मुस्लिम भाभी की प्यासी बुर चोदने का मजा लिया

muslim bhabhi porn sex story

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम गुफरान है और मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ।

मेरी उम्र 24 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता हूँ।

मेरे लंड की लंबाई 7 इंच है और मोटाई 3 इंच जो किसी भी औरत को पूरी तरह से संतुष्ट कर सकता है।

ये कहानी मेरी और मेरी नीलम भाभी की है।

नीलम भाभी मेरे बड़े भाई रियाज की पत्नी हैं।

उनकी उम्र 32 साल है लेकिन दिखती हैं 25-26 साल की।

उनका रंग गेहुआं है, आँखें बड़ी-बड़ी और होंठ मोटे-मोटे।

उनके दूध इतने बड़े और गोल हैं कि कोई भी देखकर पागल हो जाए।

उनकी गांड भी बहुत मोटी और उभरी हुई है।

ये घटना 4 महीने पहले की है जब मेरे भाई रियाज को दुबई में नौकरी मिल गई थी।

वो 2 साल के लिए वहीं रहने वाले थे।

भाई के जाने से पहले उन्होंने मुझसे कहा कि मैं नीलम भाभी का ख्याल रखूँ क्योंकि वो अकेली रहती हैं और उनके कोई बच्चे भी नहीं हैं।

भाई के जाने के 1 महीने बाद मैं एक दिन शाम को नीलम भाभी के घर गया।

वो एक अच्छे मोहल्ले में रहती थीं। मैंने दरवाजा खटखटाया तो भाभी ने खुद दरवाजा खोला।

“वाह गुफरान, तुम आ गए? अंदर आओ,” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा।

जब मैं अंदर गया तो देखा कि भाभी ने साड़ी पहनी हुई थी जो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।

उनकी नाभि दिख रही थी और उनके दूध साड़ी के ब्लाउज में कसे हुए थे।

“बैठो, मैं चाय बनाती हूँ,” भाभी ने कहा।

“नहीं भाभी, पहले आप बैठिए, मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ,” मैंने कहा।

भाभी मेरे पास सोफे पर बैठ गईं।

उनसे आ रही खुशबू से मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

“भाभी, आप अकेली रहती हैं, क्या आपको कोई दिक्कत नहीं होती?” मैंने पूछा।

“क्या करूँ गुफरान, रियाज की मजबूरी है, उन्हें पैसे कमाने हैं,” भाभी ने कहा।

“लेकिन भाभी, कुछ ज़रूरतें ऐसी होती हैं जो पैसों से पूरी नहीं हो सकतीं,” मैंने शरारती अंदाज में कहा।

भाभी समझ गईं कि मैं क्या कह रहा हूँ। उनके चेहरे पर शर्मा गईं।

“गुफरान, तुम क्या कह रहे हो?” भाभी ने कहा।

“भाभी, मैं समझ सकता हूँ, आप 1 साल से अकेली हैं, आपकी भी कुछ ज़रूरतें होंगी,” मैंने कहा और हल्के से उनके हाथ पर हाथ रख दिया।

भाभी ने कुछ नहीं कहा, बस सिर झुका लिया। मैं समझ गया कि भाभी तैयार हैं।

मैंने धीरे से उनका चेहरा उठाया और उनकी आँखों में देखा।

भाभी की सांसें तेज़ हो गई थीं। मैंने धीरे से उनके गाल पर चूमा।

“भाभी, मैं आपकी सेवा करना चाहता हूँ,” मैंने कहा।

भाभी ने अभी भी कुछ नहीं कहा।

मैंने उनके होंठों पर चूमा और फिर जीभ से उनके होंठ चाटने लगा।

भाभी भी धीरे-धीरे रिस्पांड करने लगीं।

मैंने उनकी साड़ी का पल्लू हटाया और उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके दूधों को दबाना शुरू कर दिया।

वो इतने मुलायम थे कि मेरा लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया।

“आह्ह्ह… गुफरान… ये ठीक नहीं है…” भाभी ने कहा।

“भाभी, प्लीज़, मैं जानता हूँ आपको भी चाहिए,” मैंने कहा और उनके ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए।

भाभी ने अपने हाथों से मेरे हाथ रोकने की कोशिश की लेकिन वो ज़्यादा देर तक नहीं रोक पाईं।

मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया और अब उनके सफेद ब्रा में कसे हुए बड़े-बड़े दूध मेरे सामने थे।

“वाह भाभी, क्या दूध हैं आपके,” मैंने कहा और एक हाथ से ब्रा खोल दी।

भाभी के गोल-गोल दूध बाहर आ गए।

उनके निप्पल गुलाबी रंग के थे और कड़क हो चुके थे।

मैंने एक दूध को हाथ में लिया और दबाने लगा।

“उम्म्म… गुफरान…” भाभी ने आँखें बंद करते हुए कहा।

मैंने उनके दूध को मुँह में ले लिया और चूसने लगा।

उनका दूध इतना मुलायम था कि मैं उसे चूसते ही जा रहा था।

भाभी मेरे सिर को अपने दूधों पर दबा रही थीं।

मैंने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को भी दबाना शुरू कर दिया।

भाभी बुरी तरह उत्तेजित हो चुकी थीं।

उनकी सांसें तेज़ हो गई थीं और वो “आह्ह्ह… हाँ…” की आवाजें निकाल रही थीं।

मैंने उनकी साड़ी को ऊपर उठाना शुरू किया और उनकी जांघों को सहलाने लगा।

भाभी की जांघें बहुत मुलायम थीं।

मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी पैंटी के अंदर डाल दिया।

भाभी की बुर गीली हो चुकी थी।

मैंने अपनी उँगली उनकी बुर में डाल दी।

वो इतनी टाइट थी कि मेरी उँगली अंदर जाने में मुश्किल हो रही थी।

“ओह गुफरान… धीरे…” भाभी ने कहा।

मैंने उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।

भाभी मेरे हाथ को अपनी बुर पर दबा रही थीं।

फिर मैंने उनकी पैंटी नीचे खींची और उसे उतार दिया।

अब भाभी पूरी नंगी थीं। उनकी गुलाबी बुर देखकर मेरा लंड और भी ज़्यादा तन गया।

मैंने उनके पैर फैलाए और उनकी बुर को चाटने लगा।

“आह्ह्ह… हाँ… और ज़ोर से चाटो…” भाभी चीख उठीं।

मैंने अपनी जीभ उनकी बुर के अंदर डाल दी और चाटने लगा।

भाभी की बुर से पानी निकल रहा था जो मैं पी रहा था। उनका स्वाद बहुत अच्छा था।

फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए।

मेरा 7 इंच का लंड खड़ा था जिसे देखकर भाभी की आँखें खुली रह गईं।

“इतना बड़ा लंड?” भाभी ने कहा।

“हाँ भाभी, ये आपकी बुर को पूरी तरह से संतुष्ट करेगा,” मैंने कहा।

मैंने भाभी को सोफे पर लेटा दिया और उनके पैर फैला दिए।

उनकी बुर अब खुली हुई थी।

मैंने अपने लंड को उनकी बुर के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया।

“उफ्फ्फ… बहुत मोटा है… धीरे करो…” भाभी ने दर्द से चीखते हुए कहा।

मैंने उनके होठों पर चूमा और धीरे-धीरे अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया।

भाभी की बुर बहुत टाइट थी क्योंकि उन्हें 1 साल से कोई नहीं चोद रहा था।

“आह्ह्ह… गुफरान… तुम्हारा बहुत बड़ा है…” भाभी ने कहा।

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए।

भाभी की बुर से आवाज़ें आ रही थीं “फच… फच… फच…” मैं उनके दूधों को भी दबा रहा था।

थोड़ी देर बाद भाभी को भी मज़ा आने लगा। उन्होंने अपनी कमर उठानी शुरू कर दी।

“हाँ… और ज़ोर से… चोदो मुझे…” भाभी चीखने लगीं।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब मैं पूरे ज़ोर से भाभी की बुर चोद रहा था।

उनके दूध इतनी तेज़ी से हिल रहे थे कि देखने में बहुत मज़ा आ रहा था।

लगभग 20 मिनट तक मैंने भाभी की बुर चोदी।

फिर मैंने उन्हें घुमाकर कुतिया की तरह बना दिया।

अब मैं पीछे से उनकी बुर में अपना लंड डालकर चोदने लगा।

“ओह्ह्ह… ये पोज़िशन और भी अच्छी है…” भाभी ने कहा।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।

भाभी की गांड बहुत मोटी थी और मेरे धक्कों से वो हिल रही थी।

मैंने एक हाथ से उनकी गांड भी थपथपानी शुरू कर दी।

“आह्ह्ह… हाँ… मारो… और ज़ोर से…” भाभी चीख रही थीं।

मैंने लगभग 15 मिनट तक उन्हें इसी पोज़िशन में चोदा।

फिर मैं झड़ने वाला था।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और भाभी के मुँह में डाल दिया।

भाभी ने पहले तो झिझकी लेकिन फिर मेरा लंड चूसने लगीं।

मैंने अपना सारा माल उनके मुँह में निकाल दिया।

भाभी ने सब कुछ पी लिया और फिर मेरे लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।

“कैसा लगा भाभी?” मैंने पूछा।

“बहुत मज़ा आया गुफरान, तुम्हारा लंड तो बहुत अच्छा है,” भाभी ने कहा।

हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर लेट गए।

मैंने उनके दूधों को सहलाना शुरू कर दिया।

10 मिनट बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।

“ओह, फिर से तैयार हो गया?” भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा।

“हाँ भाभी, अभी तो मैंने आपकी गांड भी मारनी है,” मैंने कहा।

“नहीं गुफरान, गांड में बहुत दर्द होता है,” भाभी ने कहा।

“डरो मत भाभी, मैं आराम से करूँगा,” मैंने कहा और उन्हें घुमाकर उनकी गांड पर तेल लगाना शुरू कर दिया।

मैंने अपनी उँगली उनकी गांड में डाली और अंदर-बाहर करने लगा।

भाभी को भी मज़ा आने लगा।

फिर मैंने अपने लंड को उनकी गांड के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर धकेलना शुरू किया।

“उफ्फ्फ… बहुत मोटा है… धीरे…” भाभी चीखीं।

मैंने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड उनकी गांड में डाल दिया।

वो बहुत टाइट थी। मैंने धक्के लगाने शुरू किए।

“आह्ह्ह… हाँ… अच्छा लग रहा है…” भाभी ने कहा।

मैंने 10 मिनट तक उनकी गांड मारी और फिर उनकी बुर में ही झड़ गया।

हम दोनों थककर सोफे पर लेट गए।

उस रात मैं भाभी के घर ही रुका। हमने रात को 3 बार और सेक्स किया।

अगली सुबह जब मैं जाने लगा तो भाभी ने मुझे गले लगाया।

“गुफरान, अब तुम रोज़ आना, मैं अकेली नहीं रह सकती,” भाभी ने कहा।

“डोंट वरी भाभी, मैं रोज़ आऊँगा,” मैंने कहा।

उसके बाद मैं रोज़ शाम को भाभी के घर जाता और उन्हें खूब चोदता।

भाभी भी बहुत खुश थीं। उन्होंने मुझे अपना सब कुछ दे दिया था।

एक दिन जब मैं भाभी के घर गया तो देखा कि वहाँ एक और औरत बैठी थी।

भाभी ने मुझे बताया कि ये उनकी सहेली सुनीता है।

सुनीता भाभी भी 30 साल की थीं और बहुत खूबसूरत थीं।

उनका पति भी विदेश में रहता था। भाभी ने मुझसे कहा कि क्या मैं सुनीता को भी संतुष्ट कर सकता हूँ।

मैंने हाँ कह दी।

उस रात मैंने दोनों भाभियों को एक साथ चोदा।

ये मेरे लिए बहुत यादगार रात थी।

अब मैं दोनों भाभियों को एक साथ चोदता हूँ।

हम तीनों बहुत खुश हैं।

ये मेरी और नीलम भाभी की कहानी थी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

1 thought on “मुस्लिम भाभी की प्यासी बुर चोदने का मजा लिया”

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top