मामा ने दो जवान बहनों को छत पर पेला

mama ji ne do behno ko choda

दो बहनों की गर्मजोशी – जब बारिश में भीगते हुए एक रिश्तेदार ने दोनों बहनों को अपनी बाहों में भर लिया, तो शर्म की सारी हदें टूट गईं। पढ़िए कैसे एक रात की बूंदों ने तीन दिलों की वासना को जोश दिया…

मेरा नाम निशा है, मैं 21 साल की हूँ और मेरी छोटी बहन लता जो कि 19 साल की है।

हम दोनों उत्तराखंड के एक छोटे से हिल स्टेशन पर रहते हैं। यहाँ की हवा हमेशा ठंडी रहती है और बारिश तो यहाँ रोज ही होती है।

मेरे मामा जी यानी राजेंद्र दिल्ली से यहाँ आए थे छुट्टियाँ मनाने।

वह एक बहुत ही हैंडसम और फिट आदमी हैं, उम्र करीब 42 साल होगी लेकिन दिखते हैं 35 के।

मेरी बहन लता और मैं एक ही कमरे में सोते हैं। हमारा घर पुराना है लेकिन बहुत बड़ा है।

ऊपर एक विशाल छत है जहाँ से पूरे पहाड़ों का नज़ारा दिखता है।

मेरे पापा एक सरकारी नौकरी में हैं और अक्सर टूर पर रहते हैं।

मम्मी भी उनके साथ चली गई हैं इस महीने, इसलिए घर में सिर्फ़ मैं, लता और मामा जी हैं।

मामा जी हमेशा से ही मुझे अलग नज़रों से देखते थे।

जब भी वह आते, मेरी तरफ़ ऐसे देखते जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देखता है।

मैं शुरू में समझ नहीं पाती थी, लेकिन जब मैं बड़ी हुई तो समझ गई कि उनकी नज़रों में वो क्या है।

वो मेरी बढ़ती हुई छाती को, मेरी कमर को, मेरी गोल-गोल गांड को कैसे घूरते थे।

मैंने कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन अंदर ही अंदर मुझे भी उनसे कुछ अलग सा लगने लगा था।

लता भी उनसे बहुत चिपकने लगी थी। वो उनके साथ बैठकर घंटों बातें करती, हँसती, उनके कंधे से सिर टिकाकर टीवी देखती।

मुझे लगता था कि इस लड़की को भी वही महसूस हो रहा है जो मुझे हो रहा है।

हम दोनों बहनें रात को बातें करते समय अक्सर मामा जी का ज़िक्र करतीं।

लता कहती, “दीदी, मामा जी कितने स्ट्रॉन्ग लगते हैं ना, उनके बाज़ुए देखो कितने मोटे हैं।”

मैं मुस्कुरा देती और कहती, “हाँ, और उनकी छाती भी तो बहारी है।”

धीरे-धीरे हम दोनों में ये बातें आम हो गईं। एक बार की बात है, मामा जी नहाकर बाहर आए थे, उनके शरीर पर सिर्फ़ तौलिया था।

वो रसोई से पानी लेने आए और मैं वहीं खड़ी थी।

उनके तौलिये के नीचे से उनकी जांघें दिख रही थीं, मोटी-मोटी और बालों से भरी।

मेरी नज़र उनके उभार पर टिक गई जो तौलिये में साफ़ दिख रहा था।

मैंने जल्दी से नज़रें हटा लीं लेकिन मेरी साँसें तेज़ हो गईं थीं।

मामा जी ने मेरी शर्म देखी और मुस्कुरा दिए, जैसे कह रहे हों कि “मैं सब जानता हूँ।”

लता भी एक बार ऐसा ही कुछ देख चुकी थी।

उसने मुझे बताया था कि मामा जी उसे अक्सर अपने कमरे में बुलाते हैं और उसके सिर पर हाथ फेरते हैं, कभी-कभी गाल को भी छू लेते हैं।

लता को ये सब अच्छा लगता था।

वो कहती थी, “दीदी, मामा जी के हाथ बहुत गर्म होते हैं, मुझे अच्छा लगता है जब वो मेरे बालों में हाथ फेरते हैं।”

हम दोनों बहनों को अब ये सब होने लगा था।

रातों को हम एक-दूसरे से बातें करते और कल्पनाएँ करते कि काश मामा जी हमें… वो बात हम पूरी नहीं कर पाते थे लेकिन दोनों समझ जाते थे।

हमारी चूतें गीली हो जातीं, हम अपने-अपने हाथों से खुद को शांत करते। कभी-कभी तो मैं सोचती कि काश मामा जी मेरे कमरे में आ जाएँ और…

यह सब सोचते-सोचते हफ़्ते बीत गए।

मौसम बदलने लगा था, बारिश का मौसम आने वाला था।

एक रात बहुत गर्मी थी, बिजली भी चली गई थी।

हमने सोचा कि छत पर सोएँगे क्योंकि वहाँ हवा चलती है।

मामा जी ने भी मान लिया। हमने छत पर चारपाइए बिछा दीं। मैं और लता एक चारपाई पर सोने वाली थीं और मामा जी दूसरी पर।

रात के करीब दो बजे अचानक आसमान में बादल गरजने लगे।

हल्की-हल्की बूंदें गिरने लगीं। मैं और लता जाग गईं। मामा जी भी उठ गए।

हमने सोचा नीचे चलते हैं लेकिन मामा जी ने कहा, “अरे रुको, थोड़ी बारिश में भीगना अच्छा होता है। तुम लोगों ने कभी बारिश में नहाया है?”

हम दोनों ने मना किया।

मामा जी ने कहा, “आओ मैं दिखाता हूँ कैसे नहाते हैं बारिश में।”

वो अपनी बनियान और निकर उतारकर सिर्फ़ अंडरवियर में हो गए।

बारिश की बूंदें उनके मोटे-मोटे बदन पर गिर रही थीं।

उनका अंडरवियर भीगकर उनके लंड का आकार साफ़ दिखाने लगा।

मैं और लता एक-दूसरे को देखने लगीं।

मामा जी ने हमें इशारा किया, “आओ ना, डरो मत।”

लता पहले उठी। उसने अपनी नाइटी उतार दी। अंदर वो ब्रा और पैंटी में थी। बारिश की बूंदें उसके गोरे बदन पर गिर रही थीं।

मामा जी उसे अपनी तरफ़ खींचने लगे। वो उनके इतने करीब हो गई कि उनका लंड उसकी पेट पर महसूस होने लगा।

मैं भी उठ गई, मेरे अंदर भी कुछ हो रहा था। मैंने भी अपनी नाइटी उतार दी। अब हम तीनों बारिश में भीग रहे थे।

मामा जी ने लता को पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

वो उसे किस करने लगे, जीभ उसके मुँह में डाल दी। लता भी उनका साथ देने लगी।

मैं पास खड़ी होकर देख रही थी, मेरी चूत गीली हो चुकी थी।

मामा जी ने एक हाथ मेरी तरफ़ बढ़ाया और मुझे भी अपनी तरफ़ खींच लिया।

अब वो मुझे भी किस करने लगे। उनकी जीभ मेरे मुँह में घूम रही थी, मैं पागल हो रही थी।

फिर मामा जी ने हम दोनों को छत पर बिछी चादर पर लिटा दिया।

बारिश अब तेज़ हो गई थी लेकिन हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था।

मामा जी पहले लता के ऊपर झुके। उन्होंने उसकी ब्रा खोल दी।

उसकी छोटी-छोटी, गोल-गोल चूचियाँ बाहर आ गईं।

मामा जी उन्हें दोनों हाथों से पकड़कर मसलने लगे, निप्पल्स को उंगलियों से निचोड़ने लगे। लता आहें भरने लगी।

फिर वो उसके पेट पर चूमते हुए नीचे गए, उसकी पैंटी उतार दी। उसकी गुलाबी चूत बारिश के पानी से भीगी हुई चमक रही थी।

मामा जी ने उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरी। लता की कमर ऊपर उठ गई।

वो उनके बालों में हाथ डालकर उन्हें और पास खींचने लगी।

मामा जी उसकी चूत को जीभ से चाट रहे थे, कभी अंदर डालते, कभी क्लिटरिस को चूसते।

लता पागल होकर चिल्लाने लगी, “आह मामा जी… बहुत मज़ा आ रहा है… और करो…”

अब मामा जी मेरी तरफ़ मुड़े। उन्होंने मेरी ब्रा भी खोल दी। मेरी चूचियाँ लता से बड़ी थीं, 34 साइज़ की।

मामा जी उन्हें पागलों की तरह चूसने लगे, दांतों से काटने लगे। मैं दर्द और मज़े की सीमा पर थी।

फिर उन्होंने मेरी पैंटी भी उतार दी। मेरी चूत पूरी तरह से गीली थी, रस टपक रहा था।

मामा जी ने मेरी चूत को भी वैसे ही चाटा, जैसे लता की थी। दो-तीन उंगलियाँ अंदर डालकर आगे-पीछे करने लगे। मैं झड़ने वाली थी।

फिर मामा जी ने अपना अंडरवियर उतार दिया। उनका लंड देखकर मैं चौंक गई।

वो करीब 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था। एकदम काला, नसों से भरा हुआ, और सख्त। लता भी उसे देखकर डर गई।

मामा जी ने कहा, “डरो मत, ये तुम्हें बहुत खुशी देगा।”

उन्होंने लता के पैर फैलाए और उसकी चूत पर अपने लंड का सुपाड़ा रगड़ा।

फिर धीरे से अंदर डालने की कोशिश की।

लता चीखी, “आह… दर्द हो रहा है मामा जी… बहुत मोटा है…” मामा जी ने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए।

थोड़ी देर में लता का दर्द कम हुआ और वो मज़े लेने लगी। उसकी चूत से आवाज़ें आने लगीं, चिकचिक की।

अब मेरी बारी थी। मामा जी लता से बाहर निकले और मेरे ऊपर आ गए।

उन्होंने मेरे पैर अपने कंधों पर रखे और लंड मेरी चूत पर सेट किया। एक ज़ोरदार धक्के में पूरा लंड अंदर घुस गया।

मैं चीख उठी लेकिन मज़ा भी आ रहा था। वो जोर-जोर से धक्के मारने लगे, मेरी चूत को पूरी तरह से भर रहे थे।

हर धक्के के साथ मेरी चूचियाँ हिल रही थीं, मामा जी उन्हें भी मसलते जा रहे थे।

फिर वो हम दोनों को बारी-बारी चोदने लगे। कभी लता की चूत में लंड डालकर पेलते, तो कभी मेरी में।

हम दोनों बहनें अब पूरी तरह से खुश थीं। लता मेरी चूचियाँ चूस रही थी जब मैं चुद रही थी, और मैं उसकी चूचियाँ चूस रही थी जब वो चुद रही थी।

मामा जी का लंड अब पूरी तरह से गर्म हो चुका था, उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

उन्होंने हम दोनों को घुटनों के बल बैठने को कहा।

हम दोनों बिल्ली की तरह बैठ गईं, गांड ऊपर उठाकर।

मामा जी पहले लता की गांड में उंगली डालकर उसे तैयार किया, फिर थूक लगाकर अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखा।

एक ज़ोरदार धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।

लता चीखने लगी, “बहुत दर्द हो रहा है… निकालो…” लेकिन मामा जी नहीं रुके। उन्होंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया और चोदने लगे।

अब मेरी गांड की बारी थी। मैं थोड़ा डरी हुई थी लेकिन उत्साहित भी।

मामा जी ने मेरी गांड को भी वैसे ही तैयार किया और अपना मोटा लंड मेरी गांड में घुसा दिया।

वो एक साथ मेरी गांड मार रहे थे और हाथ आगे बढ़ाकर लता की चूत में उंगली कर रहे थे।

हम दोनों बहनें एक-दूसरे के हाथ पकड़े हुए थीं, दर्द और मज़े की चीखें भर रही थीं।

करीब आधे घंटे तक मामा जी ने हम दोनों की गांड और चूत मारी।

बारिश अब और तेज़ हो गई थी, हम तीनों पूरी तरह से भीग चुके थे।

मामा जी ने अंत में हम दोनों को अपने सामने घुटनों पर बैठाया और अपना लंड हमारे मुँह में डाल दिया।

हम दोनों बहनों ने बारी-बारी से उनका लंड चूसा, जीभ से चाटा, और फिर वो हमारे मुँह में ही झड़ गए। उनका गरम-गरम माल हम दोनों ने पी लिया।

उस रात के बाद मामा जी हमारे कमरे में ही सोने लगे। हम तीनों एक ही बिस्तर पर सोते और रात भर चुदाई करते।

मम्मी-पापा के आने तक मामा जी ने हम दोनों बहनों को कई बार अलग-अलग तरीकों से चोदा।

कभी बाथरूम में, कभी रसोई में, कभी छत पर। हम दोनों अब उनकी रखैल बन चुकी थीं और हमें इसमें कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ़ खुशी थी।

अब जब भी मामा जी आते हैं, हम तीनों मिलकर वो सब करते हैं जो पति-पत्नी करते हैं।

लता और मैं दोनों अब मामा जी की दोनों पत्नियाँ हैं, और हम इस रिश्ते में बहुत खुश हैं।

बारिश की वो रात हमारी ज़िंदगी की सबसे यादगार रात है, जिसने हमें असली मज़े से रूबरू कराया।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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