younger sister chudai kahani
मेरा नाम राहुल है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे का रहने वाला हूँ।
उस समय मेरी उम्र तेईस साल थी, हाइट पाँच फुट ग्यारह इंच और रंग गेहुँआ।
मेरी बड़ी बहन की शादी तय हो चुकी थी और पूरा घर शादी की तैयारियों में जुटा हुआ था।
मेरे पिताजी एक सरकारी स्कूल में अध्यापक थे और माँ घर संभालती थीं। हमारा परिवार पारंपरिक था लेकिन शिक्षित और आधुनिक विचारों वाला।
मेरी बड़ी बहन अंजली, जिसे हम सब प्यार से दीदी कहते थे, की उम्र छब्बीस साल थी और उसकी शादी दिल्ली के एक इंजीनियर से तय हुई थी।
शादी हमारे कस्बे में ही होनी थी क्योंकि दीदी ने अपनी ससुराल वालों से यह शर्त रखी थी कि बिदाई पहले उसके घर से होगी जहाँ वो पली-बढ़ी है।
लेकिन इस कहानी का असली किरदार मेरी छोटी बहन प्रिया थी।
प्रिया मुझसे चार साल छोटी थी, उस समय उन्नीस साल की हो चुकी थी।
वह देखने में बेहद खूबसूरत थी, ऐसी खूबसूरती जो धीरे-धीरे निखर रही थी और हर किसी की नज़र उस पर टिक जाती थी।
उसकी हाइट पाँच फुट चार इंच थी, रंग एकदम गोरा जैसे किसी ने दूध में हल्दी मिलाकर चमक दी हो। उसके बाल कमर तक लंबे, काले और घने थे जिन्हें वो अक्सर खुला छोड़ देती थी।
लेकिन जो चीज़ मुझे सबसे ज़्यादा आकर्षित करती थी वो था उसका बदन। उसके स्तन बिल्कुल पके आमों की तरह गोल और उभरे हुए थे, करीबन चौंतीस इंच के।
उसकी कमर इतनी पतली थी कि हाथ रखते ही उँगलियाँ आपस में मिल जातीं, मात्र छब्बीस इंच की।
और उसकी गांड… ओह माँ… वो तो किसी मोटी गुलाब की पंखुड़ियों की तरह गोल और भरी हुई थी, चौंतीस इंच की जिसे देखकर कोई भी मर्द पागल हो जाता।
वो अक्सर टाइट जींस या सलवार सूट पहनती थी जिसमें उसकी गांड का आकार साफ़ दिखता था।
हमारे घर में तीन कमरे थे लेकिन शादी में आए मेहमानों की भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि जगह की कमी हो रही थी।
मामा-मामी, मौसी-मौसा, फूफा-फूफी, चाचा-चाची सब आ चुके थे।
घर में हर जगह लोगों का हुजूम था। मेरी दीदी के कमरे में उसकी सहेलियाँ ठहरी हुई थीं, माता-पिता के कमरे में दादी-दादाजी और एक चाची।
रात को सोने के लिए जगह बनाने के लिए पापा ने फैसला किया कि मैं और प्रिया एक कमरे में सोएँगे क्योंकि हम दोनों ही घर के सबसे छोटे थे और एक-दूसरे के साथ बड़े हुए थे।
बचपन में हम एक ही बिस्तर पर सोया करते थे इसलिए घरवालों को कोई एतराज़ नहीं था।
लेकिन वो नहीं जानते थे कि प्रिया अब बच्ची नहीं रही थी, वो एक जवान औरत बन चुकी थी और मैं भी एक हवस का पुजारी युवक।
शादी से तीन दिन पहले की बात है। घर में मेहंदी की रस्म थी। पूरा घर गुलाबी रंग की रोशनी में नहाया हुआ था।
महिलाएँ गाना गा रही थीं और मेहंदी लगवा रही थीं। प्रिया ने उस दिन हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जिसका ब्लाउज काफ़ी गहरा था और उसकी पीठ खुली थी।
उसकी पीठ इतनी गोरी और चिकनी थी कि मन करता था वहीं जाकर चूम लूँ।
मैं छत पर फोटो खींच रहा था क्योंकि मुझे फोटोग्राफी का शौक था।
प्रिया मेहंदी लगवाकर छत पर आई ताकि वो सूख जाए। वो छत पर आकर बैठ गई और मुझे देखकर मुस्कुराई।
“भैया, मेरी फोटो खींचोगे?” उसने प्यार से कहा।
“ज़रूर,” मैंने कहा और कैमरा उठा लिया।
जैसे ही मैंने लेंस में उसे देखा, मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
वो साड़ी में इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मुझसे रहा नहीं गया।
उसने अपने बाल एक तरफ किए हुए थे जिससे उसकी गर्दन और खुली पीठ दिख रही थी।
मैंने उसकी कई फोटो खींचीं, कभी वो पलट कर मुस्कुराती तो कभी शर्माती हुई नज़रें झुकाती।
“भैया, एक बात पूछूँ?” प्रिया ने अचानक कहा।
“हाँ पूछो,” मैंने कैमरा नीचे किया।
“तुम मुझे अजीब से क्यों देख रहे हो आजकल? जैसे कोई पराया देखता है,” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी शरारत थी।
मैं चौंक गया। क्या वो जानती थी कि मैं उसे कैसे देखता हूँ? मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “क्या… क्या बकवास कर रही है? मैं तो ऐसे ही…”
“अच्छा छोड़ो,” वो हँसी और उठकर चली गई। लेकिन उसकी वो हँसी मेरे दिमाग़ में घुमती रही। क्या वो जानबूझकर मुझे तंग कर रही थी?
रात को जब हम अपने कमरे में सोने गए तो मैंने देखा कि प्रिया एक तरफ बिस्तर पर बैठी क्रीम लगा रही थी।
उसने नाइटी पहनी हुई थी जो घुटनों तक थी और उसके कंधे खुले थे।
वो अपने हाथों पर क्रीम लगा रही थी और फिर धीरे-धीरे उसने अपने पैरों पर भी लगाना शुरू किया।
वो अपने पैर उठाकर बैठी थी और नाइटी थोड़ा ऊपर सरक गई थी जिससे उसकी जाँघें दिख रही थीं।
मैंने तुरंत नज़रें हटा लीं और अपनी तरफ लेट गया। लेकिन मेरे मन में उसकी वो तस्वीर बनी रही।
कुछ देर बाद लाइट बंद हो गई और प्रिया बिस्तर पर आकर मेरे पास लेट गई।
हमारे बीच थोड़ी सी जगह थी लेकिन गर्मी के कारण हम दोनों के शरीर से पसीना आ रहा था।
“भैया, गर्मी बहुत लग रही है ना?” प्रिया ने धीरे से कहा।
“हाँ, पंखा तेज़ चल रहा है फिर भी,” मैंने कहा।
“मैं तो सोच रही थी कि… छोड़ो,” उसने आधी बात छोड़ दी।
“क्या सोच रही थी? बोलो ना,” मैंने पूछा।
“नहीं, तुम्हें बुरा लगेगा,” वो शरमा रही थी।
“अरे बोलो तो, अपनी भाई से क्या शर्माना,” मैंने कहा।
“मैं सोच रही थी कि अगर हम थोड़ा पास होकर सोएँ तो शायद हवा अच्छी लगे,” उसने धीरे से कहा।
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। क्या वो सच में यह कह रही थी? मैंने कहा, “ठीक है, आ जाओ थोड़ा पास।”
वो मेरी तरफ सरकी और अब उसका शरीर मेरे शरीर से सटा हुआ था।
उसकी नाइटी का कपड़ा इतना पतला था कि मुझे उसकी त्वचा की गर्मी महसूस हो रही थी।
उसके स्तन मेरी पीठ से टच हो रहे थे और मेरा लंड अपने आप खड़ा होने लगा।
मैंने सोचा कि अगर उसने महसूस किया तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी।
फिर हमने करवट बदली तो थोड़ी देर बाद प्रिया कसमसाने लगी।
“भैया, तुम्हारे शरीर में कुछ कड़ा-कड़ा लग रहा है मेरी गांड के पास,” प्रिया ने अचानक कहा।
मैं समझ गया कि उसे मेरा खड़ा लंड महसूस हो गया था।
मैं घबरा गया लेकिन प्रिया शांत थी। उसने कहा, “कोई बात नहीं, मुझे पता है यह क्या है। मैं समझ सकती हूँ।”
मैं चुप रहा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ।
“भैया, मैंने कॉलेज में लड़कों के बारे में बहुत कुछ सुना है। वो अपनी बहनों के बारे में भी गंदी-गंदी बातें करते हैं। क्या तुम भी मेरे बारे में ऐसी बातें सोचते हो?” उसने सीधे सवाल पूछ लिया।
मैंने मुड़कर उसकी तरफ देखा। अंधेरे में भी उसकी आँखें चमक रही थीं। मैंने हिम्मत करके कहा, “प्रिया, तुम अब बड़ी हो गई हो। तुम्हें देखकर कोई भी मर्द…”
“तो तुम्हें भी मज़ा आता है मुझे देखकर?” उसने पूछा।
“हाँ,” मैंने कबूल कर लिया।
वो कुछ देर चुप रही फिर बोली, “मुझे भी मज़ा आता है जब तुम मुझे घूरते हो। मुझे लगता है कि मैं किसी औरत से कम नहीं हूँ।”
यह सुनकर मेरे होश उड़ गए। क्या मेरी बहन भी मुझे चाहती थी? मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, “प्रिया, यह गलत है। हम भाई-बहन हैं।”
“तो क्या हुआ? दीदी की शादी के बाद तो हम अलग-अलग हो जाएँगे। कौन देखेगा हमें? और वैसे भी, मैंने सुना है कि पहली बार अपने ही घर में किसी अपने से हो तो दर्द कम होता है,” उसने कहा।
मेरा लंड तनकर एकदम लोहे की रॉड बन गया था।
मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर किस कर दिया।
वो भी पूरा साथ दे रही थी। हम दोनों एक-दूसरे के होंठ चूसने लगे।
मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली और उसकी जीभ से खेलने लगा। वो भी मेरी जीभ को चूस रही थी।
मैंने उसकी नाइटी ऊपर उठानी शुरू की और उसने भी मेरे शॉर्ट्स नीचे कर दिए।
मेरा लंड बाहर निकल आया और उसने अपने हाथ से पकड़ लिया।
वो उसे सहला रही थी और मैं उसके बूब्स दबा रहा था।
उसकी नाइटी मैंने उतार दी और अब वो सिर्फ़ पैंटी में थी। मैंने भी अपनी बनियान उतार दी।
हम दोनों एक-दूसरे के शरीर को चूमने लगे। मैंने उसके गले पर, कंधों पर, स्तनों पर चूमना शुरू किया।
उसके स्तन इतने नरम और गोल थे कि मुझे उन्हें छोड़ने का मन नहीं कर रहा था।
मैं एक स्तन को मसल रहा था और दूसरे को चूस रहा था। उसके निपल्स कड़े हो गए थे जिन्हें मैं अपने दाँतों से काट-काट कर खेल रहा था।
“आहह भैया… धीरे… दर्द हो रहा है,” वो सिसकी।
मैंने धीरे-धीरे उसकी पैंटी भी उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ़ थी, थोड़ी सी झाँटें थीं लेकिन गुलाबी और चिकनी।
मैंने उसकी जाँघों पर चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ा।
उसकी चूत से एक अजीब सी खुशबू आ रही थी जो मुझे पागल कर रही थी।
मैंने उसकी चूत पर जीभ लगाई तो वो काँप उठी। “ओह माँ… यह क्या कर रहे हो… आहह…” वो चीखी।
मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। उसकी चूत इतनी रसीली थी कि मुझे लगा जैसे मैं किसी फल को चाट रहा हूँ।
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार में डाली और अंदर-बाहर करने लगा।
वो पागल हो रही थी, उसने बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया और अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे मुँह पर दबाने लगी।
“आहह भैया… और ज़ोर से चाटो… मैं झड़ने वाली हूँ… आहह हम्म्म…” वो कराह रही थी।
मैंने उसकी क्लिटोरिस को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू किया और साथ में दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं।
वो तड़प उठी और कुछ ही देर में झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकलकर मेरे मुँह में आ गया जिसे मैंने पी लिया।
अब प्रिया की बारी थी। उसने मुझे लिटाया और मेरे लंड को हाथ में लिया। वो उसे देख रही थी जैसे कोई खिलौना हो।
फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया। उसके मुँह की गर्मी मुझे पागल कर रही थी। वो इनिक्स्पीरिअन्स थी लेकिन फिर भी अच्छा कर रही थी।
वो लंड को चूस रही थी और कभी-कभी ऊपर की त्वचा को नीचे करके गुलाबी सिरे को चाटती।
“आहह प्रिया… तुम बहुत अच्छा कर रही हो… और ज़ोर से चूसो…” मैं कराहा।
लगभग बीस मिनट तक मुँह चुदाई के बाद मैंने उसे रोकते हुए कहा, “अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”
वो थोड़ी डरी हुई लगी लेकिन तैयार थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैरों को फैलाया। मैंने अपने लंड का सुपड़ा उसकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। सुपड़ा अंदर चला गया लेकिन वो दर्द से कराह उठी।
“दर्द हो रहा है?” मैंने पूछा।
“थोड़ा… लेकिन चोदो… मुझे सहना है,” उसने कहा।
मैंने उसके होंठ चूमे और एक ज़ोरदार धक्का दिया।
आधा लंड अंदर घुस गया। उसकी आँखों से आँसू निकल आए और वो दर्द से चीखी लेकिन मुझे रोकने की कोशिश नहीं की।
मैं थोड़ी देर वहीं रुका, फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।
कुछ देर बाद उसे मज़ा आने लगा। वो भी अपनी कमर उठा-उठाकर साथ देने लगी। “और ज़ोर से… हाँ… ऐसे ही… चोदो मुझे…” वो चिल्लाने लगी।
मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रखा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।
पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा। उसके स्तन उछल-उछल कर नाच रहे थे, मैंने उन्हें बीच-बीच में मसलना और काटना जारी रखा।
“मैं झड़ने वाला हूँ…” मैंने कहा।
“अंदर ही डाल दो… आज मेरा सेफ़ दिन है…” उसने कहा।
मैंने कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए और फिर अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया।
वो भी मेरे साथ झड़ गई। हम दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे।
अगली सुबह जब मैं उठा तो प्रिया पहले ही उठ चुकी थी।
वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी। “कैसा लगा भैया? पहली बार किसी लड़की को चोदकर?” उसने पूछा।
“तुम्हारी चूत बहुत मस्त है प्रिया। मज़ा आ गया,” मैंने कहा।
“आज रात फिर करेंगे?” उसने पूछा।
“हाँ, लेकिन दिन में भी मौका मिले तो…” मैंने कहा।
वो शरमा गई और कमरे से बाहर चली गई।
दिन में घर में बहुत व्यस्तता थी। शादी की तैयारियाँ ज़ोरों पर थीं।
दीदी के लिए गहने बनवाने थे, कपड़े सिलवाने थे, मेहमानों की व्यवस्था करनी थी।
मैं और प्रिया एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते लेकिन कोई मौका नहीं मिल रहा था अकेले में मिलने का।
शाम को जब सब नीचे बैठे थे तो प्रिया ने मुझे इशारे से ऊपर बुलाया। मैं समझ गया और पाँच मिनट बाद ऊपर गया। वो मेरे कमरे में इंतज़ार कर रही थी और उसने दरवाज़ा बंद कर लिया।
“जल्दी करो, कोई आ जाएगा,” उसने कहा।
मैंने उसे दीवार से सटाया और तुरंत उसके होंठों पर किस कर दिया।
उसने सलवार सूट पहना हुआ था जिसे मैंने जल्दी से खोलना शुरू कर दिया। उसने भी मेरे कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे हो गए।
मैंने उसे घुटनों और हाथों के बल झुकाया और पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया।
वो चीखी लेकिन मैंने उसका मुँह दबा लिया। मैं पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा। उसकी गांड थपथपा रही थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
“आहह भैया… धीरे… कोई सुन लेगा…” वो दबी आवाज़ में कराही।
मैंने उसके बाल पकड़े और और तेज़ चोदने लगा।
लगभब दस मिनट तक मैंने उसे इसी पोज़िशन में चोदा और फिर उसकी चूत में ही झड़ गया। हम दोनों जल्दी से कपड़े पहने और नीचे चले गए।
शादी का दिन आ गया। पूरा घर रोशनी से नहाया हुआ था।
दीदी की बिदाई का समय आ रहा था और घर में एक अजीब सी उदासी थी। लेकिन मेरे और प्रिया के बीच तो जैसे आग लगी हुई थी। हम दोनों बार-बार एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते।
रात को जब सब मेहमान चले गए और घर में सिर्फ़ परिवार वाले रह गए तो प्रिया ने मुझे इशारा किया।
हम दोनों छत पर गए जहाँ कोई नहीं था। छत पर ठंडी हवा चल रही थी और चाँद की रोशनी में प्रिया एकदम परी लग रही थी। उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो अभी-अभी उसने दीदी की शादी में पहनी थी।
“आज पूरी रात तुम मेरी हो,” मैंने उसे अपनी बाहों में भरते हुए कहा।
“हाँ भैया, आज मैं तुम्हें अपनी हर जगह दूँगी,” उसने शरारत से कहा।
मैंने उसे छत पर एक पुराने बिस्तर पर लिटाया जो गर्मियों में सोने के लिए रखा जाता था।
मैंने उसकी साड़ी खोलना शुरू की और उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। फिर मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए।
मैंने उसके पैरों को चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे ऊपर बढ़ा। उसकी जाँघों पर, फिर उसकी चूत पर।
मैंने उसकी चूत को फिर से चाटना शुरू किया। वो आहें भर रही थी।
फिर मैं उसके ऊपर आया और उसके स्तनों को चूसने लगा।
“भैया, आज मैं तुम्हें एक सरप्राइज़ देना चाहती हूँ,” उसने कहा।
“क्या?” मैंने पूछा।
“मैंने सुना है कि गांड मारने में बहुत मज़ा आता है। क्या तुम मेरी गांड मारोगे?” उसने शर्माते हुए कहा।
यह सुनकर मेरा लंड और भी तन गया। मैंने कहा, “पर वहाँ बहुत दर्द होता है।”
“मुझे सहना है। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी हर छेद को अपना बना लो,” उसने कहा।
मैंने उसे घुटनों और हाथों के बल झुकाया। उसकी गांड इतनी गोल और सुंदर थी।
मैंने थूक लगाकर उसकी गांड के छेद को चिकना किया और अपने लंड का सुपड़ा वहाँ रखा। धीरे से धक्का दिया लेकिन वो बहुत टाइट थी।
“आहह… दर्द हो रहा है… रुको…” वो चीखी।
मैंने रुककर उसकी पीठ सहलाई और फिर एक ज़ोरदार धक्का दिया।
मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। वो दर्द से रोने लगी लेकिन मैंने उसे पीछे से पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
“आहह भैया… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है… लेकिन मज़ा भी आ रहा है… और ज़ोर से चोदो…” वो चिल्ला रही थी।
मैंने उसे गांड में लगभग पंद्रह मिनट तक चोदा। उसकी गांड अब ढीली हो चुकी थी और वो मज़े ले रही थी। फिर मैंने लंड बाहर निकाला और उसे लिटाकर उसकी चूत में डाल दिया। अब मैं उसे मिशनरी पोज़िशन में चोद रहा था।
“आहह… भैया… दोनों जगह चोद रहे हो… मैं झड़ने वाली हूँ…” वो कराही।
मैंने और तेज़ धक्के लगाए और हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया।
उस रात हमने तीन बार और चुदाई की। एक बार बाथरूम में खड़े होकर, एक बार किचन में और फिर सुबह-सुबह जब सब सो रहे थे तब उसके कमरे में।
दीदी की बिदाई हो गई। घर में सन्नाटा पसर गया था। माँ-पापा उदास थे।
लेकिन मेरे और प्रिया के बीच अब एक अजीब सा रिश्ता बन गया था। हम अब सिर्फ़ भाई-बहन नहीं थे, बल्कि प्रेमी भी थे।
एक हफ़्ते बाद प्रिया की भी शादी तय हो गई।
उसके ससुराल वाले उसे देखने आए और उन्हें प्रिया पसंद आ गई। मुझे बहुत दुख हुआ लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकता था।
रात को जब प्रिया जाने वाली थी, उसने मुझे अकेले में बुलाया।
“भैया, मैं तुमसे वादा करती हूँ कि जब भी मैं यहाँ आऊँगी, मैं तुम्हारी हो जाऊँगी। तुम मेरे पहले प्यार हो और हमेशा रहोगे,” उसने रोते हुए कहा।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर एक लंबा किस किया। “मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा प्रिया। तुम मेरी हो और हमेशा रहोगी,” मैंने कहा।
उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड बाहर निकालकर अपने मुँह में ले लिया।
यह उसकी विदाई का तोहफ़ा था। वो मुझे चूस रही थी और मैं उसके बालों को सहला रहा था। कुछ देर बाद मैंने उसके मुँह में ही झड़ दिया और उसने मेरा सारा वीर्य पी लिया।
प्रिया चली गई लेकिन उसकी यादें हमेशा मेरे साथ रहीं।
हम अब भी फोन पर सेक्स चैट करते हैं और जब भी मिलते हैं, हम एक-दूसरे को चोदने का मौका नहीं छोड़ते।
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice bhai 🙂 🙂
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