professor madam ki chudai
मेरा नाम रोहन है और मैं बैंगलोर के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में फाइनल ईयर का स्टूडेंट था।
मेरी उम्र 24 साल थी और मैं कॉलेज की बास्केटबॉल टीम का कैप्टन था।
मेरी हाईट 6 फीट थी और जिम की वजह से मेरा बदन पूरी तरह से तराशा हुआ था।
हमारी कॉलेज में एक नई प्रोफेसर आईं – अनन्या मैम। वो कंप्यूटर साइंस की टीचर थीं और उनकी उम्र करीब 32 साल थी। उनका तलाक हुए 3 साल हो चुके थे। उनके पति एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे जो अब अमेरिका में रहते थे।
अनन्या मैम दिखने में बेहद खूबसूरत थीं।
उनकी हाईट 5’5″ थी, गोरा रंग, लंबे काले बाल और आंखें जैसे हिरणी की हों।
वो जब भी साड़ी पहनतीं, खासकर कॉटन की साड़ी, तो उनकी गोरी कमर और नाभि साफ झलकती थी।
उनका फिगर 34-28-36 था – बिल्कुल परफेक्ट।
मैं पहली बार उन्हें देखा तो ही मेरा दिल धड़क उठा।
वो लाइब्रेरी में बैठी किताब पढ़ रही थीं और सूरज की रोशनी उनके चेहरे पर पड़ रही थी।
मैं वहीं खड़ा होकर 10 मिनट तक उन्हें देखता रहा।
मेरी पढ़ाई में मन नहीं लगता था लेकिन स्पोर्ट्स में मैं कॉलेज का स्टार था।
मेरी अटेंडेंस 75% से ऊपर रहती थी क्योंकि स्पोर्ट्स कोटे से मुझे छूट मिलती थी।
एक दिन अनन्या मैम ने प्रोग्रामिंग की क्लास ली। मैं उस दिन लेट पहुंचा।
मैम ने मुझे रोका और कहा, “रोहन, तुम्हारी रेगुलैरिटी बहुत खराब है। तुम्हें पता है तुम्हारे इंटर्नल एग्जाम में मैंने तुम्हें पास किया है बड़ी मुश्किल से?”
मैंने कहा, “सॉरी मैम, बास्केटबॉल प्रैक्टिस होती है इसलिए…”
“बहाना नहीं चलेगा,” उन्होंने रोका, “कल से मेरे केबिन में आओ, मैं तुम्हें एक्स्टा क्लास दूंगी।”
अगले दिन मैं उनके केबिन में गया।
वो व्हाइट कुर्ते और जींस में थीं। उनके बाल खुले थे और एक हल्की सी परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो मुझे पागल कर रही थी।
“बैठो,” उन्होंने कहा।
मैंने उनके सामने वाली कुर्सी पर बैठा।
वो झुककर मेरे नोट्स देख रही थीं और उनके कुर्ते का गला थोड़ा खुला था।
मेरी नज़र बार-बार उनके क्लीवेज पर जा रही थी। मेरा लंड खड़ा होने लगा था।
“क्या देख रहे हो?” उन्होंने अचानक पूछा।
मैं घबरा गया, “कुछ नहीं मैम, आप बताइए…”
उन्होंने मुझे घूरा और फिर मुस्कुराईं, “फोकस करो पढ़ाई पर, लड़कियों पर नहीं।”
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थीं। मुझे लगा कि शायद वो भी…
अगले कुछ दिनों में मैं रोज उनके केबिन में जाता।
हमारी बातें पढ़ाई से हटकर निजी होने लगीं।
एक दिन उन्होंने बताया कि उनका तलाग क्यों हुआ – उनके पति उन्हें धोखा दे रहे थे।
“मैंने 5 साल की शादी में कभी खुशी नहीं देखी,” उन्होंने कहा, “उसके बाद से मैं अकेली हूं।”
मैंने कहा, “मैम, आप इतनी खूबसूरत हैं, आपको कोई भी मिल जाएगा…”
वो मेरी आंखों में देखने लगीं, “खूबसूरती क्या काम आती है रोहन, जब कोई प्यार से देखने वाला न हो तो…”
उस दिन मैंने हिम्मत की।
मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।
उन्होंने हाथ खींचने की कोशिश की लेकिन मैंने नहीं छोड़ा।
“मैम, मैं आपको देखने वाला हूं… बहुत देखता हूं आपको…”
“रोहन, ये गलत है,” उन्होंने कहा लेकिन उनकी आवाज़ कांप रही थी।
“मुझे पता है आप भी मुझे देखती हैं,” मैंने कहा, “जब मैं बास्केटबॉल खेलता हूं तो आप स्टैंड्स में खड़ी होकर देखती हैं।”
वो चुप हो गईं। उनका चेहरा लाल हो गया।
“चलो यहां से,” उन्होंने कहा, “कल मत आना।”
मैंने अगले दिन भी जाना।
वो गुस्से में थीं लेकिन मैंने दरवाजा बंद कर लिया और उनके पास जाकर घुटनों के बल बैठ गया।
“मैम, प्लीज… मैं आपसे प्यार करता हूं…”
“पागल हो गए हो!” उन्होंने कहा, “मैं तुमसे दोगुनी उम्र की हूं, तुम्हारी टीचर हूं!”
“मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता,” मैंने कहा और उनके हाथ पकड़कर चूम लिए।
वो खड़ी होकर दूसरी तरफ चली गईं।
मैंने उनका रास्ता रोका।
हमारी आंखें मिलीं।
अचानक उन्होंने मेरे कॉलर पकड़ा और मुझे कसकर किस कर लिया।
वो जानवरों की तरह मुझे चूसने लगीं।
मैं भी पागल होकर उनके होंठ चूसने लगा।
5 मिनट तक हम एक-दूसरे को चूसते रहे।
फिर उन्होंने मुझे धक्का दिया, “नहीं… ये गलत है… चले जाओ…”
मैंने कहा, “आज नहीं जाऊंगा मैम… आज मैं आपको अपना बनाऊंगा…”
मैंने उन्हें उठाया और केबिन के सोफे पर बिठा दिया।
वो मना करती रहीं लेकिन मेरी तरफ देख रही थीं।
मैंने उनका कुर्ता ऊपर उठाया और उनकी कमर पर किस करने लगा।
“आह… रोहन… नहीं…” उनकी सिसकी निकली।
मैंने उनकी जींस का बटन खोला और जींस नीचे खींची।
वो व्हाइट पैंटी में थीं।
मैंने उनकी पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर हाथ फेरा। वो गीली थीं।
“देखो, आप भी चाहती हो…” मैंने कहा।
वो शर्मा गईं।
मैंने उनकी पैंटी उतारी।
उनकी चूत पर हल्की-हल्की झांटें थीं। मैंने उनकी टांगें फैलाई और चूत पर जीभ रख दी।
“ओह गॉड… रोहन…” वो मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत में दबाने लगीं।
मैंने 15 मिनट तक उनकी चूत चाटी।
वो दो बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत का स्वाद बहुत मीठा था।
फिर मैंने खड़े होकर अपनी जींस उतारी।
मेरा 7.5 इंच का लंड देखकर वो घबरा गईं, “ये… ये तो बहुत बड़ा है… मैं… मैं 5 साल से…”
“शांत रहो मैम,” मैंने कहा, “आज मैं आपको वो मज़ा दूंगा जो आपने कभी नहीं लिया…”
मैंने अपना लंड उनके मुंह के पास लाया।
पहले तो उन्होंने मना किया लेकिन फिर चूसने लगीं।
वो अनाड़ी थीं लेकिन मज़ा बहुत आ रहा था।
10 मिनट बाद मैंने उन्हें सोफे पर लेटाया। उनकी चूत बिल्कुल गुलाबी थी।
मैंने अपना लंड उनके मुहाने पर रखा और धीरे से अंदर डालने लगा।
“आह… धीरे… दर्द हो रहा है…” वो कराह उठीं।
मैंने उनके होंठ चूसे और एक जोरदार झटका दिया।
मेरा आधा लंड अंदर चला गया।
वो चीखीं लेकिन मैंने रुका नहीं।
धीरे-धीरे मैंने पूरा लंड अंदर डाल दिया।
“कैसा लग रहा है मैम?” मैंने पूछा।
“बहुत… बहुत अच्छा…” वो सिसकीं।
मैंने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू किए। “फच… फच… फच…” की आवाज़ आने लगी। वो अब मज़े में आ गई थीं।
“और तेज़… हां… चोदो मुझे…” वो बोलने लगीं।
मैंने उनकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।
केबिन में हमारी सांसों की आवाज़ गूंज रही थी।
20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने उनकी चूत में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। वो भी मेरे साथ झड़ीं।
हम दोनों थककर सोफे पर पड़े रहे।
उन्होंने मेरे सीने पर हाथ फेरा और कहा, “तुमने आज जो किया, वो किसी ने नहीं किया…”
उस दिन के बाद हमारा रिश्ता बदल गया।
कॉलेज में वो मेरी टीचर थीं लेकिन केबिन में या उनके फ्लैट पर वो मेरी आशिका बन जाती थीं।
मैं हर रोज उनके फ्लैट पर जाता। उनकी बेटी स्कूल जाती थी, उसके जाने के बाद हम पूरे दिन चुदाई करते।
मैंने उन्हें हर तरह से चोदा – बाथरूम में, किचन में, सोफे पर, बालकनी में।
वो पहले शर्माती थीं लेकिन फिर खुल गईं।
एक दिन उन्होंने मुझे कहा, “रोहन, मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं…”
मैंने कहा, “मैम, मेरी उम्र अभी कम है, मुझे करियर बनाना है… लेकिन मैं आपसे प्यार ज़रूर करता हूं…”
वो निराश हुईं लेकिन मान गईं।
हमारा रिश्ता 2 साल तक चला।
कॉलेज खत्म होने के बाद मैंने जॉब ली और उनसे मिलना कम कर दिया।
एक साल बाद उन्होंने एक डॉक्टर से शादी कर ली।
शादी से पहले उन्होंने मुझे एक लेटर भेजा: “रोहन, तुमने मुझे वो खुशी दी जो मैंने कभी सोची नहीं थी। तुम्हारी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।”
मैंने भी उन्हें मेसेज किया: “आप मेरी पहली टीचर थीं, पहली महिला थीं, और हमेशा मेरे दिल में रहेंगी…”
आज भी जब मैं बैंगलोर जाता हूं, तो उनके कॉलेज के सामने से गुजरता हूं और वो पल याद आता है जब एक प्रोफेसर और स्टूडेंट ने प्यार और वासना की सीमाएं तोड़ दी थीं…
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
wow, mast chudai mam