MLA साहब ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चुदाई की

mla sahab ke sath gangbang chudai

मैं अब MLA विक्रम सिंह की पूरी तरह से रखैल और रंडी बन चुकी थी। उन्होंने मुझे शहर के सबसे महंगे इलाके में एक तीन मंजिला बंगला दे दिया था जहाँ मैं अकेली रहती थी।

मेरे पति से मेरा तलाक हो चुका था और मैं अब पूरी तरह से विक्रम सिंह की हो चुकी थी।

वो रोज़ आते थे और मेरी जमकर चुदाई करते थे, लेकिन अब उनका मन कुछ और चाहता था।

{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे मैं MLA साहब की रखैल बनी और फिर उनकी रंडी }

एक दिन वो मेरे पास आए और मेरे गाल को सहलाते हुए बोले, “शकुंतला, आज मैंने तुम्हारे लिए एक खास पार्टी रखी है। मेरे कुछ खास दोस्त आ रहे हैं। वो सब तुम्हें देखना चाहते हैं।”

मैं समझ गई कि उनका क्या मतलब है।

मैंने पूछा, “MLA साहब, आपके दोस्त कितने होंगे?”

“पाँच दोस्त हैं। सब मंत्री और बड़े-बड़े ठेकेदार हैं। उन्होंने सुना है कि मेरी रखैल बहुत खूबसूरत और मस्त चुदवाती है। वो सब तुम्हारे साथ मज़ा करना चाहते हैं,” उन्होंने कहा।

मेरे अंदर एक अजीब सी उत्तेजना हुई।

पाँच मर्द एक साथ मुझे चोदेंगे, यह सोचकर मेरी चूत में पानी आने लगा।

मैंने कहा, “जैसी आपकी इच्छा MLA साहब। मैं आपकी रंडी हूँ, आप जैसे चाहें मुझे इस्तेमाल कर सकते हैं।”

“बस यही तो मुझे तुममें पसंद है शकुंतला। तुम समझदार हो और रंडी बनने का पूरा फ़र्ज़ निभाती हो,” वो बोले और मेरे होंठों पर किस कर दिए।

शाम को मैंने खास तैयारी की।

मैंने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी जिसमें मेरे बड़े-बड़े दूध आधे बाहर निकले हुए थे और मेरी गांड बिल्कुल साफ़ दिख रही थी।

उसके ऊपर मैंने पारदर्शी साड़ी पहनी जिसमें मेरा पूरा बदन साफ़ दिखता था।

मैंने अपने बालों को खुला छोड़ा और गुलाबी लिपस्टिक लगाई।

रात को आठ बजे दरवाज़े की घंटी बजी।

MLA साहब ने दरवाज़ा खोला और उनके पाँच दोस्त अंदर आए।

वो सब पैंतालीस-पचास साल के थे और देखने में अमीर और पावरफुल लग रहे थे।

“यह है शकुंतला, मेरी रखैल और रंडी,” MLA साहब ने मुझे उनके सामने प्रस्तुत किया।

मैंने शर्माते हुए सबको नमस्ते की। उनकी आँखें मेरे ऊपर से नीचे तक घूम रही थीं।

वो मुझे घूर-घूर कर देख रहे थे जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देखता हो।

“वाह विक्रम, तुम तो सच में सही माल रखे हो। यह तो बहुत ही खूबसूरत है,” एक मोटे आदमी ने कहा जिसका नाम मंत्री सुरेश था।

“हाँ, इसके दूध तो देखो कितने बड़े-बड़े हैं,” दूसरे ने कहा जो ठेकेदार रमेश था।

“आज रात इसकी जमकर चुदाई करेंगे,” तीसरा बोला जो बिल्डर गुप्ता जी थे।

मैंने अपनी आँखें नीचे झुका लीं और शर्माते हुए मुस्कुराई।

MLA साहब ने मुझे अपने पास बुलाया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे दूध दबाने लगे।

“डरो मत शकुंतला, यह सब मेरे खास दोस्त हैं। आज रात तुम सबकी रंडी बनोगी और सबका लंड लोगी,” उन्होंने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मैंने हाँ में सिर हिलाया। मेरी चूत में पानी आ रहा था और मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

सब लोग बैठक में बैठ गए।

MLA साहब ने शराब निकाली और सबको गिलास दिए।

वो सब शराब पीने लगे और मुझे घूरते रहे।

मैं सोफे पर बैठी थी और अपने पैरों को सिकोड़ रही थी।

“शकुंतला, आओ थोड़ी शराब पिलाओ इन्हें,” MLA साहब ने कहा।

मैं उठी और एक-एक करके सबको शराब देने लगी।

जब मैं झुकती तो मेरे ब्लाउज से मेरे दूध आधे बाहर दिखते और वो सब घूर-घूर कर देखते।

मंत्री सुरेश ने जानबूझकर अपना हाथ मेरी गांड पर रख दिया।

“वाह, क्या मस्त गांड है इसकी। बिल्कुल गोल और भारी,” उन्होंने कहा।

मैंने कुछ नहीं कहा और शर्माते हुए मुस्कुरा दी।

फिर ठेकेदार रमेश ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने पास खींच लिया।

“बैठो यहाँ मेरे पास,” उन्होंने कहा और मेरी कमर पर हाथ रख दिया।

अब मैं रमेश के बीच में बैठी थी और दोनों तरफ मंत्री सुरेश और बिल्डर गुप्ता थे।

MLA साहब और दो और दोस्त सामने बैठे थे। वो सब मुझे घूर रहे थे।

“शकुंतला, तुम्हें पता है ना कि आज क्या होने वाला है?” MLA साहब ने पूछा।

“हाँ MLA साहब, मैं आप सबकी रंडी बनकर आप सबका लंड लूँगी,” मैंने कहा।

“बस यही तो मुझे तुममें पसंद है। बेबाक और रंडी,” MLA साहब बोले।

फिर मंत्री सुरेश ने मेरे ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए।

मैंने विरोध नहीं किया। उन्होंने मेरा ब्लाउज खोल दिया और अब मेरे बड़े-बड़े दूध ब्रा में से आधे बाहर निकले हुए थे।

“वाह, क्या मस्त माल है। इन दूधों को तो मैं पहले चूसूँगा,” मंत्री सुरेश बोले और मेरे ब्रा के ऊपर से ही मेरे दूध दबाने लगे।

वो मेरे निप्पलों को कस-कसकर दबा रहे थे और मैं सिसकियाँ लेने लगी।

फिर उन्होंने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे दूध बाहर आ गए।

उन्होंने एक स्तन को मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।

“आहह… धीरे… दर्द हो रहा है…” मैंने कहा।

“रंडी को दर्द नहीं मज़ा आता है,” वो बोले और और ज़ोर से चूसने लगे।

दूसरी तरफ ठेकेदार रमेश ने मेरी साड़ी उठा दी और मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगे।

“क्या गीली हो गई है यह रंडी। देखो इसकी पैंटी कितनी भीगी है,” उन्होंने सबको दिखाया।

सब हँसने लगे।

फिर उन्होंने मेरी पैंटी खींचकर उतार दी और मेरी नंगी चूत सबके सामने आ गई।

“वाह, क्या गुलाबी चूत है इसकी,” एक दोस्त बोला।

“आज इसको हम सब मिलकर चोदेंगे,” MLA साहब बोले।

मंत्री सुरेश ने मुझे सोफे पर लिटा दिया और अपने कपड़े उतारने लगे।

उनका पेट बहुत बड़ा था लेकिन लंड सात इंच का और मोटा था।

वो मेरे ऊपर आ गए और मेरे दूध दबाने लगे।

“इन दूधों को तो मैं रोज़ चूसूँगा,” वो बोले और मेरे निप्पलों को काटने लगे।

फिर वो नीचे गए और मेरी चूत को चाटने लगे।

उन्होंने अपनी जीभ मेरी चूत की दरार में डाली और ऊपर-नीचे करने लगे। मैं पागल हो रही थी।

“आहह… और ज़ोर से चाटो… मज़ा आ रहा है…” मैंने कहा।

वो मेरी क्लिटोरिस को चूस रहे थे और मैं झड़ने वाली थी।

कुछ ही देर में मैं झड़ गई और मेरी चूत से पानी निकलकर उनके मुँह में आ गया।

“क्या रसीली चूत है इसकी,” वो बोले।

अब ठेकेदार रमेश आए। उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह के सामने कर दिया। वो आठ इंच के थे और बहुत मोटे।

“चूसो इसे रंडी,” उन्होंने कहा।

मैंने उनका लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

वो मेरे सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबा रहे थे और मेरे मुँह में अंदर-बाहर कर रहे थे।

मुझे गले तक उनका लंड जा रहा था और मैं उल्टी होने लगी थी।

“चूसो अच्छे से। पूरी रंडी की तरह चूसो,” वो चिल्ला रहे थे।

मैंने पूरे जोश से उनका लंड चूसा।

लगभग दस मिनट बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गए और मैंने उनका सारा वीर्य पी लिया।

अब MLA साहब आए। उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और अपना दस इंच का लंड मेरी चूत में एक ही धक्के में पेल दिया।

“आहह… MLA साहब… धीरे…” मैं चीखी।

“आज तुम्हें हम सब मिलकर चोदेंगे रंडी। तुम्हारी चूत को फाड़ देंगे,” वो बोले और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगे।

पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा।

वो मेरे बाल पकड़कर मुझे पीछे से चोद रहे थे और मेरे दूध हिल रहे थे।

“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…” मैं चिल्ला रही थी।

वो बीस मिनट तक मुझे चोदते रहे और फिर मेरी चूत में ही झड़ गए।

अब बिल्डर गुप्ता और दो और दोस्त आए।

उन्होंने मुझे बेडरूम में ले जाया जहाँ एक बड़ा बिस्तर था।

वो तीनों नंगे हो गए और उनके लंड एकदम खड़े थे।

“आज इसकी दोहरी चुदाई करेंगे,” बिल्डर गुप्ता बोले।

उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया।

एक ने मेरे मुँह में लंड दे दिया, दूसरा मेरी चूत में घुस गया और तीसरा मेरी गांड में उंगली करने लगा।

मैं तीनों तरफ से चुद रही थी।

मुँह में लंड चूस रही थी, चूत में लंड ले रही थी और गांड में उंगली हो रही थी।

“आहह… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से चोदो…” मैं मुँह भरवां बोली।

फिर तीसरे ने अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया।

अब मैं तीनों छेदों में लंड ले रही थी। मुँह में, चूत में और गांड में – तीनों जगह एक साथ।

“यह तो सच में रंडी है। तीनों छेदों में ले रही है,” एक बोला।

“आज इसको हम पूरी तरह से चोदेंगे,” दूसरा बोला।

वो तीनों एक साथ धक्के लगा रहे थे।

जब एक अंदर जाता तो दूसरा बाहर निकलता।

मैं पूरी तरह से भरी हुई थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

“आहह… मर गई… और ज़ोर से… मेरी गांड फाड़ दो…” मैं चिल्ला रही थी।

वो तीस मिनट तक मुझे इसी पोज़िशन में चोदते रहे।

फिर एक-एक करके वो तीनों मेरे अंदर झड़ गए।

मेरा मुँह, चूत और गांड – तीनों वीर्य से भरे हुए थे।

अब MLA साहब फिर से आए।

वो सबने फैसला किया कि अब वो एक-एक करके मुझे चोदेंगे और मेरी हर इच्छा पूरी करेंगे।

पहले मंत्री सुरेश ने मुझे मिशनरी पोज़िशन में चोदा।

उन्होंने मेरे पैर अपने कंधों पर रखे और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए।

मेरे दूध हिल रहे थे और वो उन्हें दबा-दबाकर चोद रहे थे।

फिर ठेकेदार रमेश ने मुझे डॉगी स्टाइल में चोदा।

उन्होंने मेरे बाल पकड़े और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए।

मेरी गांड थपथपा रही थी और वो मुझे गाली देते हुए चोद रहे थे।

“साली रंडी, ले मेरा लंड… चूस इसे अच्छे से…” वो चिल्ला रहे थे।

फिर बिल्डर गुप्ता ने मुझे अपने ऊपर बैठाया और मैं उनके लंड पर कूदने लगी।

वो मेरे दूध दबा रहे थे और मैं ऊपर-नीचे कूद रही थी।

“क्या मस्त चूत है इसकी। बहुत टाइट है,” वो बोले।

अंत में MLA साहब आए। उन्होंने मुझे फिर से घोड़ी बनाया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।

वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहे थे और मेरी गांड थपथपा रहे थे।

“आज तुम्हें हम सबने मिलकर चोदा शकुंतला। कैसा लगा?” उन्होंने पूछा।

“बहुत मज़ा आया MLA साहब। मैं आप सबकी रंडी बनकर बहुत खुश हूँ,” मैंने कहा।

वो मेरी चूत में झड़ गए और मेरे ऊपर ही गिर पड़े।

उस रात के बाद मैं MLA साहब और उनके दोस्तों की रंडी बन गई।

वो सब हफ्ते में एक बार मिलते थे और मेरी जमकर चुदाई करते थे। वो सब मुझे पैसे देते थे और तोहफे देते थे।

मैंने अपने लिए एक नई ज़िंदगी बनाई। मैं अब अमीर थी और मेरी हर ज़रूरत पूरी होती थी।

MLA साहब ने मुझे अपनी विधानसभा में एक पोस्ट भी दिलवा दी थी।

मैं खुश थी क्योंकि मुझे रोज़ नए-नए लंड मिलते थे। मेरी चूत रोज़ चुदती थी और मैं मज़े लेती थी।

मैं अब पूरी तरह से एक रंडी बन चुकी थी और मुझे इस पर कोई शर्म नहीं थी।

MLA साहब और उनके दोस्त मुझे बहुत प्यार करते थे।

वो मेरी हर बात मानते थे और मेरी हर इच्छा पूरी करते थे।

मैं उनकी रखैल और रंडी बनकर बहुत खुश थी।

अब जब भी कोई पार्टी होती थी, वो सब मुझे बुलाते थे और मेरी जमकर चुदाई करते थे।

मैं उन सबका लंड चूसती थी, उनसे चुदवाती थी और उनकी रंडी बनकर मज़े करती थी।

मेरी ज़िंदगी अब पूरी तरह से बदल गई थी।

मैं एक साधारण घरेलू औरत से एक अमीर और पावरफुल रंडी बन गई थी।

और मैं इस ज़िंदगी से बहुत खुश थी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

2 thoughts on “MLA साहब ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर चुदाई की”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top