मालिक की बीवी की चुदाई की-2

malik ki biwi naukar ke sath soyi

पिछला भाग पढ़े:- मलिक की बीवी की चुदाई की-1

हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-

अमृता ने मुझे कहा खड़े हो जाओ। मैं खड़ा हो गया। उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और बोली कि घूमो। मैं घूम गया और बोली, “तुम तो देखने में इतने अच्छे लगते हो, तुम्हारी गर्लफ्रेंड कैसे नहीं होगी? गांव में तो गर्लफ्रेंड बनना बहुत आसान होता होगा।”

मैंने कहा, “नहीं भाभी, गांव की लड़कियां तो शहर की लड़कियों से भी ज्यादा तेज़ होती हैं। पूरा काम निकलवा लेती हैं और बदले में कुछ नहीं देती।”

मेरे मुंह से ना जाने क्या निकल गया था। यह सुनते ही अमृता के कान खड़े हो गए और बोली, “क्या नहीं देती है?”

मैं बात को संभालते हुए बोला कि, “कुछ नहीं देती हैं, मतलब प्यार नहीं देती हैं और ध्यान नहीं देती है।”

अमृता ने फिर से चिढ़ाने वाले अंदाज में कहा, “प्यार नहीं देती है या कुछ और नहीं देती?”

मैं उसके खेल में खेलना चाहता था और तो मैं भी कहा, “हां, वह भी।”

अमृता ने कहा, “देखो पीछे क्लोजेट में अमित की शर्ट होगी काले कलर की। उसे निकालो और से पहन कर देखो तुमको आ रही है क्या?”

अमित की हाइट थोड़ी सी छोटी थी। वह देखने में थोड़ा सा मोटा था, मगर उसकी हाइट थोड़ी सी छोटी थी। फिर भी उसकी शर्ट मुझे काफी अच्छे तरीके से आ गई थी

अमृता ने मुझे देखा और कहा, “तुम पर अच्छी लग रही है यह शर्ट। सुनो, वहां पीछे दो पेंट भी रखी होगी। तुम उनको भी ट्राई करके देख लो।”

मैं भी बेवकूफ था। अमृता के सामने ही अपनी पेंट को निकाल दिया और अमित की पेंट पहनने लगा। मैंने यह देखा कि अमृता सीधा मेरे कच्छे की तरफ ही देख रही थी। उसकी हरकत से अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा मैं और धीरे-धीरे पेंट को पहनने लगा।

मैंने पेंट को पहन लिया। अमृता ने कहा, “अच्छी लग रही है। दूसरी वाली पहन कर देख।”

दूसरी वाली के समय जब मैं पेंट नीचे कर रहा था, अचानक ही मेरा कच्छा नीचे हो गया मेरा फनफनाता हुआ लंड अमृता की आंखों के सामने आ गया था। मैं घबरा गया और शरमाता हुआ खुद को परदे के बीच छुपा लिया और बोला, “सॉरी भाभी, जान-बूझ कर नहीं किया।”

अमृता ने ऐसा दिखाया मानो कि उसने देखा नहीं हो, उसने बोला, “क्या हुआ?” मैंने कहा, “कुछ नहीं, मेरा कच्छा नीचे हो गया था।”

अमृता जोर से हंसी और वह बोली, “ठीक है दूसरी पेंट पहन लो।” मैंने डरते हुए दूसरी पैंट पहनी और उससे दिखाया। वह बोली, “यह भी अच्छा लग रहा है। तुम दोनों पेंट लेकर चले जाओ।”

मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था। मैं कमरे से बाहर निकल गया और सबसे नीचे वाला कमरा जो कि मेरा था, वहां पर जाकर मैं बेड पर पसर गया।

उस दिन की बात से अमृता के अंदर भी मेरे प्रति बदलाव आने लगा। जहां पहले वह मुझसे थोड़ी दूरी बना कर रखती थी, अब मेरे और करीब आती जा रही थ। मुझे कंधे से धक्का मारना, चाहे बिल्कुल मेरे पास खड़े होकर मोबाइल में फोटो दिखाना। वह सारी इस तरीके के हरकतें करती थी। उसके पास आते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था।

मैं रोज़ भगवन से प्राथना करता था कि किसी दिन मेरी मन की मन्नत पूरी हो और मै अमृता को चोद सकूं और भगवन ने मेरी सुन ली।

एक बार अमित, उसके माता-पिता और उसके छोटे भाई चार लोगों को देहरादून के लिए शादी में जाना था। घर को खाली नहीं छोड़ सकते थे, इसलिए अपनी बहू को और मुझे घर की रखवाली के लिए यही छोड़ गए।

यह पहली बार था जब वह अकेले सोने वाली थी। हम लोग खाना खा रात में एक पिक्चर देखे। मैं वापस अपने कमरे की तरफ बढ़ ही रहा था कि अमृता ने कहा, “सुनो प्रतीक मुझे अकेले में डर लगता है। मैं कभी भी अकेले नहीं सोई हूं। अगर हो सके तो क्या तुम आज रात इसी फ्लोर पर रुक जाओगे?”

मैंने कहा, “जी भाभी बिल्कुल रुक जाऊंगा। मैं ऐसा करता हूं बाहर कमरे में अपना एक गद्दा लगा देता हूं। आप अंदर सो जाइएगा। हो सके तो कमरा खुला ही रखिए। अगर आप डरती हैं तो मैं अंदर आ जाऊंगा।” अमृता ने हां में सर हिलाया।

हम बातें कर ही रहे थे कि तुरंत ही लाइट चली गई। सुबह से ही लाइट आ जा रही थी। क्योंकि हमारे पास कुछ करने के लिए था नहीं, हमने पूरे दिन टीवी चलाया था, जिससे कि अब हमारा इनवर्टर भी थोड़ी देर में ही खत्म हो गया था।

वह जिस बिस्तर पर सोई थी उसे पर बहुत ज्यादा गर्मी हो रही थी। वह दूसरे कमरे में और मैं इस आगे वाले कमरे में एक-दूसरे से बातें कर रहे थे। उसे गर्मी होने लगी वह बोली, “बहुत ज्यादा गर्मी हो रही है।” मैंने उसे कहा हां उसे रुई वाले गद्दे पर गर्मी होती है, मैं तो यहां पर नीचे सो रहा हूं फर्श पर थोड़ा ठंडा लग रहा है।

अमृता बोली, “वहां पर जगह है क्या? क्या मैं वहां पर आ जाऊं?” मेरी तो मानो बल्ले-बल्ले हो गई थी। मेरी ज़ुबान लड़खड़ा गई हो। मैं बोला, “हां अमृता हां भाभी, आप आ जाइए।”

अमृता आप अपने फोन का टॉर्च जलाते हुए गद्दे तक आ गई थी। वह मुझसे बोली, “तुमको सोने में कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना?”

मैं बोला, “नहीं भाभी, सोने में कोई दिक्कत नहीं होगी। और वैसे भी नीचे फर्श तो है ही, तो थोड़ा सा और खिसक जाता हूं।”

वो बोली,‌ “नहीं-नहीं ठीक है। कोई दिक्कत नहीं है।” फिर वो खुद ही बोलने लगी कि, “मैं हाथ पैर चलाती हूं, तो थोड़ा बच के रहना।”

मैं हंस और बोला,‌ “कोई बात नहीं।” अब हम दोनों एक-दूसरे की पीठ करके सो गए।

मेरे दिल में बहुत जोर से धक-धक हो रही थी, क्योंकि बिल्कुल मेरे बगल में वह लड़की सोई थी जिसे चोदने का सपना में पिछले 6 महीने का देख रहा था। मैं जानता था कि उसको मेरे लिए फीलिंग थी। मगर कुछ करने की मेरे अंदर हिम्मत नहीं थी। मैं नहीं चाहता था कि मैं कुछ करूं और मुझ पर लांछन लग जाए। मैं बहुत डर रहा था कि तभी अमृता का हाथ मुझे अपने पेट पर महसूस हुआ।

इसके आगे इस कहानी में क्या हुआ, वो आपको अगले भाग में पढ़ने को मिलेगा। यहां तक कि कहानी पढ़ कर आप उत्तेजित हुए या नहीं, ज़रूर फीडबैक दें।

अगला भाग पढ़े:- मालिक की बीवी की चुदाई की-3

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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