चचेरे भाई से खेतों में चूत मरवाई रात को

xxx gaon sex kahani

Xxx गाँव सेक्स कहानी में मैं लॉकडाउन में गाँव आई तो अपने चचेरे भाई से चूत मरवा ली. लेकिन मुझे एक चुदाई से संतुष्टि नहीं मिली. मैंने अपने भाई को मुझे खेतों में चोदने को कहा.

मैं नहा कर चिपका हुआ सूट-सलवार पहन कर बरामदे में बैठी मदन का इंतज़ार करने लगी।
वह खाना लाने घर गया हुआ था।

मदन खाना लेकर आया, पर वह एकदम सामान्य था; ऐसा मानो जैसे कुछ हुआ ही न हो।

मैं बिल्कुल सुकून में आ गई।

खाना खाते हुए मैंने कई बार मदन की तरफ देखा, पर वह तब भी सामान्य था।
मैंने उससे पूछा, “तुम ठीक तो हो?”

उसने मुस्कुराकर बोला, “हाँ, सब ठीक है! आप मुझ पर विश्वास कर सकती हो!”

मैं खाना खाकर लेट गई और किताब पढ़ने लगी।
वह बाहर बैठा हुआ था।

मैंने मदन को अंदर बुलाया, “मदन मेरे भाई, यहाँ अंदर आकर मेरे पास लेट जाओ और मुझसे बातें करो!”

वह अंदर तो आया पर लेटा नहीं।
मदन बोला, “दीदी, तू घणी सयानी है पर अंदर से अलग है! पर यह गाँव है, यहाँ बाहर चिपका-चिपकी मत करने की सोचना! बाकी मैं तेरे लिए हाजिर हूँ यहाँ!”

मैं समझ गई कि मदन सामान्य स्वभाव का है, इसलिए उसके अंदर थोड़ा डर जरूर है कि कोई उसे गलत न समझ ले।

लेटे-लेटे दोपहर के 2 बज गए और बिजली आ गई।

मैंने मदन से पूछा, “क्या मैं दरवाजा बंद कर सकती हूँ?”
मदन ने कहा, “हाँ, मैं भी घर जाता हूँ! जब काम लगे, बुला लेना!”

मैं लेटे-लेटे मदन के बारे में सोच रही थी।

पता नहीं कब मेरा हाथ मेरे बुर को सहलाने लगा और वह गीला हो गया, मुझे पता ही नहीं चला।
मैं नीचे से नंगी होकर आंगन में आई, पानी से सफाई की और दूसरी पैंटी व लोअर पहन ली।

शाम को मदन आया और हम दोनों खेत की तरफ घूमने चल दिए।
गेहूं पक रहे थे और हल्का बादल लगा हुआ था।

मेरा मन हुआ, तो मैं खेत की पतली पगडंडी पर बैठ गई और घास को सहलाने लगी।

मदन खेत का एक चक्कर लगाकर मेरे पास आ गया।
उसने कहा, “दीदी, क्या तू अभी भी मेरे बारे में सोच रही है?”
मेरे मुँह से गहरी सांस निकली और मैंने कहा, “भाई, क्या तुम मेरे हमराज़ बनोगे?”

उसने ‘हाँ’ कहा।

मैंने मदन को बताया कि लोग सोचते होंगे शहर में मेरा कोई लड़का दोस्त होगा जिसके साथ मेरा संबंध होगा, पर मैंने किसी लड़के को अपना दोस्त नहीं बनाया। मुझे सेक्स की एक अलग चाहत होती है, और वह चाहत आज मुझे अपने भाई से चुदाई करके मिली।

मैंने उससे पूछा, “क्या तुम आज रात मुझे फिर से इसी खेत में लाकर चोदोगे? मुझे अपने भाई से चुदने में एक अलग ही एहसास हो रहा है!”

खेत से हम लौट आए।

रात को खाना खाने के बाद पिताजी और माँ आए।
बात करने के बाद वे लोग चले गए।

सब ठीक था इसलिए पिताजी को कोई चिंता नहीं थी।

मेरे ताऊ का परिवार भी साथ में रहता था जिनके लिए क्वारंटीन होना जरूरी था।
कोविड होने पर पूरे परिवार को खतरा था।

मैंने पिताजी से बोल दिया कि रात में थोड़ा डर लगता है, इसलिए मदन को यहीं बाहर सोने के लिए बोल दें।

मदन आज रात मेरे साथ सोने वाला था।
करीब 12 बज गए थे और दोनों को नींद नहीं आ रही थी।

मदन मुझे गाँव के बारे में बता रहा था।
1 बजे वह बोला, “सब सोए हुए मालूम पड़ते हैं, क्या तू खेत में चलेगी?”

मैं और मदन खेत की तरफ चल दिए।
जब मदन गाँव की तरफ मुआयना करने गया था, तभी मैंने अपने कपड़े निकाल दिए थे।

खेत फार्म हाउस से लगा हुआ था इसलिए हम तुरंत उसी जगह पहुँच गए जहाँ दिन में मैं बैठी थी।
मैंने सिर्फ एक चादर लपेटी थी और मदन बरमूडा व बनियान में था।

वहाँ जाते ही मैंने चादर नीचे गिरा दी।
हल्की चाँदनी रात में मैं मदन के सामने पूरी नंगी खड़ी थी।

मदन ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरे होंठ धीरे-धीरे पीने लगा।

उसने फुसफुसाते हुए कहा, “दीदी, आवाज़ मत करना! जो भी करना, आराम से करना!”

मैंने मदन को अपनी चुचियाँ पीने का इशारा किया।
वह उन्हें जीभ से सहलाने लगा।

मैं थोड़ी देर में वहीं घास पर लेट गई।

मेरा भाई मेरे जिस्म को अपनी बाहों में जकड़ कर धीरे-धीरे चोदने लगा।

बाहर खुले आसमान के नीचे चुदने का मज़ा कुछ और ही होता है!
यहाँ मुझे अपने भाई से चुदने का दोहरा आनंद मिल रहा था।

सच कहूँ तो, किसी बाहरी लड़के से चुदने में वह मज़ा नहीं जो अपने भाई से या अपनी बहन को चोदने में मिलता है।
यह एहसास मेरे वे पाठक ज्यादा महसूस कर पा रहे होंगे जो अपने भाई से चुद चुकी हैं।
अपने ही घर में अपने भाई के लंड को अपने बुर में घुसाना… वाह, क्या गजब का मज़ा आता है!

हम दोनों जल्दी वापस आ गए।

मुझे अपने भाई के साथ सेक्स की अभी और इच्छा हो रही थी।
अंदर आते ही मैंने मदन को बाहों में भर लिया और पूरे जोश व गर्माहट से उसके मुँह में जीभ डाल कर किस करने लगी।

आज रात के लिए मदन भी शायद तैयार होकर आया था; उसने अपने पास से एक दवा निकाली और खा ली।
थोड़ी देर बाद उसका फनफनाता हुआ लंड पूरा कड़क हो गया।

मदन ने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरी गोल-गोल मुलायम चुचियों पर टूट पड़ा।

हम दोनों की सांसें तेज हो गई थीं।
मदन ने बिना देर किए मेरी जांघों को फैलाकर अपना लंड मेरे गीले बुर में धकेल दिया!
इस बार मदन अपने कड़क लंड से मुझे तेज झटकों के साथ देर तक चोदता रहा।

मैं अपने बालों और चुचियों को मसले जा रही थी।
करीब आधे घंटे की इस तूफानी चुदाई के बाद मदन ने अपना गर्म वीर्य मेरे बुर में डाल दिया।
अब तक मैं तीन-चार बार झड़ चुकी थी।

मैं लगभग दस दिन वहाँ फार्म हाउस पर रही।
मदन को भी मुझसे एक अलग लगाव हो गया था, लेकिन वह बाहर इस तरह सामान्य रहता कि किसी को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं हो सकता था।

मेरा भाई मेरी चूत चाटने का दीवाना हो गया था।

अब हम दिन में बिल्कुल कुछ नहीं करते थे; रात में हम दोनों आंगन में साथ नहाते, मैं अपने भाई का लंड चूसती और वह मेरा बुर चाटता।

एक रात मेरे भाई ने मेरी गांड चोदने की चाहत रखी।
मुझे कुतिया की तरह झुका कर पहले तो अपना लंड चुसाया, फिर पीछे आकर मेरी गांड को अपने हाथों से फैला दिया।

उसने गांड का छेद गीले कपड़े से साफ किया।
मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने उसे रोकने की कोशिश की।

मदन बोला, “दीदी, मैं तेरा बुर जिस तरह से चाटता हूँ, उससे भी अच्छा आज तुझे अपनी गांड चटवाने में आनंद आएगा!”

इतना कहकर वह मेरे पीछे बैठ गया।
उसने मेरी गांड फैलाकर अपनी गर्म थूक लगाकर जीभ मेरे गांड के छेद पर घुमाने लगा।

आह्ह्ह… वह अहसास अभी लिखते हुए फिर ताज़ा हो गया है।
मेरी चूत भी पूरी गीली हो चुकी है।

काश मैं खुद अपनी चूत चाट पाती!

मदन ने मेरी गांड को थूक से पूरी तरह भिगोने के बाद मुझे पास में रखी सरसों की ढेरी पर झुका दिया और अपना वीर्य से गीला लंड मेरी गांड में घुसा दिया!
मैंने दर्द के मारे उसका हाथ पकड़ लिया।

जब गांड का छेद सहज हो गया तो मैंने कहा, “भाई, तू अपनी बहन की गांड क्यों फाड़ रहा है! जो करना है बुर में कर लिया करो, अभी मैं तुम्हारी ही हूँ!”

मदन ने मेरी उछलती चुचियों को दबोच लिया और गांड मारता रहा।

कुछ झटकों के बाद उसने लंड निकाला और उसे मेरे बुर में डाल दिया।
मैं झड़ने ही वाली थी कि मैंने अपना बुर उसके मुँह से लगा दिया और उसके मुँह में ही झड़ गई।

दस दिन बाद मैं अपने पुराने घर चली गई।
वहाँ ज्यादा मौका नहीं मिलता था, फिर भी मदन के साथ कई बार गन्ने के खेतों में चुदाई हुई।

कभी-कभी मैं बोरवेल पर नहाने आती और मदन से अपने मक्खन जैसे जिस्म की मालिश करवाती।

एक बार पिताजी ने देख लिया, तो मेरी चुचियाँ डर से सिकुड़ गईं, पर उन्होंने बस इतना कहा, “ठीक से मालिश कर मदन! अब छोरियाँ छोरों से काम करवा रही हैं!”

पिताजी के जाते ही मैंने मदन का हाथ अपनी ब्रा के अंदर डाल दिया और कस के दबा लिया।
आअह्ह्ह… उस वक्त ऐसा लगा कि काश मैं इसी धूप में अपने भाई से चुदवा लूँ!

जब भी मौका मिलता, मैं अपने भाई की बीवी बन जाती और गांड उठा-उठा कर चुदती थी।

दोस्तो, आज भी मैं उससे गुड़गांव में चुदवाती हूँ।
जब वह यहाँ नहीं होता, तो फोन पर उसके साथ हस्तमैथुन का मज़ा लेती हूँ।
सेक्स सबको अच्छा लगता है और अपने भाई के साथ यह संबंध बनाने में कोई दिक्कत नहीं।

क्या आपने भी कभी ऐसा सुख पाया है?
मुझे जरूर बताइयेगा।
Xxx गाँव सेक्स कहानी कैसी लगी आपको?

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top