सहेली ने मेरी चूत को चुदाई का मजा दिलाया

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हाय, मैं सुधा हूँ।

मैं 18 साल की खूबसूरत लड़की हूँ, कॉलेज में पढ़ती हूँ।

घर में मम्मी-पापा, बड़े भैया और भाभी हैं।

मेरी एक बहन है आरती जो मुझसे बड़ी है, उसकी शादी हो चुकी है।

मेरे जीजू एक स्मार्ट लड़के हैं। दीदी उनके साथ बहुत खुश है।

हम भी जीजू को बहुत मानते हैं। Free Hot Girl Sex

मैं अपनी फिगर बता दूँ — मेरा कद 5 फीट 3 इंच है, फिगर 32-30-34 है, रंग गोरा है।

मेरी एक सहेली है रागिनी, वह मेरे साथ पढ़ती है।

हम दोनों आपस में हर तरह की बात कर लेती हैं।

उसका कई लड़कों से चक्कर चल रहा है।

आज वह प्रदुमन नाम के लड़के के साथ लगी हुई है।

वह मुझे भी हमेशा लड़कों से दोस्ती करने को कहती है। मैं डरती थी।

मैं उसे बोलती, “रागिनी पर मुझे बहुत डर लगता है।”

वह बोलती, “अरे जब किसी लंड के नीचे आ गई ना, सारा डर निकल जाएगा। जब कोई लड़का अपने लंड की ठोकरों से तेरी चूत का पानी निकालेगा तो स्वर्ग ज़मीन पर ही मिल जाएगा।”

वह बोली, “देख अगर चलना है मेरे साथ चल, प्रदुमन का दोस्त मनीष भी आएगा, तू उससे मज़े करना। अगर वो न भी आया तो आज के दिन प्रदुमन से मज़े कर लेना।”

मैं तैयार हो गई।

दिन के लगभग 11 बजे हम दोनों प्रदुमन के फार्म हाउस पहुँच गईं।

मुझे बहुत डर लग रहा था कि प्रदुमन कैसा होगा, क्या सोचेगा।

पर वह मिलनसार लड़का था।

थोड़ी देर बात करने के बाद रागिनी बोली, “मनीष नहीं आया।”

प्रदुमन बोला, “आ जाएगा, कोई खास काम है आज उससे।”

रागिनी ने मेरी तरफ देखा और प्रदुमन की तरफ धक्का देते हुए बोली, “ये सुधा है, आज इसको मज़ा भी देना है और इसका डर निकालना है। ये काम तुम अच्छी तरह कर सकते हो।”

मैं रागिनी के धक्के से उसकी बाहों में आ गई। मुझे बहुत शर्म आ रही थी। वह मेरे होंठ चूसने लगा।

प्रदुमन ने रागिनी को बोला, “रागिनी तुम दूसरे कमरे में जाओ, ये शर्मा रही है।”

रागिनी हँसती हुई दूसरे कमरे में चली गई।

उसके जाते ही मैंने खुल के मज़ा लेने का प्रोग्राम बनाया।

मैंने भी अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी।

प्रदुमन ने एक हाथ मेरी चुची पर रख दिया और टी-शर्ट के ऊपर से सहलाने लगा।

मैंने ब्रा नहीं डाली थी।

उसके हाथ का स्पर्श अच्छा लग रहा था।

वह मुझे देखकर मुस्कुराया और मेरी टी-शर्ट उतार दी।

मेरे गोल-मटोल से चुचे नंगे हो गए।

मैं शर्म से उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।

वह मेरे चुचों को सहलाता, मसलता, चूसता। मैं “आआह्ह्ह…” करती रही। तभी उसने अपना हाथ जीन की बेल्ट में डाल दिया।

मैं बोली, “प्रदुमन प्लीज नहीं।”

वह बोला, “यार शर्माती क्यों? तेरी जितनी उम्र की लड़कियाँ तो 3-4 लड़कों की चूत कर देती हैं।”

मैं मुस्कुराने लगी।

मैं बोली, “तुम अपना भी तो दिखाओ।”

वह बोला, “शर्माती क्यों हो मेरी जान? बोलो क्या दिखाऊँ?”

मैं बोली, “अपना लंड।”

वह बोला, “वो तो छोटा सा है। पहले तुम्हारी चूत तो देख लूँ।”

मैं कुछ नहीं बोली। उसने मेरी जीन निकाल दी।

अब मैं पैंटी में थी। वह पैंटी के अंदर हाथ डालकर मेरी चूत सहलाने लगा।

मैं बोली, “प्रदुमन क्या करते हो?”

उसने बिना बोले मेरी पैंटी उतार दी। और मैं शर्म से मरी जा रही थी। मैं अपने जाँघें बंद कर रही थी।

वह बोला, “क्या यार देखने दो ना। इतनी प्यारी चूत क्यों छुपा रही हो?”

उसने मेरा एक पैर बेड पर रख दिया।

इससे मेरी चूत उसके सामने हो गई।

एकदम उसने अपने होंठ मेरी चूत पर रख दिए।

मैं मचल उठी। वह अपनी जीभ अंदर तक मेरी चूत में देता, कभी दाँतों से चूत की फाँक काट जाता।

मेरे पैर काँप रहे थे।

मैं ना-ना कर रही थी पर वह बुरी तरह से चूत चूस रहा था।

मैं बोली, “प्रदुमन छोड़ दो।”

मैंने उसे धक्का दिया और बोली, “मैं भी ऐसे ही चूसूँगी, तुम्हें तंग करूँगी।”

और उसकी जीन उतारने लगी।

जीन नीचे होते ही उसका लौड़ा देखकर मैं तो डर गई।

7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा। मैं सोचने लगी कि ये तो चूत फाड़ देगा।

वह बोला, “क्या हुआ जानमन? देखो तुम्हारे लिप्स के लिए तरस रहा है।”

मैं बोली, “प्रदुमन ये तो मेरे मुँह में नहीं जाएगा।”

वह बोला, “जानू अब नखरे मत कर।”

मैंने 1-2 किस किए और मुँह में भरा तो लगा होंठ के किनारे फट जाएँगे।

थोड़ी देर में ही मैं उसका मोटा लंड मज़े से चूसने लगी।

वह “ओह्ह्ह बेबी suck suck” कर रहा था।

मैं उसका मोटा लंड चूस रही थी।

एकदम उसने अपना लंड बाहर निकाला।

मैंने पूछा, “क्या हुआ?”

तो बोला, “मेरी जान अब नीचे भी तो कुछ करना है।”

मैं फिर डर गई।

मैं बोली, “प्रदुमन मुँह में ही दे लो, नीचे तो दर्द होगा।”

वह बोला, “वैसे ही डर रही है? अपनी चूत को देखो कैसे तैयार है।”

मैंने झुककर देखा तो वो खुल-बंद हो रही थी।

उसने मुझे लिटा कर मेरी टाँगें अपने कंधे पर रख ली और अपना लंड चूत पर ऊपर-नीचे फिराने लगा।

मैं मस्ती में पागल हो रही थी।

मैं बोली, “प्रदुमन अंदर डालो।”

इतना बोलते ही उसने अपना लंड चूत में सरका दिया।

मैं चीखी, “ओह्ह्ह माँआआ…” मेरी चीख सुनकर रागिनी रूम में आ गई।

वह बिल्कुल नंगी थी। उसने नज़ारा देखा।

मैं चीख रही थी और उसका आधा लंड मेरी चूत में ठूँसा पड़ा था।

मैं बोली, “रागिनी देखो इसने मेरी क्या हालत बना दी, इससे कहो निकालेगा, मैं मर रही हूँ।”

वह प्रदुमन की ओर हँसते हुए बोली, “क्या प्रदुमन अभी तक आधा ही लंड घुसा है? साली की चूत की धज्जियाँ उड़ा दो। लड़कियाँ तो नखरे करती ही हैं।”

प्रदुमन ने थोड़ा सा लंड बाहर खींचा और जोर से अंदर पेल दिया।

“उआईईई माँआआ…” सालो क्या चाकू डाला है मेरी चूत में।

मैं चीखती रही और वह धक्के मारता रहा। 15-20 धक्कों में मेरा पानी निकल गया।

अब लंड आराम से आ जा रहा था।

“क्यों मेरी जान मज़ा आ रहा है?” रागिनी बोली, “है ना, मर्द के लंड के नीचे आने में असली मज़ा है।”

इतने में डोरबेल बजी।

प्रदुमन बोला, “मनीष होगा।”

रागिनी नंगी ही दरवाजा खोलने चली गई।

वापस आई, एक लड़का साथ था। 22-23 साल का, लंबा।

वह मुझे देखकर मुस्कुराया, बोला, “वाह बड़ा मस्त माल लग रही है।”

फिर प्रदुमन बोला, “हाँ यार मस्त भी और अनटच भी।”

रागिनी बोली, “मैं मस्त नहीं लग रही?”

मनीष बोला, “मेरी जान पूरी मस्त है।”

मेरे बराबर लिटा कर रागिनी की चूत मारने लगा पर उसकी नज़रें मुझ पर थीं।

मैंने उसे देखकर मुस्कुराई।

मेरी चूत में धक्के-धक्के झटके लग रहे थे।

मेरा दोबारा पानी निकलने वाला था।

“ओओह्ह्ह प्रदुमन जोर से… मैं छूटने वाली… ओह्ह्ह प्लीज फक फ़ास्ट प्लीज…” मेरा बदन अकड़ गया फिर ढीला पड़ गया।

मैं बोली, “प्रदुमन प्लीज छोड़ दो।”

वह बोला, “मेरा पानी नहीं निकला। साली मेरे से धक्के सहन नहीं हो रहे थे।”

मैं बोली, “प्रदुमन निकालो, मुँह में कर लो प्लीज, मुझे काँटे लग रहे हैं।”

वह रुक गया। प्रदुमन ने मेरी गांड में उँगली दी और बोला, “मुँह में नहीं, यहाँ।”

मैं बोली, “प्रदुमन पहले निकालो।”

मैंने रागिनी को देखा।

मनीष ने उसकी गांड में लंड दे रखा था और मनीष चूत को उँगली से चेद रहा था।

मैं बोली, “प्रदुमन रागिनी को देखो, उसकी चूत खाली है, तुम उसकी चूत में कर लो।”

वाह क्या आइडिया है।

रागिनी बोली।

मनीष बोला, “ठीक है पर सुधा इसके बाद तुम्हारी बारी है।”

मैं मान गई।

प्रदुमन रागिनी के नीचे लेट गया और मनीष पीछे से गांड में लगा हुआ था।

रागिनी “ऊऊऊ” कर रही थी।

रागिनी बोली, “सुधा तू पहले क्यों नहीं आई? इतना मज़ा तो पहले कभी न आया।”

रागिनी उन दोनों के बीच में दबी पड़ी थी।

उसकी चूत और गांड में एक साथ लंड आ जा रहे थे।

मैं बोली, “रागिनी बड़ी प्यारी लग रही है, एकदम चूतकड़ लग रही है।”

मनीष का हाथ मेरी चूत पर आ गया।

मनीष बोली, “मेरी जान थोड़ी देर रुक जा, उसके बाद तू प्यारी लगेगी। ये तो झेल रही है, तुझे देखेंगे।”

रागिनी मस्त थी।

रागिनी बोली, “प्रदुमन इस लंड से कितनी लड़कियों की सील तोड़ चुके हो पता नहीं।”

मनीष की उँगली मेरी चूत में चल रही थी।

मैं दोबारा मस्त हो रही थी। “आआआ फक फक…”

रागिनी बोली, “आआ प्रदुमन जोर से धक्के मारो, मैं आने वाली हूँ।”

प्रदुमन बोला, “मैं भी आने वाला हूँ जान।”

प्रदुमन ने रागिनी को कस लिया।

उधर मनीष का भी वीर्य निकल रहा था।

अब मनीष ने लंड निकाला तो रागिनी की गांड से सफेद पानी निकलने लगा।

मनीष मेरे पास आया और अपना लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया। थोड़ी देर सब पड़े रहे।

मैं बोली, “ये तो छोटे हो गए, अब मेरा क्या होगा?”

रागिनी बोली, “मेरी जान इनको अपने होंठों से प्यार कर, ये बड़े हो जाएँगे।”

मैं जल्दी-जल्दी दोनों के लंड चूसने लगी।

रागिनी बोली, “देखो प्रदुमन किसे कुत्ती की तरह पागल हो रही है।”

मुझे कुछ नहीं सुन रहा था।

मैं तो बस उन दोनों के लंड अपने मुँह में फूलते हुए महसूस कर रही थी।

थोड़ी देर में उनके लंड लोहे की तरह सख्त हो गए।

रागिनी बोली, “सुधा तैयार हो जा। तू बड़ी नसीब वाली है। एक ही दिन में तेरे दोनों दरवाजे खुलने वाले हैं। 2-2 लंड का मज़ा तुझे पहले दिन ही मिल रहा है।”

मैं बोली, “कमीनी जल मत, तू भी तो अभी मज़े लेकर हटी है।”

प्रदुमन ने मुझे अपने ऊपर गिरा लिया। उसका लंड मेरी चूत से टच हो रहा था।

रागिनी ने आकर प्रदुमन का लौड़ा मेरी चूत के मुहाने पर लगाया और बोली, “ले मेरी जान, प्रदुमन ऐसा झटका मार कि इसे नानी याद आ जाए।” प्रदुमन ने जोर से झटका मारा।

मुझे तेज़ दर्द हुआ। “म्म्माँआआ…”

रागिनी बोली, “अभी माँ? अभी तो तेरी गांड में जाने दे, सब याद आएँगे।”

मनीष मेरे पीछे आ गया।

मनीष बोला, “यार इसकी गांड में बहुत दम है, ये पूरा लंड खा जाएगी।”

मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी।

उसने मेरी गांड में उँगली दी। मुझे उँगली से भी दर्द हुआ।

मैं बोली, “मनीष मुझे तुम्हारी उँगली से दर्द हो रहा है, तुम्हारे लंड से तो मैं मर ही जाऊँगी।”

रागिनी बोली, “हम लड़कियाँ लंड से मज़े लेती हैं, मरती नहीं।”

तभी मनीष ने दूसरी उँगली डाली। मैं मज़े और दर्द से “ओह ओह” कर रही थी।

मैं बोली, “यार कोई क्रीम या तेल पड़ा होगा वो लगा लो।”

मनीष बोला, “पागल है तू, देखती जा।”

मनीष ने एकदम मुझे धक्का दे दिया।

मैं प्रदुमन के ऊपर गिर गई। प्रदुमन ने मुझे सख्ती से दबोच लिया।

मनीष ने मेरी गांड पर अपना लंड लगाया। मैं डर से काँप रही थी।

मैं बोली, “मनीष आराम से करना।” उसने मेरी कमर पकड़ के जोर से धक्का मारा तो लंड का सुपाड़ा गांड में घुस गया।

मैं दर्द से बेहोश सी हो गई। “आआआ…” मैं उठने को हुई पर प्रदुमन ने मुझे दबोच रखा था।

रागिनी ने कस के चूताड़ों पर थप्पड़ मारा और मनीष को बोली, “साले ये तेरी बहन है जो रुक गया।” मनीष ने दूसरे झटके में ही पूरा लंड अंदर सरका दिया।

मैं रोती रही पर दोनों जोर-जोर से झटके मारने लगे।

थोड़ी देर में ही दर्द में मज़ा आने लगा।

कमरे में थप-थप की आवाजें आ रही थीं।

मैं झड़ने को थी। मैं जोर-जोर से कर रही थी।

रागिनी बोली, “लो एक और लड़की तुम्हारी गुलाम हो गई।” दोनों झड़ गए।

मुझे बहुत मज़ा आया।

पर अब समस्या ये है कि जब भी मैं वहाँ जाती हूँ तो उनके दोस्त आ जाते हैं और वो मेरी चुदाई करते हैं।

मैं बहुत सोचती हूँ न जाऊँ पर मेरी चूत की खुजली मुझे उनके पास ले ही जाती है।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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