थीं।

मैंने उसके सामने ही सोफे पर बैठकर अपने हाथों और पैरों में लोशन लगाना शुरू किया।

मैंने अपने पैर उठाए, तौलिया थोड़ा सरक गया, और मेरी गांड का हिस्सा दिखने लगा।

समीर मुझे चोरी-चोरी देख रहा था, उसका लंड जींस में उभर रहा था।

मैंने अपने बैग से लाल रंग की जालीदार ब्रा और मैचिंग पैंटी निकाली। मैंने उसके सामने ही तौलिया खोला और ब्रा पहनने लगी।

मेरे बूब्स उसके सामने नंगे थे, गोल और उभरे हुए। समीर की साँसें तेज़ हो गईं।

फिर मैंने जालीदार पैंटी पहनी जो मेरी गांड के ऊपर कसी हुई थी और मेरी चूत के ओठ साफ झलक रहे थे।

मैंने एक सफेद रंग का पतला गाउन पहना जो मेरे बूब्स और गांड की शेप साफ दिखा रहा था।

मैंने बाल खुले छोड़ दिए, थोड़ा लिपस्टिक लगाया, और वापस ड्राइंग रूम में आ गई।

समीर मुझे देखकर घूर रहा था। उसका मुँह खुला का खुला रह गया।

मैंने पूछा, “क्या हुआ समीर? कुछ बोलोगे नहीं?”

वो हकलाते हुए बोला, “मैम… मतलब अलका जी… आप तो कमाल लग रही हैं। आप इतनी खूबसूरत हैं कि मैं तो आपको देखता ही रह गया।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “थैंक्स समीर। चलो, आज की शाम को यादगार बनाते हैं।”

फिर हम दोनों डाइनिंग टेबल पर आए।

मैंने केक निकाला और समीर ने उसमें मोमबत्तियाँ जलाईं।

फिर मैंने केक काटा। समीर बोला, “हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी अलका जी।”

मैंने केक का एक टुकड़ा उठाकर उसके मुँह में दिया। उसने भी केक उठाया और मुझे खिलाया।

उसकी उँगलियाँ मेरे होंठों को छू गईं। मैंने कहा, “ये बार-बार जी-जी क्यों बोल रहे हो? अब तुम ड्यूटी पर नहीं हो। मेरा नाम अलका है, बस अलका बोलो।”

उसने कहा, “ठीक है अलका।”

फिर मैंने दो पैग वाइन के बनाए और हम दोनों पीने लगे। हमने दो-दो पैग लिए।

वाइन का नशा धीरे-धीरे चढ़ने लगा था। मेरे गाल लाल हो गए थे और मैं थोड़ी चकचका रही थी।

तभी मेरे पति का फोन आया। मैंने फोन उठाया और गुस्से में बोली, “हाँ बोलो।” राकेश ने कहा, “सॉरी जानू, मैं थोड़ा लेट हो जाऊँगा, परसों सुबह तक पहुँचूँगा।”

मैंने गुस्से में कहा, “तुम आज के दिन भी मेरे साथ नहीं हो। मुझे कोई बात नहीं करनी तुमसे!” और मैंने फोन काट दिया।

मैं रोने लगी। समीर मेरे पास आया और बोला, “क्या हुआ अलका? रो क्यों रही हो?”

मैंने कहा, “कुछ नहीं, बस मेरे पति को मेरी कोई परवाह नहीं है।”

समीर ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, “चलो मत रो, मैं हूँ ना। आज मैं तुम्हें खुश कर दूँगा।”

उसका हाथ धीरे-धीरे मेरी जांघों पर चलने लगा।

मैंने एक और पैग बिना पानी के पी लिया और रोते-रोते उसकी तरफ देखने लगी। उसने एक और पैग बनाया और हम दोनों ने पी लिया।

अब मैं पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। उसके हाथ मेरी जांघों से होते हुए मेरी गांड तक आ गए थे।

मुझे उसका ऐसा करना बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने एक और पैग बनाया और हम दोनों ने पी लिया।

मैंने उससे कहा, “समीर, तुमने मुझे कोई गिफ्ट नहीं दिया आज?”

वो बोला, “अलका, मैं तो एक गरीब डिलीवरी बॉय हूँ, मैं तुम्हें क्या गिफ्ट दे सकता हूँ?”

मैंने शराब के नशे में मुस्कुराते हुए कहा, “तुम तो मुझे वो दे सकते हो जिसकी मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।”

वो समझ नहीं पाया और बोला, “मेरे पास कुछ नहीं है। मैं क्या दे पाऊँगा तुम्हें?”

मैंने कहा, “मुझे गिफ्ट चाहिए समीर। तुम वादा करो कि तुम मुझे वो दोगे जो मैं माँगूँगी।”

उसने कहा, “मेरी हैसियत से जो भी होगा, मैं देने को तैयार हूँ।”

मैंने एक और पैग बनाया और पीते हुए कहा, “समीर, आज की रात तुम मुझे खुश कर दो। आज की यह सालगिरह मैं बस तुम्हारे साथ मनाना चाहती हूँ।”

यह कहकर मैंने उसके लंड पर हाथ रख दिया।

वो कांप गया और बोला, “अलका, यह क्या कर रही हो? कहाँ तुम और कहाँ मैं! अगर शर्मा जी को पता चल गया तो मेरी नौकरी चली जाएगी।”

मैं उठी और उसके पास गई।

मैंने उसकी पैंट में हाथ डालते हुए कहा, “समीर, किसी को पता नहीं चलेगा। यह हमारे बीच का राज रहेगा। तुमने मुझसे वादा किया है।”

मैंने उसकी पैंट का बटन खोला और ज़िप खोली। उसका लंड बाहर निकला।

ओह माई गॉड! वो करीब 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था, एकदम कड़ा और मजबूत।

उसे देखते ही मेरे मुँह और चूत में पानी आ गया। मेरे पति का तो 4 इंच का था और पतला भी, लेकिन यह तो फौलादी लंड था।

मैंने उसका हाथ अपनी चूचियों पर रख दिया और बोली, “समीर, आज की रात बस तुम मुझे खुश कर दो। मैं तुमसे चुदवाना चाहती हूँ।”

वो कुछ बोलने वाला था कि मैंने उसके लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। वो आह्ह्ह्ह करने लगा। उसके हाथ मेरी चूचियों पर सख्त होने लगे, उन्हें दबाने लगे।

मैं उसके मोटे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

वो मेरी चूचियों को नोचने लगा, मेरे निप्पल्स को मसलने लगा। हम दोनों जोश में आ गए।

फिर हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतार दिए। समीर ने मेरी गाउन, ब्रा और पैंटी उतार दी।

मैं पूरी तरह नंगी थी। उसने अपनी टी-शर्ट और जींस उतारी। उसका बदन एकदम सख्त था, छाती पर बाल थे, और पेट सिक्स पैक की तरह।

हम 69 की पोजीशन में आ गए। मैं नीचे लेट गई और समीर मेरे ऊपर आकर अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया।

मैं उसे चूसने लगी और वो मेरी चूत को चाटने लगा। वो भूखे कुत्ते की तरह मेरी चूत पर टूट पड़ा, अंदर जीभ डालकर चोदने और चाटने लगा।

मेरी चूत पहले से ही गीली थी, लेकिन उसने तो मुझे पागल कर दिया।

वो मेरी चूत को चाट-चाटकर लाल कर दिया, जीभ अंदर तक घुसाकर चाट रहा था। और मैं उसके मोटे लंड को गपागप-गपागप अंदर-बाहर करके चूस रही थी।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि एक डिलीवरी बॉय मुझे इतना मज़ा देगा। वो मेरी चूत को चूसते हुए मेरी गांड को भी सहला रहा था, कभी-कभी उँगली से मेरी गांड के छेद को भी टच कर रहा था।

करीब दस मिनट तक हम 69 की पोजीशन में रहे। फिर समीर उठा और मुझे भी उठाया।

उसने मुझे बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसने मेरी गांड के नीचे तकिया लगाया ताकि मेरी चूत ऊपर उठी रहे।

उसने मेरी दोनों टांगों को फैलाया और ऊपर आया। उसने अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के मुँह पर रगड़ा। मेरी चूत पागल हो रही थी, पानी छोड़ रही थी।

फिर उसने एक ज़ोरदार धक्का दिया। उसका मोटा लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर जाने लगा।

मैं दर्द से चीख उठी, “ऊईईई… ईईई… आह्ह्ह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है…”

मैं आज पूरे 45 दिन बाद चुदवा रही थी और समीर का लंड मेरे पति से बहुत ज़्यादा मोटा और लंबा था।

मेरी जान निकल रही थी। उसने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए, आधा लंड अंदर था।

फिर उसने एक ज़ोरदार धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।

मेरी चीख निकल गई, “ऊईईई… ईईईई… मर गई… बचाओ… बहुत मोटा है…”

मैं चिल्लाती रही लेकिन समीर के कानों पर मेरी आवाज़ नहीं जा रही थी।

वो मुझे एक बाजारू औरत समझकर चोद रहा था, जैसे कोई कुत्ता कुतिया चोदता है। उसे मेरे दर्द की कोई परवाह नहीं थी।

उसने मेरी चूचियों को तेज़-तेज़ दबाना शुरू कर दिया, नोचने लगा।

उसके हर धक्के से मेरी चूत फटने को हो रही थी। मैं “ऊई… ऊईई… आह्ह्ह… छोड़ो मुझे…” चिल्लाती रही, लेकिन वो पागलों की तरह चोदता रहा।

करीब पंद्रह मिनट तक वो मुझे इसी तरह चोदता रहा। फिर उसने अपना लंड निकाल लिया।

मेरी जान में जान आई। उसने मुझे उठाया और अपनी गोद में बिठाया। उसने अपना लंड फिर से मेरी चूत में घुसाया और कमर पकड़कर बिठा दिया।

पूरा लंड एक ही बार में अंदर चला गया। मैं फिर से चीखी, “ऊईईई… ईईई… सीईई…”

वो नीचे से झटके लगाने लगा। मेरी चूचियाँ उसके हाथ में थीं जो वो बेरहमी से दबा रहा था।

धीरे-धीरे मुझे भी मज़ा आने लगा। मेरी चूत फैल चुकी थी और अब वो आराम से अंदर-बाहर हो रहा था।

मैं भी उसके लंड पर उछलने लगी, अपनी गांड पटकने लगी।

अब दोनों तरफ से धक्के लग रहे थे और “थप-थप-थप” की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।

मैंने कहा, “हाँह… समीर… और तेज़… चोदो मुझे…”

वो भी जोश में आ गया। उसने मुझे उठाया और खड़ा कर दिया।

उसने मेरी एक टांग उठाई और अपने कंधे पर रख दी, फिर चूत में लंड घुसाकर गपागप-गपागप चोदने लगा।

अब मैं आह्ह्ह-आह्ह्ह करके उसके लंड का मज़ा ले रही थी। आज कितने दिनों बाद मेरी ऐसी चुदाई हो रही थी।

मेरे पति तो बस मेरे ऊपर चढ़कर दो मिनट चोदते और सो जाते, लेकिन समीर के फौलादी लंड ने आज मेरी चूत का भरता बना दिया था।

मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। अब वो मुझे फच्च-फच्च करके चोदने लगा।

उसका लंड चूत के पानी से और भी तेज़ी से अंदर-बाहर होने लगा। उसका लंड अभी भी पूरा टाइट था, झड़ने का नाम नहीं ले रहा था।

उसने गीला लंड निकाला और मुझे घोड़ी बना दिया। मैंने अपनी गांड उठा दी और वो पीछे से आकर कमर पकड़कर चोदने लगा।

वो ऐसे चोद रहा था जैसे कोई आवारा कुत्ता कुतिया चोद रहा हो।

मेरी दोनों चूचियाँ हिल रही थीं, उसने उन्हें पकड़कर मसलना शुरू कर दिया।

थप-थप-थप की आवाज़ तेज़ हो गई थी। मैं भी जोश में आकर अपनी गांड चलाने लगी, आगे-पीछे करने लगी।

समीर यह देखकर और जोश में आ गया। उसने अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी।

पूरा कमरा हमारी सिसकारियों से गूँज उठा था। वो मुझे एक बाजारू औरत की तरह चोद रहा था, उसे मेरी चीख या दर्द की कोई परवाह नहीं थी।

मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया, लेकिन समीर का लंड तो झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

मेरी हिम्मत खत्म हो गई थी, मैं निढाल सी हो गई थी, लेकिन वो मुझे कुतिया बनाकर चोद रहा था।

मेरी सिसकारियाँ भी बंद हो गई थीं, मैं बस जैसे-तैसे खुद को संभाले हुए थी।

उसने लंड निकाला और मुझे लिटा दिया। वो मेरे ऊपर आ गया और चूत में लंड घुसाकर गपागप-गपागप तेज़ी से चोदने लगा।

उसका लंड अब राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन की रफ़्तार से मेरी चूत में दौड़ रहा था।

मैं शांत होकर उसके झड़ने का इंतज़ार कर रही थी। वो एक खिलाड़ी की तरह मेरी चूत के मैदान में अपने लंड के घोड़े को दौड़ा रहा था।

अब समीर की साँसें तेज़ होने लगीं। उसने मेरी चूचियों को पकड़ा और ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया।

मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ा और दो-चार झटकों के साथ समीर ने गरम लावा मेरी चूत में भर दिया।

उसने अपना पूरा वीर्य मेरी चूत में छोड़ा और मेरे ऊपर निढाल होकर गिर गया।

हम दोनों बहुत थक चुके थे, पसीने से लथपथ थे। हम दस मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे।

फिर हम उठे और बाथरूम गए। समीर ने मुझे गोद में उठाया और शावर चलाया।

हम दोनों नीचे बाथटब में बैठ गए। उसने मेरे शरीर पर साबुन लगाया, मेरी चूचियों को सहलाया, मेरी चूत को साफ़ किया।

फिर हमने एक-एक पैग और पिया। उसने केक उठाया और मेरी चूचियों में लगा दिया, फिर अपने लंड पर भी केक लगाया।

मैं समझ गई कि मुझे क्या करना है। मैं उसके लंड को चाटने लगी, केक के साथ-साथ उसका वीर्य साफ़ कर दिया। उसने भी मेरी चूचियाँ चाट-चाटकर साफ़ कर दीं।

अब वो फिर से तैयार हो गया था। उसने मुझे बेडरूम में ले जाया। हम दोनों फिर से 69 की पोजीशन में आ गए।

मैं उसका लंड चूस रही थी और वो मेरी चूत चाट रहा था।

थोड़ी देर बाद समीर ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और उठाकर अपने लंड पर बिठा दिया। गप्प से लंड अंदर चला गया। मैं “ऊईईई… आह्ह्ह…” करके उछलने लगी। अब मुझे दर्द नहीं, बस मज़ा आ रहा था।

मैंने उसकी गांड को तेज़ी से पटकना शुरू कर दिया।

मैं समीर के फौलादी लंड को चोदने लगी और वो मेरी चूचियों को चूसने लगा। फिर उसने मुझे घोड़ी बनाया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।

अब वो फिर से कुत्तों की तरह चोदने लगा और मैं बेबस कुतिया बनकर उसके धक्कों को झेलने लगी।

समीर के लंड से चुदवाने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। जैसा मैंने ब्लू फिल्मों में देखा था, वैसे ही समीर मुझे चोद रहा था।

आज मैं अपने ही बिस्तर पर एक डिलीवरी बॉय से बाजारू औरत की तरह चुद रही थी।

वो मुझे ऐसे चोद रहा था जैसे कोई आवारा कुत्ता किसी कुतिया को चोदता है।

उसने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे सीधा लिटा दिया। उसने लंड चूत में झटके से घुसाया और रफ़्तार से चोदने लगा।

वो चूचियों को मसलने लगा, काटने लगा। मैं चिल्लाने लगी, “ऊईईई… ईईईई…” लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा, वो तो मेरी चूत का भरता बना रहा था।

मेरी चूत फूलकर लाल हो गई थी, उसका लंड अंदर बच्चेदानी में टक्कर मार रहा था।

असल बात यह थी कि मेरे पति का लंड समीर के लंड से आधा था, जिससे मेरी चूत पूरी नहीं खुली थी। समीर ने मेरी चूत को खोलकर फुला दिया था।

मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ा और समीर का मोटा लंड गीला होकर फच्च-फच्च की आवाज़ से अंदर-बाहर होने लगा। चूत का पानी मेरी जांघों से बहने लगा।

समीर लंड को अंदर तक डालकर चोद रहा था। मैं बस “आह्ह्ह-आह्ह्ह” कर रही थी।

उसने लंड बाहर निकाला और मुझे अपने लंड पर बिठा दिया। गप्प से चूत में लंड चला गया।

अब मैं “आह्ह-आह्ह” करके लंड पर उछल-उछलकर गांड पटकने लगी।

अब दर्द नहीं, बस मज़ा आ रहा था। समीर का लंड लेकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मैं आज अपनी शादी की सालगिरह पर एक अजनबी लंड से चुदवा रही थी।

लेकिन मुझे इसकी कोई शर्म नहीं थी, क्योंकि ऐसी चुदाई के लिए मैं कब से तड़प रही थी।

मेरा पति तो मुझे बीच में छोड़कर सो जाता था, और समीर मुझे अब तक पाँच बार झड़ा चुका था।

समीर ने मुझे अपनी गोद में उठाया और ड्राइंग रूम में ले आया।

उसने मुझे सोफे पर लिटाया और मेरी टांग उठाकर चोदने लगा। वो चूचियों को काटने लगा।

वो मेरे घर में मुझे ऐसे चोद रहा था जैसे मैं कोई रंडी हूँ।

मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ा। समीर का गीला लंड फच्च-फच्च करके और तेज़ी से अंदर-बाहर होने लगा।

उसके लंड के साथ पानी बाहर निकलने लगा, लेकिन समीर अब भी जमकर चोद रहा था। उसका लंड और मोटा लग रहा था, मेरी चूत फूल गई थी।

उसने नीचे तकिया लगाया और पैर फैलाकर चोदने लगा। अब दोनों पैर हवा में थे।

वो मुझे बड़ी बेरहमी से ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था। मुझे उसका ऐसे चोदना बहुत मज़ा दे रहा था।

मैं बस अपने पति की इस बात पर खुश थी कि उसने आज के दिन समीर से डिलीवरी भिजवाई थी।

समीर ने मुझे डाइनिंग टेबल पर लिटा दिया और खड़ा होकर चोदने लगा।

अब तक उसके लंड ने मुझे कई बार झड़ा दिया था और वो खुद फौलाद की तरह मेरी चूत की गहराई तक जाकर गर्मी निकाल रहा था।

मैं भी बेशर्म हो गई थी, एक अजनबी डिलीवरी बॉय से ऐसे चुदवा रही थी जैसे मैं सचमुच एक रंडी हूँ।

वो मुझे उठाकर फिर से बेडरूम में ले आया और बिस्तर पर लिटा दिया।

अब वो जैसे चाहे मुझे चोद रहा था। वो भूल गया था कि मैं राकेश शर्मा की बीबी अलका हूँ, उसे लग रहा था कि मैं कोई वेश्या हूँ।

उसने मेरे मुँह में अपना लंड घुसा दिया और चोदने लगा। मैं भी उसके सामने मजबूर थी, क्योंकि मैंने ही उससे कहा था कि मुझे चोदो।

उसने लंड निकाला और मुझे लिटाया, फिर ऊपर आ गया। वो चूचियों को चूसने लगा, काटने लगा।

मैंने उसके लंड को अपनी चूत में लगा दिया। उसने धक्का लगाया और लंड अंदर चला गया। वो फिर से तेज़ी से चोदने लगा, गपागप-गपागप अंदर-बाहर करने लगा। उसने मेरी चूचियों की हालत पतली कर दी थी और नीचे मेरी चूत में खलबली मचा रखी थी।

मैं बिल्कुल निढाल होकर नीचे थी और वो अपनी मनमानी कर रहा था।

लेकिन मैं आज बहुत खुश थी, क्योंकि यह मेरी शादी की सबसे यादगार सालगिरह थी। मैंने अपनी किसी सालगिरह पर इतनी जबरदस्त चुदाई कभी नहीं की थी।

राकेश तो बस दस मिनट चोदकर सो जाते थे और मैं चूत में उँगली डालकर अपना पानी निकालती थी।

मैंने समीर से पूछा, “इतनी अच्छी चुदाई कहाँ से सीखी?”

वो बोला, “मेरी बड़ी बहन और अम्मी ने मुझे सिखाया है।”

मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ा और मैं “आह्ह-आह्ह्ह” करके झड़ गई।

समीर ने बताया, “मैं अपनी बहन को चोदता था। उसके पति ने उसे तलाक दे दिया था।

एक रात अम्मी ने देख लिया, फिर अगले दिन उन्होंने बहुत डांट लगाई। फिर एक रात बहन के बिस्तर पर अम्मी सो गईं और अंधेरे में मैंने अम्मी को चोद दिया।

अगले दिन बहन ने बताया कि वो रात में छत पर मेरा इंतज़ार करती रही।

फिर मुझे पता चला कि मैंने अम्मी को चोद दिया। कुछ दिन बाद मैं रात में बहन और अम्मी को एक साथ चोदने लगा।”

मैंने पूछा, “घर में किसी ने देखा नहीं?”

उसने बताया, “मेरे घर में मेरी अम्मी, बहन और मैं ही रहते हैं। मेरे अब्बा नहीं हैं।”

अब उसने मुझे फिर से घोड़ी बनाया और अपनी रफ़्तार से चोदने लगा।

उसकी आवाज़ और रफ़्तार तेज़ होने लगी थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी चूत में कोई रेस कर रहा हो।

मैं तो उसके सामने हार मान चुकी थी।

समीर ने बताया, “गाँव में मेरी अम्मी मेरे लंड पर बादाम तेल से मालिश करती थीं, इसलिए यह मोटा, मजबूत और लंबा हो गया है। मेरी बहन रोज़ सुबह मेरे बिस्तर पर आकर लंड चूसती थी।”

अब उसने मुझे लिटाया और चोदने लगा। दोनों की सिसकारियाँ तेज़ हो गई थीं और समीर चिल्लाने लगा।

उसके लंड ने गरम-गरम लावा छोड़ा, मेरी चूत भर गई और वो लेट गया।

उसने बताया कि उसके अब्बा के बाद उसने अपनी अम्मी और बहन को संभाला। बहन के तलाक के बाद वो उसे चोदने लगा, फिर अम्मी को भी।

मैं आज बहुत खुश थी कि समीर की अम्मी और बहन ने उसे इतना अच्छा सेक्स सिखाया था। उसने मेरी चूत लाल कर दी थी।

फिर हम दोनों नंगे ही सो गए। अगली सुबह जब हम जागे तो दोनों ने साथ में नहाया।

बाथरूम में बाथटब में मैंने उससे फिर से जमकर चुदवाया।

उसके बाद जब भी समीर फ्री होता, वो आ जाता और मुझे रातभर चोदता।

मेरी जिंदगी बदल गई।

मैं अब एक संतुष्ट औरत हूँ, और यह सब मेरी उस यादगार सालगिरह की देन है।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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