थाने की वह चुदाई वाली रात

desi samuhik charamsukh

हाय दोस्तों, मेरा नाम कविता है। मैं दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर हूं।

मेरी उम्र 32 साल है, और मेरा फिगर 36-30-38 है। मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है, और मैं जिम रेगुलर जाती हूं इसलिए मेरी बॉडी काफी टोनड है।

मेरे बूब्स काफी बड़े हैं, और मेरी गांड भी काफी उभरी हुई है। मेरे पति की 2 साल पहले एक एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई थी, और तब से मैं अकेली हूं।

मैं रात के शिफ्ट में थाने में ड्यूटी करती हूं। हमारा थाना दिल्ली के एक अपमार्केट इलाके में है।

रात के 11 बजे था, और थाने में सिर्फ मैं, मेरी सहयोगी सरिता, और एक महिला कांस्टेबल रीना थी। बाकी सब लोग पेट्रोलिंग पर गए हुए थे।

सरिता की उम्र 28 साल है, उसका फिगर 34-28-36 है। वो काफी सुंदर है, गोरा रंग, लंबे बाल। रीना 24 साल की है, उसका फिगर 32-26-34 है, छोटी-मोटी सी, प्यारी सी लड़की।

रात के 11:30 बजे, थाने का मुख्य दरवाजा खुला।

एक आदमी अंदर आया। उसकी उम्र लगभग 30 साल होगी, हाइट 6 फीट के करीब, एथलेटिक बॉडी, और चेहरे पर एक अजीब सी आत्मविश्वास की मुस्कान।

“जी, क्या समस्या है?” मैंने पूछा।

“मैडम, मेरा नाम राघव है। मुझे कुछ दिनों से बहुत तनाव हो रहा है। सोचा थोड़ी मदद ले लूं,” उसने कहा।

“किस तरह का तनाव?” मैंने पूछा।

“मैडम, वो अकेलापन… और कुछ और भी,” उसने अजीब सी मुस्कान दी।

मैं समझ गई कि यह कोई पागल आदमी है जो शायद नशे में है। “देखिए, यह पुलिस स्टेशन है। अगर कोई शिकायत है तो बताइए, वरना जाइए यहां से,” मैंने कड़ी आवाज में कहा।

“मैडम, मेरी शिकायत यह है कि मुझे काफी दिनों से सेक्स नहीं मिला है। और जब से मैंने आपको देखा है, मेरा मन कर रहा है कि…” उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

मैं गुस्से से उठी। “क्या बकवास कर रहे हो तुम? जानते हो तुम कहां खड़े हो? अभी तुम्हें अंदर कर दूंगी,” मैंने चिल्लाया।

सरिता भी आ गई। “क्या हुआ मैडम?” उसने पूछा।

“इस आदमी को ले जाओ और लॉकअप में डाल दो,” मैंने कहा।

राघव ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराया। “मैडम, एक बार मेरा लंड देख लो। फिर तुम खुद मुझे रोक नहीं पाओगी।”

“क्या?” मैंने हैरान होकर पूछा।

उसने बिना कुछ कहे अपनी टी-शर्ट उतारी। फिर उसने अपनी जींस की चेन खोली। मैं और सरिता दोनों हैरान रह गए। वो अपने अंडरवियर को नीचे किया और उसका लंड बाहर आया।

वो लगभग 9 इंच लंबा था, और बहुत मोटा। मैंने आज तक इतना बड़ा लंड नहीं देखा था। वो खड़ा था, कड़ा था, और बहुत सुंदर दिख रहा था। मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।

“देखा मैडम? मैंने कहा था ना,” राघव ने मुस्कुराते हुए कहा।

मैं खुद को रोक नहीं पाई। मेरे पति के बाद मैंने किसी मर्द को नहीं छुआ था। और यह आदमी, यह लंड… मैं बिना सोचे उसके पास गई। मैंने उसका लंड अपने हाथ में लिया। वो गर्म था, कड़ा था, और कांप रहा था।

“मैडम, कैसा लगा?” राघव ने पूछा।

मैं कुछ नहीं बोल पाई। मैं बस उसे देखती रही। सरिता भी मेरे पास आ गई। “मैडम, यह…” उसने अपनी बात अधूरी कही।

“सरिता, यहां कोई भी आ सकता है। इसे ले चलते हैं अंदर के कमरे में,” मैंने कहा।

हमारे थाने में एक पुराना स्टोर रूम था जो अब कभी-कभार आराम करने के लिए इस्तेमाल होता था। मैंने राघव को वहां ले गई। सरिता भी पीछे-पीछे आई।

कमरे में पहुंचते ही, राघव ने मुझे पकड़ा और मेरे होठों पर चुंबन कर दिया।

मैंने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन फिर मैं भी उसमें खो गई। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं।

सरिता वहीं खड़ी देख रही थी। उसका मुंह भी खुला था। राघव ने मेरे कपड़े उतारने शुरू किए। पहले मेरी यूनिफॉर्म की शर्ट, फिर पैंट। मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई।

“वाह मैडम, क्या बॉडी है,” राघव ने कहा।

उसने मेरी ब्रा खोली। मेरे बूब्स बाहर आ गए। वो उन्हें पकड़कर चूसने लगा। मैं आंखें बंद करके आनंद ले रही थी। सरिता अभी भी खड़ी थी, लेकिन अब वो भी अपने आप को छू रही थी।

“सरिता, आओ,” मैंने हाथ बढ़ाया।

सरिता मेरे पास आई। राघव ने मुझे छोड़ा और सरिता को पकड़ा।

उसने सरिता को किस किया। सरिता भी उसका साथ देने लगी। राघव ने सरिता की यूनिफॉर्म भी उतार दी। अब हम दोनों सिर्फ अंडरगारमेंट्स में थे।

राघव ने हम दोनों को बेड पर धकेल दिया। मैं और सरिता एक-दूसरे के पास लेट गए।

राघव ने अपने सारे कपड़े उतार दिए। उसका वो विशाल लंड हम दोनों के सामने था।

“कौन पहले चाहती है?” उसने पूछा।

“मैं,” मैंने कहा।

मैं उठी और उसके लंड को पकड़ा। मैंने उसे अपने मुंह में लिया।

वो इतना बड़ा था कि मुझे मुश्किल हो रही थी।

लेकिन मैं धीरे-धीरे उसे चूसने लगी। सरिता भी आ गई। वो राघव के बॉल्स चूसने लगी।

“ओह, यस… दोनों मिलकर करो,” राघव ने कहा।

हम दोनों मिलकर उसका लंड चूस रहे थे। कभी मैं, कभी सरिता।

हमारी जीभें उसके लंड पर घूम रही थीं।

राघव ने हमारे सिर पकड़े और अपना लंड हमारे मुंह में धकेलने लगा।

कुछ देर बाद, राघव ने मुझे बेड पर लिटाया। उसने मेरी पैंटी उतारी। मेरी योनि गीली थी, बहुत ज्यादा। उसने अपनी उंगली से मुझे छुआ।

“कितनी गीली हो तुम,” उसने कहा।

“हां, जल्दी करो,” मैंने कहा।

उसने अपने लंड का सिरा मेरी योनि पर रखा और धीरे से धक्का दिया।

मैं तंग थी, बहुत दिनों से किसी ने नहीं छुआ था। लेकिन वो धीरे-धीरे अंदर जाने लगा।

“ओह, राघव… यह बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।

“सहन करो मैडम, मजा आएगा,” उसने कहा।

उसने अपना पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया।

मैं चिल्लाई, लेकिन दर्द के साथ मजा भी आ रहा था।

वो हिलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, फिर तेजी से।

सरिता मेरे बगल में बैठी थी। राघव ने उसे इशारा किया।

सरिता ने अपनी योनि मेरे मुंह के पास ला दी।

मैंने उसे चाटना शुरू कर दिया। अब हम तीनों एक साथ थे।

राघव मुझे चोद रहा था, और मैं सरिता को चाट रही थी।

सरिता मेरे बूब्स को मसल रही थी। यह एक अजीब सा त्रिकोण था, लेकिन बहुत मजेदार।

“ओह, कविता, तुम बहुत टाइट हो,” राघव ने कहा।

“तुम भी बहुत बड़े हो,” मैंने कहा।

राघव ने मेरी टांगें अपने कंधों पर रख दी और और गहराई से चोदने लगा।

उसका लंड मेरी योनि की गहराई में जा रहा था। मैं झड़ने वाली थी।

“मैं झड़ने वाली हूं,” मैंने कहा।

“रुको, मैं भी आ रहा हूं,” राघव ने कहा।

उसने तेजी से धक्के लगाए। मैं झड़ गई। मेरी योनि ने उसके लंड को कसकर पकड़ लिया।

राघव भी झड़ गया। उसने अपना वीर्य मेरी योनि में ही छोड़ दिया।

हम दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। सरिता हमें देख रही थी, उसकी आंखों में लालसा थी।

“अब मेरी बारी,” सरिता ने कहा।

राघव ने मुझे छोड़ा और सरिता की तरफ मुड़ा। सरिता बेड पर लेट गई।

राघव ने उसकी पैंटी उतारी। उसकी योनि छोटी सी, गुलाबी थी।

“कितनी प्यारी है,” राघव ने कहा।

उसने सरिता की योनि को चाटना शुरू किया। सरिता आंखें बंद करके आनंद ले रही थी।

मैं उठकर उसके बगल में बैठ गई। मैंने सरिता के बूब्स पकड़े और उन्हें चूसने लगी।

कुछ देर बाद, राघव ने सरिता को चोदना शुरू किया। वो उसे मिशनरी पोजीशन में चोद रहा था।

सरिता की आवाजें निकल रही थीं। मैंने अपनी योनि में उंगली डालकर खुद को संतुष्ट करना शुरू कर दिया।

“हां, राघव, और तेज,” सरिता चिल्ला रही थी।

राघव ने तेजी से धक्के लगाए। बेड हिल रहा था।

मैंने देखा कि सरिता झड़ने वाली है। राघव ने भी अपनी स्पीड और बढ़ा दी।

“आह… आह…” सरिता चिल्लाई और झड़ गई।

राघव भी झड़ गया। उसने अपना वीर्य सरिता की योनि में छोड़ दिया।

हम तीनों थककर बेड पर पड़े थे। कोई बोल नहीं रहा था। बस हमारी सांसें चल रही थीं।

तभी, दरवाजा खुला। रीना अंदर आई।

वो थाने की सबसे युवा कांस्टेबल थी। उसने हमें देखा—तीनों नंगे, एक-दूसरे से लिपटे हुए।

रीना का मुंह खुला रह गया। “मैडम, यह… यह क्या…” वो कुछ बोल नहीं पाई।

मैं उठी। मैंने अपने कपड़े उठाए। “रीना, यह… यह एक गलती थी,” मैंने कहा।

रीना ने हमें देखा। उसकी आंखें पहले राघव के लंड पर गईं, फिर मेरी नंगी बॉडी पर, फिर सरिता पर।

“मैडम, मैं… मैं कुछ नहीं देखी,” रीना ने कहा और पीछे मुड़ने लगी।

राघव ने उसे रोका। “रुको, रीना। क्यों ना तुम भी शामिल हो जाओ?”

“क्या?” रीना ने हैरान होकर पूछा।

“हां, आओ। तुम भी मजा लो,” राघव ने कहा।

रीना ने मेरी तरफ देखा। मैंने उसे हाथ बढ़ाया। “आओ, रीना। कोई नहीं जानेगा,” मैंने कहा।

रीना थोड़ी हिचकिचाई, लेकिन फिर वो अंदर आ गई। राघव ने उसे पकड़ा और उसे किस किया।

रीना ने विरोध किया, लेकिन फिर वो भी शांत हो गई।

राघव ने रीना के कपड़े उतारने शुरू किए।

उसकी युवा बॉडी सामने आ गई—छोटे-छोटे बूब्स, कसी हुई गांड, गोरी त्वचा।

“वाह, क्या माल है,” राघव ने कहा।

उसने रीना को बेड पर लिटाया। मैं और सरिता उसके पास बैठ गए।

राघव ने रीना की योनि को चाटना शुरू किया। रीना आंखें बंद करके आनंद ले रही थी।

मैंने उसके बूब्स पकड़े और उन्हें चूसना शुरू कर दिया।

सरिता उसके पैरों के पास बैठी थी। हम तीनों मिलकर रीना को प्यार कर रहे थे।

कुछ देर बाद, राघव ने रीना को चोदना शुरू किया। रीना की आवाजें निकल रही थीं।

वो पहली बार थी, इसलिए थोड़ा दर्द भी हो रहा था, लेकिन वो मजा भी ले रही थी।

“ओह, राघव… यह बहुत अच्छा है,” रीना ने कहा।

राघव ने उसे चोदते हुए मुझे इशारा किया। मैं समझ गई। मैंने अपनी योनि रीना के मुंह के पास ला दी।

रीना ने उसे चाटना शुरू कर दिया। अब राघव रीना को चोद रहा था, और रीना मुझे चाट रही थी।

सरिता ने राघव के पीछे जाकर उसके बॉल्स चूसने शुरू कर दिए।

हम चारों एक साथ थे। यह एक ऐसा अनुभव था जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगी।

राघव ने रीना को लगभग 20 मिनट तक चोदा। फिर वो झड़ गया। उसने अपना वीर्य रीना की योनि में छोड़ दिया।

हम चारों थककर बेड पर पड़े थे। कोई बोल नहीं रहा था। बस हमारी सांसें चल रही थीं।

कुछ देर बाद, राघव उठा। उसने अपने कपड़े पहने। “मैडम, अब मुझे जाना चाहिए,” उसने कहा।

“कहां जाओगे? रुको,” मैंने कहा।

“नहीं, मैडम। मैं आऊंगा फिर। अगर आप लोग चाहें तो,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

“हां, आओ,” मैंने कहा।

राघव चला गया। मैं, सरिता और रीना एक-दूसरे को देख रहे थे।

“यह क्या हुआ?” रीना ने पूछा।

“यह हमारा सीक्रेट है। किसी को मत बताना,” मैंने कहा।

“मैं किसी को नहीं बताऊंगी,” रीना ने कहा।

हम तीनों ने कपड़े पहने और बाहर आ गए। थाना सामान्य लग रहा था, लेकिन हम तीनों बदल चुके थे।

उस रात के बाद, राघव हर हफ्ते आने लगा। हम चारों मिलकर मजा करते।

कभी-कभी और भी पुलिसकर्मी शामिल हो जाते। लेकिन यह हमारा सीक्रेट था, जो थाने की दीवारों में ही कैद रहा।

आज भी, जब मैं उस थाने में होती हूं, मुझे वो रात याद आती है।

वो रात जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। मैं अब और अकेली नहीं हूं। मेरे पास सरिता है, रीना है, और राघव है।

हम एक छोटा सा ग्रुप बना चुके हैं। हम पार्टीज करते हैं, ट्रिप्स पर जाते हैं, और एक-दूसरे के साथ खुश रहते हैं।

यह हमारी खुशी का राज है, जो हमारे बीच ही रहेगा।

तो यह थी मेरी कहानी।

अगर आपको पसंद आई हो तो मुझे जरूर बताना।

मैं और भी कहानियां सुनाऊंगी।

धन्यवाद।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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