radha ki group mein sex story
पिछली कहानी में आपने पढ़ा की कैसे आंटी ने माँ के साथ गैंग-बैंग करवाया. अब आगे पढ़ें की कैसे पिता जी जान गए…
मैं जब अपने कमरे में वापस आया तो मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने जो कुछ भी देखा था उसे मेरा दिमाग पचा नहीं पा रहा था।
मेरी मम्मी प्रिया, जो कभी पूजा-पाठ करने वाली, संस्कारी औरत थी, अब पांच मर्दों और एक औरत के बीच नंगी पड़ी थी और उसकी चूत और गांड से वीर्य टपक रहा था।
और मैंने उसी चूत को चाटा था जो अब पूरी तरह से खुली और ढीली हो चुकी थी।
मैंने अपने कमरे में आकर दरवाजा बंद किया और अंधेरे में अपने बिस्तर पर लेट गया। मुझे नींद नहीं आ रही थी।
मेरे कानों में अभी भी मम्मी की सिसकारियाँ गूंज रही थीं – “आह्ह्ह… और जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो…”
लगभग आधा घंटा बीत चुका था। मैंने सोचा कि शायद नीचे अब सब कुछ खत्म हो गया होगा और मम्मी ऊपर आ गई होगी।
लेकिन तभी मुझे बाहर से कार की आवाज सुनाई दी। मेरा दिल रुक सा गया। ये तो पापा की कार की आवाज थी!
पापा राजेश हमेशा शुक्रवार रात को आते थे, लेकिन आज तो अभी सुबह के 6:30 बजे थे। पापा इतनी जल्दी कैसे आ गए?
मैंने जल्दी से खिड़की से झाँका तो देखा कि पापा कार से उतर रहे थे। उनके चेहरे पर थकान थी, शायद उन्होंने रात भर गाड़ी चलाई थी ताकि वो सुबह पहुँच सकें।
मेरे दिमाग में हजारों ख्याल आने लगे। अगर पापा ऊपर आए और मम्मी नीचे नंगी पड़ी मिली तो क्या होगा?
मुझे तुरंत नीचे जाकर मम्मी को चेतावनी देनी चाहिए थी। मैंने अपने कमरे का दरवाजा खोला और हल्के पैरों से नीचे उतरने लगा।
जब मैं नीचे पहुँचा तो देखा कि विनोद अंकल के कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था और अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं।
शायद वो लोग अभी भी सो रहे थे या फिर… मैंने खिड़की से झाँका तो देखा कि मम्मी अभी भी बिस्तर पर नंगी पड़ी थी और विनोद अंकल उनके ऊपर लेटे हुए थे।
सुनीता आंटी और बाकी चारों दोस्त फर्श पर कंबल ओढ़कर सो रहे थे। मम्मी की चूत से अभी भी सफेद रंग का तरल पदार्थ बह रहा था जो बिस्तर पर गीला कर रहा था।
मैंने सोचा कि पापा अभी तक ऊपर नहीं आए होंगे, शायद वो सीधे नीचे ही आ गए हों।
मैंने जल्दी से पीछे का रास्ता लिया और बाहर निकलकर आगे की तरफ गया। जैसे ही मैंने कोने से मुड़कर देखा तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
पापा खड़े थे और विनोद अंकल के कमरे की खिड़की से अंदर देख रहे थे। उनका चेहरा पीला पड़ गया था।
उनके हाथ में जो सूटकेस था वो जमीन पर गिर चुका था। उनकी आँखें चौड़ी हो गई थीं और मुँह खुला का खुला रह गया था।
मैंने धीरे से आवाज लगाई, “पापा…”
पापा ने पीछे मुड़कर देखा। उनकी आँखों में आँसू थे और उनका चेहरा लाल हो चुका था।
उन्होंने मुझे देखा और फिर खिड़की की तरफ इशारा किया।
उनकी आवाज कांप रही थी, “ये… ये क्या हो रहा है रोहन? तुम्हारी मम्मी… वो अंदर…”
मैंने कहा, “पापा, शांत हो जाइए। मैं सब समझाता हूँ।”
पापा ने मेरा हाथ झटक दिया और गुस्से में बोले, “मैं अपनी आँखों से देख रहा हूँ! तुम्हारी मम्मी नंगी पड़ी है और वो विनोद उसके ऊपर लेटा हुआ है! और बाकी लोग… ये तो गैंगबैंग है!”
पापा की आवाज इतनी तेज हो गई कि शायद अंदर सो रहे लोगों को सुनाई दे गई। मैंने जल्दी से पापा का मुँह बंद किया और उन्हें पीछे की तरफ खींचा।
तभी कमरे का दरवाजा खुला और विनोद अंकल बाहर निकले। वो अभी भी नंगे थे और उनका लंड अभी भी मोटा और लंबा लटक रहा था।
उन्होंने पापा को देखा और हैरान होकर बोले, “अरे राजेश भाई! आप तो शाम को आते थे, आज इतनी जल्दी कैसे?”
पापा ने गुस्से में कहा, “तुम… तुमने मेरी पत्नी के साथ क्या किया? मैं तुम्हें पुलिस में दे दूँगा!”
विनोद अंकल ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे भाई साहब, गुस्सा मत कीजिए। अंदर आइए, बैठिए, हम बात करते हैं।”
पापा ने कहा, “मुझे तुम्हारे साथ कोई बात नहीं करनी! मेरी पत्नी कहाँ है?”
तभी मम्मी कमरे से बाहर निकलीं। उन्होंने एक चादर ओढ़ी हुई थी लेकिन उनके चेहरे पर शर्मिंदगी नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी।
उन्होंने पापा को देखा और बोलीं, “राजेश… आप… आप इतनी जल्दी कैसे आ गए?”
पापा ने मम्मी को देखा और उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मम्मी के बाल बिखरे हुए थे, उनके गाल लाल थे और गर्दन पर कई चूसने के निशान थे। चादर से उनके नंगे कंधे और गले का हिस्सा दिख रहा था जो पूरी तरह से लाल हो चुका था।
पापा ने कहा, “प्रिया… तुम… तुमने ये सब किया? तुमने इन सब लोगों के साथ…?”
मम्मी ने शांति से कहा, “हाँ राजेश, मैंने किया। और अब जब आप आ ही गए हैं तो सच्चाई जान ही लीजिए।”
विनोद अंकल ने पापा का हाथ पकड़ा और अंदर खींच लिया। पापा विरोध करते रहे लेकिन विनोद अंकल इतने मजबूत थे कि पापा कुछ नहीं कर सके। मैं भी अंदर चला गया।
कमरे का दृश्य देखकर पापा के होश उड़ गए। बिस्तर पर सफेद चादर पूरी तरह से गीली थी और उस पर पीले और सफेद धब्बे थे।
फर्श पर कंडोम के खाली पैकेट बिखरे हुए थे और कई इस्तेमाल किए हुए कंडोम भी पड़े थे।
सुनीता आंटी और बाकी चारों दोस्त अब जाग चुके थे और वो भी नंगे ही खड़े थे। उनके लंड अभी भी मोटे और लंबे लटक रहे थे।
फरहान ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे राजेश भाई, आप भी आ गए? बहुत अच्छा हुआ, अब तो पूरा परिवार इकट्ठा हो गया।”
पापा ने घृणा से कहा, “तुम सब पागल हो गए हो! मैं पुलिस बुला रहा हूँ!”
इमरान ने कहा, “पुलिस बुलाने से पहले एक बार अपनी पत्नी से पूछ लीजिए कि उसे कैसा लगा। देखिए, वो कितनी खुश दिख रही है।”
सचमुच, मम्मी के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी।
उन्होंने पापा से कहा, “राजेश, मैंने जो कुछ भी किया है, जानबूझकर किया है। आपको पता है, पिछले पाँच सालों से मैंने क्या सहा है? आपका छोटा सा लंड जो चूत में जाते ही झड़ जाता है, मुझे कभी संतुष्टि नहीं दे पाया।”
पापा के चेहरे पर शर्मिंदगी छा गई। उन्होंने कहा, “प्रिया, ये… ये सब गलत है…”
मम्मी ने कहा, “गलत है? तो क्या सही है? हर रात अपनी उंगलियों से काम चलाना? या फिर आपके ऑफिस जाने के बाद अकेले बिस्तर पर तड़पना? राजेश, मैं एक औरत हूँ, मुझे भी जरूरत है। और विनोद भाई साहब और उनके दोस्तों ने वो मुझे दिया है जो आप कभी नहीं दे सके।”
पापा ने अपना सिर झुका लिया। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे।
तभी सुनीता आंटी आगे आईं और पापा के कंधे पर हाथ रखा।
उन्होंने कहा, “राजेश भाई, रोइए मत। देखिए, आपकी पत्नी कितनी खुश है। क्या आप उसकी खुशी से जलते हैं? या फिर आप भी उस खुशी का हिस्सा बनना चाहेंगे?”
पापा ने उलझन भरी नजरों से देखा, “क्या… क्या मतलब?”
विनोद अंकल ने कहा, “मतलब ये राजेश भाई, कि आज हम सब मिलकर एक नया परिवार बनाएंगे। आपकी पत्नी अब हम सबकी है, और अगर आप चाहें तो आप भी हमारे समूह का हिस्सा बन सकते हैं।”
पापा ने हिचकिचाते हुए कहा, “मैं… मैं कैसे…?”
मम्मी ने आगे बढ़कर पापा का हाथ पकड़ा और बोलीं, “राजेश, मैंने आपसे कभी शिकायत नहीं की क्योंकि मैं समझती थी कि आपकी उम्र हो गई है। लेकिन अब मैंने असली मजा चख लिया है। देखिए, विनोद भाई साहब का लंड कितना मोटा और लंबा है। और इनके दोस्तों का भी। क्या आप मुझे इन सब से दूर रख पाएंगे? या फिर आप भी देखना चाहेंगे कि मैं कैसे चुदती हूँ?”
पापा ने मम्मी को देखा और फिर विनोद अंकल के लंड को देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक आई।
शायद वो सोच रहे थे कि अगर वो विरोध करेंगे तो मम्मी उन्हें छोड़कर चली जाएगी, और अगर वो मान जाएं तो शायद वो भी…
तभी करन ने कहा, “देखो राजेश भाई, तुम्हारी पत्नी की चूत अभी भी गर्म है। अभी तो हमने उसे पूरी तरह से संतुष्ट नहीं किया है। क्या तुम नहीं चाहते कि तुम भी अपनी पत्नी को चोदो?”
पापा ने कहा, “लेकिन… लेकिन मेरा… मेरा लंड तो…”
विनोद अंकल ने कहा, “कोई बात नहीं। आज हम तुम्हें भी वो मजा देंगे जो तुमने कभी नहीं लिया। सुनीता, राजेश भाई साहब को तैयार करो।”
सुनीता आंटी ने पापा का हाथ पकड़ा और उन्हें बिस्तर की तरफ खींचा। पापा विरोध करते हुए भी चले गए। उनके चेहरे पर शर्मिंदगी और उत्सुकता का मिश्रण था।
सुनीता आंटी ने पापा के कपड़े उतारने शुरू किए। पहले उनकी शर्ट उतारी, फिर बनियान, और फिर पैंट। पापा अब केवल अंडरवियर में थे। उनका शरीर उम्र के कारण थोड़ा ढीला हो चुका था लेकिन उनका लंड अभी भी छोटा सा खड़ा हो रहा था।
मम्मी ने देखा और बोलीं, “देखो राजेश, तुम्हारा लंड अभी भी उतना ही छोटा है। लेकिन कोई बात नहीं, आज मैं तुमसे भी चुदवाऊंगी और इन सब से भी।”
विनोद अंकल ने पापा का अंडरवियर उतार दिया। पापा का लंड सचमुच बहुत छोटा था, मुश्किल से 3 इंच का। लेकिन अजीब बात ये थी कि वो बहुत मोटा था, लगभग 2 इंच चौड़ा।
फरहान ने हंसते हुए कहा, “वाह राजेश भाई, आपका लंड तो बहुत मोटा है पर लंबाई कम है। कोई बात नहीं, आज हम आपको दिखाएंगे कि असली चुदाई कैसे होती है।”
पापा ने शर्मिंदगी से अपना लंड छुपाने की कोशिश की लेकिन सुनीता आंटी ने उनका हाथ हटा दिया और बोलीं, “अरे शर्माओ मत राजेश भाई, यहाँ सब अपने हैं। देखिए, आपकी पत्नी कितनी खुश है।”
मम्मी ने अपनी चादर उतार दी और पूरी तरह से नंगी हो गईं। उनका शरीर अभी भी गोरा और मुलायम था, लेकिन अब उनकी चूत लाल हो चुकी थी और थोड़ी सूजी हुई लग रही थी। उनके बूब्स पर कई निशान थे और निप्प्स भी लाल-लाल थे।
पापा ने मम्मी को देखा और उनका लंड अपने आप हिलने लगा। उन्होंने कहा, “प्रिया… तुम… तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो…”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ राजेश, और अब मैं और भी खूबसूरत बनने वाली हूँ। आओ, मुझे चोदो।”
पापा ने हिचकिचाते हुए कदम बढ़ाए। वो मम्मी के पास गए और उनके बूब्स को छूने लगे। मम्मी ने उनका हाथ पकड़ा और अपने बूब्स पर दबाया।
तभी विनोद अंकल ने कहा, “रुकिए राजेश भाई, ऐसे नहीं। पहले आप देखिए कि हम कैसे करते हैं, फिर आप करना।”
विनोद अंकल ने मम्मी को खींचा और उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया।
फिर उन्होंने मम्मी के पैर फैलाए और अपना मोटा लंड मम्मी की चूत के मुँह पर रखा।
मम्मी ने आँखें बंद कर लीं और कहा, “हाँ विनोद भाई, डाल दो अपना लंड। मेरी चूत तरस रही है।”
विनोद अंकल ने एक जोरदार झटका मारा और उनका पूरा 7 इंच लंबा लंड मम्मी की चूत में घुस गया। मम्मी ने आह भरी, “आह्ह्ह… हाँ… यही तो चाहिए था मुझे…”
पापा ये सब देखकर चौंक गए। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मम्मी इतना बड़ा लंड ले सकती हैं।
उनका अपना लंड हिल रहा था और वो बिना कुछ किए खड़े होकर देखते रहे।
विनोद अंकल जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मम्मी की चूत से फच-फच की आवाज आने लगी।
मम्मी पागलों की तरह चिल्लाने लगीं, “आह्ह्ह… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… राजेश देखो… देखो तुम्हारी पत्नी कैसे चुद रही है…”
पापा ने कहा, “मैं… मैं देख रहा हूँ… ये… ये अद्भुत है…”
मैं कोने में खड़ा होकर ये सब देख रहा था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि पापा इतनी आसानी से मान गए। शायद उन्हें भी ये सब देखकर मजा आ रहा था।
विनोद अंकल लगभग 10 मिनट तक मम्मी को चोदते रहे। फिर उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और कहा, “अब राजेश भाई की बारी। आइए, अपनी पत्नी की चूत में अपना लंड डालिए।”
पापा ने हिचकिचाते हुए अपना छोटा लंड मम्मी की चूत में डाला। मम्मी की चूत अब इतनी ढीली हो चुकी थी कि पापा का छोटा लंड उसमें कहीं का नहीं लग रहा था।
मम्मी ने कहा, “राजेश, तुम्हारा लंड तो बिल्कुल ही नहीं पहुँच रहा। चलो, कोई बात नहीं, तुम मेरे बूब्स चूसो।”
पापा ने मम्मी के बूब्स चूसने शुरू किए और उनका लंड मम्मी की चूत में अंदर-बाहर होता रहा। लेकिन कुछ ही देर में पापा झड़ गए। उन्होंने कहा, “माफ करना प्रिया, मैं… मैं रुक नहीं पाया…”
मम्मी ने राहत की सांस ली और कहा, “कोई बात नहीं राजेश, मुझे पता है तुमसे नहीं होगा। लेकिन देखो, अभी तो रात भर पड़ी है।”
विनोद अंकल ने कहा, “अब जब राजेश भाई भी आ गए हैं तो हम एक नया नियम बनाते हैं। आज से, प्रिया भाभी हम सबकी साझेदारी की संपत्ति होंगी। राजेश भाई, आप जब भी चाहें अपनी पत्नी को चोद सकते हैं, लेकिन सिर्फ हमारी मौजूदगी में। और रोहन, तुम भी अब बड़े हो गए हो, तुम भी अपनी मम्मी का मजा ले सकते हो।”
मैं चौंक गया। मैंने कहा, “क्या… मैं भी?”
सुनीता आंटी ने कहा, “हाँ रोहन, तुमने कल रात अपनी मम्मी की चूत चाटी थी ना? तुम्हें भी मजा आया था। आज तुम भी अपनी मम्मी को चोदो।”
मैंने हिचकिचाते हुए कहा, “लेकिन… वो मेरी मम्मी है…”
मम्मी ने कहा, “कोई बात नहीं बेटा, आज से मैं सिर्फ तुम्हारी मम्मी नहीं, तुम्हारी रांड भी हूँ। आओ, अपनी मम्मी को चोदो।”
मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था।
जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो पापा ने देखा और हैरान होकर कहा, “ये… ये तो मुझसे भी बड़ा है!”
सचमुच, मेरा लंड लगभग 6 इंच लंबा था और काफी मोटा भी। उम्र के हिसाब से मेरा लंड काफी विकसित था।
मम्मी ने मेरे लंड को देखा और कहा, “आह्ह्ह… मेरे बेटे का लंड भी कितना मोटा है। आओ रोहन, अपनी मम्मी की चूत में डालो अपना लंड।”
मैं मम्मी के पास गया। मम्मी ने अपने पैर फैलाए और मैंने अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा।
उनकी चूत अभी भी गीली थी और विनोद अंकल के वीर्य से भरी हुई थी। मैंने एक धक्का मारा और मेरा लंड आधा अंदर चला गया।
मम्मी ने कहा, “आह्ह्ह… हाँ बेटा… और अंदर डालो… पूरा डालो…”
मैंने एक और जोरदार झटका मारा और मेरा पूरा लंड मम्मी की चूत में समा गया। मम्मी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और कहा, “चोदो मुझे बेटा… अपनी मम्मी को चोदो…”
मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मम्मी की चूत इतनी ढीली थी कि मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी, लेकिन फिर भी मजा बहुत आ रहा था। ये सोचकर कि मैं अपनी ही मम्मी को चोद रहा हूँ, मेरा उत्साह बढ़ता जा रहा था।
पापा कोने में बैठकर ये सब देख रहे थे। उनका लंड फिर से खड़ा हो गया था।
विनोद अंकल ने देखा और कहा, “राजेश भाई, आप भी आइए। अपनी पत्नी के मुँह में अपना लंड डालिए।”
पापा उठे और मम्मी के सिर की तरफ गए।
उन्होंने अपना छोटा लंड मम्मी के मुँह में डाल दिया। मम्मी ने बिना कहे ही उसे चूसना शुरू कर दिया।
अब मम्मी दोनों तरफ से चुद रही थीं – आगे से मैं उनकी चूत चोद रहा था और पीछे से पापा उनका मुँह चोद रहे थे।
ये दृश्य बहुत ही उत्तेजक था। बाकी लोग भी खड़े होकर हिला रहे थे और इंतजार कर रहे थे कि कब उनकी बारी आएगी।
लगभग 15 मिनट तक मैं मम्मी को चोदता रहा। फिर मैं झड़ने वाला था।
मैंने पूछा, “मम्मी… मैं निकालने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?”
मम्मी ने मुँह से पापा का लंड निकाला और कहा, “अंदर ही निकाल दो बेटा… मैं गर्भवती होना चाहती हूँ… तुम्हारे बच्चे को जन्म देना चाहती हूँ…”
ये सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया। मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और फिर अपना सारा वीर्य मम्मी की चूत में छोड़ दिया। मैं पूरा झड़ गया और मम्मी के ऊपर गिर पड़ा।
तभी विनोद अंकल ने कहा, “बहुत बढ़िया रोहन! अब पापा की बारी। राजेश भाई, अपनी पत्नी की गांड मारिए।”
पापा ने कहा, “गांड? लेकिन मैंने कभी…”
सुनीता आंटी ने कहा, “कोई बात नहीं, हम सिखाते हैं।”
सुबह के 8 बज चुके थे लेकिन कमरे में अभी भी अंधेरा था क्योंकि सब थके हुए थे। मम्मी बिस्तर पर पड़ी थीं और उनके शरीर पर वीर्य की परत चमक रही थी। पापा, मैं और बाकी सब लोग फर्श पर या कुर्सियों पर सो रहे थे।
लगभग 9 बजे सुनीता आंटी जागीं और उन्होंने सबको जगाया। “उठो सब लोग, नहाना-धोना है और फिर नाश्ता करना है। आज तो शनिवार है, पूरा दिन हमारे पास है।”
सब एक-एक करके उठे। मम्मी भी उठीं लेकिन वो बहुत थकी हुई लग रही थीं। उनके चलने में तकलीफ हो रही थी क्योंकि उनकी चूत और गांड दोनों में दर्द था।
विनोद अंकल ने कहा, “चलो, पहले नहाते हैं। लेकिन आज हम साथ में नहाएंगे।”
उन्होंने बाथरूम का दरवाजा खोला। बाथरूम बड़ा था लेकिन इतने सारे लोगों के लिए छोटा पड़ रहा था। विनोद अंकल ने नल खोला और सब गीले हो गए। फिर उन्होंने सबको अंदर आने को कहा।
मम्मी, सुनीता आंटी, पापा, मैं और चारों दोस्त सब बाथरूम में घुस गए। विनोद अंकल ने मम्मी को पकड़ा और उनकी चूत में साबुन लगाया। फिर उन्होंने अपनी उंगली अंदर डालकर साफ किया।
मम्मी ने कहा, “आह्ह्ह… धीरे… अभी तो दर्द हो रहा है…”
विनोद अंकल ने कहा, “कोई बात नहीं प्रिया, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा।”
फरहान ने मम्मी के बूब्स पर साबुन लगाया और उन्हें मसलने लगा। इमरान ने उनकी पीठ पर साबुन लगाया। मैंने और पापा ने मिलकर मम्मी के पैरों पर साबुन लगाया।
कुछ देर बाद सबने अपने-अपने शरीर धोए। मम्मी ने सबसे पहले नहाया और फिर वो तरोताजा दिखने लगीं।
नहाने के बाद सब बाहर आए। सुनीता आंटी ने नाश्ता बनाने के लिए कहा लेकिन विनोद अंकल ने कहा, “पहले एक राउंड और करते हैं। मुझे अभी भी मम्मी की चूत चाहिए।”
मम्मी ने शर्माते हुए कहा, “अरे अभी तो सुबह हुई है…”
विनोद अंकल ने कहा, “तो क्या हुआ? आज तो पूरा दिन है।”
उन्होंने मम्मी को फिर से बिस्तर पर लेटा दिया। इस बार उन्होंने मम्मी को घोड़ी बनने को कहा। मम्मी ने अपने घुटनों के बल खड़ी होकर अपनी गांड उठा दी।
विनोद अंकल ने मम्मी की गांड पर थप्पड़ मारा और कहा, “क्या मस्त गांड है तुम्हारी प्रिया। आज मैं इसे फाड़ूंगा।”
मम्मी ने घबराकर कहा, “नहीं विनोद भाई, कल रात तो आपने मेरी गांड बहुत मारी। अभी तो दर्द हो रहा है…”
लेकिन विनोद अंकल ने एक नहीं सुनी। उन्होंने अपने लंड पर तेल लगाया और मम्मी की गांड के छेद पर रख दिया। फिर एक जोरदार झटके से आधा लंड अंदर डाल दिया।
मम्मी चीख उठीं, “हाए माँ… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो…”
लेकिन विनोद अंकल रुके नहीं। उन्होंने दूसरा झटका मारा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मम्मी की गांड बहुत टाइट थी लेकिन अभी थोड़ी ढीली हो चुकी थी कल रात की चुदाई के कारण।
विनोद अंकल जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मम्मी की गांड की थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। पापा और मैं देख रहे थे और हमारे लंड फिर से खड़े हो गए थे।
तभी सुनीता आंटी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “रोहन, चलो तुम मुझे चोदो। मुझे भी मजा चाहिए।”
मैंने कहा, “लेकिन आंटी…”
उन्होंने कहा, “कोई लेकिन-वेकिन नहीं। आओ।”
वो मुझे पास वाले कमरे में ले गईं और बिस्तर पर लेट गईं। उन्होंने अपने पैर फैलाए और मुझे अपने ऊपर बुलाया। मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाला और चोदने लगा।
इधर विनोद अंकल मम्मी की गांड मार रहे थे और उधर मैं सुनीता आंटी की चूत चोद रहा था। पापा अकेले खड़े होकर देख रहे थे तो फरहान ने उनसे कहा, “राजेश भाई, आइए मैं आपको सिखाता हूँ कि असली मर्द कैसे बनते हैं।”
फरहान ने पापा को अपने पास बुलाया और उनका लंड पकड़कर हिलाने लगा। पापा को ये सब अजीब लग रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था।
दोपहर के 12 बज चुके थे और अभी भी चुदाई जारी थी। मम्मी को अब तक कम से कम दस बार अलग-अलग लोगों ने चोदा था। उनकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं और थोड़ी सूजी भी हुई थीं।
लेकिन मम्मी अभी भी और चाहती थीं। वो बिस्तर पर लेटी हुई थीं और चारों तरफ लंड लहरा रहे थे। विनोद अंकल, फरहान, इमरान, करन, अमित, पापा और मैं – सब अपने-अपने लंड हिला रहे थे।
मम्मी ने कहा, “आओ सब लोग… एक-एक करके आओ… मैं सबका लंड चूसूंगी…”
एक-एक करके सब मम्मी के पास गए और उन्होंने अपने लंड मम्मी के मुँह में डाले। मम्मी बारी-बारी से सबका लंड चूस रही थीं। वो पहले विनोद अंकल का लंड चूसीं, फिर फरहान का, फिर इमरान का, फिर करन का, फिर अमित का, फिर पापा का और अंत में मेरा।
जब मेरा लंड उन्होंने मुँह में लिया तो उन्होंने कहा, “मेरे बेटे का लंड भी कितना स्वादिष्ट है…”
ये सुनकर मैं झड़ने वाला था। मैंने कहा, “मम्मी… मैं निकालने वाला हूँ…”
मम्मी ने मेरा लंड मुँह से निकाला और कहा, “अपनी मम्मी के मुँह में निकाल दो बेटा…”
मैंने अपना लंड मम्मी के मुँह में डाला और झड़ गया। मम्मी ने सारा वीर्य पी लिया और बचा हुआ चाटकर साफ कर दिया।
अब बारी थी पापा की। पापा ने मम्मी के ऊपर लेटकर अपना लंड उनकी चूत में डाला। लेकिन पापा जल्दी ही झड़ गए। उन्होंने शर्मिंदगी से कहा, “माफ करना प्रिया…”
मम्मी ने कहा, “कोई बात नहीं राजेश, तुम्हारी उम्र हो गई है। लेकिन देखो, तुम्हारे बेटे ने कितनी देर तक चोदा। वो तुमसे ज्यादा मर्द है।”
पापा ने सिर झुकाया और कोने में बैठ गए।
अब शाम होने वाली थी। विनोद अंकल ने कहा, “चलो, आज की चुदाई यहीं खत्म करते हैं। कल फिर से मिलेंगे।”
सबने अपने कपड़े पहने। मम्मी ने भी साड़ी पहनी लेकिन उनके चलने में अभी भी दिक्कत हो रही थी। उनकी चूत से अभी भी वीर्य टपक रहा था।
विनोद अंकल ने पापा से कहा, “राजेश भाई, आज से हमारा एक नया समझौता है। आपकी पत्नी अब हम सबकी है। आप जब भी आएंगे, वो हमारे साथ ही रहेगी। और आप भी हमारे समूह का हिस्सा हैं।”
पापा ने हाँ में सिर हिलाया। उन्होंने समझौते को स्वीकार कर लिया था।
रात को जब सब चले गए, तो हम तीनों – मम्मी, पापा और मैं – ऊपर अपने घर में थे। मम्मी ने खाना बनाया और हमने साथ में खाया। खाते समय पापा ने मम्मी से कहा, “प्रिया, क्या तुम सचमुच खुश हो?”
मम्मी ने कहा, “हाँ राजेश, पहली बार इतने सालों बाद मैं सचमुच खुश हूँ। मुझे वो मिला है जो मैं हमेशा से चाहती थी।”
पापा ने कहा, “तो फिर ठीक है। मैं भी कोशिश करूँगा कि तुम्हें खुश रख सकूँ। लेकिन जैसा कि तुम देख चुकी हो, मेरे बस का नहीं है।”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं, मेरे पास अब रोहन है और विनोद भाई साहब हैं।”
मैंने कहा, “मम्मी, क्या मैं आज रात आपके साथ सोऊँ?”
मम्मी ने कहा, “हाँ बेटा, आओ। आज रात सिर्फ तुम और मैं।”
हम मम्मी के कमरे में गए। पापा ने अलग कमरे में सोने का फैसला किया। मम्मी ने अपने कपड़े उतारे और नंगी हो गईं। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए।
मम्मी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और कहा, “आज मैं तुमसे प्यार करवाना चाहती हूँ बेटा, न कि सिर्फ चुदाई।”
मैंने मम्मी के होंठों पर किस किया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। मम्मी ने मेरे बदन पर अपने हाथ फेरे और मैंने मम्मी के बूब्स दबाए।
फिर मैंने मम्मी को बिस्तर पर लेटाया और उनके पैर फैलाए। मम्मी की चूत अभी भी गीली थी लेकिन थोड़ी सूजी हुई लग रही थी। मैंने अपना लंड धीरे से उनकी चूत में डाला।
मम्मी ने कहा, “आह्ह्ह… धीरे बेटा… अभी तो दर्द हो रहा है…”
मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। मम्मी ने अपने पैर मेरे कंधों पर रख दिए। हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे और प्यार कर रहे थे।
लगभग 20 मिनट तक मैंने मम्मी को धीरे-धीरे चोदा। फिर मम्मी झड़ गईं और मैंने भी अपना वीर्य उनकी चूत में छोड़ दिया।
उस रात हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर सोए। मम्मी ने मुझसे कहा, “रोहन, आज से तुम मेरे पति हो। राजेश तो बस नाम के पति हैं, लेकिन असली पति तुम हो।”
मैंने कहा, “हाँ मम्मी, मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूँगा।”
अगली सुबह जब मैं जागा तो मम्मी मेरे बगल में नंगी पड़ी थीं। उनकी चूत से मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था। मैंने उन्हें जगाने की कोशिश की लेकिन वो थकी हुई थीं।
मैंने सोचा कि आज रविवार है और स्कूल नहीं है। मैंने अपना लंड मम्मी के मुँह के पास ले गया और उनके होंठों पर रगड़ने लगा। मम्मी की आँख खुली और उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरा लंड मुँह में ले लिया।
वो मुझे चूसने लगीं और मैं फिर से उत्तेजित हो गया। मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, आज फिर से विनोद अंकल आएंगे?”
मम्मी ने मेरा लंड मुँह से निकालकर कहा, “हाँ बेटा, आज भी आएंगे। और हर रोज आएंगे। अब तो यही हमारी जिंदगी है।”
मैंने कहा, “मुझे बहुत मजा आता है मम्मी, जब आपको चोदता हूँ और देखता हूँ कि दूसरे लोग भी आपको चोद रहे हैं।”
मम्मी ने कहा, “मुझे भी बेटा, अब मैं बिना चुदाई के एक दिन भी नहीं रह सकती।”
तभी दरवाजे की घंटी बजी। मम्मी ने कहा, “देखो, विनोद भाई साहब आ गए। जाओ, दरवाजा खोलो।”
मैंने अपने कपड़े नहीं पहने, बस अंडरवियर में ही दरवाजा खोला। बाहर विनोद अंकल, सुनीता आंटी और चारों दोस्त खड़े थे। वो सब मुझे देखकर मुस्कुराए।
विनोद अंकल ने कहा, “अरे रोहन, अभी तक कपड़े नहीं पहने? क्या तुमने अपनी मम्मी को चोदना शुरू कर दिया है सुबह-सुबह?”
मैंने शर्माते हुए कहा, “हाँ अंकल…”
वो सब अंदर आए। मम्मी अभी भी नंगी बिस्तर पर पड़ी थीं। विनोद अंकल ने मम्मी को देखा और कहा, “प्रिया, तुम तो अभी भी तैयार हो। चलो, आज का दिन शुरू करते हैं।”
मम्मी ने मुस्कुराते हुए अपने पैर फैलाए और कहा, “आओ विनोद भाई, आज मुझे और जोर से चोदना…”
और इस तरह, एक नई सुबह, एक नई चुदाई और एक नई जिंदगी की शुरुआत हुई। अब हमारा पूरा परिवार बदल चुका था। पापा अब एक दर्शक बन गए थे जो अपनी पत्नी को दूसरे मर्दों से चुदवाते देखकर खुश होते थे। मैं अब मम्मी का असली पति था जो उन्हें हर रोज चोदता था। और मम्मी, वो अब एक सच्ची रांड बन चुकी थीं जो हर लंड की प्यासी थीं।
विनोद अंकल ने मम्मी के ऊपर लेटकर अपना लंड उनकी चूत में डाला और जोर-जोर से चोदने लगे। मैं और पापा बगल में बैठकर देख रहे थे। मम्मी चिल्ला रही थीं, “आह्ह्ह… हाँ… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… मैं तुम्हारी रांड हूँ… मुझे चोदो…”
ये सिलसिला अब रोज चलता था। सुबह, दोपहर, शाम, रात – कभी भी मम्मी की चूत खाली नहीं रहती थी। कभी विनोद अंकल आते, कभी उनके दोस्त, कभी पापा और कभी मैं।
और मम्मी, वो हमेशा खुश रहती थीं। उनका चेहरा अब हमेशा चमकता रहता था। उनकी चूत हमेशा गीली रहती थी और उनकी बुर हमेशा लंड की प्यासी।
एक दिन पापा ने मुझसे कहा, “रोहन, मुझे गर्व है कि तुम मेरे बेटे हो। तुमने वो किया जो मैं नहीं कर सका। तुमने अपनी मम्मी को खुश रखा।”
मैंने कहा, “पापा, आप चिंता मत कीजिए। मैं हमेशा मम्मी का ख्याल रखूँगा।”
और इस तरह, हमारा परिवार अब एक खुशहाल परिवार बन गया था। एक ऐसा परिवार जहाँ प्यार था, समझ थी, और बहुत सारी चुदाई थी। मम्मी अब हम सबकी रांड थीं और हम सब उनके प्रेमी थे।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अब तो हर दिन नए कारनामे होते हैं। कभी मैं स्कूल से आकर मम्मी को चोदता हूँ, कभी पापा आते हैं तो देखते हैं कि मम्मी पहले से ही किसी और के साथ चुद रही होती हैं। और कभी-कभी तो हम सब मिलकर एक साथ मम्मी की चुदाई करते हैं।
मम्मी की चूत अब हमेशा खुली रहती है, हमेशा तैयार रहती है। और हम सब उनकी सेवा में हमेशा तैयार रहते हैं।
यही थी हमारी कहानी – एक छोटे से परिवार की कहानी जो बड़े सेक्सual समूह में बदल गया। और हम सब इससे बहुत खुश हैं।
अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो मुझे जरूर बताएं। मैं और भी कई किस्से सुनाऊंगा – कैसे मम्मी ने मेरे दोस्तों को भी अपनी चूत का मजा दिया, कैसे पापा ने सुनीता आंटी को चोदा, और कैसे हमने एक बड़ा सेक्स पार्टी का आयोजन किया जिसमें पूरे मोहल्ले के मर्दों ने मम्मी को चोदा।
लेकिन वो सब अगली बार…
कैसी लगी आपको ये कहानी? अगला भाग पढ़ना चाहेंगे जिसमें मम्मी मेरे दोस्तों से भी चुदवाती हैं?
- मैंने दादी की 4 लंड से गैंगबैंग चुदाई
- गुरूजी टीचर्स डे पर चोद दिए
- पंडित जी ने चोदा मेरी विधवा माँ को और मुझे
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Wow! nice story.