sanskari wife karva chauth chudai story
मेरा नाम प्रिया है। मैं 28 साल की शादीशुदा औरत हूँ। मेरे पति राजेश एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं और अक्सर बाहर रहते हैं। हमारी शादी को पाँच साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ है।
मेरा फिगर 36-28-38 है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है। मेरे पति अक्सर मुझे कहते हैं कि मैं बहुत सेक्सी हूँ और कोई भी मर्द मुझे देखकर पागल हो जाए। लेकिन पति की अनुपस्थिति में मैं अक्सर अकेली रहती हूँ और मेरे मन में कुछ अलग ही ख्याल आने लगते हैं।
ये बात पिछले साल करवा चौथ की है। मेरे पति राजेश उस समय अमेरिका गए हुए थे।
मैं अकेली घर पर थी। करवा चौथ का व्रत रखने के लिए मैंने सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी थी।
मैंने सुबह स्नान किया और व्रत का संकल्प लिया।
फिर मैंने एक बहुत ही सेक्सी साड़ी पहनी—लाल रंग की, पतली सी, जो मेरे बदन पर बिल्कुल चिपकी हुई थी।
ब्लाउज भी गहरे गले वाला था जिसमें से मेरे मोटे-मोटे दूध आधे बाहर निकले हुए थे।
मेरे पड़ोस में विक्रम रहता है। वो 25 साल का जवान लड़का है और हाल ही में यहाँ शिफ्ट हुआ है।
वो एक जिम ट्रेनर है और उसका बदन बहुत मस्कुलर है। मैंने अक्सर उसे मुझे घूरते हुए देखा था।
शाम को करीब 5 बजे, मेरी दरवाजे की घंटी बजी। मैंने दरवाज़ा खोला तो विक्रम खड़ा था।
“प्रिया जी, मैंने सोचा आप अकेली हैं तो करवा चौथ की पूजा में मदद कर दूँ,” उसने कहा।
मैंने उसे अंदर बुलाया। वो मुझे देखकर घूर रहा था। मेरी लाल साड़ी, खुले बाल, और मेरे मोटे दूध उसकी नज़रों में थे।
“आप बहुत सुंदर लग रही हैं प्रिया जी,” विक्रम ने कहा।
“धन्यवाद,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।
हमने पूजा की तैयारी की। विक्रम मेरी मदद कर रहा था।
जब वो झुककर सामान रखता, तो उसकी नज़र मेरे दूधों पर पड़ती। मैंने भी नोटिस किया, लेकिन कुछ नहीं बोली।
पूजा के बाद, हम बैठे। चाँद निकलने में अभी वक्त था। विक्रम ने कहा, “प्रिया जी, आपके पति कब आ रहे हैं?”
“अभी तो नहीं,” मैंने उदास होकर कहा, “अगले महीने आएंगे।”
“आप अकेली रहती हैं, इसलिए पूछ रहा था,” विक्रम ने कहा, “अगर कभी ज़रूरत हो तो बता दीजिएगा।”
मैंने उसे देखा। उसकी आँखों में कुछ था—एक अलग ही आग।
मेरे मन में भी कुछ हो रहा था। व्रत के बाद का समय, अकेली औरत, और एक जवान मर्द।
“विक्रम,” मैंने धीरे से कहा, “तुम मुझे पसंद करते हो ना?”
विक्रम चौंक गया। फिर उसने हाँ में सिर हिलाया। “प्रिया जी, मैं… मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। आप बहुत सेक्सी हैं।”
मैंने उसका हाथ पकड़ा। “आज मेरा व्रत है। लेकिन मैं अकेली हूँ। क्या तुम मेरा साथ दोगे?”
विक्रम समझ गया। उसने मेरा हाथ कसकर पकड़ा। “प्रिया जी, मैं कुछ भी करूँगा आपके लिए।”
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
वो मुझे कसकर पकड़ने लगा। उसका मस्कुलर बदन मेरे नरम बदन से सटा हुआ था।
फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वो चुंबन जोरदार था, प्यासा था। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और मेरी जीभ से खेलने लगी।
“आह्ह… विक्रम… और चूसो…” मैं कराह रही थी।
विक्रम ने मेरी साड़ी खींची। वो धीरे-धीरे मेरे बदन से सरक गई।
फिर उसने मेरा ब्लाउज खोला। मेरे दूध बाहर आ गए। वो उन्हें देखकर पागल हो गया।
विक्रम ने मेरे एक दूध को अपने हाथ में लिया और फिर मुँह में ले लिया।
वो जोर-जोर से चूसने लगा, निपल को दाँतों से काटने लगा।
“आह्ह… विक्रम… धीरे… निपल दर्द हो रहा है…” मैं चीख रही थी।
लेकिन वो नहीं रुका। वो दूसरा दूध भी चूसने लगा। दोनों दूधों को बारी-बारी से चूस रहा था। मेरे निपल कड़े हो गए थे और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
“कितने मोटे दूध हैं आपके प्रिया जी,” विक्रम ने कहा, “मज़ा आ गया।”
फिर वो नीचे गया। उसने मेरी पेटीकोट उतारी और फिर पैंटी। मेरी बुर साफ़ थी, गीली हो चुकी थी।
विक्रम ने मेरी बुर पर अपनी जीभ रखी। “आह्ह… विक्रम… ये क्या कर रहे हो…” मैं कराही।
“आपकी बुर चाट रहा हूँ प्रिया जी,” उसने कहा, “बहुत स्वादिष्ट है।”
उसने अपनी जीभ मेरी बुर में घुसा दी। अंदर-बाहर करने लगा।
मैं पागल हो रही थी। उसकी जीभ मेरी बुर की दीवारों को चाट रही थी।
“आह्ह… और अंदर… जीभ घुसाओ… मज़ा आ रहा है…” मैं चीख रही थी।
विक्रम लगातार मेरी बुर चाट रहा था। मेरी बुर से पानी निकल रहा था और वो सब चाट रहा था। फिर उसने मेरी क्लिटोरिस भी चूसी।
फिर मैंने उसे रोका। “अब मेरी बारी,” मैंने कहा।
विक्रम खड़ा हुआ। उसने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड बहुत मोटा और लंबा था—करीब 9 इंच का। मैंने पहली बार इतना बड़ा लंड देखा था।
“ओह्ह… इतना बड़ा…” मैंने कहा।
मैंने उसके लंड को अपने हाथ में लिया। वो गरम और सख्त था। फिर मैंने उसे अपने मुँह में ले लिया।
“उम्म…” विक्रम ने कराहते हुए कहा।
मैं उसके लंड को मुँह में अंदर-बाहर करने लगी। उसका सुपाड़ा मेरे गले तक जा रहा था। मैं जीभ से उसके लंड को चाट भी रही थी।
“आह्ह… प्रिया जी… बहुत मस्त चूस रही हो…” विक्रम कराह रहा था।
मैंने उसके लंड को गहरे तक मुँह में लिया। उसका मोटा लंड मेरे मुँह को भर रहा था। विक्रम ने मेरे बाल पकड़े और आगे-पीछे करने लगा।
अब विक्रम ने मुझे बेड पर लिटाया। मेरी टाँगें फैलाईं और उसने अपना मोटा लंड मेरी बुर के मुहाने पर रखा।
“प्रिया जी, आपका व्रत आज मैं तोड़ूँगा,” विक्रम ने कहा।
“हाँ विक्रम… आज मुझे अपनी बनाओ… मेरे पति की जगह ले लो…” मैंने कहा।
विक्रम ने एक जोरदार धक्का मारा। उसका लंड मेरी बुर में घुस गया। मैं चीखी क्योंकि वो बहुत मोटा था।
“आह्ह… धीरे… बहुत मोटा है…” मैंने कहा।
विक्रम ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। “फच्च-फच्च-फच्च” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।
“आह्ह… और चोदो… मेरी बुर फाड़ डालो…” मैं चीख रही थी।
विक्रम मुझे जोर-जोर से चोद रहा था। मेरे दूध उसके हर धक्के के साथ उपर-नीचे हो रहे थे। वो मेरे दूध भी चूस रहा था।
फिर विक्रम ने मुझे घुटनों के बल बिठाया। मैंने अपनी गांड उठा दी। विक्रम ने पीछे से अपना लंड मेरी बुर में डाला।
“आह्ह… पीछे से और गहरा जा रहा है…” मैं चीखी।
विक्रम ने मेरी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। मेरी गांड उसके हर धक्के से हिल रही थी।
“थप्प-थप्प” की आवाज़ आ रही थी। विक्रम मेरी गांड पर भी चांटे मार रहा था।
“आह्ह… विक्रम… और चोदो… मेरी बुर फाड़ डालो…” मैं चीख रही थी।
फिर हम स्पूनिंग पोजीशन में आए। विक्रम मेरे पीछे लेट गया और अपना लंड मेरी बुर में डाल दिया। मेरी टाँगें थोड़ी मोड़ी हुई थीं।
विक्रम ने मेरे दूध पकड़े और उन्हें दबाते हुए धक्के मारने लगा। ये पोजीशन बहुत इंटीमेट थी।
“आह्ह… विक्रम… और अंदर… मज़ा आ रहा है…” मैं कराह रही थी।
विक्रम मेरे गाल पर चूम रहा था और पीछे से मुझे चोद रहा था। उसका लंड मेरी बुर की गहराइयों तक जा रहा था।
फिर हम 69 की पोजीशन में आए। मैं नीचे लेट गई और विक्रम मेरे ऊपर आकर उल्टा बैठ गया। उसका लंड मेरे मुँह के सामने था और मेरी बुर उसके मुँह के सामने।
मैंने उसका लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। विक्रम भी मेरी बुर चाटने लगा। हम दोनों एक-दूसरे को चूस रहे थे।
“उम्म… विक्रम… लंड बहुत मस्त है…” मैं मुँह भरकर कह रही थी।
“आपकी बुर भी बहुत स्वादिष्ट है प्रिया जी…” विक्रम कह रहा था।
हम दोनों लगातार एक-दूसरे को चूस रहे थे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
फिर हम साइड-बाय-साइड पोजीशन में आए। दोनों एक-दूसरे के सामने लेटे और मैंने एक टाँग उठाकर उसके लंड को अपनी बुर में ले लिया।
विक्रम ने मेरी कमर पकड़ी और धक्के मारने लगा। हम दोनों एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे।
“प्रिया जी… मैं झड़ने वाला हूँ…” विक्रम ने कहा।
“मैं भी… मेरी बुर में ही झड़ जाओ…” मैंने कहा।
विक्रम ने जोर से धक्का मारा और मेरी बुर में अपना पानी छोड़ दिया। मैं भी झड़ गई।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए। बाहर चाँद निकल आया था। मैंने विक्रम के हाथ से अपना व्रत तोड़ा।
“आज तुमने मेरा व्रत तोड़ा,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरे पति की जगह लेकर।”
“प्रिया जी, मैं हमेशा आपके लिए तैयार हूँ,” विक्रम ने कहा।
उस रात के बाद, जब भी मेरे पति बाहर होते हैं, विक्रम मेरे पास आता है और मुझे खूब चोदता है। मैं अब उसकी रंडी बन गई हूँ और मुझे इसमें कोई पछतावा नहीं है।
करवा चौथ का व्रत मैं हर साल रखती हूँ, लेकिन अब मैं जानती हूँ कि अगर मेरे पति नहीं हैं, तो विक्रम मेरा व्रत तोड़ने के लिए तैयार है।
अगर आप पढ़ना चाहें तो अगले पार्ट में पढ़ें की कैसे मैं 11 लोगों से चुदवाई …
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Nice.