पति ने मुझे अपने बाप, उनके भाई और अपने जीजा से चुदवाया

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मेरा पति राजेश जब यह सब देखते-देखते परेशान हो गया तो उसने सोचा कि क्यों ना वो भी अपने परिवार वालों को इसमें शामिल करे।

उसने गाँव से अपने पिता जी रघुनाथ, अपने चाचा जी रघवीर और अपने जीजा जी मोहन को फोन किया और उन्हें दिल्ली बुला लिया।

{अगर आपने पहली कहानी नहीं पढ़ी हैं तो उसे पढ़ें की कैसे मैं श्याम की रानी और रखैल बनी और फिर कैसे 5 बस ड्राइवर्स से गैंगबैंग चुदवाकर रंडी बनी उसके बाद 8 अफ्रीकन नीग्रो से अपने पति के सामने चुदवाई}

तीनों दिन के भीतर दिल्ली आ गए।

रघुनाथ 65 साल के थे, लेकिन अभी भी उनमें जोश था।

रघवीर 60 साल के थे, उनका बदन अभी भी मजबूत था।

मोहन 45 साल का था, वो राजेश की बहन का पति था और उसकी बहन की शादी को 20 साल हो चुके थे।

राजेश ने उन्हें सब कुछ बताया।

उसने कहा, “पिता जी, चाचा जी, जीजा जी, मेरी बीवी निर्मला बहुत चुदासी हो गई है। वो 8 काले नीग्रों से चुदवा चुकी है। उसकी चूत और गांड अब बहुत फैल गई हैं। मैं उसे संतुष्ट नहीं कर सकता। आप लोग प्लीज उसे चोदकर संतुष्ट करें। मैं आप सबके सामने बैठकर देखूँगा।”

रघुनाथ ने कहा, “बेटा, ये तो बहुत गलत बात है। वो तेरी बीवी है, हमारी बहू।”

राजेश ने कहा, “पिता जी, अब वो सिर्फ एक रंडी है। उसे बड़े लंड चाहिए। आप लोगों के लंड तो बड़े हैं ना? मैंने सुना है कि आप तीनों ने गाँव में कई औरतों को चोदा है।”

रघवीर ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ बेटा, हमारे लंड तो अभी भी काम करते हैं। तेरी बीवी को हम तीनों मिलकर चोदेंगे।”

मोहन ने भी कहा, “मैं तो तैयार हूँ। मुझे तो हमेशा से निर्मला पसंद थी। उसकी गांड बहुत मस्त है।”

राजेश ने मुझे फोन करके घर बुला लिया।

मैं जब घर पहुँची तो देखा कि तीन बुड्ढे मेरे घर में बैठे हैं।

मैंने पूछा, “ये कौन हैं?”

राजेश ने कहा, “ये मेरे पिता जी रघुनाथ, चाचा जी रघवीर और जीजा जी मोहन हैं। इन्होंने तुम्हें चोदने के लिए गाँव से बुलाया है।”

मैंने उन्हें देखा।

रघुनाथ 65 साल के होने के बावजूद मजबूत दिख रहे थे। रघवीर भी काफी तंदुरुस्त थे। मोहन तो जवान ही था।

मैंने कहा, “ओह्ह… तो ये हैं तुम्हारे पिता जी। देखो तो इनमें अभी भी कितना जोश है।”

रघुनाथ ने मुझे देखा और कहा, “बहू, तुम तो बहुत हॉट लग रही हो। राजेश ने बताया कि तुम 8 कालों से चुदवा चुकी हो।”

मैंने कहा, “हाँ पिता जी, वो तो मुझे बहुत मज़ा दिए। लेकिन अब देखती हूँ कि आप मुझे कितना मज़ा देते हैं।”

रघवीर ने कहा, “बहू, हमारे लंड उन कालों से कम नहीं हैं। आज तुझे पता चलेगा कि असली हिंदुस्तानी लंड क्या होता है।”

मैंने कहा, “ठीक है, आओ दिखाओ अपने लंड।”

तीनों ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए।

रघुनाथ ने जब अपनी धोती उतारी तो मैं देखकर चौंक गई।

उनका लंड करीब 9 इंच लंबा और बहुत मोटा था।

वो सफेद बालों वाला था लेकिन अभी भी काफी सख्त दिख रहा था।

रघवीर का लंड भी 8 इंच का था और बहुत मोटा।

मोहन का लंड सबसे बड़ा था – करीब 10 इंच लंबा और काफी मोटा।

मैंने कहा, “वाह… आप तीनों के लंड तो बहुत बड़े हैं। राजेश का तो 4 इंच का ही है।”

राजेश कोने में बैठा शर्मा रहा था।

रघुनाथ ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

वो मुझे जोर-जोर से किस करने लगे।

उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई।

मैं भी उनका साथ देने लगी।

रघवीर पीछे से मेरी गांड सहलाने लगे।

मोहन ने मेरी चूचियाँ पकड़ लीं।

मैंने कहा, “आओ पिता जी, मुझे अपना लंड दिखाओ।”

रघुनाथ ने मुझे घुटनों के बल बिठाया और अपना 9 इंच का मोटा लंड मेरे मुँह के सामने कर दिया।

मैंने उसे अपने हाथ में लिया और देखा। वो गरम और सख्त था।

मैंने उसके सुपाड़े को चूमा और फिर धीरे से अपने मुँह में ले लिया।

“आह्ह… बहू… बहुत अच्छा चूसती है तू!” रघुनाथ कराह उठे।

मैंने उनका लंड गले तक लेने की कोशिश की। वो इतना मोटा था कि मेरी गालें फैल गईं। मैं जीभ से उसे चाट रही थी और चूस रही थी।

इतने में रघवीर ने अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया।

मैंने एक हाथ से उनका लंड हिलाना शुरू कर दिया।

मोहन भी आगे बढ़े और मैंने उनका लंड अपने दूसरे हाथ में ले लिया।

अब मैं तीनों बुड्ढों के लंडों से खेल रही थी – एक मुँह में, दो हाथों में।

राजेश कोने में बैठकर ये सब देख रहा था।

उसे अपनी बीवी को अपने पिता, चाचा और जीजा के साथ देखकर बहुत अजीब लग रहा था लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था।

रघुनाथ ने मुझे उठाया और बेड पर लिटा दिया।

उन्होंने मेरी टाँगें फैलाईं और अपना मोटा लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा।

“आज अपने ससुर का लंड ले बहू!” कहकर उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा और उनका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया।

“आह्ह… पिता जी… इतना बड़ा… मेरी चूत फट जाएगी!” मैं चीखी।

रघुनाथ मुझे जोर-जोर से चोदने लगे। उनके हर धक्के के साथ मेरी चूचियाँ उछल रही थीं।

वो अपनी उम्र के बावजूद बहुत तेजी से चोद रहे थे।

“फच्च-फच्च-फच्च” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।

रघवीर ने मेरे मुँह में अपना लंड घुसा दिया।

अब मेरी चूत में एक लंड और मुँह में दूसरा था। दोनों मुझे एक साथ चोद रहे थे।

मोहन ने मेरी गांड में उंगली करनी शुरू कर दी।

वो मेरी गांड को तैयार कर रहे थे।

“ओह्ह… दोनों तरफ… मर गई… आह्ह!” मैं चीख रही थी।

राजेश ये सब देख रहा था और रो रहा था।

उसे अपनी बीवी को अपने पिता और चाचा के साथ चुदते देखकर बहुत दुख हो रहा था।

करीब 20 मिनट तक रघुनाथ मेरी चूत चोदते रहे।

फिर उन्होंने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया।

उनका गर्म पानी मेरी चूत में भर गया।

रघुनाथ हटे तो रघवीर आगे बढ़े।

उन्होंने भी अपना लंड मेरी चूत में घुसाया और चोदने लगे।

मोहन ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया।

अब रघवीर मेरी चूत में, मोहन मेरे मुँह में और रघुनाथ मेरी चूचियों से खेल रहे थे।

“आह्ह… चाचा जी… और चोदो… मेरी चूत फाड़ डालो!” मैं चीख रही थी।

रघवीर बहुत जोर-जोर से धक्के मार रहे थे।

मेरी चूत अब पूरी तरह फैल गई थी।

करीब 25 मिनट बाद रघवीर भी झड़ गए।

उन्होंने भी अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया।

अब बारी थी मोहन की। उन्होंने मुझे डॉगी पोजीशन में बिठाया और अपना 10 इंच का लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

“आह्ह… जीजा जी… इतना बड़ा… मर गई!” मैं चीखी।

मोहन मुझे पीछे से जोर-जोर से चोदने लगे। उनके हर धक्के के साथ मेरी गांड उछल रही थी।

रघुनाथ और रघवीर मेरे सामने खड़े हो गए और मैंने उनके लंड फिर से चूसने शुरू कर दिए।

अब मोहन मेरी चूत में और दोनों बुड्ढे मेरे मुँह में – तीनों एक साथ मुझे चोद रहे थे।

“ओह्ह… तीनों तरफ… मर गई… आह्ह!” मैं चीख रही थी।

राजेश कोने में बैठकर रो रहा था।

उसे अपनी बीवी का ये हाल देखकर बहुत दुख हो रहा था लेकिन मुझे कोई परवाह नहीं थी।

मैं तो तीनों बुड्ढों के लंडों से चुद रही थी।

करीब 30 मिनट तक मोहन मुझे चोदते रहे। फिर उन्होंने भी अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया।

मेरी चूत अब तीनों के पानी से भरी हुई थी। वो सब बाहर बह रहा था।

मैंने कहा, “अब मेरी गांड भी चोदो।”

रघुनाथ ने कहा, “ठीक है बहू, आज तेरी गांड भी फाड़ते हैं।”

उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी टाँगें उठाकर मेरी गांड पर थूका।

फिर उन्होंने अपना मोटा लंड मेरी गांड के छेद पर रखा और धक्का मारा।

“आह्ह… पिता जी… दर्द हो रहा है… धीरे!” मैं चीखी।

लेकिन वो नहीं रुके। वो मेरी गांड में लंड घुसाकर जोर-जोर से चोदने लगे।

मेरी गांड फटने लगी थी लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था।

रघवीर ने मेरे मुँह में अपना लंड घुसा दिया।

मोहन ने मेरी चूत में अपनी उंगलियाँ डाल दीं।

अब रघुनाथ मेरी गांड में, रघवीर मेरे मुँह में और मोहन मेरी चूत में – तीनों एक साथ मुझे चोद रहे थे।

“ओह्ह… तीनों छेदों में… मर गई… आह्ह!” मैं चीख रही थी।

करीब 25 मिनट तक ये तीनों मुझे इसी तरह चोदते रहे।

फिर रघुनाथ ने अपना पानी मेरी गांड में छोड़ दिया।

उसके बाद रघवीर ने भी मेरी गांड में अपना लंड डाला और चोदा। फिर मोहन ने भी मेरी गांड चोदी।

मेरी गांड अब तीनों के पानी से भरी हुई थी।

राजेश ये सब देख रहा था।

मैंने उसे बुलाया और कहा, “आओ राजेश, देखो मेरी चूत और गांड का क्या हाल हुआ है।”

राजेश आया और देखा कि मेरी चूत और गांड दोनों फैल गई हैं और उनसे उसके पिता, चाचा और जीजा का पानी बह रहा है।

मैंने कहा, “अब चाटो साले! तुम्हारे पिता जी, चाचा जी और जीजा जी का पानी चाटकर साफ करो मेरी चूत और गांड।”

राजेश ने मना किया, “नहीं, ये गलत है।”

मैंने उसे थप्पड़ मारा और कहा, “चाटो साले! तुम्हारी बीवी की चूत और गांड में जो तुम्हारे पिता जी, चाचा जी और जीजा जी का पानी है वो चाटो।”

राजेश डरकर मेरी चूत चाटने लगा।

उसने अपने पिता, चाचा और जीजा का पानी मेरी चूत से चाट-चाटकर साफ किया।

फिर मैंने उसे अपनी गांड भी चाटवाई।

उसके बाद रघुनाथ ने कहा, “अब मैं इसे डबल पेनेट्रेशन दूँगा।”

मैंने पूछा, “क्या होता है ये?”

उन्होंने कहा, “मेरा लंड तेरी चूत में और रघवीर का लंड तेरी गांड में – दोनों एक साथ।”

मैंने कहा, “ठीक है, आओ करो।”

रघुनाथ ने मुझे बेड पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर लेट गए।

उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में घुसाया।

फिर रघवीर आए और उन्होंने अपना लंड मेरी गांड में घुसाने की कोशिश की।

दोनों मोटे लंड मेरी चूत और गांड में घुसते ही मैं चीख पड़ी, “आह्ह… फट गई… मेरी चूत और गांड फट गई!”

दोनों एक साथ मुझे चोद रहे थे।

मेरी चूत और गांड पूरी तरह फैल गई थीं।

दर्द के साथ-साथ अजीब सा मज़ा भी आ रहा था।

मोहन ने मेरे मुँह में अपना लंड घुसा दिया।

अब तीनों एक साथ मुझे चोद रहे थे – एक चूत में, एक गांड में और एक मुँह में।

“ओह्ह… तीनों तरफ… मर गई… आह्ह!” मैं चीख रही थी।

राजेश ये सब देख रहा था और रो रहा था।

उसे अपनी बीवी को अपने पिता और चाचा के साथ चुदते देखकर बहुत दुख हो रहा था।

करीब 40 मिनट तक ये तीनों मुझे इसी तरह चोदते रहे।

फिर रघुनाथ और रघवीर एक साथ झड़ गए। उन्होंने अपना पानी मेरी चूत और गांड में छोड़ दिया।

मैं बेहोश हो गई। जब मुझे होश आया, तो मैं बेड पर लेटी हुई थी और तीनों बुड्ढे मेरे चारों तरफ लेटे हुए थे।

राजेश कोने में बैठा रो रहा था।

मैंने कहा, “अब मैं तुम तीनों से एक साथ चुदवाऊँगी।”

मैंने रघुनाथ को बेड पर लिटाया और उनके ऊपर बैठकर उनका लंड अपनी चूत में ले लिया।

फिर रघवीर को पीछे से बुलाया और उनका लंड अपनी गांड में ले लिया।

मोहन ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया।

अब मैं तीनों लंडों से भरी हुई थी – चूत में एक, गांड में एक और मुँह में एक।

मैं सबको एक साथ हिला रही थी और मज़ा ले रही थी।

“ओह्ह… ये तो जन्नत है… आह्ह… और चोदो… मुझे और चोदो!” मैं कराह रही थी।

तीनों मिलकर मुझे करीब 2 घंटे तक इसी पोजीशन में चोदते रहे।

वो एक-एक करके झड़ रहे थे और फिर से खड़े हो रहे थे।

मेरी चूत और गांड दोनों में कम से कम दस बार पानी गिर चुका था।

फिर रघुनाथ ने मुझे उठाया और खिड़की के पास ले गए।

उन्होंने मुझे खिड़की से बाहर झुकाया और पीछे से मेरी चूत में लंड घुसा दिया।

रघवीर ने मेरी गांड में लंड डाल दिया। मोहन ने मेरे मुँह में लंड घुसा दिया।

खिड़की से बाहर पड़ोसी देख सकते थे, लेकिन मुझे कोई परवाह नहीं थी।

मैं तो तीनों बुड्ढों के लंडों से चुद रही थी।

करीब 30 मिनट बाद वो तीनों एक साथ झड़ गए।

मेरी चूत, गांड और मुँह तीनों से उनका पानी बह रहा था।

मैं खिड़की से झुकी हुई ही बेहोश हो गई।

जब मुझे सुबह होश आया, तो मैं बेड पर लेटी हुई थी।

तीनों बुड्ढे जा चुके थे। राजेश कोने में बैठा रो रहा था।

मैंने उसे बुलाया और कहा, “आओ राजेश, मेरी चूत और गांड चाटो।”

राजेश ने मेरी चूत और गांड चाटकर साफ की।

उसने अपने पिता, चाचा और जीजा का पानी चाट-चाटकर साफ किया।

मैंने उससे कहा, “अब से ये तीनों हर महीने आएँगे और मुझे चोदेंगे। तुम उनके सामने बैठकर देखोगे और मेरी चूत और गांड चाटोगे।”

राजेश मान गया।

अब हर महीने रघुनाथ, रघवीर और मोहन आते हैं और मुझे जमकर चोदते हैं।

राजेश उनके सामने बैठकर देखता है और फिर मेरी चूत और गांड चाटता है।

मेरी चूत और गांड अब इन तीनों बुड्ढों के लंडों की दीवानी हो गई हैं।

मैं इनसे हर महीने चुदवाती हूँ और मज़ा लेती हूँ।

राजेश अब मेरा नौकर है और मेरी चूत और गांड चाटता है।

यही मेरी जिंदगी है और इसमें मैं बहुत खुश हूँ।

मुझे बड़े लंड चाहिए चाहे वो किसी के भी हों – काले नीग्रों के हों या अपने ससुर के हों।

मैं हर लंड से चुदवाऊँगी और राजेश को चाटने के लिए बैठाऊँगी।

कैसे मेरे मकान मालिक जब यह जाना तो 32 डेली लेबर्स को बुलाकर चुदवाया, ये कहानी 20 कमेंट्स होने पर कभी लिखूंगी

कमेंट्स करे …..तबतक के लिए अपनी रंडी, रखैल, बुरमारी, साली रंडी, निर्मला को इज्जाजत दीजिये ….

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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