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मेरा नाम विक्रम है। मैं एक प्राइवेट कॉलेज में बी.कॉम का छात्र हूँ।
मेरे पिताजी की दूसरी शादी हुई थी जब मैं सोलह साल का था।
मेरी सौतेली माँ अनन्या उस वक्त सिर्फ अठाईस साल की थीं।
आज भी वह बहुत जवान दिखती हैं।
उनकी पहली शादी से एक लड़की है, प्रिया, जो मुझसे चार साल छोटी है।
इस साल की गर्मी की छुट्टियों में पिताजी कनाडा गए हुए थे।
उनका काम वहाँ फंस गया था।
उन्होंने मुझे हमारे पैतृक गाँव के बंगले पर जाने को कहा ताकि अनन्या और प्रिया की मदद हो सके।
बंगला बहुत बड़ा था और गाँव के बीच में ही था।
मैं वहाँ पहुँचा तो दोपहर का वक्त था। गर्मी बहुत थी।
अनन्या ने सफेद रंग की हल्की साड़ी पहनी हुई थी जो पसीने से उनके शरीर से चिपक रही थी।
उनका बदन पूरी तरह से उभरा हुआ दिख रहा था।
प्रिया ने शॉर्ट्स और टैंक टॉप पहना था। उसकी टाँगें बहुत गोरी और लंबी थीं।
शाम को खाना खाने के बाद हम तीनों बरामदे में बैठे थे।
पंखा चल रहा था लेकिन गर्मी कम नहीं हो रही थी।
अनन्या ने अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया।
उनकी गहरी गर्दन और कंधे पसीने में चमक रहे थे।
मेरी नजरें बार-बार उनके ब्लाउज की तरफ जा रही थीं जो उनके उभार को साफ दिखा रहा था।
रात में मैं ऊपर वाले कमरे में सोने गया।
बीच रात को प्यास लगी तो मैं नीचे किचन की तरफ गया।
रास्ते में मैंने देखा कि बाथरूम का दरवाज़ा हल्का सा खुला था और अंदर से रोशनी आ रही थी।
मैंने झाँका तो मेरी साँसें थम गईं।
अनन्या नहा रही थीं। दरवाज़े की दरार से मैंने देखा कि वह शावर के नीचे खड़ी थीं।
पानी की बूंदें उनके गोरे बदन पर लुढ़क रही थीं।
उनके बड़े-बड़े स्तन पानी की धार में फूलों की तरह लहरा रहे थे।
मैं वहीं जड़ होकर खड़ा रह गया। मेरे लंड में अचानक हलचल शुरू हो गई।
तभी मेरे कंधे पर हाथ महसूस हुआ।
मैं चौंककर पीछे मुड़ा तो प्रिया खड़ी थी।
उसने भी गर्मी में नींद टूटने की वजह से कुछ नहीं पहना था सिवाय एक छोटी सी नाइटी के।
उसके अंदर कुछ भी नहीं था।
नाइटी के कपड़े से उसके छोटे-छोटे उभार साफ झलक रहे थे।
“क्या देख रहे हो?” प्रिया ने धीरे से पूछा।
मैंने कुछ नहीं कहा। वह समझ गई।
वह मेरे पास आई और दरवाज़े से झाँका। उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं था।
बल्कि एक अजीब सी मुस्कान थी।
“मम्मी तो बहुत मस्त हैं ना?” उसने कहा।
मैं हैरान रह गया। प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे की तरफ खींचने लगी।
वहाँ पहुँचकर उसने दरवाज़ा बंद कर लिया।
फिर उसने अपनी नाइटी एक झटके में उतार दी।
उसका गोरा बदन मुझे नशे की तरह भाने लगा।
“मैंने कभी किसी लड़के को नहीं देखा,” प्रिया ने शर्माते हुए कहा, “मुझे दिखाओगे?”
मैंने अपनी नाइट शॉर्ट्स उतार दी। मेरा लंड पूरा खड़ा था।
उसे देखकर प्रिया की आँखें बड़ी हो गईं। वह धीरे से नीचे बैठ गई और उसे छूने लगी।
उसके हाथों की नरमी से मुझे बिजली सी लगी।
तभी दरवाज़ा खुला और अनन्या अंदर आईं।
उन्होंने सिर्फ एक तौलिया लपेटा हुआ था जो उनके बदन को ढकने के लिए बहुत छोटा था।
उन्होंने हमें देखा तो चौंकीं लेकिन गुस्सा नहीं हुईं।
“तुम दोनों यहाँ?” उन्होंने पूछा।
प्रिया डर गई।
लेकिन अनन्या ने दरवाज़ा बंद किया और कहा, “कोई बात नहीं। मैं भी तो इसी लिए आई थी। तुम्हारे पापा तो महीनों से नहीं आए।”
मैं समझ गया। अनन्या ने अपना तौलिया खोल दिया।
उनका गोरा बदन पूरी तरह से नंगा था। उनके बड़े स्तनों पर गुलाबी अंगारे चमक रहे थे।
नीचे उनकी बुर पूरी तरह से साफ की हुई थी।
“आज रात यहीं रुक जाओ,” अनन्या ने मुझे देखते हुए कहा, “लेकिन पहले मुझे प्यास बुझानी होगी।”
वह मेरे पास आईं और घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया।
वह बहुत प्यार से चूसने लगीं। उनके गरम होंठ मेरे लंड पर चिपक गए थे।
प्रिया यह सब देख रही थी। उसने अपना हाथ अपनी चूत में डाल लिया।
थोड़ी देर बाद अनन्या उठीं और बिस्तर पर लेट गईं।
उन्होंने अपनी टाँगें फैला दीं।
उनकी बुर गीली हो चुकी थी और पूरी तरह से खुली हुई दिख रही थी।
“आओ,” उन्होंने मुझे बुलाया।
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। मेरे लंड का सिरा उनकी बुर के मुँह पर टिका था।
मैंने एक जोर का धक्का लगाया। मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया।
अनन्या की साँसें फूल गईं। उनकी आँखें बंद हो गईं।
“ऐसे ही चोदो मुझे,” उन्होंने कहा, “बहुत दिनों से इसी का इंतजार था।”
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए।
बिस्तर की चरपराहट गूँजने लगी।
प्रिया अपनी माँ को इस हालत में देखकर बहुत उत्तेजित हो गई थी।
वह भी बिस्तर पर आ गई और अपनी माँ के मुँह पर अपनी चूत रख दी।
अनन्या ने अपनी बेटी की चूत चाटना शुरू कर दिया।
यह नजारा देखकर मेरा जोश और बढ़ गया।
मैंने अनन्या की टाँगें उठाकर उनके कंधों तक कर दीं और उनकी गहराई में लंड पेलने लगा।
“माँ, कैसा लग रहा है?” प्रिया ने पूछा।
“बहुत मस्त है,” अनन्या ने कहा, “तुम भी इसका मजा लो।”
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड अनन्या की बुर से बाहर निकाला।
वह पूरी तरह से लाल हो चुकी थी। अब प्रिया की बारी थी। वह डरी हुई लग रही थी।
“डरो मत,” अनन्या ने कहा, “मैं हूँ ना।”
अनन्या ने अपनी बेटी को बिस्तर पर लेटाया और उसकी टाँगें फैला दीं।
फिर उन्होंने मेरे लंड पर थूक लगाया और उसे प्रिया की चूत के मुँह पर रख दिया।
“धीरे से डालो,” अनन्या ने कहा, “पहली बार है इसकी।”
मैंने धीरे से धक्का लगाया। प्रिया की चीख निकल गई। उसकी चूत बहुत टाइट थी।
मेरा लंड उसमें आधा ही घुस पाया था।
लेकिन अनन्या ने मेरे कूल्हों को पकड़कर एक जोर से धक्का लगवा दिया।
मेरा पूरा लंड अंदर समा गया।
प्रिया की आँखों से आँसू निकल आए।
लेकिन थोड़ी देर बाद उसे भी मजा आने लगा।
मैंने उसे धीरे-धीरे चोदना शुरू किया।
अनन्या उसके बगल में लेटकर उसके स्तनों को सहला रही थीं।
“कैसा लग रहा है बेटी?” अनन्या ने पूछा।
“बहुत अच्छा माँ,” प्रिया ने कहा, “थोड़ा और जोर से करो।”
मैंने स्पीड बढ़ा दी।
प्रिया की चूत से खून निकल रहा था लेकिन वह दर्द को सहन कर रही थी।
कुछ देर बाद वह झड़ गई। उसका पूरा शरीर काँपने लगा।
अब मेरा लोड निकलने वाला था।
अनन्या ने मुझे रुकने का इशारा किया।
उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में मैंने अपना सारा माल उनके मुँह में छोड़ दिया।
अनन्या ने उसे निगल लिया। फिर प्रिया के मुँह में भी थोड़ा डाल दिया। तीनों के शरीर पसीने में तर थे।
उस रात के बाद हर रात हम तीनों एक साथ सोने लगे।
अब मेरे पिताजी वापस आ भी गए हैं लेकिन वह बूढ़े हैं और जल्दी सो जाते हैं।
रात में हम तीनों अभी भी एक-दूसरे की प्यास बुझाते हैं।
प्रिया अब मेरे लंड की आदी हो चुकी है और अनन्या को भी मेरी जवानी का नशा चढ़ गया है।
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Very beautiful story 👌😲
Very nice story y