sexy chachi chudai kahani
मेरा नाम कबीर है और मेरी उम्र 21 साल है। मैं वेस्ट बंगाल के एक मध्यम आकार के शहर का रहने वाला हूँ और अभी बी.कॉम के तीसरे साल में पढ़ रहा हूँ।
मेरे पिता एक सरकारी नौकरी करते हैं और मेरी माँ गृहिणी है। हम एक संयुक्त परिवार में रहते हैं जिसमें मेरे चाचा-चाची भी हमारे साथ ही रहते हैं।
मेरी चाची ज़ुबैदा की उम्र 38 साल है। वह थोड़ी सांवली हैं लेकिन उनकी देहयष्टि बहुत ज़बरदस्त है।
उनका फिगर साइज़ 36-30-38 का है जो किसी भी मर्द को दीवाना बना दे।
उनके चूची इतने मोटे और रसीले हैं कि बस देखते ही रह जाओ।
उनकी गांड भी बहुत मोटी है और जब वह चलती हैं तो उनकी गांड ऐसे हिलती है जैसे दो बड़े-बड़े तरबूज नीचे लटक रहे हों।
मेरे चाचा जावेद एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं और उन्हें अक्सर बाहर शहरों में टूर पर जाना पड़ता है।
कभी-कभी तो वह महीनों घर नहीं आते। इस वजह से चाची अक्सर अकेली रहती हैं और घर के कामों के लिए किसी न किसी की मदद लेनी पड़ती है।
मेरे और चाची के बीच अच्छे रिश्ते हैं। मैं उन्हें हमेशा सम्मान देता हूँ और वह भी मुझे अपने बेटे जैसा समझती हैं।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरे मन में उनके लिए कुछ अलग ही भावना जाग रही है।
शायद यह मेरी जवानी का असर है कि मैं अपनी चाची को भी एक औरत की नज़र से देखने लगा हूँ।
मेरा लंड करीब 8 इंच लंबा और काफी मोटा है। जब भी मैं चाची को देखता हूँ तो मेरा लंड अपने आप खड़ा हो जाता है और मुझे उनके साथ सोने का मन करता है।
मैं और मेरा चाचा का बेटा फैज़ान अक्सर साथ में ही रहते हैं। वह मुझसे 2 साल छोटा है और अभी 12वीं क्लास में पढ़ता है।
हम दोनों साथ में ही कॉलेज जाते हैं और वापस भी साथ में आते हैं।
लेकिन फैज़ान का एक दोस्त है जिसके साथ वह अक्सर घूमने चला जाता है और मुझे अकेला छोड़ देता है।
चाची ज़ुबैदा के दो बच्चे हैं – बड़ी बेटी सना जो 20 साल की है और छोटा बेटा फैज़ान जो 19 साल का है।
सना की शादी हो चुकी है और वह ससुराल में रहती है। इसलिए घर में चाची, चाचा और फैज़ान ही रहते हैं।
जब चाचा बाहर जाते हैं तो चाची और फैज़ान अकेले रह जाते हैं।
मैं अक्सर चाची के घर जाता रहता हूँ। कभी उनके मोबाइल का कोई काम हो तो कभी कंप्यूटर में कुछ समस्या हो।
चाची मुझे बहुत प्यार से “कबीर बेटा” कहकर बुलाती हैं और मैं भी उनकी मदद करके खुश होता हूँ।
एक दिन की बात है, मैं चाची के घर गया तो वह झाड़ू लगा रही थीं।
उन्होंने सलवार-कमीज पहनी हुई थी और दुपट्टा नहीं ओढ़ा हुआ था।
जब वह झुककर झाड़ू लगा रही थीं तो उनकी कमीज का गला खुला था और मुझे उनके मोटे-मोटे चूची साफ दिख रहे थे।
वह इतने बड़े थे कि बस मुझे पागल कर रहे थे।
मैं वहीं खड़ा होकर उन्हें देखता रहा। मेरा लंड पैंट में खड़ा हो गया था। चाची ने मुझे देखा और मुस्कुराईं।
“कबीर बेटा, क्या देख रहे हो?” चाची ने पूछा।
“कुछ नहीं चाची, आपने बुलाया था?” मैंने कहा।
“हाँ बेटा, मुझे मार्केट जाना है, थोड़ा सामान लाना है। क्या तुम मुझे अपनी बाइक पर ले जाओगे?” चाची ने पूछा।
“जी जरूर चाची,” मैंने कहा।
मैंने अपनी बाइक निकाली और चाची को बैठने के लिए कहा।
चाची मेरी बाइक पर बैठीं और मुझसे इतनी चिपक कर बैठीं कि उनके मोटे चूची मेरी पीठ से दब रहे थे। मेरा लंड तो पैंट फाड़ने को हो रहा था।
हम मार्केट गए। चाची ने सामान खरीदा और फिर हम वापस आने लगे।
रास्ते में एक स्पीड ब्रेकर आया और मैंने ब्रेक लगाई। चाची आगे की ओर झुक गईं और उनके चूची मेरी पीठ पर और ज़ोर से दबे। मुझे बहुत मजा आया।
“सॉरी चाची,” मैंने कहा।
“कोई बात नहीं बेटा,” चाची ने कहा।
उस दिन के बाद मैं रोज़ चाची के घर जाने लगा। कभी उनके लिए दूध लेकर आता, कभी सब्जी, तो कभी कोई और काम।
चाची भी मुझे अपने कामों में लगा लेतीं और मैं भी खुशी-खुशी करता।
एक दिन चाची ने मुझे बुलाया कि उनके कमरे का पंखा खराब हो गया है।
मैं गया और पंखा ठीक किया। उस दिन चाची ने एक हल्की सी साड़ी पहनी हुई थी जो बहुत पारदर्शी थी।
उनका पेटीकोट भी हल्का था और मुझे उनकी जांघें साफ दिख रही थीं।
जब मैं पंखा ठीक कर रहा था तो चाची पास में खड़ी होकर देख रही थीं।
उनके चूची मुझे इतने करीब से दिख रहे थे कि मैं तो बस उन्हें ही देख रहा था। चाची ने शायद यह नोट कर लिया था।
एक दिन चाची को अचानक अपने मायके जाना पड़ा। उनकी माँ की तबीयत खराब हो गई थी।
चाची अपने छोटे बेटे फैज़ान को लेकर चली गईं। घर में सिर्फ उनकी बेटी सना रह गई जो कुछ दिनों के लिए ससुराल से आई हुई थी।
3-4 दिन बाद चाची का मुझे फोन आया।
“कबीर बेटा, मैं कल शाम को आ रही हूँ। सना अकेली है घर में, उसे डर लग रहा है। क्या तुम आज रात हमारे घर सो जाओगे?” चाची ने पूछा।
“जी जरूर चाची, मैं आ जाऊँगा,” मैंने कहा।
मैंने अपनी माँ से कहा और वह भी राजी हो गईं। शाम को मैं चाची के घर चला गया। सना मुझे देखकर खुश हो गई।
“कबीर भैया, आप आ गए, अब मुझे डर नहीं लगेगा,” सना ने कहा।
“कोई बात नहीं सना, तुम चिंता मत करो,” मैंने कहा।
रात को हमने खाना खाया और फिर अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। सना एक कमरे में सोई और मैं दूसरे कमरे में जो चाचा-चाची का था।
मैं तो सोच ही रहा था कि चाची का कमरा, चाची की बिस्तर, चाची की खुशबू… सब कुछ चाची का।
मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने अपना मोबाइल निकाला और पॉर्न वीडियो देखने लगा।
एक वीडियो में एक लड़का अपनी चाची को चोद रहा था। यह देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने सोचा काश मैं भी अपनी चाची को चोद पाता।
मैंने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 2 बज रहे थे। मुझे पेशाब आई तो मैं बाथरूम की ओर गया।
वापस आते समय मैंने देखा कि सना का कमरा थोड़ा खुला था। मैंने झाँका तो वह गहरी नींद में सो रही थी।
मेरे मन में एक शैतानी ख्याल आया। मैंने सोचा क्यों ना सना के साथ थोड़ा मजा किया जाए। वह तो मेरी बहन जैसी है लेकिन मेरा लंड तो किसी का भी मोहताज नहीं है।
मैं धीरे से उसके कमरे में घुसा। उसने एक हल्की सी नाइटी पहनी हुई थी।
मैंने अपना मोबाइल निकाला और वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन कर दी।
फिर मैंने उसकी नाइटी थोड़ी ऊपर की और उसकी चूत देखी। वह बिल्कुल साफ शेव थी और थोड़ी ब्लैक थी।
मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया। वह गर्म थी। मैंने धीरे से उसकी चूत को सहलाना शुरू किया।
सना हिली लेकिन नींद में ही थी। मैंने अपना लंड निकाला और मुठ मारने लगा।
कुछ देर बाद मैं झड़ गया और अपना माल एक टिश्यू में निकाल कर वापस अपने कमरे में आ गया।
अगले दिन शाम को चाची आ गईं। वह थोड़ी थकी हुई लग रही थीं। मैंने उनका बैग उठाया और अंदर रख दिया।
“धन्यवाद कबीर बेटा, तुमने सना का खयाल रखा,” चाची ने कहा।
“कोई बात नहीं चाची,” मैंने कहा।
शाम को चाची ने मुझे बुलाया।
“कबीर बेटा, तुम्हारा फोन मुझे दो, मुझे एक नंबर चाहिए था,” चाची ने कहा।
मैंने बिना सोचे अपना फोन दे दिया। चाची ने फोन लिया और उसमें देखने लगीं। अचानक उनका चेहरा बदल गया।
“यह क्या है कबीर?” चाची ने गुस्से में पूछा।
मैंने देखा तो वह सना की वीडियो देख रही थीं जिसमें मैं उसकी चूत पर हाथ फेर रहा था।
“चाची, वो… मैं…” मैं कुछ बोल नहीं पाया।
“तुमने मेरी बेटी के साथ यह सब किया? तुम्हें शर्म नहीं आती? वह तुम्हारी बहन जैसी है!” चाची चिल्लाईं।
मैं सिर झुकाकर खड़ा रहा। चाची बहुत गुस्से में थीं।
“मैं तुम्हारी माँ को बताऊँगी! तुम्हारे पापा को बताऊँगी!” चाची ने धमकी दी।
मैं डर गया। अगर मम्मी-पापा को पता चल गया तो मेरी खैर नहीं।
“चाची प्लीज़, माफ़ कर दीजिए। मुझसे गलती हो गई,” मैंने गिड़गिड़ाकर कहा।
“नहीं, यह गलती नहीं जुर्म है!” चाची ने कहा।
फिर अचानक चाची ने वीडियो डिलीट कर दिया।
“मैं इसे डिलीट कर रही हूँ लेकिन अगर तुमने फिर से ऐसा किया तो…” चाची ने कहा।
मैंने सोचा कि चाची ने वीडियो डिलीट कर दिया लेकिन मुझे पता था कि मैंने एक कॉपी क्लाउड में सेव कर रखी है।
अगले दिन मैंने चाची को वह वीडियो दिखाया।
“चाची, अगर आपने किसी को बताया तो मैं यह वीडियो यूट्यूब पर डाल दूँगा,” मैंने कहा।
चाची के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
“प्लीज़ कबीर, ऐसा मत करना। हमारी इज़्ज़त चली जाएगी,” चाची ने रोते हुए कहा।
“तो फिर आप मेरी बात मानो,” मैंने कहा।
“क्या चाहते हो तुम?” चाची ने पूछा।
“मुझे आपकी चूत चाहिए,” मैंने सीधे कह दिया।
चाची हैरान रह गईं। “यह क्या बकवास कर रहे हो? मैं तुम्हारी चाची हूँ!”
“तो क्या हुआ? आपकी बेटी को भी तो मैंने हाथ लगाया था,” मैंने कहा।
चाची रोने लगीं। फिर कुछ देर सोचने के बाद बोलीं, “ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए।”
मैं खुश हो गया। मेरा सपना पूरा होने वाला था।
शाम को जब घर में कोई नहीं था तो मैं चाची के घर गया। चाची ने एक सेक्सी साड़ी पहनी हुई थी।
“आ गए तुम?” चाची ने पूछा।
“हाँ चाची,” मैंने कहा।
मैंने गेट बंद किया और चाची के पास गया। उनका हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया।
“चाची, आप बहुत सुंदर हैं,” मैंने कहा।
“बेटा, यह गलत है,” चाची ने कहा।
“कुछ गलत नहीं है,” मैंने कहा और उनके होंठों पर किस कर दिया।
चाची ने पहले तो विरोध किया लेकिन फिर मान गईं। हम दोनों किस करने लगे। मैं एक हाथ से उनकी गांड दबा रहा था और दूसरे हाथ से चूची।
“ओह कबीर, धीरे,” चाची ने कहा।
मैंने उनकी साड़ी खोलनी शुरू की। वह अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं। मैंने उनका ब्लाउज खोला और चूची बाहर निकाल लिए।
“क्या मस्त दूध हैं आपके चाची,” मैंने कहा।
मैंने एक चूची मुँह में ले ली और चूसने लगा। चाची की साँसें तेज़ हो गईं।
“ओह हाँ, और चूसो,” चाची ने कहा।
मैं दूसरी चूची भी चूसने लगा। उनके निप्पल कड़क हो गए थे।
फिर मैंने उनका पेटीकोट उतारा। उन्होंने लाल रंग की पैंटी पहनी थी। मैंने वह भी उतार दी। उनकी चूत दिख गई। वह थोड़ी बालों वाली थी और काले रंग की।
मुझे काला बुर पसंद है.
“क्या सुंदर बुर है आपकी चाची,” मैंने कहा।
मैंने उनकी चूत पर मुँह लगाया और चाटने लगा।
“ओह बेटा, यह क्या कर रहे हो?” चाची ने कहा।
“आपकी चूत चाट रहा हूँ चाची,” मैंने कहा।
मैंने अपनी जीभ उनकी चूत में डाली। वह बहुत गीली थी।
“ओह हाँ, और अंदर करो,” चाची ने कहा।
मैंने उनकी चूत को अच्छे से चाटा। कुछ देर में वह झड़ गईं।
अब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड खड़ा था। चाची ने उसे देखा और कहा, “बहुत बड़ा लंड है तुम्हारा।”
“क्या आप ले पाएँगी?” मैंने पूछा।
“कोशिश करती हूँ,” चाची ने कहा।
मैंने चाची को बिस्तर पर लेटाया और उनकी टाँगें फैलाईं। अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का लगाया।
लंड का टोपा अंदर चला गया। चाची की साँसें फूल गईं।
“ओह, बहुत मोटा है,” चाची ने कहा।
मैंने थोड़ा और धक्का लगाया और आधा लंड अंदर चला गया।
“थोड़ा रुको बेटा,” चाची ने कहा।
मैंने रुककर उनके चूची दबाए। फिर एक जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह!” चाची चीखीं।
मैंने रुककर उनके होंठों पर किस किया। फिर अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया।
“फच्… फच्… फच्…” की आवाज़ गूँज रही थी।
“ओह कबीर, बहुत मजा आ रहा है,” चाची चिल्लाईं, “और जोर से चोदो।”
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए। चाची की टाँगें हवा में थीं और मैं उनके बीच में था।
“आपकी चूत बहुत टाइट है चाची,” मैंने कहा।
“और तुम्हारा लंड बहुत मोटा है,” चाची ने कहा।
मैंने लगभग 20 मिनट तक चाची को चोदा। वह 3 बार झड़ चुकी थीं। अब मैं झड़ने वाला था।
“मैं झड़ने वाला हूँ चाची,” मैंने कहा।
“अंदर ही निकालो बेटा,” चाची ने कहा।
मैंने जोर से धक्के लगाए और अपना सारा वीर्य चाची की चूत में छोड़ दिया। वह गरम-गरम माल उनकी चूत में भर गया। मैं थककर उनके ऊपर गिर पड़ा।
इसके बाद मैं रोज़ चाची को चोदने लगा। जब भी चाचा बाहर जाते तो मैं चाची के घर चला जाता। हम दोनों खूब मजा करते।
एक दिन मैंने चाची को घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी चूत में लंड डाला।
“ओह, पीछे से बहुत मजा आता है,” चाची ने कहा।
मैंने उनकी गांड भी मारी। वह पहले तो चीखी लेकिन फिर मजा लेने लगीं।
“ओह कबीर, तुम तो बहुत कमीने हो,” चाची ने कहा।
“हाँ चाची, आपकी चूत और गांड दोनों मारूँगा,” मैंने कहा।
एक दिन चाची ने कहा, “कबीर, मैं चाहती हूँ कि तुम सना को भी चोदो।”
मैं हैरान हो गया। “क्या?”
“हाँ, वह भी तो मेरी बेटी है। उसे भी मजा चाहिए,” चाची ने कहा।
मैं खुश हो गया। अगले दिन जब सना आई तो चाची ने हम दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया।
मैंने सना को चोदा और चाची बाहर से देख रही थीं।
“माँ, बहुत मजा आ रहा है,” सना ने कहा।
“हाँ बेटा, मजा लो,” चाची ने कहा।
फिर तो हम तीनों रोज़ मजा करने लगे। मैं चाची और सना दोनों को एक साथ चोदता। कभी चाची की चूत तो कभी सना की।
एक दिन मैंने चाची को लेटाया और उनकी चूत में लंड डाला। सना उनके चूची चूस रही थी।
“ओह, यह तो बहुत मजेदार है,” चाची चिल्लाईं।
फिर मैंने सना को घोड़ी बनाया और चाची उसकी चूत चाट रही थीं।
“माँ, और चाटो,” सना ने कहा।
मैंने दोनों को बारी-बारी से चोदा।
एक दिन चाची ने मुझे बताया, “कबीर, तुम्हें पता है, तुम्हारे चाचा मुझे ठीक से चोद नहीं पाते। इसलिए मैं तुमसे चुदवाती हूँ।”
मैंने कहा, “चाची, मैं हमेशा आपको खुश रखूँगा।”
“हाँ बेटा, तुम्हारा लंड बहुत मस्त है,” चाची ने कहा।
मैंने चाची को हर पोजीशन में चोदा।
चाची हर पोजीशन में मजा लेतीं।
“ओह कबीर, तुम बहुत अच्छा चोदते हो,” चाची ने कहा।
“आपकी चूत भी बहुत मस्त है चाची,” मैंने कहा।
एक दिन चाचा अचानक आ गए और हमें पकड़ लिया। वह बहुत गुस्से में थे।
“यह क्या हो रहा है?” चाचा ने चिल्लाया।
चाची डर गईं। लेकिन मैंने कहा, “चाचा, आप चाची को खुश नहीं कर पाते, इसलिए मैं करता हूँ।”
चाचा ने सोचा और फिर कहा, “ठीक है, लेकिन मुझे भी कभी-कभी देखने दो।”
मैंने कहा, “ठीक है चाचा।”
अब तो हम चारों मजा करने लगे। मैं चाची और सना दोनों को चोदता और चाचा देखता।
आज भी मैं चाची को रोज़ चोदता हूँ। उनकी चूत अब मेरे लंड की आदी हो गई है।
चाची कहती हैं, “कबीर, तुमने मेरी चूत का इलाज कर दिया।”
मैं कहता हूँ, “चाची, यह तो मेरा फर्ज़ था।”
हम दोनों हँसते हैं और फिर चुदाई शुरू कर देते हैं।
- 4 औरतें अकेले फिर एक साथ चोदवाई
- दादा ने पोती को ग्रुप चुदाई का मजा दिया
- विधवा भाभी का देवर ने चोदकर इलाज़ किया
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice