nisha ki mast chudai
एक महीने बाद, जैसे ही मुझे पुणे जाने का मौका मिला, मैंने अर्जुन को मैसेज किया। “मैं आ रही हूँ।”
“कब?” उसने तुरंत जवाब दिया।
“कल शाम को।”
“मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा।”
मैंने अपने ऑफिस से छुट्टी ली और शाम की फ्लाइट से पुणे पहुंची।
अर्जुन एयरपोर्ट पर मुझे लेने आया था।
वो ब्लैक शर्ट और जींस में था, और दिखने में बिल्कुल हीरो जैसा लग रहा था।
“निषा…” उसने मुझे गले लगाया।
“अर्जुन…” मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया।
हम एक-दूसरे से लिपटकर किस करने लगे।
एयरपोर्ट पर लोग हमें देख रहे थे, लेकिन हमें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
“चलो, मेरे घर चलते हैं,” उसने कहा।
“तुम्हारे घर? तुम्हारी पत्नी?” मैंने पूछा।
“वो अमेरिका में है। घर में सिर्फ मैं ही रहता हूं,” उसने कहा।
यह सुनकर मुझे राहत मिली।
हम उसकी कार में बैठे और उसके अपार्टमेंट की तरफ निकले।
रास्ते में हम एक-दूसरे के हाथ पकड़े हुए थे।
वो बार-बार मेरे हाथ को चूम रहा था।
उसका अपार्टमेंट बांद्रा में एक ऊंची इमारत में था।
समंदर का नज़ारा दिखता था वहां से।
जैसे ही हम अंदर आए, अर्जुन ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे दीवार से लगा दिया।
“एक महीने से तड़प रहा हूँ तुम्हारे लिए…” उसने कहा और मेरे होंठों पर चूमा।
“मैं भी…” मैंने कहा।
हम एक-दूसरे के कपड़े उतारने लगे।
मैंने उसकी शर्ट खोली, उसने मेरी टॉप उतारी।
हम बीच रास्ते में ही नंगे होने लगे।
“बेडरूम में चलो…” उसने कहा।
“नहीं… यहीं…” मैंने कहा और लिविंग रूम के सोफे पर लेट गई।
अर्जुन मेरे ऊपर आ गया।
उसने मेरे स्तनों को पकड़ा और चूसने लगा।
मैं उसके बालों में हाथ फेर रही थी।
“उम्माह… और जोर से…” मैंने कहा।
उसने मेरे निप्पलों को काटा।
मुझे दर्द हुआ लेकिन मज़ा भी आया।
“आह… काटो इन्हें…” मैंने कहा।
फिर उसने नीचे बढ़कर मेरी स्कर्ट उतार दी।
मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था—जानबूझकर।
“आज तो तुम पूरी तरह तैयार होकर आई हो…” उसने मुस्कुराते हुए कहा।
“हां… बस तुम्हारे लिए…” मैंने कहा।
उसने मेरी चूत पर अपनी जीभ रखी और चाटने लगा।
वो मेरी क्लिट को चूस रहा था, मेरी फांकों को चाट रहा था।
“ओह गॉड… अर्जुन… बहुत मज़ा आ रहा है…” मैं कराह रही थी।
“तुम्हारी चूत का स्वाद बहुत अच्छा है…” उसने कहा।
वो १५ मिनट तक मेरी चूत चाटता रहा। मैं दो बार झड़ चुकी थी।
अब मेरी बारी थी। मैंने उसे खड़ा किया और उसकी जींस उतार दी।
उसका लंड एकदम खड़ा था—७ इंच का, मोटा, और कड़ा।
“इसे तो मैंने बहुत मिस किया…” मैंने कहा और उसे मुंह में ले लिया।
मैं उसे जोर-जोर से चूसने लगी।
वो मेरे सिर को पकड़कर अपना लंड मेरे मुंह में पेलने लगा।
“उम्माह… और अंदर… गले तक…” उसने कहा।
मैंने पूरी कोशिश की। उसका लंड मेरे गले तक घुस रहा था।
मैं उसे चूस रही थी, जीभ से उसकी टोपी चाट रही थी।
“क्या मस्त चूसती हो… बिल्कुल रंडी की तरह…” उसने गाली दी।
“हां… मैं तुम्हारी रंडी हूं…” मैंने कहा।
वो मेरे मुंह में ही झड़ने वाला था, लेकिन उसने रोक लिया।
“नहीं… आज मैं तुम्हारी चूत और गांड दोनों मारूंगा…” उसने कहा।
उसने मुझे सोफे पर घुटनों के बल किया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया।
“आह… माँ… दर्द…” मैंने कहा।
“सहन करो… थोड़ी देर में मज़ा आएगा…” उसने कहा।
वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मेरी चूत से पच-पच की आवाजें आ रही थीं।
“और तेज़… मारो… फाड़ दो मेरी चूत…” मैं चीख रही थी।
वो मेरे बाल पकड़कर मुझे चोद रहा था।
मेरी गांड लाल हो गई थी थप्पड़ों से।
“साली रंडी… बहुत चिल्लाती है…” उसने कहा।
“हां… मैं रंडी हूं… मुझे और चोदो…” मैंने कहा।
२० मिनट बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गया। मैं भी झड़ चुकी थी।
“अब गांड की बारी…” उसने कहा।
“पहले थोड़ा आराम…” मैंने कहा।
“नहीं… आज तो मैं तुम्हें पूरी तरह से चोदूंगा…” उसने कहा।
उसने मुझे बाथरूम में ले जाकर नहलाया।
वहां भी उसने मुझे चोदा—शावर के नीचे।
पानी की बौछारों में हम एक-दूसरे को चोद रहे थे।
फिर हम बेडरूम में आए। इस बार उसने मुझे बेड पर लेटाया और मेरी टांगें अपने कंधों पर रखीं।
वो मिशनरी पोजीशन में मुझे चोदने लगा।
“देखो मेरी आंखों में… मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं…” उसने कहा।
“मैं भी…” मैंने कहा।
हम एक-दूसरे को देखते हुए चोद रहे थे। यह बहुत रोमांटिक था।
अगले दिन सुबह, जब मेरी आंख खुली, तो अर्जुन मेरे बगल में था।
वो मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था।
“कैसी लगी रात?” उसने पूछा।
“सपना जैसी…” मैंने कहा।
“मैंने सोचा है…” उसने कहा।
“क्या?”
“क्यों ना तुम पुणे ही आ जाओ? मैं तुम्हारे लिए एक अपार्टमेंट ले लूंगा। तुम मुझसे मिल सकोगी जब चाहो…”
मैंने सोचा। यह अच्छा ऑफर था।
मुंबई में मेरा काम भी ऑनलाइन हो सकता था।
“ठीक है… मैं सोचूंगी…” मैंने कहा।
हमने उस दिन और भी चुदाई की।
इस बार हमने कुछ नया किया—रोल प्ले।
मैंने नर्स की यूनिफॉर्म पहनी, उसने डॉक्टर का कोट पहना।
“मिसेज शर्मा, आपकी तबीयत क्या है?” उसने पूछा।
“डॉक्टर साहब, मेरी चूत में बहुत जलन हो रही है…” मैंने कहा।
“चलो, मैं देखता हूं…” उसने कहा और मेरी यूनिफॉर्म उतार दी।
वो मेरी चूत को “चेकअप” करने लगा।
उसने अपनी जीभ से मेरी चूत का इलाज किया, फिर अपने लंड से।
“डॉक्टर साहब, यह इंजेक्शन बहुत मोटा है…” मैंने कहा।
“डरो मत, थोड़ा दर्द होगा फिर आराम मिलेगा…” उसने कहा और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।
हम दोनों हंस रहे थे और चोद रहे थे। यह बहुत मज़ेदार था।
शाम को जब मैं जाने लगी, तो अर्जुन ने मुझे एक बॉक्स दिया।
“क्या है इसमें?” मैंने पूछा।
“खोलकर देखो…”
मैंने खोला—एक डायमंड की रिंग थी।
“यह…” मैंने हैरान होकर पूछा।
“मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं…” उसने कहा।
“लेकिन तुम्हारी पत्नी…”
“मैं उसे तलाक दे दूंगा। वो अमेरिका में ही खुश है। हम दोनों अलग-अलग ज़िंदगी जी रहे हैं…”
मैंने सोचा। यह बड़ा फैसला था।
“मुझे वक्त दो…” मैंने कहा।
“लेकिन यह रिंग रख लो…” उसने कहा।
मैंने रिंग रख ली।
हमने एक-दूसरे को गले लगाया और किस किया।
“मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा…” उसने कहा।
“मैं जल्दी जवाब दूंगी…” मैंने कहा।
मैं पुणे से वापस मुंबई आ गई।
लेकिन अब मेरे मन में सिर्फ अर्जुन था।
उसका लंड, उसका प्यार, उसकी गालियां… सब कुछ।
तीन महीने बाद, मैंने अपना जवाब दिया—हां।
मैंने अपनी नौकरी छोड़ी, मुंबई छोड़ा, और पुणे आ गई।
अर्जुन ने मेरे लिए एक अपार्टमेंट लिया, और हम दोनों एक साथ रहने लगे।
उसने अपनी पत्नी से तलाक ले लिया, और हमने कोर्ट मैरिज कर ली।
आज हम दोनों खुशी-खुशी रह रहे हैं।
रोज रात को वो मुझे वैसे ही चोदता है जैसे पहली रात को चोदा था—बेरहमी से, प्यार से, और पूरी तरह से।
यह थी मेरी और अर्जुन की कहानी।
एक ऑनलाइन दोस्ती जो प्यार में बदली, और फिर शादी में।
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