मामा की बेटी पुरे गाँव की रंडी बन गयी

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मेरा नाम अरुण है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ।

मैं आज आपको अपनी मामा की बेटी कविता की कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जो कि मेरी मौसी की लड़की भी है और जिसने हमारे पूरे गाँव को अपने जिस्म से वश में कर लिया था।

यह कहानी उस समय की है जब कविता हमारे गाँव में रहने आई और धीरे-धीरे पूरे गाँव की रंडी बन गई।

मेरे मामा जी का नाम रघुनाथ है और वो शहर में रहते हैं। उनकी बेटी कविता उस समय 21 साल की थी।

वो दिखने में बहुत खूबसूरत थी – गोरा बदन, लंबे काले बाल, और एक ऐसा फिगर जिसे देखकर कोई भी मर्द पागल हो जाए।

उसके बूब्स 36 इंच के गोल और उभरे हुए थे, कमर 28 इंच की बिल्कुल पतली, और गांड 38 इंच की मोटी और गोल।

वो जब चलती थी तो उसकी गांड ऐसे हिलती थी जैसे दो गुलाब के फूल हवा में थिरक रहे हों।

कविता के पापा यानी मेरे मामा जी की तबीयत खराब हो गई थी, इसलिए वो अपनी बेटी को हमारे गाँव छोड़कर गए थे ताकि वो हमारे साथ रहे जब तक उनकी तबीयत ठीक नहीं हो जाती।

कविता को शहर की जिंदगी से गाँव की जिंदगी में आना पड़ा और शुरू में वो इससे बहुत नाखुश थी।

हमारे गाँव में करीब 50-60 घर हैं और यहाँ के लोग बहुत ही पुरुष प्रधान हैं।

यहाँ की औरतें ज़्यादातर घरों में ही रहती हैं और मर्दों की हर बात मानती हैं।

कविता जब पहली बार गाँव आई तो सबकी नज़रें उस पर टिक गईं।

वो शहरी कपड़े पहनती थी – टाइट जींस, टॉप, और जब वो चलती थी तो उसके शरीर की हर एक लहर साफ दिखती थी।

हमारे गाँव के मर्दों में उसे देखकर एक अलग ही लालच पैदा हुआ।

वो सब सोचने लगे कि इस शहरी माल को चोदने में कितना मज़ा आएगा।

लेकिन शुरू में कोई भी उसके पास जाने की हिम्मत नहीं करता था क्योंकि वो मामा की बेटी थी और सबको डर था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए।

कविता हमारे घर में रहती थी।

मेरे पापा और मम्मी उसे अपनी बेटी की तरह रखते थे।

मैं और कविता एक ही उम्र के थे इसलिए हमारी अच्छी बनती थी।

वो मुझे अपने सारे दुख बताती थी – कैसे शहर में उसके बॉयफ्रेंड ने उसे धोखा दिया था, कैसे वो सेक्स के लिए तरस रही थी लेकिन उसे कोई सही मर्द नहीं मिल रहा था।

एक दिन रात को जब सब सो रहे थे, मैंने देखा कि कविता बाथरूम की तरफ जा रही थी।

वो सिर्फ एक नाइटी पहने हुए थी और अंदर कुछ नहीं था।

मैंने दरवाजे से झाँका तो देखा कि वो नहाने जा रही थी।

मैंने उसे नंगा देखने की कोशिश की और सफल भी रहा।

जब उसने अपनी नाइटी उतारी तो मैंने उसके गोल बूब्स और चिकनी चूत देखी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

अगले दिन मैंने उससे बात करने की कोशिश की।

मैंने उसे बताया कि मैंने उसे नंगा देखा है। पहले तो वो शर्माई और गुस्सा भी हुई, लेकिन फिर वो शांत हो गई।

उसने मुझसे पूछा, “तुमने क्या देखा?”

मैंने कहा, “सब कुछ देखा। तुम बहुत खूबसूरत हो कविता।”

वो मुस्कुराई और बोली, “अच्छा? तुम्हें मेरा शरीर पसंद आया?”

मैंने कहा, “बहुत पसंद आया।”

वो फिर बोली, “तो क्या करोगे उसका?”

मैंने हिम्मत करके कहा, “मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”

वो हँसने लगी और बोली, “पागल हो क्या? मैं तुम्हारी बहन जैसी हूँ।”

मैंने कहा, “लेकिन तुम्हारी तो अभी कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं है। तुम्हें भी तो चुदवाना है ना?”

वो सोचने लगी और फिर बोली, “ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए।”

उसी रात जब सब सो गए, हम दोनों छत पर मिले।

वहाँ अंधेरा था और कोई नहीं था। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और किस करने लगा।

वो भी मेरा साथ दे रही थी। मैंने उसके बूब्स दबाए और उसकी चूत में उंगली की। वो गीली हो चुकी थी।

फिर मैंने उसे नीचे बैठने को कहा और अपना लंड उसके मुँह में दे दिया।

वो उसे चूसने लगी। 10 मिनट बाद मैंने उसे लिटाया और उसकी चूत में लंड डालकर चोदना शुरू किया।

वो चीख रही थी लेकिन मज़ा भी ले रही थी। मैंने उसे करीब आधे घंटे तक चोदा और फिर अपना वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया।

यह हमारी पहली चुदाई थी। इसके बाद हम रोज़ाना चुदाई करने लगे।

लेकिन कविता का मन अब भी नहीं भरा था। वो और चाहती थी।

वो कहती थी कि एक लंड से उसका काम नहीं चलेगा।

एक दिन हमारे गाँव के प्रधान यानी मुखिया जी का लड़का सुरेश हमारे घर आया।

वो 30 साल का था और बहुत ही दबंग था।

उसने कविता को देखा और उसकी आँखें उस पर टिक गईं।

वो मुझसे बोला, “अरुण, यह तुम्हारी बहन है? बहुत माल है यार।”

मैंने कहा, “हाँ, मेरी मौसी की लड़की है।”

वो बोला, “मुझे इससे मिलना है। तुम बुलाओ उसे।”

मैंने कविता को बुलाया। जब वो आई तो सुरेश उसे घूर-घूर कर देखने लगा।

उसने कविता से कहा, “तुम बहुत खूबसूरत हो। क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी?”

कविता ने मुझे देखा और मैंने आँख मारी।

वो समझ गई।

उसने कहा, “क्यों नहीं? लेकिन कहाँ?”

सुरेश ने कहा, “आज रात को गाँव के बाहर पुराने कुएँ के पास मिलो। वहाँ कोई नहीं आता।”

रात को कविता वहाँ गई। मैं भी छुपकर उसके पीछे गया ताकि देख सकूँ कि क्या होता है।

सुरेश वहाँ अकेला था। उसने कविता को देखते ही अपनी बाहों में भर लिया और किस करने लगा।

कविता भी उसका साथ दे रही थी। फिर सुरेश ने उसके कपड़े उतार दिए और उसे नंगा कर दिया।

उसने कविता के बूब्स चूसे, उसकी चूत चाटी, और फिर उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदा।

कविता चीख रही थी, “आह्ह्ह… और तेज़… मारो मुझे…” सुरेश ने उसे करीब एक घंटे तक चोदा और फिर अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया।

इसके बाद सुरेश ने अपने दोस्तों को भी बता दिया कि यह लड़की चुदने के लिए तैयार है।

अगले दिन से गाँव के लड़के कविता के पीछे पड़ गए।

वो उसे अलग-अलग जगहों पर बुलाते और चोदते। कविता भी अब खुल गई थी। उसे मज़ा आने लगा था।

वो रोज़ाना किसी ना किसी से चुदवाती। कभी सुबह खेत में किसान से, कभी दोपहर को स्कूल के टीचर से, कभी शाम को दुकानदार से।

वो पूरे गाँव की रंडी बन चुकी थी। लेकिन वो इससे खुश थी क्योंकि उसे हर रोज़ नए-नए लंड मिल रहे थे।

एक दिन गाँव के पंचायत में यह बात उठी कि यह लड़की बहुत बदनाम है।

लेकिन क्योंकि वो मामा की बेटी थी, इसलिए कोई उसे कुछ नहीं बोलता था।

वो गाँव के हर मर्द को अपने जिस्म का मज़ा देती और वो सब उससे खुश रहते थे।

कविता अब पूरी तरह से बदल गई थी। वो अब साड़ी पहनने लगी थी जिसमें उसकी गांड और बूब्स साफ दिखते थे।

वो गाँव के मर्दों से पैसे भी लेने लगी थी। वो एक पेशेवर रंडी बन गई थी।

लेकिन वो इससे खुश थी क्योंकि उसे वो मज़ा मिल रहा था जो वो चाहती थी।

मैं भी अब उससे रोज़ाना चुदवाता था।

वो मुझसे कहती, “अरुण, तुम मुझे बहुत अच्छा चोदते हो। लेकिन और भी लंड चाहिए मुझे। मेरी चूत प्यासी है।”

मैंने उसे कहा, “तुम जो चाहो करो। मुझे कोई दिक्कत नहीं है।”

और इस तरह कविता पूरे गाँव की रंडी बन गई और वो इससे बहुत खुश थी।

उसकी यह कहानी आज भी गाँव में मशहूर है और लोग उसे याद करके आज भी अपना लंड हिलाते हैं।

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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