करवा चौथ के बाद – ग्यारह मर्दों की रंडी

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करवा चौथ की रात जब विक्रम ने मुझे खूब चोदा, तो उसके बाद हम दोनों थककर सो गए। अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो विक्रम मुझे घूर रहा था।

{अगर आपने मेरी पिछली कहानी नही पढ़ी है तो पढ़ें की कैसे मैं संस्कारी पत्नी करवा चौथ पर गैर मर्द से चुदवाई}

“प्रिया जी, आज रात एक सरप्राइज है आपके लिए,” उसने कहा।

“क्या सरप्राइज?” मैंने पूछा।

“आज मैंने आपके लिए 10 और मर्दों को बुलाया है,” विक्रम ने कहा, “मेरे जिम के दोस्त, सब जवान, सब मोटे लंड वाले। आज हम ग्यारह मिलकर आपको चोदेंगे।”

मैं पहले तो चौंकी, फिर उत्साहित हो गई। “सच में? 10 लोग?”

“हाँ प्रिया जी, आज आपकी बुर और गांड की सील टूटेगी,” विक्रम ने कहा।

शाम को विक्रम ने मुझे एक होटल के कमरे में ले जाया। बड़ा सा कमरा, एक बड़ा बेड, और आराम की सभी सुविधाएं।

“यहाँ कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा,” विक्रम ने कहा, “आज रात सिर्फ आप और हम ग्यारह।”

रात के 8 बजे, दरवाजे की घंटी बजी। एक-एक करके 10 जवान लड़के अंदर आए। सब 22-28 साल के, सब जिम बॉडी वाले, सबके लंड उनकी पैंट में उभारे हुए थे।

“ये हैं प्रिया जी,” विक्रम ने कहा, “आज की रानी।”

सब ने मुझे देखा और सीटियाँ बजाईं। मैंने उस दिन एक बहुत ही सेक्सी लाल रंग की लैंगरी पहनी थी जिसमें से मेरे दूध और बुर साफ दिख रहे थे।

“आओ लड़कों, शुरू करें,” विक्रम ने कहा।

सबसे पहले विक्रम ने मुझे बेड पर लिटाया। फिर उसने एक-एक करके सबको मेरे दूध चूसने के लिए बुलाया।

पहला लड़का रोहित आया। उसने मेरे एक दूध को मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। निपल को दाँतों से काट रहा था। “आह्ह… धीरे… निपल दर्द हो रहा है…” मैं चीखी।

दूसरा लड़का करन आया। उसने दूसरा दूध चूसना शुरू किया। दोनों लड़के एक साथ मेरे दूध चूस रहे थे। मेरे निपल कड़े हो गए थे।

तीसरा लड़का अमित आया। उसने मेरे दूधों को हाथों से मसलना शुरू किया और बीच-बीच में चूम रहा था।

चौथा, पाँचवाँ, छठा… एक-एक करके सब लड़के मेरे दूध चूसे। सबने मेरे निपलों को काटा, चूसा, मसला। मेरे दूध लाल हो गए थे लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर विक्रम ने मुझे फैलाया। मेरी टाँगें चौड़ी कर दीं। मेरी बुर साफ दिख रही थी, गीली हो चुकी थी।

“अब सब एक-एक करके इसकी बुर चाटेंगे,” विक्रम ने कहा।

पहला लड़का सुनील नीचे बैठा और मेरी बुर पर जीभ रखी। “आह्ह… और अंदर…” मैं कराही।

उसने जीभ मेरी बुर में घुसा दी। अंदर-बाहर करने लगा। मैं पागल हो रही थी।

दूसरा लड़का राजेश आया। उसने भी मेरी बुर चाटी। फिर तीसरा, चौथा… सब लड़कों ने मेरी बुर चाटी। किसी ने क्लिटोरिस चूसी, किसी ने बुर के अंदर जीभ घुसाई, किसी ने बुर के होठों को काटा।

मेरी बुर से पानी निकल रहा था और सब लड़के उसे चाट रहे थे।

अब विक्रम ने कहा, “अब प्रिया जी सबका लंड चूसेगी।”

सब लड़कों ने अपने कपड़े उतारे। 10 मोटे-मोटे लंड मेरे सामने थे। सब 7-9 इंच के, सब मोटे, सब तने हुए।

मैंने पहले रोहित का लंड पकड़ा और मुँह में ले लिया। “उम्म…” वो कराहा।

फिर मैंने करन का लंड चूसा। फिर अमित का। एक-एक करके मैंने सब 10 लंडों को चूसा। किसी को गहरे तक, किसी को जीभ से, किसी को हाथ से मिलाकर।

“क्या मुँह है प्रिया जी का… बहुत मस्त चूसती है…” सब लड़के कराह रहे थे।

विक्रम ने मुझे लिटाया। मेरी टाँगें फैलाईं और उसने अपना लंड मेरी बुर में डाला। “फच्च-फच्च-फच्च” की आवाज़। मैं चीखी, “आह्ह… और चोदो…”

रोहित ने मुझे घुटनों के बल बिठाया। पीछे से उसका लंड मेरी बुर में घुसा। “थप्प-थप्प” की आवाज़। वो मेरी गांड पर चांटे भी मार रहा था।

करन ने लेटकर अपना लंड ऊपर किया। मैं उसके ऊपर बैठी और उसका लंड अपनी बुर में ले लिया। मैं ऊपर-नीची उछलने लगी। मेरे दूध हवा में झूल रहे थे।

अमित के ऊपर बैठी, लेकिन पीठ उसकी तरफ। उसका लंड मेरी बुर में था और मैं अपनी गांड घुमाकर उछल रही थी।

सुनील मेरे पीछे लेटा और अपना लंड मेरी बुर में डाल दिया। उसने मेरे दूध पकड़े और दबाते हुए धक्के मारे।

राजेश के ऊपर लेटी, उल्टा। उसका लंड मेरे मुँह में, मेरी बुर उसके मुँह में। हम दोनों एक-दूसरे को चूस रहे थे।

मोहित ने मुझे दीवार से सटाया। एक टाँग उठाकर उसने अपना लंड मेरी बुर में डाला। खड़े-खड़े चोद रहा था।

नवीन ने लेटकर अपने पैर फैलाए। मैं उसकी गोद में बैठी और अपनी टाँगें उसकी कमर के पीछे बांधीं। उसका लंड मेरी बुर में था। हम एक-दूसरे से लिपटे धक्के कर रहे थे।

पंकज ने मुझे बेड के किनारे लिटाया। मेरी टाँगें उसके कंधों पर थीं। वो झुककर मेरी बुर में लंड डालकर चोद रहा था।

राहुल ने मुझे कंधों के बल खड़ा किया। मेरी टाँगें हवा में थीं, सिर बेड पर टिका था। वो ऊपर से मेरी बुर में लंड डालकर चोद रहा था।

अनुज ने मुझे पीठ के बल लेटाया। मैंने अपनी कमर और पैर ऊपर उठाए, ब्रिज की तरह। वो नीचे से मेरी बुर में लंड डालकर चोद रहा था।

विकास ने मेरे पैर उठाए और अपने कंधों पर रखे। मेरे हाथ जमीन पर थे। वो पीछे से मेरी बुर में लंड डालकर चोद रहा था।

रोहित और करन ने मुझे बीच में लिया। रोहित का लंड मेरी बुर में, करन का मेरे मुँह में। दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मुझे चोद रहे थे।

अमित और सुनील ने मुझे घुटनों के बल बिठाया। अमित का लंड मेरी बुर में पीछे से, सुनील का लंड मेरे मुँह में आगे से। मैं दोनों तरफ से चुद रही थी।

विक्रम और रोहित ने मुझे लिटाया। विक्रम का लंड मेरी बुर में, रोहित का लंड मेरी गांड में। दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे।

“आह्ह… मर गई… दोनों तरफ से… फाड़ डालो मुझे…” मैं चीख रही थी।

ग्यारहों मर्दों ने मुझे लगातार 4 घंटे तक चोदा। हर पोजीशन में, हर छेद में। मेरी बुर और गांड दोनों से पानी और खून निकल रहा था।

एक-एक करके सब झड़े। सबने मेरी बुर, गांड, मुँह, दूधों पर अपना पानी छोड़ा। मैं पूरी तरह से वीर्य से लथपथ थी।

विक्रम ने मुझे उठाया और कहा, “प्रिया जी, आज आप पूरी तरह से हमारी रंडी बन गईं।”

मैंने कहा, “हाँ… मैं अब सिर्फ तुम्हारी रंडी हूँ… जब चाहो चोद लेना…”

हम सब थककर सो गए। अगली सुबह जब मेरी आँख खुली, तो मैं अकेली थी। लेकिन मेरे बदन पर ग्यारह मर्दों के निशान थे।

यही मेरी जिंदगी है – एक रंडी की जिंदगी। और मैं इसमें खुश हूँ।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

1 thought on “करवा चौथ के बाद – ग्यारह मर्दों की रंडी”

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