गांव की चाची की चुदास मिटा दी- 2

garam chachi ki antarvasna

गरम चाची की अन्तर्वासना चरम पर थी. चाचा बाहर रहता था तो चाची को लंड की जरूरत थी. उन्होंने मेरा लंड देखा तो वे मुझसे चुदाई करवाने को लालायित होने लगी.

दोस्तो, मैं आपको अपनी चाची की चुदाई की कहानी सुना रहा था.

कहानी के पहले भाग
नंगी चाची के साथ मैं भी नंगा सोया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि वे चुदाई की आग से जल तो रही थीं लेकिन अभी उन्होंने खुद से ऐसा जाहिर नहीं किया था.

अब आगे गरम चाची की अन्तर्वासना:

मैं छत पर गया तो देखा कि चाची छत पर बैठकर गेहूँ को फैला रही थीं सूखने के लिए … और वहां मुझे उनके स्तन साफ़ दिख रहे थे.

वे कभी-कभी टांगें ज्यादा खोल दे रही थीं तो उनकी ब्लू पैंटी दिख रही थी.
ये नज़ारा देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था और चाची तेज धूप में मेहनत करने के कारण पूरी तरह से पसीने में भीग गई थीं.

रात की बारिश के बाद बहुत गर्मी हो गई थी.
उमस वाली गर्मी में धूप में बैठे-बैठे चाची पसीने से एकदम लथपथ हो गई थीं.

वे मुझे देख कर मुस्कुराने लगीं लेकिन उन्होंने अपने आप को सही करने की जरा सी भी कोशिश नहीं की.

कुछ देर बाद उनका काम खत्म हो गया और हम दोनों नीचे आ गए.
हम दोनों उसी कमरे में आ गए थे, जहां रात को सोए थे.

उस वक्त लाइट आ रही थी, तो मैंने पंखा चालू किया.
चाची बोलीं- जा जरा मेन गेट को बंद कर आ!

मैं गया और मेन गेट बंद करके वापस आ गया.

फिर चाची ने साड़ी खोल दी और ब्लाउज तथा पेटीकोट में ही बिस्तर पर बैठ गई थीं.
उन्होंने पेटीकोट को अपनी जांघों तक ऊपर उठा रखा था.

चाची- बहुत गर्मी है न विराट!

मैंने कुछ नहीं बोला तो वे बोलीं- तू भी टी-शर्ट उतार दे और पैंट भी … गर्मी में जान क्यों दे रहा है?
मैंने कहा- नहीं चाची, ठीक है.

तो वे हंसती हुई बोलीं- शर्मा क्यों रहा है? कल ही तो तुझे नंगा देखा है, खोल दे न … मैं भी तेरी तरह लड़का होती तो अब तक सब खोल देती!
मैंने भी हंसते हुए बोला- मैंने भी तो कल आपको नंगी देखा है ना … आप क्यों शर्मा रही हैं? खोल लो आप भी!

वे बोलीं- बदमाश हो गया है तू, मैं एक औरत हूँ. वह रात थी, तो तूने थोड़ा-बहुत देख लिया होगा … और मैं देख रही हूँ कि तू बहुत बड़ा हो गया है. तेरा सब बड़ा हो गया है.
यह कह कर चाची ज़ोर ज़ोर से हंसने लगीं.

चाची- अब तेरा तो हाथ में भी नहीं आता.
ये कहकर वे और भी ज़ोर से हंसने लगीं.
मैं भी हंसने लगा.

चाची- तेरी शादी करवानी पड़ेगी.

मैंने अपने सारे कपड़े खोल दिए और सिर्फ अंडरवियर में आ गया.
फिर बैठ गया.

मेरा लंड खड़ा था.
चाची के स्तन और जांघों को देखकर मुझे ठरक चढ़ रही थी.

चाची ने लंड देखा और फिर मुझे देखा.

फिर वे बोली- मैं आती हूँ पानी पीकर.

मैं भी पीछे-पीछे गया और देखा कि चाची ने सुसु करने के लिए पेटीकोट ऊपर किया और पैंटी नीचे कर ली.
फिर वे बैठकर सुसु करने लगीं.

उनकी गांड देखकर मेरा लंड पागल हो गया. मैंने लंड बाहर निकाल दिया और हिलाने लगा.

चाची की सुसु निकलना खत्म हो गई थी, पर वे अपनी चूत को सहला रही थीं शायद मेरा लंड याद करके.

कोई 5 मिनट तक हम दोनों अलग-अलग ऐसे ही करते रहे.

फिर चाची उठीं तो मैं भागकर कमरे में जाकर खड़े लंड के साथ ही झूठ-मूठ का चित अवस्था में सो गया.

चाची आईं और मेरा खड़ा लंड देखकर बेचैन हो गईं.

वे बस खड़ी होकर मेरे तनतनाए लौड़े को देखी जा रही थीं.
उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें.

फिर उन्होंने अपनी पैंटी नीचे से खींच कर निकाल दी और मेरे बगल में आकर सो गईं.
उस वक्त वे अपनी गांड मेरी तरफ करके लेटी थीं.

मैंने भी इंतज़ार किया कि थोड़ा समय हो जाए तो कुछ करूँ.

करीब 15 मिनट बाद चाची सो गई थीं तो मैंने अपना लंड चाची की गांड में लगा दिया.

चाची ने पीछे मुड़कर देखा.
मैंने आंखें बंद कर लीं.

बहुत देर तक देखने के बाद चाची को लगा कि मैं सोते हुए ऐसा कर रहा हूँ, तो वे सहज हो गईं.
फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने खुद ही अपनी गांड मेरे लंड से लगा दी.

मैं समझ गया कि अब चाची मेरी हो चुकी थीं.
मैंने उस समय कुछ नहीं किया.

चाची ने अपने हाथ से मेरे लंड को छूना शुरू कर दिया.
आगे से वे अपनी चूत सहला रही थीं और मेरी तरफ देख रही थी कि कहीं मैं जाग न जाऊं.

ऐसे ही चाची ने बहुत देर तक किया और फिर सो गईं.
फिर मैं भी सो गया.

शाम को उठा तो देखा कि चाची नहीं थीं.
मैंने भी कपड़े डाले और घर चला गया.

फिर मैंने बाइक ली और बाजार से कंडोम का बड़ा वाला पैकेट लाया.
अलग-अलग फ्लेवर वाले कंडोम थे.

मैंने पहले घर में कुछ कंडोम रखे और दूसरे घर में भी कुछ कंडोम रख दिए.

फिर छोटी चाची के बच्चे खाने के लिए आ गए.
मैं उनके साथ चला गया और देखा कि बड़ी चाची नहीं थीं.

मैंने पूछा तो छोटी चाची बोलीं कि वे खेत में हैं.
मैंने खाना खाया और खेत में चला गया.

वहां मैंने देखा लेकिन वहां कोई नहीं था.
मैं थोड़ी देर वहीं बैठा रहा और फिर दूसरे वाले घर में आ गया.

फिर मैंने दिल्ली वाली आंटी को कॉल किया और बातें करने लगा.
रात 11 बजे तक लगातार बातें होती रहीं, वीडियो कॉल भी की.

आंटी बहुत मिस कर रही थीं मुझे.
मैंने कॉल पर ही उन्हें हॉर्नी कर दिया.
आंटी गर्म होकर बोलने लगीं- जल्दी से वापस आ, मेरी चूत तेरे लंड के बिना मर रही है. आकर चोद दे ना मुझे … मेरी प्यासी चूत को छोड़ कर इतनी दूर क्यों चला गया है? आओ ना जल्दी, पूरा बदन मेरा तेरे जिस्म के लिए टूट रहा है … आओ ना, चोदो ना अपनी आंटी को!’

उक्त सेक्स कहानी को नीचे दी गई लिंक से पढ़ सकते हैं तथा इसके अलावा आप मेरी लिखी अन्य सेक्स कहानियों को भी पढ़ सकते हैं.
https://www.freesexkahani.com/antarvasna/horny-aunty-garam-kahani/

मैंने आंटी से कहा- आ रहा हूँ कुछ दिन में आ रहा हूँ मेरी प्यारी आंटी!
ऐसे ही बातें करके कॉल कट कर दी.

फिर मेरा गेट बजा.
मैंने गेट खोला तो बड़ी चाची थीं.

वे अन्दर आईं तो मैंने पूछा- कहां थी आप? आपको हर जगह ढूँढा मैंने!
चाची कुछ नहीं बोलीं और बिस्तर पर जाकर सो गईं.

मैं अपना फोन इस्तेमाल करने लगा.

थोड़ी देर बाद मुझे आवाज़ आने लगी, जैसे कोई दर्द में हो.
ध्यान से सुना तो चाची ही थीं. वे खुद अपना बदन दबा रही थी और ‘आह्ह … उफ्फ्फ … ऊह्ह … ’ कर रही थीं.
उनका पूरा बदन दर्द कर रहा था.

मैंने पूछा तो वे बोलीं- कुछ नहीं, थोड़ा बदन दर्द हो रहा है. तू जा, ये रोज़ का है मेरा!

मैं उठा और चाची के पास बैठ गया.
मैंने पूछा- कहां-कहां हो रहा है दर्द?

तो उन्होंने मना कर दिया और बोलीं- तू जा ना … इतनी फिक्र क्यों कर रहा है? ये मेरा रोज़ का है!
पर मैं नहीं माना.

फिर चाची ने बताया कि उनके हाथ, सर, पैर, कमर सब दर्द कर रहे थे.
मैंने कहा- रुको आप.

फिर मैं बाहर निकला और दूसरे घर से तेल लेकर आया.
मुझे आने-जाने में 10 मिनट लग गए.

चाची ने पूछा- कहां चला गया था?
मैंने बताया- तेल लाने.

तो वे हंसती हुई बोली- पागल लड़का, इतनी फिक्र क्यों कर रहा है? ठीक हूँ मैं!
मैंने कहा- बारिश वाली रात आपने मेरा ध्यान रखा था कि नहीं? तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है. लाओ पैर दो, मालिश कर देता हूँ. ठीक हो जाएगा.

चाची बहुत मना कर रही थीं.

बहुत बार बोलने पर आखिरकार मान गईं … पर वे बोलीं- किसी को बताना नहीं वर्ना सब बोलेंगे कि ब.च्चे से तेल लगवाती है!
मैंने कहा- किसी को नहीं बोलूँगा.

फिर मैंने उनकी साड़ी को जांघों तक उठा लिया और पैरों में तेल लगाने लगा, अच्छे से मसाज करने लगा.
उनको बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था और आराम मिलने लगा.

पैरों के बाद मैंने उनके हाथों की मालिश की और फिर उनके सर की मालिश की.
उनको इतना ज़्यादा राहत मिली कि वे बहुत खुश हो गईं.

चाची बोलीं- तू इतनी अच्छी सेवा करता है, पता ही नहीं था!
मेरे मुँह से निकल गया- मैं बहुत कुछ अच्छा करता हूँ.

ये बोलकर मैं चुप हो गया.

चाची नशीली आवाज में बोलीं- तो बाकी क्यों छोड़ दिया? पूरा कर दे न … पूरे बदन की अच्छे से रगड़ कर मालिश कर दे!

यह कह कर उन्होंने साड़ी खोल दी और ब्लाउज भी उतार दिया.
वे ब्रा में आ गईं.

फिर उन्होंने ब्रा भी खोल दी, पेटीकोट को स्तनों तक ढक लिया और पेट की साइड होकर लेट गईं.

मैंने उनकी पीठ की मालिश शुरू की. उनके मुँह से ‘आह … हम्म … ’ निकलने लगा.
उनकी कमर की मालिश करते समय मैंने उनके पेटीकोट को गांड की लाइन तक नीचे कर दिया.

फिर धीरे-धीरे उनकी पीठ की मालिश करने लगा और बीच-बीच में उनकी गांड की लाइन में उंगली डालकर मालिश करने लगता.

चाची बोलीं- कैसे मालिश करता है तू? आधा-अधूरा … तू रहने दे, मैं खुद कर लूंगी.
मैंने कहा- जानता हूँ कि यह सब, कुछ भी नहीं है आप सबके लिए … पर थोड़ा इंतज़ार तो करें.

उन्होंने पूछा- कितना इंतजार करना पड़ेगा और अभी कितना हुआ है?

मैंने कहा- अभी बहुत कुछ बाकी है.

वे बोलीं- मेरे पैरों की मालिश तो तूने सिर्फ घुटनों तक की है. मेरी जांघों की मालिश कौन करेगा?
मैंने कहा- चाची वह आपका पेटीकोट है न … इसलिए नहीं कर पा रहा.

तो चाची तुरंत बोली- जब तू मेरा पेटीकोट ऊपर से नीचे कर सकता है … तो नीचे से ऊपर नहीं कर सकता क्या?

मैंने कुछ नहीं बोला और पेटीकोट को आधी जांघों तक उठा दिया, फिर मालिश आधी जांघों तक करने लगा.

वे गुस्से में उठ कर देखने लगीं.

चाची- क्या हुआ, क्या दिक्कत है? शर्म आ रही है क्या मुझसे?
मैंने कहा- हां.
तो वे बोलीं- फिर रहने दे तू!

उन्होंने बिस्तर से नीचे उतर कर अपना पेटीकोट सही किया और खुद दूसरी तरफ चेहरा करके ब्रा पहनने लगीं.
मैं चुपचाप बैठा रहा.

ब्रा पहनने के बाद चाची ने मेरी तरफ देखा.
उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वे कुछ ज्यादा गुस्सा कर गई हैं.

वे मेरे पास आकर बैठ गईं और बोलीं- मेरी तरफ देख!
मैंने देखा, तो वे ब्रा में थीं.

मैंने नज़रें दोबारा नीचे कर लीं.
तो चाची दोबारा बोलीं- ऊपर देख मेरी तरफ!

मैंने देखा. मेरा हाथ उन्होंने पकड़ा अपने हाथों में और बोलीं- विराट, तुझे तो पता है ना मेरी कोई औलाद नहीं है? एक पति है और वह भी दूर है. प्यार नहीं करता, ना प्यार देता है. तू आया तो अच्छा लगा. बेटे जैसे प्यार देने की सोची. पर तू बड़ा हो गया है और जब तेरा वह सब देखा, तो मेरा भी दिल मचलने लगा. तू बड़ा हो गया है, जब तूने मेरे बदन को छुआ, तो वह फीलिंग आई, जो सालों से नहीं आई थी.

मैं चुप था.

चाची- जानती हूँ ये सब गलत है, पर क्या करूँ औरत हूँ. मुझे भी प्यार चाहिए मैं भी एक पत्नी हूँ. कभी ना प्यार मिला, ना बच्चा हुआ. कोई साथ भी नहीं दिया. बचपन में शादी हो गई, तो मेरा बचपन भी चला गया. जवानी में पति ने साथ नहीं दिया. इससे अच्छा कि मर ही जाती, तो शांति मिल जाती!

वे रो-रोकर सब बातें बता रही थीं.
मैंने उनके आंसू पौंछे.

मैं बोला- सॉरी चाची, माफ़ कर दो.
वे बोलीं- तू माफ़ी क्यों मांग रहा है? मैंने ही कुछ गलत सोच लिया था. अपने से छोटी उम्र के लड़के के लिए गंदी सोच ला दी दिमाग में.

मैंने कहा- ऐसा नहीं. अच्छा, एक बात बोलूँ?
चाची- हां बोल.

मैं- आपको अगर मैं बोलूँ कि आपको जो चाहिए, मैं देने के लिए तैयार हूँ. जितना भी हो, जो भी करना पड़ेगा … तो?
चाची- मतलब? कहना क्या चाहता है तू?

मैंने कहा- जो भी आपको तब से अभी तक नहीं मिला, अगर मैं आपको सब दे दूँ तो?
चाची अभी भी नहीं समझी थीं.

फिर मैंने कहा- आपकी जवानी वापस कर दूँ. आपको जिस चीज़ की कमी है, वह पूरी कर दूँ? आपको प्यार से भर दूँ तो?

चाची मेरी तरफ देखती रही.
वे चुप थीं.

फिर थोड़ी देर बाद बोलीं- कैसे करेगा तू? मैं तेरे से उम्र में बहुत बड़ी हूँ!
मैंने कहा- आपको मुझ पर भरोसा है? मुझे मानती हो तो एक चांस दो.

चाची- पर कैसे करेगा तू … जो भी बोल रहा है? इतना आसान नहीं है. चल ठीक है. पर जो भी करेगा मेरे और तेरे बीच में रहेगा. इसके अलावा किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए.
मैंने कहा- हां.

चाची- तो बता, कैसे और क्या करेगा?
मैं- पहले तो आपके बचपन और जवानी दोनों एक साथ दूँगा. आप तैयार हो?

चाची- हां.
मैं- तो पहले आप रोना बंद करो और खड़ी हो जाओ नीचे.

फिर हम दोनों नीचे आ गए और मैंने कहा- चलो मुझे ज़ोर से गले लगाओ.

वे अभी भी सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थीं.

मैंने टी-शर्ट नहीं पहनी थी.
चाची पास आईं और मेरे गले से लग गईं.

मैंने कहा- और ज़ोर से!
चाची ने अपनी पूरी जान लगा दी.

उनके इतने बड़े 36 इंच के दूधों ने मेरे सीने को दबा दिया कि सांस लेना थोड़ा मुश्किल हो रहा था.

मैंने कहा- जितने दुख-दर्द हैं, सब यहीं भूल जाओ!

फिर मैंने भी ज़ोर से उन्हें दबाया.
उनके मुँह से ‘आह’ निकल गया.

मेरा लंड खड़ा था, तो वह पेटीकोट के ऊपर से ही उनकी चूत से मिल रहा था.

मैंने उनकी गर्दन पर किस करना शुरू किया.
उनको जैसे करंट लगा और वे हिल गईं.

मैंने ज़ोर से उनकी गर्दन को अपने मुँह में ले लिया और वे फिर से सिहर उठीं.

एक पल बाद चाची मुझे ज़ोर से दबाने लगीं.
मैं ऐसे ही 10 मिनट तक करता रहा.

फिर मैंने चाची से कहा- छोड़ो मुझे अब!
उन्होंने छोड़ दिया.

मैंने पूछा- कैसा लग रहा है आपको?
वे बोलीं- इतना सुख और शांति मिली कि बता ही नहीं सकती. बहुत अच्छा लग रहा था!
मैंने कहा- अभी और अच्छा लगेगा.

फिर मैंने उनके चेहरे को पकड़ा और अपने होंठों के पास लाया.
चाची डर गईं, पर कुछ बोली नहीं.

वे मेरी आंखों में देख रही थीं.
मैं उनके होंठों को हल्का-हल्का टच कर रहा था.

फिर धीरे-धीरे उनके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और चूसने लगा.

चाची को बहुत अच्छा लगने लगा.
पर जैसे ही मैंने ज़ोर से चूसना शुरू किया, उन्होंने मुझे गले लगा लिया.

मैं भी अपने दोनों हाथों से उन्हें छूने लगा.
एक हाथ मैंने उनके स्तन को दबाने में लगा दिया और दूसरे से उनकी गांड को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
साथ में मैं उन्हें किस भी किए जा रहा था.

चाची अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी थीं. वे अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ रही थीं.
उनकी सांसें पूरी तेज़ व गर्म हो चुकी थीं और दिल की धड़कन भी बहुत तेज़ थी.

दोस्तो, सेक्स कहानी के अगले भाग में आपको चाची की चुदाई की कहानी को विस्तार से लिखूँगा.

गरम चाची की अन्तर्वासना का अगला भाग:

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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