xxx chachi sex kahani
Xxx चाची सेक्स कहानी में मैं चाचा के घर रहने गया तो चाची ने मेरी मालिश की. मेरा लंड खडा हो गया जिसे देख कर चाची मुस्कुरा रही थी.
दोस्तो, मेरा नाम सोनू है.
ये Xxx चाची सेक्स कहानी तब की है, जब मैं 18 वर्ष का हुआ ही था.
मेरी हाईस्कूल की परीक्षा थीं और परीक्षा का सेंटर शहर में पड़ गया, जहां मेरे चाचा रहते थे.
उनकी दूसरी शादी हुई थी.
उनकी उम्र लगभग 50 वर्ष की थी जबकि चाची 36 साल की, बहुत ही गठीले बदन की औरत थीं. ये उनकी सेकंड वाइफ थीं इसलिए उम्र में खासा फर्क था.
चाचा की कोई औलाद नहीं हुई थी, इसका कारण मुझे बाद में मालूम पड़ा था कि चाचा का बीज कमजोर था.
एक दिन जब मैं परीक्षा देकर शाम को वापस आया तो मेरे पेट में हल्का-हल्का दर्द हो रहा था.
मैंने चाची से कहा- चाची, मेरे पेट में दर्द हो रहा है.
चाची ने कहा- अच्छा, तुम थोड़ा आराम कर लो. अभी मैं थोड़ी देर में काम से फ्री होकर तुम्हारे पेट में गर्म तेल की मालिश कर दूंगी तो दर्द खत्म हो जाएगा.
उसके बाद चाची सरसों का तेल लेकर आई और बोली- लल्ला, तुम अपना पैंट और शर्ट उतार कर सिर्फ लुंगी पहन कर लेट जाओ, जिससे मैं तुम्हारे पेट की अच्छे से मालिश कर दूं.
चाची मुझे लिटाकर मालिश करने लगीं.
मालिश करते समय उन्होंने केवल ब्लाउज और पेटीकोट पहन रखा था क्योंकि वह घर में इसी पहनावे में रहती थीं.
टाइट ब्लाउज में उनके उरोज साफ नजर आ रहे थे, जिसे देखकर मैं उत्तेजित हो गया.
उनके बड़े गले के ब्लाउज में से उनके दोनों दूधिया दूध मस्त दिख रहे थे.
उनके मम्मों की घाटी को देख कर मेरी वासना जाग गई थी लेकिन वे चाची थीं, तो मैं उनके मम्मों से अपनी नजर हटा कर शर्मा रहा था.
मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया.
यद्यपि मैं सिर्फ 18 वर्ष का ही था परंतु मेरा लंड पूरी तरह से विकसित हो गया था.
यह लगभग साढ़े छह इंच लंबा तथा काफी मोटा था.
उन्हें ऐसे देखकर मुझे शर्म आ रही थी.
तो चाची बोलीं- काहे शर्मा रहे हो लल्ला, जब मैं ब्याह कर आई थी, तब तुम छोटे से थे और पूरे घर में नंगे घूमते रहते थे. मैं तुम्हारी मालिश करती थी, तेल लगाती थी, तुम्हारी नुनिया में भी तेल लगाती थी.
ऐसा कहते हुए उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और बोलीं- देखूं तो तुम्हारी वह छोटी सी नुनिया तेल लगाने से आज कितना बड़ा लंड बन गई है!
मैं लजाते हुए बोला- अरे चाची आप तो … पहले मैं छोटा था, अब बड़ा हो गया हूं, मुझे शर्म आती है!
चाची- अरे मुझसे कैसी शर्म? मेरे तेल लगाने और मालिश करने से ही तो तुम्हारी छोटी सी नुनिया फूल गई और आज ये इतना बड़ा और मोटा लंड हो गई है. मैं तो इसे देखकर हैरान हूं कि अभी तुम्हारी उम्र 18 साल की है और तुम्हारा लंड एकदम बड़ा और मोटा किसी मर्द के जैसे हो गया है.
वे बार बार लंड कह रही थीं तो मुझे बड़ा अजीब सा लग रहा था.
तभी चाची ने मेरे लंड को मेरे लोअर से बाहर निकाल लिया और उसके सुपाड़े को खोल कर टोपे को प्यार से देखने लगीं.
मैं- चाची, मुझे तो बहुत शर्म आ रही है. आप मुझसे बहुत बड़ी हो.
चाची- अरे, बड़ी हूँ तब तो और काहे की शर्म … जैसे बचपन में तुम्हारी मालिश करती थी, वैसे अभी भी कर दूंगी. जब तक यहां हो, मुझसे मालिश करवा लिया करना. हां और एक बात, यह बताओ कि तुम्हारे लंड के चारों ओर इतने बड़े-बड़े बाल हो गए हैं, इनको बनाते क्यों नहीं? इसी से खुजली होती है, इंफेक्शन होता है और फिर पेट वगैरह दर्द करता है.
मैं- चाची, एक बार मैंने बनाने की कोशिश की थी लेकिन उधर कट गया था तो फिर मैं डर के मारे नहीं बनाता. मुझे बहुत डर लगता है.
चाची- ठीक है, कल मैं जब नहाने लगूंगी तो तुम मेरे पास आ जाना. मैं चाचा के रेजर से बना दूंगी और बनाने के बाद तेल भी लगा दूंगी, जिससे फिर खुजली भी नहीं होगी और दर्द भी नहीं होगा.
ऐसा कहकर चाची चली गईं.
मेरा लंड एकदम टाइट हो गया.
लेकिन पेट का दर्द एकदम सही हो गया था.
मैं उनके मम्मों को याद करते हुए उनके हाथों का स्पर्श महसूस कर रहा था और अपने लौड़े को सहला कर मन मारता हुआ सो गया.
अगले दिन इतवार था.
दोपहर के समय चाची बाथरूम गईं.
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे आवाज दी- लल्ला आ जाओ!
मैं बाथरूम में चला गया.
चाची बाथरूम में केवल पेटीकोट और काली ब्रा पहन कर खड़ी थीं.
उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्रा में कसी हुई थीं और बाहर आने को तड़प रही थीं.
चाची बोलीं- चलो आओ, तुम्हारे बाल बना देती हूं. जाओ, बाहर चाचा का रेजर रखा हुआ है, उसे उठा लाओ … और बाहर एक स्टूल है, उसे भी ले आओ.
मैं स्टूल लाया तो चाची स्टूल पर बैठ गईं. उन्होंने मुझे अपने सामने खड़ा किया और मेरे अंडरवियर को उतार दिया.
उन्होंने मेरे लौड़े पर पानी डाला और साबुन लगाकर लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
मेरा लंड खड़ा हो गया तो वे मुस्कुराने लगीं.
फिर चाची ने मेरी झांटें बनाना शुरू कर दिया.
झांटें बनाते समय उन्होंने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया था जिससे मेरा लंड पूरी तरह गर्म और टाइट हो गया था.
झांटें बनाते समय बराबर मेरे सुपाड़े का छिलका आगे-पीछे हो रहा था.
उससे मुझे उत्तेजना होने लगी थी और ऐसे लगने लगा था मानो मेरा माल बाहर आने वाला है.
तभी चाची ने लौड़े से हाथ हटा लिया.
मैं मन मसोस कर रह गया.
अब तक मेरे लंड की झांटें साफ हो गई थीं और लौड़े की छटा देखने लायक थी.
उसके बाद उन्होंने मेरे बदन पर पानी डालकर अच्छी तरीके से साबुन लगाना शुरू किया.
साबुन लगाते समय उन्होंने लंड में भी साबुन लगाकर उसे खूब अच्छी तरीके से धोया.
जहां बाल बनाए थे, वहां भी साफ कर दिया.
चाची- लल्ला, मेरी बगलों में भी बाल उग आए हैं, तुम रेजर से मेरी बगलें साफ कर दो. अपने नीचे की तो मैं साफ सफाई खुद कर लेती हूं, बगल में मेरा हाथ नहीं पहुंचता.
मैंने रेजर लेकर उसका ब्लेड बदला और चाची के दोनों बगलों को खूब अच्छी तरीके से बना दिया.
उसके बाद चाची ने मुझे खूब अच्छी तरीके से नहला-धुलाकर कहा- जाकर तू कमरे में लुंगी पहन कर बैठ, मैं आकर तेरे शरीर में तेल लगा दूंगी, जिससे खुश्की नहीं होगी.
तभी चाचा ने आवाज दी.
शायद वे घर आ गए थे.
चाचा ने आवाज देते हुए कहा- क्या हो रहा है भाई सोनू? खाना-वाना खाया कि नहीं?
चाची- अभी तो नहा करके बैठा है. अब आप आए हैं तो साथ में खाना खा लेगा.
चाचा- अच्छा-अच्छा, ठीक है. मैं हाथ-मुँह धोकर आता हूं. तुम सभी लोगों का खाना एक साथ लगाओ.
एक साथ सभी लोग खाना खाने लगे.
चाचा- मेरी रात की ड्यूटी लग गई है, शाम को 7:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक की ड्यूटी है, तो ऐसा करना कि मेरे लिए कुछ परांठा आदि बना देना. तुम लोग बाद में खा-पी लेना, मैं फिर सुबह आ जाऊंगा.
शाम को चाचा के चले जाने के बाद चाची अपना काम समेट कर रात करीब 9:00 बजे मेरे पास आईं.
वे बोलीं- मैं दिन में तुझे तेल नहीं लगा पाई थी. अंडरवियर उतार कर लुंगी पहन ले, अभी मैं तेल लगा देती हूं.
मैंने अंडरवियर उतार कर लुंगी पहन ली.
थोड़ी देर बाद चाची कटोरी में तेल लेकर आईं- लुंगी पहन ली? ठीक है रात में एकदम ढीले कपड़े पहन कर सोना चाहिए, नींद अच्छी आती है.
ऐसा कहते हुए उन्होंने अपनी साड़ी और ब्लाउज एक तरफ उतार कर रख दिया.
उसके बाद उन्होंने बिस्तर पर एक पॉलिथिन बिछाकर मुझसे कहा- लुंगी उतार कर इस पर पेट के बल लेट जाओ. आज मैं तुम्हारी मालिश बचपन की तरह ही करूंगी.
मैं थोड़ा शर्मा रहा था तो उन्होंने मुझे अभी बिस्तर पर लिटाकर मेरी लुंगी खोल दी.
उसके बाद मुझे पेट के बल लिटाकर मेरी पीठ पर तेल लगाना शुरू कर दिया.
मेरे पीछे पूरी तरह से मालिश करने के बाद बोलीं- अब तू पलट कर लेट जा, मैं तेरी आगे भी मालिश कर देती हूँ.
जैसे ही मैं पीठ के बल लेटा, मेरा एकदम तना हुआ लंड ऊपर आ गया.
वे लंड देखते ही बोलीं- बचपन में मैं तेरी मालिश करती थी, तब भी इसी तरह तेरी नुनिया खूब खड़ी-खड़ी हो जाती थी और मैं खूब हंसती थी. उस समय इसका छिलका नहीं खुलता था. जब मैं खोलने की कोशिश करती थी तो तू खूब जोर-जोर से रोने लगता था. फिर मैं ऊपर से ही तेल लगाकर तेरी नुनिया में जोर से फूंक देती थी, तो तेल अन्दर चला जाता था.
ऐसा कहकर उन्होंने मेरे सुपाड़े के छेद में दो बूंद तेल टपकाया और अपने मुँह में लंड लेकर जोर से फूंका.
मैं बता नहीं सकता कि उस समय मेरी क्या हालत हो गई थी.
ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड फट जाएगा.
लेकिन चाची मेरे लंड में आहिस्ता-आहिस्ता तेल लगा रही थीं और इसके आगे कुछ नहीं कर रही थीं.
इसके बाद उन्होंने लंड को छोड़कर मेरे पैरों और हाथों में तेल लगाना शुरू किया. मेरे तलवों में तेल लगाया और फिर से एक बार मेरे लंड को मुँह से चूमकर मेरे पेट और पैरों में सभी जगह उन्होंने अच्छी तरह से तेल लगाया.
लेकिन संकोच के मारे उन्होंने आगे कुछ नहीं किया. डर के मारे मेरी भी कुछ आगे करने की हिम्मत नहीं पड़ी.
मैं उठकर बैठ गया.
उसके बाद मैंने कहा- चाची, अगर आप कहें तो मैं भी आपकी तेल मालिश कर दूं. आपकी भी थकान दूर हो जाएगी.
चाची- हां लल्ला, थोड़ा पीठ में तेल लगा देते तो ठीक रहता.
तो मैंने कहा- ठीक है चाची, आप पेट के बल लेट जाइए.
चाची अपनी ब्रा उतार कर पेट के बल लेट गईं.
उसके बाद मैं उनकी पीठ की मालिश हल्के-हल्के करने लगा.
अब क्योंकि मैं लुंगी को उतार कर अलग रख दिया था, इसलिए मैं नंगा ही था.
चाची की पीठ की मालिश करते समय मेरा लंड उनकी गांड पर हल्का-हल्का रगड़ खा रहा था, लेकिन चाची अनजान बनी रहीं.
मैं बराबर मालिश करता रहा.
लेकिन मुझे लग रहा था कि चाची धीरे-धीरे काफी उत्तेजित हो चुकी थीं.
वे संकोच के मारे कुछ कर नहीं रही थीं.
इधर मैं भी डर के मारे कुछ नहीं कर रहा था.
पीठ की मालिश करने के बाद मैंने कहा- चाची, अगर आप कहें तो आपके पैरों की भी मालिश कर दूं.
चाची- ठीक है, जब कर ही रहा है तो थोड़ा पैरों की भी कर दे.
ऐसा कहकर वे पीठ के बल लेट गईं जिससे उनकी दोनों चूचियां ऊपर सामने आ गईं.
उन्होंने अपना पेटीकोट जांघों तक उठा लिया था तो वे चुदासी रांड जैसी लग रही थीं और उन्हें ऐसे देख कर मेरे लौड़े की हालत खराब हो गई थी.
धीरे-धीरे मैं उनके पैरों की मालिश करने लगा.
मुझे स्पष्ट दिख रहा था कि उनकी चूत बहुत ज्यादा गीली हो चुकी थी लेकिन वे अभी मुझे कुछ कह नहीं रही थीं.
उन्होंने धीरे-धीरे अपने पैर फैला कर खोल लिए थे, जिससे उनकी चूत मुझे पूरी तरह से दिखने लगी.
मुझे दिख रहा था कि उनकी चूत पानी छोड़ रही थी लेकिन अभी मुझसे चोदने के लिए नहीं बोल रही थीं.
शायद उन्हें संकोच हो रहा था.
मैंने कहा- चाची, आप अपने दोनों हाथ ऊपर कर लें तो मैं आपके बगल में भी तेल लगा दूं. क्योंकि सवेरे रेजर से बगल बनाया था, तो वहां खुश्की हो गई होगी.
चाची ने कहा- ठीक है.
उन्होंने दोनों हाथों को ऊपर कर लिया, जिससे उनकी दोनों चूचियां मेरे सामने आ गईं.
मेरा लंड एकदम फनफनाने लगा लेकिन मैं मारे डर के अभी शांति से तेल लगा रहा था.
पहले मैंने चाची के बगल में अच्छी तरह तेल लगाया. फिर धीरे-धीरे अपने हाथों को उनकी चूचियों की ओर लाया.
साफ लग रहा था कि वे पूरी तरह से गर्म हो गई हैं, इसलिए मेरे हाथ उन्होंने नहीं हटाए.
उसके बाद मैंने धीरे-धीरे उनकी दोनों चूचियों को हल्के-हल्के मसलना शुरू कर दिया. मेरा खड़ा हुआ लंड उनकी चूत पर हल्का-हल्का टक्कर मारने लगा.
मैंने देखा कि उनकी चूत एकदम पूरी तरह से गीली हो गई थी और खूब पानी फेंक रही थी.
एकाएक चाची थोड़ा नीचे सरक गईं, जिससे मेरा लंड उनकी चूत में करीब आधा एकदम से घुस गया.
अब मेरे लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया.
मैंने चाची की दोनों चूचियां कसकर पकड़ कर अपना लंड उनकी चूत में पूरा पेल दिया.
चाची ने मुझे खूब जोर से पकड़ लिया और बोलीं- चोदो मेरे राजा चोदो!
Xxx चाची सेक्स की आवाज सुनकर मैं पूरी तरह से जोश में आ गया.
अपने दोनों हाथ उनकी पीठ के नीचे डालकर मैं खूब जोर-जोर से उनकी चूत चोदने लगा.
‘आह-आह’ चाची के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं.
मैं भी पूरे जोश के साथ उनकी बुर चोदने लगा.
कोई 15 मिनट के बाद मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी निकली जिससे चाची की बुर पूरी तरह भर गई.
चाची ने जोरों से मुझे कसकर भींच लिया.
दो मिनट बाद वे मेरा सिर सहलाती हुई बोलीं- लल्ला, आज तो तूने मुझे खुश कर दिया. चाचा से कहकर मैं तुझे यहीं रख लूंगी. तेरा नाम यहीं लिखवा दूंगी. मेरी बुर की तुम भरपूर रोज इसी तरह चुदाई करना!
मैंने कहा- क्यों चाचा मजा नहीं देते हैं क्या?
वे हंस दीं और बोलीं- उनका लंड मुरझा गया है … दो मिनट में ही ठंडा पड़ जाता है.
मैंने कहा- चाची अगर चाचा को मालूम चला तो क्या होगा?
चाची मुस्कुराईं और बोलीं- अरे तुम चिंता मत करो … तेरे चाचा के सामने ही तेरे लौड़े से चुदूँगी. वे मना नहीं करेंगे … वे तुझे प्यार करते हैं न!
मैं समझ गया कि चाची चाचा को पटा लेंगी कि उनकी चुत के लिए उनके भतीजे का लंड मुफीद रहेगा.
बस उस दिन से मैंने चाची को पेलना शुरू कर दिया.
और आगे चल कर चाची की चुत में मैंने औलाद का बीज बो दिया था.
वह सब बड़ा मजेदार किस्सा है …
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