khoobsurat kunwari sali chudai
मेरा नाम अंजलि है। मैं 19 साल की हूँ और मेरी बहन प्रिया की शादी 2 साल पहले राजेश जीजा से हुई थी।
राजेश जीजा 28 साल के हैं और एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं।
वो बहुत हैंडसम हैं और उनकी हाइट 6 फीट है। उनका बदन एथलेटिक है और हर लड़की उन्हें देखकर घूरती है।
मेरी बहन प्रिया 25 साल की है और वो भी बहुत सुंदर है। उनका फिगर 36-30-38 है।
लेकिन मैं उनसे भी ज़्यादा सुंदर हूँ। मेरा फिगर 34-26-36 है और मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है।
मेरे चूचे बहुत मोटे और उठे हुए हैं और हर लड़का मुझे देखकर पागल हो जाता है।
बात उस समय की है जब मैं अपनी बहन के यहाँ उनके घर गई थी।
मेरे पापा की तबीयत खराब थी इसलिए मेरी मम्मी ने मुझे बहन के यहाँ भेज दिया कि कुछ दिन वहाँ रहकर आऊँ।
जब मैं पहली बार जीजा को देखी, तो मेरा दिल धड़कने लगा। वो बहुत सुंदर थे।
उन्होंने मुझे देखकर मुस्कुराया और कहा, “अंजलि, तुम तो बहुत बड़ी हो गई हो। बिल्कुल हीरोइन लग रही हो।”
मैंने शरमाते हुए कहा, “धन्यवाद जीजा जी।”
मैं उनके घर में रहने लगी। मेरी बहन प्रिया दिन में ऑफिस चली जाती थी और घर पर सिर्फ मैं और जीजा ही रहते थे।
धीरे-धीरे मैं और जीजा एक-दूसरे के करीब आने लगे।
एक दिन की बात है। मैं नहाने गई और भूल से तौलिया बाथरूम में ही छोड़ आई।
मैंने आवाज़ लगाई, “जीजा जी, तौलिया दे दीजिए।”
जीजा तौलिया लेकर आए। जब वो तौलिया देने आए, तो मैंने दरवाज़ा थोड़ा सा खोला।
जीजा की नज़र मुझ पर पड़ी। मैं पूरी नंगी थी और पानी की बूंदें मेरे बदन पर लुढ़क रही थीं। मेरे चूचे और गोरी चूत उन्हें दिख गई।
जीजा तो देखते ही रह गए। उनका लंड खड़ा हो गया। मैंने भी नोटिस किया लेकिन कुछ नहीं बोली।
मैंने तौलिया लिया और दरवाज़ा बंद कर लिया।
उस रात मैंने सोचा कि जीजा मुझे कैसे देख रहे थे।
मुझे भी उनमें कुछ अलग सा लगा।
मैंने सोचा कि क्यों ना मैं भी उनके साथ मज़े करूँ।
अगले दिन मेरी बहन प्रिया को अपने ऑफिस से काम से बाहर जाना पड़ा।
वो 3 दिन के लिए बाहर गई। घर पर सिर्फ मैं और जीजा ही थे।
शाम को जीजा ऑफिस से आए। मैंने उस दिन एक बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनी थी।
मैंने एक हल्की नीली रंग की स्कर्ट पहनी थी जो मेरे घुटनों से ऊपर थी।
ऊपर मैंने एक टाइट टॉप पहना था जिसमें से मेरे चूचे आधे बाहर निकले हुए थे।
जीजा ने मुझे देखा तो उनकी आँखें चौड़ी हो गईं। वो बोले, “अंजलि, आज तुम बहुत हॉट लग रही हो।”
मैंने शरारती मुस्कान के साथ कहा, “क्या जीजा जी, आपको मैं पसंद आई?”
जीजा ने कहा, “बहुत पसंद आई। तुम्हारी बहन से भी ज़्यादा।”
मैंने कहा, “तो फिर क्या करोगे मेरा?”
जीजा समझ गए कि मैं भी तैयार हूँ। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर किस करने लगे।
उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और हम जोर-जोर से एक-दूसरे को चूसने लगे।
“आह्ह… जीजा जी… और चूसो… मज़ा आ रहा है…” मैं कराह रही थी।
जीजा ने मेरी टॉप उतार दी। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी।
मेरे गोरे गोरे चूचे बाहर आ गए।
जीजा ने उन्हें पकड़कर चूसना शुरू कर दिया।
“कितने मोटे चूचे हैं तुम्हारे अंजलि,” जीजा बोले।
फिर उन्होंने मेरी स्कर्ट भी उतार दी।
मैंने पैंटी पहनी थी। उन्होंने वो भी उतार दी। अब मैं पूरी नंगी थी।
“आज तो मैं तुम्हारी सील तोड़ूँगा अंजलि,” जीजा ने कहा।
मैंने कहा, “हाँ जीजा जी, आज मुझे अपनी बनाओ। मैं आज तक कुंवारी हूँ।”
जीजा ने मुझे बेडरूम में ले गए और बेड पर लिटाया।
उन्होंने अपने कपड़े उतारे। उनका 6.4 इंच का मोटा लंड बाहर आ गया। वो लाल और सख्त था।
मैंने पहली बार इतना बड़ा लंड देखा था। मैंने कहा, “जीजा जी, ये तो बहुत बड़ा है। मेरी चूत में जाएगा ये?”
जीजा ने कहा, “जाएगा बिटिया, थोड़ा दर्द होगा पहली बार, लेकिन फिर मज़ा आएगा।”
जीजा ने मेरी टाँगें फैलाईं। मेरी चूत बिल्कुल साफ़ थी और थोड़े बाल थे।
वो गीली हो चुकी थी। जीजा ने अपने लंड का उपरी हिस्सा मेरी बुर के मुँह पर रखा।
“तैयार हो अंजलि?” जीजा ने पूछा।
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
जीजा ने एक जोरदार धक्का मारा। उनका आधा लंड मेरी बुर में घुस गया।
“आह्ह… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो जीजा जी…” मैं चीख पड़ी और रोने लगी।
सच में बहुत दर्द हो रहा था।
मेरी बुर की सील टूट रही थी। खून भी निकलने लगा था।
जीजा ने रुककर मेरे चूचे चूसे।
कुछ देर बाद जब मैं शांत हुई, तो उन्होंने धीरे से बाकी लंड भी अंदर डाल दिया।
मेरी चूत बहुत टाइट थी और उनका लंड फंसा हुआ लग रहा था।
“फच्च-फच्च-फच्च” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। जीजा धीरे-धीरे धक्के मार रहे थे।
“आह्ह… जीजा जी… धीरे… मेरी चूत फट जाएगी…” मैं कराह रही थी।
कुछ देर बाद दर्द कम हुआ और मज़ा आने लगा।
मैंने कहा, “अब और जोर से जीजा जी… मज़ा आ रहा है…”
जीजा ने स्पीड बढ़ा दी। वो मुझे जोर-जोर से चोदने लगे।
मेरे चूचे उनके हर धक्के के साथ उपर-नीचे हो रहे थे।
“आह्ह… अंजलि… तुम्हारी चूत बहुत टाइट है… मज़ा आ गया…” जीजा कराह रहे थे।
करीब 25 मिनट बाद जीजा मेरी चूत में ही झड़ गए।
उनका गर्म पानी मेरी चूत में भर गया। मैं भी झड़ गई।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।
जीजा ने मुझे किस किया और कहा, “अंजलि, आज तुम मेरी हो गई।”
मैंने कहा, “हाँ जीजा जी, आज से मैं सिर्फ आपकी हूँ।”
अगले दिन जीजा ने मुझे फिर से चोदा। इस बार उन्होंने मुझे डॉगी स्टाइल में बिठाया।
मैंने अपनी गांड उठा दी। जीजा ने पीछे से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।
“आह्ह… पीछे से और अंदर जा रहा है…” मैं कराह रही थी।
जीजा ने मेरी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए।
उनकी हर धक्के के साथ मेरी गांड हिल रही थी।
“थप्प-थप्प” की आवाजें आ रही थीं। जीजा मेरी गांड पर भी चांटे मार रहे थे।
“आह्ह… जीजा जी… और चोदो… मज़ा आ रहा है अब…” मैं चीख रही थी।
करीब 20 मिनट बाद जीजा फिर से मेरी चूत में झड़ गए।
तीसरे दिन जीजा ने मुझे काउगर्ल पोजीशन में चोदा।
मैं उनके ऊपर बैठी और उनका लंड अपनी चूत में ले लिया। मैं ऊपर-नीचे उछलने लगी।
मेरे चूचे जीजा के मुँह के सामने झूल रहे थे और वो उन्हें चूस रहे थे।
मैं अपनी गांड घुमाकर उनका लंड अपनी चूत में अंदर-बाहर कर रही थी।
“आह्ह… अंजलि… और तेज… और उछलो…” जीजा कराह रहे थे।
मैं बहुत तेजी से उछल रही थी। करीब 15 मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।
जब मेरी बहन प्रिया वापस आई, तो वो कुछ नहीं जान पाई।
लेकिन अब जब भी मौका मिलता, जीजा मुझे चोदते हैं।
मैं भी उनसे बहुत प्यार करती हूँ और उनसे चुदवाती हूँ।
मेरी बहन को कभी पता नहीं चला कि उसके पति ने उसकी बहन की सील तोड़ी है और मैं उसकी रंडी बन गई हूँ।
तो यह थी मेरी जीजा साली की चुदाई कहानी, अगर आपको अच्छी लगी होतो कमेंट करके बताएं….
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बहुत ही अच्छी कहानी है