drivers gangbang bhabhi chudai
मैंने श्याम से कहा, “श्याम, तुम तो मेरी चूत के राजा हो गए हो। लेकिन मुझे एक और ख्वाहिश है।”
श्याम ने पूछा, “क्या ख्वाहिश है मेरी रानी?”
{अगर आपने पहली कहानी नहीं पढ़ी हैं तो उसे पढ़ें की कैसे मैं श्याम की रानी और रखैल बनी}
मैंने कहा, “मुझे तुम्हारे दोस्तों से भी मिलवाओ। मैं सोच रही हूँ कि अगर एक बस ड्राइवर से इतना मज़ा आता है, तो पाँच बस ड्राइवर मिलकर मेरी चूत का क्या हाल करेंगे!”
श्याम ने कहा, “ये तो बहुत आसान है। मेरे चार दोस्त हैं – रघुराम, रघवेंद्र, सुनील और मनोज। ये सब बस ड्राइवर हैं और सब मस्त लंड वाले हैं। कल शाम को मैं उन्हें बुला लूँगा।”
मैंने कहा, “और तुम सब मिलकर मेरी चूत, गांड और मुँह एक साथ चोदना। मैं तुम पाँचों की रंडी बनकर रहूँगी।”
अगले दिन शाम को 7 बजे, श्याम ने अपने चारों दोस्तों को होटल के कमरे में बुला लिया।
मैंने एक बेहद सेक्सी लाल रंग की लैंगरी पहनी थी जो मेरी चूचियों को आधा ढक रही थी और मेरी गांड पूरी खुली थी।
मैंने स्टॉकिंग्स और हाई हील्स भी पहने थे।
जब वो पाँचों मुझे देखे, तो उनके होश उड़ गए।
श्याम ने उन्हें परिचय कराया, “ये हैं रघुराम, ये रघवेंद्र, ये सुनील और ये मनोज। और ये हैं मेरी मैडम निर्मला, जो आज हम सब की रानी बनेंगी।”
रघुराम बोला, “वाह श्याम! तूने तो बहुत माल पटाया है। इसकी चूचियाँ तो देखो कितनी बड़ी-बड़ी हैं!”
रघवेंद्र ने कहा, “हाँ यार! इसकी गांड भी बहुत मस्त है। मुझे तो इसकी गांड मारने का मन कर रहा है।”
सुनील बोला, “पहले मैं इसका मुँह चोदूँगा। मुझे मुँह चोदना बहुत पसंद है।”
मनोज ने कहा, “मैं तो इसकी चूत में अपना लंड डालूँगा। वो तो मेरी है।”
मैंने कहा, “अरे रुको सालों! एक-एक करके आओ। पहले अपने कपड़े उतारो। मैं तुम सबके नंगे बदन देखना चाहती हूँ।”
एक-एक करके वो सब नंगे होने लगे।
रघुराम 35 साल का था, गठीले बदन वाला, उसका लंड करीब 9 इंच लंबा और बहुत मोटा था।
रघवेंद्र 32 साल का था, उसका लंड 8 इंच का था लेकिन इतना मोटा कि मेरी साँसें अटक गईं।
सुनील 28 साल का जवान था, उसका लंड 7 इंच का था लेकिन बहुत सख्त।
मनोज 30 साल का था, उसका लंड भी 8 इंच का था और बहुत गरम।
और श्याम तो था ही मेरा पहला आशिक, उसका 8 इंच का लंड मुझे पता था।
मैंने उन पाँचों के लंड देखकर कहा, “वाह! आज तो मेरी चूत, गांड और मुँह तीनों की फाड़ने की तैयारी कर रखी है तुम लोगों ने। आओ अब मुझे चोदो।”
रघुराम सबसे पहले आगे बढ़ा।
उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वो मुझे जोर-जोर से किस करने लगा।
उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और मेरी जीभ से खेलने लगी।
दूसरी तरफ रघवेंद्र मेरी गांड सहलाने लगा।
वो मेरी गांड पर हाथ फेर रहा था और मेरे गालों को मसल रहा था।
सुनील और मनोज मेरी चूचियों से खेलने लगे।
वो दोनों एक-एक चूची पकड़कर उसे मसल रहे थे, निप्पल को काट रहे थे, चूस रहे थे।
मैं तो पाँचों के बीच में फँसकर बुरी तरह उत्तेजित हो गई।
श्याम ने कहा, “चलो इसे बेड पर लिटाते हैं।”
रघुराम ने मुझे उठाया और बेड पर पटक दिया।
मैं बेड पर लेटी हुई थी और पाँचों मर्द मेरे चारों तरफ खड़े थे, उनके लंड मेरे मुँह के सामने झूल रहे थे।
मैंने कहा, “आओ अब मैं तुम सबका लंड चूसती हूँ। एक-एक करके आओ।”
सबसे पहले रघुराम आगे बढ़ा।
उसने अपना मोटा लंड मेरे मुँह के सामने किया।
मैंने अपने हाथों से उसका लंड पकड़ा और उसके सुपाड़े को चूमने लगी।
फिर मैंने धीरे से उसे अपने मुँह में ले लिया।
वो इतना मोटा था कि मेरे मुँह में आते ही मेरी गालें फैल गईं।
रघुराम ने मेरे सिर को पकड़ा और अपना लंड मेरे गले तक घुसा दिया।
“आह्ह… क्या मुँह है तेरा निर्मला! बहुत मस्त चूसती है तू!” वो कराह रहा था।
मैंने उसका लंड चूसते हुए उसकी गांड भी सहलाई।
फिर रघवेंद्र ने अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया।
मैंने एक हाथ से रघवेंद्र का लंड हिलाना शुरू कर दिया।
अब मैं एक लंड चूस रही थी और दूसरे को हिला रही थी।
सुनील बोला, “मेरी बारी कब आएगी?”
मैंने रघुराम का लंड मुँह से निकाला और सुनील के लंड को पकड़ लिया।
उसका लंड थोड़ा छोटा था लेकिन बहुत सख्त।
मैंने उसे पूरा मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
वो तो जैसे पागल हो गया, “ओह्ह… निर्मला… तू तो बहुत मस्त है यार!”
फिर मैंने मनोज का लंड पकड़ा। उसका लंड बहुत गरम था, जैसे कोई आग का अंगारा हो।
मैंने उसे भी चूसा और फिर श्याम के लंड को भी मुँह में लिया। मैं बारी-बारी से पाँचों के लंड चूस रही थी।
रघुराम ने कहा, “अब मैं इसकी चूत चोदूँगा।”
उसने मुझे बेड पर लिटाया, मेरी टाँगें फैलाईं और अपना मोटा लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा।
“आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाऊँगा मैं!” कहकर उसने एक जोरदार धक्का मारा और उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया।
“आह्ह… मर गई… इतना मोटा… आह्ह!” मैं चीखी।
वो मुझे जोर-जोर से चोदने लगा। “फच्च-फच्च-फच्च” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।
उसके हर धक्के के साथ मेरी चूचियाँ उछल रही थीं।
इतने में रघवेंद्र आगे बढ़ा और मेरे मुँह में अपना लंड घुसा दिया।
अब मेरी चूत में एक लंड था और मुँह में दूसरा। दोनों एक साथ मुझे चोद रहे थे।
फिर सुनील ने मुझे उठाया और डॉगी पोजीशन में बिठा दिया।
रघुराम मेरी चूत में ही था, सुनील ने अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया। “आह्ह… दोनों तरफ… आह्ह!” मैं चीखी।
अब मेरी चूत में रघुराम, गांड में सुनील और मुँह में रघवेंद्र – तीनों एक साथ मुझे चोद रहे थे। मैं तीनों लंडों की गुलाम बन गई थी।
मनोज और श्याम हमें देख रहे थे और अपने लंड हिला रहे थे।
फिर मनोज ने मेरी एक चूची पकड़ी और उसे चूसने लगा, श्याम ने दूसरी चूची पकड़ी।
करीब 20 मिनट तक ये तीनों मुझे इसी तरह चोदते रहे।
फिर रघुराम ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया।
उसके गर्म पानी से मेरी चूत और भी गीली हो गई।
रघुराम हटा तो मनोज आगे बढ़ा।
उसने मेरी चूत में अपना लंड घुसाया और चोदने लगा।
अब मनोज मेरी चूत में, सुनील मेरी गांड में और रघवेंद्र मेरे मुँह में – तीनों मिलकर मुझे चोद रहे थे।
रघुराम और श्याम अब मेरी चूचियों से खेल रहे थे।
वो दोनों मेरी चूचियों को काट रहे थे, चूस रहे थे, मसल रहे थे।
फिर रघवेंद्र ने अपना पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया।
मैंने सब कुछ पी लिया। वो हटा तो श्याम आगे बढ़ा और उसने भी अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया।
अब मनोज मेरी चूत में, सुनील मेरी गांड में और श्याम मेरे मुँह में – तीनों मिलकर मुझे चोद रहे थे।
रघुराम और रघवेंद्र मेरी चूचियों और चूतड़ों से खेल रहे थे।
करीब 25 मिनट तक ये तीनों मुझे इसी तरह चोदते रहे।
फिर मनोज ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया। उसके बाद सुनील ने भी अपना पानी मेरी गांड में छोड़ दिया।
श्याम ने मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ा और मैंने सब कुछ पी लिया।
मैं सोची कि अब खत्म हुआ, लेकिन ये तो शुरुआत थी।
रघुराम फिर से खड़ा हो गया और बोला, “अभी तो हमने इसकी गांड ठीक से नहीं मारी। आओ इसे डबल पेनेट्रेशन देते हैं।”
मैंने पूछा, “क्या होता है ये डबल पेनेट्रेशन?”
उसने कहा, “एक लंड तेरी चूत में और एक लंड तेरी गांड में – दोनों एक साथ।”
मैंने कहा, “ओह्ह… ये तो बहुत मज़ेदार होगा। आओ करो।”
रघुराम ने मुझे बेड पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर लेट गया।
उसने अपना लंड मेरी चूत में घुसाया।
फिर रघवेंद्र आया और उसने अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया।
अब दोनों एक साथ मुझे चोद रहे थे – एक ऊपर से और एक नीचे से।
“आह्ह… दोनों तरफ… मर गई… आह्ह!” मैं चीख रही थी।
सुनील और मनोज मेरे मुँह में अपने लंड बारी-बारी से घुसा रहे थे। श्याम मेरी चूचियों से खेल रहा था।
करीब 30 मिनट तक ये लोग मुझे इसी तरह चोदते रहे।
मेरी चूत और गांड दोनों में दर्द हो रहा था लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था।
फिर रघुराम और रघवेंद्र एक साथ झड़ गए।
उन्होंने अपना पानी मेरी चूत और गांड में छोड़ दिया। मैं भी खलास हो गई।
लेकिन ये कहाँ रुकने वाले थे। अब सुनील और मनोज ने मुझे उठाया और बाथरूम में ले गए।
वहाँ उन्होंने मुझे शॉवर के नीचे खड़ा किया और एक-एक करके मुझे चोदा।
पहले सुनील ने मेरी चूत चोदी, फिर मनोज ने मेरी गांड मारी।
फिर श्याम आया और उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा करके पीछे से चोदा।
रघुराम ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया। रघवेंद्र ने मेरी एक चूची पकड़ी और सुनील ने दूसरी।
मैं फिर से पाँचों लंडों के बीच में फँस गई।
श्याम मेरी चूत में, रघुराम मेरे मुँह में, और बाकी तीन मेरी चूचियों और गांड से खेल रहे थे।
करीब 40 मिनट तक ये लोग मुझे चोदते रहे।
फिर एक-एक करके सब झड़ गए। मेरी चूत, गांड और मुँह तीनों से उनका पानी बह रहा था।
मैं बाथरूम के फर्श पर गिर गई। मेरी हालत खराब थी।
मेरी चूत लाल हो गई थी, गांड भी फटने को थी, और मुँह भी दर्द कर रहा था। लेकिन मैं बहुत खुश थी।
हम सब नहाए और फिर बेड पर आए।
मैंने पाँचों के लंड एक-एक करके फिर से चूसे और खड़े कर दिए।
फिर मैंने कहा, “अब मैं तुम सबकी रानी बनूँगी। तुम सब मेरे गुलाम हो।”
रघुराम ने कहा, “हाँ निर्मला, तू हमारी रानी है। हम तेरे गुलाम हैं।”
फिर हमने डिनर किया। डिनर के बाद फिर से राउंड शुरू हुआ।
इस बार मैंने कहा, “मुझे तुम सब एक साथ चोदो। मेरी चूत में दो लंड डालो और गांड में दो।”
रघुराम और रघवेंद्र ने मेरी चूत में अपने लंड एक साथ घुसाए।
दो मोटे लंड मेरी चूत में घुसते ही मैं चीख पड़ी, “आह्ह… फट गई… मेरी चूत फट गई!”
सुनील और मनोज ने मेरी गांड में अपने लंड घुसा दिए।
अब मेरी चूत में दो लंड और गांड में दो लंड – चार लंड एक साथ मुझे चोद रहे थे। श्याम ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया।
मैं पाँचों लंडों से घिरी हुई थी। मेरी चूत और गांड दोनों फैल गई थीं। दर्द के साथ-साथ अजीब सा मज़ा भी आ रहा था।
“ओह्ह… माँ… मर गई… आह्ह… और चोदो… फाड़ डालो मेरी चूत और गांड!” मैं चीख रही थी।
पाँचों मिलकर मुझे करीब एक घंटे तक चोदते रहे।
वो एक-एक करके झड़ रहे थे और फिर से खड़े होकर मुझे चोद रहे थे।
मेरी चूत और गांड में कम से कम दस बार पानी गिर चुका था।
फिर रघुराम ने मुझे उठाया और खिड़की के पास ले गया।
उसने मुझे खिड़की से बाहर झुकाया और पीछे से मेरी चूत में लंड घुसा दिया।
बाकी चारों मेरे चारों तरफ खड़े थे और मुझे चोद रहे थे – एक मेरे मुँह में, एक मेरी गांड में, और दो मेरी चूचियों में अपने लंड घुसा रहे थे।
खिड़की से बाहर सड़क दिख रही थी और लोग गुज़र रहे थे।
कोई देख भी सकता था, लेकिन मुझे कोई परवाह नहीं थी। मैं तो पाँचों लंडों की गुलाम बन चुकी थी।
करीब 30 मिनट बाद वो सब एक साथ झड़ गए।
मेरी चूत, गांड और मुँह तीनों से उनका पानी बह रहा था। मैं खिड़की से झुकी हुई ही बेहोश हो गई।
जब मुझे होश आया, तो मैं बेड पर लेटी हुई थी।
पाँचों मर्द मेरे चारों तरफ लेटे हुए थे। मैंने एक-एक करके उनके लंड चूसे और फिर से खड़े किए।
मैंने कहा, “अब मैं तुम सबसे एक साथ चुदवाऊँगी।”
मैंने रघुराम को बेड पर लिटाया और उसके ऊपर बैठकर उसका लंड अपनी चूत में ले लिया।
फिर रघवेंद्र को पीछे से बुलाया और उसका लंड अपनी गांड में ले लिया।
फिर सुनील और मनोज को बगल में बुलाया और उनके लंड अपने हाथों में ले लिए। श्याम ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया।
अब मैं पाँचों लंडों से भरी हुई थी – चूत में एक, गांड में एक, मुँह में एक, और दोनों हाथों में एक-एक।
मैं सबको एक साथ हिला रही थी और मज़ा ले रही थी।
“ओह्ह… ये तो जन्नत है… आह्ह… और चोदो… मुझे और चोदो!” मैं कराह रही थी।
पाँचों मिलकर मुझे करीब 2 घंटे तक इसी पोजीशन में चोदते रहे।
वो एक-एक करके झड़ रहे थे और फिर से खड़े हो रहे थे। मेरी चूत और गांड दोनों में कम से कम बीस बार पानी गिर चुका था।
फिर रघुराम ने कहा, “अब मैं इसकी पेशाब वाली जगह चोदूँगा।”
मैंने कहा, “क्या मतलब?”
उसने कहा, “तुम्हारी पेशाब वाली छेद में लंड डालूँगा।”
मैंने कहा, “ओह्ह… वो भी चोदो। मुझे हर छेद में लंड चाहिए।”
रघुराम ने मुझे लिटाया और मेरी टाँगें फैलाईं।
उसने अपना लंड मेरी पेशाब वाली छेद पर रखा और धक्का मारा। वो अंदर घुस गया।
“आह्ह… ये क्या जगह है… आह्ह!” मैं चीखी।
वो मेरी पेशाब वाली छेद में लंड डालकर चोदने लगा।
दर्द हो रहा था लेकिन मज़ा भी आ रहा था। बाकी चारों मेरी चूत, गांड और मुँह में लंड डालकर चोद रहे थे।
अब मेरी चारों छेदों में लंड थे – चूत में एक, गांड में एक, मुँह में एक, और पेशाब वाली जगह में एक। मैं चारों तरफ से चुद रही थी।
“आह्ह… मर गई… फाड़ डालो मुझे… आह्ह!” मैं चीख-चीखकर चुदवा रही थी।
करीब 45 मिनट तक वो मुझे इसी तरह चोदते रहे।
फिर एक-एक करके सब झड़ गए। मेरी चारों छेदों से उनका पानी बह रहा था।
मैं बेहोश हो गई। जब मुझे सुबह होश आया, तो मैं होटल के बेड पर लेटी हुई थी।
पाँचों मर्द जा चुके थे। मेरी चूत, गांड, मुँह और पेशाब वाली जगह – चारों दर्द कर रही थीं।
मेरी चूचियाँ लाल हो गई थीं और पूरे बदन पर निशान थे।
मैं उठकर बाथरूम गई। शीशे में देखा तो मेरी हालत देखकर मैं खुद ही हँस पड़ी।
मैंने शॉवर लिया और सोचा कि ये रात कभी नहीं भूलूँगी।
अब तो मैं हर हफ्ते इन पाँचों से मिलती हूँ।
वो मुझे अपनी बस में लेकर कहीं भी ले जाते हैं और वहीं होटल में मुझे जमकर चोदते हैं।
मेरी चूत, गांड और मुँह अब इन पाँचों लंडों की दीवानी हो गई है।
मैं इनसे हर रोज चुदवाती हूँ और मज़ा लेती हूँ।
यही मेरी जिंदगी है और इसमें मैं बहुत खुश हूँ।
लेकिन अगर आप चाहते हो की मैं कैसे अपने पति के सामने डेल्ही में 8 नीग्रो ब्लैक लंड से चुदी वह कहानी लिखूं तो नीचे कमेंट करें, मैं यकीं के साथ कहती हूँ की आप मुठ मार मार के अपने लंड को लाल कर दोगे….
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- मरीज़ बनी डॉक्टर नीरंजन की रखैल
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
yah kahnni mast thi. please negro wali kahani likho.
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