दोस्त की माँ को चोदकर मजा दिया

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नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम करन है। मैं आज आपको अपनी एक सच्ची और यादगार कहानी सुनाने जा रहा हूं जो मेरे जीवन के सबसे खास अनुभवों में से एक है।

यह कहानी उस समय की है जब मैं पुणे गया था कुछ ऑफिस के काम से।

मेरे स्कूल का एक पुराना दोस्त वरुण पुणे में रहता है।

उसके पिता एक आईटी कंपनी में काम करते हैं और वरुण भी वहीं इंटर्नशिप कर रहा था।

जब उसे पता चला कि मैं पुणे आ रहा हूं, तो उसने तुरंत फोन किया – “भाई, होटल में क्या करेगा? मेरे घर आजा, मम्मी-पापा भी खुश होंगे।”

मैंने पहले तो मना किया लेकिन वो इतना जोर देने लगा कि आखिरकार मैं मान गया।

जब मैं उसके घर पहुंचा तो शाम का वक्त था। घर में सब लोग थे – वरुण, उसके पिता, और उसकी मम्मी मीना आंटी।

मुझे देखकर सब बहुत खुश हुए।

वरुण ने मुझे गले लगाया और मीना आंटी ने कहा – “अरे करन, कितना बड़ा हो गया है तू। पहचान में ही नहीं आ रहा।”

मैंने आंटी को प्रणाम किया। वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थीं।

मीना आंटी की उम्र करीब 45 साल होगी लेकिन वो दिखने में 35 की भी नहीं लगती थीं।

वो थोड़ी मोटी थीं लेकिन उनका चेहरा बहुत क्यूट था – गोरी स्किन, बड़ी-बड़ी आंखें, और गुलाबी होंठ। उन्होंने हल्के गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था जिसमें वो बहुत सुंदर लग रही थीं।

मैं अंदर गया, फ्रेश हुआ, और फिर सबके साथ डिनर किया।

खाना बहुत अच्छा था। मीना आंटी ने खुद बनाया था। खाते वक्त मैंने नोटिस किया कि वरुण मुझसे कुछ कहना चाह रहा था लेकिन वो अपने पापा के सामने कुछ बोल नहीं रहा था।

रात को जब हम वरुण के कमरे में गए तो वो मुस्कुराके बोला – “भाई, सच-सच बता, कविता आंटी और नेहा आंटी के साथ क्या-क्या हुआ था?”

मैंने हंसते हुए पूरी स्टोरी सुना दी। कैसे कविता आंटी ने मुझे अपने घर बुलाया था जब उनके पति बाहर गए थे।

कैसे हमने पूरी रात मजे किए थे। और कैसे नेहा आंटी जो हमारी पड़ोस में रहती थीं, उन्होंने मुझे बालकनी में देख लिया था और फिर कैसे उन्होंने भी मुझे अपना बनाया।

मैं इतने जोश में था कि मुझे पता ही नहीं चला कि मीना आंटी बाहर से हमारी बातें सुन रही थीं।

मैंने बाद में पता चला कि वो चुपके से दरवाजे के पास खड़ी होकर सब सुन रही थीं और फिर वो अपने कमरे में चली गई थीं।

उस रात हम दोनों देर तक बातें करते रहे और फिर सो गए। अगला दिन सुबह वरुण और उसके पापा ऑफिस चले गए।

मुझे दोपहर में एक मीटिंग के लिए जाना था इसलिए मैं घर पर ही था। मीना आंटी घर पर थीं।

सुबह मैं उठा तो आंटी मेरे लिए चाय लेकर आईं। हम बालकनी में बैठकर चाय पी रहे थे।

आंटी ने हाल-चाल पूछा और मैंने भी जवाब दिया।

फिर बोलीं – “आज गर्मी बहुत है ना?”

मैंने हां कहा। तभी आंटी ने अपने सूट के ऊपर के दो बटन खोल दिए और पंखे के नीचे बैठ गईं।

बटन खुलते ही उनकी ब्रा और गहरी क्लीवेज साफ दिखने लगी।

दोनों चूचियां थोड़ी उभरी हुई थीं और दरार में पसीना चमक रहा था।

मैंने नजर हटाने की पूरी कोशिश की, खुद को कंट्रोल किया, लेकिन मेरा लंड खड़ा हो गया था।

आंटी यह नोटिस कर रही थीं और मुस्कुरा रही थीं।

थोड़ी देर बाद आंटी ने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा। मैंने कहा – “मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है आंटी।”

तब उन्होंने जो बोला, मेरे होश उड़ गए। उन्होंने कहा – “कल रात मैंने सब सुन लिया था… कैसे तूने कविता आंटी और नेहा आंटी को संतुष्ट किया, उनकी चुदाई की।”

मैं शॉक हो गया, सर नीचे कर लिया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं।

फिर वो मेरे बगल में बैठ गईं और बोलीं – “इसमें शर्माने वाली कोई बात नहीं है करन। ये तो पुण्य का काम है। हर औरत को खुश रहने का हक है। और तू तो बड़ा मर्द है जो औरतों को खुश करता है।”

मैंने तुरंत मना किया – “नहीं आंटी, आप मेरी दोस्त की मां हो, मैं ऐसा नहीं कर सकता।”

उन्होंने कहा – “दोस्त की मां हूं तुम्हारी नहीं। और वैसे भी, तू तो दूसरों की मां के साथ करता है, मेरे साथ क्यों नहीं? क्या मैं उनसे कम खूबसूरत हूं?”

मैंने कहा – “नहीं आंटी, ऐसी बात नहीं है। आप बहुत खूबसूरत हैं।”

फिर वो और करीब आईं और अपने सूट के सारे बटन खोल दिए। काली ब्रा साफ दिख रही थी।

उनके बूब्स ब्रा से बाहर आने को तड़प रहे थे। फिर उन्होंने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगीं।

मैंने हटाने की कोशिश की लेकिन वो मुझे कसकर पकड़े हुए थीं।

काफी देर तक हम अलग नहीं हुए। उनके होंठ इतने रसीले थे कि मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैं भी उनका साथ देने लगा।

आखिर में मैंने खुद को संभाला और वहां से हट गया।

मैंने कहा – “आंटी, प्लीज, यह गलत है।”

वो बोलीं – “कुछ भी गलत नहीं है करन। आज वरुण और उसके पापा दोनों देर से आएंगे। हमारे पास पूरा दिन है।”

मैंने कहा – “मुझे सोचने दीजिए” और अपने कमरे में चला गया।

दोपहर को मेरी मीटिंग थी। मैं बाहर गया और काम निपटाकर शाम को वापस आया।

जब वापस आया तो घर में कोई नहीं था। वरुण और उसके पापा अभी तक नहीं आए थे। मीना आंटी घर पर अकेली थीं।

मैंने आंटी को ढूंढा। वो शायद बाथरूम में थीं।

तभी अंदर से आवाज आई – “करन, तुम इधर हो क्या?”

मैंने हां बोला।

फिर बोलीं – “बाहर सोफे पर तौलिया रखा है, जरा दे दो ना, मैं भूल गई।”

मैंने तौलिया उठाया और बाथरूम का दरवाजा नॉक किया।

उन्होंने दरवाजा आधा खोला। मैं हाथ अंदर करके तौलिया देने लगा तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर जोर से अंदर खींच लिया।

अंदर देखा तो मेरी सांसें रुक गईं। आंटी बिल्कुल नंगी खड़ी थीं।

पूरे बदन पर पानी की बूंदें चमक रही थीं। उनकी चूचियां भरी हुई थीं, गोल और मोटी। पानी की बूंदें चूचियों से नीचे बहकर नाभि पर जा रही थीं।

नीचे चूत पर भी बूंदें टपक रही थीं। और उनकी गांड… उफ्फ… क्या बताऊं यार, गोल-मटोल, फूली हुई, जैसे मखमल जैसी सॉफ्ट।

पानी की बूंदें उस पर भी चमक रही थीं। पूरा बदन इतना हॉट लग रहा था कि कोई भी इंसान पागल हो जाए।

वो मुझे देखकर हंसने लगीं। मैं जैसे ही होश में आया, बाहर भाग आया। लेकिन उनका नंगा बदन दिमाग में चिपक गया था।

खासकर वो गांड… मैं उसका दीवाना बन गया था। मेरा लंड पूरी तरह टाइट होकर खड़ा था, जैसे सलामी दे रहा हो।

थोड़ी देर बाद आंटी बाहर आईं। वो अपने कमरे में जाकर साड़ी पहनकर आईं।

लेकिन मेरे दिमाग में बस वही नजारा घूम रहा था – उनका नंगा भीगा हुआ बदन, गांड पर वो बूंदें… उफ्फ।

मैं खुद को रोक नहीं पाया। उनके पास गया और उनके होंठों पर अपने होंठ रखकर किस करने लगा।

हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे। किस करते हुए एक-दूसरे को सपोर्ट दे रहे थे।

मैंने धीरे-धीरे अपने कपड़े उतार दिए और सिर्फ अंडरवियर में आ गया।

अंडरवियर में मेरा लंड का उभार साफ दिख रहा था। वो मुस्कुराईं और बोलीं – “वाह करन, कितना बड़ा है तुम्हारा।”

मैंने आंटी के गाल पर किस करते-करते उनकी साड़ी का पल्लू निकाल दिया और ब्लाउज के ऊपर से ही चूचियों को दबाने लगा।

आंटी सिसकियां ले रही थीं। मैंने ब्लाउज के बटन खोले, ब्रा भी निकाल दी। उनके बड़े-बड़े बूब्स को दबाने लगा और चूसने लगा।

आंटी ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थीं। फिर आंटी ने बेडरूम में चलने को कहा। हम बेडरूम में आ गए।

मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटाया, उनके ऊपर चढ़ गया और दूध को चूसना शुरू कर दिया। उनके बूब्स को जोर-जोर से दबाने लगा।

फिर किस करते-करते नीचे की तरफ आया और उनकी नाभि को किस करने लगा। आंटी तड़प रही थीं।

फिर किस करते-करते उनकी साड़ी पूरी निकाल दी और दांतों से पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। उन्होंने खुद मदद की पेटीकोट उतारने में। अब वो सिर्फ पैंटी में मेरे सामने लेटी हुई थीं।

एक तरफ पूरा भरा हुआ बदन और सिर्फ एक पैंटी। कोई भी मर्द देखकर पागल हो जाए। मैंने उनकी जांघों को किस करना शुरू किया।

हर किस पे वो मदहोश हो रही थीं। जांघों को किस करते-करते पैंटी के बीच में आ गया और चूत के ऊपर से ही पैंटी को किस करने लगा। जीभ से जांघों को चाट रहा था। आंटी पूरी तरह मदहोश हो चुकी थीं।

फिर मैंने धीरे-धीरे उनकी पैंटी भी निकाल दी। अब आंटी मेरे सामने पूरी तरह नंगी थीं।

चूत तो बिल्कुल क्लीन थी, जैसे मेरे लिए की हो। नजारा कुछ ऐसा था – सिर्फ गले में मंगलसूत्र और हाथों में चूड़ियां, बिल्कुल अप्सरा जैसी।

मैंने उनकी जांघों को चौड़ा किया और चूत के आस-पास किस करना शुरू कर दिया।

आंटी की सांसें तेज हो रही थीं। वो धीरे-धीरे मोन करने लगीं – “आह करन… हां बेटा… ऐसे ही… मत रुकना।”

मैं अपनी जीभ से उनकी चूत के बाहर के हिस्से को चाट रहा था, धीरे-धीरे अंदर की तरफ बढ़ रहा था।

उनकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी। उनकी चूत से जो भी पानी आ रहा था मैं उसे चाट रहा था।

मैंने जीभ चूत के अंदर डाली तो आंटी ने मेरे बाल पकड़कर जोर से दबाया – “आआह… कितना अच्छा लग रहा है… जोर से चाट बेटा… आंटी की चूत को पूरा साफ कर दे।”

मैं जोर-जोर से चाटने लगा। आंटी की टांगें कांप रही थीं, वो बेड पर हिल रही थीं। “करन… अब बर्दाश्त नहीं होता… अंदर डाल दे अपना लंड… मुझे चोद दे आज।”

मैं उठा, अपना अंडरवियर उतारा। मेरा लंड बिल्कुल खड़ा था, करीब 7.5 इंच का और मोटा।

आंटी ने देखा तो आंखें बड़ी कर लीं – “उफ्फ… कितना बड़ा है तेरा… ये तो अंदर जाके फाड़ देगा मेरी चूत को।”

मैंने उनके पैर फैलाए, लंड को उनकी चूत पर रगड़ा। गीली होने की वजह से स्लिप हो रहा था। एक धीरे से धक्का मारा। आंटी चिल्लाई – “आह… धीरे बेटा…”

मैंने धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। पूरा अंदर जाने पर आंटी ने जोर से सिसकारी भरी – “आआह… पूरा अंदर डाल दे। अब मत रुकना… जोर से पेल।”

मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उनकी चूचियां उछल रही थीं। मैंने दोनों हाथों से पकड़कर दबाया, आंटी तड़प उठीं – “हां बेटा… ऐसे ही… आंटी को चोद दे… पूरा सुख दे।”

उन्होंने अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए, धक्के और गहरे लेने लगीं। रूम में आवाजें गूंज रही थीं – थप-थप, सिसकारियां और बेड की चर्र-चर्र।

थोड़ी देर बाद आंटी ने बोला – “अब मुझे ऊपर आने दे… मैं राइड करूंगी।”

मैं नीचे लेट गया, आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं। लंड को हाथ से पकड़कर चूत में डालने लगीं और बैठ गईं।

मेरा लंड उनकी चूत के अंदर जा चुका था। फिर उछलने लगीं – ऊपर-नीचे। चूचे मेरे मुंह के सामने उछल रहे थे। मैं पकड़कर चूसने लगा, जोर से काट भी लिया।

आंटी जोर-जोर से मोन कर रही थीं – “आह… कितना मजा आ रहा है… तेरा लंड अंदर तक पहुंच रहा है… और जोर से उछलूं क्या?”

वो स्पीड बढ़ा रही थीं, चूत से पानी टपक रहा था बेड पर। मैं नीचे से धक्के दे रहा था। आखिर में आंटी चिल्लाई – “करन… मैं झड़ रही हूं… आआह!”

उनका बदन कांप गया, चूत से गरम पानी निकलने लगा। मैं भी कंट्रोल नहीं कर पाया, जोर से अंदर ही झड़ गया। पूरा माल उनके अंदर भर दिया।

आंटी मेरे ऊपर लेट गईं, सांसें तेज चल रही थीं। थोड़ी देर बाद वो उठीं, मुस्कुराके बोलीं – “बेटा आज तो बहुत मजा आ गया।”

मुझे भी काफी मजा आया। मैं और आंटी एक-दूसरे की बाहों में लिपटके लेट गए। फिर थोड़ी देर में हम दोनों उठे।

अगले दिन मैंने उनकी गांड भी मारी।

उनकी गांड काफी टाइट थी लेकिन धीरे-धीरे लंड सेट हो गया और बहुत मजा आया उनकी गांड मारने में।

अब जब भी मैं पुणे जाता हूं, मीना आंटी से जरूर मिलता हूं और उन्हें चोदता हूं।

वो भी मुझे फोन करके बुला लेती हैं जब उनका मन करता है।

यह थी मेरी कहानी।

उम्मीद है आपको पसंद आई होगी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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