old lady chudai kahani
मेरा नाम राहुल शर्मा है। मैं इंदौर के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ।
मेरी उम्र चौबीस साल है और मैं शारीरिक रूप से पूरी तरह से विकसित युवक हूँ।
मेरा लंड करीब साढ़े आठ इंच लंबा और काफी मोटा है, जिसपर मैं बहुत गर्व करता हूँ।
मेरे परिवार में मेरे माता-पिता, मेरी एक छोटी बहन और मेरी दादी साविता देवी हैं।
मेरे दादाजी का दस साल पहले देहांत हो गया था। उसके बाद से दादी अकेले हमारे पैतृक गाँव में रहती हैं।
हमारा गाँव मध्य प्रदेश के एक शांत जिले में स्थित है, जहाँ हरियाली हर ओर फैली हुई है और वातावरण पूरी तरह से प्रदूषण से दूर है।
मेरी दादी साविता देवी की उम्र साठ साल की है, लेकिन वह उम्र से काफी कम दिखती हैं।
वह हमेशा अपने आपको संभालकर रखती हैं। उनका बदन अभी भी भरा-पूरा और आकर्षक है।
उनकी त्वचा गेहुँआनी है और उनके बालों में अभी भी कालेपन की झलक है। उनकी आँखें बड़ी-बड़ी और कजरारे हैं, जिनमें एक अजीब सी चमक है।
मेरे पिता एक सरकारी अधिकारी हैं और उनका तबादला अक्सर अलग-अलग शहरों में होता रहता है।
मेरी माँ एक गृहिणी हैं और वह अपने सास की बहुत इज्जत करती हैं।
इस साल जुलाई में, जब मेरी गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हुईं, तो मेरी माँ ने मुझे गाँव भेजने का फैसला किया।
“राहुल, तुम्हारी दादी ने कल फोन किया था,” माँ ने कहा, “उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तुम जाकर उनका हालचाल ले आओ। दस-पंद्रह दिन रुककर आना।”
मैंने कहा, “ठीक है माँ, मैं कल ही निकल जाता हूँ।”
मैंने अपने दोस्त अमित को फोन किया और उससे उसकी मोटरसाइकिल ले ली।
अगले दिन सुबह छह बजे मैं इंदौर से अपने गाँव की ओर निकल पड़ा।
रास्ते में मैंने कई खूबसूरत नजारे देखे। हरियाली, पहाड़ियाँ और ताज़ी हवा मुझे बहुत अच्छी लग रही थी।
दोपहर करीब ढाई बजे मैं गाँव पहुँचा। हमारा घर गाँव के बीच में था, एक पुरानी हवेली जैसा।
मैंने मोटरसाइकिल बाहर खड़ी की और दरवाज़ा खटखटाया। कुछ देर बाद दादी ने दरवाज़ा खोला।
मैं उन्हें देखकर हैरान रह गया। उन्होंने हल्की नारंगी रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गेहुँआने बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी।
उनका ब्लाउज थोड़ा टाइट था और उनके मोटे-मोटे स्तन बाहर को निकले हुए थे।
उनकी कमर अभी भी इतनी पतली थी कि कोई भी उन्हें देखकर उनका दीवाना बन जाए।
“आ गए मेरे लाल,” दादी ने मुझे गले लगाते हुए कहा।
उनके स्तन मेरी छाती से दबे और मुझे एक अजीब सी सिहरन महसूस हुई।
मैंने खुद को संभाला और कहा, “जी दादी, आप कैसी हैं?”
“बस ठीक हूँ बेटा, अंदर आओ,” दादी ने कहा।
मैं अंदर गया। घर बिल्कुल साफ-सुथरा था।
दादी ने मेरे लिए नाश्ता तैयार किया था।
मैंने नहाया और ताज़े कपड़े पहने। फिर हम दोनों बैठकर बातें करने लगे।
दादी ने बताया कि उन्हें अक्सर सीने में दर्द रहता है और रात को नींद नहीं आती।
मैंने कहा, “दादी, आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”
“बेटा, उम्र हो गई है, अब यही सब चलेगा,” दादी ने मुस्कुराते हुए कहा।
शाम को हमने साथ में खाना खाया। दादी ने मेरी पसंद की सब्ज़ियाँ बनाई थीं।
खाना बहुत स्वादिष्ट था। रात को दादी ने मेरे लिए छत पर बिस्तर लगवाया क्योंकि नीचे के कमरे में गर्मी बहुत थी।
रात करीब ग्यारह बजे थे। मैं छत पर लेटा हुआ था और तारों को देख रहा था।
गाँव की रातें बहुत खूबसूरत होती हैं। पूरा आसमान तारों से जगमगा रहा था। हल्की-हल्की हवा चल रही थी।
मुझे प्यास लगी तो मैं नीचे पानी पीने गया।
जब मैं वापस आ रहा था, तो मेरी नजर दादी के कमरे पर पड़ी।
उनके कमरे की खिड़की से रोशनी आ रही थी और पर्दा हल्का सा हिल रहा था।
मेरी जिज्ञासा जागी। मैं धीरे से उस खिड़की के पास गया और अंदर झाँका।
मेरी साँसें थम गईं। दादी अपने कपड़े बदल रही थीं।
उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी थी और सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थीं।
वह आईने के सामने खड़ी होकर अपने बालों में कंघी कर रही थीं।
उनकी पीठ मेरी तरफ थी। फिर उन्होंने अपना ब्लाउज भी खोल दिया।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। दादी ने अपनी ब्रा खोली और उनके मोटे-मोटे स्तन आज़ाद हो गए।
वह स्तन क्या थे! गोल, भारी, गुलाबी अंगारों वाले।
उनके निप्पल बड़े-बड़े और हल्के भूरे रंग के थे।
दादी ने अपने हाथों से अपने स्तनों को सहलाया और फिर नीचे झुककर अपना पेटीकोट खोलने लगीं।
जैसे ही पेटीकोट नीचे गिरा, मैं देखता ही रह गया। दादी ने अंदर कुछ भी नहीं पहना था।
उनकी बुर पूरी तरह से दिख रही थी। उनके बुर के बाल सफेद थे लेकिन झड़े हुए थे।
उनकी चूत की फाँकें गुलाबी और मोटी थीं। उनकी जांघें गोरी और मोटी थीं, जिनपर कोई झुर्री नहीं थी।
दादी खड़ी होकर अपने बदन को देख रही थीं।
उन्होंने अपने हाथ से अपनी बुर पर हाथ फेरा और फिर एक हल्की सी मुस्कान दी।
मुझे लगा जैसे मेरा लंड पत्थर बन गया हो। वह खड़ा हो गया था और मेरी शॉर्ट्स में तंत्र-मंत्र कर रहा था।
मैं वहीं खड़ा होकर देखता रहा। दादी ने एक रात का सूट निकाला और पहनने लगीं।
मैं धीरे से वापस छत पर आ गया। मेरा दिमाग दादी के उस नंगे बदन को देखकर भावुक हो रहा था।
मैंने कभी सोचा नहीं था कि दादी इतनी सुंदर होंगी।
मैंने सोचा कि यह गलत है, लेकिन मेरा शरीर मानने को तैयार नहीं था।
मेरा लंड बार-बार खड़ा हो जा रहा था। मैंने अपनी शॉर्ट्स उतारी और अपने लंड को सहलाना शुरू किया।
मैंने कल्पना की कि मैं दादी को चोद रहा हूँ। कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया।
मैंने शॉर्ट्स पहनी और सोने की कोशिश की।
लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मेरे कानों में दादी की वो मुस्कान गूँज रही थी।
अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो दादी पहले से ही जाग चुकी थीं।
उन्होंने नहा लिया था और पूजा कर रही थीं। मैंने उन्हें प्रणाम किया।
उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेरा और आशीर्वाद दिया।
“बेटा, आज मैं तुम्हारे लिए खीर बनाऊँगी,” दादी ने कहा।
“वाह दादी, मुझे तो बहुत पसंद है,” मैंने खुशी से कहा।
दिन भर हम दोनों साथ में रहे। दादी ने मुझे गाँव में घुमाया।
हम खेतों में गए, तालाब के पास बैठे। दोपहर को जब बहुत गर्मी हुई तो हम घर वापस आ गए।
शाम को दादी ने नहाने के लिए पानी गरम किया।
मैंने नहाया और सिर्फ लुंगी पहनकर बाहर आ गया।
मेरी छाती और बाहें खुली हुई थीं।
दादी ने मुझे देखा और कहा, “वाह बेटा, कितना बड़ा हो गया है तू। तेरे दादाजी जैसा दिखता है।”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “दादी, आप भी तो बहुत फिट हैं।”
दादी ने शरमा कर कहा, “अब क्या जवानी बची है।”
“नहीं दादी, सच कह रहा हूँ,” मैंने कहा, “आप बहुत सुंदर हैं।”
दादी ने मुझे एक अजीब सी नजर से देखा। उनकी आँखों में एक चमक थी। वह मुस्कुराईं और किचन में चली गईं।
रात को खाना खाने के बाद हम छत पर बैठे।
दादी ने एक पुरानी साड़ी ओढ़ी हुई थी। हवा चल रही थी और उनकी साड़ी हल्की-हल्की उड़ रही थी।
उनके पैर दिख रहे थे जो गोरे और सुंदर थे।
“राहुल, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?” दादी ने अचानक पूछा।
मैं थोड़ा शर्माया और कहा, “नहीं दादी, अभी तो पढ़ाई पूरी करनी है।”
“पढ़ाई तो पूरी हो जाएगी,” दादी ने कहा, “लेकिन शरीर की ज़रूरतें भी तो ज़रूरी हैं।”
मैं समझ नहीं पाया कि क्या कहूँ।
दादी ने आगे कहा, “मैं जानती हूँ तुम्हारी उम्र क्या है। इस उम्र में लड़कों को… तुम समझ रहे हो ना?”
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
दादी ने मेरा हाथ पकड़ा और कहा, “अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे बताना। मैं तुम्हारी दादी हूँ, कुछ भी छिपाने की ज़रूरत नहीं।”
उनका हाथ मेरे हाथ पर था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
मैंने हिम्मत करके कहा, “दादी, मैंने कभी… मतलब किसी लड़की के साथ…”
दादी समझ गईं। उन्होंने मेरे हाथ को सहलाया और कहा, “कोई बात नहीं बेटा, सब सीखना पड़ता है।”
हम दोनों कुछ देर चुपचाप बैठे रहे। फिर दादी ने कहा, “चलो, सोने चलते हैं। कल सुबह जल्दी उठना है।”
उस रात छत पर बहुत गर्मी थी। मैं लेटा हुआ था और पंखे की हवा महसूस कर रहा था।
दादी मेरे बगल में एक चारपाई पर लेटी थीं। उन्होंने अपनी साड़ी उतार दी थी और सिर्फ एक पतला सा नाइटी पहना था।
“राहुल, गर्मी लग रही है?” दादी ने पूछा।
“हाँ दादी, बहुत,” मैंने कहा।
“तो अपनी टी-शर्ट उतार दो,” दादी ने कहा, “यहाँ कोई नहीं देखेगा।”
मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी। मेरी छाती खुली हुई थी।
दादी ने मेरी छाती को देखा और कहा, “कितना मजबूत बदन बना लिया है तूने।”
मैंने कहा, “जिम जाता हूँ दादी, इसलिए।”
दादी उठीं और मेरे पास आईं। उन्होंने अपना हाथ मेरी छाती पर रखा और कहा, “बहुत सख्त है।”
मेरा दिल जोर से धड़का। दादी का हाथ मेरी छाती पर था और वह उसे सहला रही थीं।
मैंने उनकी तरफ देखा। उनकी नाइटी के नीचे से उनके मोटे स्तन झलक रहे थे।
“दादी…” मैंने धीरे से कहा।
“क्या हुआ बेटा?” दादी ने पूछा।
“कुछ नहीं,” मैंने कहा।
दादी मुस्कुराईं और अपनी चारपाई पर वापस लेट गईं।
कुछ देर बाद मुझे लगा कि दादी सो गई हैं। मैंने धीरे से उनकी तरफ देखा।
उनकी नाइटी उनके घुटनों तक उठी हुई थी और उनकी सफेद जांघें दिख रही थीं।
मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उनकी जांघ पर रख दिया।
वह गरम थी और नरम। दादी हिलीं लेकिन उठी नहीं।
मैंने अपना हाथ धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ाया।
तभी दादी की आँख खुल गई। मैं डर गया और अपना हाथ हटाने लगा। लेकिन दादी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“क्या कर रहा है बेटा?” दादी ने पूछा, लेकिन उनकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था।
“दादी, मैं… मैं…” मैं कुछ बोल नहीं पाया।
दादी ने मेरा हाथ अपनी जांघ पर ही रखा और कहा, “प्यास लगी है तुझे?”
मैंने हाँ में सिर हिलाया।
दादी उठकर बैठ गईं और मुझे देखते हुए बोलीं, “मैं जानती हूँ तेरे मन में क्या चल रहा है। कल रात तू मुझे देख रहा था ना खिड़की से?”
मैं शर्मिंदा हो गया।
मैंने कहा, “हाँ दादी, माफ़ कर दीजिए।”
दादी ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं। मैंने भी तो तुझे देख लिया था। तू जब नहा रहा था तब मैं भी झाँक रही थी। तेरा लंड देखकर मेरी रात नींद नहीं आई।”
मैं हैरान रह गया।
दादी ने मेरा लंड देखा था? दादी ने कहा, “बेटा, मैं दस साल से अकेली हूँ। तेरे दादाजी के बाद किसी ने मुझे नहीं छुआ। मेरा शरीर तड़पता है। अगर तू चाहे तो…”
मैं समझ गया। मैंने हिम्मत करके दादी के हाथ को पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया।
दादी ने मेरे लंड को सहलाया और बोलीं, “वाह, कितना मोटा और गरम है।”
दादी ने मेरी लुंगी खोल दी। मैंने अंदर कुछ नहीं पहना था। मेरा लंड पूरा खड़ा था, लाल और मोटा। दादी उसे देखकर चौंक गईं।
“बाप रे! इतना बड़ा लंड?” दादी ने कहा, “तेरे दादाजी का तो आधा था।”
मैंने कहा, “दादी, आपको पसंद आया?”
दादी ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत पसंद आया।”
दादी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और उसे सहलाने लगीं।
उनके हाथ नरम थे और उनकी स्पर्श से मुझे बिजली सी लग रही थी। मेरा लंड और भी ज़्यादा कड़क हो गया।
“बेटा, तू मेरी बुर चूसेगा?” दादी ने पूछा।
मैंने कहा, “जी दादी, बहुत मन है।”
दादी ने अपनी नाइटी उतार दी। वह पूरी तरह से नंगी थीं।
उनका बदन चाँदनी में चमक रहा था। उनके मोटे स्तन लटक रहे थे और उनकी बुर के बाल चमक रहे थे।
दादी लेट गईं और अपनी टाँगें फैला दीं। उनकी बुर पूरी तरह से दिख रही थी।
वह गुलाबी और गीली लग रही थी। मैं उनके पैरों के बीच में बैठ गया और उनकी जांघों को चूमने लगा।
“ओह बेटा, जल्दी कर,” दादी ने कहा।
मैंने अपनी जीभ दादी की जांघों पर फेरनी शुरू की।
वह काँप उठीं। फिर मैं धीरे से उनकी बुर के पास गया। उ
नकी बुर की गंध मुझे बहुत उत्तेजित कर रही थी। मैंने अपनी जीभ उनकी बुर पर रख दी।
“ओह हाँ,” दादी ने आहें भरीं।
मैंने उनकी बुर को चूसना शुरू किया। उनकी चूत का स्वाद नमकीन था लेकिन बहुत अच्छा।
मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर डाली और बाहर की तरफ खींची। दादी की कमर उठ गई।
“ऐसे ही कर बेटा,” दादी बोलीं, “बहुत मजा आ रहा है।”
मैंने उनकी बुर के दाने को भी चूसा। वह बहुत मोटा था और कड़क।
दादी ने मेरे सिर को अपनी बुर पर दबा लिया। मेरी जीभ उनकी चूत में अंदर-बाहर हो रही थी।
“ओह बेटा, तू तो बहुत अच्छा चूसता है,” दादी ने कहा, “ऐसे ही चूस, मैं झड़ने वाली हूँ।”
मैंने और जोर से चूसना शुरू किया। मेरी जीभ उनकी चूत की गहराई में जा रही थी।
दादी पागलों की तरह कमर उठा-उठाकर मेरे मुँह से चुदवा रही थीं।
कुछ ही देर में दादी का शरीर काँपने लगा। उन्होंने मेरे सिर को कसकर पकड़ा और एक लंबी सी आह निकाली। उनकी बुर से पानी निकलने लगा और मैंने उसे पी लिया।
“बहुत मजा आया बेटा,” दादी ने कहा, “अब मेरी बारी है।”
दादी उठकर बैठ गईं और मुझे अपने पास बुलाया।
मैं उनके सामने खड़ा हो गया। उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उसे देखने लगीं।
“कितना सुंदर लंड है तेरा,” दादी ने कहा, “मोटा और लंबा।”
दादी ने अपने होंठ मेरे लंड के टोपे पर रखे और चूमने लगीं।
फिर उन्होंने अपनी जीभ निकाली और लंड के छेद पर लगाई। मुझे बहुत मजा आया।
“दादी, आप बहुत अच्छा कर रही हैं,” मैंने कहा।
दादी ने मुस्कुराते हुए मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया।
उनका मुँह गरम था और नरम। वह मेरे लंड को अंदर-बाहर करने लगीं।
उनके होंठ मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थे।
मैंने उनके सिर को पकड़ा और उनके मुँह में अपना लंड पेलना शुरू किया।
दादी बिना रुके चूसती रहीं। वह मेरे अंडकोश को भी चूम रही थीं और फिर वापस लंड चूसने लगीं।
“ओह दादी, बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
दादी ने मेरा लंड बाहर निकाला और कहा, “बेटा, अब मेरे दूध पीले। मेरे स्तन बहुत भरे हुए हैं।”
दादी लेट गईं और मैं उनके ऊपर लेट गया।
मैंने एक स्तन अपने हाथ में लिया और उसे दबाया।
वह बहुत नरम और गरम था। मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर रखा और चूसना शुरू किया।
“ओह हाँ बेटा, ऐसे ही चूस,” दादी ने कहा।
मैंने उनके निप्पल को अपने होंठों से कसकर पकड़ा और चूसा।
दादी की साँसें तेज़ हो गईं। मैंने दूसरे स्तन को भी चूसा। दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसता रहा।
“बेटा, अब और नहीं रुकता जा रहा,” दादी ने कहा, “अपना लंड मेरी बुर में डाल दे।”
मैं दादी के पैरों के बीच में आ गया। उन्होंने अपनी टाँगें फैला दीं।
उनकी बुर गीली और खुली हुई थी। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा।
“धीरे से डालना बेटा,” दादी ने कहा, “मेरी बुर काफी दिनों से बंद है।”
मैंने धीरे से धक्का लगाया। मेरे लंड का टोपा अंदर चला गया।
दादी की साँसें फूल गईं। मैंने थोड़ा और धक्का लगाया और आधा लंड अंदर चला गया।
“ओह, बहुत मोटा है,” दादी ने कहा, “थोड़ा रुक जा।”
मैंने थोड़ी देर रुककर उनकी चूत को अपने लंड से भरा रहने दिया।
फिर मैंने एक जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह!” दादी चीख उठीं।
मैंने रुककर उनके स्तनों को सहलाया।
कुछ देर बाद मैंने अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया।
दादी की बुर बहुत टाइट थी और मेरे लंड को कस रही थी।
“ऐसे ही चोद बेटा,” दादी ने कहा, “बहुत मजा आ रहा है।”
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।
मेरे लंड से दादी की चूत की आवाज़ें आ रही थीं – “फच्… फच्… फच्…”
“ओह दादी, आपकी बुर बहुत टाइट है,” मैंने कहा।
“तू भी तो बहुत मोटा लंड लेकर आया है,” दादी ने कहा, “फाड़ दे मेरी बुर को।”
मैंने उनकी टाँगें अपने कंधों पर रख दीं और जोर-जोर से चोदना शुरू किया।
बिस्तर की चरपराहट गूँज रही थी। दादी की मोटी गांड हिल रही थी और उनके स्तन लहरा रहे थे।
“चोद मुझे बेटा,” दादी चिल्लाने लगीं, “पोते के मोटे लंड से चोद। आज मेरी सारी प्यास बुझा दे।”
मैं बहुत उत्तेजित हो गया था। मैंने दादी को घोड़ी बना दिया।
वह अपने हाथों से सहारा लेकर खड़ी हो गईं और मैंने उनकी गांड के नीचे से अपना लंड उनकी बुर में पेल दिया।
“ओह हाँ, ऐसे ही,” दादी ने कहा, “पीछे से चोद मुझे।”
मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए।
मेरे अंडे उनकी चूत से टकरा रहे थे। दादी की चीखें निकल रही थीं।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” दादी ने कहा, “साथ में झड़ जा बेटा।”
मैंने और जोर से चोदना जारी रखा। कुछ ही देर में दादी झड़ गईं।
उनकी बुर ने मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया और मैं भी झड़ गया। मैंने अपना सारा माल दादी की बुर में ही छोड़ दिया।
हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।
दादी ने मुझे कसकर गले लगाया और कहा, “बहुत मजा आया बेटा।”
उस रात के बाद दादी और मेरे बीच का रिश्ता बदल गया।
अब हम दादी-पोते कम और प्रेमी ज़्यादा लगते थे। दिन भर हम एक-दूसरे को चोरी-छिपे छूते रहते थे।
अगली सुबह जब मैं उठा तो दादी पहले से ही नहा चुकी थीं।
उन्होंने एक हल्की साड़ी पहनी थी जिसमें से उनका पेट और नाभि दिख रही थी।
मैंने उन्हें पीछे से जाकर गले लगाया और उनके स्तनों को दबाया।
“सुबह-सुबह ही शुरू हो गए?” दादी ने मुस्कुराते हुए कहा।
“दादी, आप इतनी सुंदर लग रही हैं कि रुका नहीं जा रहा,” मैंने कहा।
दादी ने मेरा लंड साड़ी के ऊपर से ही पकड़ लिया।
वह पहले से ही खड़ा था। दादी ने कहा, “चल, बाथरूम में चलते हैं।”
हम दोनों बाथरूम में गए। दादी ने अपनी साड़ी उतार दी।
मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे होकर नहाने लगे।
दादी ने मेरे लंड पर साबुन लगाया और उसे सहलाने लगीं।
“आज तू मुझे नहाते हुए चोदेगा,” दादी ने कहा।
मैंने उन्हें दीवार से सटाया और एक टाँग उठाकर अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।
पानी की धार में हम दोनों चुदाई करने लगे। दादी की चीखें बाथरूम में गूँज रही थीं।
“ओह बेटा, पानी में और भी मजा आ रहा है,” दादी ने कहा।
मैंने उन्हें जोर-जोर से चोदा। पानी हम दोनों के शरीर पर बह रहा था।
दादी के स्तन भीगे हुए थे और मैं उन्हें चूसता रहा।
कुछ देर बाद मैं झड़ गया।
हम दोनों ने एक-दूसरे को साफ किया और बाहर आ गए।
उस दिन दोपहर को जब बहुत गर्मी थी, तो हम दोनों कमरे में लेटे थे।
पंखा चल रहा था लेकिन गर्मी कम नहीं हो रही थी।
दादी ने सिर्फ एक पतली साड़ी ओढ़ी हुई थी और उसके अंदर कुछ भी नहीं पहना था।
“दादी, मुझे फिर से वो करना है,” मैंने कहा।
“क्या बेटा?” दादी ने पूछा।
“आपकी बुर चूसना है,” मैंने कहा।
दादी ने मुस्कुराते हुए अपनी साड़ी उठा दी। उनकी बुर फिर से मेरे सामने थी।
मैं उनके पैरों के बीच में बैठ गया और उनकी बुर को चूसने लगा।
“ओह बेटा, तू तो बुर चूसने में एक्सपर्ट हो गया है,” दादी ने कहा।
मैंने उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटा। उनका दाना बहुत मोटा था।
मैंने उसे अपने होंठों में लिया और चूसा। दादी की कमर उठ गई।
“बहुत मजा आ रहा है बेटा,” दादी ने कहा, “चूसते रहो।”
मैंने उनकी बुर में दो उँगलियाँ डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा।
दादी पागल हो रही थीं। उन्होंने मेरे सिर को कसकर पकड़ा।
“झड़ने वाली हूँ,” दादी ने कहा।
मैंने और जोर से चूसना जारी रखा।
कुछ ही देर में दादी झड़ गईं और उनका पानी मैंने पी लिया।
शाम को दादी ने मेरे लिए खीर बनाई। हम दोनों ने खीर खाई।
खाते समय दादी ने मेरे लंड को साड़ी के नीचे से पकड़ लिया।
“बेटा, आज एक काम कर,” दादी ने कहा।
“क्या दादी?” मैंने पूछा।
“मेरी गांड मार,” दादी ने कहा, “मैंने कभी गांड नहीं मरवाई।”
मैं हैरान हो गया। मैंने कहा, “दादी, वह तो बहुत दर्दनाक होगा।”
“तू धीरे से करना,” दादी ने कहा, “मैं तैयार हूँ।”
रात को हम दोनों तेल लेकर छत पर गए। दादी ने अपनी साड़ी उतार दी और घुटनों के बल हो गईं।
उनकी गांड बहुत मोटी और गोल थी। मैंने उनकी गांड को चूमा और फिर तेल लगाया।
“धीरे से डालना बेटा,” दादी ने कहा।
मैंने अपने लंड पर भी तेल लगाया और उनकी गांड के छेद पर रखा।
धीरे से धक्का लगाया। लंड का टोपा अंदर चला गया। दादी की चीख निकल गई।
“आह! बहुत मोटा है,” दादी ने कहा।
मैंने थोड़ी देर रुककर उनकी कमर सहलाई। फिर धीरे-धीरे और अंदर किया। मेरा आधा लंड उनकी गांड में चला गया।
“ओह बेटा, पूरा डाल दे,” दादी ने कहा।
मैंने एक जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
दादी की साँसें फूल गईं। मैंने रुककर उनके स्तनों को पकड़ लिया।
फिर मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। दादी को भी मजा आने लगा।
वह अपनी गांड पीछे को धकेलकर मेरा साथ देने लगीं।
“ऐसे ही मार मेरी गांड,” दादी ने कहा, “बहुत मजा आ रहा है।”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। मेरे लंड से दादी की गांड की आवाज़ें आ रही थीं। वह बहुत टाइट थी।
“मैं झड़ने वाला हूँ दादी,” मैंने कहा।
“अंदर ही निकाल दे बेटा,” दादी ने कहा।
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाए और अपना सारा माल दादी की गांड में छोड़ दिया।
मेरे गाँव में रहने के दस दिन बीत चुके थे। कल मुझे वापस जाना था।
उस रात हम दोनों बहुत उदास थे। हमने पूरी रात एक-दूसरे को चोदा।
दादी ने मेरा लंड बार-बार अपने मुँह में लिया। मैंने उनकी बुर और गांड दोनों को चोदा। हम दोनों थककर लेट गए।
“बेटा, तू जब भी आएगा, हम यही करेंगे,” दादी ने कहा।
“जी दादी,” मैंने कहा, “मैं हर महीने आऊँगा।”
सुबह मैं निकलने के लिए तैयार हुआ।
दादी ने मुझे गले लगाया और मेरे लंड को सहलाया।
“अपना ख्याल रखना बेटा,” दादी ने कहा।
“आप भी दादी,” मैंने कहा।
मैं मोटरसाइकिल पर बैठकर निकल पड़ा।
पीछे मुड़कर देखा तो दादी हाथ हिला रही थीं।
मैंने सोचा कि जल्द ही वापस आऊँगा और फिर से दादी की बुर चूसूँगा, उनके दूध पीऊँगा और उनकी गांड मारूँगा।
मैं गाँव से बाहर निकल गया।
मेरे दिल में दादी के लिए एक अजीब सा प्यार था।
हमारा यह रिश्ता अब हमेशा के लिए बन चुका था। अगले पार्ट में पढ़ें दादी का गैंगबैंग चुदाई…
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Bahut achchha kiya bhai apani dadi ko chodkar.
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