triple lesbian sex story
ट्रिपल लेस्बियन सेक्स स्टोरी में दो सहेलियों के पति को सेक्स में रूचि कम हुई तो उन्होंने आपस में एक दूसरी को मजा देने की कोशिश की. उनको तीसरी सहेली ने देख लिया.
इस सेक्स कहानी में आप पढ़ेंगे कि किस तरह से तीन दोस्तों और उनकी पत्नियों ने यौन की नीरसता से बोर होकर, यौन आनन्द के कई तरीके आजमाए, इसमें महिलाओं ने लेस्बियन सेक्स का मजा लिया, पुरुषों ने गे सेक्स का मजा लेंए के साथ अदला-बदली करके एक दूसरे की बीवियों को चोद कर अपनी काम वासना को पूरा किया.
यह सेक्स कहानी मेरे पाठक संजीव जी उम्र 70 और उनकी पत्नी संजना जी उम्र 68, हिमांशु जी उम्र 70 और उनकी पत्नी हेमलता उम्र 67 ने भेजी है.
ये दोनों वरिष्ठ नागरिक जोड़े वर्तमान में अन्तःवासना के नियमित पाठक हैं.
मैंने उनके कहने पर कहानी को और रोचक सेक्सी बनाकर अन्तःवासना में भेजी है.
उनका सेक्स कहानी भेजने का उद्देश्य सिर्फ यह बताना है कि उनके जमाने में भी लोग यौन आनन्द के लिए नए नए तरीके आजमाते थे.
मैंने सभी के नाम बदल दिए हैं.
अब आप संजीव की ट्रिपल लेस्बियन सेक्स स्टोरी उन्हीं की जुबानी सुनें.
बारहवीं पास करके 18 साल की उम्र में मैं अपने पिताजी के रेडीमेड कपड़ों की दुकान में काम सीखने लगा.
मैं गेहुंए रंगत का था, शरीर भरा था, न मोटा न बहुत दुबला.
हमारे बाजू की दुकान मेरे दोस्त हिमांशु के पिता की थी.
उनकी इलेक्ट्रिकल सामान की दुकान थी.
हिमांशु मेरे साथ स्कूल में पढ़ा था, वह मेरा अच्छा दोस्त था.
हिमांशु भी अपने पिता की दुकान में काम करने लगा था,
मेरे पिताजी और हिमांशु के पिताजी दोस्त हैं, हम लोग व्यापारी समाज के हैं तो आपस में अच्छी बनती थी.
पितृपक्ष के समय बिक्री कम होती थी, तो दुकान एक हफ्ते के लिए बंद करके मेरे और हिमांशु के माता पिता घूमने निकल जाते थे.
मैं भी हिमांशु के साथ घूमने जाता था.
जब हम 20 उम्र के थे, मैं और हिमांशु खजुराहो गए थे.
खजुराहो के मंदिरो में सेक्स के विभिन्न आसनों की मूर्तियों को देख कर हम दोनों ही उत्तेजित हो गए थे.
हमने उन आसनों की फोटो की किताब खरीदी.
उस समय इंटरनेट नहीं था तो इसी तरह की पुस्तकों से मनोरंजन हुआ करता था.
उस रात हम दोनों खजुराहो में रहे, बाकी दिन आस-पास की टूरिस्ट जगहों पर गए.
हम दोनों उधर के होटलों में रुके और मौज मस्ती की.
फिर 21 साल की उम्र में मेरी शादी संजना से और हिमांशु की शादी हेमलता से हुई.
हम दोनों की पत्नियों की उम्र 18-19 साल थी.
मैं और हिमांशु आपस में बात करते की कैसे हमने अपनी पत्नियों के साथ यौन आनन्द लिया.
पहले खजुराहो से लायी किताब पत्नी को दिखाकर आसन आजमाए.
हेमलता और संजना की भी अच्छी दोस्ती हो गयी, हमारे घर भी पास पास थे.
एक साल बाद मैं और हिमांशु बाप बन गए.
अब हमारी शादी हुए 10 साल हो गए थे, हम दोनों के बच्चे 9 साल की उम्र के हो गए थे.
पत्नी के साथ सेक्स में कोई नवीनता नहीं रही.
सेक्स मतलब कमर हिलाना रह गया था, वह भी हफ्ते में एक या दो बार.
उधर हिमांशु का भी यही हाल था.
उन दिनों हमारे शहर के बाहर जो खाली जगह थी, वहां कई बड़ी सोसाइटी बन रही थीं.
मैं और हिमांशु उस इलाके में गए, कुछ बड़ी खाली दुकानों पर ‘बेचना है.’ का बोर्ड लगा था.
हमने उनकी कीमत पता की.
हम दोनों काफी समय से अपनी दुकान बड़ा करने की सोच रहे थे क्योंकि अभी वाली दुकान पर ज्यादा जगह नहीं थी.
हमने सोचा कि हम अपनी दुकानों को यहां ले आएंगे.
मैंने और हिमांशु ने अपने अपने पिताजी से बात की.
चूंकि हमारे पिता आपस में दोस्त थे, दोनों परिवार के लोगों ने साथ बैठकर सलाह मशविरा किया.
फिर तय हुआ कि हमारे पिताजी लोग पुरानी दुकान चलाएंगे, मैं और हिमांशु नयी दुकान खोलेंगे और दुकान के पास किराये के फ्लैट में रहेंगे.
नयी दुकान घर से काफी दूर थी, तो रोज रोज पुराने घर आना जाना संभव नहीं था.
हम लोगों ने कुछ अपने रूपए लगाए कुछ लोन लिया और दुकान खरीद ली.
नयी दुकान में फर्नीचर का काम चल रहा था, मैं और हिमांशु अपनी पत्नियों के साथ काम की देख भाल करते.
एक दिन एक सज्जन हमारी नयी दुकान पर आए, उन्होंने पूछा किस चीज की दुकान खुल रही है?
उन्होंने अपना नाम शर्मा जी बताया.
शर्माजी 6 फुट लम्बे थे, मैं और हिमांशु 5 फुट 6 इंच लम्बे थे.
उन्होंने पास की सोसाइटी में घर खरीदा था, हमने उनसे किराये के फ्लैट के बारे में पूछा.
शर्माजी ने बताया कि वे नौकरी करते है, उनके ऑफिस के दो लोगों के फ्लैट उनके फ्लोर में हैं, जो किराये पर देना है.
शाम को हम शर्माजी के फ्लैट पर गए, शर्माजी की पत्नी उषा जी काफी मिलनसार महिला थीं.
दोनों फ्लैट के मालिक वहां थे.
चाय के बाद हमने 3 बेडरूम फ्लैट देखा, हमने दोनों फ्लैट किराये पर ले लिए.
हम बच्चों के साथ नए फ्लैट में रहने आ गए.
शर्माजी का ब.च्चा हमारे ब.च्चे की उम्र का था, ब.च्चों में दोस्ती हो गयी.
हमारी पत्नियों – संजना और हेमलता से उषाजी की दोस्ती हो गयी.
शर्माजी हमारे दोस्त बन गए.
कुछ दिनों बाद मेरी और हिमांशु की नयी दुकान शुरू हो गयी, हम दोनों बहुत व्यस्त हो गए.
आगे की सेक्स कहानी आपको मेरी पत्नी संजना लिख रही है.
दोस्तो, मैं संजना आगे का हाल बताती हूँ.
उस समय मेरी उम्र 28 साल हो गई थी.
मैं 5 फुट लम्बी गेहुंए रंगत की हूँ.
मेरी फिगर 32बी-30-34 की है. मैं भरे बदन की सुन्दर महिला हूँ.
हेमलता भी मेरे कद के बराबर लम्बी और मेरी उम्र की थी, उसका बदन भी एकदम छरहरा और 34बी-30-36 का फिगर था.
उसकी रंगत भी गेहुंआ थी और वह भी काफी सुन्दर दिखती थी.
उषा 5 फुट 8 इंच की खासी लंबी और थोड़ी मोटी व गोरी महिला थी.
उसका फिगर 36सी-32-38 का था.
एक दिन पति और बच्चों के जाने के बाद मैं और हेमलता घर पर बैठी थीं और अपने पुराने दिनों को याद कर रही थीं.
हम दोनों चर्चा कर रही थीं कि कैसे हम सेक्स का आनन्द लेती थीं.
खजुराहो से लायी आसनों की किताब देखकर हमारे पति सेक्स के नए नए आसन आजमाते थे.
पर अब तो कभी कभी ही पति सम्भोग करते हैं.
हमारे बीच यही सब बातें हो रही थीं कि हमारे पतियों में अब वह पहले वाला जोश नहीं रहा है. बस कभी मन हुआ तो कमर हिलाना ही हो पाता है.
हम दोनों को अब उनकी सेक्स में घटती रुचि से काम सुख नहीं मिल रहा था और हम दोनों को ही संतुष्टि नहीं मिल रही थी.
हमारे बीच बातें बढ़ने लगीं तो हेमलता खजुराहो से लायी किताब ले आयी.
हम दोनों उन कामुक चित्रों को देखने लगीं.
उनमें से कुछ चित्र दो स्त्रियों के बीच यौन आनन्द लेते हुए बने थे, जिनको हमने पहले कभी ख्याल से नहीं देखे थे.
हम दोनों उन चित्रों को देखने लगीं.
उनमें काम सुख लेती दो स्त्रियों को देख कर हम दोनों के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान आ गयी.
मैंने कहा- चल हेमा, ये वाला आसन आजमाती हैं!
हेमलता ने भी हामी भर दी.
हम दोनों खड़ी हो गईं और एक दूसरे को चूमने लगीं.
हमने एक दूसरे के होंठों पर होंठ लगाकर लम्बा चुम्बन लिया, फिर एक दूसरे के चूचों को कपड़ों के ऊपर से दबाए.
हम दोनों की वासना भड़कने लगी और टांगों के बीच खुजली बढ़ गई, तो हम दोनों ने अपने अपने कपड़े उतार दिए.
हम दोनों ने ही एक दूसरे को पहली बार इस तरह से एकदम नंगी देखा था.
हेमलता बोली- संजना तेरे चूचे तो बड़े मस्त हैं!
यह कहकर वह मेरे नंगे चूचे चूसने दबाने लगी.
मैं वासना से सिसकारी ले रही थी.
मैंने कहा- हेमलता, तेरे चूचे तो मुझसे बड़े हैं!
यह कहकर मैं उसके चूचे चूसने दबाने लगी.
हम दोनों उत्तेजित होकर पलंग पर आ गईं.
पहले मैं चित लेट गई थी, हेमलता मेरे बाजू में बैठ गई.
वह मेरे पेट, नाभि को चूमती हुई नीचे चुत की तरफ बढ़ी.
मेरी जांघें चूमने के बाद वह मेरी चूत की तरफ बढ़ रही थी.
मैंने उसे रोककर कहा- चल दोनों अपनी अपनी चुत धोकर आती हैं.
पतियों के साथ मुख मैथुन से पहले हम लोग अपने गुप्त अंग साबुन से धोते थे.
यदि चुत को न धोएं और उसमें से बास आ जाए तो चुदाई का जोश ख़त्म सा हो जाता है.
हेमलता ने बताया था कि वह और उसके पति भी ऐसा करते हैं.
हेमलता- अच्छा हुआ तूने याद दिलाया.
हम दोनों एक साथ बाथरूम में गईं और अपनी अपनी चूत को साबुन से अच्छे से धोकर आ गए.
मैंने घुटने मोड़कर जांघें फैला दीं.
हेमलता ने मेरी चूत चूमी, फिर चूत की दोनों फांकों को फैलाकर जीभ अन्दर डालकर चूत चूसने लगी.
वह मेरी चूत के दाने (भगनासा) को उंगलियों से हल्के हल्के से मरोड़ने भी लगी, तो इससे मुझे बेहद लज्जत मिलने लगी.
फिर उसने अपने हाथ की दो उंगलियां मेरी चूत में डाल दीं और वह मेरी चुत को अपनी उंगलियों से चोदने लगी.
मैं कामोत्तेजना से मचल रही थी, इसलिए मेरी सांसें तेज हो गईं.
मैं ज्यादा देर न टिक पायी, मेरा बदन थरथराया और ढेर सा कामरस चूत से निकल गया.
मैं निढाल होकर बोली- तूने तो मेरे पति से भी ज्यादा अच्छी तरह चूसा और मजा दिया.
मैंने कपड़े से चूत पौंछी और कुछ देर बाद उठकर पानी पिया.
हेमलता लेटकर अपनी चूत सहला रही थी.
अब मेरी बारी थी तो मैं पूरे जोश में उसकी चूत चूसने लगी, उंगली से भगनासा सहलाने लगी.
हेमलता बोली- उंगली से चोद न!
मैं उसकी चुत को अपनी दो उंगलियों से चोदने लगी.
उसकी चुदास एकदम से भड़क गई और उसने मचलते हुए मेरा सर हाथ से चूत दबा कर पकड़ लिया.
वह अपने चरम पर आ गई थी तो उसकी चूत से कामरस का फव्वारा बह निकला.
उसकी चुत ने अपना पानी एकदम रफ्तार से बाहर फेंका था जिससे कुछ रस मेरे मुँह में चला गया था.
उसकी चुत के रस का स्वाद कुछ अजीब सा था … पर मुझे अच्छा लगा.
मैंने हेमलता के होंठ चूमकर उससे पूछा- कैसा लगा?
हेमलता- आह … मजा आ गया यार!
दूसरे दिन जब मैं और हेमलता चूमा चाटी कर रही थीं, तो मैंने कहा- चलो आज एक दूसरे की मालिश करती हैं.
हेमलता झट से राजी हो गई और तेल ले आयी.
मैं नंगी होकर चित लेट गयी.
हेमलता मेरे चूचों की मालिश करते समय चूचे दबाने लगी, निप्पल मरोड़ने लगी.
कुछ ही पल बाद वह अपनी तेल लगी उंगलियां मेरी चूत में अन्दर बाहर करने लगी.
फिर उसने मुझे पेट के बल लिटाकर मेरे पीठ कूल्हों की मालिश की.
उसके बाद मैंने हेमलता की मालिश की, उसके चूचे दबाकर, निप्पल मरोड़ कर की .. तो वह मस्त हो गई.
हम दोनों अति उत्तेजित हो गए थे.
अब हम दोनों करवट लेकर 69 में लेट गईं.
मेरा मुँह हेमलता की चूत की तरफ था.
हेमलता का मुँह मेरी चूत की तरफ था.
यह आसन हमने खजुराहो के चित्र में देखा था, जब इंटरनेट आया तब मालूम चला कि इसे ही 69 की पोजीशन कहते हैं.
हम दोनों एक दूसरे की चूत चूसने लगीं और झड़ गईं.
फिर हम दोनों ने बाथरूम में एक दूसरे को साबुन लगाकर नहलाया.
अब जब भी हमारा मूड होता तो हम लोग यह खेल खेल लेते.
एक दिन मैं, हेमलता, शर्माजी की पत्नी उषा बातें कर रहे थे.
उषा जी बोलीं- शर्माजी फैक्ट्री से बहुत देर से आते हैं और खाना खाकर सीधे सो जाते हैं.
मैंने उषा जी को छेड़ा- और तुम प्यासी रह जाती हो?
वह मेरी तरफ देख कर हंसने लगी.
मैं- मेरा और हेमलता का भी यही हाल है, दोनों के पति नयी दुकान से देर से आते हैं तो थके रहते हैं.
हम लोग आपस में चुहल बाजी करती हुई एक दूसरे से मस्ती कर रही थीं.
फिर एक बार जब मैं और हेमलता आपस में लेस्बियन सेक्स कर रही थीं, उस वक्त हेमलता बोली- उषा को भी शामिल कर लिया जाए, उसके गोरे बड़े 36सी के चूचे बिना कपड़े के देखने का बड़ा मन है.
मैं- ओके, हम दोनों उषा को राजी कर लेती हैं.
जल्द ही हमें मौका मिल गया.
हमने उषा को खजुराहो की किताब के चित्र दिखाए, खासकर वे चित्र दिखाए जिसमें लड़की, लड़की के साथ यौन आनन्द ले रही थी.
उषा जी उन चित्रों को बड़े चाव से देख रही थीं.
अगले दिन जब बेडरूम में नंगी होकर चूमा-चाटी के बाद मैं हेमलता की मालिश कर रही थी, तभी फ्लैट की डोर बेल बजी.
मैंने जल्दी से सिर्फ मैक्सी पहनी, बेडरूम का दरवाज़ा बंद कर मुख्य द्वार खोला.
उषा जी दरवाज़े पर थीं.
वे अन्दर आईं और मेरी अस्त-व्यस्त हालत देखने लगीं.
मेरे बाल बिखरे थे.
मैंने मुख्य दरवाज़े की अन्दर की चिटखनी लगा थी, मालिश से पहले हम ऐसा करती थीं.
इसका कारण था कि मुख्य दरवाज़े के ऑटो लैच की चाबी पति के पास और हेमलता, उषा के घर रहती थी.
उषा- क्या कर रही थी? लगता है संजीव आज घर पर हैं!
मैं- नहीं संजीव दुकान गए हैं. मैं हेमलता की मालिश कर रही थी. तुम्हारी भी मालिश कर दूँ?
उषा ने हामी भरी.
मैंने बेडरूम का दरवाज़ा थोड़ा खोलकर हेमलता से कहा- उषा आयी है, उसे भी मालिश करानी है.
हेमलता ने अब तक मैक्सी पहन ली थी.
उसने मुस्कुरा कर मैक्सी उतार दी और वह नंगी ही चित लेट गयी.
उषा बेडरूम में आयी.
वह नंगी लेटी हेमलता को देखकर बोली- तुम लोग पूरी नंगी होकर मालिश कराती हो?
मैं- यदि वादा करो कि किसी को नहीं बताओगी, पति को भी नहीं .. तो हम तुम्हें एक रहस्य बताएंगी.
उषा ने वादा किया.
मैं भी मैक्सी उतारकर नंगी हो गयी- कपड़े पहने मालिश नहीं होती. तुम्हें खजुराहो के चित्र याद हैं … लड़की के साथ लड़की का यौन आनन्द. हम सिर्फ मालिश ही नहीं करते, यौन आनन्द भी लेते है. पति को यौन क्रीड़ा करने की फुरसत ही नहीं है. उषा तुम चाहो तो तुम भी शामिल हो जाओ.
उषा- मैंने कभी किया नहीं, तुम लोग करो … मैं देखती हूँ.
मैं हेमलता की मालिश के साथ उसके चूचे दबाने चूसने लगी, उसके होंठ चूमने लगी, उसकी चूत में उंगली करने लगी.
उसके बाद मैं लेटी, हेमलता मेरी मालिश करने के साथ मेरे होंठ चूमने लगी.
वह मेरे चूचे दबाने व चूसने लगी, चूत में उंगली करने लगी.
फिर मैं और हेमलता 69 पोजीशन में एक दूसरे की चूत चूसने के बाद झड़ गईं.
उषा यह सब देख रही थी और कामुक होकर अपने चूचे दबा रही थी.
साथ ही वह अपनी साड़ी के ऊपर से अपनी चूत पर भी हाथ फेर रही थी.
मैंने उषा से कहा- अब तेरी मालिश करेंगे, कपड़े उतार दो.
उषा ने दबी आवाज़ में कहा- सिर्फ मालिश और कुछ नहीं!
मुझे लगा कि उसकी ना में भी हां है.
उषा ने हमारी तरफ पीठ करके कपड़े उतारे और पेट के बल पलंग पर लेटकर बोली- पीठ की मालिश करो.
मैं और हेमलता उषा के बड़े चूचे देखने को उत्सुक थीं, पर देख नहीं पाईं.
उषा का गोरा बदन, भरे कूल्हे, मोटी जांघें मस्त थीं.
मैंने उषा के पीठ कमर जांघों की मालिश की.
उसके कूल्हे थपथपा कर कहा कि अब चित लेट जाओ.
उषा करवट लेकर चित लेट गयी.
मैं उषा के बायीं तरफ थी, हेमलता दाहिनी तरफ. हम दोनों की नज़र उषा के चूचों की तरफ थी.
उसके 36-सी के गोरे चूचे मस्त थे, उस पर किसमिस की तरह भूरे निप्पल थे.
मैं तेल लेकर उषा के बाएं चूचे की मालिश करने लगी.
हेमलता दाहिने दूध की मालिश कर रही थी.
हम दोनों में मालिश करने की होड़ लगी थी.
मालिश करने के साथ साथ हम दोनों उषा के चूचों को हल्के हल्के से दबा भी रही थीं.
उषा आंख बंद कर लेटी थी.
फिर हम दोनों उषा के निप्पल उंगलियों में दबा कर मरोड़ने लगीं, इससे उषा मीठी सिसकारी लेने लगी.
‘आह आह.’
उसकी मादक आवाज से हम दोनों और मस्ती से उसके मम्मों के साथ खेलने लगीं.
हमने उषा के थोड़े मोटे पेट की मालिश की, फिर नीचे की तरफ बढ़े.
मैं एक जांघ की मालिश कर रही थी, हेमलता दूसरी की.
उषा की चूत गुलाबी और फूली हुई थी.
मुझसे रहा नहीं गया, मैं उसकी चूत पर हाथ फेरने लगी.
अब उषा की सिसकारियां कुछ तेज हो गईं.
उसकी आंखें बंद थीं.
हेमलता ने उषा के होंठ चूमकर पूछा- मजा आ रहा है?
उषा ने हां में सर हिलाया.
यह हमारे लिए हरी झंडी थी.
मैं लपक कर उषा की जांघों की बीच आ गयी, उसकी चूत की पंखुड़ियों को फैला कर चूत चूसने लगी, उसकी चुत के भगनासा के दाने को चाटने लगी.
चुत पर हमला होते ही उषा मचलने लगी.
मैं उसकी चूत में दो उंगली डालकर अन्दर बाहर करने लगी.
हेमलता उषा के होंठ चूस रही थी, साथ ही उसके चूचे दबा रही थी … निप्पल मरोड़ रही थी.
दो तरफ़ा हमले का आनन्द उषा ज्यादा देर झेल नहीं पायी, उसका शरीर थरथराया और उसकी चूत से ढेर सा कामरस निकल गया.
वह निढाल हो गयी.
कुछ देर बाद उषा ने आंख खोलकर कहा- सच में यार मजा आ गया!
उसके बाद से हम तीनों अक्सर ही लेस्बियन सेक्स का आनन्द लेने लगी थीं.
हम तीनों फोरप्ले के बाद त्रिभुज के आकार में लेटकर एक दूसरे की चूत चूसतीं.
जब हम में से कोई किसी कारण सेक्स में भाग नहीं ले पाता, तब बाकी दो सहेलियां आपस में यौन आनन्द लेतीं.
हमने अपने पतियों को हमारे लेस्बियन संबंध के बारे में नहीं बताया था.
ऐसे ही एक साल बीत गया.
हमारे पति कभी कभार हमारे साथ सम्भोग करते, उसका भी अलग मजा था.
हम तीनों सहेलियों ने अपने अपने पति के साथ किस तरह से सेक्स किया, उसकी चर्चा करके मजा लेतीं.
इसके आगे आपको लिखेंगे के अदला बदली और गे सेक्स का खेल किस तरह से हुआ.
आपको मेरी ट्रिपल लेस्बियन सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है?
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।