bhabhi xxx train chudai kahani
मेरा नाम सुनीता है। मैं मध्य प्रदेश के रीवा जिले में अपने पति अनिल के साथ रहती हूं। मेरी शादी को पूरे चार साल हो चुके हैं और मैं अपनी मैरिड लाइफ से बहुत खुश हूं।
मेरे पति अनिल मुझे बहुत प्यार करते हैं और हमारी सेक्स लाइफ भी बहुत अच्छी है। वो मेरी बहुत चुदाई करते हैं और मुझे हर तरह से संतुष्ट करते हैं।
मैं दिखने में बहुत सेक्सी हूं। मेरी बॉडी का साइज 34-30-34 है जो कि एकदम परफेक्ट फिगर माना जाता है।
मेरा पेट अंदर की ओर है जिससे मैं बहुत खूबसूरत दिखती हूं। मेरे बूब्स बहुत ही गोल और उभारे हुए हैं, और मेरी गांड भी एकदम उठी हुई और टाइट है।
जब भी मैं बाजार जाती हूं, लोग मुझे घूर-घूर कर देखते हैं और मुझे उनकी नजरों में वो हवस साफ दिखती है।
एक दिन की बात है, मेरी माँ का फोन आया।
उन्होंने बताया कि मेरी छोटी बहन तानिया की शादी तय हो गई है और मुझे जल्दी घर आना होगा ताकि हम साथ मिलकर शादी की सारी तैयारियां कर सकें।
मैंने उनकी बात मान ली और अपने पति अनिल से बात की।
अनिल ने कहा, “ठीक है सुनीता, तुम चली जाओ। मैं थोड़ा काम में फंसा हूं, लेकिन शादी से एक दिन पहले मैं भी आ जाऊंगा।”
मैंने कहा, “ठीक है जी, मैं निकलती हूं। आप जल्दी आ जाना।”
मेरे पति मुझे रेलवे स्टेशन तक छोड़ने आए। वो हमेशा की तरह मुझे बहुत प्यार से मिले और स्टेशन पर मेरे गाल पर एक किस भी किया।
मुझे अच्छा लगा लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि आज की रात मेरे लिए कुछ और ही प्लान बना हुआ है।
जल्दबाजी की वजह से मुझे रिजर्वेशन में टिकट नहीं मिल पाया था। मैंने बहुत कोशिश की लेकिन सभी सीटें फुल थीं।
मुझे मजबूरन जनरल क्लास में यात्रा करना पड़ा। मैंने सोचा कि रीवा से सतना ज्यादा दूर नहीं है, कुछ ही घंटे लगेंगे, मैं किसी तरह पहुंच जाऊंगी।
जब मैं स्टेशन पहुंची तो वहां पहले से ही बहुत भीड़ थी। ट्रेन आते ही लोगों की भागदौड़ मच गई।
मैंने भी अपना बैग कसकर पकड़ा और डिब्बे की ओर दौड़ी। जनरल डिब्बे में तो एक-दूसरे पर लोग चढ़े हुए थे।
किसी तरह मैंने अपने आपको अंदर धकेलने की कोशिश की।
“अरे भाई, थोड़ा हटो ना!” मैंने कहा और लोगों को धकेलते हुए अंदर घुसी।
मेरे पीछे-पीछे और भी लोग आ रहे थे। मुझे बहुत दबाव महसूस हो रहा था।
मेरे बूब्स लोगों की पीठ से रगड़ खा रहे थे और मुझे अजीब सा सनसनी महसूस हो रही थी।
किसी तरह मैंने डिब्बे के अंदर एक कोने में जगह बनाई।
मैंने सांस ली और अपने कपड़े ठीक किए। मैंने एक सफेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें मेरी बॉडी बहुत सेक्सी लग रही थी।
मेरा ब्लाउज थोड़ा गहरा था और मेरे बूब्स का क्लीवेज हल्का-हल्का दिख रहा था।
तभी मेरी नजर सामने खड़े दो लड़कों पर पड़ी। वो दोनों लगभग 25-26 साल के लग रहे थे और बहुत ही स्मार्ट दिख रहे थे।
एक लंबा-चौड़ा और गोरा था, दूसरा थोड़ा सांवला लेकिन बहुत ही मस्कुलर बॉडी वाला था।
लेकिन जो मुझे सबसे ज्यादा ध्यान दिलाने वाला था, वो थी उनकी नजरें। वो दोनों मुझे घूर-घूर कर देख रहे थे।
उनकी आंखों में वो हवस और लालच साफ झलक रही थी जो मैं पहचानती थी। मैंने उनकी नजरों को देखकर समझ गई कि आज मेरी इस ट्रेन में डबल चुदाई होगी।
मेरे मन में एक अजीब सी उत्तेजना भर गई। मेरे पति के अलावा मैंने कभी किसी और के साथ नहीं किया था, लेकिन आज कुछ अलग ही होने वाला था। मेरे अंदर की रंडी जाग गई थी और मैंने मन ही मन सोच लिया कि आज इन दोनों से अपनी चुदाई करवाऊंगी।
ट्रेन धीरे-धीरे चलने लगी। अंधेरा होने वाला था और डिब्बे में भीड़ बहुत ज्यादा थी। मैं खिड़की के पास खड़ी थी और वो दोनों लड़के मेरे सामने खड़े हो गए।
पहले लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैडम, आप कहां जा रही हैं?”
मैंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “सतना जा रही हूं।”
दूसरा लड़का बोला, “हम भी सतना जा रहे हैं। बहुत भीड़ है ना डिब्बे में?”
मैंने कहा, “हां जी, बहुत भीड़ है।”
अब वो दोनों मुझसे और करीब आ गए। भीड़ की वजह से लोग एक-दूसरे से सटे हुए थे। वो दोनों मेरे सामने खड़े थे और मैं खिड़की की तरफ थी।
धीरे-धीरे, ट्रेन के झटकों का फायदा उठाते हुए, वो लड़के मेरे करीब आने लगे।
पहले लड़के का हाथ ‘गलती से’ मेरे बूब्स पर लग गया। मैंने कुछ नहीं कहा, बस उसकी आंखों में देखा। उसने समझ लिया कि मैं विरोध नहीं कर रही हूं।
अब वो और बहादुर हो गया। ट्रेन के एक झटके में उसने अपना पूरा हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया और दबाने लगा।
मुझे एक अजीब सी सनसनी हुई। मेरे निप्पल तन गए और मेरी बुर में पानी आने लगा।
दूसरा लड़का भी पीछे से मेरे करीब आ गया। उसने अपना लंड मेरी गांड पर सटा दिया।
मुझे उसका कड़ा लंड अपनी गांड के दरार में महसूस हुआ। वो आगे-पीछे हो रहा था और उसका लंड मेरी गांड को रगड़ रहा था।
मैंने आंखें बंद कर लीं और इस पल का आनंद लेने लगी। मेरे पति की याद आई लेकिन फिर मैंने सोचा कि एक बार क्या बिगड़ जाएगा। यह मौका बार-बार नहीं मिलता।
पहला लड़का अब मेरे बहुत करीब आ गया था।
उसने अपना मुंह मेरे कान के पास लाया और फुसफुसाते हुए कहा, “मैडम, आप बहुत सेक्सी हो। आपके बूब्स बहुत बड़े और मस्त हैं।”
मुझे उसकी यह गंदी बातें सुनकर और भी ज्यादा मजा आने लगा। मैंने भी हिम्मत करके कहा, “तुम्हें पसंद आए मेरे बूब्स?”
वो बोला, “हां मैडम, बहुत पसंद आए। मैं इन्हें चूसना चाहता हूं।”
मैंने शरमाते हुए कहा, “अभी नहीं, कोई देख लेगा।”
तभी दूसरा लड़का पीछे से बोला, “मैडम, आपकी गांड बहुत टाइट है। मेरा लंड तो आपकी गांड देखकर ही खड़ा हो गया है।”
मैंने पीछे मुड़कर उसे देखा और मुस्कुराई। यह मेरी तरफ से हरी झंडी थी।
अब वो दोनों खुलकर मुझे छूने लगे। पहला लड़का सामने से मेरे बूब्स दबा रहा था और उनके निप्पलों को कस-कस कर मसल रहा था।
दूसरा लड़का पीछे से मेरी गांड को सहला रहा था और कभी-कभी अपना हाथ मेरी बुर तक ले जाने की कोशिश करता था।
मेरी सांसें तेज हो गईं। मेरे मुंह से हल्की-हल्की सिसकियां निकलने लगीं।
मैंने कहा, “अरे धीरे से करो, कोई देख लेगा।”
पहला लड़का बोला, “मैडम, चिंता मत करो। अंधेरा हो गया है और सब अपने में मस्त हैं। कोई नहीं देख रहा।”
उसने अपना हाथ मेरे ब्लाउज के अंदर डालने की कोशिश की। मैंने थोड़ा विरोध किया लेकिन फिर मान गई।
उसने अपना हाथ मेरे ब्लाउज में डाला और मेरे नंगे बूब्स को छू लिया। मेरे निप्पल बहुत कड़े हो गए थे और वो उन्हें अपनी उंगलियों से मसल रहा था।
“ऊह्ह्ह… धीरे…” मैंने सिसकते हुए कहा।
“मैडम, आप तो बहुत गरम हो। आपके निप्पल तो पत्थर जितने कड़े हो गए हैं,” वो लड़का बोला।
दूसरा लड़का पीछे से मेरी साड़ी को ऊपर उठाने लगा। उसने अपना हाथ मेरी साड़ी के नीचे डाला और मेरी गांड को सहलाने लगा।
मैंने पेटीकोट पहना हुआ था लेकिन उसने उसके ऊपर से ही मेरी गांड के छेद को छूना शुरू कर दिया।
“मैडम, आपकी गांड तो बहुत मस्त है। मुझे इसे चाटने का मन कर रहा है,” वो बोला।
मुझे उनकी यह बातें सुनकर बहुत उत्तेजना हो रही थी। मैं एक शादीशुदा औरत थी और दो अजनबी लड़के मुझे इस तरह छू रहे थे।
यह गलत था लेकिन मजा बहुत आ रहा था।
मैंने कहा, “तुम दोनों का नाम क्या है?”
पहला लड़का बोला, “मेरा नाम राहुल है और यह मेरा दोस्त विकास है।”
मैंने कहा, “राहुल, विकास, तुम दोनों मुझे बहुत गरम कर रहे हो। लेकिन यहां नहीं, कोई देख लेगा।”
राहुल बोला, “मैडम, टॉयलेट चलो। वहां कोई नहीं आएगा।”
मैंने सोचा और फिर हामी भर दी। मेरे अंदर की वासना इतनी बढ़ चुकी थी कि मैं कुछ भी करने को तैयार थी।
हम तीनों धीरे-धीरे टॉयलेट की ओर बढ़े। ट्रेन के टॉयलेट में जगह बहुत कम होती है लेकिन हमें वहीं काम चलाना था।
मैं पहले अंदर गई और फिर राहुल और विकास भी अंदर आ गए।
टॉयलेट में आते ही राहुल ने दरवाजा बंद कर दिया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
उसने मेरे होठों पर अपने होठ रख दिए और जोर-जोर से किस करने लगा। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई और मैं भी उसका साथ देने लगी।
विकास पीछे से मेरी गांड को सहला रहा था। उसने अपना लंड मेरी गांड पर रगड़ना शुरू कर दिया।
मुझे पीछे से एक कड़ा लंड महसूस हो रहा था और सामने राहुल का लंड भी मेरी बुर पर टिका हुआ था।
राहुल ने मेरे ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे हुक खुल गए और मेरा ब्लाउज खुल गया।
मैंने अंदर ब्रा पहनी हुई थी जो कि लाल रंग की थी। राहुल ने मेरी ब्रा भी उतार दी और मेरे बूब्स आजाद हो गए।
“वाह मैडम, क्या मस्त दूध हैं तुम्हारे!” राहुल ने कहा और मेरे एक बूब्स को अपने मुंह में ले लिया।
उसने मेरे निप्पल को जोर से चूसना शुरू कर दिया। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
वो एक-एक करके दोनों निप्पलों को चूस रहा था और कभी-कभी दांतों से हल्का सा काट भी लेता था।
“आह्ह्ह… राहुल… धीरे चूसो… बहुत मजा आ रहा है…” मैंने कहा।
इधर विकास ने मेरी साड़ी को ऊपर उठा दिया था और मेरा पेटीकोट नीचे कर दिया था।
उसने मेरी पेंटी को एक तरफ कर दिया और मेरी गांड के छेद को देखने लगा।
“मैडम, आपकी गांड तो एकदम गुलाबी है। मुझे इसे चाटने का मन कर रहा है,” विकास ने कहा।
मैंने कहा, “चाटो ना… अपनी जीभ से मेरी गांड चाटो…”
विकास ने अपना मुंह मेरी गांड पर रख दिया और अपनी जीभ से मेरे गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया। ऊह्ह्ह… क्या मजा आ रहा था।
एक लड़का सामने मेरे बूब्स चूस रहा था और दूसरा पीछे से मेरी गांड चाट रहा था।
“आह्ह्ह… हां… और चाटो… मेरी गांड को अच्छे से चाटो…” मैंने कहा।
राहुल अब मेरे बूब्स से नीचे आ गया था। उसने मेरी नाभि को चूमा और फिर नीचे की ओर बढ़ गया।
मेरी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और पानी बह रहा था।
राहुल ने कहा, “मैडम, आपकी बुर तो पूरी गीली हो गई है। मुझे इसका रस पीना है।”
मैंने कहा, “पी लो… मेरी बुर का सारा रस पी जाओ…”
राहुल ने अपना मुंह मेरी बुर पर रख दिया और अपनी जीभ से मेरी बुर को चाटना शुरू कर दिया।
वो मेरी बुर की दोनों फांकों को चाट रहा था और कभी-कभी क्लिटोरिस पर भी जीभ फेर देता था।
“ऊह्ह्ह… राहुल… बहुत अच्छा लग रहा है… और चाटो… हां… वहीं… ऊह्ह्ह…” मैंने सिसकियां भरते हुए कहा।
विकास अब खड़ा हो गया था और अपना लंड बाहर निकाल रहा था।
उसका लंड बहुत बड़ा और काला था। उसने मेरे मुंह के पास अपना लंड ला दिया।
“मैडम, इसे चूसो… मेरा लंड चूसो…” विकास ने कहा।
मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया। वो गरम और कड़ा था। मैंने उसे अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
विकास के मुंह से आह्ह्ह निकल गई।
“ऊह्ह्ह… मैडम… बहुत मजा आ रहा है… और चूसो… अपनी जीभ से मेरे लंड को लिपटो…”
मैं उसका लंड चूस रही थी और राहुल मेरी बुर चाट रहा था। यह डबल मजा था।
मेरी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और मुझे अब लंड चाहिए था।
राहुल खड़ा हो गया और अपना लंड बाहर निकाला। उसका लंड भी बहुत बड़ा था, लगभग 7 इंच का और एकदम कड़ा। उसने मुझे पकड़ा और मेरी एक टांग उठा दी।
“मैडम, अब मैं अपना लंड आपकी बुर में डालूंगा,” राहुल ने कहा।
मैंने कहा, “हां डालो… अपना लंड मेरी बुर में डालो और जोर-जोर से चोदो…”
राहुल ने अपने लंड का सुपारा मेरी बुर के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। उसका पूरा लंड मेरी बुर में समा गया।
“आह्ह्ह… बहुत बड़ा है तुम्हारा लंड… धीरे करो…” मैंने कहा।
राहुल ने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी बुर में अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। वो जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और मेरी बुर को चोद रहा था।
“ऊह्ह्ह… हां… और जोर से… मेरी बुर को फाड़ दो… बहुत मजा आ रहा है…” मैंने कहा।
इधर विकास का लंड अभी भी मेरे मुंह में था। मैं उसे चूस रही थी और राहुल मेरी बुर चोद रहा था। यह संडविच चुदाई थी और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
राहुल ने मेरी दूसरी टांग भी उठा ली और अब वो मुझे हवा में पकड़कर चोद रहा था।
उसके धक्के बहुत तेज हो गए थे और मेरी बुर से पच-पच की आवाजें आ रही थीं।
“ऊह्ह्ह… सुनीता… तुम्हारी बुर बहुत टाइट है… बहुत मजा आ रहा है…” राहुल ने कहा।
मैंने विकास का लंड मुंह से निकालकर कहा, “हां… और जोर से चोदो… मुझे पूरा मजा दो…”
अब राहुल ने मुझे नीचे उतार दिया और खुद जमीन पर बैठ गया।
उसने अपना लंड ऊपर की ओर कर लिया और मुझे ऊपर बैठने का इशारा किया।
“बैठो मेरी ऊपर… अपनी बुर में मेरा लंड लो…” राहुल ने कहा।
मैंने उसके लंड को अपने हाथ में लिया और अपनी बुर के मुहाने पर रखा।
फिर मैं धीरे से नीचे बैठ गई और उसका पूरा लंड मेरी बुर में समा गया।
“आह्ह्ह…” मेरे मुंह से सिसकी निकली।
अब मैं राहुल के ऊपर उछल-उछल कर चुद रही थी। मेरे बूब्स बहुत तेजी से हिल रहे थे और राहुल उन्हें पकड़कर दबा रहा था।
इधर विकास ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रख दिया। उसने थूक लगाया और फिर धीरे से अपना लंड मेरी गांड में डालने की कोशिश की।
“आह्ह्ह… विकास… धीरे… मेरी गांड फट जाएगी…” मैंने कहा।
“थोड़ा सहन करो मैडम… बहुत मजा आएगा…” विकास ने कहा और एक जोरदार धक्का दिया।
उसका आधा लंड मेरी गांड में घुस गया। मुझे बहुत दर्द हुआ लेकिन साथ में मजा भी आ रहा था।
“ऊह्ह्ह… हां… और अंदर डालो… पूरा डाल दो…” मैंने कहा।
विकास ने एक और धक्का दिया और उसका पूरा लंड मेरी गांड में समा गया।
अब मेरी दोनों छेदों में लंड थे। राहुल का लंड मेरी बुर में और विकास का लंड मेरी गांड में। यह असली संडविच चुदाई थी।
“ऊह्ह्ह… बहुत मजा आ रहा है… दोनों जोर-जोर से चोदो… मुझे आज रंडी बना दो…” मैंने कहा।
दोनों लड़के अब पूरी गति से मुझे चोद रहे थे।
जब राहुल अंदर जाता तो विकास बाहर आता और जब विकास अंदर जाता तो राहुल बाहर आता।
यह रिदम बन गया था और मुझे बहुत मजा आ रहा था।
मेरी बुर और गांड दोनों में लंड घुस रहे थे। मेरे बूब्स हिल रहे थे और मेरे निप्पल कड़े हो गए थे। मैं बहुत जोर-जोर से सिसकियां भर रही थी।
“आह्ह्ह… हां… और जोर से… मेरी बुर को फाड़ो… मेरी गांड को भी फाड़ दो… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने कहा।
“हम भी झड़ने वाले हैं…” राहुल ने कहा।
“मैं पहले झड़ूंगा…” विकास ने कहा और अपने धक्के तेज कर दिए।
कुछ ही देर में विकास ने अपना गरम वीर्य मेरी गांड में छोड़ दिया। उसका लंड फड़क रहा था और मेरी गांड को भर रहा था।
“ऊह्ह्ह… मैं झड़ गया…” विकास ने कहा।
इधर राहुल भी अपनी स्पीड बढ़ा चुका था। वो जोर-जोर से मेरी बुर को पेल रहा था।
“मैं भी झड़ने वाला हूं…” राहुल ने कहा।
“मेरे अंदर ही झड़ जाओ… अपना सारा माल मेरी बुर में डाल दो…” मैंने कहा।
राहुल ने कुछ और जोरदार धक्के लगाए और फिर अपना वीर्य मेरी बुर में छोड़ दिया।
मैं भी उसी समय झड़ गई। मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया और राहुल के लंड को भीगो दिया।
हम तीनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। मेरी बुर और गांड दोनों में गरम गरम वीर्य भरा हुआ था। मुझे बहुत मजा आया था।
कुछ देर बाद हमने अपने कपड़े ठीक किए और टॉयलेट से बाहर निकले।
वो दोनों लड़के सतना स्टेशन पर उतर गए और मैं भी।
यह मेरी ट्रेन यात्रा की सबसे यादगार रात थी जब दो लड़कों ने मेरी संडविच चुदाई की।
मेरी बुर और गांड दोनों को उन्होंने अच्छी तरह से चोदा और मुझे पूरा संतुष्ट किया।
दोस्तो, ये थी मेरी सफर सेक्स की कहानी। आपको ये स्टोरी कैसी लगी मुझे बताना जरूर।
- मुस्लिम भाभी की प्यासी बुर चोदने का मजा लिया
- अपनी चचेरी चाची को पटाकर चोदा
- पापा ने पहले दीदी की फिर मेरी चुदाई की
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Wow! nice story…👌👌
Mast khahani hai.