mama bhanji chudai kahani
मेरा नाम प्रिया है। आज मेरी उम्र 26 साल है, लेकिन यह कहानी तब की है जब मैं 18 साल की थी।
मैं एक छोटे से शहर की रहने वाली थी और मेरे पिता एक साधारण सरकारी नौकरी करते थे।
मेरी माँ की जब मैं 17 साल की थी तब एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
उसके बाद से मेरे पिता अकेले मुझे पालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी।
मेरी मौसी, जो मेरी माँ की छोटी बहन थीं, मुझे अपने साथ लखनऊ ले आईं।
उनका नाम सुमन था और उनके पति का नाम रमेश था।
मौसी और मामा की शादी को 15 साल हो चुके थे लेकिन उनके कोई बच्चे नहीं थे। डॉक्टरों ने कहा था कि मौसी कभी माँ नहीं बन सकतीं।
जब मैं मौसी के घर आई तो मैं 18 साल की थी। उस समय मेरा फिगर 34-28-36 का था।
मैं गदराई हुई थी, मेरी कमर बहुत पतली थी और कूल्हे गोल और भरे हुए थे।
मेरी चूचियाँ भारी और उभरी हुई थीं जो किसी भी कपड़े में साफ झलकती थीं।
मेरे बाल लंबे और काले थे और मेरी आँखें बड़ी-बड़ी थीं।
मौसी और मामा ने मुझे अपनी बेटी की तरह रखना शुरू किया। वे मेरे हर छोटे-बड़े काम का ध्यान रखते थे।
मुझे नए कपड़े दिलाए, मुझे अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया, और मेरी हर ज़रूरत पूरी की।
लेकिन धीरे-धीरे मैंने देखा कि मामा मुझसे थोड़ा अलग तरह से व्यवहार करने लगे थे।
मामा रमेश की उम्र 52 साल थी। वह एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर थे और अच्छी खासी कमाई करते थे।
वह दिखने में बहुत हैंडसम थे और उनका बदन भी मजबूत था।
पहले तो मामा मुझे बस प्यार से सिर पर हाथ फेरते थे, लेकिन धीरे-धीरे वह और करीब आने लगे।
कभी वह मेरे कंधे पर हाथ रख देते तो कभी मेरे बालों को सहलाते।
एक दिन जब मैं रसोई में काम कर रही थी तो मामा पीछे से आए और मेरे कमर पर हाथ रख दिया।
“प्रिया, तुम बहुत बड़ी हो गई हो,” मामा ने कहा।
मैं थोड़ा अजीब महसूस किया लेकिन कुछ नहीं बोली। मैंने सोचा कि शायद वह प्यार से कह रहे हैं।
लेकिन धीरे-धीरे मामा के हाथ और भी नीचे सरकने लगे।
कभी वह मेरी गांड को छू देते तो कभी मेरी चूचियों को। मैं समझ नहीं पा रही थी कि यह क्या हो रहा है।
एक दिन मौसी अपने एक रिश्तेदार के यहाँ गई हुई थीं। वह शाम को वापस आने वाली थीं।
मैं घर में अकेली थी और नहाने के लिए बाथरूम में गई। मैंने कपड़े उतारे और नहाने लगी।
तभी मुझे लगा कि कोई बाथरूम में आया है। मैंने देखा तो मामा वहाँ खड़े थे। उन्होंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए।
“मामा, आप यहाँ क्या कर रहे हैं?” मैंने घबराकर पूछा।
“मैं भी नहाऊँगा प्रिया,” मामा ने कहा और मुस्कुराए।
मैं शर्म से लाल हो गई। मैंने अपने हाथों से अपने शरीर को ढकने की कोशिश की।
लेकिन मामा ने कहा, “डरो मत प्रिया, मैं तुम्हें अपनी बेटी मानता हूँ।”
वह नंगे हो गए और मेरे पास आ गए। उनका लंड बहुत बड़ा था और खड़ा हो रहा था। मैं उसे देखकर डर गई।
मामा ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। मैंने विरोध करने की कोशिश की लेकिन वह मुझसे बहुत मजबूत थे।
उन्होंने मुझे नहाने वाले साबुन से लगाया और मेरे पूरे शरीर पर मलने लगे।
“मामा, प्लीज़, यह गलत है,” मैंने कहा।
“शांत हो जाओ प्रिया, तुम्हें मजा आएगा,” मामा ने कहा।
उन्होंने मेरी चूचियों पर साबुन लगाया और उन्हें मलना शुरू कर दिया।
मेरे निप्पल उनकी हथेलियों में घूम रहे थे और मुझे एक अजीब सी सनसनी महसूस हो रही थी। मेरा शरीर गर्म होने लगा था।
फिर उन्होंने नीचे का साबुन लगाया और मेरी चूत पर हाथ फेरने लगे। मैं कांप उठी। उन्होंने अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी।
“आह!” मैं चीखी।
“बस थोड़ी देर में मजा आएगा,” मामा ने कहा।
उन्होंने मुझे फर्श पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गए। उनका बड़ा लंड मेरी चूत पर रगड़ रहा था।
मैं डर गई थी क्योंकि वह बहुत मोटा था।
“मामा, दर्द होगा,” मैंने कहा।
“पहली बार थोड़ा दर्द होता है,” मामा ने कहा और एक जोर का धक्का लगाया।
उनका लंड का सिरा मेरी चूत में घुस गया। मुझे बहुत दर्द हुआ और मेरी आँखों से आँसू निकल आए।
“आह! मामा, बहुत दर्द हो रहा है,” मैं चीखी।
“शांत हो जाओ,” मामा ने कहा और फिर से धक्का लगाया।
इस बार उनका आधा लंड अंदर चला गया। मेरी चूत फटने लगी थी। खून की एक बूंद बाहर निकली।
“देखो, तुम्हारी सील टूट गई,” मामा ने कहा।
फिर उन्होंने एक और जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरे मुँह से एक लंबी चीख निकली।
मामा अब धीरे-धीरे धक्के लगाने लगे। पहले तो मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा और एक अजीब सा मजा आने लगा।
“ओह मामा, अब अच्छा लग रहा है,” मैंने कहा।
“देखा, मैंने कहा था ना,” मामा ने मुस्कुराते हुए कहा।
उन्होंने अपनी गति तेज कर दी। वह जोर-जोर से मुझे चोदने लगे। बाथरूम में फच-फच की आवाज गूँज रही थी।
मैंने अपने हाथ उनकी पीठ पर रख दिए और उनका साथ देने लगी। मेरी चूचियाँ उनके सीने से रगड़ खा रही थीं।
लगभग 20-25 मिनट बाद मामा झड़ने वाले थे।
“प्रिया, मैं तुम्हारे अंदर झड़ने वाला हूँ,” मामा ने कहा।
“हाँ मामा, अंदर ही निकाल दो,” मैंने कहा।
उन्होंने जोर से धक्के लगाए और अपना गर्म वीर्य मेरी चूत में भर दिया। मैं भी उसी समय झड़ गई।
जब मामा और मैं बाथरूम से बाहर निकले तो मैंने देखा कि मौसी आ गई थीं। वह हमें देखकर मुस्कुराईं।
“कब हो गया?” मौसी ने पूछा।
“अभी-अभी,” मामा ने कहा।
मैं शर्म से लाल हो गई। मुझे लगा कि मौसी गुस्सा करेंगी लेकिन वह बिल्कुल शांत थीं।
“प्रिया, तुम मत डरो,” मौसी ने मेरे पास आकर कहा, “मैं ही चाहती थी कि रमेश तुम्हें अपनी बीवी बनाए। मुझे कोई बच्चा नहीं हो सकता इसलिए मैंने सोचा कि तुम ही हमारे वंश को आगे बढ़ाओगी।”
मैं हैरान रह गई। यह सब मौसी की योजना थी?
“मैं तुम्हारा बहुत ख्याल रखूँगी प्रिया,” मौसी ने कहा, “तुम बस मामा को खुश रखो।”
मैंने सोचा और फिर मान गई। मुझे भी अब मजा आने लगा था और मामा भी मुझे बहुत प्यार करते थे।
इसके बाद तो मामा मुझे रोज़ चोदने लगे। सुबह जब मौसी ऑफिस चली जाती थीं तो मामा मुझे बिस्तर पर खींच लेते। कभी बाथरूम में तो कभी सोफे पर।
एक दिन मामा ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाला।
“ओह मामा, पीछे से बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
“हाँ प्रिया, तुम्हारी चूत बहुत टाइट है,” मामा ने कहा।
उन्होंने मेरी गांड भी मारी। पहले तो बहुत दर्द हुआ लेकिन फिर मजा आने लगा।
मैं अब पूरी तरह से मामा की हो चुकी थी। वह मुझे हर तरह से चोदते और मैं उनकी हर बात मानती।
3 महीने बाद मैं प्रेगनेंट हो गई। मेरा पेट धीरे-धीरे बड़ा होने लगा। मामा और मौसी दोनों बहुत खुश थे।
“अब हमारे घर में बच्चे की किलकारी गूँजेगी,” मौसी ने कहा।
मामा मेरा बहुत ख्याल रखते थे। वह मेरे पेट को सहलाते और कहते, “यह मेरा बेटा है।”
9 महीने बाद मैंने एक लड़के को जन्म दिया। मामा और मौसी बहुत खुश हुए।
उन्होंने बच्चे को अपना नाम दिया और उसे अपना बेटा बताया।
मैं अब बच्चे को दूध पिलाती थी। मामा कभी-कभी मेरी चूचियाँ भी चूस लेते और कहते, “बच्चे को भी दूध चाहिए और मुझे भी।”
मैं मुस्कुरा देती।
2 साल बाद मामा-मौसी ने मेरी शादी एक अच्छे घर में कर दी।
मेरे पति का नाम अमित था और वह एक इंजीनियर थे।
उन्हें पता था कि मेरा एक बच्चा है लेकिन वह इसे मानने को तैयार हो गए क्योंकि मामा ने उन्हें बहुत पैसे दिए थे।
मैं अपने पति के साथ रहने लगी लेकिन मामा अभी भी मुझे चोदने आते थे।
जब भी मौका मिलता वह मेरी ससुराल आ जाते और मुझे चोदकर जाते।
मैंने अपने पति से 4 बच्चे और किए। अब मेरे कुल 5 बच्चे हैं – पहला मामा का और बाकी 4 पति के।
मामा अभी भी मुझे चोदते हैं जब भी मौका मिलता है।
मेरी चूत अब उनकी हो चुकी है और मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ।
यह मेरी सच्ची कहानी है।
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Wow! nice.