पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-3

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PART 2: पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-2

राहुल के जाने के एक हफ्ते बाद, घर में फिर से वही माहौल बन गया था। लेकिन अब कुछ बदल गया था—प्रिया और अर्जुन के बीच का रिश्ता और भी गहरा हो गया था। वो अब सिर्फ शारीरिक आकर्षण से बंधे नहीं थे; उनके बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव था।

एक रात, जब रोहन अपनी नानी के यहां गया हुआ था, प्रिया ने अर्जुन से कहा, “आज मैं चाहती हूं कि हम पूरी रात एक साथ रहें। कोई जल्दी नहीं, कोई डर नहीं।”

अर्जुन ने उसके हाथ को चूमा। “मैं भी यही चाहता हूं।”

रात के दस बजे थे। प्रिया ने अपने कमरे में खास तैयारी की थी—हल्की सी खुशबू वाली अगरबत्ती, नरम रोशनी, और बिस्तर पर नए सफेद चादर। उसने एक खूबसूरत लाल रंग की साड़ी पहनी थी, जो अर्जुन को बहुत पसंद थी।

अर्जुन कमरे में आया तो उसने प्रिया को देखकर सांस रोक ली। वो दीपक की रोशनी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

“तुम बहुत खूबसूरत हो,” अर्जुन ने कहा।

प्रिया ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ बढ़ाया। “आओ।”

अर्जुन उसके पास गया। प्रिया ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होठों पर एक लंबा, गहरा चुंबन दिया। उसकी जीभ अर्जुन के मुंह में घुस गई, उसकी जीभ से खेलने लगी। अर्जुन ने भी जवाब दिया—उसने प्रिया की कमर को पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा।

दोनों एक-दूसरे में खो गए। प्रिया ने अर्जुन की कमीज उतारनी शुरू की, और अर्जुन ने प्रिया की साड़ी खोलनी शुरू की। धीरे-धीरे, एक-एक करके, दोनों के कपड़े बिस्तर पर गिरते गए।

कुछ ही मिनटों में, दोनों पूरी तरह नंगे थे। अर्जुन ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसने उसके पैरों से शुरुआत की—धीरे-धीरे चूमते हुए ऊपर आया। घुटनों, जांघों, फिर प्रिया की योनि के पास।

प्रिया ने अपने पैर फैलाए। अर्जुन ने उसकी योनि को चूमना शुरू किया—धीरे-धीरे, जीभ से चाटते हुए। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं और आनंद की आवाज निकाली। “हां, अर्जुन, हां…”

अर्जुन ने उसकी योनि की दोनों फांकों को अपने हाथों से फैलाया और अपनी जीभ अंदर डाल दी। वो ऊपर-नीचे करने लगा, प्रिया की क्लाइटोरिस को चाटते हुए। प्रिया का शरीर कांपने लगा—यह अनुभव बहुत तीव्र था।

“प्लीज, अब अंदर डालो,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ऊपर आया। उसने प्रिया के मुंह पर चुंबन किया ताकि वो अपना स्वाद खुद चख सके। फिर उसने अपना लिंग प्रिया की योनि के मुंह पर रखा।

“तुम तैयार हो?” अर्जुन ने पूछा।

“हां, मैं हमेशा तुम्हारे लिए तैयार हूं,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने एक धीमा सा धक्का दिया। उसका लिंग धीरे-धीरे अंदर जाने लगा। प्रिया की योनि गीली थी, और अर्जुन का लिंग पूरी तरह खड़ा था—8 इंच का, मोटा और कड़ा।

“ओह…” प्रिया ने आवाज निकाली जैसे अर्जुन का पूरा लिंग उसके अंदर घुस गया।

अर्जुन ने रुककर प्रिया को देखा। उसका चेहरा आनंद और प्यार से भरा हुआ था। “मैं तुमसे प्यार करता हूं,” उसने कहा।

“मैं भी,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने हिलना शुरू किया। धीरे-धीरे, पहले छोटे-छोटे धक्के, फिर थोड़ा तेज। प्रिया ने अपने पैर उठाकर अर्जुन की कमर पर रख दिए ताकि वो और गहराई से जा सके।

“तेज करो, अर्जुन, तेज,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने गति बढ़ाई। अब वो पूरी तरह से हिल रहा था—हर धक्के के साथ प्रिया की योनि में उसका लिंग पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। आवाजें आ रही थीं—चप-चप की आवाज, जो दोनों को और उत्तेजित कर रही थी।

प्रिया ने अर्जुन के कंधों को पकड़ा और अपनी कमर उछालनी शुरू कर दी। वो अर्जुन के हर धक्के का जवाब दे रही थी—जब वो अंदर आता, वो ऊपर उठती, और जब वो बाहर जाता, वो नीचे होती।

“तुम बहुत अच्छे हो,” प्रिया ने कहा।

“तुम भी,” अर्जुन ने कहा।

अर्जुन ने प्रिया की छातियों को अपने हाथों में भर लिया। वो उन्हें दबा रहा था, उनकी निपल्स को उंगलियों से मसल रहा था। प्रिया को दर्द और आनंद का मिश्रण महसूस हो रहा था—यह अविश्वसनीय था।

“मैं झड़ने वाली हूं,” प्रिया ने कहा।

“मैं भी,” अर्जुन ने कहा।

“एक साथ। हम एक साथ झड़ते हैं,” प्रिया ने कहा।

दोनों ने गति और बढ़ा दी। अर्जुन अब पूरी ताकत से हिल रहा था—हर धक्का प्रिया को बिस्तर पर धकेल रहा था। प्रिया ने अपने नाखून अर्जुन की पीठ में गाड़ दिए।

“अब!” प्रिया ने चिल्लाया।

दोनों एक साथ झड़े। प्रिया की योनि ने अर्जुन के लिंग को कसकर पकड़ लिया और सिकुड़ने लगी। अर्जुन ने प्रिया के अंदर अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया—एक के बाद एक झटके, जो प्रिया के अंदर भर गए।

दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े। अर्जुन ने अपने आप को प्रिया से अलग नहीं किया—वो उसी के अंदर रहा, धीरे-धीरे सिकुड़ता हुआ।

कुछ देर बाद, जब दोनों ने अपनी सांसें सामान्य कीं, अर्जुन ने प्रिया के बगल में लेट गया। प्रिया ने उसे अपनी बांहों में भर लिया।

“यह स्वर्ग जैसा था,” अर्जुन ने कहा।

“हमेशा की तरह,” प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।

उस रात, दोनों ने तीन बार प्यार किया—हर बार नई तरह से, नई जगह पर। एक बार बाथरूम में, एक बार फर्श पर, और एक बार फिर बिस्तर पर। दोनों थककर चूर हो गए, लेकिन संतुष्ट थे।

अगली सुबह, जब सूरज की पहली किरण खिड़की से आई, प्रिया जागी। अर्जुन उसकी बांहों में सो रहा था। उसने उसके बालों में हाथ फेरा।

अर्जुन की आंख खुली। “सुबह हो गई?”

“हां,” प्रिया ने कहा।

“मैं कॉलेज जाना है?”

“नहीं, आज रविवार है।”

अर्जुन ने मुस्कुराते हुए प्रिया को अपनी ओर खींचा। “तो फिर थोड़ी देर और सोते हैं।”

“ठीक है,” प्रिया ने कहा और उसकी बांहों में समा गई।

उस दिन दोपहर को, दोनों उठे। प्रिया ने नहाने के लिए गर्म पानी तैयार किया, और दोनों ने साथ में नहाया। बाथरूम में भी दोनों ने एक-दूसरे को छुआ, चूमा, और फिर से प्यार किया।

नहाने के बाद, प्रिया ने अर्जुन से गंभीरता से बात की। “सुनो, हमें भविष्य के बारे में सोचना होगा।”

“क्या मतलब?” अर्जुन ने पूछा।

“मतलब यह कि यह रिश्ता हमेशा ऐसे ही नहीं चल सकता। कभी न कभी राहुल को पता चल जाएगा, या किसी और को। हमें एक रास्ता सोचना होगा,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने सोचा। “क्या तुम मेरे साथ भागना चाहती हो?”

“नहीं, अर्जुन। मैं राहुल को छोड़कर नहीं जा सकती। वो मेरे पति हैं, और मैं उनकी पत्नी हूं। लेकिन मैं तुम्हें भी नहीं खोना चाहती।”

“तो फिर क्या करें?” अर्जुन ने पूछा।

“मैंने सोचा है। तुम्हें नौकरी करनी होगी। कोलकाता जाना होगा, अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। जब तुम स्थापित हो जाओगे, तब हम सोचेंगे कि आगे क्या करना है। शायद… शायद एक दिन हम साथ रह पाएं,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने उसे देखा। “तुम चाहती हो कि मैं यहां से जाऊं?”

“अर्जुन, यह मेरे लिए भी मुश्किल है। लेकिन यह हमारे भविष्य के लिए जरूरी है। अगर हम यहां पकड़े गए, तो सब खत्म हो जाएगा। तुम्हारी पढ़ाई, तुम्हारा करियर, सब कुछ।”

अर्जुन ने समझा। उसे पता था कि प्रिया सही कह रही थी। लेकिन उसे यहां से जाने का विचार भी दर्द दे रहा था।

“कब जाना होगा?” उसने पूछा।

“जल्दी। इसी साल। तुम कॉलेज खत्म करो, फिर मैं राहुल से बात करूंगी। वो तुम्हारे लिए कोलकाता में नौकरी का इंतजाम कर देंगे,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने उसे गले लगाया। “मैं जाऊंगा। लेकिन मैं तुम्हें हर रोज याद करूंगा।”

“मैं भी,” प्रिया ने कहा।

अगले छह महीने, दोनों ने एक-दूसरे का पूरा साथ दिया। जब भी मौका मिलता, वो एक-दूसरे के पास होते। रातों को, जब रोहन सो जाता, वो एक-दूसरे को पाते। कभी-कभी दिन में भी, जब घर में कोई नहीं होता।

उनके रिश्ते में अब एक नई गहराई थी। वो सिर्फ शारीरिक साथी नहीं थे; वो एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त थे, एक-दूसरे का सहारा थे।

छह महीने बाद, अर्जुन का कॉलेज खत्म हुआ। राहुल ने कोलकाता में उसके लिए एक छोटी सी नौकरी का इंतजाम कर दिया। विदाई का दिन आया।

प्रिया ने अर्जुन को स्टेशन तक छोड़ने जाने से मना कर दिया। वो नहीं चाहती थी कि कोई उन्हें एक साथ देखे और शक करे। वो घर पर ही रही।

अर्जुन ने प्रिया को अपनी बांहों में भरा। “मैं जा रहा हूं। लेकिन मेरा दिल यहीं रहेगा, तुम्हारे पास।”

“मुझे पता है,” प्रिया ने कहा, आंखों में आंसू लिए। “तुम जाओ। और वहां अच्छे से रहना।”

“मैं तुम्हें फोन करूंगा हर रोज,” अर्जुन ने कहा।

“हां,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने उसे आखिरी बार चूमा—एक लंबा, गहरा चुंबन जिसमें उनका सारा प्यार था। फिर वो चला गया।

प्रिया खिड़की से उसे जाते हुए देखती रही। उसके दिल में दर्द था, लेकिन साथ ही एक उम्मीद भी—कि एक दिन, शायद, वो फिर से एक होंगे।

कोलकाता में, अर्जुन ने मेहनत से काम किया। वो हर रोज प्रिया को फोन करता—कभी घर के फोन पर, कभी पड़ोस के एसटीडी बूथ से। वो हर महीने एक बार घर आता, और हर बार प्रिया से मिलता—छुपकर, जल्दी में, लेकिन प्यार से।

साल बीतते गए। अर्जुन ने कोलकाता में अच्छी नौकरी कर ली। उसने एक छोटा सा फ्लैट किराए पर लिया। एक दिन, उसने प्रिया से कहा, “आओ, एक बार मेरे यहां। राहुल भैया से कहो कि तुम अपनी मां से मिलने जा रही हो।”

प्रिया ने सोचा, फिर हां कर दी। वो एक हफ्ते के लिए कोलकाता गई—राहुल को यह कहकर कि उसकी मां बीमार है।

उस हफ्ते, प्रिया और अर्जुन ने अर्जुन के फ्लैट में एक साथ रहने का अनुभव किया—जैसे पति-पत्नी, जैसे एक साधारण जोड़ा। वो सुबह उठते, साथ नाश्ता करते, फिर अर्जुन ऑफिस जाता और प्रिया घर का काम करती। शाम को अर्जुन लौटता, और दोनों साथ में समय बिताते।

वो सात दिन स्वर्ग जैसे थे। लेकिन फिर प्रिया को वापस जाना पड़ा।

“मैं नहीं जाना चाहती,” उसने अर्जुन से कहा।

“मुझे पता है। लेकिन अभी हमें इंतजार करना होगा। थोड़ा और समय,” अर्जुन ने कहा।

प्रिया वापस आ गई। लेकिन अब उसके मन में एक नई उम्मीद थी। उसने सोचा कि शायद, एक दिन, जब रोहन बड़ा हो जाएगा, जब वो समझदार हो जाएगा, तब वो राहुल से बात करेगी। शायद वो राहुल को समझा पाएगी कि उनके बीच क्या था, क्या नहीं।

साल और बीतते गए। रोहन अब दस साल का हो गया था। अर्जुन कोलकाता में अच्छी पोजीशन पर था। उसने एक बड़ा फ्लैट खरीद लिया था।

एक दिन, राहुल को अपने ऑफिस से ट्रांसफर मिली—कोलकाता में ही, लेकिन एक अलग ब्रांच में। प्रिया को यह खबर मिली तो उसका दिल जोर से धड़का। क्या यह संयोग था, या किस्मत?

राहुल ने प्रिया से कहा, “क्या तुम कोलकाता चलना चाहोगी? मैं वहां जा रहा हूं। अर्जुन भी वहीं है। हम तीनों एक साथ रह सकते हैं।”

प्रिया ने हां कह दी। उसके मन में एक अजीब सी उम्मीद थी—कि शायद, कोलकाता में, वो और अर्जुन और करीब आ पाएंगे।

कोलकाता में, तीनों ने एक साथ रहना शुरू किया। राहुल अपने ऑफिस में व्यस्त रहते, अर्जुन अपने काम में, और प्रिया घर संभालती। लेकिन अब, रात को, अर्जुन घर आता था—उसी घर में जहां प्रिया थी।

राहुल को नहीं पता था, लेकिन प्रिया और अर्जुन फिर से एक-दूसरे के पास थे। रात को, जब राहुल गहरी नींद में होते, प्रिया अर्जुन के कमरे में जाती। या कभी-कभी, दिन में, जब राहुल ऑफिस जाते।

उनका रिश्ता अब और भी मजबूत हो गया था। वो अब बूढ़े नहीं थे—प्रिया 35 की हो गई थी, और अर्जुन 28 का। दोनों समझदार थे, परिपक्व थे।

एक दिन, प्रिया ने अर्जुन से कहा, “मैं राहुल से बात करने वाली हूं।”

“किस बारे में?” अर्जुन ने पूछा।

“हमारे बारे में। मैं और नहीं छुपा सकती यह रिश्ता। मैं चाहती हूं कि वो जाने। शायद वो समझ जाएं,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने डरते हुए कहा, “क्या अगर वो नाराज हो गए? क्या अगर उन्होंने तुम्हें छोड़ दिया?”

“तो फिर तुम मुझे अपना लेना,” प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।

उस रात, प्रिया ने राहुल से बात की। उसने उन सब कुछ बताया—कैसे यह शुरू हुआ, क्यों हुआ, और अब क्या था।

राहुल ने सुना, फिर चुप रहे। लंबी खामोशी के बाद, उन्होंने कहा, “मुझे पता था। मुझे हमेशा से पता था।”

प्रिया चौंक गई। “क्या?”

“मैंने उस रात देखा था, दिवाली वाली रात, जब तुम दोनों मेरे बगल में थे। मैंने सब देखा था। लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा क्योंकि मैं जानता था कि मैं तुम्हें वो नहीं दे पाता जो तुम चाहती थीं। मैंने सोचा, शायद यह तुम्हारी खुशी के लिए जरूरी है,” राहुल ने कहा।

प्रिया की आंखों से आंसू बहने लगे। “तुम्हें माफ कर दो। मैंने तुम्हें धोखा दिया।”

“नहीं, प्रिया। तुमने मुझे खुश रखा। तुमने इस घर को बचाए रखा। और अर्जुन… वो मेरा भाई है। मैं जानता हूं वो तुम्हें प्यार करता है। और तुम भी उसे प्यार करती हो,” राहुल ने कहा।

“अब क्या होगा?” प्रिया ने पूछा।

राहुल ने सोचा। “मैं यहां से जा रहा हूं। मुझे दुबई में नौकरी मिली है। मैं चाहता हूं कि तुम मेरे साथ चलो, लेकिन मुझे पता है तुम नहीं आओगी। तो मैं अकेले जा रहा हूं। रोहन मेरे साथ आएगा—वो अब बड़ा हो गया है, उसे अच्छी शिक्षा की जरूरत है। और तुम… तुम अर्जुन के साथ रहो।”

प्रिया ने राहुल को गले लगाया। “तुम बहुत अच्छे हो।”

“मैं तुमसे प्यार करता हूं, प्रिया। हमेशा करता रहूंगा। लेकिन अब मुझे जाना होगा,” राहुल ने कहा।

अगले महीने, राहुल दुबई चले गए। रोहन भी उनके साथ था। प्रिया और अर्जुन कोलकाता में अकेले रह गए।

अब कोई छुपने की जरूरत नहीं थी, कोई डर नहीं था। दोनों ने शादी की—एक छोटी सी, निजी शादी, जिसमें सिर्फ कुछ करीबी दोस्त थे।

प्रिया अब 45 साल की है, और अर्जुन 38 के। दोनों अभी भी एक साथ हैं, अभी भी प्यार में हैं। उनका रिश्ता शायद दुनिया के नजर में गलत था, लेकिन उनके लिए यह सच्चा प्यार था।

और इसीलिए, आज, जब मैं यह कहानी बता रही हूं, मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैंने प्यार किया, और प्यार पाया।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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