मेरी आपी को खेत में चोदकर सील तोड़ी

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मेरा नाम सलमा है, और आज मैं जो कहानी सुनाने जा रही हूँ, वह मेरी अपनी बहन शमीना आपी की है।

यह कहानी सिर्फ एक चुदाई की कहानी नहीं है, बल्कि एक ज़माने की कहानी है, एक औरत की जवानी की कहानी है, और उस दौर की कहानी है जब हम लोगों की ज़िंदगी में तंगी और जिस्म की भूख दोनों एक साथ रहती थी।

यह बात 2001 की है, जब मिलेनियम नया था और हमारी ज़िंदगी पुरानी ही थी।

शमीना आपी उस समय जवान हो चुकी थीं – उम्र के तौर पर शायद 18-19 साल की, लेकिन जिस्म के तौर पर एक पूरी औरत बन चुकी थीं।

आपी हम सबसे बड़ी थीं, और उन्होंने अपनी जवानी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था।

गाँव में लोग उन्हें “रंडी” कहकर बुलाते थे, लेकिन यह नाम उनके लिए गाली नहीं था, बल्कि उनकी पहचान बन गया था।

सारे लड़के, जवान लड़के, और मर्द उनके पीछे पागल रहते थे। उनकी एक झलक पाने के लिए रास्ते पर खड़े रहते थे।

मेरे पिताजी रिक्शा चलाते थे, लेकिन उनका असली काम कुछ और ही था।

वह रंगरसिया आदमी थे, और मम्मी को चोदने के अलावा कुछ और सोचते ही नहीं थे।

इसी वजह से हम लोग 13 भाई-बहन थे, जिनमें से दो की मौत हो गई, तो अब 11 लोग बचे।

घर में चुदाई का माहौल हमेशा बना रहता था। पिताजी मम्मी की चूत में अपना लंड डालकर हमें पैदा करते रहे।

लेकिन तक़दीर ने हमसे खेल किया। बिहार के पश्चिमी चंपारण में बाढ़ आ गई, और हमारा पूरा खेत कट गया।

ज़मीन डूब गई, फसल बर्बाद हो गई, और हम लोग बेघर हो गए। पिताजी के पास पैसे नहीं थे कि कोई और जगह खरीद सकें।

तो हम लोग बिहार से निकलकर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में आ गए।

यहाँ सड़क के किनारे, सरकारी ज़मीन पर, हमने अपनी झोपड़ी बना ली।

वह जगह ऐसी थी कि हर रोज़ हज़ार लोग गुज़रते थे। ट्रक ड्राइवर, रिक्शा वाले, लखेरे लड़के, और काम-धंधे वाले लोग।

और सबकी नज़र शमीना आपी पर टिक जाती थी। आपी का जिस्म ही ऐसा था कि कोई भी मर्द देखकर पागल हो जाए।

आपी की चूचियाँ… ओह बाबा, क्या बताऊँ! 38 इंच की ब्रा पहनती थीं वह।

उनके स्तन इतने बड़े और मस्त थे कि कोई भी देखकर सोचता कि बस इन्हें दबाकर चूस लूँ।

उनका बदन मीडियम साइज़ का था, लेकिन गांड… वह तो एकदम भारी थी।

चलते वक़्त उनकी गांड इतनी मस्त हिलती थी कि लोग खड़े होकर मुट्ठ मारते थे।

उनके निप्पल्स हमेशा टाइट रहते थे, और कुछ भी कपड़ा पहने पर वह उभरकर आते थे।

घर सड़क के बिल्कुल किनारे था इसलिए हर आते-जाते की नज़र आपी पर पड़ती थी।

आपी भी रंडी टाइप की थीं – हमेशा तैयार रहती थीं चुदाई के लिए। लड़के लाइन मारते थे, और आपी भी उन्हें इशारा करती थीं।

लेकिन सबसे पहले जिस मर्द ने आपी को चोदा, वह था दशरथ।

दशरथ एक लखेरा लड़का था, गाँव का ही रहने वाला। उसकी नज़र हमेशा आपी पर रहती थी।

वह आपी को लाइन दिया करता था, कभी आंख मारता था, तो कभी सीधा कहता था कि आजा मेरी गोद में बैठ जा।

आपी भी उससे बात करती थीं, हंसी-मज़ाक करती थीं। दोनों में कुछ-कुछ होने लगा था।

लेकिन वह दिन अलग था। एक दिन दोपहर का वक़्त था, गर्मी बहुत थी। आपी नहर के पास गई थीं पानी भरने।

दशरथ ने उन्हें वहाँ अकेला देख लिया। उसका दिल मचल गया। उसने सोचा कि आज तो इस माल को चखना ही है।

वह आपी के पीछे-पीछे चल दिया खेत की तरफ, जहाँ गाँव से दूर, खेत और नहर के बीच में गन्ना और झाड़ियाँ थीं।

वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ़ हवा चल रही थी, गन्ने के पत्ते साँसें ले रहे थे, और आपी का जिस्म पसीने में भीगा हुआ था।

दशरथ ने आपी को पकड़ लिया, और उस दिन जो हुआ, वह मैं आपको डिटेल में बताऊँगी…

दोपहर का वक़्त था, सूरज सर के ऊपर था और गर्मी ऐसी लग रही थी जैसे आग बरस रही हो।

शमीना आपी ने अपने बदन पर एक हल्की सी कॉटन की साड़ी पहनी हुई थी, जो पसीने से चिपक रही थी उनके जिस्म से।

उनके बड़े-बड़े चूचियाँ साफ़ दिख रहे थे, निप्पल्स उभरकर कपड़े में छाप बना रहे थे।

उनकी ब्रा भी गीली हो गई थी, और उनके दूध का शेप साफ़ नज़र आ रहा था।

आपी नहर से पानी भरकर वापस आ रही थीं जब दशरथ उनके पीछे आया।

वह एकदम मस्त जवान लड़का था, 25-26 साल का, बदन में जान थी, और लंड में इतनी ताक़त कि किसी भी औरत की चूत फाड़ दे।

उसने आपी को दूर से ही देख लिया था, और उसका लंड तन गया था। उसने सोचा कि आज तो इस रंडी को चोदकर ही दम लूँगा।

“अरे शमीना, रुक तो!” दशरथ ने आवाज़ लगाई।

आपी ने पीछे मुड़कर देखा। उनके होंठ गीले थे, और उन्होंने ज़रा सी मुस्कान दी।

“क्या है दशरथ? गर्मी में परेशान कर रहा है,” आपी ने कहा अपनी मादक आवाज़ में।

दशरथ पास आया। उसकी आँखें आपी के स्तनों पर टिक गईं।

“बहुत दिनों से दिल कर रहा था तुमसे कुछ कहने का,” दशरथ बोला, और उसने आपी का हाथ पकड़ लिया।

“छोड़ मुझे, कोई देख लेगा,” आपी ने शरमाते हुए कहा, लेकिन उनकी आँखों में वही रंडी वाली चमक थी जो हमेशा रहती थी।

“कोई नहीं है यहाँ, सब सो रहे हैं गर्मी में। आओ मेरे साथ खेत में चलते हैं,” दशरथ ने कहा और आपी को खींच लिया।

आपी ने ज़्यादा विरोध नहीं किया। शायद उनको भी मन था। वह दोनों खेत की तरफ चल दिए जहाँ गन्ने के खेत थे और झाड़ियाँ थीं।

वहाँ जाकर कोई भी उन्हें देख नहीं सकता था। गन्ने इतने ऊँचे थे कि एकदम अलग दुनिया बन गई थी वहाँ।

जैसे ही वह अंदर पहुँचे, दशरथ ने आपी को अपनी बाहों में भर लिया।

“साली कुत्तिया, कितने दिनों से तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ। आज तेरी चुदाई करके ही दम लूँगा,” दशरथ ने गाली देते हुए कहा।

आपी ने शरमाते हुए कहा, “हरामखोर, पहले से कितनी लड़कियाँ चोद चुका है, अब मुझे भी लाइन में लगा दिया?”

“तेरी तो लाइन अलग है रंडी। तेरे जैसा माल पूरी गाँव में कोई नहीं है। तेरे दूध देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,” दशरथ बोला और आपी के दूधों पर हाथ रख दिया।

आपी ने सिसकी ली। “आह… धीरे, कोई आ जाएगा।”

“कोई नहीं आएगा मादरचोद। आज मैं तेरी सील तोड़ूँगा। तुझे असली मर्द का लंड चखना है,” दशरथ ज़ोर से बोला।

वह आपी को ज़मीन पर बिठा दिया। गन्ना खेत की ज़मीन नरम थी, गरम थी।

आपी बैठ गईं, और दशरथ उनके ऊपर झुक गया। उसने आपी के होंठ चूमने शुरू किए।

पहले धीरे-धीरे, फिर ज़ोर-ज़ोर से। आपी भी रिस्पॉन्स देने लगीं।

उन्होंने अपने हाथ दशरथ के बालों में डाल दिए और उसके मुँह को अपने मुँह में भर लिया।

“चूस मेरी ज़ुबान को साली,” दशरथ ने कहा और आपी के मुँह में अपनी ज़ुबान डाल दी।

आपी ने चूसना शुरू कर दिया। दोनों ऐसे चिपक गए जैसे कोई अलग ही न कर सके।

फिर दशरथ ने आपी की साड़ी खींचकर अलग कर दी। आपी का बदन सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में रह गया।

ब्लाउज भी गीला था और उनके दूध का उभार साफ़ दिख रहा था।

दशरथ ने आपी के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके स्तन दबाने शुरू कर दिए।

“कितने बड़े हैं तेरे दूध साली रंडी। आज इन्हें चूस-चूसकर खत्म कर दूँगा,” दशरथ बोला।

“हाथ मत लगा हरामी,” आपी ने हल्का विरोध किया, लेकिन उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं।

दशरथ ने आपी का ब्लाउज फाड़ दिया। हाँ, बिल्कुल फाड़ दिया। बटन टूट गए, और आपी के दूध आज़ाद हो गए।

ब्रा के ऊपर से वह दूध जैसे कोई पहाड़ उभरे हुए थे। दशरथ ने ब्रा भी खींचकर उतार दी।

जैसे ही आपी के दूध आज़ाद हुए, दशरथ पागल हो गया।

वह उनपर टूट पड़ा। उसने एक दूध मुँह में लिया और चूसने लगा।

ज़ोर-ज़ोर से, ऐसे जैसे कोई बच्चा दूध पीता है। आपी की सिसकियाँ निकलने लगीं।

“आह… छोड़ो… मत करो… आह…” आपी चीख रही थीं लेकिन उनकी चीख में भी मज़ा था।

दशरथ दूसरे स्तन को हाथ से दबा रहा था।

आपी के निप्पल्स काले और बड़े थे। वह टाइट हो गए थे। दशरथ ने उन्हें अपने दाँतों से काट लिया।

“आह… दर्द हो रहा है… साले कुत्ते… छोड़ो…” आपी तड़प रही थीं।

“चुप साली चुदक्कड़। आज तो पूरा मज़ा लूँगा तुझसे। तेरी बुर को आज मैं अपने लंड से चोदूँगा,” दशरथ ने कहा और आपी के पेटीकोट को भी खींचकर उतार दिया।

आपी सिर्फ़ पैंटी में रह गईं। उनकी बुर पैंटी के ऊपर से दिख रही थी।

दशरथ ने आपी की टाँगें खोल दीं। आपी ने विरोध करने की कोशिश की लेकिन दशरथ ज़्यादा ताक़तवर था।

“मत रोक मुझे मादरचोद। आज तुझे अपनी रंडी बनाकर चोदूँगा,” दशरथ ज़ोर से बोला।

उसने आपी की पैंटी खींचकर उतार दी। आपी की बुर साफ़ दिखने लगी।

वह एकदम गोरी थी, लेकिन बुर के बाल काले थे। दशरथ ने बुर के बालों में हाथ फिराया।

“कितनी गीली है तेरी बुर साली। पहले से कितने लंड ले चुकी है?” दशरथ ने पूछा।

“कोई नहीं… तू पहला है… आह…” आपी ने झूठ बोलते हुए कहा।

“झूठी रंडी। लेकिन कोई बात नहीं। आज मैं तेरी असली सील तोड़ूँगा,” दशरथ बोला और अपने कपड़े उतारने लगा।

जैसे ही दशरथ ने अपना लोअर उतारा, उसका लंड बाहर आया।

वह 8-9 इंच लम्बा था, और मोटा… ओह बाबा, इतना मोटा कि देखकर डर लग जाए। सुपाड़ा लाल हो चुका था गर्मी में।

आपी ने लंड देखा तो डर गईं। “इतना बड़ा? नहीं… यह तो मेरी बुर फाड़ देगा… प्लीज़ मत करो… मैं मर जाऊँगी…”

“मरने दे साली कुत्तिया। आज तो यह लंड तेरी बुर में घुसकर ही रहेगा,” दशरथ ने कहा और आपी के ऊपर चढ़ गया।

उसने आपी की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। आपी की बुर बिल्कुल खुली हुई थी।

दशरथ ने अपने लंड का सुपाड़ा आपी की बुर के मुहाने पर रख दिया।

“तैयार हो जा साली। अब तेरी असली मर्द की चुदाई शुरू होने वाली है,” दशरथ ने कहा और ज़ोर से धक्का दिया।

“चोअअअअअअअअ…द..”

आपी की बुर में लंड घुसा। पहला धक्का ही इतना ज़ोर से था कि आपी चीख उठीं।

“चोअअअअअअअअअअह..दे.. अपने लौड़े से मेरे बुर को ….. मर गई… बाहर निकाल… दर्द हो रहा है… माँअअअअअ…”

दशरथ ने एक और धक्का दिया। पूरा लंड अंदर घुस गया।

आपी की आँखों से आँसू निकल आए। उनकी बुर फट रही थी। वह पहली बार इतना बड़ा लंड ले रही थीं।

“चुप साली रंडी। अब तो पूरा लंड अंदर घुस गया है। अब मज़ा आएगा,” दशरथ ने कहा और चोदना शुरू कर दिया।

वह आपी की बुर में अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा।

पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़-तेज़। आपी की चीखें निकल रही थीं लेकिन धीरे-धीरे उन्हें भी मज़ा आने लगा।

“आअअअअअह… हाँ… और ज़ोर से… चोद मुझे… चोद साले…. मादरचोद.. मैं तेरी रंडी हूँ… चोद मुझे…”

“ले साली चुदक्कड़। ले अपनी चुदाई। तेरी बुर बहुत मस्त है। कितनी टाइट है साली,” दशरथ ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था।

आपी की बुर से खून निकल रहा था। वह पहली बार चुद रही थीं इसलिए उनकी सील टूट रही थी।

लेकिन दशरथ रुका नहीं। वह ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था।

“तेरी माँ की चूत साली। कितना मज़ा आ रहा है। तेरे दूध देखकर ही मेरा लंड तन जाता है। आज तो तेरी बुर को खत्म कर दूँगा,” दशरथ गालियाँ देते हुए चोद रहा था।

आपी के स्तन ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे। दशरथ ने एक हाथ से उनके दूध दबाना शुरू कर दिया। निप्पल्स को खींच रहा था, काट रहा था।

“आअअअअअह… दर्द हो रहा है… छोड़ो… नहीं… और ज़ोर से चोदो… हाँ… वहीं… और ज़ोर से… मैं गई… मैं जा रही हूँ…”

आपी झड़ने वाली थीं। उनकी बुर ने पानी छोड़ दिया। दशरथ भी झड़ने वाला था। उसने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी।

“रुक साली। अब मैं झड़ने वाला हूँ। तेरी बुर में ही अपना माल छोड़ूँगा,” दशरथ ने कहा।

“नहीं… बाहर निकाल… प्रेगनेंट हो जाऊँगी… प्लीज़…”

“चुप साली रंडी। आज तो तेरी बुर में ही झड़ूँगा,” दशरथ ज़ोर से बोला और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा।

“फच… फच… फच… फच…” की आवाज़ आ रही थी। आपी की बुर पूरी तरह से लंड से भर गई थी।

“आअअअअअअअअअअअह…” दशरथ ज़ोर से चिल्लाया और आपी की बुर में अपना माल छोड़ दिया।

गरम-गरम माल आपी की बुर में घुसा। आपी भी झड़ गईं। दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर गए।

कुछ देर बाद दशरथ उठा और अपना लंड आपी की बुर से बाहर निकाला।

माल और खून से लथपथ लंड बाहर आया। आपी की बुर से माल बह रहा था।

“साली रंडी, मज़ा आ गया। तू तो असली माल है। अब तो रोज़ तुझे चोदूँगा,” दशरथ ने कहा।

आपी शरमा से मुँह छुपा रही थीं लेकिन उनके चेहरे पर संतुष्टि थी। उनकी पहली चुदाई हो चुकी थी। उनकी सील टूट चुकी थी।

यह थी शमीना आपी और दशरथ की पहली चुदाई की कहानी।

इसके बाद तो आपी ने पूरी गाँव के लड़कों को अपनी बुर दी, लेकिन दशरथ हमेशा उनका पहला मर्द रहा…

तो दोस्तों, यह थी वह कहानी जिस दिन शमीना आपी पहली बार चुदी थीं।

दशरथ ने उन्हें खेत में चोदकर उनकी सील तोड़ी थी। आपी के दूध, उनके निप्पल्स, उनकी बुर, और दशरथ का लंड – सब कुछ उस गर्मी भरी दोपहर में एक-दूसरे से मिले।

आपी ने पहली बार मर्द का लंड अपनी बुर में महसूस किया। उनकी बुर फटी, खून निकला, लेकिन मज़ा भी आया।

यह सिर्फ़ शुरुआत थी। उसके बाद तो आपी रोज़ चुदती थीं।

कभी खेत में, कभी झोपड़ी में, कभी सड़क के किनारे।

उनकी बुर ने हज़ारों लंड लिए, लेकिन पहला लंड हमेशा याद रहा – दशरथ का वह 9 इंच लम्बा और मोटा लंड जो उनकी ज़िंदगी बदल गया।

मैं सलमा, आपको अगली कहानी में बताऊँगी कैसे आपी और लड़कों की रंडी बनी।

तब तक के लिए, शमीना आपी की चुदाई की यह पहली कहानी पढ़ते रहिए और मज़े लीजिए…

NEXT PART: दो दोस्तों ने एक साथ दो लौड़े से दी के बुर को चोदा

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

3 thoughts on “मेरी आपी को खेत में चोदकर सील तोड़ी”

  1. Wow! amazing story sister Salma. Where do you live in Kushinagar. I like to fuck you, Salma.
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