गे, लेस्बियन, पति की अदला-बदली सेक्स- 2

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स्टेल सेक्स फ्रेश सेक्स कहानी में शादी के कुछ साल बाद अपनी पत्नियों से बोर हुए तो उनकी नजर बीवी की सहेली पर टिकी. बीवियां भी अपने पतियों की नजर को पहचान गयी.

दोस्तो, मैं रतन दत्त आपको एक ग्रुप सेक्स कहानी लिख रहा था.
कहानी के पहले भाग
तीन सहेलियों ने पहली बार समलिंगी सेक्स का मजा लिया
में अब तक आपने पढ़ा था कि संजीव और हिमांशु दोस्त थे, उनकी अपनी अपनी दुकान थी.
उनके तीसरे दोस्त शर्माजी नौकरी करते थे.
तीनों की पत्नियां संजना, हेमलता और शर्माजी की पत्नी उषा आपस में अच्छी सहेलियां हो गई थीं और लेस्बियन सेक्स का मजा लेने लगी थीं.

अब आगे की स्टेल सेक्स फ्रेश सेक्स कहानी संजना की जुबानी सुनिए :

शनिवार रविवार बच्चों की छुट्टी होती, संजीव और हिमांशु के पिता कार भेज देते, तो हमारे बच्चे दादा दादी के घर चले जाते.

शनिवार रविवार दुकान में ज्यादा भीड़ होती, तो मैं और हेमलता पतियों की मदद करने दुकान चली जातीं.

मैंने देखा कि जब कोई सेक्सी महिला संजीव से हंसकर बातें करती, संजीव खिल उठता.
वह उस महिला से बहुत सी बातें करता.

जिस दिन संजीव किसी सेक्सी महिला से बात करता, वह उस रात बहुत जोश में होता और मेरे साथ जमकर सम्भोग करता.
सम्भोग के समय अपनी आंख बंद रखता, मुझे अंदाजा हो गया कि संजीव उस सेक्सी महिला को याद करके मेरे साथ सम्भोग कर रहा है.

मैंने इस बात की चर्चा हेमलता से की.
हेमलता ने बताया कि हिमांशु भी ऐसा करता है.

एक शनिवार की शाम एक सेक्सी महिला आयी जो अक्सर संजीव से बात करती थी.
वह अक्सर अकेली आती थी.

उस दिन उसने संजीव से काफी देर बात करने के बाद संजीव को घर आने का निमंत्रण दिया.

साथ ही उसने थोड़ा सा सामान भी खरीदा.
मैं कैश काउंटर पर थी, बिल बनाते समय मैंने उसका नाम पूछा, तो नाम पता चला.
वह पामेला थी.
शायद वह ईसाई थी.

मैंने पामेला को बताया कि मैं संजीव की पत्नी हूँ और उससे कहा कि आपने संजीव को अपने घर आने का निमंत्रण दिया, हम दोनों ही आएंगे.
पामेला ने कोई जवाब नहीं दिया.
शायद उसे यह बात पसंद नहीं आयी थी कि मैं संजीव के साथ उसके घर जाउंगी.

उस रात संजीव जोश में मेरे साथ आंख बंद करके सम्भोग कर रहा था.
मैं भी अपनी कमर उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी.

सम्भोग के बाद हम दोनों लेटे थे.

मैं- संजीव, मुझे तुमसे एक बात पूछनी है, सच बताना. मैं वादा करती हूँ कि बुरा नहीं मानूँगी.
संजीव- पूछो.

मैं- सम्भोग के समय तुम क्या आंख बंद कर पामेला को याद कर रहे थे?
यह सुनकर संजीव चुप रहा.

मैं- इसमें बुरा कुछ नहीं है, मैंने पत्रिका में पढ़ा है, ऐसी फैंटेसी बहुत लोगों में होती है.
संजीव ने स्वीकार किया कि वह मुझे चोदते समय पामेला को याद कर रहा था. यानि वह मुझे पामेला समझ कर सम्भोग कर रहा था.

‘तुम कभी पामेला के घर गए हो?’
संजीव- पामेला ने मुझे उसके घर आने को कई बार कहा, मैं दुकान की व्यस्तता के कारण कभी जा ही नहीं पाया!

दूसरे दिन मैंने हेमलता को पामेला के बारे में बताया और संजीव से क्या बात हुई, वह सब बताया.

हेमलता- पिछले हफ्ते एक सेक्सी महिला रोजी हमारे दुकान पर आकर हिमांशु से घुल मिलकर बात कर रही थी, उसने भी मेरे पति हिमांशु से कहा था कि उसे हिमांशु से बात करना बहुत अच्छा लगता है. वह हिमांशु से बोली भी कि कभी बाहर भी मिलिए. मैं पास ही रहती हूँ.
मैंने कहा- अच्छा फिर क्या हुआ?

हेमलता- रोजी को जो सामान चाहिए था, वह स्टॉक में नहीं था, तो हिमांशु ने उसे बताया कि वह सामान रोजी के घर शाम तक पहुंचा देगा.
शाम को जब मैंने हिमांशु से कहा कि मैं घर जा रही हूँ. रसीद पर रोजी का पता है, वह घर के रास्ते में पड़ता है. मैं उसे सामान दे दूंगी.

हिमांशु चुप रहा और हां कह कर अपने काम में लग गया.
जब मैं रोजी के घर गयी, तो देखा कि वह अकेली रहती थी.

उस रात हिमांशु ने मेरे साथ धुआंधार सम्भोग किया, आंख बंद करके मुझे हचक कर पेला. शायद वह रोजी को याद कर रहा था.

मैं और हेमलता चिंतित थीं और चर्चा कर रही थीं कि पुरुष स्वाभाव से बहुगामी होते हैं. शादी के इतने सालों बाद हमारा सेक्स जीवन नीरस हो गया था, उनको बाहर वाली महिला आकर्षित कर रही थी.

हम दोनों सोचने लगीं कि यदि हमारे पति बाहर की महिलाओं के चक्कर में पड़ गए तो कुछ भी हो सकता है.
वे उन महिलाओं पर रूपए बर्बाद कर सकते हैं, बदनामी, यौन बीमारी भी हो सकती है और हमारे घर भी टूट सकते हैं.

अब हम दोनों ने तय किया कि जब पति लोग रात को घर आते हैं, तो हम थोड़ा सजधज कर रहेंगी, उनका प्यार से स्वागत करेंगी.

मेरा और हेमलता का फ्लैट पास पास था.
रात को मैं और हेमलता सजकर फ्लैट से बाहर पतियों का इन्तजार कर रही थीं.

संजीव और हिमांशु घर वापस आए तो मैंने देखा कि संजीव मुझे नहीं, वरन हिमांशु की पत्नी हेमलता को निहार रहा था.
वह हेमलता से बातें करने लगा.

उधर हिमांशु भी मुझे निहारते हुए मुझसे बातें करने लगा.

काफी देर बाद पति लोग अपने अपने घर में घुसे.
हालांकि उन दोनों ने हम दोनों को खूब मजे से चोदा.

फिर ऐसा हर रोज होने लगा.

कुछ दिनों बाद मैं हेमलता के साथ लेस्बियन सेक्स का आनन्द ले रही थी.
उस दिन उषा नहीं आयी थी.

मैंने हेमलता को चूमकर उसके चूचे दबाकर कहा- मेरे पति संजीव तुझे पसन्द करते हैं, रात को दुकान से आने के बाद तुझे प्यार से निहारते हैं, तुझसे बात करते हैं. उसके बाद ही घर में घुसते हैं.
हेमलता ने मेरे चूचे चूसकर कहा- और मेरे पति हिमांशु तुझे देखकर खिल उठते हैं. हंस-हंस कर मीठी मीठी बातें करते हैं.

मैंने आंख दबा कर कहा- लेकिन उसके बाद मेरे पति मुझे मजे लेकर चोदते भी हैं. शायद वे तुझे याद करके ही मेरी लेते हैं.
यही बात हेमलता ने कही- शायद हिमांशु भी तुझे याद करके मेरी चुदाई करते हैं.

हम दोनों ने तय किया कि हमें इस बात की पुष्टि करना चाहिए कि क्या यह यौन आकर्षण है?

अब हम दोनों ने योजना बनाई.
पति को क्या पसन्द है, एक दूसरे को बताया.

हमारे पति सुबह 10 बजे दुकान जाते थे.

योजना अनुसार मैंने संजीव को सुबह 9 बजे नाश्ता दिया और ‘बाथरूम जा रही हूँ’ कहकर बाथरूम चली गयी.

मेरे बाथरूम में जाते ही हेमलता ने हमारे फ्लैट की घंटी बजायी, संजीव ने दरवाज़ा खोला.
हेमलता ने साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज पहना था और बालों को पोनीटेल से बांधा था.
वह बहुत सेक्सी लग रही थी.

हेमलता- संजीव, मैं आपकी पसन्द का हलवा लायी हूँ.
यह कहकर उसने हलवा का डब्बा टेबल पर रखा और हाथ उठाकर अपने बालों को ठीक करने लगी.

संजीव हेमलता की चिकनी साफ़ कांख देखकर अपने होंठों पर जीभ फिराने लगा.

संजीव- हेमलता बैठो, मेरे साथ नाश्ता करो.
हेमलता बैठ गयी.

संजीव ने उसे नाश्ता परोसा.
वह हेमलता के रूप गुण की तारीफ़ करके फ़्लर्ट करने लगा.

वापस जाने से पहले हेमलता ने बाथरूम के बाहर से मुझे आवाज देकर कहा- मैं जा रही हूँ.
उसके जाने के बाद मैं बाथरूम से निकली.

दोपहर को हेमलता ने मुझे सब बताया.

अगले दिन योजना अनुसार मैंने सुबह 9.30 पर हेमलता के फ्लैट की घंटी बजायी.
हिमांशु ने दरवाज़ा खोला.
उस वक्त हेमलता बाथरूम में थी.

मैंने झीनी जॉर्जेट की गुलाबी नाभिदर्शना साड़ी, लाल खुले गले का ब्लाउज पहना था, मेरे बाल खुले थे.
मेरे हाथ में पकौड़े की प्लेट थी.

मैं मुस्कुरा कर अन्दर आ गयी.
झीनी साड़ी से ब्लाउज में ढके मेरे 34-बी के चूचों को हिमांशु कनखियों से देख रहा था.
उसकी पत्नी हेमलता के चूचे मुझसे छोटे 32-बी के थे.

फिर उसकी नज़र मेरे पेट और गहरी नाभि पर गयी.

मैं- क्या देख रहे हो, मैं तुम्हारी पसन्द के पकौड़े लायी हूँ.

हिमांशु ने मुझे उसके साथ नाश्ता करने को कहा, उसने नाश्ता परोसा.

वह कहने लगा- संजना, तुमसे बात करना मुझे बहुत अच्छा लगता है.
मैंने इठलाकर कहा- और मैं कैसी लगती हूँ?

हिमांशु मेरे रूप की तारीफ कर फ्लर्ट करने लगा.
वापस जाने से पहले मैंने बाथरूम के बाहर से हेमलता से कहा- मैं जा रही हूँ.

मेरे जाने के बाद हेमलता बाथरूम से निकल आई.

दोपहर को मैंने हेमलता को सब बताया.
हमें दूसरे पुरुष से इतना अटेंशन मिल रहा था, उससे हम दोनों मन ही मन में खुश थे.
पति ने कभी हमें नाश्ता नहीं परोसा था.

शादी के एक साल तक हमारे सुंदरता की तारीफ की, फिर वह भी बंद हो गया.
यानि घर की मुर्गी दाल बराबर.

हमारा नाश्ते का आदान-प्रदान एक महीने से चल रहा था.
अब हिमांशु मेरे … और संजीव हेमलता के होंठ चूमने लगा था. वे लोग हम दोनों के चूचे भी दबाने लगे थे और हम दोनों भी उनका साथ दे रही थीं.

मैं और हेमलता एक दूसरे को बतातीं कि आज क्या हुआ.

शनिवार रविवार मैं और हेमलता अपने पति की मदद करने दुकान जाती थीं तो हमने देखा कि अब हमारे पति उनके दुकान में आयी सेक्सी महिलाओं से पहले की तरह घुल-मिल कर बात नहीं करते, सिर्फ काम की बात करते हैं.
शायद वे घर पर ही दोस्त की पत्नी की निकटता से संतुष्ट होने लगे थे.

मैं और हेमलता गप्प मारने बैठ गईं.

मैं- एक बात अच्छी हुई कि अब हमारे पति दुकान में सेक्सी महिलाओं से निकटता नहीं बढ़ाते. पर लगता है हिमांशु मेरे साथ सम्भोग करने को बेकरार है.
हेमलता- हां, संजीव भी मेरे साथ सम्भोग के लिए बेकरार है.

मैंने शरारत से कहा- तेरे पति हिमांशु से यौन क्रीड़ा की कल्पना कर मेरे बदन में झुरझुरी हो रही है.
हेमलता- मेरा भी यही हाल है, संजीव के बारे में सोचकर … पर संजना सोच ले … हिमांशु खिलाड़ी है. उसमें गजब की ताकत है. जब वह करारे झटके से चोदता है, तो मुझे पूरा थका देता है. चुदाई के बाद मैं थककर सो जाती हूँ, तू झेल पाएगी?

मैं- संजीव की चुदाई का तरीका अलग है, वह इत्मीनान से प्यार से काफी देर चोदता है. तू इतनी देर चुदाई झेल पाएगी?

उस दिन लेस्बियन सेक्स के लिए उषा नहीं आयी थी.

हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए, चूमा चाटी करने लगीं.
हेमलता चित लेटी थी, मैं हेमलता की जांघों के बीच घुटनों पर बैठकर उसकी की चूत चूसने लगी.

फिर चूत चूसना रोककर मैंने हेमलता से कहा- कल्पना कर कि संजीव तेरी चूत चूस रहा है.
मैं फिर से चूत चूसने लगी.

संजीव का नाम सुनकर हेमलता को ज्यादा ही जोश आ गया था. वह मेरा सर चूत में दबाने लगी और कुछ ही देर में झड़ गयी.
हेमलता ने मेरी चूत चूसने के पहले कहा- अब हिमांशु तेरी चूत चूसेगा.

इस बात की कल्पना कर चूत चुसवाते समय मुझे नया जोश आया.
मैं भी जल्द ही झड़ गयी.

झड़ने के बाद हम दोनों शांत लेटी थीं.

दोस्तो, अब संजना और हेमलता मानसिक रूप से अपने पतियों को अदल-बदल कर अपनी चुत चुदवाने के लिए तैयार हो चुकी थीं.

उनकी इस बात को किस तरह से अमल में लाया गया और उन दोनों ने किस तरह से अपने पति बदल चुदाई का मजा लिया, यह सब आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में पढ़ने को मिलेगा.

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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