landlady sex story
मैं विजय सिंह, भोपाल का रहने वाला एक 20 साल का नौजवान। मेरी उम्र भले ही कम हो, लेकिन मेरा शरीर काफी हेल्दी और स्मार्ट है।
मेरा लंड 9.3 इंच का है, जो कि किसी भी औरत को संतुष्ट करने के लिए काफी है।
मैं आगरा में पढ़ाई करता हूं और यहां एक 1BHK फ्लैट किराए पर लेकर अकेला रहता हूं।
मेरी मकान मालकिन का नाम सुमन है, उम्र करीब 38 साल। वो एक बेहद खूबसूरत और सेक्सी औरत हैं।
उनका बदन ऐसा है कि कोई भी मर्द उन्हें देखकर मदहोश हो जाए। उनकी चूचियां 34D साइज की हैं, जो हमेशा उभरी हुई लगती हैं।
उनकी कमर करीब 32 इंच की है, और गांड… ओह उनकी गांड तो करीब 38 इंच की है, इतनी बड़ी और उभरी हुई कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए।
जब मैंने पहली बार उन्हें देखा था, तो मैंने तय कर लिया था कि मैं इस खूबसूरत मकान मालकिन को जरूर चोदूंगा।
उनकी आंखों में वो चमक थी, जो एक भूखी औरत की होती है।
उनके होंठ गुलाबी और मोटे थे, जिन्हें देखकर मन करता था कि बस उन्हें चूसता रहूं।
मेरे फ्लैट में शिफ्ट होने के बाद, हमारी मुलाकातें अक्सर होने लगीं।
वो रोजाना किसी न किसी बहाने मेरे कमरे में आतीं।
कभी पानी पूछने, कभी बिजली का बिल देने, तो कभी सिर्फ ये पूछने कि मुझे कोई दिक्कत तो नहीं है।
एक दिन शाम को करीब 6 बजे, मैं अपने कमरे में बैठा था।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। मैंने दरवाजा खोला तो सुमन आंटी खड़ी थीं।
उन्होंने एक हल्की सी ट्रांसपेरेंट साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें से उनकी पेटी और ब्लाउज साफ दिख रहा था।
“विजय, तुमने खाना खाया?” आंटी ने पूछा।
“नहीं आंटी, अभी तो नहीं खाया। आपको कैसे पता?” मैंने कहा।
“अरे बेटा, मैं तो तुम्हारी मां जैसी हूं। मुझे सब पता रहता है। चलो, आज मेरे साथ खाना खा लो। मैंने खाना बनाया है,” आंटी ने कहा।
मैं समझ गया कि आंटी में भी कुछ-कुछ हो रहा है। मैंने हां कर दी।
उनके घर में जाने के बाद, मैंने देखा कि वो अकेली रहती हैं।
उनके पति की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। इसीलिए वो इतनी अकेली और उदास लगती थीं।
खाना खाते समय, आंटी का पैर बार-बार मेरे पैर से टकरा रहा था।
मैं भी मौके का फायदा उठाकर उनके पैर को अपने पैर से सहला रहा था।
खाना खत्म होने के बाद, आंटी ने कहा, “विजय, तुम बहुत हैंडसम हो। तुम्हारी गर्लफ्रेंड होगी न?”
“नहीं आंटी, अभी तो कोई नहीं है। पढ़ाई में मन लगाना है,” मैंने कहा।
“अच्छा… तो फिर तुम्हारी जरूरतें कैसे पूरी करते हो?” आंटी ने आंखें झुकाकर पूछा।
मैं समझ गया कि बात कहां जा रही है।
मैंने हिम्मत करके कहा, “आंटी, जरूरतों को हाथ से ही पूरा करना पड़ता है।”
आंटी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दीं। “तुम बड़े शरारती हो विजय।”
उस रात मैं जब अपने कमरे में आया, तो मुझे नींद नहीं आ रही थी।
मेरे दिमाग में सिर्फ आंटी का खूबसूरत बदन था।
उनकी उभरी हुई चूचियां, उनकी मोटी गांड, उनके गुलाबी होंठ… सब कुछ मुझे पागल बना रहा था।
अगले दिन सुबह, मैं नहाने गया। नहाने के बाद मैंने सोचा कि थोड़ा तेल लगाकर मालिश कर लूं।
मैंने कपड़े उतार दिए और पूरी नंगी हालत में तेल लगाने लगा।
मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया और उसे सहलाने लगा। मेरा लंड 9.3 इंच का होने के कारण काफी बड़ा और मोटा दिख रहा था।
मैं अपने लंड को सहला रहा था कि तभी दरवाजा खुल गया। मैंने दरवाजा लॉक करना भूल गया था। आंटी अंदर आ गईं।
“विजय, मैं तुम्हारे लिए चाय…” आंटी की आवाज अटक गई।
वो मेरे नंगे बदन और मेरे खड़े हुए बड़े लंड को देखकर चौंक गईं। मैं भी शर्मिंदा होकर खड़ा रह गया।
“आंटी… मैं… दरवाजा…” मैं कुछ बोल नहीं पाया।
आंटी ने मेरे लंड को घूरते हुए कहा, “अरे विजय, तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है। इतना बड़ा लंड तो मैंने सिर्फ ब्लू फिल्मों में ही देखा है।”
मैंने शर्माते हुए कहा, “सॉरी आंटी, मैं दरवाजा लॉक करना भूल गया था।”
आंटी ने दरवाजा बंद किया और मेरे पास आ गईं। “कोई बात नहीं बेटा। मुझे तो बहुत पसंद आया तुम्हारा ये हथियार।”
मैं समझ गया कि आज मौका हाथ से जाने नहीं देना है।
मैंने हिम्मत करके कहा, “आंटी, अगर आपको पसंद आया हो तो इसे छूकर भी देख सकती हैं।”
आंटी ने शर्माते हुए मेरे लंड को छुआ।
उनका हाथ मेरे लंड पर पड़ते ही मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया। मेरा लंड और भी ज्यादा कड़क हो गया।
“वाह, कितना गरम और कड़क है तुम्हारा लंड,” आंटी ने कहा।
“आंटी, प्लीज, आज मेरी प्यास बुझा दो। मैं आपको बहुत दिनों से चाहता हूं,” मैंने कहा।
आंटी ने मेरी तरफ देखा और फिर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
हमारा पहला किस था। उनके होंठ बहुत नरम और मीठे थे। मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया और जोर-जोर से चूमने लगा।
मैंने अपनी जीभ को उनके मुंह में डालकर चूसने लगा। यह बहुत ही रोमांटिक था मेरे लिए।
“उम्म्ह… अह्ह… विजय… धीरे…” आंटी सिसक रही थीं।
मैं किस करते हुए उनकी साड़ी खोलनी शुरू की। उन्होंने ब्लैक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी।
उनकी चूचियां ब्रा से बाहर निकलने को तरस रही थीं। मैंने उनकी ब्रा खोली और उनके निप्पल्स को देखा।
उनके निपल्स गहरे भूरे रंग के थे और कड़क हो रहे थे।
“क्या बड़े-बड़े दूध हैं आपके आंटी,” मैंने कहा।
“चूसो इन्हें… बहुत दिनों से कोई नहीं चूसा,” आंटी ने कहा।
मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और चूसने लगा। दूसरे हाथ से दूसरी चूची को दबा रहा था। आंटी मस्ती में आहें भर रही थीं।
“अह्ह… हां… और जोर से चूसो… अपनी रंडी की चूचियों को चूसो… हां… मेरे लंड के राजा…” आंटी गाली देते हुए बोल रही थीं।
मैं उनकी चुचियों को चूसते हुए, नीचे आने लगा फिर उसनके पेट पर किस किया और चाटा और इसके बाद मैंने उनकी पैंटी भी उतार दी।
उनकी बुर पूरी तरह से भरी हुई थी। झांटें साफ की हुई थीं। मैंने उनकी बुर पर हाथ फेरा।
“कितनी गीली हो गई है आपकी बुर आंटी,” मैंने कहा।
“तुम्हारे लंड को देखकर ही गीली हो गई हूं। अब मत तड़पाओ, डालो अपना लंड इस चूत की रानी में,” आंटी ने कहा।
“आंटी, मुझे अपने बुर को चाटने दीजिये। मैं इसको पहले चाट कर साफ कर देता हूँ और जब चाटूंगा तो आपको बहुत अच्छा लगेगा। प्लीज मुझे चाटने के लिए परमिशन दीजिये” मैं उनके सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
आंटी तो एकदम रानी बन गयी मेरी इस अदा पर और बोल पड़ी, “तुम कितने अच्छे हो विजय, मैं तुम्हें कभी नहीं छोडूंगी। और तुम्हें बिलकुल मेरी परमिशन है, शाबाश जाओ नीचे और चाटो मेरी बुर को।”
“थैंक यू, मेरी जान” मैं बहुत प्रेम से बोला।
मैं उन्हें बिस्तार पर लेटा दिया और किनारे पर उन्हें खिंचकर कर लिया और खुद नीचे बैठ गया, और उनकी बुर को चाटने लगा।
चाटने के साथ साथ मैंने अपनी एक ऊँगली उनकी बुर में डाल दिया।
वह अपने बुर को ऊपर उठाने लगी। बिलकुल ही मदहोश हो गयी थीं। मैंने अपनी दूसरी ऊँगली को भी उनके बुर में डालकर अन्दर बाहर करने लगा।
यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा अनुभव था। एक 35 प्लस की औरत को चोदना मेरा सपना था जो आज पूरा हो रहा था। मैं उनको रानी की तरह ट्रीट कर रहा था।
वह बहुत मोन कर रही थीं। करीब 15 मिनट तक उन्हें ऐसे ही चाटता और अपनी उंगुलियों से चोदता रहा।
फिर मैंने उन्हें उठाया और अपने घुटनों पर बैठकर रोमांटिक अंदाज़ में पूछा, “आंटी, मेरी रानी, क्या आप मेरे लंड को चुसना पसंद करेंगी? शायद आपको अच्छा लगेगा और मुझे भी।”
आंटी जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अब जब तुम इतने प्रेम से पूछोगे तो लंड क्या मैं कुछ भी करुँगी। यह मेरे लिए शौभाग्य होगा की मेरे मुंह में तुम्हारा लंड जायेगा और मैं तुम्हारे लंड को चूसूंगी, मेरे प्यारे राजा”
और मुझे पकड़ कर खड़ा कर दिया और खुद घुटनों पर बैठ गईं और मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया।
मैं बता नहीं सकता की कितना मजेदार था यह मोमेंट जब आंटी ने मेरे लंड को हाथ में लेकर बहुत ही प्यार से धीरे धीरे सहलाना शुरू किया।
मैं तो अपने आप को किसी स्वर्ग का देवता समझने लगा।
और बोल पड़ा, “मेरी रानी, मेरी जान, आह …. ये कमाल का है, अब प्लीज मेरे लंड को अपने मुंह में लीजिये।”
“जरुर, अब मैंने अपने लौड़े राजा के लौड़े को मुंह में लेकर चूसती हूँ।” उन्होंने कहा और मेरे लंड को मुंह में लेकर अन्दर बाहर करने लगीं।
मैं थोड़ी देर बाद उनके सर को पकड़ कर उनके मुंह में अपने लंड से पेलने लगा।
करीब करीब 10 मिनट तक उन्हें ऐसे ही पेलता रहा।
फिर वह बोली, “विजय अब मुझे तुम्हारा लंड अपनी चूत में चहिये, प्लीज मुझे अपने लंड से मेरी चूत में पेलकर मेरे चूत को धन्य करो।”
“जी! जरुर आंटी जी, मैं अब आपको अपने लंड से चोदता हूँ।” मैं जवाब देते हुए उन्हें उठाकर बेड पर लिटा दिया
वो मिशनरी पोजीशन में थीं। मैंने उनके पैरों को फैलाया।
मैंने उनकी गुलाबी और चिकनी बुर पर अपने लंड का सुपारा रखा।
और उनसे पूछा, “मेरी रानी, क्या मुझे आपकी बुर में पेलने के लिए आपकी इजाजत है?”
“हां मेरे राजा… पेल दो अपने लंडसे… अपनी इस साली छिनाल रंडी के बुर में और मेरी बुर को चोद दो… मेरे लंड के राजा…” आंटी चिल्ला रही थीं।
मैंने एक जोर का धक्का लगाया और मेरा आधा लंड उनकी बुर में घुस गया।
“उई मां… आपका लंड बहुत मोटा है मेरे राजा … धीरे..धीरे . चोदिये अपनी रानी को, मुझे बहुत दर्द हो रहा है…” आंटी चीखीं।
“थोड़ा सहन करिए आंटी, थोड़ी देर में आपको बहुत मजा आने लगेगा,” मैंने कहा।
मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर कर दिया। आंटी की सांसें फूल गईं।
मैंने कुछ देर रुककर उनके होंठ चूमे। फिर धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
“अह्ह… हां… अब मजा आ रहा है… और तेज… चोदो अपनी मकान मालकिन को… इस रंडी को चोदो…” आंटी गाली दे रही थीं।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। पच-पच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उनकी चूचियां हिल रही थीं, मैं उन्हें पकड़कर दबा रहा था।
“आंटी, आपकी बुर बहुत टाइट है,” मैंने कहा।
“हां… बहुत सालों से नहीं चुदवाई हूँ… तुम्हारे मालिक ने मरने से पहले ही चोदना बंद कर दिया था… अब चोदो इस भूखी चूत को… मदरचोद…” आंटी चिल्ला रही थीं।
मैं 15 मिनट तक उन्हें मिशनरी पोजीशन में चोदता रहा।
फिर मैंने कहा, “आंटी, अब खड़े होकर चोदूं?”
“हां… जैसे चाहो चोदो… बस मत रुको…” आंटी ने कहा।
मैंने उन्हें खड़ा किया और उनकी एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रख दी।
अब मैं खड़े होकर उनकी बुर में लंड डालकर चोदने लगा। ये पोजीशन बहुत गहरी थी। मेरा लंड पूरी तरह से अंदर जा रहा था।
“ओह्ह… हां… गहरा जा रहा है… बहुत मजा आ रहा है… चोदो… चोदो अपनी चुदक्कड रंडी रानी को…” आंटी चिल्ला रही थीं।
मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे। “कैसी लग रही है आपको अपने किराएदार की चुदाई?”
“बहुत अच्छी… तुम बहुत अच्छा चोदते हो… इस लौड़े के राजा… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत को…” आंटी गाली दे रही थीं।
मैंने स्पीड और बढ़ा दी। 15 मिनट तक उन्हें इसी पोजीशन में चोदता रहा।
आंटी दो बार झड़ चुकी थीं। उनकी बुर से पानी निकल रहा था।
“अब मैं झड़ने वाला हूं आंटी,” मैंने कहा।
“अंदर ही निकाल दो… मैं तुम्हारे वीर्य को अपने बुर के अन्दर लूंगी… मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दो मेरे राजा” आंटी ने बहुत प्यार से कहा।
मैंने कुछ जोर के धक्के लगाए और अपना गरम पानी उनकी बुर में छोड़ दिया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर बिस्तर पर गिर पड़े।
मैं उनके पीछे से चिपक गया, और अपना लंड उनकी गांड के दरारों में रख दिया और काफी मजबूती से उन्हें पकड़ लिया।
“विजय, तुमने आज मेरी सालों की प्यास बुझा दी,” आंटी ने कहा।
“आंटी, मेरी रानी, ये तो शुरुआत है। अब तो मैं रोज आपकी चुदाई करूंगा,” मैंने कहा।
“हां… रोज आना. मेरे राजा.. मैं आपकी रखैल बनकर रहूंगी… तुम्हारे लंड की गुलाम…” आंटी ने कहा।
उसके बाद हमने एक-दूसरे को चूमा और फिर सेकंड राउंड के लिए तैयार हुए।
वो रात हमारी चुदाई की पहली रात थी, जिसके बाद हमारा रिश्ता सिर्फ मकान मालकिन और किराएदार का नहीं रहा, बल्कि जिस्म की भूख और प्यार का रिश्ता बन गया।
अब रोजाना जब भी मैं कॉलेज से आता, आंटी मेरे कमरे में आ जातीं और हम सेक्स का मजा लेते।
आंटी मेरी पूरी तरह से हो गई थीं, और मैं उनका गुलाम। हम दोनों एक-दूसरे के जिस्म से प्यार करते थे, और ये सिलसिला आज भी जारी है।
मेरी मकान मालकिन सुमन आंटी, जो अब मेरी रखैल बन चुकी हैं, हमेशा कहती हैं, “विजय, तुम्हारा लंड मेरी जिंदगी का सबसे कीमती तोहफा है। इसे कभी मत जाने देना।”
और मैं भी हमेशा उनकी बुर की सेवा करता हूं, उन्हें वो सुकून देता हूं जो वो सालों से तरस रही थीं। हम पति पत्नी की तरह रहते हैं, कभी जब मेरे घर वाले आते हैं तो मैं अपने कमरे में रहता हूँ और जब वो लोग चले जाते हैं तो फिर एक साथ।
मुझे नहीं पता है की पढ़ाई के ख़त्म होने के बाद क्या होगा लेकिन अभी यही हो रहा है।
हमारी ये चुदाई की कहानी, ये प्यार भरा सेक्स, ये जुनून… ये हमेशा यादगार रहेगा। मुझे डर लगता है कि मैं आंटी के चूत के बिना कैसे रहूँगा।
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Nice story…
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