slut woman xxx sex story
उस रात के बाद जब सूरज निकला, तो छत पर पड़ी चारपाइयों पर चारों की हालत देखने लायक थी। रानू की जाँघों पर सूखे वीर्य के धब्बे थे, उसकी चूचियों पर मेरे और सोनू के दाँतों के निशान, और उसकी बुर अब भी सूजी हुई, लाल और गरम थी।
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पढ़े की मौसी अपनी बेटी को हमसे ग्रुप में चुदवाई
मौसी नीलम अपनी बेटी के पास लेटी हुई थी और उसके बाल सहला रही थी। रानू ने आँखें खोलीं, पहले मौसी को देखा, फिर हम दोनों को, और शरमाकर चादर खींच ली — जैसे कल रात कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन उसकी आँखों में जो चमक थी, वो साफ़ बता रही थी कि अब वो भी उसी राह पर चल पड़ी है जिस पर उसकी माँ चल रही थी।
मौसी उठी, अँगड़ाई ली, और अपने नंगे बदन पर सिर्फ़ एक पतली सूती साड़ी लपेटकर नीचे चली गई — चाय बनाने। उसकी भारी चूचियाँ साड़ी के नीचे झूल रही थीं और बयालीस इंच की गांड हर क़दम पर मटक रही थी।
मैंने सोनू को कोहनी मारी, “देख, मौसी आज भी कमाल की लग रही है।” सोनू ने मुँह से आवाज़ निकाली, “साला, इस औरत का जिस्म ही ऐसा है कि चुदाई के बाद भी ऐसे लगता है जैसे कुछ हुआ ही न हो। बल्कि और निखर जाती है।”
रानू भी उठी और शरमाते हुए कपड़े पहनने लगी। मैंने उसे देखा — सत्रह साल की कच्ची कली, जो कल रात तक कुँवारी थी, आज सुबह दो मर्दों की रंडी बनकर उठी थी।
उसकी चाल में वो पहले वाला भोलापन तो था, लेकिन अब उसमें एक हल्का-सा नखरा और एक नई चेतना भी आ गई थी — जैसे उसे पता चल गया हो कि उसके बीच में जो चीज़ है, वो कितनी कीमती है। नीचे जाते-जाते उसने पीछे मुड़कर हमें देखा और धीरे से मुस्कुरा दी।
चाय पीते-पीते मौसी ने हमें इशारा किया कि रानू को कुछ देर के लिए बाहर भेज दें — बाज़ार से सामान लाने।
जैसे ही रानू गई, मौसी ने अपनी चाय रख दी और हम दोनों की तरफ़ घूमकर बैठ गई। उसके चेहरे पर वही शातिर मुस्कान थी।
“सुनो,” मौसी ने कहा, “आज रात कुछ और करेंगे।”
“क्या?” मैंने पूछा, दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
“आज माँ-बेटी दोनों साथ होंगी। एक ही बिस्तर पर, एक ही चादर के नीचे। दोनों की चुदाई एक साथ। और तुम दोनों के साथ रोहन भी रहेगा।” मौसी ने एक-एक करके सब बताया, “मैं चाहती हूँ कि आज रानू देखे कि उसकी माँ को कैसे चोदा जाता है, और मैं देखूँ कि मेरी बेटी को कैसे चोदा जाता है। और बीच-बीच में हम दोनों एक-दूसरे को भी चूमें, चूसें।”
सोनू ने हकलाते हुए पूछा, “मौसी, मतलब… तू और रानू… आपस में भी?”
मौसी हँसी, “हाँ, क्यों नहीं? औरत की चूची औरत के हाथ में भी अच्छी लगती है। और फिर आज रानू को तो मज़ा चाहिए, और मुझे भी। माँ-बेटी की जुगलबंदी बनाएँगे।”
यह सुनकर मेरा लंड पैंट में खड़ा हो गया। सोनू भी ऐसे बैठ गया जैसे अभी उठकर नाच पड़ेगा।
मौसी ने यह देखकर हँसते हुए कहा, “देख रही हूँ, दोनों फिर तैयार हैं। पर आज रात का इंतज़ार करो। दिन में आराम कर लो, क्योंकि आज रात लंबी होगी और तीनों को बराबर हिस्सा मिलेगा।”
शाम को रोहन काका आ गए। चालीस के मज़बूत बदन वाले, पसीने से चमकते, हाथ-पैर में किसानों जैसी ताक़त।
आते ही उन्होंने मौसी को देखकर आँख मारी और बोले, “नीलम जी, आज तो सुना है पूरा परिवार ही एक साथ है। माँ भी, बेटी भी।”
मौसी ने हँसकर कहा, “हाँ रोहन, आज तेरा भी पूरा हिस्सा है। पर पहले एक शर्त — आज रानू नई है, तो उसके साथ ज़रा नरमी से। तेरा मोटा है, वो डर जाएगी।”
रोहन काका ने अपना मोटा लंड पैंट के ऊपर से दबाकर कहा, “अरे नीलम जी, जिस बुर ने तेरे जैसा पूरा परिवार जना है, उसमें मेरा भी समा जाएगा। और रानू तो तेरी बेटी है — मेरी भी बिटिया जैसी।”
रात हुई, खाना खाया, और मौसी ने आज बिस्तर नीचे ही लगवाया — एक बड़ा-सा गद्दा ज़मीन पर बिछा दिया, ऊपर साफ़ चादर। क्योंकि आज तीन मर्द और दो औरतें थीं, और छत की चारपाइयाँ छोटी पड़ जातीं।
मौसी ने आज घर के सारे दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद कर दीं, ताकि कोई आवाज़ बाहर न जाए।
रानू को सब पता था — वो शरमा रही थी, लेकिन साथ ही उत्सुक भी थी। उसने आज मौसी की सलाह पर एक ढीली सी नाइटी पहनी थी, जिसमें उसकी चूचियों का उभार और निपल्स साफ़ दिख रहे थे।
मौसी ने रात के खाने के बाद हम सबको बैठाकर बातें कीं, हँसी-मज़ाक किया, ताकि माहौल ढीला हो जाए।
रोहन काका ने रानू को उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा, हँसी-हँसी में उसका मज़ाक बनाया, और रानू खिलखिला उठी।
फिर मौसी ने रानू से पूछा, “बिटिया, कल रात कैसी थी?”
रानू ने मुँह छिपाकर कहा, “मम्मी, आप भी ना… इतना पूछती हैं।”
“तो बता ना, आज फिर चाहिए या नहीं?”
रानू ने धीरे से सिर हिला दिया। और यही इशारा था — आज रात की शुरुआत।
मौसी ने सबसे पहले रानू को अपने पास बुलाया और उसके बाल पीछे किए। फिर उसने रानू का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके माथे पर होंठ रखे — एक लंबा, नरम स्मूच। रानू ने आँखें बंद कर लीं।
फिर मौसी के होंठ माथे से नीचे, गालों पर, और फिर रानू के होंठों पर आ गए। माँ और बेटी के होंठ एक-दूसरे से लिपट गए।
रानू ने पहले तो झिझकी, फिर धीरे-धीरे जवाब दिया। “म्म्म… स्मूच…” की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगीं। रोहन काका, सोनू और मैं तीनों यह नज़ारा देखकर पत्थर बन गए।
मौसी ने रानू का होंठ चूमते-चूमते उसकी नाइटी के तार खोल दिए। नाइटी खिसककर गिर गई और रानू फिर नंगी खड़ी हो गई — सफ़ेद, चिकनी देह, छोटी-सी गोल गांड, कसी चूचियाँ और गुलाबी निपल्स।
मौसी ने झुककर रानू की चूचियों को अपने हाथों में लिया और उन्हें दबाने लगी। फिर उसने रानू के एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। रानू ने “आह” करके मौसी का सिर पकड़ लिया, “मम्मी… आप भी… अच्छा लगता है…”
मौसी ने दूसरा निप्पल भी चूसा, और फिर रानू को घुटनों के बल बैठाकर उसकी चूचियों को चूसते-चूसते नीचे उसकी बुर तक पहुँच गई।
रानू की बुर अभी भी सूजी हुई थी, लेकिन गीली होने लगी थी। मौसी ने अपनी जीभ रानू की बुर पर लगाई और चाटने लगी। रानू की कमर झटके से उठ गई, “आआह मम्मी… वहाँ… वहाँ मत… मर जाऊँगी…”
मौसी ने बुर चाटते-चाटते कहा, “बिटिया, औरत को औरत ही समझती है। अब देख, तू कैसे पिघलती है।” और वो जीभ से रानू की बुर के होंठ चाटती, चूसती, और अंदर तक घुसाती।
रानू दोनों हाथों से मौसी का सिर दबाकर कराह रही थी। यह नज़ारा देखकर तीनों के लंड पत्थर हो चुके थे।
अब हम भी शामिल हुए। सोनू ने मौसी को पीछे से पकड़ा और उसकी गर्दन चूमने लगा।
रोहन काका ने मौसी की बयालीस इंच की गांड पर हाथ रखकर उसे दबाया। और मैं रानू के पीछे बैठकर उसकी पीठ और कमर चूमने लगा। इस तरह चारों ने दोनों औरतों को घेर लिया।
मौसी ने रानू को चूमते-चूमते मेरी तरफ़ देखा और बोली, “वेद, अब तू रानू की चूचियाँ चूस। और सोनू, तू मेरी चूत चाट। रोहन, तू मेरी गांड पर होंठ लगा।” और सब वैसा ही करने लगे।
मैंने रानू की चूचियाँ दबाईं और निपल्स चूसने लगा, और सोनू मौसी की बुर के सामने घुटने टेककर उसे चाटने लगा।
मौसी की बुर बड़ी, रसीली और गरम थी, और जब सोनू की जीभ उस पर पड़ी, तो मौसी ने लंबी कराह छोड़ी, “आह सोनू… ऐसे ही… मेरी चूत चाट… और अंदर… और अंदर जीभ डाल…” रोहन काका ने मौसी की गांड के गड्ढे पर अपनी जीभ लगाई और उसे सहलाने लगे।
मौसी अब दो तरफ़ से चाटी जा रही थी — आगे बुर पर सोनू की जीभ, पीछे गांड पर रोहन की जीभ।
कुछ देर बाद मौसी ने सोनू को अपनी बुर चटवाते-चटवाते कहा, “बस… अब अंदर आओ… पहले मेरी चूत में लंड डालो।” और सोनू ने अपनी पैंट खोलकर अपना दस इंच का लंड बाहर निकाला। वो आज भी वैसा ही खड़ा था — लाल, मोटा, और चमकता हुआ।
सोनू ने मौसी को घुटनों के बल कर दिया और उसकी बयालीस इंच की गांड ऊपर उठा दी। मौसी की चूत पूरी खुली, गीली और लाल थी।
सोनू ने अपना लंड उसके मुँह पर रखकर एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया।
मौसी ज़ोर से चीखी, “आआआह… सोनू… तेरा लंड… मेरी चूत में… पूरा भर गया… ऐसे ही ठोक मुझे… ठोक अपनी रंडी को…”
सोनू ठोकने लगा — पहले धीरे, फिर तेज़। हर ठोकर पर मौसी की गांड लहराती और उसकी भारी चूचियाँ झूलतीं।
मैं सामने जाकर उन झूलती चूचियों को पकड़ता, दबाता और निपल्स चूसता।
मौसी एक साथ पीछे से चुद रही थी और आगे से दूध चुसवा रही थी।
रोहन काका पीछे खड़े होकर मौसी की गांड को सहला रहे थे और उसके गड्ढे पर अपनी उँगली फेर रहे थे।
“चोद सोनू… ज़ोर से चोद… मेरी चूत फाड़ दे… तेरी रंडी को चोद…” मौसी बेबाक होकर गालियाँ बक रही थी, और सोनू जवाब देता, “ले नीलम, ले रंडी, तेरी चूत कितनी गरम है… ले मेरा लंड पूरा अंदर… ले-ले-ले…”
रानू यह सब देख रही थी — अपनी माँ को दस इंच के लंड पर कराहते हुए। उसकी आँखें बड़ी हो गई थीं, और उसकी बुर से रस बहने लगा था।
मौसी ने रानू की तरफ़ देखकर कहा, “बिटिया, देख कैसे चुदती है तेरी माँ। अब तू भी तैयार हो।” और फिर रानू को बुलाकर उसने उसका सिर नीचे किया और मेरा लंड उसके मुँह में डाल दिया।
रानू ने मेरा सात इंच का लंड होंठों में लिया और चूसने लगी। पहले धीरे-धीरे, फिर जैसे-जैसे मौसी की कराहें तेज़ होती गईं, रानू भी उत्साहित होकर तेज़ चूसने लगी।
उसकी जीभ सिरे पर घूमती, और वो पूरा लंड मुँह में लेने की कोशिश करती।
सोनू यह देखकर हँसा, “वाह रानू, तू तो माँ से भी तेज़ निकली। मुँह में भी लंड ले रही है और माँ की चूत भी चुद रही है।”
सोनू कुछ देर और ठोकता रहा, फिर बाहर निकल आया। उसका लंड मौसी के रस से लथपथ, चमकता हुआ था।
मौसी की चूत खुली और फैली हुई थी। अब रोहन काका आगे आए। उन्होंने पहले मौसी की चूत में अपना मोटा लंड कुछ देर ठोका, और फिर उसे निकालकर मौसी की गांड के गड्ढे पर रख दिया।
“नीलम जी, आज गांड भी लेगी?” रोहन काका ने पूछा।
मौसी ने बिना झिझक कहा, “ले रोहन, आज पूरी ले। चूत भी, गांड भी। आज मेरी बेटी देख रही है, तो दिखा दे कि उसकी माँ कैसे चुदती है।”
रोहन ने मौसी की गांड पर थूका, उसे चिकना किया, और अपना लंड गड्ढे पर रखा। मौसी ने गहरी साँस ली और रोहन ने धीरे-धीरे धकेला।
पहले गड्ढा कसा हुआ था, लेकिन जैसे ही लंड अंदर गया, मौसी की आँखें बंद हो गईं, “आआह… गांड में भी… हाय राम… कितना मोटा है… पूरा भर गया… ऐसे ही ठोक रोहन… ऐसे ही…”
रोहन ठोकने लगे और मौसी की गांड पर दोनों हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से पेलने लगे। मौसी की गांड हर झटके पर लहराती और उसकी चूचियाँ झूलतीं।
मैंने सामने से मौसी की चूत में अपना लंड घुसा दिया — अब मौसी दोनों तरफ़ से भरी हुई थी, आगे मेरा लंड चूत में, पीछे रोहन का लंड गांड में। मौसी दोनों जगह एक साथ चुद रही थी।
“हाय राम… दोनों जगह… पूरी भर गई… वेद, तू भी ठोक… और रोहन तू भी… मुझे फाड़ दो दोनों तरफ़ से…” मौसी बेबाक होकर चीख रही थी।
उसकी चूत और गांड दोनों एक साथ भरी हुईं, और हर ठोकर पर उसकी पूरी देह काँपती।
मैं झुककर उसके होंठ चूमता, उसकी चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता, और रोहन पीछे से उसकी गांड को ज़ोर से ठोकते।
रानू यह सब देखकर पागल हो रही थी। उसने खुद अपनी बुर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।
मौसी ने यह देखकर कहा, “रुक बिटिया, अभी तेरी बारी आएगी। अभी हाथ मत लगा, पूरी भूख बनाए रख।”
अब मौसी ने पूरा खेल बदल दिया। उसने रोहन और मुझे रुकने का इशारा किया और रानू को अपने सामने बिठाया।
फिर उसने रानू की बुर के सामने मुँह रखा और चाटने लगी, और रानू को इशारा किया कि वो भी उसकी चूत चाटे।
अब माँ और बेटी एक-दूसरे की बुर चाट रही थीं — दोनों की टाँगें एक-दूसरे की तरफ़, दोनों के मुँह एक-दूसरे की चूत पर।
यह नज़ारा देखकर तीनों के लंड पत्थर हो गए। रोहन काका ने कहा, “नीलम जी, ये तो कमाल है। माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाट रही हैं।”
मौसी ने चाटते-चाटते कहा, “और आगे भी करेंगी रोहन। आज पूरी रात है।”
कुछ देर दोनों ने एक-दूसरे की बुर चाटी, एक-दूसरे की चूचियाँ चूसीं, और होंठ चूमे।
फिर मौसी ने रानू को घुटनों के बल किया और उसके पीछे खड़े होकर उसकी गांड पर हाथ फेरा। रानू की छोटी-सी गांड थी, और मौसी ने उसे दबाकर कहा, “बिटिया, आज तेरी चूत में बड़ा लंड जाएगा। डरना मत।”
अब सोनू आगे आया और अपना दस इंच का लंड रानू की बुर पर रखा। रानू ने गहरी साँस ली। सोनू ने धीरे-धीरे धकेला और पूरा लंड अंदर चला गया।
रानू ने चीख पड़ी, “आआआह… फिर से… इतना बड़ा… मम्मी… पकड़ो मेरा हाथ…” मौसी ने रानू का हाथ पकड़ लिया और उसके कान में प्यार से बोली, “साँस ले बिटिया, अब मज़ा आएगा।”
सोनू ठोकने लगा, और मौसी सामने से रानू की चूचियाँ दबाने और निपल्स चूसने लगी। रानू दोनों तरफ़ से मज़ा ले रही थी — पीछे से लंड, आगे से माँ के होंठ।
उसकी कराहें तेज़ हो गईं, “आह सोनू… और ठोको… मेरी चूत फाड़ दो… मम्मी… मम्मी… कितना अच्छा है…” और मौसी जवाब देती, “ले बिटिया, ले, तू भी अब रंडी है। चुदती रह, मज़े कर।”
मैं इधर मौसी की चूत चाट रहा था, जो अभी-अभी रोहन के लंड से खाली हुई थी और रस से भरी थी। मौसी की चूत का रस मीठा और गरम था।
मैं उसे चाटते-चाटते उसके ऊपर के दाने को सहलाता और जीभ अंदर तक डालता।
मौसी कराहती, “आह वेद… ऐसे ही चाट… मेरी चूत चाट… तेरी मौसी की चूत कितनी गरम है…” और रोहन काका पीछे से मौसी की गांड को अपने हाथों से दबाते और उसके गड्ढे पर जीभ फेरते।
कुछ देर बाद सोनू ने रानू को करवट दिलाई और मैं आगे आया। अब मैंने रानू की बुर में अपना लंड डाला और ठोकने लगा।
रानू अब पूरी तरह खुल चुकी थी, उसकी बुर लाल और फूली हुई थी।
मैं ठोकते-ठोकते उसके होंठ चूमता, उसकी चूचियाँ दबाता, और उसके कान में गालियाँ बकता, “ले रानू, ले… तेरी चूत कितनी कसी है… तू तो पक्की रंडी निकली… मौसी की बेटी, मौसी जैसी ही।”
रानू जवाब देती, “हाँ वेद… रंडी हूँ… चोदो मुझे… मम्मी की तरह… आज पूरी रात चोदो…”
इधर रोहन काका ने मौसी को चारपाई पर लिटाया और उसकी चूत में अपना मोटा लंड डालकर ठोकने लगे।
मौसी की भारी चूचियाँ ठोकरों पर झूल रही थीं और रोहन उन्हें दबा-दबा कर चूसता।
मौसी उसके होंठ चूमती और बेबाक होकर कहती, “चोद रोहन… ज़ोर से चोद… मेरी चूत तोड़ दे… तेरी रंडी को चोद… ऐसे ही… ऐसे ही…”
अब कमरे में दो जोड़े चुदाई कर रहे थे — एक तरफ़ मैं और रानू, दूसरी तरफ़ रोहन और मौसी।
सोनू बीच में खड़ा होकर दोनों को देख रहा था और अपना दस इंच का लंड सहला रहा था।
फिर मौसी ने उसे बुलाया, “सोनू, तू भी आ जा। रानू की गांड में डाल। आज मेरी बेटी की गांड भी खुल जाए।”
रानू ने यह सुनकर पूछा, “मम्मी, गांड में भी? दर्द होगा ना?”
मौसी हँसी, “पहली बार में ज़रा सा। पर फिर तू खुद माँगेगी। देख, मैं तो दोनों जगह ले रही हूँ।” और रानू ने सिर हिला दिया।
सोनू ने रानू की छोटी गांड पर थूका, उसे चिकना किया, और अपना लंड उसके गड्ढे पर रखा।
मैंने रानू की बुर में लंड डाला हुआ था। सोनू ने धीरे-धीरे धकेला, और जब सिरा अंदर गया तो रानू ने कराहकर कहा, “आआह… मम्मी… जल रही है… लेकिन अच्छा भी है… वेद, तुम भी ठोको… दोनों एक साथ…”
और अब रानू की चूत में मेरा लंड और गांड में सोनू का लंड एक साथ ठोक रहे थे। रानू की देह दोनों तरफ़ से भरी हुई थी, और वो बार-बार कराह रही थी, “हाय राम… दोनों जगह… पूरी भर गई… और ठोको… और ठोको…”
मौसी अपनी बेटी को दोनों तरफ़ से चुदते देखकर खुशी से बोली, “देखा बिटिया, अब तू भी मेरी तरह पूरी रंडी बन गई। आज से तेरी चूत और गांड दोनों खुल गईं।”
अब मौसी ने सोचा कि रानू को थोड़ा आराम मिले। उसने सोनू और मुझे रुकने का इशारा किया और रानू को अपने पास लिटा लिया।
माँ और बेटी एक-दूसरे के सामने लेट गईं, दोनों की टाँगें फैली हुईं, दोनों की बुरें खुली और गीली।
मौसी ने रानू का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठ चूमे। रानू ने भी मौसी के होंठ चूमे।
दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं। फिर मौसी ने रानू की चूचियाँ चूसीं और रानू ने मौसी की भारी दूध भरी चूचियाँ चूसीं। मौसी के बड़े-बड़े निपल्स रानू के मुँह में थे, और रानू के छोटे गुलाबी निपल्स मौसी के मुँह में।
“बिटिया, तेरी चूचियाँ कितनी मीठी हैं,” मौसी ने चूसते-चूसते कहा।
“मम्मी, आपकी तो बहुत बड़ी हैं,” रानू ने मुँह भरे हुए कहा, “और दूध जैसी हैं।”
“अब तू भी बड़ी हो जाएगी, फिर तेरी भी ऐसी होंगी। और तेरा आदमी इन्हें चूसेगा।”
यह सुनकर सोनू ने बीच में टोका, “मौसी, आज तो हम चूस रहे हैं।” और सब हँस पड़े।
अब रोहन काका ने मौसी को फिर घुटनों के बल किया और उसकी चूत में लंड डालकर ठोकना शुरू किया।
मौसी कराहने लगी, “आह रोहन… फिर से… ठोक… मेरी चूत को फाड़ दे…” और इधर सोनू ने रानू को घुटनों के बल करके उसकी बुर में लंड डाला। अब माँ और बेटी दोनों एक साथ, घुटनों के बल, दो मर्दों के नीचे ठोकी जा रही थीं।
और मैं दोनों के बीच खड़ा होकर बारी-बारी से मौसी की चूचियाँ और रानू की चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता, और दोनों के होंठ चूमता।
मौसी और रानू दोनों एक-दूसरे की तरफ़ देखकर मुस्कुराती और होंठ चूमती, और फिर मेरी तरफ़ मुड़कर मेरे होंठ चूमती। इस तरह माँ-बेटी की जुगलबंदी पूरी रात चलती रही।
रात काफ़ी बढ़ गई थी और तीनों मर्दों की साँसें भारी हो रही थीं। सबसे पहले रोहन काका का निकलने का वक़्त आया। उन्होंने मौसी से पूछा, “नीलम जी, कहाँ डालूँ?”
मौसी ने बिना झिझक कहा, “चूत में डाल रोहन… आज मेरी चूत पूरी भर दे… मेरी बेटी देख रही है, तो दिखा दे…” और रोहन ने कुछ ज़ोरदार ठोकरों के बाद अपना सारा वीर्य मौसी की चूत के अंदर उँडेल दिया।
मौसी की देह ऐंठ गई और वो लंबी साँस छोड़ते हुए बोली, “आह… गरम… गरम डाला… मेरी चूत जल गई…” रोहन बाहर निकले और उनके लंड से वीर्य और रस टपकता रहा।
फिर सोनू की बारी आई। उसने रानू से पूछा, “रानू, कहाँ डालूँ?”
रानू ने मौसी की तरफ़ देखा, और मौसी ने सिर हिलाया।
रानू ने कहा, “चूत में डालो सोनू… अंदर डालो… आज पूरी बुर भर दो…” सोनू ने कुछ ज़ोरदार ठोकरें मारीं और अपना सारा वीर्य रानू की चूत के अंदर उँडेल दिया।
रानू कराह उठी, “आह… सोनू… गरम… मेरी बुर में आग लग गई…” सोनू बाहर निकला और रानू की चूत से रस और वीर्य बह निकला।
अब सिर्फ़ मैं बचा था। मौसी ने मुझे पास बुलाया और बोली, “वेद, आज तेरी बारी आख़िरी है। दोनों में से जिसे चाहे, चुन।” मैंने मौसी की तरफ़ देखा, फिर रानू की तरफ़। दोनों मुस्कुरा रही थीं। मैंने कहा, “दोनों को।”
मौसी हँसी, “ठीक है, दोनों को। पहले रानू को चोद, फिर मुझे।”
मैंने रानू को पीठ के बल लिटाया और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
रानू की चूत सोनू के वीर्य से चिकनी थी और आसानी से लंड अंदर चला गया। मैं तेज़ ठोकरें मारने लगा, रानू की चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता, होंठ चूमता।
रानू कराहती, “और वेद… और ठोको… मेरी चूत फाड़ दो… मज़ा आ रहा है…” जब मेरा निकलने का वक़्त आया, तो रानू ने कहा, “अंदर ही डाल वेद… मेरी बुर में…” और मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में उँडेल दिया।
फिर मैंने मौसी को घुटनों के बल किया, उसकी बयालीस इंच की गांड ऊपर उठाई, और उसकी गीली, वीर्य से भरी चूत में लंड डालकर ठोकने लगा। मौसी की चूत चिकनी और गरम थी।
मैं ठोकते-ठोकते उसकी चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता, और उसके कान में गालियाँ बकता, “ले मौसी, ले… तेरी चूत कितनी गरम है… तू तो पक्की रंडी है… तेरी बेटी भी अब रंडी बन गई…” और मौसी जवाब देती, “हाँ रंडी हूँ… चोद-चोद… मेरे दूध पर डाल… मेरी चूचियों पर डाल अपना रस…”
जब मेरा निकलने का वक़्त आया, तो मौसी ने कहा, “चूचियों पर डाल वेद… मेरे दूध पर…” और मैंने तेज़ ठोकरें मारकर अपना सारा वीर्य मौसी की चूचियों और गले पर उँडेल दिया।
सफ़ेद रस मौसी के दूध और निपल्स पर बहकर चमकने लगा। मौसी ने उसे अपनी उँगली से लेकर चखा और मुस्कुराते हुए बोली, “आज तो तीनों ने मिलकर माँ-बेटी को पूरा भर दिया।”
रानू ने यह देखकर कहा, “मम्मी, मेरे चूचियों पर भी डालो ना।” और सोनू ने हँसते हुए अपनी बाक़ी बूँदें रानू के चूचियों पर डाल दीं।
सब थके-हारे गद्दे पर लेट गए — तीन मर्द, दो औरतें, सब पसीने से लथपथ। मौसी बीच में थी, रानू उसके एक तरफ़, और हम तीनों चारों तरफ़।
मौसी ने सबके हाथ पकड़कर अपनी चूचियों और गांड पर रख दिए और बोली, “ये घर अब तुम सबका है। माँ भी, बेटी भी, दोनों तुम्हारी।” रोहन काका हँसकर बोले, “नीलम जी, अब तो बगीचे का माली भी मालिक बन गया।” और सब हँस पड़े।
रानू ने मौसी के कान में धीरे से कहा, “मम्मी, आज तो पूरा शरीर टूट गया। पर मज़ा ऐसा आया कि फिर करने का मन है।”
मौसी ने उसका माथा चूमकर कहा, “ये तो शुरुआत है बिटिया। अब तो तू भी मेरी तरह रंडी है। जब मन करे, बुला लेना।”
रात भर तारे चमकते रहे और ठंडी हवा चलती रही। नीचे आँगन में कुत्ते सो रहे थे और ऊपर बंद कमरे में एक नई परंपरा शुरू हो चुकी थी — माँ भी, बेटी भी, दोनों एक ही बिस्तर पर, एक ही चादर के नीचे, एक ही मर्दों की रंडी।
अगले हफ़्ते मौसी की सहेली सुनीता आई — पैंतालीस की, मोटी गांड और भारी दूध वाली विधवा। मौसी ने उसे भी हमसे मिलवाया। रात को सुनीता की चूत चाटकर, चूचियाँ चूसकर, हम दोनों ने उसे चोदा। वो भी बेबाक होकर गालियाँ बकती रही — “चोदो, मेरी बुर फाड़ दो।” अब घर में चार औरतें थीं — मौसी, रानू, सुनीता और उनकी बेटी।
NEXT PART: तीन मर्दों ने मिलकर सिक्स औरतों को चोदकर रंडी बनाए
- मेरी गर्लफ्रेंड चार काले लंडों से चुदवाई
- शादी की सालगिरह पर डिलीवरी बॉय से चुदवाई
- मौसी अपनी बेटी को हमसे ग्रुप में चुदवाई
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