old man chudai kahani
बूढ़े रमादीन अंकल ने पिताजी के न रहते हुए शमीना आपी को पांच सौ रुपये देकर अपने कमरे में बुलाया। उन्होंने आपी के बड़े दूध और काले निप्पल्स चूसे, उनकी भोसड़ा बनी गीली बुर चाटी, फिर अपने मोटे लंड से ज़ोर-ज़ोर से चोदा।
पिछली कहानियों में आपने पढ़ा कि कैसे दशरथ ने खेत में आपी की सील तोड़ी, फिर कैसे दिलीप और उसके दोस्त रमेश ने मिलकर होटल में आपी की दोहरी चुदाई की।
आपी अब पूरी तरह से एक चुदक्कड़ रंडी बन चुकी थीं।
उनकी बुर जो पहले टाइट थी, अब भोसड़े जैसी हो गई थी – हमेशा के लिए खुली हुई, रसीली, और हर लंड को आसानी से निगलने वाली।
मेरे पिताजी के एक बहुत पुराने दोस्त थे रमादीन अंकल। वह गाँव के ही रहने वाले थे और उनकी उम्र लगभग 50 साल की थी।
उनके बाल सफेद हो चुके थे, दाढ़ी भी सफेद थी, और चेहरे पर झुर्रियाँ थीं, लेकिन उनका बदन अभी भी मजबूत था।
वह रोज़ सुबह टहलने जाते थे इसलिए उनकी ताकत बरकरार थी।
रमादीन अंकल और पिताजी की दोस्ती बचपन से थी। वह अक्सर हमारे घर आते-जाते रहते थे।
जब भी वह आते, उनकी नज़र सीधे शमीना आपी पर टिक जाती।
आपी के बड़े-बड़े दूध, उनकी मोटी गांड, और उनकी चाल जो रंडियों जैसी हो गई थी, यह सब रमादीन अंकल को बहुत भाता था।
रमादीन अंकल की पत्नी की कुछ साल पहले मौत हो चुकी थी। उनके दो बेटे थे जो शहर में रहते थे।
अंकल अकेले रहते थे और उनकी जवानी की आग अभी भी बुझी नहीं थी।
उन्हें रोज़ रात को एक औरत की ज़रूरत महसूस होती थी और वह इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए शमीना आपी को अपनी नज़र बना चुके थे।
एक दिन की बात है। पिताजी अपने रिक्शे पर कहीं बाहर गए हुए थे। मम्मी भी अपनी एक बहन के यहाँ गई हुई थीं।
घर में सिर्फ मैं, आपी और छोटे-छोटे भाई-बहन थे। शाम का वक़्त था, धूप ढल रही थी और हल्की हवा चल रही थी।
रमादीन अंकल अपने कंधे पर एक थैला लेकर आए। उसमें वह कुछ फल और मिठाई लाए थे।
उन्होंने दरवाज़ा खटखटाया। मैंने दरवाज़ा खोला।
“अरे सलमा बेटी, तुम्हारे पिताजी कहाँ हैं?” रमादीन अंकल ने पूछा।
“अंकल, पिताजी बाहर गए हैं। शाम को आएँगे,” मैंने कहा।
रमादीन अंकल के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आई। उन्हें पता चल गया कि यह सही मौका है।
“अच्छा, तो शमीना कहाँ है?” उन्होंने पूछा।
“आपी अंदर हैं,” मैंने कहा।
रमादीन अंकल अंदर आ गए। उन्होंने अपना थैला नीचे रखा और आपी को आवाज़ दी। “शमीना बेटी, कहाँ हो?”
आपी बाहर आईं। उन्होंने एक हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी जो उनके बदन से चिपक रही थी।
उनके दूध साफ़ दिख रहे थे और निप्पल्स उभरे हुए थे।
रमादीन अंकल की आँखें उनके स्तनों पर टिक गईं और उनका लंड अंदर ही अंदर खड़ा हो गया।
“आओ बेटी, थोड़ी देर बैठो मेरे साथ। मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है,” रमादीन अंकल ने कहा।
आपी ने उनकी नीयत समझ ली, लेकिन वह भी तो रंडी थीं। उन्हें पता था कि यह बूढ़ा भी उन्हें चोदना चाहता है।
उन्होंने मना नहीं किया और उनके पास बैठ गईं।
रमादीन अंकल ने आवाज़ से कहा, “सलमा बेटी, तुम बाहर जाकर अपने पिता जी इंतज़ार करो। मैं तुम्हारी बहन से कुछ बात कर रहा हूँ।”
मैं समझ गई कि यह क्या होने वाला है, लेकिन मैं चुपचाप बाहर चली गई।
रमादीन अंकल ने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और आपी के पास बैठ गए।
“शमीना बेटी, तुम बहुत खूबसूरत हो गई हो। तुम्हारे पिताजी ने तुम्हें पाल-पोसकर बड़ा किया है और तुम अब एक पूरी औरत बन चुकी हो,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी के हाथ को पकड़ लिया।
“अंकल, आप क्या कह रहे हैं…” आपी ने शरमाते हुए कहा, लेकिन उनकी आँखों में वही चमक थी।
“बेटी, मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ। मैं जानता हूँ कि तुम अब बड़ी हो गई हो और तुम्हें मर्दों की ज़रूरत होती है। मैं भी अकेला हूँ। अगर तुम मुझे खुश कर दो, तो मैं तुम्हें पैसे दूँगा,” रमादीन अंकल ने सीधे तौर पर प्रस्ताव रखा।
आपी ने नीचे मुँह कर लिया। “अंकल, यह कैसी बातें कर रहे हैं आप… मैं आपकी बेटी जैसी हूँ…”
“बेटी जैसी नहीं, तुम मेरी रंडी बनोगी आज। देखो, मैं तुम्हें 500 रुपये दूँगा। बस एक बार मुझे अपने साथ सोने दो,” रमादीन अंकल ने कहा और अपनी जेब से 500 रुपये का नोट निकाला।
आपी ने पैसे देखे। 500 रुपये उस ज़माने में बहुत होते थे। उन्होंने सोचा कि एक बूढ़े से चुदवाने में क्या जाता है।
वह तो रोज़ ही चुदती हैं। “ठीक है अंकल, लेकिन कोई जान नहीं जाना चाहिए,” आपी ने कहा।
“नहीं जाएगा कोई, मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया है। चलो मेरे साथ मेरे कमरे में,” रमादीन अंकल ने कहा।
रमादीन अंकल का घर हमारे घर से कुछ दूर था। उन्होंने आपी को अपने कमरे में ले जाने का फैसला किया।
वहाँ कोई रुकावट नहीं होगी, कोई शोर नहीं होगा, और वह आराम से आपी की चुदाई कर सकेंगे।
आपी ने साड़ी ठीक की और रमादीन अंकल के साथ चल दीं। रास्ते में कुछ लोगों ने देखा, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा।
सब जानते थे कि शमीना क्या है और कहाँ जा रही है।
रमादीन अंकल के घर पहुँचकर, उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और आपी को अपने बेडरूम में ले गए।
उनका बेडरूम बड़ा था, बीच में एक चौड़ा बिस्तर था, और कमरे में एक अलग सी महक थी – बूढ़े मर्द की महक, जवानी की महक, और चुदाई की तैयारी की महक।
“आओ बेटी, आज मैं तुम्हें असली मर्द का मज़ा दूँगा। तुम्हारी बुर जो अब भोसड़ा बन चुकी है, उसे मैं अपने लंड से भरूँगा,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी को अपनी बाहों में भर लिया।
रमादीन अंकल ने आपी को कसकर पकड़ लिया। उनका बदन गरम था, साँसें तेज़ चल रही थीं।
उन्होंने आपी के गालों पर हाथ फिराया और फिर उनके होंठों को चूमने लगे।
उनके होंठ सूखे थे लेकिन चूसने में वह एक्सपर्ट थे।
वह आपी के निचले होंठ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे, फिर ऊपर वाले को, फिर दोनों को एक साथ।
“आह… अंकल… धीरे…” आपी सिसकीं।
“चुप बेटी, आज मैं तुझे चोदूँगा जैसे कोई जवान लड़का चोदता है। मेरा लंड अभी भी उतना ही तगड़ा है जितना मैं 20 साल का था,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी की साड़ी खींचने लगे।
उन्होंने आपी की साड़ी खींचकर उतार दी। आपी सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गईं।
उनके बड़े-बड़े दूध ब्लाउज में फूले हुए थे, निप्पल्स उभरे हुए थे। रमादीन अंकल की आँखें उनके स्तनों पर टिक गईं।
“वाह… क्या माल है… तेरे पिताजी ने तुझे बड़ा करके एकदम रंडी बना दिया है। तेरे दूध देखकर मेरा लंड पागल हो रहा है,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके स्तन दबाने लगे।
उन्होंने ज़ोर-ज़ोर से दूध दबाए, मसले, और खींचे। आपी के निप्पल्स ब्लाउज के ऊपर से ही खड़े हो गए।
रमादीन अंकल ने उन निप्पल्स को अपने उंगलियों से कसकर पकड़ा और घुमाना शुरू कर दिया।
“आह… दर्द हो रहा है अंकल… धीरे…” आपी चिल्लाईं।
“दर्द होगा बेटी, मज़ा भी तो आएगा,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी का ब्लाउज फाड़ दिया।
बटन टूट गए और आपी की ब्रा दिखने लगी। रमादीन अंकल ने ब्रा भी खींचकर उतार दी।
जैसे ही आपी के दूध आज़ाद हुए, रमादीन अंकल पागल हो गए।
उनके सामने दो गोरे-गोरे, बड़े-बड़े, नरम-नरम पहाड़ जैसे स्तन थे। निप्पल्स काले, बड़े, और खड़े हुए थे।
“मेरे भगवान… यह तो स्वर्ग है,” रमादीन अंकल बड़बड़ाए और एक स्तन पर टूट पड़े।
उन्होंने एक स्तन अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।
वह निप्पल को अपने दाँतों से काटते, जीभ से चाटते, और मुँह में भरकर चूसते। आपी की सिसकियाँ निकलने लगीं।
“आह… हाँ… और चूसो… मेरे निप्पल्स को काटो… आह… बहुत मज़ा आ रहा है…” आपी कराहने लगीं।
रमादीन अंकल दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को दबा रहे थे। वह दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसते, काटते, और दबाते।
आपी पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। उनकी बुर में पानी आने लगा था।
“अंकल… अब और मत तड़पाओ… मेरी बुर में आग लग रही है…” आपी ने कहा।
“रुक बेटी, अभी तो शुरुआत है,” रमादीन अंकल ने कहा और नीचे झुककर आपी का पेटीकोट खींचने लगे।
उन्होंने आपी का पेटीकोट और पैंटी दोनों एक साथ खींचकर उतार दिया। आपी पूरी नंगी हो गईं।
उनकी बुर सामने थी – एकदम गोरी, रसीली, और भोसड़े जैसी जो पहले से ही बहुत सारे लंडों से चुदी हुई थी।
बुर के होठ खुले हुए थे, अंदर गुलाबी गुफा दिख रही थी, और थोड़ी सी बाल थे।
“देखो बेटी, तुम्हारी बुर तो पूरी भोसड़ा बन चुकी है। यह तो बड़े-बड़े लंडों को आसानी से निगल लेती होगी,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी की बुर पर हाथ फिराया।
“हाँ अंकल, आपको तो पता ही है की चौराहे का कोई ऐसा आदमी नहीं है जिसने मुझे चोदा न हो।” शमीना आपी ने जवाब दिया
यह सुनकर रमादीन अंकल का तो बुरा हाल हो गया,
उन्होंने आपी की बुर के होठों को फैलाया और अंदर की गुलाबी दीवारें देखीं।
वहाँ पहले से ही पानी भरा हुआ था। रमादीन अंकल ने अपनी उंगली आपी की बुर में डाल दी।
“आह… हाँ… अंदर डालो…” आपी चिल्लाईं।
रमादीन अंकल ने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी।
आपी की बुर बहुत गीली थी और उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। फिर उन्होंने दो उंगलियाँ डाल दीं, फिर तीन।
“कितनी चौड़ी हो गई है तुम्हारी बुर। यह तो अब किसी भी लंड को बिना दर्द के ले लेती है,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी की बुर में उंगलियाँ घुमाने लगे।
आपी की कमर उठ-उठ कर हिल रही थी। वह और ज़्यादा चाहती थीं। “अंकल… अब अपना लंड डालो… मेरी बुर में आग लग रही है…”
“रुक बेटी, पहले मैं तुम्हारी बुर चाटता हूँ,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी की टाँगें फैलाकर उनकी बुर पर मुँह रख दिया।
उन्होंने अपनी जीभ आपी की बुर में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगे।
वह उनके बुर के होथों को चाटते, नीचे की तरफ चाटते, और फिर अंदर की गहराई तक जीभ डालते। आपी पागल हो रही थीं।
“आह… हाँ… और चाटो… मेरी बुर को चाटो… जीभ अंदर डालो… आह… मैं गई…” आपी चिल्लाने लगीं।
रमादीन अंकल ने आपी की बुर को पूरा चाटा, साफ़ किया, और फिर उठकर अपने कपड़े उतारने लगे।
उन्होंने अपनी बनियान उतारी, फिर पैंट उतारी। उनका बदन बूढ़ा था लेकिन अभी भी मजबूत था।
पेट थोड़ा निकला हुआ था लेकिन छाती चौड़ी थी।
जब उन्होंने अंडरवियर उतारा, तो उनका लंड बाहर आया। वह 7 इंच लम्बा था, लेकिन इतना मोटा कि आपी की आँखें खुली रह गईं।
सुपाड़ा लाल और फूला हुआ था, नसें उभरी हुई थीं, और पूरा लंड एकदम कड़क था।
“देखा बेटी, बूढ़ा होने के बावजूद मेरा लंड अभी भी जवानों से कम नहीं है। आज इसी से तुम्हारी भोसड़े वाली बुर चुदेगी,” रमादीन अंकल ने गर्व से कहा।
आपी ने उस विशाल लंड को देखा और उनके मुँह में पानी आ गया।
वह उसे अपने हाथ में लेना चाहती थीं। “अंकल… यह तो बहुत मोटा है…”
“हाँ बेटी, मोटा है। और यह तुम्हारी बुर में जाकर तुम्हें स्वर्ग का मज़ा देगा,” रमादीन अंकल ने कहा और आपी को बिस्तर पर लेटा दिया।
रमादीन अंकल ने आपी को बिस्तर पर लेटा दिया।
उन्होंने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख लीं ताकि उनकी बुर पूरी तरह खुली रहे और लंड आसानी से अंदर जा सके।
आपी की बुर एकदम खुली हुई थी, भोसड़े जैसी, गीली, और चुदाई के लिए तैयार।
“देखो बेटी, मैं अपना लंड तुम्हारी बुर में डाल रहा हूँ। तुम्हारी यह भोसड़ा बनी बुर आज मेरे लंड से भरेगी,” रमादीन अंकल ने कहा और अपने लंड का सुपाड़ा आपी की बुर के मुहाने पर रख दिया।
सुपाड़ा गरम था, फूला हुआ था, और आपी की बुर के होठों को चीरता हुआ अंदर जाने लगा। रमादीन अंकल ने ज़ोर से धक्का दिया।
“फाअअअअअअ…”
पूरा लंड एक ही बार में आपी की बुर में घुस गया। भले ही वह बूढ़े थे, लेकिन उनके धक्के में बहुत ताकत थी। आपी चीख उठीं।
“आह… अंकल… बहुत मोटा है… मेरी बुर फट रही है…” आपी चिल्लाईं।
“चुप बेटी, तुम्हारी बुर तो अब भोसड़ा है। यह आसानी से ले लेगी। रुको, अब मज़ा आएगा,” रमादीन अंकल ने कहा और धक्के मारने शुरू कर दिए।
वह ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड आपी की बुर में अंदर-बाहर करने लगे। “फच… फच… फच…” की आवाज़ आ रही थी।
आपी की बुर गीली थी और लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
भोसड़े होने के कारण कोई ज़्यादा दर्द नहीं हो रहा था, बल्कि मज़ा ही मज़ा आ रहा था।
“कैसा लग रहा है बेटी? मेरा लंड तुम्हें मज़ा दे रहा है ना?” रमादीन अंकल ने पूछा।
“हाँ अंकल… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से चोदो… मेरी भोसड़ा बनी बुर को फाड़ दो… आह… हाँ… वहीं… और ज़ोर से…” आपी चिल्लाने लगीं।
रमादीन अंकल ने आपी के दूध पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए चोदना जारी रखा।
वह उनके निप्पल्स को खींचते, काटते, और मसलते। आपी पूरी तरह से मस्त हो चुकी थीं।
“आह… मैं गई… मैं झड़ने वाली हूँ…” आपी ने कहा।
“रुको बेटी, अभी तो मैं शुरू ही हुआ हूँ,” रमादीन अंकल ने कहा और अपनी स्पीड बढ़ा दी।
वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे। उनका लंड आपी की बुर की गहराई तक जा रहा था।
सुपाड़ा आपी की बुर की दीवारों से टकरा रहा था और उन्हें असीम आनंद दे रहा था।
“ले साली… ले मेरा लंड… तेरी बुर बहुत मस्त है… इतनी गीली… इतनी रसीली… आह… मज़ा आ गया…” रमादीन अंकल चिल्ला रहे थे।
आपी ने अपने हाथों से रमादीन अंकल की कमर पकड़ ली और उन्हें और अपनी तरफ खींचने लगीं। “और ज़ोर से… मेरी बुर में अपना पूरा लंड डालो… फाड़ दो इस भोसड़े को… आह… हाँ… और ज़ोर से…”
रमादीन अंकल लगभग बीस मिनट तक उन्हें इसी तरह चोदते रहे।
फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और आपी को घोड़ी बना दिया।
“आओ बेटी, अब इस तरह से चुदो। मुझे तुम्हारी गांड भी दिखाओ,” रमादीन अंकल ने कहा।
आपी अपने हाथों और घुटनों के बल बिस्तर पर आ गईं। उनकी गांड ऊपर उठी हुई थी और बुर पीछे की तरफ से दिख रही थी।
रमादीन अंकल ने उनकी गांड पर थप्पड़ मारा और फिर अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।
“आह… यह तो और भी गहरा जा रहा है…” आपी चीखीं।
“हाँ बेटी, इस तरह से और भी अंदर जाता है,” रमादीन अंकल ने कहा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।
वह आपी की गांड पर थप्पड़ मारते हुए, उनके बाल खींचते हुए, और उनकी बुर में लंड पेलते हुए चोद रहे थे।
आपी की बुर से आवाज़ें आ रही थीं – “फच… फच… फच…”
“क्या मस्त भोसड़ा है तुम्हारी बुर बेटी… यह तो रोज़ चुदती है ना?” रमादीन अंकल ने पूछा।
“हाँ अंकल… रोज़ चुदती हूँ… हर रोज़ कोई न कोई मेरे घर आता है… मेरी बुर चोदने के लिए…” आपी ने कहा।
“साली रंडी… तू तो पूरी प्रोफेशनल हो गई है,” रमादीन अंकल ने कहा और और भी ज़ोर से चोदने लगे।
आपी के स्तन ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे।
रमादीन अंकल ने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनके दूध पकड़ लिए और उन्हें खींचने लगे।
वह उनके निप्पल्स को मसलते हुए उन्हें चोद रहे थे।
“आह… माँ… बहुत मज़ा आ रहा है… मैं फिर से झड़ने वाली हूँ…” आपी चिल्लाईं।
“झड़ो बेटी, मेरे साथ झड़ो,” रमादीन अंकल ने कहा और अपनी स्पीड और तेज़ कर दी।
वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे। आपी की बुर में से पानी निकलने लगा था।
दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं। कमरे में सिर्फ़ चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं।
“आह… मैं गई… मैं झड़ गई…” आपी ने अपना पानी छोड़ दिया।
“मैं भी झड़ने वाला हूँ बेटी… तुम्हारी बुर में अपना माल छोड़ूँगा…” रमादीन अंकल ने कहा।
“नहीं अंकल… बाहर निकालो… प्रेगनेंट हो जाऊँगी…” आपी ने कहा।
“चुप साली, आज तो तुम्हारी बुर में ही जाएगा मेरा माल,” रमादीन अंकल ने कहा और ज़ोर से धक्का दिया।
वह ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। उनका लंड आपी की बुर की गहराई में जाकर फँस गया।
फिर उन्होंने एक ज़ोरदार धक्का दिया और अपना गरम-गरम माल आपी की बुर में छोड़ दिया।
“आह… गरम माल… बहुत गरम है…” आपी चिल्लाईं।
रमादीन अंकल ने लगभग दो मिनट तक अपना लंड आपी की बुर में ही रखा और अपना सारा माल उनकी बुर में भर दिया। फिर वह थककर उनके ऊपर गिर गए।
कुछ देर बाद वह उठे और अपना लंड बाहर निकाला। माल और रस से लथपथ लंड बाहर आया।
आपी की बुर से भी माल बह रहा था। उनकी भोसड़ा बनी बुर अब और भी ज़्यादा लाल और फैली हुई दिख रही थी।
“बेटी, मज़ा आया?” रमादीन अंकल ने पूछा।
“हाँ अंकल, बहुत मज़ा आया,” आपी ने कहा और उठकर अपने कपड़े पहनने लगीं।
रमादीन अंकल ने उन्हें 500 रुपये दिए और कहा कि वह फिर आएँगे। आपी पैसे लेकर थकी हुई लेकिन संतुष्ट घर आ गईं।
यह थी बूढ़े रमादीन अंकल और शमीना आपी की चुदाई की कहानी।
उन्होंने आपी की भोसड़ा बनी बुर को खूब चोदा और उनके दूध, निप्पल्स, और बुर का पूरा मज़ा लिया।
आपी भी उनके मोटे लंड से पूरी तरह संतुष्ट हुईं।
कुछ दिनों बाद पता चला की आपी प्रेग्नेंट हो गयी थीं। अगली कहानी में बताऊंगी की कैसे एबॉर्शन करने वाला बंगाली डॉक्टर ने आपी को अक्सर चोदने लगा।
NEXT PART: एबॉर्शन करने वाला बंगाली डॉक्टर ने आपी को चोदा
- सलमान मुझे 5 साल तक रंडियों की तरह चोदा
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- काकी और चाची को मैं और काका मिलकर चोदे
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