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पिछली कहानी में आपने पढ़ा कि कैसे दशरथ ने खेत में जाकर मेरी बहन शमीना आपी की सील तोड़ी थी और उन्हें पहली बार चोदा था।
{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे दशरथ ने मेरी आपी खेत में चोदकर सील तोड़ी}
उस दिन के बाद आपी की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई थी। वह रोज़ चुदने लगी थीं और चुदाई के इस खेल में वह दिन-ब-दिन और भी खूबसूरत होती जा रही थीं।
उनके बदन में एक अलग सी चमक आ गई थी, उनके स्तन और भी भारी हो गए थे, और उनकी गांड और भी मोटी और आकर्षक हो गई थी।
दशरथ आपी को खाने के लिए रोज़ काजू, बादाम, किशमिश वगैरह लाता रहता था ताकि उनका बदन और भी मस्त रहे और चुदाई में और भी मज़ा आए।
वह आपी को अपनी रखैल बना चुका था और रोज़ उनकी बुर चोदता था।
लेकिन अब मैं बताने वाली की कैसे दशरथ का छोटा भाई दिलीप न मेरी बहन को चोदा।
दिलीप फलों का ठेला लगाकर बेचता था।
वह आम, केला, संतरा वगैरह का ठेला जिस चौराहे पर लगाता था, वहीं पर मेरे पिताजी अपना रिक्शा चलाते थे।
दिलीप की नज़र भी आपी पर पहले से ही थी, लेकिन उसे आपी को पटाने का मौका नहीं मिल पा रहा था।
वह रोज़ उन्हें देखता और सोचता कि कैसे इस माल को अपने बिस्तर पर ले जाए।
एक दिन मेरी मम्मी की तबीयत खराब हो गई। घर में पैसे नहीं थे दवा के लिए।
मजबूरन पिताजी को दिलीप से कुछ रुपये उधार लेने पड़े। पिताजी ने दिलीप से उधार लिए पैसे और मम्मी का इलाज कराया।
इसके बाद दिलीप का हमारे घर आना-जाना शुरू हो गया।
वह रोज़ शाम को आता और पिताजी से उधार के पैसे की बात करता, लेकिन असल में उसकी नज़र तो आपी पर ही टिकी रहती थी।
उसी समय पिताजी ने एक छोटी सी ब्लैक एंड वाइट टीवी खरीदकर लाई थी। उस ज़माने में टीवी बहुत बड़ी बात होती थी।
हम लोग उस पर मूवी देखते थे। रात में अक्सर आस-पास के लड़के और मर्द हमारे घर मूवी देखने के लिए आते थे।
यह उनके लिए मुफ़्त का तमाशा था और हमारे लिए थोड़ी सी कंपनी।
दिलीप भी एक दिन रात में मूवी देखने आया था। उस दिन “विजयपथ” मूवी चल रही थी।
घर में ज़्यादा जगह नहीं थी इसलिए सब लोग एक-दूसरे से सटकर बैठे थे। दिलीप ने जान-बूझकर आपी के पास ही जगह बनाई।
आपी ने सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी और एक चादर ओढ़ रखी थी क्योंकि पंखा नहीं था और गर्मी बहुत थी।
मूवी शुरू हो गई। अजय देवगन और तब्बू स्क्रीन पर थे। लेकिन दिलीप की नज़र तो स्क्रीन पर नहीं, बल्कि आपी के बदन पर थी।
उसने देखा कि आपी के दूध कितने बड़े हैं और कैसे उनकी साँसों के साथ उठ-उठ कर हिल रहे हैं।
धीरे-धीरे, जब सब मूवी में मशगूल हो गए, तो दिलीप ने अपना हाथ आपी की चादर के नीचे डाल दिया।
आपी ने हल्का सा विरोध किया, लेकिन दिलीप ने उनका हाथ पकड़ लिया और अपने हाथ को आगे बढ़ाता रहा।
उसने आपी के सलवार में हाथ डाल दिया और सीधे उनकी बुर पर हाथ रख दिया।
आपी की बुर पहले से ही गीली थी। उन्हें पता था कि यह दशरथ का भाई है और शायद यह भी उन्हें चोदना चाहता है।
दिलीप ने उनकी बुर में उंगली डाल दी और पूरी मूवी के दौरान उन्हें हाथों से चोदता रहा।
वह उनकी बुर में उंगली अंदर-बाहर करता रहा, उनके निप्पल्स को भी दबाता रहा, और आपी को पूरी मूवी में गर्म किए रखा।
“विजयपथ” मूवी खत्म हो गई, लेकिन दिलीप का खेल शुरू हुआ। उसने आपी से सेटिंग कर ली।
उसने आपी को कहा कि वह उन्हें एक ऐसी जगह ले जाएगा जहाँ कोई नहीं होगा, जहाँ वह उन्हें अपने दोस्त के साथ मिलकर चोदेगा।
आपी ने पहले तो मना किया, लेकिन दिलीप के ज़ोर देने पर और उसके पैसे दिखाने पर वह मान गईं।
एक दिन दिलीप आपी को बुलाकर अपने दोस्त के साथ फाजिलनगर ले गया।
वहाँ उसने एक सस्ते होटल में कमरा लिया और दोनों ने मिलकर आपी को खूब चोदा।
अब मैं आपको विस्तार से बताती हूँ कि उस रात होटल में क्या-क्या हुआ…
दिलीप ने अपने दोस्त रमेश को साथ में लिया था।
रमेश भी एक जवान लड़का था, गठीला बदन, और लंड में वैसी ही ताक़त जैसी दिलीप में थी।
दोनों ने प्लान बनाया था कि आज इस रंडी को दोनों मिलकर चोदेंगे और उसकी बुर का मज़ा लेंगे।
वह एक छोटे से होटल में पहुँचे। होटल का नाम था “कृष्णा लॉज”।
वहाँ उन्होंने एक कमरा लिया जो ऊपरी मंजिल पर था और पीछे की तरफ था ताकि कोई आवाज़ सुन न सके।
कमरा बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन एक बिस्तर था जो काफ़ी चौड़ा था।
जैसे ही वह कमरे में घुसे, दिलीप ने दरवाज़ा बंद कर दिया और आपी को अपनी बाहों में भर लिया।
“अबे साली रंडी, आज तो तेरी बुर का भंडारा लगेगा। दो-दो लंड तेरी बुर में घुसेंगे,” दिलीप ने कहा और आपी के होंठ चूमने लगा।
रमेश भी पीछे से आकर आपी से चिपक गया।
उसने आपी की गांड पर हाथ रख दिया और दबाने लगा।
“क्या माल है यार दिलीप! तेरी भाभी तो एकदम चुदक्कड़ लग रही है,” रमेश ने कहा।
आपी ने शरमाते हुए कहा, “क्या कर रहे हो तुम लोग… मुझे छोड़ दो…”
“छोड़ेंगे नहीं साली कुत्तिया, आज तो तुझे चोदकर ही रहेंगे,” दिलीप बोला और आपी के कपड़े खींचने लगा।
दिलीप ने आपी की साड़ी खींचकर उतार दी। वह सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गईं।
उनके बड़े-बड़े स्तन ब्लाउज में फूले हुए थे, निप्पल्स उभरे हुए थे।
रमेश की आँखें खुली की खुली रह गईं।
“बहनचोद, कितने बड़े दूध हैं इसके! यह तो असली माल है,” रमेश चिल्लाया।
दिलीप ने आपी का ब्लाउज फाड़ दिया। बटन टूटकर उड़ गए। आपी की ब्रा भी फट गई और उनके दोनों स्तन आज़ाद हो गए।
वह दूध के पहाड़ जैसे थे, गोरे-गोरे, नरम, और निप्पल्स काले-काले, बड़े-बड़े। दोनों मर्द पागल हो गए।
दिलीप ने एक चूची पकड़ा और रमेश ने दूसरा। दोनों ज़ोर-ज़ोर से उनके दूध दबाने लगे।
“आह… धीरे… दर्द हो रहा है…” आपी सिसकीं।
“चुप साली रंडी, आज तो तेरे दूध चूस-चूसकर खत्म करेंगे,” दिलीप बोला और एक निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा।
रमेश ने दूसरा निप्पल अपने मुँह में लिया और दाँतों से काटने लगा।
वह निप्पल को खींचता, चूसता, और काटता। आपी को दर्द हो रहा था लेकिन मज़ा भी आ रहा था। उनकी बुर गीली होने लगी।
“चल इसकी पैंटी भी उतारते हैं,” रमेश ने कहा।
दोनों ने मिलकर आपी का पेटीकोट और पैंटी खींचकर उतार दिया।
आपी पूरी नंगी हो गईं। उनकी बुर दिखने लगी – गोरी, रसीली, और थोड़ी सी बालों से भरी।
दिलीप ने उनकी बुर पर हाथ फिराया।
“कितनी गीली है साली की बुर! पहले से ही तैयार है लंड लेने के लिए,” दिलीप ने कहा।
रमेश ने अपने कपड़े उतारे। उसका लंड 8 इंच लम्बा था और मोटा। फिर दिलीप ने अपने कपड़े उतारे।
उसका लंड भी उतना ही बड़ा था, शायद थोड़ा और ज़्यादा मोटा। दोनों लंड तने हुए थे, सुपाड़े लाल, और नसें उभरी हुई।
“देख साली, दो-दो लंड तेरे लिए। आज तेरी बुर की खाल उतरेगी,” दिलीप ने कहा।
दोनों ने आपी को बिस्तर पर लेटा दिया। दिलीप ने आपी की टाँगें खोली और उनकी बुर को चाटने लगा।
उसने अपनी जीभ उनकी बुर में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा।
“आह… हाँ… और ज़ोर से… चाटो… मेरी बुर चाटो…” आपी कराहने लगीं।
रमेश ने उनके दूध पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। वह उनके निप्पल्स को खींचता, मसलता, और दबाता।
आपी की सिसकियाँ निकल रही थीं।
“आह… माँ… बहुत मज़ा आ रहा है… और करो… मत रुको…”
दिलीप ने आपी की बुर में दो उंगलियाँ डाल दीं और ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगा।
आपी की बुर से रस निकलने लगा।
“देख रमेश, कितनी रसीली है इसकी बुर। आज तो इसे खूब चोदेंगे,” दिलीप ने कहा।
रमेश ने आपी का मुँह पकड़ा और अपना लंड उनके मुँह में ठूँस दिया।
“चूस साली कुत्तिया, मेरा लंड चूस। अच्छे से चूस जैसे कोई आइसक्रीम हो,” रमेश ने कहा।
आपी ने मजबूरी में उसका लंड चूसना शुरू कर दिया। वह उसके सुपाड़े को जीभ से चाटती, फिर पूरा लंड मुँह में लेती।
रमेश को मज़ा आने लगा।
“साली बहुत अच्छा चूसती है। दिलीप, तेरी भाभी तो एक नंबर की चुदक्कड़ है,” रमेश बोला।
दिलीप ने आपी की बुर चाटते-चाटते उनकी गांड में भी उंगली डाल दी।
“आह… नहीं… वहाँ मत डालो… दर्द होगा…” आपी चिल्लाईं, लेकिन उनका मुँह लंड से भरा था इसलिए आवाज़ दबी रही।
“चुप साली, आज तो तेरी गांड भी मारेंगे,” दिलीप ने कहा और उनकी गांड में उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
आपी पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। उनके दूध दब रहे थे, बुर चट रही थी, और मुँह में लंड था।
वह पूरी तरह से रंडी बन चुकी थीं।
“चोदो मुझे… अब और मत तड़पाओ… मेरी बुर में लंड डालो… दोनों मिलकर चोदो…” आपी बड़बड़ाने लगीं।
दिलीप ने अपना लंड आपी की बुर के मुहाने पर रखा।
“तैयार हो जा साली रंडी। अब तेरी चुदाई शुरू होगी,” दिलीप ने कहा और ज़ोर से धक्का दिया।
“फाअअअअअ…फाड़ … दिया रे”
उसका पूरा लंड एक ही बार में आपी की बुर में घुस गया।
आपी चीख उठीं। “आह… बहुत बड़ा है… धीरे करो… मेरी बुर फट जाएगी…”
“चुप साली, अब तो पूरा लंड अंदर जाएगा,” दिलीप ने कहा और धक्के मारने शुरू कर दिए।
वह ज़ोर-ज़ोर से आपी की बुर में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा।
“फच… फच… फच…” की आवाज़ आ रही थी। आपी की बुर गीली थी इसलिए लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
“कैसा लग रहा है साली? मेरा लंड तेरे भैया के लंड से बड़ा है ना?” दिलीप ने पूछा।
“हाँ… बहुत बड़ा है… और ज़ोर से चोदो… मेरी बुर को फाड़ दो… आह… हाँ… वहीं… और ज़ोर से…” आपी चिल्लाने लगीं।
दिलीप ने उनके दूध पकड़े और ज़ोर-ज़ोर से दबाते हुए चोदना जारी रखा।
उसने आपी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और भी गहरे धक्के मारने लगा।
उसका लंड आपी की बुर की गहराई तक जा रहा था।
“आह… मैं गई… मैं झड़ने वाली हूँ…” आपी चिल्लाईं।
“रुक साली, अभी मत झड़ना,” दिलीप ने कहा और अपना लंड बाहर निकाल लिया।
अब रमेश की बारी थी। उसने आपी को घोड़ी बना दिया।
आपी अपने हाथों और घुटनों के बल बिस्तर पर थीं, उनकी गांड ऊपर उठी हुई थी।
रमेश ने उनकी बुर में अपना लंड डाल दिया।
“आह… यह तो और भी मोटा है…” आपी चीखीं।
रमेश ने ज़ोर से धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
फिर वह ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। वह आपी की गांड पर थप्पड़ मारता, उनके बाल खींचता, और उनकी बुर में लंड पेलता।
“ले साली… रंडी.. ले मेरा लंड… तेरी बुर बहुत मस्त है… इतनी टाइट… आह… मज़ा आ गया…” रमेश चिल्ला रहा था।
आपी की बुर में पहले से ही दिलीप का माल थोड़ा लगा हुआ था, लेकिन रमेश का लंड और भी मोटा होने के कारण उन्हें और मज़ा आ रहा था।
वह पीछे की तरफ धक्का लगातीं ताकि लंड और अंदर जाए।
“हाँ… और ज़ोर से… चोदो मुझे… मैं तुम दोनों की रंडी हूँ… मेरी बुर में अपना पूरा लंड डालो… फाड़ दो मेरी बुर…” आपी बड़बड़ा रही थीं।
रमेश ने लगभग दस मिनट तक उन्हें चोदा। फिर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया।
फिर दिलीप ने कहा, “रमेश! सुन, अब हम लोगबुर बुर में एक साथ दोनों लंड डालेंगें। जैसे उस चुदाई वाले विडियो में हमने देखा था, ठीक है भाई?”
रमेश ने जवाब दिया, “अच्छा हाँ, जो हम लोग कल देखे थे। इस तरह तो बहुत मजा आएगा चल ऐसा ही करते हैं।”
दिलीप नीचे लेट गया और आपी को ऊपर लेकर अपना लंड आपी की बुर में डाला।
फिर रमेश ने थोड़ा तेल लगाया और आपी की बुर के पास अपना लंड रखा। दोनों लंड एक साथ अंदर डालने की कोशिश करने लगे।
“आह… नहीं… दो-दो लंड नहीं जाएँगे… मेरी बुर फट जाएगी… मर जाऊँगी…” आपी चीखने लगीं।
“चुप साली रंडी, जाएगा तो सब कुछ। आज तेरी बुर दो लंडों से चुदेगी,” दिलीप ने कहा और ज़ोर से धक्का दिया।
दोनों लंडों के सुपाड़े आपी की बुर में घुस गए। उनकी बुर बहुत फैल गई थी। दर्द बहुत हो रहा था, लेकिन दोनों मर्द ज़ोर लगाते रहे।
“फाअअअअअ… आह… मर गई… बहुत दर्द हो रहा है…” आपी रोने लगीं।
“थोड़ी देर में मज़ा आएगा साली,” रमेश ने कहा और दोनों ने एक साथ धक्का दिया।
दोनों लंड आधे-आधे अंदर घुस गए। आपी की बुर पूरी तरह फैल चुकी थी।
वह दोनों लंडों से भरी हुई थीं। फिर दोनों ने धक्के मारने शुरू किए।
“फच… फच… फच…” की आवाज़ तेज़ हो गई। दोनों लंड एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे।
आपी को शुरू में दर्द हो रहा था, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मज़ा आने लगा।
उनकी बुर दो लंडों से भरी थी और वह असीम आनंद महसूस कर रही थीं।
“आह… हाँ… अब मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से… दोनों मिलकर चोदो… मेरी बुर को खत्म कर दो… आह… मैं गई… मैं झड़ रही हूँ…” आपी चिल्लाने लगीं।
दोनों मर्द भी अपनी स्पीड बढ़ा दी। वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहे थे।
आपी के दूध ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे। दिलीप ने उनके निप्पल्स को खींचा और काटा।
“आह… माँ… मैं गई… झड़ गई…” आपी ने अपना पानी छोड़ दिया।
दोनों मर्द भी झड़ने वाले थे। उन्होंने एक साथ अपने लंड बाहर निकाले और आपी के मुँह में ठूँस दिए।
“चूस साली, हमारा माल चूस,” दोनों ने कहा।
आपी ने दोनों लंडों को मुँह में लिया और चूसने लगीं। कुछ ही देर में दोनों ने एक साथ अपना गरम-गरम माल आपी के मुँह में छोड़ दिया।
आपी ने सारा माल पी लिया और लंड चाट-चाटकर साफ़ कर दिया।
फिर दोनों ने आपी को फिर से चोदा। इस बार दिलीप ने उनकी गांड मारी और रमेश ने बुर चोदी।
दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। आपी पूरी तरह से थक चुकी थीं लेकिन मज़े ले रही थीं।
रात भर दोनों मर्दों ने उन्हें चोदा। कभी एक-एक करके, कभी दोनों एक साथ।
आपी की बुर लाल हो गई थी, उनके दूध में दाँतों के निशान थे, और वह पूरी तरह से संतुष्ट थीं।
शाम होने पर दोनों ने आपी को कुछ पैसे दिए और वापस घर छोड़ दिया।
आपी थकी हुई थीं लेकिन उनके चेहरे पर एक अलग सी चमक थी। उन्होंने दो लंडों से एक साथ चुदाई का मज़ा लिया था।
अब मैं आपको अगली कहानी का थोड़ा सा हिंट देती हूँ।
जैसा कि मैंने पहले बताया था कि मेरे पिताजी बहुत रंगरसिया थे और उनके बहुत से दोस्त थे।
उनमें से एक थे रमादीन अंकल, जो पिताजी के बहुत पुराने दोस्त थे और उनकी उम्र लगभग 50 साल की थी।
रमादीन अंकल अक्सर हमारे घर आते थे और आपी को घूर-घूर कर देखते थे।
उनकी नज़र आपी के दूध पर टिकी रहती थी। एक दिन जब पिताजी घर पर नहीं थे, रमादीन अंकल आए और उन्होंने आपी को अपने कमरे में बुलाया।
उन्होंने आपी को पैसे दिखाए और कहा कि उनका बहुत दिनों से मन है उनके साथ सोने का।
आपी ने पहले तो मना किया, लेकिन जब अंकल ने 500 रुपये दिए तो वह मान गईं।
अंकल ने आपी को अपने कमरे में ले जाकर उनकी साड़ी उतारी।
उनके बूढ़े होने के बावजूद उनका लंड अभी भी काफ़ी मोटा और तगड़ा था।
उन्होंने आपी के दूध दबाए, उनके निप्पल्स चूसे, और फिर अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।
“साली कुत्तिया, बहुत दिनों से तुझे चोदने का मन कर रहा था। तेरे पिताजी की बेटी होकर तू इतनी बड़ी रंडी बन गई है,” अंकल ने कहा और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे।
आपी अंकल के नीचे चिल्ला रही थीं।
“आह… अंकल… धीरे… मेरी बुर… आह… हाँ… और ज़ोर से…”
यह कहानी मैं अगली बार पूरी डिटेल में सुनाऊँगी कि कैसे बूढ़े रमादीन अंकल ने आपी को चोदा और उनकी बुर का मज़ा लिया…
NEXT PART: बूढ़े रमादीन अंकल ने आपी की भोसड़ा बने बुर को चोदा
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Mast chudai bhai….