barish ki raat papa ne beti ko aurat banaya
मेरा नाम रिया है, उम्र 20 साल। मैं कॉलेज की फाइनल ईयर में हूँ। मेरे पापा विक्रम 47 साल के हैं। मम्मी की मौत को 4 साल हो चुके हैं। घर में सिर्फ हम दोनों रहते हैं।
पापा बहुत व्यस्त रहते हैं, लेकिन मेरे लिए हमेशा समय निकालते हैं।
पिछले कुछ महीनों से हमारे रिश्ते में एक अजीब सा बदलाव आ रहा था। मैं उन्हें अब सिर्फ पापा की नज़र से नहीं देख पा रही थी। उनकी मजबूत बॉडी, गहरी आवाज और वो तरीका जिससे वो मुझे देखते थे… सब कुछ मुझे अंदर तक छू जाता था।
बाहर की वो रात
एक शाम पापा ने कहा, “रिया, आज ऑफिस से जल्दी छुट्टी मिल गई है। चल, कहीं बाहर घूम आएँ।”
मैं बहुत खुश हो गई। हम दोनों कार लेकर शहर से बाहर एक शांत पहाड़ी इलाके की तरफ निकल गए। रास्ते में बारिश शुरू हो गई। पापा ने कार एक सुनसान जगह पर पार्क कर दी। आस-पास सिर्फ जंगल और बारिश की आवाज थी।
हम दोनों कार में ही बैठे रहे। बारिश की बूँदें कार की छत पर टप-टप कर रही थी। अंदर ए.सी. की ठंडक थी।
रिया ने कहा, “पापा, बहुत अच्छा लग रहा है यहाँ।”
पापा ने मुस्कुराते हुए मेरे सिर पर हाथ रखा। “तुझे अच्छा लगे तो मैं रोज ले आऊँगा।”
धीरे-धीरे बातें पुरानी यादों पर आ गई। मैंने पापा की गोद में सिर रख दिया। पापा ने मुझे अपने सीने से लगा लिया। मेरी छाती उनकी छाती से सट गई। उनकी गर्मी मुझे अच्छी लग रही थी।
कुछ देर बाद पापा का हाथ मेरी पीठ पर सरकने लगा। मैंने भी अपनी उंगली उनकी शर्ट के अंदर डाल दी और उनकी छाती सहलाने लगी।
“रिया… तू अब बहुत बड़ी हो गई है,” पापा ने धीरे से कहा।
“पापा… आपको मैं अच्छी लगती हूँ?” मैंने शर्माते हुए पूछा।
पापा ने मेरे बालों में हाथ फेरा और बोले, “बहुत अच्छी लगती है बेटी… कभी-कभी तो लगता है तू मेरी बेटी नहीं… कुछ और है।”
मैंने हिम्मत करके पापा के होंठों पर हल्का सा किस्स किया। पापा पहले चौंके, लेकिन फिर उन्होंने भी जवाब दिया। किस्स धीरे-धीरे गहरा होता गया। पापा की जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैं उनकी जीभ चूसने लगी।
पापा का हाथ मेरी कमर से नीचे सरका और मेरी गांड पर आ गया। उन्होंने हल्के से दबाया। मैं काँप उठी।
“पापा… आह्ह्ह…”
पापा ने मेरी टी-शर्ट ऊपर की। मैंने खुद टी-शर्ट उतार दी। अब मैं सिर्फ ब्रा और जींस में थी। पापा ने ब्रा का हुक खोला और मेरी छातियाँ बाहर निकाल ली।
उन्होंने एक छाती को मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगे।
“आह्ह्ह… पापा… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”
पापा का दूसरा हाथ मेरी जींस के बटन पर गया। उन्होंने जींस का बटन खोला और हाथ अंदर डाल दिया। मेरी पैंटी पहले से गीली थी। पापा ने उंगली से मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
“रिया… तू बहुत गीली हो गई है बेटी…”
“पापा… उंगली अंदर… आह्ह्ह…”
पापा ने उंगली अंदर डाली और धीरे-धीरे हिलाने लगे। मैं उनकी गोद में बैठी हुई अपनी कमर हिला रही थी।
बारिश तेज हो गई थी। कार की खिड़कियों पर पानी की धारें बह रही थी। अंदर सिर्फ हमारी सांसें और मेरी सिसकियाँ थी।
पापा ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। अब मैं उनकी गोद में बैठी थी। उनकी हार्ड लंड मेरी जींस के ऊपर से मेरी चूत पर दब रहा था।
“रिया… हम गलत कर रहे हैं…”
“पापा… मुझे अच्छा लग रहा है… बस थोड़ा और…”
पापा ने मेरी जींस और पैंटी नीचे सरका दी। अब मैं उनकी गोद में पूरी नंगी बैठी थी। पापा ने अपना लंड बाहर निकाला। वह बहुत मोटा और खड़ा था। मैंने उसे हाथ में पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। पापा आह भर रहे थे।
“रिया… तू मेरी बेटी है… लेकिन आज तू मेरी औरत भी है।”
मैंने पापा की आँखों में देखा और धीरे से कहा, “पापा… मुझे अपनी बनाओ… आज… यहीं… इस बारिश में।”
बारिश अब और तेज हो गई थी। कार की खिड़कियों पर पानी की धारें तेजी से बह रही थीं। अंदर सिर्फ हम दोनों की सांसें और बारिश की आवाज थी। रिया पापा की गोद में नंगी बैठी थी। पापा का मोटा, खड़ा लंड उसके चूत के मुंह पर दब रहा था। रिया ने उसे हाथ में पकड़ कर धीरे-धीरे सहलाया।
“पापा… यह बहुत मोटा है… मुझे डर लग रहा है…”
पापा ने रिया के बालों में हाथ फेरा और प्यार से बोले, “बेटी, डर मत। पापा बहुत धीरे करेगा। अगर दर्द हो तो बोल देना।”
रिया ने पापा की आँखों में देखा। उसकी आँखों में शर्म, डर और भूख तीनों थे। उसने धीरे से सिर हिलाया। पापा ने रिया की कमर पकड़ी और लंड का सिरा उसकी चूत पर सेट किया। बहुत धीरे से ऊपर की तरफ दबाव डाला।
लंड का सिरा रिया की टाइट चूत में घुसा तो रिया ने आँखें बंद कर ली और पापा की गर्दन कस कर पकड़ ली।
“आह्ह्ह… पापा… दर्द हो रहा है…
आह्ह्ह… बहुत मोटा है…”
पापा रुके नहीं। धीरे-धीरे इंच-इंच करके अपना पूरा लंड रिया की चूत में डाल दिया। जब पूरा लंड अंदर चला गया, रिया की सांस रुक गई।
“पापा… पूरा अंदर चला गया… आह्ह्ह… मुझे लग रहा है जैसे मैं फट गई हूँ…”
पापा ने रिया को सीने से चिपका लिया और उसके कान में फुसफुसाया,
“आराम से बेटी… अब पापा हिलाएगा… बहुत धीरे…”
पापा ने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की। हर धक्के के साथ रिया की सिसकियाँ निकल रही थीं।
“आह्ह्ह… पापा… हाँ… धीरे… आह्ह्ह… अच्छा लग रहा है… और गहरा…”
धीरे-धीरे दर्द कम होने लगा। रिया अब खुद अपनी कमर हिलाने लगी। वह पापा की गोद में ऊपर-नीचे हो रही थी। कार की सीट हल्की-हल्की हिल रही थी। पापा ने रिया की छातियाँ मुंह में ले ली और जोर से चूसने लगे। रिया की सिसकियाँ तेज हो गई।
“पापा… और जोर से चूसो… आह्ह्ह… मुझे बहुत मजा आ रहा है… आह्ह्ह…”
पापा ने रिया को गोद में उठा कर मिशनरी पोजीशन में कर दिया। अब रिया कार की सीट पर लेटी हुई थी और पापा उसके ऊपर थे। पापा ने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
“आह्ह्ह… पापा… बहुत गहरा जा रहा है… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह… हाँ… इसी तरह…”
बारिश की आवाज और रिया की सिसकियाँ एक साथ गूंज रही थी। पापा अब पूरी ताकत से धक्के मार रहे थे। हर धक्के पर रिया की छातियाँ उछल रही थी।
रिया ने पापा की पीठ पर नाखून गाड़ दिए और चीख उठी, “पापा… मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह… आ गया… आ गया!”
रिया का शरीर जोर से काँप उठा। उसकी चूत पापा के लंड को कस कर दबाने लगी। पापा भी और तेज हो गए। कुछ ही देर बाद उन्होंने रिया की चूत के सबसे गहरे हिस्से में गरम-गरम वीर्य छोड़ दिया।
दोनों थक कर एक-दूसरे से लिपट गए। बारिश अभी भी तेज हो रही थी। कार की खिड़कियाँ पूरी तरह धुंधली हो चुकी थी।
रिया ने पापा की छाती पर सिर रखा और धीरे से बोली, “पापा… मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरी पहली चुदाई मेरे पापा से होगी… लेकिन… बहुत अच्छा लगा। मुझे अब डर नहीं लग रहा।”
पापा ने रिया के माथे पर किस्स किया और बोले, “रिया… तू मेरी बेटी है… लेकिन आज से तू मेरी औरत भी है। शादी के बाद भी… जब भी तुझे चाहे… पापा तुझे चोदेगा।”
रिया शर्मा कर पापा के सीने में छुप गई, लेकिन उसके होंठों पर एक संतुष्ट मुस्कान थी। बारिश धीरे-धीरे कम होने लगी। पापा ने रिया को अपनी गोद में बिठाया और बोले, “चल बेटी… अब घर चलते हैं। लेकिन याद रख… घर में भी ये सिलसिला जारी रहेगा।”
रिया ने पापा की गर्दन में हाथ डाल कर कहा, “हाँ पापा… घर में भी… जब मन करे… मुझे चोदना। मैं अब आपकी हूँ।”
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Very romantic and beautiful story. 💕