hot sister sex story
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम प्रिया है। मेरी उम्र २० साल है और मैं जयपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हूँ।
मेरा फिगर ३६-२८-३६ है—पूरे गोल स्तन, पतली कमर, और मोटे नितंब। मेरे बाल लंबे और काले हैं, और मेरी आंखें हिरणी जैसी हैं।
दिखने में मैं बिल्कुल हीरोइन जैसी लगती हूँ।
मेरे चचेरे भाई का नाम आर्यन है। वो मुझसे एक साल छोटा है, १९ साल का।
वो गांव में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। वो दिखने में बिल्कुल पहलवान जैसा है—लंबा, चौड़ी छाती, और कसरती बदन।
गांव में वो कबड्डी खेलता है, इसलिए उसकी बॉडी बहुत फिट है।
मैं आर्यन को बचपन से ही पसंद करती थी।
वो मुझे हमेशा “दीदी” कहकर बुलाता था, लेकिन मेरे मन में उसके लिए कुछ और ही भाव थे।
जब भी वो शर्टलेस होकर खेतों में काम करता या कबड्डी खेलता, मेरी चूत में पानी आ जाता था।
होली की छुट्टियों में मैं गांव आई थी।
मेरे मम्मी-पापा एक शादी में जा रहे थे, इसलिए वो मुझे गांव छोड़कर चले गए।
घर में सिर्फ मैं, आर्यन, और मेरी दादी थीं।
दादी की तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए वो जल्दी सो जाती थीं।
मैंने सोचा, यह सही मौका है। मैं आर्यन को अपने काबू में करूंगी, और उससे अपनी चूत की आग बुझवाउंगी।
पहले दिन जब मैं गांव पहुंची, तो आर्यन मुझे देखकर शर्मा गया।
वो अभी भी वही शर्मीला लड़का था जो लड़कियों से आंख मिलाकर नहीं बात कर सकता था। ले
किन मैं जानती थी कि गांव की कई औरतें उससे चुदवा चुकी थीं।
मेरी एक सहेली ने मुझे बताया था कि आर्यन का लंड बहुत बड़ा है और वो चुदाई में महारथ हासिल कर चुका है।
शाम को मैंने आर्यन से कहा, “भाई, आज रात तू मेरे साथ घर पर ही रुक जा। मुझे अकेले डर लगता है।”
आर्यन ने हामी भर दी।
वो मेरे कहने से कभी मना नहीं करता था।
रात को हमने साथ में खाना खाया।
मैंने जानबूझकर एक हल्की सी ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी, जिसमें से मेरे स्तन और नितंब साफ झलक रहे थे।
मैंने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए मेरे निप्पल नाइटी से बाहर दिख रहे थे।
आर्यन मुझे देखता रहा, फिर नज़रें झुका ली।
मैं मुस्कुराई—मुझे पता था कि वो मुझे देखकर उत्तेजित हो रहा था।
सोने का वक्त आया।
मैंने जमीन पर एक बिस्तर बिछाया और आर्यन से कहा, “आ जा भाई, यहीं सो जा। दादी तो अपने कमरे में सो गई हैं।”
आर्यन झिझकता हुआ आया और मेरे बगल में लेट गया।
मैंने लाइट बंद कर दी, लेकिन मोबाइल की रोशनी से कमरा हल्का-हल्का दिख रहा था।
मैं करवट लेकर उसकी तरफ सोने लगी।
ऐसे करते हुए मेरा हाथ उसके पेट पर आ गया।
वो सिहर उठा, लेकिन कुछ नहीं बोला।
थोड़ी देर बाद मैंने जानबूझकर अपना पैर उसके पैर पर रख दिया।
फिर धीरे-धीरे मेरा पैर ऊपर बढ़ता गया—उसके घुटनों पर, फिर जांघों पर, और फिर उसके लंड के पास।
मैंने महसूस किया कि उसका लंड खड़ा हो रहा था।
वो तनकर अपनी पैंट में उभर रहा था।
मैंने हल्के से उसके लंड पर अपना पैर दबाया।
वो कांप उठा, लेकिन फिर भी चुप रहा।
“भाई, तू सोया नहीं अभी तक?” मैंने धीमी आवाज में पूछा।
“नहीं दीदी,” उसने कहा।
“क्या सोच रहा है?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं,” उसने कहा।
मैंने अपना हाथ उसके पेट से होते हुए ऊपर बढ़ाया—उसकी छाती पर, फिर उसके कंधों पर।
वो कांप रहा था।
“भाई, तू कितना गरम है,” मैंने कहा और उसके माथे पर हाथ रखा।
फिर मैंने अपना हाथ नीचे सरकाया—उसके पेट पर, फिर उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड पर।
“दीदी, यह क्या कर रही हो?” उसने घबराते हुए कहा।
“कुछ नहीं भाई, बस देख रही हूं कि तेरा लंड कितना बड़ा है,” मैंने कहा।
“दीदी, यह गलत है,” उसने कहा।
“क्या गलत है? मैं तो बस देख रही हूं,” मैंने कहा और उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया।
वो मजबूरी में लेटा रहा। मैंने महसूस किया कि उसका लंड और भी ज़्यादा कड़ा हो गया था।
“भाई, तेरा लंड तो बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।
“दीदी, प्लीज,” उसने कहा।
“प्लीज क्या? मैं तो इसे देखना चाहती हूं,” मैंने कहा और उसकी पैंट का हुक खोल दिया।
उसने कुछ नहीं कहा। मैंने धीरे से उसकी पैंट नीचे की और उसका लंड बाहर निकाल लिया।
ओह माँ! वो कम से कम ७ इंच का था, और बहुत मोटा। मैंने आज तक इतना बड़ा लंड नहीं देखा था।
“भाई, यह तो बहुत बड़ा है,” मैंने कहा और उसे हाथ में ले लिया।
वो गर्म था, कड़ा था, और कांप रहा था। मैंने उसे हिलाना शुरू किया।
“उम्म… दीदी…” उसके मुंह से आवाज निकली।
“कैसा लग रहा है?” मैंने पूछा।
“अच्छा लग रहा है,” उसने कहा।
मैंने उसका लंड और तेज़ी से हिलाया।
वो कराहने लगा।
फिर मैंने झुककर उसके लंड पर चूमा।
“दीदी, आप यह…” उसने कहा।
“चुप रह,” मैंने कहा और उसका लंड मुंह में ले लिया।
मैं उसे चूसने लगी। वो पागल हो रहा था। उसने मेरे सिर को पकड़ा और अपना लंड मेरे मुंह में पेलने लगा।
“उम्म… और अंदर… गले तक ले लो…” उसने कहा।
मैंने पूरी कोशिश की।
उसका लंड मेरे गले तक घुस रहा था।
मैं उसे चूस रही थी, जीभ से उसकी टोपी चाट रही थी।
“क्या मस्त चूसती हो दीदी… बहुत मज़ा आ रहा है…” उसने कहा।
मैंने १० मिनट तक उसका लंड चूसा। फिर उसने मुझे रोका।
“अब मैं तुम्हें चोदूंगा,” उसने कहा।
मैं लेट गई और अपनी नाइटी ऊपर उठाई।
मैंने नीचे पैंटी नहीं पहनी थी, इसलिए मेरी चूत साफ दिख रही थी।
“दीदी, तुमने पैंटी नहीं पहनी?” उसने पूछा।
“नहीं भाई, मैं तो तेरे लिए तैयार होकर आई थी,” मैंने कहा।
यह सुनकर वो पागल हो गया।
उसने मेरी टांगें चौड़ी कीं और मेरी चूत पर अपना लंड रखा।
“तैयार हो दीदी?” उसने पूछा।
“हां भाई, पेल दे… मेरी चूत फाड़ दे…” मैंने कहा।
उसने एक जोरदार धक्का दिया।
उसका मोटा लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं चीखी, “आह… माँ… दर्द…”
“दर्द तो होगा दीदी, लेकिन थोड़ी देर में मज़ा आएगा,” उसने कहा।
उसने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू किए।
मेरी चूत पहले तो टाइट थी, लेकिन फिर गीली होकर चिकनी हो गई।
उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा।
“फच… फच… फच…” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।
“कैसा लग रहा है दीदी?” उसने पूछा।
“बहुत अच्छा भाई… और तेज़… और जोर से…” मैंने कहा।
उसने गति बढ़ा दी।
वो जोर-जोर से मेरी चूत में धक्के मार रहा था।
मेरे स्तन हिल रहे थे।
उसने उन्हें पकड़कर दबाना शुरू कर दिया।
“तेरे चूचे कितने मस्त हैं दीदी,” उसने कहा।
“चूस इन्हें… काट इन्हें…” मैंने कहा।
उसने मेरी नाइटी उठाई और मेरे स्तनों को बाहर निकाल लिया।
वो एक स्तन को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा, दूसरे को हाथ से मसल रहा था।
“आह… भाई… बहुत मज़ा आ रहा है…” मैं कराह रही थी।
वो १५ मिनट तक मुझे इसी तरह चोदता रहा।
फिर उसने मुझे घुमाकर कुत्ते की तरह बना दिया।
अब वो पीछे से मेरी चूत चोद रहा था।
उसने मेरे बाल पकड़े और मेरा सिर पीछे खींचा।
“आह… भाई… और जोर से…” मैं चीख रही थी।
उसने मेरे नितंबों पर थप्पड़ मारे। “साली रंडी… बहुत चिल्लाती है…”
“हां… मैं रंडी हूं… मेरी माँ भी रंडी थी… हम दोनों ने तुम्हारा लंड लिया है…” मैंने कहा।
यह सुनकर वो और भी पागल हो गया।
उसने मुझे और तेज़ चोदना शुरू कर दिया।
मेरी चूत से पानी निकल रहा था।
“मैं झड़ने वाली हूं भाई…” मैंने कहा।
“मैं भी दीदी…” उसने कहा।
“अंदर ही झड़ जा… मेरी चूत में अपना माल छोड़ दे…” मैंने कहा।
उसने कुछ और जोरदार धक्के मारे और फिर मेरी चूत में ही झड़ गया।
मैंने महसूस किया कि उसका गरम वीर्य मेरी चूत में भर रहा है। मैं भी झड़ गई।
हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर गए।
उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
“कैसा लगा दीदी?” उसने पूछा।
“स्वर्ग जैसा भाई… मैंने आज तक इतना मज़ा नहीं लिया…” मैंने कहा।
“मुझे भी बहुत मज़ा आया,” उसने कहा।
थोड़ी देर बाद वो फिर से तैयार हो गया।
उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था।
“अब मैं तेरी गांड मारूंगा,” उसने कहा।
“भाई, वहां दर्द होगा…” मैंने कहा।
“डरो मत, मैं आराम से करूंगा,” उसने कहा।
उसने मुझे घुटनों के बल किया और मेरे नितंबों को चौड़ा किया।
उसने थूक लगाया और अपनी उंगली मेरी गांड में डाली।
“आह… धीरे…” मैंने कहा।
फिर उसने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया।
“आह… माँ… दर्द…” मैं चीखी।
“सहन करो दीदी, थोड़ी देर में मज़ा आएगा,” उसने कहा।
उसका आधा लंड अंदर चला गया। मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन मैं सहन कर रही थी।
फिर उसने एक और धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह… भाई… मर गई…” मैंने कहा।
“चुप रहो साली,” उसने कहा और धक्के लगाने शुरू कर दिए।
धीरे-धीरे मुझे मज़ा आने लगा। उसका लंड मेरी गांड में अंदर-बाहर हो रहा था।
“कैसा लग रहा है?” उसने पूछा।
“अच्छा लग रहा है… और तेज़ करो…” मैंने कहा।
उसने गति बढ़ा दी। वो जोर-जोर से मेरी गांड मार रहा था।
मेरी गांड से फच-फच की आवाजें आ रही थीं।
१० मिनट बाद वो मेरी गांड में ही झड़ गया।
उसका गरम वीर्य मेरी गांड में भर गया।
हम दोनों थककर सो गए।
अगली सुबह जब मेरी आंख खुली, तो मैंने देखा कि आर्यन फिर से मेरे ऊपर था।
उसका लंड फिर से खड़ा था।
“सुबह-सुबह एक बार और?” उसने पूछा।
“हां भाई, चोदो मुझे…” मैंने कहा।
उसने मुझे फिर से चोदा। इस बार वो और भी जोर से था।
उसने मुझे बाथरूम में भी चोदा, किचन में भी चोदा, और छत पर भी चोदा।
सात दिन तक मैं गांव में रही।
हर दिन, हर रात, हर कोने में हमने चुदाई की।
आर्यन ने मेरी हर पोजीशन में चुदाई की—मिशनरी में, डॉगी में, काउगर्ल में, और स्टैंडिंग में भी।
जब मैं वापस जयपुर जाने लगी,
तो आर्यन ने मुझे गले लगाया और कहा, “दीदी, तुम जब भी चाहो आ सकती हो। मेरा लंड हमेशा तुम्हारे लिए तैयार है।”
“और मेरी चूत भी हमेशा तेरे लिए तैयार है भाई,” मैंने कहा।
उसके बाद से मैं हर महीने गांव जाती हूं।
आर्यन मुझे चोदता है, मेरी प्यास बुझाता है, और मैं वापस अपने शहर चली जाती हूं।
मैं एक खुशहाल लड़की हूं।
मेरे पास मेरा भाई है जो मेरी चूत का ख्याल रखता है।
यह थी मेरी कहानी।
उम्मीद है आपको पसंद आई होगी…
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice story