malik ki biwi ke sath sex
पिछला भाग पढ़े:- मालिक की बीवी की चुदाई की-2
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
तभी अमृता का हाथ मुझे अपने पेट पर महसूस हुआ। शायद वह नींद में थी। वह अपना हाथ मेरे पेट पर फेरने लगी। उसके हाथों का स्पर्श पाते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और इक्कीस तोपों की सलामी देने लगा।
धीरे-धीरे अब वह मेरी छाती पर हाथ में फिराने लगी। वह मुझसे और सट गई और अपने एक पैर को मेरी जांघों पर रख दिया और दूसरे पैर को मेरे दोनों पैरों के बीच में।
वो मुझसे इतनी ज्यादा सट चुकी थी कि उसके वह मुलायम स्तन मेरी पीठ पर लग रहे थे। अब तो मेरा लंड पूरी लंबाई को छू चुका था। ऐसा लगा कि लंड अभी फट पड़ेगा।
मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज़ होती जा रही थी। हे भगवन मैं मर ना जाऊं कहीं।
मैं सोच रहा था कि मैं पलटी मारूं और उसके मखमल मुलायम जैसे होठों को अपने होठों में दबा कर उसका रसपान कर लूं। मगर मैं वहीं पर किसी मूर्ति की तरह पड़ा हुआ था।
अमृता मूड में थी शायद। अचानक उसका हाथ मैं अपने कच्छे के अंदर जाते हुए महसूस किया। उसका हाथ मेरे लंड पर बढ़ चुका था, जो कि पहले का ही तना हुआ था। उसने मेरे लंड को पकड़ा और उसे हिलाने लगी और कहने लगी, “तुम मुझसे प्यार क्यों नहीं करते अमित?”
वो शायद गहरी नींद में थी। जानती नहीं थी उसने अमित का नहीं प्रतिक का लंड पकड़ा था। उसके हाथ पड़ते ही मेरा लंड फुँफनाने लगा। उसके हाथों की गर्माहट से मेरा लंड ऐसा लगने लगा कि यह मानो अभी के अभी ही झड़ जाएगा।
बस अब बहुत हो गया था। मैं तुरंत मुड़ा और अमृता की ओर देखा। अमृता की आंखें खुली हुई थी। उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर ही था। वह बोली, “देखो अमित तुम्हारी वजह से मुझे क्या करना पड़ रहा है।” कह कर उसने मेरे होठों पर अपने होठों को रख दिये।
उसने अपना एक हाथ मेरे सर के पीछे रखा और मुझे बेतहाशा चूमने लगी। उसके होंठ बहुत ज्यादा मुलायम थे। मैं उन्हें बड़े ही आहिस्ता-आहिस्ता से उनके होठों का रस पीने लगा। कभी ऊपर का होंठ तो कभी नीचे का, कभी दोनों एक साथ। उसके रसों को पीकर मानो मेरे अंदर एक अलग सी ताकत आ गई थी।
मैं अमृता के ऊपर आ गया था और अपनी कोहनी के बल में लेटा हुआ था और अमृता को किस्स कर रहा था। अमृता ने अपने पैरों से मेरे पजामी और कच्छे दोनों को ही नीचे कर लिया था। उसने अब अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ पर हाथ रखा और अपनी चूत की और धकेली। साथ ही वह मेरी गांड को आगे-पीछे कर रही थी, जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत पर घिस रहा था।
मैं उसे थोड़ा अलग हुआ और बोला: भाभी मैं आपको बहुत चाहता हूं। जब से मैंने आपको देखा है मुझे आपसे प्यार हो गया है।
अमृता भी कहने लगी: मुझे भी तुझसे प्यार है पगले। मैंने इतनी बार तुझे रिझाने का ट्राई किया, मगर तू है कि मेरे एक भी सिग्नल को समझ नहीं पाया। देखा आज मुझे ही खुद तेरे पास आकर सोना पड़ा।
मैं: मैं समझा नहीं किस सिग्नल की बात कर रही हो भाभी?
अमृता: जब पहली बार तूने मुझे मास्टरबेट करते हुए देखा था, मैं तेरी शकल देख ली थी। क्योंकि इस फ्लोर पर तेरे अलावा कोई भी बिना खटखटाये नहीं आता है। मैंने सोचा कि कभी तो तेरी हिम्मत बनेगी और तू मुझे कुछ कहेगा या कुछ करने की कोशिश करेगा। मगर तू तो एक-दम फट्टू निकला। और हां मुझे भाभी मत बोल, मुझे मेरा नाम से बुला।
मुझे डर लग रहा था और मेरी धड़कनें बहुत तेज थी। मैंने डरते हुए कहा: जी अमृता।
अमृता ने अब मेरे सर पर हाथ दिया और मेरे होठों को अपनी गर्दन के पास लगा लिया। मैंने उसकी गर्दन को चूमता-चूमता और स्तनों की तरफ आगे बढ़ा। अमृता थोड़ी मुझसे अलग हुई और अपनी शर्ट को निकाल कर अलग फेंक दी। लगे हाथ ही उसने अपनी पेंट और पैंटी को भी अलग कर दिया था। मैंने भी अपने शर्ट को निकाल फेंका और अब हम दोनों ही एक-दम नंगे उसे बिस्तर पर लेटे थे।
मैंने अमृता के स्तनों को अपने हाथों में पकड़ा। वह बहुत ही ज्यादा मुलायम थे। ऐसा लग रहा था मानो मैंने कोई खिलौना पकड़ लिया हो उनका, बड़ी आसानी से दब रहे थे। और मेरे हाथों में भी आ जा रहे थे। मैंने अपने मांसल हाथों से उसके स्तनों को एक-दम रगड़ कर रख दिया था। मैं उसके बूब्स को ऐसे निचोड़ रहा था मानो मैं संतरो का रस निकाल रहा हूं।
अमृता मुझे किस्स कर रही थी और उसके होंठों का रस मेरे लिए किसी अमृत की तरह काम कर रहा था। मैंने एक हाथ से उसके स्तन को मसल रहा था, निचोड़ रहा था, उसके बदन को गूंथ रहा था, तो दूसरे हाथ से उसके शरीर के बनावट का एहसास ले रहा था।
अमृता: अह्ह्ह्हह प्रतीक आज इतने दिनों बाद किसी मर्द के हाथ मेरे शरीर में लगे हैं।
मैंने उससे कहा: अमित आपके साथ नहीं करता है क्या?
अमृता ने अमित को दुत्कारते हुए कहा: उसके बस का कुछ भी नहीं है। आता है, बस 1 मिनट में 2 मिनट में करके उसका काम हो जाता है। ना कोई प्यार की बातें, ना और कुछ। मुझे ही उसके साथ जबरदस्ती करनी पड़ती है। तब जाकर वह करता है।
मैंने अमृता की आंखों में देखा और कहा: पागल है वो जो इतनी खूबसूरत बीवी के होते हुए बाहर मुंह मारता है।
अमृता ने तुरंत मेरे होठों से होठों को चिपका लिया और मुझे चूमने लगी। क्योंकि मेरा लंड अब नंगा था और अमृता भी गीली थी। मेरा लंड एक-दम निशाने पे लगा हुआ था। अमृता अपनी गांड को हिला रही थी और उसने हिलाते-हिलाते मेरे लंड को अपनी चूत पर सेट कर लिया था।
मैं उसको बोला: रूको अमृता, मैं तुम्हें पहले ज़माने का सुख देता हूं।
तुरंत ही मैं उसकी गुलाबी चूत की तरफ लपका जो अंधेरे में भी किसी गुलाब की तरह चमक रही थी। बड़ी अच्छी सुगंध आ रही थी। मैंने उसकी चूत को अपने उंगलियों से फैलाया और उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ को डाल करके गोलाकार घुमाने लगा।
उसके मुंह से सिसकारी निकल गई: अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह प्रतीक, मजा आ रहा है। अह्ह्ह्हह्हह मजा आ रहा है। करते रहो ऐसे ही।
मैंने उसके चूत की चार दिवारी नाप ली थी और उसकी चूत के दाने को मैंने अपने होठों के अंदर भर करके उसको जी भर के चूसा।
इसके आगे क्या हुआ, अगले भाग में पढ़िए।
अगला भाग पढ़े:- मालिक की बीवी की चुदाई की-4
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