kaaki group me chudai stroy
कुछ हफ्ते बीत चुके थे। नीलम काकी और मेरा रिश्ता अब एक नए मोड़ पर था। हम रोज रात को एक-दूसरे को प्यार देते, और दिन में चोरी-छिपे चूमा-चाटी करते। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे मैं अपनी प्यारी काकी को चोदा दिया }
एक शाम, जब मैं और काकी कमरे में एक-दूसरे से लिपटे हुए थे, अचानक दरवाज़ा खुला और काका जी अंदर आ गए।
वो एक हफ्ते की यात्रा से एक दिन पहले ही लौटे थे, और हमें इसकी कोई खबर नहीं थी।
“क्या चल रहा है यहाँ?” काका जी की आवाज़ कांप रही थी। उनके हाथ में सूटकेस था और वो हमें घूर रहे थे।
मैं और काकी एक-दूसरे से अलग हुए। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
काकी का चेहरा पीला पड़ गया था। हम दोनों अर्ध-नग्न अवस्था में थे – काकी की साड़ी खुली हुई थी और मेरा शर्ट बटन खुला था।
“ये… ये…” काकी कुछ बोल नहीं पा रही थीं।
काका जी ने दरवाज़ा बंद किया और अंदर आ गए।
उनका चेहरा गुस्से से लाल था, लेकिन उनकी आँखों में कुछ और भी था – एक अजीब सी चमक, एक छिपी हुई वासना।
“मैंने सब देख लिया,” काका जी ने कहा और कुर्सी पर बैठ गए। “कब से चल रहा है ये सब?”
मैं डरा हुआ था। मुझे लगा कि अब सब खत्म हो गया।
लेकिन काकी ने हिम्मत जुटाई और काका जी के पास गईं।
“सुनिए,” काकी ने हल्की आवाज़ में कहा, “मैं जानती हूँ कि आपको बुरा लग रहा है। लेकिन सच्चाई ये है कि आप मुझे समय नहीं देते। मुझे प्यार की ज़रूरत थी, और सोनू ने वो प्यार दिया।”
काका जी चुप रहे। वो काकी को देख रहे थे, फिर मुझे देख रहे थे।
“तुम्हें पता है नीलम,” काका जी ने धीरे से कहा, “कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ। लेकिन मेरी नौकरी की वजह से मैं तुम्हें समय नहीं दे पाता।”
“मैं समझती हूँ,” काकी ने कहा और काका जी के हाथ पर हाथ रखा, “लेकिन मैं एक औरत हूँ। मुझे भी ज़रूरतें हैं।”
काका जी ने काकी का हाथ पकड़ा। “क्या तुम सच में सोनू से प्यार करती हो? या सिर्फ शारीरिक ज़रूरत?”
काकी ने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में प्यार साफ झलक रहा था। “मैं सोनू से बहुत प्यार करती हूँ। लेकिन आपसे भी प्यार करती हूँ। आप मेरे पति हैं।”
काका जी ने गहरी साँस ली। वो कुछ सोच रहे थे। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा।
“सोनू, तुम मेरे भतीजे हो। मैंने तुम्हें पाला है। लेकिन मैं जानता हूँ कि तुम अब बड़े हो गए हो। और नीलम… वो सच में एक खूबसूरत औरत है।”
मैं समझ नहीं पा रहा था कि काका जी क्या सोच रहे हैं। लेकिन फिर उन्होंने कुछ ऐसा कहा जिससे मेरे होश उड़ गए।
“मैंने कभी सोचा नहीं था कि ये दिन भी देखना पड़ेगा,” काका जी ने कहा, “लेकिन शायद ये ही सही है। नीलम, क्या तुम मुझे और सोनू दोनों को खुश रख सकती हो?”
काकी ने हैरानी से उन्हें देखा। “आपका क्या मतलब है?”
काका जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरा मतलब है कि अगर तुम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हो, और मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ, तो क्यों ना हम तीनों एक साथ खुश रहें? मैंने कभी त्रिगुट… मतलब थ्रीसम के बारे में सोचा था, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई।”
मैं हैरान था।
काका जी हमें माफ़ कर रहे थे, और उससे भी बड़ी बात, वो हमारे साथ शामिल होना चाहते थे।
काकी ने शरमाते हुए कहा, “आप सच में ये चाहते हैं?”
“हाँ,” काका जी ने कहा और खड़े हो गए, “और आज रात से ही शुरुआत होगी।”
वो काकी के पास गए और उनके गाल पर चूमा। फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा।
“सोनू, क्या तुम तैयार हो अपने काका के साथ मिलकर अपनी काकी को खुश करने के लिए?”
मैंने हाँ में सिर हिलाया। मेरे मन में एक अजीब सी उत्तेजना थी।
ये सोचकर कि अब मैं और काका जी मिलकर काकी को चोदेंगे, मेरा लंड खड़ा होने लगा।
“तो फिर शुरू करें,” काका जी ने कहा और अपने कपड़े उतारने शुरू किए।
वो एक बहुत ही फिट आदमी थे।
उम्र के बावजूद उनका बदन बहुत मजबूत था।
उनकी छाती पर बाल थे और पेट बिल्कुल सपाट था।
जब उन्होंने अपनी पैंट उतारी, तो उनका लंड देखकर मैं चौंक गया।
वो करीब 8 इंच लंबा और बहुत मोटा था, एकदम काला और नसों से भरा हुआ।
“देखा सोनू,” काका जी ने कहा, “तुम्हारा काका अभी भी जवान है।”
काकी भी उन्हें देखकर मुस्कुरा रही थीं। “आपका लंड तो हमेशा से बहुत बड़ा है,” उन्होंने शरमाते हुए कहा।
“आज इसी से तेरी बुर और गांड दोनों फाड़ूँगा,” काका जी ने कहा और काकी को अपनी तरफ खींच लिया।
उन्होंने काकी को कसकर पकड़ा और उनके होंठों पर जोर से चूमा।
ये एक जंगली चुंबन था – पूरी तरह से वासना से भरा हुआ।
काका जी काकी की जीभ को चूस रहे थे और उनके मम्मों को जोर-जोर से दबा रहे थे।
“आह… धीरे… बहुत दर्द हो रहा है,” काकी ने कहा।
“चुप कर रांड,” काका जी ने गाली दी, “आज तू दो लंड लेगी, एक तेरे भतीजे का और एक मेरा। तेरी बुर और गांड दोनों फाड़कर रख दूँगा।”
ये सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड भी पूरी तरह से खड़ा था।
“आओ सोनू,” काका जी ने कहा, “आओ अपनी काकी की सेवा करो।”
मैं काकी के पास गया। वो अब दो लंडों के बीच में थीं – एक उनके सामने था और एक पीछे।
मैंने उनके गाल को चूमा और फिर उनके होंठों पर अपने होंठ रखे।
हम तीनों एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। काका जी पीछे से काकी की गांड सहला रहे थे और मैं आगे से उनकी बुर को।
काकी दोनों तरफ से छू रही थीं और आहें भर रही थीं।
“क्या मजा आ रहा है तुझे रांड?” काका जी ने पूछा।
“बहुत मजा आ रहा है,” काकी ने कहा, “आज मेरी दोनों जगहें भर जाएँगी।”
“हाँ साली,” काका जी ने कहा, “आज तेरी बुर में सोनू का लंड जाएगा और गांड में मेरा। दोनों तरफ से तुझे चोदेंगे।”
मैंने काकी को बेड पर लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं और उनकी बुर को देखा।
वो गीली हो चुकी थी। मैंने अपने लंड का सुपारे को उनकी बुर के मुँह पर रखा।
“काकी, तैयार हो?” मैंने पूछा।
“हाँ सोनू, डाल दो अपना लंड मेरी बुर में,” काकी ने कहा।
मैंने एक धक्का दिया और मेरा लंड उनकी बुर में घुस गया। वो आहें भरने लगीं।
“आह… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से सोनू…”
मैंने धक्के मारने शुरू किए। उनकी बुर बहुत गर्म और टाइट थी। मैं जोर-जोर से उन्हें चोद रहा था।
तभी काका जी ने काकी को घोड़ी बनाया। वो अपने हाथों और घुटनों के बल हो गईं, और मैं नीचे लेट गया।
मेरा लंड उनकी बुर में ही था, और अब उनकी गांड हवा में थी।
“अब मेरी बारी,” काका जी ने कहा।
उन्होंने अपने लंड पर तेल लगाया और काकी की गांड के छेद पर रगड़ा।
काकी थोड़ी डरी हुई लग रही थीं।
“काका जी, धीरे से डालना… मेरी गांड बहुत टाइट है,” काकी ने कहा।
“चिंता मत कर रांड,” काका जी ने कहा, “थोड़ा दर्द होगा फिर मजा आएगा।”
उन्होंने अपने लंड का सुपारा काकी की गांड के मुँह पर रखा और धीरे से दबाया। काकी चीख उठीं।
“आह… बहनचोद… बहुत दर्द हो रहा है…”
“शांत रह साली,” काका जी ने कहा और एक जोरदार धक्का दिया।
उनका आधा लंड काकी की गांड में घुस गया। काकी दर्द से कराह रही थीं।
लेकिन काका जी नहीं रुके। उन्होंने और जोर से धक्का दिया और पूरा लंड अंदर कर दिया।
“आह… मादरचोद… मेरी गांड फट गई…” काकी चीखीं।
“अभी तो शुरुआत है रांड,” काका जी ने कहा।
अब हम दोनों एक साथ धक्के मारने लगे।
जब मैं अंदर जाता, तो काका जी बाहर निकलते, और जब वो अंदर जाते, तो मैं बाहर निकलता।
काकी दोनों तरफ से चुद रही थीं।
“कैसा लग रहा है तुझे रांड?” काका जी ने पूछा।
“बहुत… बहुत मजा आ रहा है…” काकी हांफ रही थीं, “दोनों लंड… बहुत अच्छे हैं… और जोर से चोदो…”
मैंने काकी के मम्मों को पकड़ लिया और उनके निप्पल्स को मसलना शुरू कर दिया। वो और उत्तेजित हो गईं।
“आह… सोनू… मेरे निप्पल्स को मसलो… और जोर से…”
काका जी ने काकी की गांड थपथपाना शुरू कर दिया।
हर थपकी के साथ वो एक धक्का मारते।
“पेलो मेरे सैयां जी… मेरी गांड को मारो… साली रांड की गांड फाड़ दो…” काकी चिल्ला रही थीं।
हम दोनों की स्पीड बढ़ गई थी।
कमरे में चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं – थप-थप-थप की आवाज, काकी की सिसकारियाँ, और हमारी हांफने की आवाज।
करीब बीस मिनट तक इसी तरह चुदाई चली।
फिर काका जी ने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ…”
“मैं भी…” मैंने कहा।
“एक साथ झड़ते हैं,” काका जी ने कहा।
हम दोनों ने स्पीड और बढ़ा दी। काकी भी झड़ने वाली थीं।
“आह… मैं झड़ रही हूँ… दोनों मुझे भर दो… अपना माल मेरी बुर और गांड में डाल दो…” काकी चीखीं।
काका जी ने पहले झड़ा।
उनका गर्म वीर्य काकी की गांड में भर गया।
फिर मैंने भी झड़ दिया और मेरा माल उनकी बुर में चला गया।
हम तीनों एक साथ झड़े। काकी बीच में थीं और हम दोनों उनके अंदर अपना प्यार डाल रहे थे।
थोड़ी देर बाद हम अलग हुए। काका जी का लंड काकी की गांड से बाहर निकला और उनकी गांड से वीर्य बहने लगा।
मेरा लंड भी उनकी बुर से निकला और वहाँ से भी सफेद तरल बह रहा था।
“क्या मजा आया,” काका जी ने हांफते हुए कहा।
“बहुत मजा आया,” काकी ने कहा और उठकर हम दोनों को किस किया।
लेकिन यहीं खत्म नहीं हुआ। काका जी ने फोन किया और कुछ देर बाद दरवाज़े पर दस्तक हुई।
“कौन है?” मैंने पूछा।
“तुम्हारी चाची,” काका जी ने मुस्कुराते हुए कहा।
दरवाज़ा खुला और मेरी चाची अंदर आईं। वो भी बहुत खूबसूरत थीं – करीब 35 साल की, गोरी, और भरी हुई फिगर वाली।
“मैंने सब सुन लिया था,” चाची ने कहा, “और मैं भी शामिल होना चाहती हूँ।”
मैं हैरान था। आज तो सब कुछ हो रहा था।
चाची ने अपने कपड़े उतारे। उनके मम्मे काकी से भी बड़े थे। उन्होंने मेरे पास आकर मेरे लंड को पकड़ा।
“बहुत बड़ा लंड है तुम्हारा भतीजे,” चाची ने कहा और उसे चूसना शुरू कर दिया।
“आह… चाची…” मैं सिहर उठा।
चाची बहुत माहिर थीं। उन्होंने मेरे लंड को पूरा अपने मुँह में ले लिया और जीभ से चाटना शुरू कर दिया।
फिर वो काका जी के पास गईं और उनके लंड को भी चूसने लगीं।
“आज तो चार लोग हैं,” काका जी ने कहा, “मजा आ जाएगा।”
हमने फिर से पोजीशन बनाई।
काकी और चाची दोनों बेड पर लेट गईं।
काका जी चाची की बुर में लंड डालने लगे, और मैं काकी की बुर में।
फिर हमने स्वैप किया – मैं चाची को चोदने लगा और काका जी काकी को।
दोनों औरतें एक-दूसरे के हाथ पकड़े हुए थीं और चिल्ला रही थीं।
“और जोर से चोदो… हम दोनों को फाड़ दो…” चाची चीख रही थीं।
“हाँ साली रांडों,” काका जी ने कहा, “आज तुम दोनों की बुरें लाल कर दूँगा।”
हमने घंटों तक चुदाई की। कभी काकी को चोदा, कभी चाची को। कभी दोनों को एक साथ।
फिर चाची ने कहा कि वो भी डबल पेनेट्रेशन लेना चाहती हैं।
काका जी ने उनकी बुर में लंड डाला और मैंने उनकी गांड में। चाची चीख उठीं।
“आह… दोनों लंड… बहुत अच्छे हैं… और जोर से… मेरी गांड फाड़ दो…”
हमने उन्हें जोर-जोर से चोदा।
फिर काकी ने भी कहा कि वो फिर से दोनों लंड एक साथ लेना चाहती हैं।
इस बार मैंने काकी की बुर में लंड डाला और काका जी ने उनकी गांड में।
हम दोनों एक साथ धक्के मारने लगे।
“क्या मजा आ रहा है तुझे रांड?” मैंने काकी से पूछा।
“बहुत मजा आ रहा है सोनू… तुम दोनों मुझे बहुत खुश कर रहे हो…” काकी ने कहा।
“आज के बाद हम रोज ऐसे ही करेंगे,” काका जी ने कहा।
“हाँ… रोज चोदना… मेरी बुर और गांड को रोज भरना…” काकी कह रही थीं।
हमने फिर से एक साथ झड़ा। दोनों औरतों की बुर और गांड में हमने अपना माल डाला।
उस रात के बाद हम चारों का एक अजीब सा रिश्ता बन गया।
रोज रात को हम एक साथ मिलते और एक-दूसरे को खुश करते। कभी-कभी तो पूरे दिन चुदाई चलती।
काकी और चाची दोनों अब बहुत खुश रहती थीं।
उनकी बुरें हमेशा गीली रहती थीं और हमारे लंड हमेशा उनके लिए तैयार रहते थे।
ये हमारा गुप्त खेल था, जो रोज रात को खेला जाता था।
और हम सब इसमें बहुत खुश थे।
दोस्तों, ये थी हमारी चारों की कहानी।
आशा करता हूँ आपको पसंद आई होगी।
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