wife change sex kahani
वाइफ चेंज सेक्स कहानी में बीवियों ने मिल कर ग्रुप डिनर किया लेकिन उद्देश्य था कि पतियां को अदल बदल कर सेक्स का मजा लेना. डिनर के बाद पत्नियां बेडरूम में चली गयी.
दोस्तो, मैं आपका साथी रतन दत्त अपने पाठक की एक सेक्स कहानी लिख रहा था, जिसमें पति पत्नियों के समूह ने ग्रुप सेक्स का अलग अलग तरह से मजा लिया था.
कहानी के दूसरे भाग
तीन सहेलियों ने पहली बार समलिंगी सेक्स का मजा लिया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि संजना और हेमलता अपने अपने पति से चुदवाती हुई इस बात को महसूस कर चुकी थी कि उनके पति एक दूसरे की बीवी को अपने लौड़े के नीचे लेना चाहते थे.
संजना और हेमलता भी अपना मन बना चुकी थीं कि वे भी अपने पतियों को अदल बदल कर सेक्स का मजा ले लें.
अब आगे संजना की कलम से वाइफ चेंज सेक्स कहानी सुनें :
फ्रेंड्स, मैं संजना आपको बता रही थी कि जब से संजीव हेमलता के करीब आया था, वह मेरे साथ पहले से ज्यादा सम्भोग करने लगा था.
पर सम्भोग के समय आंख बंद कर लेता, मुझे यकीन था कि वह अपने लंड से हेमलता की चुदाई को याद करता है.
हिमांशु भी हेमलता के साथ आंख बंद कर सम्भोग करता.
एक दो बार सम्भोग की चरम सीमा पर पहुंच कर वह कह उठा- आह संजना, मजा आ गया.
यह सुनकर मैं समझ गई कि अब वक्त आ गया है कि खेल खुल कर खेला जाना चाहिए.
उस दिन हम दोनों सहेलियों ने सोचा कि अब क्या करना चाहिए.
उस रात जब संजीव मेरे साथ आंख बंद कर सम्भोग कर रहा था, तो मैंने उससे पूछा- तुम इस वक्त अपने साथ हेमलता की कल्पना कर रहे हो न?
संजीव ने बिना झिझक कहा- हां, उसके साथ सेक्स करने की इच्छा है, तुम्हें कोई आपत्ति न हो, तो हेमलता को राजी करो.
मैं बोली- हां हेमलता भी तुम्हें पसंद करती है … पर मेरा क्या होगा?
संजीव- मुझे पता है तुम हिमांशु को पसन्द करती हो और हिमांशु तुम्हें, यदि तुम उसके साथ सेक्स का आनन्द लो मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी. वैसे भी तुम्हारा और हेमलता का परिवार नियोजन का ऑपरेशन हो गया है, बच्चा होने की संभावना नहीं है.
हेमलता की भी अपने पति से ऐसी ही बात हुई.
नए फ्लैट में आने के बाद उस दिन मेरी और संजीव की शादी की सालगिरह थी.
संजीव ने हिमांशु, हेमलता को डिनर पर आमंत्रित किया था.
शनिवार की रात थी और आपको मैंने ऊपर बताया था कि शनिवार को बच्चे दादा के घर जाते थे.
पार्टी में संजीव वोदका ले आया था, मैंने और हेमलता ने पहली बार वोदका पी, खूब मजा आया.
हम चारों में खूब हंसी मजाक हुआ था.
इससे पहले तक मेरे पति संजीव, हेमलता के प्रति … और हिमांशु मेरे प्रति आकर्षित नहीं थे.
पर अब परिस्थिति बदल चुकी थी.
तीन दिन बाद हिमांशु हेमलता की शादी की सालगिरह थी, पार्टी उसके बाद के शनिवार को होना तय हुई.
पार्टी की रात हेमलता ने संजीव की पसन्द की पोनीटेल बांधी, स्लीवलेस सेक्सी ब्लाउज पहना.
मैंने हिमांशु की पसन्द के अनुसार बाल खुले रखे, नाभिदर्शना पतली साड़ी पहनी.
हम चारों में वोदका पीना शुरू हुआ.
उस दौरान हेमलता हाथ उठाकर बाल ठीक करती, तो संजीव उसकी चिकनी कांख को निहारने लगता.
हिमांशु मेरे सेक्सी पेट, पतली साड़ी के अन्दर ब्लाउज में छुपे 34-बी के चूचे बार बार देख रहा था.
हमारे पति आपस कुछ इशारे कर रहे थे.
एक एक पैग के बाद मैं और हेमलता यह कह कर उठीं कि हम लोग और चखना लाती हैं.
यह कहकर हम दोनों किचन में आ गईं.
किचन से हमने देखा हम दोनों के पति आपस में कुछ बात कर रहे हैं, जो हमें सुनाई नहीं दिया.
हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराईं और चखना की प्लेट लेकर कमरे में आ गईं.
उधर हम दोनों ने एक एक छोटा पैग और पिया.
फिर कुछ अश्लील मजाक के बाद संजीव ने मुझे … और हिमांशु ने हेमलता को बेडरूम में जाने को कहा.
हम दोनों अलग अलग बेडरूम में आ गईं और अपने अपने पतियों का इंतज़ार करने लगीं.
मुझे सुखद आश्चर्य हुआ, जब बेडरूम में मेरे पति संजीव नहीं बल्कि हिमांशु आया, मैं खड़ी थी.
हिमांशु ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे अपनी बांहों में भर कर बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया.
मैं भी वोदका की मस्ती में थी तो उसका साथ देने लगी.
हम दोनों ने इससे पहले भी चूमा चाटी की थी, पर आज बात अलग थी.
मेरा आंचल गिर गया, हिमांशु ने मेरा ब्लाउज उतार दिया और वह मेरे चूचों की घाटी को चूमने लगा.
वह मेरे चूचे ब्रा के ऊपर से दबाने लगा.
फिर उसने मेरी ब्रा को उतार दिया, तो मेरे चूचे एकदम से बाहर आ गए.
वह मेरे दोनों दूध दबा दबा कर चूसने लगा.
वह कहने लगा- संजना, तुम्हारे चूचे कितने मस्त हैं!
उसकी बात सुनकर मुझे थोड़ी शर्म आ रही थी.
हिमांशु ने आसानी से मुझे गोद में उठाया और प्यार से पलंग पर लिटा दिया, वह मेरी नाभि को चूमने लगा.
मैं मदमस्त होकर सिसकारी ले रही थी.
हिमांशु ने मेरी साड़ी व साया उतार दिया, उसने अपने कपड़े भी उतार दिए.
मैंने देखा कि हिमांशु का खड़ा लंड मेरे पति के लंड के समान ही करीब साढ़े पांच लम्बा था.
मैं भी केवल पैंटी में लेटी थी.
हिमांशु मेरे पैरों को चूमते ऊपर आया, फिर मेरी भरी जांघें चूमने के बाद उसने दांतों से पकड़ कर मेरी पैंटी उतार दी.
उसका दांत से पैंटी उतारने का तरीका मुझे बड़ा रोमांटिक लगा.
मैं चित घुटने मोड़कर जांघ फैलाकर लेटी थी, हिमांशु ने चूत को चूमा … फिर वह घुटनों पर बैठकर मेरी गीली हो चुकी चूत में अपना लंड घिसने लगा.
मैं कमर उठाकर लंड अन्दर लेने की कोशिश कर रही थी.
तभी हिमांशु ने एक झटके में लंड चूत में पेल दिया.
उसके दमदार झटके से मैं दहल गई.
वह मुझे धकापेल चोदने लगा.
उसका चोदने का तरीका निराला था.
वह लंड को चूत से बाहर निकालता, सिर्फ लंड का सुपारा भर चूत में रहता, फिर झटके से लंड चूत में पेल देता.
उसके हर झटके के साथ मेरे चूचे डोल रहे थे.
वह मेरे डोलते चूचों को देखकर ऐसे खुश हो रहा था, जैसे बच्चे नया खिलौना देखकर खुश होते हैं.
उसके करारे झटकों से मेरे बदन का हर जोड़ हिल जाता.
मैं कुछ देर में ही झड़ गयी.
उधर हिमांशु की चोदने की गति बढ़ती जा रही थी.
फिर वह अपनी चरम स्थिति पर आया तो उसने ने एक आखिरी झटका दिया और माल छोड़ने लगा.
उसके लंड से निकले वीर्य से मेरी चूत भर गयी.
मैंने चुदाई शुरू होने से पहले दीवार घड़ी को देखा था.
उसने मेरी चुदाई 15 मिनट तक की थी पर मुझे लग रहा था हिमांशु मुझे बहुत देर से चोद रहा था.
मैं थक गयी थी.
हिमांशु मेरे ऊपर लेटा रहा, जब लंड सिकुड़ कर चूत से पक्क की आवाज़ से बाहर निकला, तब वह मेरे बदन से नीचे उतरा और मेरे पास लेट गया.
हिमांशु- संजना, मेरी इतने दिनों की तम्मना पूरी हुई, मजा आ गया!
मैं- मुझे भी मजा आया, तुमने मुझे थका दिया!
हम दोनों ने कपड़े पहने और ड्राइंगरूम में आ गए.
हेमलता और संजीव अभी भी बेडरूम में थे.
मैं डिनर की तैयारी करने की कहकर डिनर टेबल पर लगाने लगी.
हिमांशु बोला- हल्का डिनर लेना … एक राउंड और करेंगे.
करीब 20 मिनट बाद हेमलता संजीव बेडरूम से निकले, तो वे दोनों खुश दिख रहे थे.
फिर हल्के डिनर के बाद हम लोग एक बार फिर से मूड बनाने लगे.
हेमलता- संजना आज रात यहीं रुक जाओ.
चारों राजी थे.
हम लोग खाना हजम करने के लिए थोड़ी देर सोसाइटी में टहल कर वापस आ गए.
मैं और हिमांशु एक बेडरूम में गए, हेमलता संजीव दूसरे बेडरूम में घुस गए.
चूमा-चाटी के बाद हमने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए.
कुछ देर मेरे चूचों से खेलने के बाद, हिमांशु ने चूत चूमकर कहा- मेरा चूमोगी.
मैंने हां कह दी.
हम 69 की पोजीशन में लेट गए.
हिमांशु ने कुछ देर चूत चूमने के बाद चूत चूसना शुरू किया.
मैंने भी उसका लंड चूमा चाटा, फिर लंड चूसने लगी.
हम दोनों सिसकारी लेने लगे.
हिमांशु ने चित लेटकर कहा- तुम लंड की सवारी करो, मैं तुम्हारे बड़े और सुन्दर चूचों को उछलते हुए देखूंगा!
मैंने हंस कर हामी भर दी और हिमांशु लंड के ऊपर आ गयी.
उसका कड़क लंड मैंने अपने हाथ से अपनी चूत में लिया और उछलने लगी.
हिमांशु मेरे उछलते चूचों को देख रहा था, वह बीच बीच में चूचों को जोर से दबाने लगा.
मैं बोली- आह जरा धीरे दबाओ न … दुखता है.
हिमांशु नीचे से कमर उछाल कर मुझे चोदने लगा.
कुछ ही देर में मैं थककर उतर गयी.
हिमांशु ने मुझे पलंग के किनारे घोड़ी बनाकर खड़ा किया, खुद फर्श पर खड़ा होकर मेरी कमर पकड़ कर चूत चोदने लगा.
अच्छा हुआ कि हिमांशु ने मेरी कमर पकड़ रखी थी, नहीं पकड़ी होती तो मैं उसके करारे झटको से पलंग पर गिर जाती.
मेरे पैंडुलम के समान हिलते चूचे हिमांशु सामने लगे आइने में देख रहा था.
वह रुककर चूचे दबाता, मेरे कूल्हों पर चांटे मारता, फिर कमर पकड़ कर चोदने लगता.
इस बार हम काफी देर से झड़े.
हम बाथरूम से फ्रेश होकर आए, दोनों थके थे इसलिए नंगे ही सो गए.
दूसरे दिन मैंने हेमलता से कहा- मेरे शरीर की मालिश कर दो … बदन दर्द कर रहा है. हिमांशु ने चुदाई के समय जो करारे झटके लगाए, उससे मेरा हर जोड़ हिल गया है.
मैं नंगी लेट गई और हेमलता मेरे बदन की मालिश कर रही थी.
मैंने उससे पूछा- कल की रात संजीव के साथ मजा आया?
हेमलता ने बताया- मैं पहले जब बेडरूम में गई, तो सोच रही थी कि काश आज मेरे पति हिमांशु की जगह संजीव आ जाए तो चुत का स्वाद बदल जाएगा.
मैंने कहा- फिर?
‘फिर क्या, उसी पल बेडरूम में संजीव आ गया. उसे देखकर मैं खुश हो गयी. संजीव ने दरवाज़ा बंद किया और उसने मुझे अपने आलिंगन में ले लिया.
मैं हम्म कह कर हेमलता की बात सुन रही थी.
हेमलता- मेरे चूचे संजीव की छाती में दबे थे तो संजना मुझे बड़ा सकून मिल रहा था. काफी समय बाद हम दोनों अलग हुए.
मैं बोली- फिर क्या हुआ?
हेमलता- संजना तुमने बताया था कि संजीव मेरी चिकनी कांख का दीवाना है, तो आज मैंने अपनी कांख के बालों की सफाई हेयर रिमूवर क्रीम से की थी.
मैंने वाह कहा.
हेमलता- फिर मैंने अपने हाथ अपने सिर के ऊपर रख लिए और संजीव के सामने खड़ी हो गयी. संजीव मेरे करीब आकर मेरी एक कांख को चूमने चाटने लगा. वह काँख चूमने के साथ मेरे दूध भी दबा रहा था. यह मेरे लिए एक नया अनुभव था, मुझे बड़ा मजा आ रहा था.
‘फिर?’
‘फिर उसने मेरे होंठ चूमने शुरू किए.
मैं भी उसके होंठ चूमने लगी.
संजीव मेरा ब्लाउज उतारने लगा तो मैंने उसकी मदद की और ब्लाउज के बाद ब्रा को भी उतार दिया!’
‘हम्म …’
‘फिर संजीव मेरे चूचे दबाने चूसने लगा और बोला- हेमा, तुम्हारे चूचे एकदम सही साइज के हैं. पूरा चूचा एक हथेली में समा जाता है और दबाने में मजा आता है.
हम दोनों ने कब एक दूसरे के कपड़े उतार दिए, पता ही नहीं चला. दोनों पलंग पर आ गए.
हेमलता बताती जा रही थी कि उसके साथ क्या क्या हुआ.
संजीव ने हेमलता के पूरे बदन को चूमा.
हेमलता ने देखा कि संजीव का लंड हिमांशु के लंड जितना ही लम्बा है, करीब साढ़े पांच लंबा, पर संजीव का लंड हिमांशु के लौड़े से थोड़ा ज्यादा मोटा है.
उसने चित लेटकर घुटने मोड़कर अपनी जांघें फैलाकर कातिल मुस्कान के साथ संजीव को उंगली से उसके ऊपर आकर चोदने का इशारा किया.
संजीव हेमलता के पावों के बीच आया, धीरे धीरे लंड चूत में घुसाने लगा.
लंड पूरा अन्दर जाने के बाद उसने हेमलता की कांखों को चूमा, धीमी गति से रस ले लेकर चोदने लगा.
हेमलता कमर उछालकर साथ देने लगी.
संजीव इत्मीनान से चोद रहा था, थोड़ी देर चोदने के बाद वह रुकता, हेमलता के चूचे दबाता, कांख व होंठ चूमता और फिर से चोदने लगता.
हेमलता को चुदाई का यह नया अंदाज अच्छा लगा जबकि हेमलता का पति हिमांशु करारे झटके से चुदाई करता था.
उन दोनों का सम्भोग आधा घंटा चला.
फिर जब हेमलता उत्तेजना के चरम पर पहुंची, तो उसका बदन थरथराने लगा.
हेमलता ने संजीव से कहा- मेरा होने वाला है.
संजीव ने चोदने की गति बढ़ा दी और वे दोनों साथ में झड़ गए.
फिर उन दोनों ने एक दूसरे को बताया कि बहुत मजा आया.
इस नए अनुभव से तृप्त होकर वे दोनों कपड़े पहन कर बाहर आ गए.
डिनर के बाद जब वापस सेक्स की शुरुआत हुई तो चूमा चाटी के बाद हेमलता और संजीव ने 69 की पोजीशन मुख मैथुन का आनन्द लिया.
हेमलता संजीव का वीर्य भी पी गयी.
संजीव ने भी हेमलता की चूत से निकला कामरस चाट लिया था.
संजना और हेमलता ने तय किया कि वे पति अदला बदली की बात अपनी तीसरी सहेली उषा को नहीं बताएंगी.
दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आपको यह वाइफ चेंज सेक्स कहानी पसंद आ रही होगी.
गे, लेस्बियन, पति की अदला-बदली सेक्स- 4
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।