पापा ने किया बेटी की गरम चूत को शांत

horny daughter chudai

हैलो दोस्तों, मैं हूँ रिया शर्मा, उम्र २४ साल, फिगर ३६-२८-३६, रंग गेहुँआ गोरा।

मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और एक साल पहले ही मेरी शादी हुई है।

दिखने में मैं बिल्कुल हीरोइन जैसी लगती हूँ—बड़े-बड़े आंखें, लंबे काले बाल, और एक ऐसा बदन जो किसी भी मर्द को दीवाना बना दे।

मेरे स्तनों का साइज़ ३६ है—पूरे गोल, उभरे हुए, और हमेशा तैयार।

मेरी कमर २८ इंच की है और नितंब ३६ इंच के—पूरे मोटे और गोल।

मैं सेक्स की बहुत बड़ी दीवानी हूँ। मुझे लंड की बहुत प्यास है।

शादी से पहले मैं कई लड़कों के साथ सो चुकी थी।

मेरे कॉलेज के दिनों में मैंने अपनी चूत का भरपूर इस्तेमाल किया है।

लेकिन शादी के बाद मेरी यह प्यास और भी बढ़ गई है, क्योंकि मेरे पति में वो दम नहीं है जो मुझे चाहिए।

मेरे पिता का नाम विक्रम शर्मा है। वो ४५ साल के हैं, लेकिन दिखने में बिल्कुल ३५ के लगते हैं।

वो जिम जाते हैं, इसलिए उनका बदन बहुत फिट है—चौड़ी छाती, कसी हुई कमर, और वो लंड… ओह माँ!

मैंने एक बार उन्हें नहाते हुए देखा था और उनका लंड देखकर मेरी चूत में पानी आ गया था।

वो करीब ८ इंच का और बहुत मोटा था।

मेरी माँ की मेरी शादी से ठीक एक साल पहले मृत्यु हो गई थी।

वो कैंसर से पीड़ित थीं।

माँ के जाने के बाद पापा अकेले रह गए थे।

मैं उनकी इकलौती बेटी थी।

माँ के जाने के बाद से ही मैंने नोटिस किया कि पापा मुझे अलग नज़रों से देखने लगे थे।

वो मेरे स्तनों को घूरते, मेरी कमर को देखते, और कभी-कभी मेरे नितंबों पर हाथ भी फेर देते।

मेरी शादी करन से हुई थी। करन एक अच्छा लड़का था, लेकिन बेड में बिल्कुल निकम्मा था।

शादी की पहली रात को ही उसने मुझे निराश कर दिया था।

वो जल्दी झड़ जाता था, और मेरी चूत की आग बुझती ही नहीं थी।

मैं रोज़ रात को प्यासी सोती थी।

एक दिन मैंने सोचा, क्यों ना मैं अपने पापा के पास जाऊं?

वो भी तो माँ के बाद अकेले थे, और मुझे भी लंड की ज़रूरत थी।

मैंने यह सोचकर अपने ससुराल से बहाना बनाया कि मैं अपने पापा से मिलने जा रही हूँ। करन ने मुझे जाने दिया।

मैं अपने मायके पहुंची। पापा ने मुझे देखते ही गले लगा लिया।

उनके बदन की गर्माहट मुझे अच्छी लगी।

वो मुझे अंदर ले गए और सोफे पर बैठा दिया।

“कैसी हो बेटी?” पापा ने पूछा।

“ठीक हूं पापा,” मैंने कहा, “आप कैसे हैं?”

“मैं भी ठीक हूं,” पापा ने कहा, “लेकिन अकेला रहना अच्छा नहीं लगता।”

मैंने उनके पास जाकर अपना सिर उनकी छाती पर रख दिया, “मैं हूं ना पापा।”

पापा ने मेरे बालों को सहलाया, “हां बेटी, तुम ही हो मेरी सब कुछ।”

शाम को हमने साथ में डिनर किया।

पापा ने वाइन निकाली और हम दोनों ने पीनी शुरू कर दी।

थोड़ी देर में हम दोनों नशे में हो गए।

“बेटी, बताओ, तुम्हारी शादीशुदा ज़िंदगी कैसी चल रही है?” पापा ने पूछा।

मैंने शरमाते हुए कहा, “पापा, ठीक है।”

“ठीक है मतलब? करन तुम्हें खुश रखता है?” पापा ने पूछा।

“पापा, वो… वो बेड में अच्छा नहीं है,” मैंने कहा।

“क्या मतलब?” पापा ने पूछा।

“मतलब वो जल्दी झड़ जाता है। मुझे मज़ा नहीं आता,” मैंने कहा।

पापा चुप हो गए।

फिर उन्होंने कहा, “बेटी, यह तो बड़ी समस्या है। एक औरत को उसकी चूत की आग बुझानी ज़रूरी है।”

मैंने देखा कि पापा का लंड उनकी पैंट में उभर रहा था।

मैं समझ गई कि वो भी मुझे चाहते थे।

“पापा, आपका क्या हाल है?” मैंने पूछा।

“मैं तो माँ के जाने के बाद से अकेला हूं बेटी। कभी-कभार किसी एस्कॉर्ट से काम चलाता हूं,” पापा ने कहा।

“पापा, आपको एस्कॉर्ट की क्या ज़रूरत है? मैं हूं ना,” मैंने कहा और उनके पास चिपक गई।

पापा ने मुझे देखा।

उनकी आंखों में वो आग थी जो मैं पहचानती थी।

वो मुझे चाहते थे, और मैं भी उन्हें।

“बेटी, यह गलत होगा,” पापा ने कहा।

“क्या गलत है पापा? मैं एक प्यासी औरत हूं, और आप एक प्यासे मर्द। हम दोनों एक-दूसरे की प्यास बुझा सकते हैं,” मैंने कहा।

पापा ने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मेरे होंठों पर चूमा।

वो मेरे होंठों को जोर-जोर से चूसने लगे।

मैं भी उनका साथ दे रही थी।

हमारी जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं।

“उम्माह… पापा… और जोर से…” मैंने कहा।

पापा ने मुझे उठाया और अपने बेडरूम में ले गए।

उन्होंने मुझे बेड पर पटक दिया और मेरे ऊपर झुक गए।

“आज मैं तुझे अपनी बीवी बनाकर चोदूंगा,” पापा ने कहा।

“हां पापा, मैं आपकी बीवी हूं, आपकी रंडी हूं। मेरी चूत फाड़ दो,” मैंने कहा।

पापा ने मेरी नाइटी ऊपर उठाई।

मैंने नीचे ब्रा और पैंटी पहनी थी।

वो ब्रा के ऊपर से ही मेरे स्तनों को मसलने लगे।

“कितने बड़े-बड़े चूचे हैं तेरे,” पापा ने कहा।

“चूसो इन्हें पापा, काटो इन्हें,” मैंने कहा।

पापा ने मेरी ब्रा खोली और मेरे स्तनों को आज़ाद कर दिया।

वो एक स्तन को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगे।

दूसरे को हाथ से मसल रहे थे।

“आह… पापा… बहुत मज़ा आ रहा है…” मैं कराह रही थी।

पापा ने मेरे निप्पलों को काटा। मुझे दर्द हुआ लेकिन मज़ा भी आया।

वो १० मिनट तक मेरे स्तनों का रस पीते रहे।

फिर वो नीचे बढ़े।

उन्होंने मेरी पैंटी नीचे खींची।

मेरी चूत साफ थी, गीली, और लाल।

वो उसे देखकर पागल हो गए।

“कितनी सुंदर चूत है तेरी,” पापा ने कहा।

“चाटो इसे पापा, पी जाओ इसका रस,” मैंने कहा।

पापा ने अपनी जीभ निकाली और मेरी चूत पर रख दी।

वो मेरी चूत की फांकों को चाटने लगे, मेरी क्लिट चूसने लगे।

“ओह गॉड… पापा… और जोर से…” मैं चीख रही थी।

पापा ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी।

वो अंदर-बाहर करने लगे।

मैं पागल हो रही थी।

मैंने उनका सिर अपनी चूत पर दबा दिया।

“चाटो… और चाटो… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने कहा।

पापा ने गति बढ़ा दी। और फिर मैं झड़ गई।

मेरी चूत से पानी निकलकर पापा के मुंह में गया। उन्होंने उसे पी लिया।

अब मेरी बारी थी।

मैंने पापा को लेटाया और उनके कपड़े उतारने शुरू किए।

उन्होंने शर्ट और पैंट पहनी थी।

मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए।

अब वो सिर्फ अंडरवियर में थे।

उनका लंड अंडरवियर से बाहर निकलने को तड़प रहा था।

मैंने उनकी अंडरवियर नीचे खींची। उनका लंड बाहर आ गया।

वो ८ इंच का, मोटा, और एकदम खड़ा था।

मैं उसे देखकर हैरान हो गई।

इतना बड़ा लंड मैंने आज तक नहीं देखा था।

“पापा, यह तो बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।

“तुझे पसंद आया?” पापा ने पूछा।

“बहुत पसंद आया,” मैंने कहा और उसे हाथ में ले लिया।

वो गर्म था, कड़ा था, और कांप रहा था।

मैंने उसे हिलाया। पापा कराहने लगे।

“मुंह में लो बेटी,” पापा ने कहा।

मैंने उनका लंड मुंह में ले लिया। वो बहुत मोटा था।

मैं उसे धीरे-धीरे चूसने लगी।

पापा ने मेरे सिर को पकड़ा और अपना लंड मेरे मुंह में पेलने लगे।

“उम्माह… और अंदर… गले तक ले लो…” पापा ने कहा।

मैंने पूरी कोशिश की।

उनका लंड मेरे गले तक घुस रहा था।

मैं उसे चूस रही थी, जीभ से उसकी टोपी चाट रही थी।

“बहुत अच्छा चूसती है तू… बिल्कुल अपनी माँ की तरह…” पापा ने कहा।

मैंने १५ मिनट तक उनका लंड चूसा। फिर पापा ने मुझे रोका।

“अब मैं तेरी चूत चोदूंगा,” पापा ने कहा।

मैं लेट गई और अपनी टांगें चौड़ी कर दीं।

पापा ने मेरी चूत पर थूक लगाया और अपना लंड रखा।

“तैयार हो बेटी?” पापा ने पूछा।

“हां पापा, पेल दो… मेरी चूत फाड़ दो…” मैंने कहा।

पापा ने एक जोरदार धक्का दिया।

उनका मोटा लंड मेरी चूत में घुस गया।

मैं चीखी, “आह… माँ… दर्द…”

“दर्द तो होगा बेटी, लेकिन थोड़ी देर में मज़ा आएगा,” पापा ने कहा।

उन्होंने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू किए।

मेरी चूत पहले तो टाइट थी, लेकिन फिर गीली होकर चिकनी हो गई।

पापा का लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा।

“फच… फच… फच…” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।

“कैसा लग रहा है बेटी?” पापा ने पूछा।

“बहुत अच्छा पापा… और तेज़… और जोर से…” मैंने कहा।

पापा ने गति बढ़ा दी। वो जोर-जोर से मेरी चूत में धक्के मार रहे थे।

मेरे स्तन हिल रहे थे। पापा ने उन्हें पकड़कर दबाना शुरू कर दिया।

“तेरे चूचे कितने मस्त हैं,” पापा ने कहा।

“चूसो इन्हें… मसलो इन्हें…” मैंने कहा।

पापा ने मुझे घुमाकर कुत्ते की तरह बना दिया।

अब वो पीछे से मेरी चूत चोद रहे थे।

उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मेरा सिर पीछे खींचा।

“आह… पापा… और जोर से…” मैं चीख रही थी।

पापा ने मेरे नितंबों पर थप्पड़ मारे। “साली रंडी… बहुत चिल्लाती है…”

“हां… मैं रंडी हूं… मेरी माँ भी रंडी थी… हम दोनों ने तुम्हारा लंड लिया है…” मैंने कहा।

यह सुनकर पापा और भी पागल हो गए।

उन्होंने मुझे और तेज़ चोदना शुरू कर दिया।

मेरी चूत से पानी निकल रहा था।

“मैं झड़ने वाली हूं पापा…” मैंने कहा।

“मैं भी बेटी…” पापा ने कहा।

“अंदर ही झड़ जाओ… मेरी चूत में अपना माल छोड़ दो…” मैंने कहा।

पापा ने कुछ और जोरदार धक्के मारे और फिर मेरी चूत में ही झड़ गए।

मैंने महसूस किया कि उनका गरम वीर्य मेरी चूत में भर रहा है। मैं भी झड़ गई।

हम दोनों थककर बेड पर गिर गए। पापा ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।

“कैसा लगा बेटी?” पापा ने पूछा।

“स्वर्ग जैसा पापा… मैंने आज तक इतना मज़ा नहीं लिया…” मैंने कहा।

“मुझे भी बहुत मज़ा आया,” पापा ने कहा।

हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।

अगली सुबह जब मैं उठी, तो पापा फिर से मेरे ऊपर थे।

उनका लंड फिर से खड़ा था।

“सुबह-सुबह एक बार और?” पापा ने पूछा।

“हां पापा, चोदो मुझे…” मैंने कहा।

पापा ने मुझे फिर से चोदा। इस बार वो और भी जोर से थे।

उन्होंने मुझे बाथरूम में भी चोदा, किचन में भी चोदा, और सोफे पर भी चोदा।

मैं सात दिन तक अपने पापा के साथ रही।

हर दिन, हर रात, हर कोने में हमने चुदाई की।

पापा ने मेरी हर पोजीशन में चुदाई की—मिशनरी में, डॉगी में, काउगर्ल में, और स्टैंडिंग में भी।

जब मैं वापस अपने ससुराल जाने लगी, तो पापा ने मुझे गले लगाया और कहा, “बेटी, तुम जब भी चाहो आ सकती हो। मेरा लंड हमेशा तुम्हारे लिए तैयार है।”

“और मेरी चूत भी हमेशा आपके लिए तैयार है पापा,” मैंने कहा।

उसके बाद से मैं हर हफ्ते अपने पापा से मिलने जाती हूं।

वो मुझे चोदते हैं, मेरी प्यास बुझाते हैं, और मैं वापस अपने पति के पास चली जाती हूं।

मेरे पति को कुछ पता नहीं है।

वो सोचता है कि मैं अपने पापा से मिलने जाती हूं, लेकिन उसे नहीं पता कि मैं उनसे चुदवाने जाती हूं।

मैं एक खुशहाल औरत हूं।

मेरे पास दो मर्द हैं—एक पति जो मेरा ख्याल रखता है, और एक पापा जो मेरी चूत का ख्याल रखता है।

और मैं दोनों को खुश रखती हूं।

यह थी मेरी कहानी।

उम्मीद है आपको पसंद आई होगी।

अगर आपकी भी कोई fantasy है, तो मुझे ज़रूर लिखें…

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

1 thought on “पापा ने किया बेटी की गरम चूत को शांत”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top