sahkarmi ladaki ne karai chudai kahani hindi
दोस्तो मैं मुंबई, महाराष्ट्र में एक मल्टीनेशनल कम्पनी में 5 साल से काम कर रहा हूँ। मुंबई जैसे ड्रीम सिटी में हर साल लाखों लड़के लड़कियां अपने करियर की तलाश में आते हैं।
मैं जिस कम्पनी में काम करता हूँ, उस कम्पनी का सारा स्टाफ मुझे बहुत पसंद करता है क्योंकि मैं सबकी मदद भी करता हूँ और देखने में भी मैं बहुत स्मार्ट हूँ। मेरा नाम राघव है।
मेरा कद 6 फुट का है और रंग एकदम गोरा है। मेरी बॉडी भी इतनी अच्छी है कि कोई भी लड़की एक बार तो मंत्रमुग्ध हो ही जाएगी।
मेरे चेहरे पर एक अलग ही निखार है और मेरी आँखें हरी हैं जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।
ये ऑफिस सेक्स स्टोरी आज से 3 साल पहले की है।
मेरे ऑफिस में कविता नाम की लड़की आई। कविता के बारे में आप लोगों को सीधे तौर पर बताऊं … तो कविता एक नम्बर की माल लौंडिया थी।
उसके बड़े बड़े मम्मों को हथेलियों से पूरा भर पाना बहुत मुश्किल काम था।
वो 5 फीट 4 इंच के कद वाली एक डीजल माल थी। डीजल माल मैं उस लौंडिया को कहता हूँ जो कद में नाटी हो और भरे हुए शरीर की हो।
कविता ज्यादातर साड़ी पहनती थी।
उसकी उम्र 24 साल थी और वो मुंबई के एक अच्छे कॉलेज से MBA करके आई थी।
उसकी साड़ी में उसकी पीठ का कट बहुत सेक्सी लगता था और उसकी कमर इतनी पतली थी कि मन करता था बस पकड़कर खींच लूँ।
ऑफिस के काम के बारे में उसे ज्यादा जानकारी नहीं थी, तो मैंने उसकी काफी मदद की।
मैं तो वैसे ही सबकी मदद करने वाला बंदा था।
मैंने कविता को भी एक दोस्त की तरह माना और उसकी हर काम में उसकी बहुत मदद की।
उसे एक बार तो मैंने एक बड़े प्रोजेक्ट में फंसने से भी बचाया।
क्लाइंट ने उससे कुछ गलती से गलत डेटा माँग लिया था और वो भेजने वाली थी।
मैंने आखिरी वक्त पर चेक किया और उसे रोक लिया। वो मेरी इस बात से बड़ी खुश थी।
लेकिन मैं इस बात से बिल्कुल अंजान था कि वो मुझ पर इस तरह फिदा हो चुकी है कि वो कैसे भी करके मुझे पाना चाहेगी।
फिर एक दिन जब ऑफिस में हमारे बॉस नहीं थे, तो कविता मेरे पास आ गई। कविता मेरी टेबल पर अपनी कोहनियों को टिकाते हुए मुझे देखने लगी और बोली- यार राघव, मैं आपका एहसान कैसे चुकाऊं … मेरे लिए तो आपने मेरी रोजी रोटी सब कुछ बचाई है।
मैंने कहा- अरे कविता … आप मुझे क्यों शर्मिंदा कर रही हो।
पर उसकी आंखों में आंखें डालने पर मुझे सच में कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया।
मैंने कहा- कविता आप तो सैंटी हो गई हो। मैंने आप पर कोई एहसान नहीं किया है। मैंने जो भी किया अपनी कम्पनी की छवि बचाने और एक दोस्त का फर्ज निभाने के लिए ही किया है।
लेकिन मेरी तमाम दलीलों के बावजूद भी कविता नहीं मानी।
वो लगातार मेरी तारीफ पर तारीफ करती ही रही और मुझसे कोई भी ऐसा काम करने के लिए बोलती रही, जिससे वो मेरे अहसान से मुक्त हो सके।
आखिर मैंने उससे कहा- ओके अगर तुम मेरे एहसान का बदला चुकाना ही चाहती हो तो बस तुम मुझे एक डिनर पर ले चलो।
ऑफिस में सभी को मालूम था कि मैं बहुत बड़ा फूडी हूँ।
मैंने पहले भी कविता से इस तरह की बात की थी … जो कि मेरे लिए बिल्कुल आम बात थी।
मैंने कभी कभी ऑफिस में भी लंच में बाहर जाता था, जिसके बारे में कविता को पता था, लेकिन उसने कभी किसी से नहीं कहा था।
कविता ने थोड़ी देर में मुझसे कहा- ठीक है राघव, मैंने तुमसे वादा किया है … तो मैं अपना ये वादा जरूर निभाउंगी।
फिर शुक्रवार के दिन उसने मुझे फ़ोन किया और मेरे साथ डिनर करने की इच्छा जताई।
मुझे अकसर ऑफिस में देरी हो जाने के कारण में घर पहुंचने में कई बार देरी हो जाती थी।
लेकिन उस दिन मेरे पास कोई ज्यादा काम नहीं था।
मैं जल्दी घर जाकर मस्ती से इस शुक्रवार का मजा लेना चाहता था।
मगर आज कविता ने बोला तो मैंने हामी भर दी।
कविता ने कहा- अगर तुम चाहो तो हम दोनों किसी अच्छे रेस्टोरेंट में डिनर करने चल सकते हैं।
लेकिन ऑफिस से रेस्टोरेंट काफी दूर होने के कारण मैंने कविता को मेरे साथ ऑफिस के पास के एक होटल में ही डिनर करने का प्रस्ताव दिया।
जिसे उसने मेरे कहने पर तुरन्त मान लिया।
हालांकि ऑफिस के पास होटल में जाने की उसकी हामी भर देना मुझे थोड़ा अजीब सा लगा।
मैंने उससे होटल में जाने की बात केवल टालने के लिए कही थी। मगर वो एकदम से मान गई थी।
आम तौर पर कोई भी लड़की अपने कलीग के साथ होटल में इस तरह इतनी जल्दी जाने के लिए नहीं मानती। लेकिन कविता ने झट से मान लिया था।
मैंने उसकी आंखों में देखा, तो वो बड़ी लालसा से मेरी तरफ देख रही थी।
मैं उसकी आंखों को देख कर अब भी ये न समझ सका था कि कविता क्या चाहती है।
शाम को जैसे ही 07.00 बजे, तो उसका मैसेज आ गया कि चलो होटल चलते हैं, मैं पे कर दूंगी।
उसकी बात सुनकर मैं तैयार हो गया।
हम दोनों ऑफिस से निकले और पास के एक 5 स्टार होटल में चले गए।
जब हम होटल पहुंचे … तो कविता ने रिसेप्शन पर जाकर एक रूम बुक कर लिया।
मैं थोड़ा हैरान हुआ लेकिन कुछ बोला नहीं।
थोड़ी देर में हम दोनों रूम में चले गए और दरवाजा बंद कर लिया।
रूम बहुत लग्जरी था और एक बड़ा बेड बीच में लगा हुआ था।
हम दोनों आमने सामने बैठ गए और कविता ने फोन पर ऑर्डर कर दिया।
30 मिनट में हमारा डिनर आ गया। हमने साथ में खाना खाया और वाइन ऑर्डर की।
कविता ने वाइन का बोतल खोला और दो ग्लास भरे। हम दोनों ने चियर्स की और पीना चालू कर दिया।
हम दोनों वाइन के गिलासों को होंठों से लगाए हुए धीरे धीरे सिप लेते हुए एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे।
मैं उसकी तारीफ़ कर रहा था और वो मेरी। हम दोनों एक दूसरे की खूबसूरती की तारीफ करते हुए वाइन का मजा ले रहे थे।
कविता धीरे धीरे पी रही थी। उसके 3 गिलास वाइन हुए थे और मैं 5 गिलास फिनिश कर चुका था। मैं तो पीने का आदी हो गया हूँ।
हम दोनों फुल मस्ती में थे और आपस में हंसी मजाक कर रहे थे।
मुझे शराब जल्दी असर नहीं करती है। मगर ये सीन कविता के साथ नहीं था। उसे शराब का नशा चढ़ गया था।
और तभी पता नहीं उसको क्या हुआ, वह अपनी सीट से उठ कर मेरी गोद में आकर कुछ इस तरह से बैठ गई कि उसके दोनों स्तन मेरे सीने को छूने लगे थे।
उसकी साड़ी का पल्लू गिर गया था और उसकी क्लीवेज साफ दिख रही थी।
पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि कविता मुझसे चुदने के मूड में आ गई है। मैंने कविता को खींच कर उसके गुलाबी होंठों पर किस कर लिया।
कविता ने भी मेरा साथ दिया, तो हम दोनों चूमा चाटी में लग गए।
उसके होंठ बहुत नरम थे और उसकी साँसें गर्म हो रही थीं। मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ कर उसको उठा लिया। वो भी मेरी कमर से अपने दोनों पैर बांध कर लटक गई।
मैंने उसे बेड पर बिठाया और उसकी साड़ी खींच कर एक झटके में खोल दी। वो नीचे बेड पर बैठी थी और मैं उसके सामने खड़ा था।
मैं पहली बार इतना वाईल्ड हुआ था। पता नहीं … उस दिन मुझे कुछ ज्यादा नशा हो गया था।
फिर कविता की तरफ से तो पहले से ही मुझे खुला आमंत्रण था।
उसकी साड़ी खुलते ही मेरे सामने एक गुलाबी ब्लाउज और पेटीकोट में कसे उसके मम्मे मुझे दीवाना बनाने लगे।
उसकी ब्रा का हुक पीछे से खुला हुआ था और उसके स्तन ऊपर को उभरे हुए थे। मैंने उसका ब्लाउज खोल दिया और उसकी ब्रा भी हटा दी। उसके मम्मों को पीना और काटना शुरू कर दिया।
मैं कुछ ज्यादा ही तेजी से उसके मम्मों को काटता हुआ चूस रहा था। उसके स्तन 36 इंच के थे और बहुत मुलायम।
मैं उनमें अपना चेहरा गाड़ देता था और वो मेरे बालों में हाथ फेरती थी।
उसे दर्द ही रहा था मगर तब भी कविता ने चुपचाप सब कुछ होने दिया।
कविता नशे में इस दर्द को भी एन्जॉय कर रही थी। उसे भी अच्छा लगने लगा था। अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था। फिर भी मैं उसको मीठा दर्द दिए जा रहा था।
अब मैंने उसका हाथ अपने औजार पर रख दिया। उसको भी मेरे लंड को पकड़ने का मन था।
उसने भी लंड को सहलाया और धीरे से नीचे झुक कर मेरी पैंट खोलकर लंड बाहर निकाल लिया।
मेरा लंड 8 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा था। वो एकदम सख्त होकर खड़ा था।
वो मेरी आंखों में वासना से देखने लगी तो मैंने उसे हल्का से इशारा किया। वो समझ गई और झुक कर लौड़े को चूसने लगी।
आह … एक तरफ तो वाइन का नशा और दूसरी तरफ कविता की जवानी मेरे लंड को चूस रही थी।
मैंने अपनी शर्ट उतार दी और पूरा नंगा होकर मजा लेने लगा। उसने मेरे लंड को पूरा मुँह में ले लिया था और जीभ से उसे चाट रही थी। मेरे लंड का सिरा उसके गले तक जा रहा था।
कुछ ही समय बाद मैं बेड पर ही लेट गया और नशे में लंड चुसाई का मजा लेने लगा।
मेरी आंखें मस्ती में बंद हो गई थीं और मैं कुछ बेहोश सा हो गया था।
कुछ देर बाद लंड चुसाई का अहसास खत्म हुआ और कुछ अलग सी गर्मी मिली।
तो मैंने आंखें खोल कर देखा कि कविता पूरी तरह से नंगी होकर मेरे लंड को अपनी चुत में लेकर मेरे ऊपर बैठने की कोशिश कर रही थी। वो नशे में थी और उसकी चुत में लंड घुस नहीं रहा था।
मैंने हाथ से लंड को सैट किया और वो मेरे लौड़े पर चुत पेलती हुई धच्छ से बैठ गई। लंड चुत के रगड़ से हम दोनों के मुँह से आह निकल गई।
उसकी चुत बहुत गीली और तंग थी। मेरा लंड उसमें पूरी तरह फंस गया था।
एक दो बार ऊपर नीचे होकर कविता ने पूरा लंड चुत में ले लिया था और अब वो जोरों से मेरा लंड चुत की जड़ तक ले रही थी।
वो मेरे ऊपर उछल उछल कर अपनी चुत मेरे लंड पर पेल रही थी।
मुझे बहुत मजा आने लगा तो मैंने भी कविता को पकड़ कर उसकी धकापेल चुदाई चालू कर दी।
मैं नीचे से भी धक्के मारने लगा था। हम दोनों की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
कुछ देर बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया। वो डॉगी स्टाइल में थी और मैं उसके पीछे था। मैंने अपना लंड उसकी चुत में एक ही धक्के में पूरा डाल दिया।
वो चुत में लंड लेकर एकदम से बिलबिला उठी। मगर मैंने पूरा लौड़ा चुत में अन्दर तक पेल दिया।
उसकी गांड बहुत गोल और मुलायम थी। मैंने उसकी कमर पकड़ी और जोर जोर से धक्के मारने लगा।
अब मैं उसको कुत्ते की तरह जोर जोर से चोदने लगा। वो भी कुतिया सी बिलबिलाती हुई लंड अन्दर ले रही थी। फच फच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
कविता को भी मजा आने लगा।
वो बोली- क्या यार राघव, आप तो बहुत जोर से पेल रहे हो … मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आपके साथ पहली बार में ही इतना ओपनली सेक्स करवा लूंगी।
मैंने भी लंड पेलते हुए कहा- अब बस चुदने का मजा ले लो कविता रानी। तुम्हारी चुत बहुत टाइट है।
ये कहकर मैंने अपने झटके और तेज कर दिए और कविता मस्ती में चिल्ला चिल्ला कर मेरा लंड लेने लगी।
उसके स्तन हर धक्के पर आगे पीछे हिल रहे थे।
उस समय होटल के रूम में हमारी मस्ती भरी आवाजों को सुनने वाला कोई नहीं था।
मैंने उसकी कमर पकड़ी और और तेज से पेलना शुरू कर दिया। मेरे कूल्हे उसकी गांड से टकरा रहे थे।
20 मिनट बाद वो मुझसे छोड़ने को कहने लगी, लेकिन अब मेरे ऊपर एक दूसरा नशा चढ़ गया था और वो था कविता की चुदाई का नशा। मैंने कहा- रुको अभी तो मजा आया है।
मैंने उसे पलटा दिया और मिशनरी पोजीशन में उसकी टाँगें फैला दीं।
उसकी चुत अब पूरी तरह लाल हो गई थी और गीली थी।
मैंने अपना लंड फिर से उसकी चुत में डाल दिया और तेजी से धक्के मारने लगा।
कविता की साँसें तेज हो गई थीं और वो बार बार अपनी आँखें बंद करके मजा ले रही थी।
मैंने उसके स्तनों को भी दबाना शुरू कर दिया और उसके निपल्स को चुटकी से पकड़कर खींचता था।
उसकी चुत से पच पच की आवाजें आ रही थीं और मेरा लंड पूरी तरह गीला हो चुका था।
मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और अब मैं 2 सेकंड में 3 धक्के मार रहा था।
कविता बोली- आह राघव … और जोर से … फाड़ दो मेरी चुत … आह … मजा आ रहा है … और तेज …
मैंने उसकी बात सुनी और और जोर से पेलने लगा।
मेरे कूल्हे तेजी से आगे पीछे हो रहे थे और मेरा लंड उसकी चुत की गहराई में जा रहा था।
करीब 30 मिनट तक मैंने उसे इसी तरह चोदा और फिर मैं झड़ने वाला था। मैंने कहा- कविता मैं निकालने वाला हूँ।
वो बोली- अंदर ही निकाल दो … मैं सेफ हूँ …
मैंने एक जोरदार धक्का मारा और अपना सारा वीर्य उसकी चुत में छोड़ दिया।
मेरा लंड कांप रहा था और उसकी चुत भी सिकुड़ रही थी। हम दोनों एक साथ झड़ गए थे।
चुदाई के बाद हम दोनों स्खलित हो गए थे। नशे में होने के कारण कविता और मैं वहीं उसी नंगी हालत में बेड पर ही पड़े रहे।
जब सुबह मेरी नींद गहरी लगी हुई थी तो मेरे पास नंगी पड़ी कविता ने मेरे सीने पर किस किया और मुझको हिलाते हुए जगाया।
मैं जागा … तो उसने कहा- उठो यार, सुबह के 6 बज गए हैं और अब हमें अपने कपड़े पहन कर घर चलना चाहिए।
मैं उठा और जल्दी से अपने कपड़े पहने।
फिर हम दोनों चलने को रेडी हो गए।
हमने चेक आउट किया और मैंने बिल पे किया।
फिर हम दोनों अपने अपने घर को रवाना हो गए।
कविता के साथ होटल सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी।
इसके बाद कविता और मैंने कई बार ऑफिस में भी सेक्स किया।
एक बार तो हमने कॉन्फ्रेंस रूम में भी मजे किए जब सब लोग लंच ब्रेक पर गए थे।
वो अब मेरी गर्लफ्रेंड बन चुकी है और हम दोनों साथ में रहते हैं।
- अब्बू ने 9 इंच लंड से मेरी चूत फाड़ी
- दोस्त और उसकी मम्मी की चुदाई देखी
- लंड दिखा कर पड़ोसन लड़की को चोद दिया
- पड़ोसी आंटी की प्यासी चूत की हार्डकोर चुदाई
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