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मेरा नाम किरन विश्वकर्मा है। मैं लखनऊ की रहने वाली हूँ। उम्र 38 साल, शादीशुदा, दो बच्चों की माँ। मेरी हाइट 5 फीट 2 इंच है और फिगर 38-34-42 है। मैं जानती हूँ कि मैं बहुत खूबसूरत हूँ – गोरा बदन, भरे हुए गाल, और वो जवानी जो आज भी मचल रही है।
मेरे पिता सुरेश विश्वकर्मा, उम्र 59 साल, फिर भी इतने हैंडसम कि कोई 45 का लगे। वो बिल्डर हैं, शरीर अभी भी कड़क है। मेरी माँ बिमला देवी का देहांत मेरे बचपन में ही हो गया था, इसलिए पापा ने मुझे ही माँ-बाप दोनों बनकर पाला।
मैं जब 15 साल की थी, एक दिन बाथरूम का दरवाजा खुला था। मैं अनजाने में अंदर घुसी और देखा कि पापा नहा रहे थे। वो अपने कपड़े उतारे खड़े थे, और उनका लंड… ओह माय गॉड! वो करीब 10 इंच का था, बिल्कुल खड़ा, गोरा, मोटा, और इतना बड़ा कि मेरी साँसें रुक गईं।
मैं वहीं जम गई। 15 साल की उम्र में मुझे पहली बार किसी मर्द का लंड दिखा और वो भी इतना बड़ा। पापा ने मुझे देखा तो शर्मा गए, लेकिन मैं वहीं खड़ी रही। उस दिन के बाद से मैं पापा की दीवानी हो गई। रातों को मैं उन्हीं की याद में अपनी बुर सहलाती, उनके उस बड़े लंड की कल्पना करती।
लेकिन मैं बहुत लज्जाशील लड़ी थी। कभी हिम्मत नहीं हुई कि अपने पिता से ये कह सकूँ कि मैं उन्हें चाहती हूँ। वो भी मेरी माँ की याद में अक्सर अकेले ही मुठ मारकर काम चलाते थे। मैं ये जानती थी क्योंकि मैंने कई बार उन्हें नहाते वक्त या रात में अकेले कमरे में ये करते देखा था।
फिर मेरी शादी हो गई डॉक्टर प्रभात से। वो अच्छे इंसान हैं, लेकिन उनका लंड सिर्फ 4.5 इंच का है। जब वो मुझे चोदते हैं, मुझे कोई मजा नहीं आता। मैं हमेशा अपने पापा की कल्पना करती हूँ, उनके 10 इंची लंड की फैंटसी में खो जाती हूँ तभी मुझे झड़ने का आनंद आता है।
मेरे दो बच्चे हैं – बेटा 12 साल का और बेटी 8 साल की। लेकिन मेरी जवानी अभी भी पापा के लिए तड़प रही है।
एक दिन मैं पापा के घर गई। मेरे पति प्रभात कुछ दिनों के लिए कॉन्फ्रेंस में दिल्ली गए थे। बच्चे स्कूल से आकर सो रहे थे। मैंने सोचा पापा से मिल लूँ।
पापा का घर पुराना लखनऊ में है – बड़ा सा बंगला, ऊँची छत, और गर्मियों में ठंडी हवा। मैं शाम को वहाँ पहुँची। पापा अकेले थे, उनके घर में कोई नौकरानी भी नहीं थी उस दिन।
“अरे किरन बेटी, तुम?” पापा ने दरवाजा खोला। उन्होंने सफेद कुर्ता पहना था, और वो इतने हैंडसम लग रहे थे कि मेरा दिल धड़कने लगा।
“हाँ पापा, प्रभात बाहर गए हैं, सोचा आपका हालचाल लूँ,” मैंने कहा, लेकिन मेरी आँखें उनके शरीर पर थीं।
हम बैठकर बातें करने लगे। पापा ने व्हिस्की का कप बनाया और मुझे भी दिया। मैंने कभी इतनी बेशर्मी से नहीं पी थी, लेकिन आज मैं जानबूझकर नशे में होना चाहती थी ताकि जो मन में है वो कह सकूँ।
रात हो गई। पापा ने कहा, “रात हो गई बेटी, यहीं रुक जाओ।”
मैंने हामी भर दी। अंदर ही अंदर मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। ये मौका था जिसका मैं 23 साल से इंतजार कर रही थी।
रात के करीब 11 बजे थे। पापा का बेडरूम ऊपर था, और मेहमान कमरा नीचे। लेकिन मैंने बहाना बनाया कि मुझे ऊपर वाले कमरे की हवा अच्छी लगती है।
मैं ऊपर गई। पापा अभी भी जागे हुए थे, कुर्ता उतारकर बनियान में बैठे थे। उनका शरीर अभी भी कड़क था – छाती चौड़ी, पेट सपाट, बाहें मजबूत।
“पापा, मैं आपके पास बैठूँ?” मैंने पूछा, आवाज़ में वो शरारत थी जो 23 साल से दबी हुई थी।
“आओ बेटी,” पापा ने कहा।
मैं उनके बगल में बैठ गई। इतने करीब कि मेरे हाथ उनके हाथ से टच हो रहे थे। मैंने साड़ी पहनी थी, और ब्लाउज थोड़ा ढीला था – जानबूझकर।
“पापा, मैं आपसे कुछ पूछूँ?” मैंने कहा, नज़रें झुकाए।
“पूछो बेटी,” पापा ने मेरे चेहरे को उठाया।
“क्या आप कभी मुझसे प्यार नहीं करते थे… वैसे?” मैंने पूछा, और मेरी साँसें तेज़ हो गईं।
पापा चौंक गए। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक दिखी। “किरन, तुम…”
“हाँ पापा, मैं जानती हूँ। मैंने आपको नहाते देखा था। मैंने आपका वो… वो लंड देखा था,” मैंने शर्माते हुए कहा, “और तब से मैं आपकी होना चाहती हूँ।”
पापा के चेहरे पर एक अजीब सा भाव आया। उन्होंने मेरे हाथ पकड़े और कहा, “बेटी, ये गलत है…”
“नहीं पापा, ये गलत नहीं है। मैं 38 साल की हूँ, समझदार हूँ। और मैं जानती हूँ कि आप भी मुझे चाहते हैं। रातों को जब आप मुठ मारते हैं, तो मेरा ही ख्याल आता है ना?” मैंने बेबाकी से कहा।
पापा ने मुझे कसकर पकड़ लिया। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। “हाँ किरन, मैंने हमेशा तुम्हें चाहा है। लेकिन डरता था…”
मैंने उनके होठों पर अपने होठ रख दिए। वो पहले तो हिचकिचाए, फिर जोश में आ गए। हम एक-दूसरे को कसकर पकड़कर चूमने लगे। 23 साल का इंतजार खत्म हो रहा था।
“ओह पापा, आपके होठ कितने रसीले हैं,” मैंने कहा, “मुझे चूसो, मुझे अपनी बनाओ।”
पापा ने मेरी साड़ी खींची और मैं बिस्तर पर गिर गई। उन्होंने मेरा ब्लाउज फाड़ दिया। मेरे दूध बाहर आ गए – 38 साइज के भरे हुए, गोरे, और निप्पल गुलाबी।
“साली रंडी, तेरे ये दूध कितने बड़े हो गए हैं,” पापा ने गाली देते हुए कहा, “तेरी माँ के भी इतने बड़े थे।”
“हाँ पापा, चूसो इन्हें, काटो मेरे निपल्स,” मैंने कराहते हुए कहा, “23 साल से तड़प रही हूँ आपके लिए।”
पापा मेरे दूध पर टूट पड़े। वो एक-एक करके मेरे निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसने लगे, काटने लगे। दर्द और मजे का अजीब संगम था। मेरी बुर पानी छोड़ने लगी थी।
“ओह मादरचोद, क्या चूस रहे हो,” मैंने गाली दी, “और जोर से चूसो, अपनी बेटी को अपनी रखैल बनाओ।”
“हाँ साली कुतिया, तू मेरी रखैल है,” पापा ने मेरी पेटीकोट खींची, “आज तेरी बुर को मैं अपने लंड से भरूँगा।”
मैं बिल्कुल नंगी हो गई। मेरी बुर गीली थी, बाल वाली, गुलाबी, और तड़प रही थी।
“देख पापा, मेरी बुर कितनी गीली है आपके लिए,” मैंने अपनी टाँगें फैलाई, “ये 23 साल से आपके लंड का इंतजार कर रही है।”
पापा ने अपनी बनियान और लोअर उतारे। और जब उनका लंड बाहर आया, मेरी आँखें फटी रह गईं। वो अभी भी उतना ही बड़ा था – 10 इंच का, मोटा, खड़ा, और गर्म।
“लो साली रांड, ले मेरा लंड,” पापा ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसेड़ा, “चूस इसे, अपने बाप का लंड चूस।”
मैंने उनका लंड पकड़ा। वो इतना गर्म और मोटा था कि मेरा हाथ उसे पूरा नहीं घेर पा रहा था। मैंने उसे अपने मुँह में लिया और चूसने लगी।
“ओह हाँ, बेटी, क्या चूस रही है,” पापा ने मेरे सिर को पकड़कर अपना लंड मेरे गले तक घुसाया, “ले पूरा, अपने बाप का लंड अपने मुँह में ले।”
मैं उनका लंड चूस रही थी, जीभ से चाट रही थी, और वो कराह रहे थे। 59 साल के पापा और 38 साल की बेटी, दोनों पागलों की तरह एक-दूसरे को चूस रहे थे।
“बस अब और नहीं,” पापा ने मुझे बिस्तर पर पटक दिया, “अब तेरी बुर चोदूँगा।”
“हाँ पापा, चोदो मुझे,” मैंने अपनी टाँगें उठाकर फैला दीं, “अपनी बेटी की बुर फाड़ दो। मेरे पति का लंड बहुत छोटा है, मुझे मजा नहीं आता। आपका बड़ा लंड मेरी बुर में डालो।”
“साली कमीनी, तू अपने पति से धोखा कर रही है,” पापा ने मेरी बुर पर अपना लंड रगड़ा, “तेरी बुर तो बहुत टाइट है।”
“हाँ पापा, आपके लिए टाइट है,” मैंने कहा, “डालो अपना लंड, फाड़ दो मेरी बुर को।”
पापा ने एक जोरदार धक्का लगाया और उनका आधा लंड मेरी बुर में घुस गया।
“ओह माँ… बहुत दर्द हो रहा है,” मैंने चीखते हुए कहा, “लेकिन और अंदर डालो, पूरा डालो।”
“साली रांड, ले पूरा लंड,” पापा ने एक और धक्का लगाया और पूरा 10 इंच का लंड मेरी बुर में उतर गया।
मेरी बुर फटी जा रही थी, लेकिन वो मजा भी आ रहा था जो मुझे कभी नहीं आया था।
पापा ने मेरे दूध पकड़े और जोर-जोर से दबाने लगे।
“कैसा लग रहा है तेरी बाप का लंड?” पापा ने मुझे चोदते हुए पूछा, “तेरी माँ भी इसी लंड से चुदती थी, और आज मेरी बेटी भी चुद रही है।”
“बहुत अच्छा लग रहा है पापा,” मैंने कराहते हुए कहा, “और जोर से चोदो, अपनी बेटी को रांड बनाओ। मेरे निप्पल काटो, मेरे दूध दबाओ।”
पापा पागलों की तरह मुझे चोद रहे थे।
उनका 10 इंची लंड मेरी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था।
चप-चप की आवाज़ें गूंज रही थीं।
“ओह सुरेश जी, चोदो मुझे,” मैंने उन्हें उनके नाम से बुलाया, “आप मेरे पापा नहीं, मेरे मर्द हो। चोदो अपनी किरन को, फाड़ दो उसकी बुर।”
“हाँ साली रांड, ले,” पापा ने मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और और जोर से चोदने लगे, “तेरी बुर बहुत मस्त है, तेरे पति को पता नहीं क्या मजा छोड़ दिया है।”
“वो इंपोटेंट है पापा,” मैंने कहा, “उसका 4 इंच का लंड क्या चोदेगा? आपका 10 इंची लंड ही मेरी बुर को संतुष्टि दे सकता है।”
हम दोनों पसीने में नहा रहे थे।
पापा ने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से मेरी बुर में लंड डाला।
“ओह मादरचोद, पीछे से और अच्छा लग रहा है,” मैंने कहा, “मेरे दूध पकड़ो और चोदो।”
पापा ने मेरे दूध जोर-जोर से दबाए और मेरी बुर में लंड पेलते रहे।
मेरे निप्पल कड़क हो गए थे, मेरी बुर पानी छोड़ रही थी।
“आ रहा है मेरा पानी,” मैंने चीखते हुए कहा, “ओह पापा, मैं झड़ने वाली हूँ…”
“मैं भी आने वाला हूँ बेटी,” पापा ने जोर से धक्के लगाए, “तेरी बुर में ही अपना माल छोड़ूँगा।”
“हाँ पापा, छोड़ो अपना पानी मेरी बुर में,” मैंने कहा, “भर दो मेरी बुर को अपने वीर्य से। मुझे अपने बच्चे की माँ बनाओ।”
“साली कुतिया, ले,” पापा ने एक आखिरी जोरदार धक्का लगाया और मेरी बुर में अपना गर्म पानी छोड़ दिया।
मैं भी झड़ गई। हम दोनों एक-दूसरे से चिपककर साँसें ले रहे थे।
पापा का लंड अभी भी मेरी बुर में था, और वो मेरे दूध सहला रहे थे।
“23 साल बाद मिला ये मजा,” मैंने कहा, “पापा, आज के बाद मैं हमेशा आपसे चुदूँगी।”
“हाँ बेटी, तू मेरी रखैल है,” पापा ने कहा, “जब भी तेरा मन करे, आ जाना। मेरा ये 10 इंची लंड हमेशा तेरी बुर के लिए तैयार है।”
हम पूरी रात तीन बार और चुदे।
हर बार पापा ने मेरी बुर अलग-अलग तरीके से चोदी – कभी मिशनरी में, कभी घोड़ी बनाकर, कभी मुँह में लेकर।
मेरे निप्पल लाल हो गए थे चूसने से, मेरी बुर सूज गई थी चोदने से, लेकिन मैं संतुष्ट थी।
सुबह जब मैं उठी, पापा ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
“कैसी रही रात?” उन्होंने पूछा।
“स्वर्ग था पापा,” मैंने कहा, “आपका लंड मेरे लिए सबसे कीमती खजाना है।”
अब जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं पापा के पास जाती हूँ और उनके 10 इंची लंड से अपनी बुर चुदवाती हूँ।
मेरे पति को कुछ पता नहीं है, और ना ही किसी को पता चलेगा।
ये हमारा गुप्त प्रेम है, पिता और पुत्री का अनोखा रिश्ता जो अब शारीरिक भी हो गया है।
मेरी बुर अब हमेशा पापा के लंड की प्यासी रहती है, और मेरे निप्पल उनके मुँह का इंतजार करते हैं।
ये है मेरी कहानी – एक बेटी जो अपने पिता से चुदवाती है और खुश है।
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Mast chudai bhai…….😘😍
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