uncle mom chudai sex kahani
20 साल के अर्जुन अपनी 38 साल की माँ रजनी को अपने मामा के साथ देख लेता है एक पारिवारिक समारोह के दौरान, जिससे उसकी माँ के प्रति उसकी इच्छाएं और भी बढ़ जाती हैं।
अर्जुन की उम्र 20 साल थी और वह एक प्राइवेट कॉलेज में बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था।
उसकी माँ रजनी की उम्र 38 साल थी। रजनी बेहद खूबसूरत औरत थी, गोरी चिट्टी त्वचा, भरी-भरी जांघें और एक ऐसा फिगर जो हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेता था।
उसकी हाइट 5 फुट 4 इंच थी, लेकिन उसका फिगर 40-32-46 था। हाँ, उसकी गांड बेहद बड़ी और गोल थी, और उसके स्तन तो इतने भारी थे कि उसकी ब्रा भी उन्हें संभालने में कई बार असफल रहती थी।
अर्जुन के पिता की 10 साल पहले एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
तब से रजनी ने अकेले ही अर्जुन को पाला था।
वह एक मजबूत औरत थी, लेकिन उसके अंदर एक ज्वाला सुलगती रहती थी जिसे उसने सालों से दबा कर रखा था।
अर्जुन अपनी माँ को बचपन से ही अलग नजर से देखता आ रहा था।
जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया, उसकी माँ के प्रति उसकी भावनाएं बदलती गईं।
अब वह 20 साल का जवान था और उसकी माँ उसके सपनों में आने लगी थी।
वह रातों में अपनी माँ को सोचकर हस्तमैथुन करता था, उसकी मोटी गांड और भारी स्तनों की कल्पना करके।
एक बार की बात है। अर्जुन के नाना के यहां एक शादी थी। रजनी का एक भाई रमेश, जो अर्जुन का मामा था, उसी शहर में रहता था।
रमेश की उम्र 42 साल थी और वह एक सरकारी नौकरी में था। उसकी शादी नहीं हुई थी और वह अकेला रहता था।
रजनी और रमेश के बीच हमेशा से एक अजीब सा रिश्ता था। वह एक-दूसरे को देखते हुए अजीब सी मुस्कान देते थे।
शादी के लिए अर्जुन और रजनी नाना के घर आए थे। वहां पूरा परिवार जमा था।
रजनी ने उस दिन एक गुलाबी रंग का सूट पहना था जो उस पर बेहद फब रहा था।
सूट का कपड़ा इतना पतला था कि उसके अंदर का ब्लाउज साफ झलक रहा था।
उसने काले रंग की फोम ब्रा पहनी थी जो उसके भारी स्तनों को संभालने में संघर्ष कर रही थी।
शाम का समय था। सभी लोग बाहर शादी के कार्यक्रमों में व्यस्त थे। अर्जुन को प्यास लगी तो वह पानी पीने के लिए अंदर आया।
जैसे ही वह रसोई से पानी पीकर वापस जाने लगा, उसे अपनी माँ की आवाज सुनाई दी। आवाज आ रही थी घर के पिछले हिस्से से जहां पुराना सामान रखा हुआ था।
अर्जुन धीरे-धीरे उस तरफ बढ़ा। उसने देखा कि पिछले कमरे का दरवाजा बंद था लेकिन खिड़की खुली हुई थी।
उसने खिड़की से झांका और उसके होश उड़ गए।
उसकी माँ रजनी वहां खड़ी थी और उसके सामने रमेश मामा थे।
रमेश ने अपनी बांह रजनी की कमर पर डाल रखी थी और वे दोनों एक-दूसरे को घूर रहे थे।
“क्या तुमने मुझे यहां बुलाया था?” रजनी ने धीमी आवाज में पूछा, उसकी आवाज में एक अजीब सी कामुकता थी।
रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहन, तुम्हें पता है मैंने तुम्हें क्यों बुलाया है।”
रजनी ने शरारती अंदाज में कहा, “नहीं, मुझे क्या पता।”
रमेश ने अचानक रजनी को अपनी ओर खींच लिया और उसके स्तनों पर अपने हाथ रख दिए।
रजनी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वह रमेश के और करीब हो गई।
अर्जुन बाहर खिड़की से यह सब देख रहा था। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी माँ और मामा के बीच ऐसा कुछ चल रहा होगा।
उसे पहले तो गुस्सा आया, लेकिन फिर उसे अजीब सा मजा आने लगा। उसकी पैंट में उसका लंड खड़ा हो गया था।
रमेश ने रजनी का दुपट्टा खींचा और उसे फर्श पर गिरा दिया। फिर उसने रजनी के सूट के बटन खोलने शुरू किए।
एक-एक करके सारे बटन खुल गए और रजनी का सूट खुल गया।
अंदर वह एक गहरे नीले रंग का ब्लाउज पहने हुए थी जो उसके स्तनों को बांधने की कोशिश कर रहा था लेकिन असफल रहता था।
“क्या बात है, आज तो तुम बेहद खूबसूरत लग रही हो,” रमेश ने कहा और रजनी के ब्लाउज पर अपने हाथ फेरने लगा।
रजनी ने सिसकते हुए कहा, “रमेश, जल्दी करो, कोई आ जाएगा।”
“डरो मत, सब बाहर व्यस्त हैं,” रमेश ने कहा और रजनी के ब्लाउज के हुक खोल दिए।
जैसे ही ब्लाउज खुला, रजनी के वो भारी स्तन बाहर आ गए। उसने एक काले रंग की फोम ब्रा पहनी थी जो उसके स्तनों को पूरी तरह ढक नहीं पा रही थी। ऊपर से नीचे तक उसके स्तनों का क्लीवेज दिखाई दे रहा था।
रमेश ने रजनी की ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। रजनी की आंखें बंद हो गईं और वह मजे लेने लगी।
“कितने दिनों से तुम्हारे इन स्तनों को छूने की इच्छा हो रही थी,” रमेश ने कहा और रजनी की ब्रा को नीचे खींच लिया।
रजनी के स्तन बाहर आ गए। वे इतने बड़े और गोल थे कि रमेश के हाथ में भी आ रहे थे।
उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे और बेहद बड़े थे। स्तनों के ऊपर हल्के-हल्के नीले नसें दिखाई दे रही थीं।
रमेश ने एक स्तन को पकड़ा और उसे मसलने लगा। रजनी की सांसें तेज हो गईं।
फिर रमेश ने नीचे झुककर रजनी के एक स्तन का निप्पल अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
“ओह रमेश… धीरे… बहुत मजा आ रहा है,” रजनी ने कराहते हुए कहा।
अर्जुन बाहर से यह सब देख रहा था। उसका लंड पैंट में तनकर खड़ा हो गया था।
उसने अपना लंड बाहर निकाला और हिलाने लगा।
उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी माँ, जो उसके सामने इतनी शरीफ रहती थी, अपने भाई के साथ ऐसे कर रही थी।
रमेश ने रजनी के दूसरे स्तन को भी अपने हाथ में ले लिया और दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूसने लगा।
रजनी का मुंह खुला हुआ था और वह आहें भर रही थी।
“तुम्हारे स्तन तो बेहद नरम हैं, बहन,” रमेश ने कहा और रजनी के स्तनों के बीच अपना चेहरा घुसा दिया।
रजनी ने रमेश का सिर अपने स्तनों पर दबा दिया।
रमेश उनके बीच सांस ले रहा था और उसकी गर्म सांसें रजनी को और उत्तेजित कर रही थीं।
फिर रमेश ने रजनी की सलवार का नाड़ा खोला। सलवार नीचे गिर गई और रजनी के पैरों पर आकर ढेर हो गई।
अब रजनी सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में थी। उसकी पैंटी भी काले रंग की थी और वह उसकी मोटी गांड को बांधने की कोशिश कर रही थी।
रमेश ने पीछे से रजनी की गांड पर हाथ मारा। “क्या गांड है तुम्हारी, इतनी मोटी और गोल,” रमेश ने कहा।
रजनी ने शरारत से कहा, “पसंद आई तुम्हें?”
“बहुत पसंद आई,” रमेश ने कहा और रजनी की गांड को सहलाने लगा।
फिर रमेश ने रजनी को घुमाया और उसकी गांड को कसकर पकड़ लिया।
उसने अपने हाथ रजनी की गांड की दरार में फेरे और रजनी को और करीब खींच लिया।
“मैं तुम्हें बहुत समय से चाहता था,” रमेश ने कहा।
“मुझे पता था,” रजनी ने कहा और रमेश के होठों पर चूमा कर दिया।
दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगाया और फिर एक लंबा चुंबन लिया।
उनकी जुबानें एक-दूसरे से लड़ रही थीं और दोनों एक-दूसरे को चूस रहे थे।
अर्जुन बाहर से यह सब देख रहा था। उसने अपना लंड तेजी से हिलाना शुरू कर दिया। उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह स्वर्ग में हो।
रमेश ने रजनी को बिस्तर पर बैठने के लिए कहा। रजनी बिस्तर पर बैठ गई और रमेश उसके सामने खड़ा हो गया।
रमेश ने अपनी पैंट की चेन खोली और अपना लंड बाहर निकाला।
वह लंड देखकर रजनी की आंखें चौड़ी हो गईं। वह लंड कम से कम 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था।
उसका सिर बैंगनी रंग का हो चुका था और वह तनकर खड़ा था।
“यह तो बहुत बड़ा है,” रजनी ने कहा।
“तुम्हारे लिए है, बहन,” रमेश ने कहा और अपना लंड रजनी के मुंह के पास ले आया।
रजनी ने पहले तो झिझकी, लेकिन फिर उसने रमेश का लंड अपने हाथ में ले लिया।
वह उसे सहला रही थी और उसे देख रही थी। फिर उसने अपनी जीभ निकाली और लंड के सिरे पर चाटा।
रमेश ने आह भरी। रजनी ने फिर लंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
वह लंड को पूरा अपने गले तक उतार रही थी और फिर बाहर निकालकर चूस रही थी।
“ओह रजनी… बहुत अच्छा कर रही हो तुम,” रमेश ने कहा और रजनी के सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाने लगा।
रजनी पूरी लगन से रमेश का लंड चूस रही थी। उसके मुंह से आवाजें आ रही थीं और वह लंड को अपने मुंह में अंदर-बाहर कर रही थी।
उसके थूक से रमेश का लंड चमकने लगा था।
अर्जुन बाहर से यह सब देख रहा था। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी माँ ऐसे काम कर सकती है।
उसका लंड पूरी तरह तनकर खड़ा था और उसने अपना वीर्य निकाल दिया था, लेकिन वह फिर से उत्तेजित हो गया था।
रमेश ने रजनी को बिस्तर पर लेटने के लिए कहा। रजनी बिस्तर पर लेट गई और रमेश उसके ऊपर आ गया।
रमेश ने रजनी की ब्रा खोल दी और उसके स्तनों को चूसने लगा। फिर वह नीचे सरका और रजनी की पैंटी खोल दी।
रजनी की चूत साफ शेव की हुई थी और वह गुलाबी रंग की थी। रमेश ने उसे देखा और फिर उस पर अपनी जीभ फेरने लगा।
“ओह… रमेश… हां… वहीं… और जोर से,” रजनी चीख रही थी।
रमेश ने रजनी की चूत में अपनी जीभ घुसा दी और उसे अंदर-बाहर करने लगा।
रजनी का पूरा शरीर कांप रहा था। उसने अपने पैर फैला दिए और रमेश का सिर अपनी चूत पर दबा दिया।
रमेश रजनी की चूत को चाट रहा था और उसकी गांड पर अपने हाथ फेर रहा था। फिर उसने अपनी एक उंगली रजनी की चूत में डाल दी।
“ओह मां… यह क्या कर रहे हो,” रजनी ने कहा।
“मजा आ रहा है ना,” रमेश ने कहा और अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
रजनी की चूत से पानी निकलने लगा था। रमेश ने उस पानी को चाटा और फिर खड़ा हो गया।
उसने रजनी के पैरों को फैलाया और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया।
“तैयार हो?” रमेश ने पूछा।
“हां, डाल दो… मुझे बहुत दिनों से चाहिए था यह,” रजनी ने कहा।
रमेश ने एक जोर का धक्का मारा और उसका लंड रजनी की चूत में घुस गया।
“ओहhhhh… बहुत बड़ा है… धीरे… दर्द हो रहा है,” रजनी चीखी।
रमेश ने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। रजनी की चूत बहुत टाइट थी और रमेश को बहुत मजा आ रहा था।
“कितनी टाइट है तुम्हारी चूत,” रमेश ने कहा।
“तुम्हारा बहुत मोटा है,” रजनी ने कहा।
धीरे-धीरे रजनी को मजा आने लगा और वह रमेश के धक्कों का साथ देने लगी।
रमेश ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
पच पच पच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। रजनी की चूत से पानी निकल रहा था और रमेश का लंड उसमें आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
“ओह रमेश… और जोर से… मुझे फाड़ दो,” रजनी चीख रही थी।
रमेश ने रजनी के पैर अपने कंधों पर रखे और और जोर से धक्के मारने लगा।
उसका लंड रजनी की चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था।
“आहhhhh… मैं झड़ने वाली हूं,” रजनी ने कहा।
“मैं भी,” रमेश ने कहा।
दोनों एक साथ झड़ गए। रमेश ने अपना वीर्य रजनी की चूत में ही निकाल दिया और रजनी ने भी अपना पानी छोड़ दिया।
वे दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए।
रमेश ने रजनी को अपनी बांहों में भर लिया और उसके स्तनों को सहलाने लगा।
“कब से यह सब सोच रहे थे तुम?” रजनी ने पूछा।
“बहुत समय से, जब से तुम शादी करके यहां आई थी,” रमेश ने कहा।
“मैं भी तुम्हें पसंद करती थी, लेकिन डरती थी,” रजनी ने कहा।
अर्जुन बाहर से यह सब देख चुका था। उसने अपना वीर्य दो बार निकाल दिया था।
उसे अपनी माँ के प्रति एक अजीब सी इच्छा हो रही थी। वह सोच रहा था कि काश वह रमेश की जगह होता।
थोड़ी देर बाद रजनी और रमेश ने अपने कपड़े ठीक किए और बाहर चले गए।
अर्जुन भी चुपचाप वहां से निकल गया और बाहर आ गया।
शाम को जब सब लोग खाना खाने बैठे, तो अर्जुन अपनी माँ को देख रहा था।
रजनी बिल्कुल नॉर्मल दिख रही थी, जैसे कुछ हुआ ही न हो। लेकिन अर्जुन को पता था कि कुछ हुआ था और वह इसे कभी नहीं भूलेगा।
रात को जब सब लोग सो गए, अर्जुन जाग रहा था। उसे अपनी माँ के कमरे से अजीब सी आवाजें आ रही थीं।
उठकर वह उस तरफ गया और दरवाजे के पास कान लगाया।
अंदर से रजनी की सिसकियों की आवाज आ रही थी। अर्जुन ने दरवाजे की दरार से झांका और देखा कि रमेश फिर से उसकी माँ के कमरे में था।
इस बार रजनी कुत्ते की तरह बैठी हुई थी और रमेश उसकी गांड में अपना लंड डाले हुए थे।
“ओह… यह और भी मजेदार है,” रजनी कह रही थी।
रमेश ने जोर से धक्का मारा और उसका पूरा लंड रजनी की गांड में घुस गया।
“आहhhhh… बहुत गहरा है,” रजनी ने कहा।
रमेश ने रजनी की कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
उसका लंड रजनी की मोटी गांड में आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
अर्जुन यह सब देख रहा था। उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था।
वह सोच रहा था कि उसकी माँ कितनी कामुक है और वह कितनी मजे से अपने भाई से चुदवा रही है।
रमेश ने रजनी की गांड में 15 मिनट तक धक्के मारे और फिर उसमें ही अपना वीर्य निकाल दिया।
अगले दिन सुबह जब अर्जुन उठा, तो उसकी माँ रसोई में थी। अर्जुन वहां गया और अपनी माँ को पीछे से गले लगा लिया।
“क्या हुआ बेटा?” रजनी ने पूछा।
“कुछ नहीं माँ, बस ऐसे ही,” अर्जुन ने कहा और अपने हाथ अपनी माँ की कमर पर फेरे।
रजनी को अजीब सा लगा, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
दिन भर अर्जुन अपनी माँ को देखता रहा। वह उसकी मोटी गांड और भारी स्तनों को देखकर उत्तेजित हो रहा था।
उसे रात का वो दृश्य याद आ रहा था जब उसकी माँ रमेश के साथ थी।
शाम को जब रमेश वहां से जाने लगा, तो उसने रजनी को एक चिट्ठी दी। रजनी ने वह चिट्ठी अपनी ब्रा में छिपा ली।
रात को जब अर्जुन सो रहा था, तो उसकी आंख खुली और उसने देखा कि उसकी माँ बाथरूम में जा रही है।
वह उठकर बाथरूम के दरवाजे के पास गया और झांका।
रजनी नहा रही थी। उसने अपने कपड़े उतार दिए थे और वह पूरी नंगी थी।
उसका फिगर पानी में भी बेहद खूबसूरत लग रहा था।
उसके स्तन पानी की बौछारों से भीगे हुए थे और उसकी गांड पीछे से बेहद मोटी दिख रही थी।
अर्जुन का लंड फिर से खड़ा हो गया। उसने अपना लंड निकाला और हिलाने लगा।
तभी रजनी ने पीछे मुड़कर देखा और अर्जुन को देख लिया।
अर्जुन डरकर वहां से भागने लगा, लेकिन रजनी ने उसे रोक लिया।
“रुको अर्जुन,” रजनी ने कहा।
अर्जुन रुक गया और डरा हुआ अपनी माँ की तरफ देखने लगा।
“कब से देख रहे हो तुम मुझे?” रजनी ने पूछा।
अर्जुन चुप रहा।
“कल रात तुमने देखा था ना?” रजनी ने पूछा।
अर्जुन ने हामे में सिर हिलाया।
रजनी चुप रही। फिर उसने कहा, “आओ अंदर।”
अर्जुन हैरान होकर अपनी माँ की तरफ देखने लगा।
“मैंने कहा आओ,” रजनी ने कहा।
अर्जुन धीरे-धीरे अंदर गया। रजनी ने बाथरूम का दरवाजा बंद कर दिया।
“तुम्हें पता है यह सब गलत है?” रजनी ने पूछा।
“माँ, मैं… मैं सॉरी,” अर्जुन ने कहा।
“सॉरी नहीं, तुम्हें यह सब देखने में मजा आता है ना?” रजनी ने पूछा।
अर्जुन ने शर्माते हुए हामे में सिर हिलाया।
रजनी ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं जानती थी कि तुम मुझे देखते हो। मैंने कई बार तुम्हें मेरे कपड़े सूंघते हुए देखा है।”
अर्जुन की आंखें चौड़ी हो गईं।
“डरो मत, मैं गुस्सा नहीं हूं,” रजनी ने कहा और अपने हाथ अर्जुन के कंधों पर रखे।
“तुम बड़े हो गए हो अर्जुन, और मैं भी एक औरत हूं। मुझे भी जरूरतें हैं,” रजनी ने कहा।
“माँ…” अर्जुन ने कहा।
“चुप करो, और मुझे देखो,” रजनी ने कहा और अपने कपड़े पूरी तरह उतार दिए।
अर्जुन की सांसें थम गईं। उसकी माँ उसके सामने पूरी नंगी खड़ी थी।
उसके स्तन बेहद बड़े और गोल थे, उसकी कमर पतली थी और उसकी गांड बेहद मोटी और गोल थी।
“पसंद आया मेरा शरीर?” रजनी ने पूछा।
“हां माँ, बहुत,” अर्जुन ने कहा।
“तो फिर आओ, छुओ मुझे,” रजनी ने कहा।
अर्जुन ने धीरे से अपने हाथ बढ़ाए और अपनी माँ के स्तनों को छुआ। वे इतने नरम थे कि उसके हाथ उसमें डूब गए।
“कैसे लगे?” रजनी ने पूछा।
“बहुत नरम हैं माँ,” अर्जुन ने कहा।
“और मजे लो,” रजनी ने कहा।
अर्जुन ने रजनी के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। उसे बेहद मजा आ रहा था।
फिर उसने एक स्तन का निप्पल अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
“ओह बेटा… बहुत अच्छा कर रहे हो,” रजनी ने कहा और अर्जुन के सिर को अपने स्तनों पर दबा दिया।
अर्जुन दोनों स्तनों को बारी-बारी से चूस रहा था। उसकी जीभ निप्पलों पर फिर रही थी और रजनी को बेहद मजा आ रहा था।
फिर रजनी ने अर्जुन का चेहरा पकड़ा और उसके होठों पर चूमा कर दिया।
माँ-बेटे के बीच का बंधन टूट चुका था। वे दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगाए और गहरे चुंबन करने लगे।
अर्जुन ने अपनी माँ की गांड पर हाथ फेरा। वह इतनी मोटी थी कि उसका हाथ उसमें डूब गया।
“क्या गांड है माँ आपकी,” अर्जुन ने कहा।
“पसंद आई?” रजनी ने पूछा।
“बहुत,” अर्जुन ने कहा और गांड को कसकर पकड़ लिया।
रजनी ने अर्जुन की पैंट खोली और उसका लंड बाहर निकाला। वह 7 इंच लंबा और मोटा था।
“मेरे बेटे का तो बहुत बड़ा है,” रजनी ने कहा और अर्जुन के लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी।
फिर वह नीचे झुकी और अर्जुन के लंड को अपने मुंह में ले लिया।
“ओह माँ… यह क्या कर रही हो,” अर्जुन ने कहा।
“मजा दे रही हूं अपने बेटे को,” रजनी ने कहा और लंड चूसने लगी।
अर्जुन को बेहद मजा आ रहा था। उसकी माँ उसका लंड बड़े मजे से चूस रही थी।
उसने रजनी के सिर को पकड़ा और अपने लंड पर दबाने लगा।
रजनी ने अर्जुन का पूरा लंड अपने गले तक उतार लिया और फिर बाहर निकालकर चाटने लगी।
उसके थूक से लंड चमकने लगा था।
“माँ, मैं झड़ने वाला हूं,” अर्जुन ने कहा।
“मेरे मुंह में ही निकाल दो,” रजनी ने कहा।
अर्जुन ने जोर से धक्के मारे और रजनी के मुंह में ही अपना वीर्य निकाल दिया।
रजनी ने सब कुछ पी लिया और फिर खड़ी हो गई।
“कैसा लगा?” रजनी ने पूछा।
“स्वर्ग जैसा माँ,” अर्जुन ने कहा।
“अभी तो बहुत कुछ बाकी है,” रजनी ने मुस्कुराते हुए कहा।
उसने अर्जुन को बाथरूम के फर्श पर बैठने के लिए कहा और खुद उसके ऊपर बैठ गई।
उसने अर्जुन का लंड अपने हाथ में लिया और अपनी चूत के मुहाने पर रखा।
“तैयार हो अपनी माँ की चूत के लिए?” रजनी ने पूछा।
“हां माँ, बहुत दिनों से इंतजार था,” अर्जुन ने कहा।
रजनी ने धीरे से नीचे बैठना शुरू किया और अर्जुन का लंड उसकी चूत में घुस गया।
“ओहhhhh… बहुत बड़ा है तेरा,” रजनी ने कहा।
अर्जुन ने अपनी माँ की कमर पकड़ी और नीचे से धक्के मारने लगा।
रजनी ऊपर-नीचे हो रही थी और अर्जुन का लंड उसकी चूत में पूरा अंदर-बाहर हो रहा था।
“ओह बेटा… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से,” रजनी चीख रही थी।
अर्जुन ने पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू कर दिए। उसकी माँ की चूत इतनी गर्म और टाइट थी कि उसे बेहद मजा आ रहा था।
वह अपनी माँ के स्तनों को दबाते हुए उसे चोद रहा था।
पच पच पच की आवाजें बाथरूम में गूंज रही थीं। रजनी का पूरा शरीर कांप रहा था और वह अपने बेटे से चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी।
“ओह माँ… मैं झड़ने वाला हूं,” अर्जुन ने कहा।
“अंदर ही निकाल दो बेटा… मुझे तेरा वीर्य चाहिए,” रजनी ने कहा।
अर्जुन ने कुछ और जोर से धक्के मारे और फिर अपनी माँ की चूत में ही अपना वीर्य निकाल दिया। रजनी भी झड़ गई और वह अपने बेटे पर गिर पड़ी।
दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बाथरूम के फर्श पर लेटे रहे।
रजनी ने अर्जुन के बालों में हाथ फेरा और कहा, “तुम्हें पता है, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं।”
“मैं भी माँ, लेकिन अब यह प्यार और भी गहरा हो गया है,” अर्जुन ने कहा।
“हां, अब हम एक-दूसरे के हैं,” रजनी ने कहा।
उस रात के बाद अर्जुन और रजनी का रिश्ता बदल गया। वे अब सिर्फ माँ-बेटे नहीं थे, बल्कि प्रेमी भी थे।
वे हर रात एक-दूसरे के साथ सोते थे और एक-दूसरे को संतुष्ट करते थे।
रमेश भी कभी-कभी आता था, लेकिन अब रजनी के लिए अर्जुन ही सब कुछ था।
अर्जुन अपनी माँ को हर तरह से खुश रखता था और रजनी भी अपने बेटे को पूरा प्यार देती थी।
शादी के बाद जब वे वापस अपने घर आए, तो अर्जुन ने अपने कमरे को छोड़कर अपनी माँ के कमरे में सोना शुरू कर दिया।
रजनी भी खुश थी कि उसे अब अकेलेपन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
रातों में जब पड़ोसी सो जाते थे, अर्जुन अपनी माँ की चूत और गांड मारता था। रजनी भी अपने बेटे से हर तरह की खुशी लेती थी।
एक बार अर्जुन ने अपनी माँ से पूछा, “माँ, क्या आपको मामा की याद नहीं आती?”
रजनी ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब मुझे सिर्फ तुम्हारी जरूरत है बेटा। तुम ही मेरे सब कुछ हो।”
अर्जुन ने अपनी माँ को गले लगाया और उसके स्तनों को दबाते हुए कहा, “मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं माँ, हमेशा।”
और इस तरह अर्जुन और रजनी का यह रिश्ता आगे बढ़ता रहा।
एक माँ जो अपने बेटे से प्यार करती थी, और एक बेटा जो अपनी माँ को दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत मानता था।
उनकी यह कहानी एक नए रिश्ते की शुरुआत थी, जो शायद समाज के लिए गलत थी, लेकिन उनके लिए सच्चा प्यार था।
शाम को जब अर्जुन कॉलेज से आता, तो रजनी उसके लिए तैयार रहती।
वह उस दिन एक खास लैंगरी पहनती जो अर्जुन को पसंद थी। कभी-कभी वह बिल्कुल नंगी भी हो जाती और अर्जुन के इंतजार में बैठी रहती।
अर्जुन आते ही अपनी माँ को गले लगाता और उसके स्तनों को दबाता।
फिर वे दोनों सोफे पर बैठकर एक-दूसरे को चूमते और सहलाते।
रजनी अपने बेटे का लंड निकालकर उसे हाथ से सहलाती और फिर उसे अपने मुंह में ले लेती।
अर्जुन को अपनी माँ का मुंह बेहद पसंद था। वह इतनी अच्छी तरह चूसती थी कि उसे बहुत जल्दी झड़ने का मन करता था।
लेकिन वह रुकता था क्योंकि उसे अपनी माँ की चूत में अपना लंड डालना पसंद था।
एक बार अर्जुन ने अपनी माँ से कहा, “माँ, मैं आपकी गांड मारना चाहता हूं।”
रजनी ने शुरू में झिझक दिखाई, लेकिन फिर मान गई। उसने कहा, “ठीक है बेटा, लेकिन धीरे से करना, पहली बार है मेरी गांड में।”
अर्जुन ने अपनी माँ को बेड पर कुत्ते की तरह बैठने के लिए कहा।
रजनी ने ऐसा ही किया। उसकी मोटी गांड हवा में थी और अर्जुन उसे देखकर बेहद उत्तेजित हो गया।
उसने अपनी माँ की गांड पर थूका और फिर अपना लंड उसके मुहाने पर रखा।
धीरे से धक्का मारा और उसका सिरा अंदर चला गया।
“ओहhhhh… बहुत दर्द हो रहा है बेटा… धीरे,” रजनी चीखी।
अर्जुन ने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डाला। रजनी की गांड बेहद टाइट थी और उसे बहुत मजा आ रहा था।
जब पूरा लंड अंदर चला गया, तो उसने रुककर अपनी माँ की कमर सहलाई।
“अब ठीक है माँ?” अर्जुन ने पूछा।
“हां बेटा, अब चलो,” रजनी ने कहा।
अर्जुन ने धक्के मारने शुरू किए। रजनी की गांड में उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
धीरे-धीरे रजनी को भी मजा आने लगा और वह अपने बेटे का साथ देने लगी।
“ओह बेटा… बहुत अच्छा लग रहा है… और जोर से,” रजनी कहने लगी।
अर्जुन ने पूरी ताकत से धक्के मारने शुरू कर दिए।
उसकी माँ की गांड इतनी मोटी थी कि उसका लंड पूरी तरह उसमें समा जाता था।
पच पच पच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
रजनी का पूरा शरीर कांप रहा था और वह अपने बेटे से अपनी गांड मरवाने का पूरा मजा ले रही थी।
“आह… मैं झड़ने वाली हूं,” रजनी ने कहा।
“मैं भी माँ,” अर्जुन ने कहा।
दोनों एक साथ झड़ गए। अर्जुन ने अपना वीर्य अपनी माँ की गांड में ही निकाल दिया और फिर उसके ऊपर गिर पड़ा।
उस रात के बाद रजनी को भी अपनी गांड मरवाने में बहुत मजा आने लगा।
वह अक्सर अपने बेटे से कहती कि वह उसकी गांड मारे।
अर्जुन भी खुश था। उसे अपनी माँ की चूत भी पसंद थी और गांड भी।
वह रात में कभी चूत में डालता, तो कभी गांड में। कभी-कभी वह एक रात में दोनों जगह भी डालता था।
रजनी भी अपने बेटे को पूरा संतुष्ट करती। वह हर तरह से उसकी खिदमत करती।
सुबह उठकर उसका लंड चूसती, रात को उसे अपनी चूत और गांड देती।
उनका यह रिश्ता सालों तक चला। अर्जुन ने शादी भी नहीं की क्योंकि उसे अपनी माँ से बढ़कर कोई औरत पसंद नहीं आती थी।
रजनी भी खुश थी कि उसका बेटा सिर्फ उसी का था।
और इस तरह यह कहानी खत्म होती है, एक माँ और बेटे की कहानी जो प्यार से शुरू हुई और एक अनोखे रिश्ते में बदल गई।
यह कहानी सिर्फ उन दोनों के बीच थी, एक रहस्य जो हमेशा के लिए उनके दिलों में बसा रहा।
- मेरी सलहज मुझसे चुदवाकर अपनी प्यास बुझायी
- गुरूजी टीचर्स डे पर चोद दिए
- ठेले वाले ने मालिश करके मुझे चोदा
- मेरे यार ने मुझे चोदकर औरत बनाया
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Wow! very beautiful story.