nude body x kahani
न्यूड बॉडी X कहानी में मैं अपने गाँव गया तो बड़ी चाची से मुलाक़ात हुई. वे मेरी देखभाल के लिए मेरे घर में ही रुक गयी. रात की बारिश में हम दोनों भीग गए तो …
ये न्यूड बॉडी X कहानी कुछ दिनों पहले होली के बाद की है.
मैं अपने गांव गया था कुछ काम से, अकेले ही बाइक लेकर.
सुबह निकला तो दोपहर तक पहुंच गया.
गांव का घर मेरा बहुत बड़ा है, पर वहां कोई रहता नहीं है.
मेरे बड़े दादाजी के घर पर मेरे घर की चाबी रहती है.
वहीं के लोग मेरे घर की साफ सफाई और अन्य दूसरी चीजों का ध्यान रखते हैं.
मेरे बड़े दादा के दो बेटे हैं. वे दोनों चाचा मुंबई में जॉब करते हैं. पर उनकी पत्नियां यानि कि मेरी दोनों चाचियां यहीं गांव में रहती हैं. बड़े चाचा का कोई बच्चा नहीं है और छोटे वाले के दो बेटे और एक बेटी है.
मैं गांव दोपहर में पहुंच गया, तो चाबी लेने बड़े दादा के घर गया.
वहां पर सिर्फ उनके बच्चे थे घर में.
मैंने पूछा तो बच्चों ने बताया कि दोनों मेरी चाचियां खेत में गई थीं.
तो मैंने चाबी ली और अपना घर आ गया.
बड़े दादा अपने संगी साथियों के साथ तीरथ करने गए हुए थे.
मैं अपने घर को खोल कर अन्दर गया तो सब सफाई की हुई थी.
चूंकि चाची को मेरे आने की खबर थी तो उन्होंने मेरे वाले घर को और भी सही से व्यवस्थित करवा दिया था.
मैं अपने कमरे में गया और लेट गया.
मुझे गांव में 15 दिन रहना था क्योंकि खेत का कुछ काम करवाना था.
मैं बहुत सालों बाद गांव गया था.
मुझे अपने बचपन की सभी बातें याद आने लगीं.
पहले मैंने अपना पूरा घर घूमा.
फिर सुसु लगी थी मुझे, तो बाथरूम जा ही रहा था कि याद आया कि पहले तो मैं घर के पीछे जाकर सुसु करता था.
सोचा कि चलो आज भी वहीं जाकर करता हूँ.
मैं पीछे के गेट से गया और जहां बचपन में सुसु करता था, वह मेरे और बड़े दादा के घर के बीच का हिस्सा था.
सबको पता होगा कि गांव में घरों के पीछे भी कमरे होते थे और अमूमन सभी के यहां एक हैंडपंप लगा रहता था.
वह कमरा कभी किसी मेहमान के लिए आराम करने के लिए हुआ करता था और सभी की जरूरत के लिए पानी का हैंडपंप लगा था.
मेरे घर के पीछे मेरा खेत भी था, उधर पर अब सभी के खेतों की मेड़ बना दी गई थी.
उधर ही एक छोटी-सी जगह थी, जहां मैं सुसु करता था. मैं वहां गया और सुसु करने के लिए बैठने लगा.
तभी अचानक दूसरी तरफ से खेत से एक औरत अचानक मेरे एकदम सामने आ गई.
मैंने डर से सुसु रोक दिया, पर वह औरत मेरे लंड को देख रही थी और मुझे देख रही थी.
फिर वह बोली- ये क्या कर रहा है यहां? ये कोई जगह है पेशाब करने की? ये रास्ता है और तू ययां सुसु कर रहा है!
मैंने लंड अन्दर करते हुए कहा- मुझे नहीं पता था. मैं बचपन में यहीं सुसु करता था, तो मुझे लगा आज भी वैसा ही है.
यह कह मैंने उनको सॉरी बोला.
तो वह औरत हंसने लगी.
मैं पीछे को हुआ तो वह मेरी तरफ आई और पूछने लगी- तू विराट है ना?
मैंने हां बोला और पूछा- आप कौन हो?
तो वह बोली- मुझे नहीं पहचान रहा? मैं तेरी बड़ी चाची हूँ … भूल गया इतनी जल्दी?
मैंने कहा- अरे हां चाची, कैसी हो आप?
उनको लेकर मेरे मन में सम्मान का भाव आ गया था.
वे जवाब देती हुई बोलीं- ठीक हूँ तू कैसा है? और कब आया? और कौन-कौन आया है?
मैंने कहा- बस अभी आ ही रहा हूँ और अकेले आया हूँ. खेत में काम था. आप लोग ही तो बुलाए थे.
वे बोलीं- हां, अरे तुम्हारे दोनों चाचा तो हैं नहीं और तेरे दादा भी नहीं हैं … वे तीरथ करने गए हैं … तो एक आदमी की जरूरत थी ही. चल, आ गया तू. अब सब हो जाएगा. पहले घर चल … कुछ खाया तूने?
मैंने कहा- नहीं.
तो वे बोलीं- चल, खाना बना रखा है. मुझे भी भूख लगी है, साथ में खाते हैं.
फिर वे आगे चलने लगीं और मैं पीछे.
चाची पसीने में भीगी हुई थीं.
उनके बदन से पसीने की महक आ रही थी.
उनकी गांड बहुत बड़ी थी. उनका नाम शोभा था और फिगर मुझे लगता है कि 36-34-38 के जैसा ही कुछ था.
बहुत बड़े स्तन थे उनके … और ढीले नहीं होते गांव की औरतों के … क्योंकि खेत में काम करती रहती हैं.
घर गए तो चाची हाथ-मुँह धोकर खाना ले आईं.
फिर हम दोनों बैठकर खाने लगे.
मैंने पूछा- छोटी चाची कहां हैं?
तो उन्होंने बोला- वह खेत में ही काम करवा रही है. आएगी थोड़ी देर में.
उनके बच्चे सो गए थे.
फिर वे मेरे घर के बारे में, पढ़ाई के बारे में और सब कुछ पूछने लगीं.
खाना खत्म हुआ तो मैं बोला- चाची, अब मैं जाता हूँ घर में … नींद आ रही है. बाइक से आया हूँ ना, थक गया हूँ.
तो वे बोलीं- हां ठीक है, चला जा. शाम को खेत में चलेंगे.
फिर मैं जाकर गेट बंद करके सो गया.
शाम को गेट बजा.
मैं बहुत देर बाद उठा, गेट खोला तो चाची खड़ी थीं.
वे बोलीं- कब से गेट बजा रही हूँ, कैसा सोता है? अब से गेट खुला रखना, यहां कोई आता-जाता नहीं है.
मैंने कहा- ठीक है.
वे बोलीं- चल, खेत चलना है.
मैंने टी-शर्ट डाली और उनके पीछे-पीछे चलने लगा.
वे बताने लगीं- ये हमारा खेत है. इसमें ये फसल है.
उन्होंने सब बताया और वहीं छोटी चाची थीं. उधर एक छोटी-सी बैठने की जगह थी. वहीं बैठकर छोटी चाची काम देख रही थीं.
वे मुझे देखकर बोलीं- विराट?
मैंने हां बोला.
उन चाची का नाम हेमा था.
वे बोलीं- तू तो बहुत बड़ा हो गया है!
मैंने कहा- बड़े होने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं था चाची!
इस बात पर हम सब हंस पड़े.
फिर शोभा चाची बोलीं- चल, तुझे और घुमा देती हूँ.
ऐसे ही घूमते-घूमते रात के 8 बज गए.
मैं फोन की फ्लैश लाइट से चल रहा था और चाची ऐसे ही आगे-आगे चली जा रही थीं.
फिर हम सब घर आ पहुंचे.
छोटी चाची ने खाना बना दिया था, हमने हाथ-मुँह धोकर खाना खाया.
फिर मैं सोने के लिए अपने घर आ गया.
मैं घर के बीच वाले आंगन में सोया था.
रात को लगभग 10 बजे बड़ी चाची आईं.
वे बोली- मैं भी यहीं सोऊंगी, क्योंकि ऊपर छत पर गेहूँ सूखने डाला है और मौसम बारिश जैसा लग रहा है.
तो मैंने उनके लिए भी एक अलग से बिस्तर अपनी साइड में ही लगा दिया.
फिर हम सो गए.
रात के एक बजे बहुत तेज़ आंधी आई.
हम दोनों उठे.
मैं बेडरूम में जाने लगा और चाची छत पर भागीं और गेहूँ उठाने लगीं.
बारिश भी अचानक से बहुत तेज़ होने लगी.
मैं भी छत पर भागा और मदद करने लगा.
छत पर एक छोटा सा कमरा बना था.
उसी में गेहूँ हम दोनों ने जल्दी-जल्दी डाल दिया.
इतना सब करने में हम दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे.
हमने छत वाले कमरे का गेट बंद किया और जल्दी-जल्दी नीचे भागने लगे.
मैं आगे था और चाची मेरे पीछे. सीढ़ियों पर भी पानी आ रहा था.
तभी चाची का पैर फिसला और वे सीधी मेरी पीठ पर गिर पड़ीं.
उनके एकदम से गिरने से मैं भी गिरने वाला था, पर मैंने दीवार पकड़ ली.
चाची के बड़े भीगे हुए दूध मेरी पीठ पर लगे, तो अजीब-सा मजा आ गया.
मैंने चाची से पूछा- आप ठीक हो? चोट तो नहीं लगी?
उन्होंने बोला- नहीं!
फिर हम दोनों नीचे आए और कमरे में चले गए.
मैंने फोन का फ्लैश ऑन किया और बिस्तर पर रख दिया.
तभी चाची बोलीं- बाबू, तू तो पूरा भीग गया है!
मैंने कहा- आप भी तो पूरी भीग गई हो.
उनके पूरे बदन से साड़ी चिपकी हुई थी. दूध से पानी टपक रहा था.
उन्होंने मेरी टांगों के बीच में देखते हुए कहा- जल्दी से कपड़े बदल ले, सर्दी लग जाएगी.
मैंने कहा- चाची, बैग तो अन्दर वाले कमरे में है. यहां कुछ भी नहीं है. आप भी बदल लो, आपको भी सर्दी लगेगी.
उन्होंने बोला- बाबू, मेरे कपड़े यहां कहां से? वह तो मेरे घर पर हैं.
थोड़ी देर सोचने के बाद चाची बोलीं- एक काम कर, तू सब कपड़े खोल ले और बिस्तर पर जाकर सो जा.
मैंने पूछा- और आप?
तो वे बोलीं- तू अपने तो उतार पहले!
मैंने वैसा ही किया, पर अंडरवियर नहीं खोला.
चाची बोलीं- ये चड्डी भी खोल दे, भीग गई है.
मैंने कहा- चाची, मुझे शर्म आ रही है.
तो चाची बोलीं- तुझे बचपन से नंगा देखा है, शर्म क्यों? इसे उतार दो.
मैंने मना किया.
तो चाची पास आईं और बिना कुछ बोले चड्डी खोल दी.
चड्डी खुलते ही मेरा लंड खड़ा था और उनके मुँह के एकदम सामने निकल कर हिलने लगा.
चाची लंड देख कर एकदम से डर गईं और पीछे की तरफ गिर गईं.
मैं शर्मा गया, लंड छिपाते हुए बिस्तर पर आ गया और लाइट बंद कर दी.
चाची नीचे बैठकर अभी भी हंस रही थीं. फिर बोलीं- अच्छा, मैं भूल गई थी कि तेरा बड़ा हो गया है मतलब तू अब बड़ा हो गया है!
चाची फिर खड़ी हुईं और बोलीं- अरे, लाइट तो दिखा, मैं कैसे कपड़े बदलूँ?
मैंने फ्लैश लाइट जलाई और उनका फोन दे दिया.
फिर मैं बिस्तर पर लेट गया.
बिस्तर पुराने समय वाला पलंग था, जिसमें कई बड़े-बड़े होल डिज़ाइन में बने थे.
मैं उसी होल से चाची को देखने लगा.
चाची एक-एक करके सारे कपड़े उतार रही थीं. उन्होंने ब्लाउज खोला तो सफेद ब्रा में 2-2 किलो के स्तन थे.
उनकी ब्रा छोटी थी और बूब्स बाहर आने को बेचैन थे.
पेटीकोट खोला तो काली पैंटी में वे साउथ की किसी बहुत हॉट माल जैसी लग रही थीं.
चाची को कोई नहीं बोल सकता था कि वे अभी 40 की थीं.
खेतों में काम करने से उनका पूरा शरीर का फिगर अच्छे से मेंटेन था.
चाची एक बार बिस्तर के पास आकर चेक करने लगीं कि मैं सो रहा हूँ या नहीं.
फिर पीछे होकर उन्होंने ब्रा भी उतार दी.
जब वे पैंटी खोलने के लिए झुकीं तो उनकी बड़ी सी 38 इंच वाली गांड दिखाई दी साथ ही उनके 36B के बूब्स पके हुए आम की तरह लटक गए.
फिर वे फ्लैश लाइट लेकर कपड़े दूसरे कमरे में सुखाने डालने चली गईं.
मैं भी चुपके से पीछे-पीछे चला गया और अंधेरे में उनको करीब से देखने लगा.
दिल धक-धक कर रहा था और लंड पूरा रॉड जैसा हो गया था.
मेरा दिल कर रहा था कि जब वे झुक रही हैं तो उनकी गांड में जाकर लंड डाल दूं.
सारे कपड़े डालकर वह वापस आने को हुईं तो मैं भागकर बिस्तर पर जाकर सो गया.
फिर चाची आईं और पलंग के पीछे से फोन देकर बोलीं- लो इसकी लाइट बंद करो.
मैंने लाइट बंद कर दी.
अब वे बोलीं- साइड हो, कोने में को हो जा तू … इधर मुझे सोने दे.
मैं साइड हो गया. पूरा अंधेरा था, कुछ भी दिख नहीं रहा था.
एक घंटे बाद मुझे लगा कि चाची सो गई हैं, तो मैं फोन की लाइट से उनका पूरा बदन देखने लगा.
मेरा मन कर रहा था कि उन्हें छू लूं, पर डर भी लग रहा था. बहुत देर तक ऐसे ही देखता रहा और लंड हिलाता रहा.
मैंने अपनी लंड उनकी गांड के पास रख दिया. उनके बदन के हिलने से लंड हिला और उनकी गांड को लग गया.
मैं डर के आंखें बंद कर ली.
फिर चाची की नींद खुल गई.
उन्होंने पीछे देखा और फिर मेरी तरफ मुँह करके सो गईं.
मेरी गांड फट रही थी.
मैं हिल भी नहीं रहा था.
बहुत देर बाद मैं थोड़ा उनके पास सरका, तो चाची थोड़ी दूर हो गईं.
रात के करीब 3 बजे होंगे.
बारिश फिर शुरू हो गई और ठंड बढ़ गई.
मुझे ठंड लगने लगी और मैं थोड़ा कांपने लगा.
फिर चाची उठीं और थोड़ी देर बाद पूछा- विराट, ठंड लग रही है क्या?
मैंने कोई जवाब नहीं दिया. फिर उन्होंने अपने हाथ से मुझे हिलाकर दुबारा पूछा.
मैंने हां बोला.
तो उन्होंने बोला- रुक, चादर देखती हूँ.
पर वहां कुछ भी नहीं था.
फिर वे बोलीं- यहां तो कुछ भी नहीं है.
मैंने कहा- कोई ना, रहने दो चाची.
वे बोलीं- नहीं, तेरी तबीयत खराब हो जाएगी बच्चे. रुक, तू कुछ देखती हूँ मैं!
वह बाहर ऐसी ही नंगी गईं.
वहां कमरे में देखकर वापस आईं, लेकिन कुछ नहीं मिला.
मैंने कहा- छोड़ दो चाची. 3:30 हो गए हैं, थोड़ी देर और फिर सुबह हो जाएगी.
चाची से रहा नहीं गया और वे बिस्तर पर आकर बोलीं- सुन, तेरी तबीयत खराब नहीं होने दूंगी इधर आ तो पास मेरे!
मैंने कहा- कोई ना चाची.
मुझे अपनी तरफ से खींचकर उन्होंने अपने नंगे बदन से लिपटा लिया. न्यूड बॉडी X के कारण उनके दूध मेरे मुँह में थे, लंड उनकी चूत से लगा हुआ था और लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा.
मैं नियंत्रण कर रहा था कि ना हो, पर संभव नहीं था
चाची ने पूछा- अब ठंड लग रही है?
मैंने कहा- नहीं.
फिर मैंने सोचा कि लंड खड़ा हो गया था और उनको ये अच्छा नहीं लगेगा तो बहुत बेकार लगेगा.
इस प्रकार मैंने अपनी स्थिति बदल ली.
मैंने अपनी पीठ उनके चेहरे की तरफ कर ली और अब मेरा लंड पूरी तरह फ्री था.
चाची के स्तन मेरी पीठ पर बहुत बड़े-बड़े और कठोर महसूस हो रहे थे.
मुझ पर नियंत्रण नहीं हो रहा था और उनकी चूत के बाल मेरी गांड पर लग रहे थे.
चाची ने मुझे बहुत ज़ोर से पकड़ा था.
वे अभी भी मुझसे बच्चा ही समझ रही थीं.
चाची सो गई थीं और मुझे नींद नहीं आ रही थी.
थोड़ी देर बाद पता नहीं कैसे, चाची का हाथ मेरे पेट होते हुए लंड पर चला गया.
चाची ने लंड पकड़ लिया और दबाने लगीं.
मेरी गांड फट गई, समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ.
देखा तो चाची सो रही थीं.
वे मुझे चाहिए थीं.
उनकी सांसें मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थीं.
पर वे लंड दबा रही थीं.
मैंने उनका हाथ पकड़ा और लंड से हाथ हटाकर पेट पर रख दिया और सो गया.
सुबह उठा तो देखा चाची नहीं थीं और उनकी साड़ी मेरे शरीर पर थी.
शायद मुझे ठंड न लगे, इसलिए उन्होंने मेरे ऊपर डाल दी थी.
मैं उठा, अपने कपड़े देखे तो अभी भी भीगे हुए थे.
फिर भी मैंने पहनने के लिए उठाए और बाथरूम में आ गया.
मैं फ्रेश हुआ, नहाया और उन्हीं हल्के गीले कपड़ों को पहन कर बाइक से बाहर निकल गया.
मैं मार्केट गया और अंडरवियर, टी-शर्ट तथा एक ट्राउजर ले लिया.
वापस आया तो चाची मेरे घर आने का इंतज़ार कर रही थी.
वे बोलीं- कहां गया था?
मैंने बताया- कपड़े लेने एक्स्ट्रा.
वे गुस्से में बोलीं- बता कर नहीं जा सकता था? और नाश्ता भी नहीं किया टाइम देखा है … 12 बज गए हैं अभी तक भूखा है. खाना लाई हूँ, खा ले!
मैंने सॉरी बोला और खाना खाया.
चाची बोलीं- मैं दूसरे वाले घर जा रही हूँ. धूप आई हुई है, तो छत पर गेहूँ सुखाने जा रही हूँ.
फिर वे चली गईं.
मैंने भी खाना खत्म किया और मैं भी चला गया.
दोस्तो, चाची का मूड भांपना जरूरी था कि क्या वे मेरे साथ सेक्स करने के लिए राजी हैं भी या नहीं.
अगले अंक में आपको चाची की चुदाई की मदमस्त कर देने वाली सेक्स कहानी का मजा मिलेगा.
न्यूड बॉडी X कहानी का अगला भाग: गांव की चाची की चुदास मिटा दी- 2
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