गांडू लड़के को पेला

gandu ladka

नमस्ते दोस्तों, मैं आज आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं जो मुझे पिछले मानसून में हुई थी।

बारिश का मौसम वाकई में प्रेमियों का मौसम होता है, और यह मेरे लिए भी सच साबित हुआ।

ठंडक के साथ बारिश का भीगा-भीगा मौसम आपके मन में शृंगार रस को तो बढ़ाता ही है, साथ ही सुहाने और हरे-भरे मौसम के कारण मन प्रफुल्लित भी रहता है। ऐ

से में मन चाहता है कि उसे किसी का साथ मिले, जो सिर्फ उसके साथ उसकी बाहों में रहे।

शारीरिक वासना के भूखे लोग भी इस मौसम से बच नहीं पाते।

उनके मन में शृंगार रस का प्रवाह होता है और वे अपनी शारीरिक भूख को मिटाने के लिए साथी की तलाश करते हैं ताकि इस भीगे-भीगे मौसम से उत्पन्न वासना को यौन क्रिया से शांत कर सकें।

इसीलिए भीगे मौसम से उत्पन्न मेरे शरीर में बढ़ते हुए वासना के ज्वर को किसी के नग्न शरीर से शांत करने के लिए मैं भी किसी मस्त जिस्म की तलाश करने लगा।

जब मैंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट डाली, तो 15-20 लोगों ने डीएम में मैसेज किया।

पर उनमें से 3-4 वे लोग थे जो मुझसे पहले मिल चुके थे और हम काफी दोस्त हो गए थे, तो वे मेरी टांग खिंचाई करने के लिए मैसेज करने लगे।

‘आज किसे जन्नत नसीब कराओगे!’
‘आज तो चुसवाओगे, मजे लेकर!’
‘मस्त! मतलब आज तो 6 इंच का लंड खुश होगा!’

वे लोग तरह-तरह के मैसेज करके मेरी खिंचाई कर रहे थे।

बचे हुए लोगों में से सिर्फ दो लोगों से बात बनी, तो उन्हें शाम को 6 बजे बांद्रा स्टेशन के पास मिलने बुला लिया।

आदित्य 25 साल का लड़का था, निहायत ही गोरा था, पर उसका फेस-कट एवरेज था।

कबीर 29 साल का गांडू लड़का था और लुक्स में बहुत अच्छा था।

जब उसने हाथ मिलाया, तो उसका हाथ बहुत कड़क लगा … एकदम मर्दाना हाथ!

मैंने दोनों को एक-दूसरे से इंट्रोड्यूस कराया। मुझे दोनों के साथ करने में कोई परेशानी नहीं थी।

मैंने दोनों को साफ बता दिया कि मुझे लंड चुसवाना बहुत पसंद है।

कबीर के पास जगह भी थी और वह ‘थ्रीसम सेक्स’ के लिए भी तैयार था। पर आदित्य को सिर्फ ‘वन-टू-वन’ करना था।

चूंकि न तो आदित्य के पास जगह थी और न मेरे पास, इसलिए उसका साथ संभव नहीं था।

आदित्य ने कहा- ओके, मैं जगह अरेंज करता हूं, फिर अपन दोनों मिलते हैं। मैंने कहा- ठीक है।

अब उसका वहां रुकने का कोई औचित्य नहीं था तो वह चला गया। अब मैं और कबीर अकेले थे।

उसने पूछा- बताइये, क्या करना है? मैंने जवाब दिया- तुम कहो, मुझे तो कोई परेशानी नहीं है!

कबीर बोला- मेरा फ्लैट है जुहू में, यदि फ्री हो तो चलो! मैंने कहा- श्योर!

उसने सुझाव दिया- मेरी बाइक से चलते हैं, आपकी बाइक यहीं रहने दो। वापसी में मैं आपको यहीं ड्रॉप कर दूंगा। मैंने सहमति दी- ओके!

उसने बाइक स्टार्ट की, मैं पीछे बैठा और हम दोनों अपने गंतव्य की तरफ चल दिए।

उस वक्त रात के 7 बजने का समय हुआ था। रोड पर काफी ट्रैफिक था, इसलिए मैं थोड़ा पीछे को सरक कर बैठा था।

पर वह बार-बार पीछे सरक कर बैठता और मेरे लंड से अपनी गांड को टच करता।

मेरा लंड कड़क होकर मेरी जींस में तड़प रहा था।

जब भी वह अपनी गांड को ऊपर उठाकर फिर से बैठते समय मेरे लंड से घिसता हुआ बैठता, तो सीधे होकर और थोड़ा मुंह पीछे करके मुझसे पूछता- मजा आया? मैंने कहा- यार, काफी लोग हैं, ऐसा मत करो!

वह हंसकर बोला- अरे आप क्यों डर रहे हो! आपने भी हेलमेट पहना हुआ है और मैंने भी हेलमेट पहना है, किसे पता चलेगा कि कौन हैं हम? आप तो जिंदगी के मजे लो! न जाने ये टाइम फिर कब मिलेगा!

बात तो उसने बहुत सही कही थी। समय किसी के लिए नहीं रुकता और न ही दोबारा आता है।

वर्तमान ही अटल सत्य है, उसे जितना खुलकर और मजे लेकर जी सकते हो, जी लो! फिर यह समय दोबारा नहीं मिलेगा।

मैं सीट पर आगे सरक कर उससे एकदम चिपक कर बैठ गया और मैंने अपने दोनों हाथ उसकी जांघों पर रख दिए।

मैं उसकी जांघों को सहलाने लगा और उसी वक्त मैंने उसके लंड पर खुजलाते हुए उससे पूछा- अब ठीक है?

उसने उत्साह से जवाब दिया- अरे मस्त! आप तो बिल्कुल रंग में आ गए!

एक ट्रैफिक सिग्नल पर रेड लाइट के कारण हमें रुकना पड़ा।

वहां ज्यादा लोग नहीं थे, बस पास में ही एक 24 साल का लड़का बाइक पर खड़ा था … बिल्कुल हैंडसम हंक टाइप! मैं और कबीर, हम दोनों उसे ही देख रहे थे।

मैं सोच रहा था कि अगर यह रात भर के लिए मिल जाए, तो इसे कम से कम चार बार तो जरूर चोदूं! शायद कबीर को भी उससे चुदवाने की इच्छा हो।

हमने हेलमेट पहना था, इसलिए उसे समझ नहीं आ रहा था कि हम कौन हैं।

वह भी हमें देख रहा था और पहचानने की कोशिश कर रहा था कि कहीं हम उसके दोस्त या परिचित तो नहीं!

कबीर मुझसे पूरी तरह चिपक कर बैठा था। मेरे दोनों हाथ उसकी जांघ पर, उसके लंड से थोड़ी ही दूर थे। हम दोनों उस हैंडसम हंक को घूर रहे थे।

जब उस लड़के से रहा नहीं गया तो उसने हमारी तरफ देखकर अपनी भौंहें उचका कर इशारा किया मतलब क्या हुआ? क्यों घूर रहे हो? मैंने सिग्नल की तरफ देखा, अभी दस सेकंड्स बचे थे।

मैंने कबीर की जांघ पर रखे हुए हाथ से ही चुटकी बजाई, जिससे उस लड़के का ध्यान हमारे हेलमेट से हटकर मेरे हाथ पर आया।

तब मैंने अपनी तर्जनी उंगली से कबीर के लंड की तरफ इशारा किया और उसे सहला दिया!

वह लड़का समझ नहीं पाया कि यह क्या था। जैसे ही ग्रीन सिग्नल हुआ, हम आगे बढ़ गए।

कबीर हंसकर बोला- आपने तो मजे ले लिए उसके! पता नहीं क्या सोच रहा होगा! हम दोनों खिलखिला कर हंस दिए।

कबीर ने एक जगह सड़क किनारे बाइक रोकी और कहा- मैं अभी आया … कंडोम लेकर! मैंने जवाब दिया- ओके!

कबीर ने मेडिकल स्टोर से काफी पहले गाड़ी रोकी थी इसलिए उसे आने में समय लग रहा था।

मैंने अपना मोबाइल ऑन किया और देखा कि इंस्टाग्राम पर मिलने के लिए जो पोस्ट की थी, उस पर बहुत सारे कमेंट्स और मैसेज आए हुए थे।

अक्सर ऐसा होता है कि जब हमें किसी की जरूरत होती है तब कोई नहीं मिलता, पर जब जरूरत न हो, तो बहुत से लोग तैयार रहते हैं।

जब कबीर वापस आया, तो मैंने उसे बताया कि काफी लोगों ने मिलने के लिए मैसेज किए हैं।

उसने पूछा- फिर? मिलना है क्या उनसे? मैंने कहा- नहीं यार! जो मिला है वही सही है। ज्यादा के चक्कर में, जो पास है उसे नहीं खोना चाहता!

फिर हम लोग उसके फ्लैट पर आ गए।

फ्लैट तो काफी अच्छा था, पर शायद 15-20 दिन से बंद होने के कारण उसमें कुछ अजीब सी गंध आ रही थी इसलिए मैंने सारे कमरों की खिड़कियां और दरवाजे खोल दिए; सिर्फ मुख्य दरवाजा बंद रखा।

थोड़ी देर हम लिविंग रूम में ही बैठे, फिर हम बेडरूम की ओर चल दिए।

हमने लाइट बंद कर दी थी, लेकिन लिविंग रूम से छनकर आती रोशनी के कारण बेडरूम में एक नर्म और मदहोश कर देने वाला उजाला फैला हुआ था।

बेडरूम की सभी खिड़कियां और बालकनी का दरवाजा खुला था, जिससे ठंडी और मस्त हवा अन्दर आ रही थी।

कमरे में अंधेरा था, इसलिए बाहर से किसी के कुछ देख पाने की गुंजाइश नहीं थी।

मैंने धीरे से कबीर को अपने करीब खींचा और उसे अपनी बाहों की नर्म पकड़ में भर लिया।

मैं उसके होंठों को चूसने लगा। कबीर मुझसे थोड़ा लंबा था इसलिए मुझे अपने शरीर को ऊपर की ओर खींचना पड़ रहा था या अपनी एड़ियों के बल खड़ा होना पड़ रहा था।

मैं अब तक जितने भी लोगों से मिला हूँ, उनमें कबीर सबसे लंबा था।

मेरी खुद की लंबाई 5.9 फीट है, जबकि कबीर 6.1 फीट से भी ज्यादा लंबा था!

मैं लिविंग रूम से सोफे का एक कुशन उठा लाया और उस पर खड़ा हो गया।

अब सब ठीक था। हम पूरी लगन और प्यार से एक-दूसरे को चूम रहे थे और बेताबी में एक-दूसरे की जींस उतारने लगे थे।

कुछ ही पल बाद हम दोनों सिर्फ अंडरवियर और टी-शर्ट में थे। उत्तेजना के कारण हमारे लौड़ों ने अंडरवियर को उभार दिया था।

होंठों के चुंबन के साथ-साथ अब हम एक-दूसरे के अंगों को भी रगड़ रहे थे। दोनों के लंड बेताबी से फड़फड़ा रहे थे!

कबीर ने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मेरे नंगे, चिकने बदन पर हाथ फेरकर मानो मेरे अन्दर आग लगा दी थी।

मैंने भी तुरंत कबीर की टी-शर्ट उतारी और उसे अपने नंगे बदन से चिपका लिया।

‘उफ़्फ़…!’ जैसे ही दो मर्दों के नंगे बदन आपस में टकराए, दोनों के जिस्मों में हवस की आग भड़क उठी।

मैंने कबीर को कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसके होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा।

जब दो मर्दों के नंगे जिस्म इस तरह मिलते हैं, तो प्यार का धैर्य वासना की उग्रता में बदल जाता है!

मैंने जैसे ही कबीर के नंगे बदन को सहलाना शुरू किया, मेरे मुँह से निकला ‘ओह … इतना चिकना बदन!’ मैंने अपने जीवन में आज तक किसी मर्द का बदन इतना चिकना महसूस नहीं किया था।

अक्सर लोग मुझसे कहते हैं कि मेरा जिस्म बहुत चिकना है, पर कबीर का जिस्म तो मुझसे भी कहीं ज्यादा चिकना था … बिल्कुल मक्खन की तरह!

दो चिकने और नंगे जिस्मों का मिलन हो रहा था।

मुझे उसके शरीर के साथ खेलने में बहुत मज़ा आ रहा था, पर कबीर ने मुझे ज्यादा देर मौका नहीं दिया।

उसने मुझे बेड पर धकेला, मुझे लिटाया और झटके से मेरी अंडरवियर खींच कर उतार दी!

अब मैं बेड पर पूरी तरह नंगा लेटा था। कबीर तुरंत मेरे पैरों के पास आया और मेरे दोनों पैरों के बीच लेटकर मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया!

‘उफ़्फ़… आह हहह…!’ ये सुख ही परम सत्य है! मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सुख अपना लंड चुसवाना है।

ऐसा लगता है कि यह सब घंटों तक, महीनों तक करवाता रहूँ।

लंड चूसे जाने से मैं एक अलग ही दुनिया में चला गया था, इस भौतिक दुनिया से कहीं बहुत दूर।

कबीर अपने गीले मुँह से मेरे लंड को किसी रसीली कुल्फी की तरह चूस रहा था। उसके मुँह का गर्म स्पर्श पाकर मेरा नंगा तन थरथरा गया था।

वह पूरे इत्मीनान से अपनी जीभ चारों तरफ घुमा-घुमा कर चूस रहा था और मैं मदहोशी के सागर में गोते खा रहा था।

वह पूरे लंड पर नीचे से ऊपर तक जीभ फेरता और फिर उसे मुँह में लेकर जोर से चूसने लगता।

लगभग 20-25 मिनट तक इसी तरह चूसकर लंड को एकदम ‘टनटनाट’ करने के बाद कबीर उठा।

उसने अपनी पैंट की जेब से शहद की बोतल निकाली और मेरे लंड पर शहद लगाकर फिर से चूसने लगा।

ओह .. यह तो एक अलग ही सुख था! शहद का रस पीने के लिए वह और भी जोर से चुस्कियां ले रहा था।

मैंने अपने होंठों पर थोड़ा शहद लगाया और अपना मुँह कबीर के आगे कर दिया। कबीर ने मेरे दोनों होंठों को चूस-चूस कर एकदम लाल कर दिया और सारा शहद चाट लिया।

फिर मैंने अपनी जीभ की नोक पर शहद रखा और अपनी जीभ उसके मुँह के आगे कर दी।

कबीर ने मेरी जीभ को अपने मुँह में खींच लिया और उसे गहराई से चूसने लगा। मैं अपने जिस्म में रोंगटे खड़े कर देने वाले चुम्बनों का अनुभव कर रहा था।

फिर मैंने भी शहद लेकर कबीर के होंठों पर लगाया और उन्हें चूसने लगा।

किसी मर्द के होंठ मुझे आज तक इतने रसीले कभी नहीं लगे थे! कबीर फिर से मेरी लंड चुसाई में लग गया और 15 मिनट की उस मेहनत ने मेरे लंड को पत्थर जैसा कठोर बना दिया था।

अब कबीर से कंट्रोल नहीं हो रहा था और मेरा लंड भी अपने पूरे शवाब पर था। कबीर ने कंडोम निकालकर मेरे लंड पर चढ़ाया और अपनी अंडरवियर उतारकर पूरी तरह नंगा हो गया।

हे मेरे मालिक … उफ़्फ़! कबीर का लंड मेरे लंड से डेढ़ गुना मोटा था। मैंने अपने जीवन में पहली बार इतना मोटा लंड अपनी आंखों से ‘लाइव’ देखा था!

कबीर का जिस्म मुझसे ज्यादा चिकना और लंबा था। उसका शरीर एकदम कड़क था, जबकि मेरा थोड़ा सॉफ्ट।

हर चीज़ में वह मुझसे बढ़कर था। मुझे उससे जलन तो नहीं हो रही थी पर मेरा आत्मविश्वास डगमगाने लगा और मन में हीन भावना आने लगी।

अभी तक मैं जिन लोगों से भी मिला था, वे मेरी तारीफ ही करते थे। ‘क्या चिकना बदन है यार!’ ‘तुम्हारी हाइट कितनी अच्छी है!’ ‘क्या मोटा लंड है, मजा आ गया!’

सच तो यह है कि मेरा लंड बहुत ज्यादा मोटा नहीं है, बस नॉर्मल से थोड़ा सा ज्यादा है।

शायद अब तक मैं जिनसे मिला, उनके अंग मुझसे पतले थे, इसलिए उन्हें मेरा लंड मोटा लगता था।

तारीफ सबको अच्छी लगती है, पर इन तारीफों ने कब अहंकार का रूप ले लिया, मुझे पता ही नहीं चला।

पर आज कबीर को देखकर वह अहंकार चूर-चूर हो चुका था।

मेरे मन में खलबली मची थी … मेरा बदन इतना कड़क और लंड इतना मोटा क्यों नहीं है? मैं हीन भावना के दलदल में धंसता जा रहा था।

तभी कबीर मेरे लंड पर बैठ गया और उचक-उचक कर चुदवाने लगा।

कबीर को चोदने से मिलने वाले जिस्मानी सुख की मदहोशी ऐसी छाई कि मैं उस दलदल से निकलकर सीधे वासना के आसमान पर पहुँच गया।

उसे चोदते हुए मुझे यह ज्ञान मिला कि जो मेरे पास है, वह भी अद्भुत है।

उसी के दम पर मैं कबीर को जन्नत की सैर करा रहा था। लगभग ढाई घंटे के उस ‘चुदाई कार्यक्रम’ में कबीर का अंग-अंग पस्त हो गया।

अंत में, हम दोनों एक-दूसरे के नंगे जिस्म की आगोश में समाकर उस बिस्तर के गलियारों में कहीं खो गए। वह अनुभव वाकई अविस्मरणीय था।

आपको मेरी इस गांडू लड़का गे सेक्स कहानी पर क्या कहना है, प्लीज जरूर बताएं।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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