jeth bhabhi ki vasna chudai
मेरा नाम सपना है और मैं 36 साल की एक शादी-शुदा और भरपूर जिस्म की मालकिन हूँ मेरे रूप में एक अजीब सा खिंचाव है जिसे मैं खुद भी महसूस करती हूँ मेरा फिगर 36C-32-38 है और मेरे बूब्स का हैवी और पर्फेक्ट्ली शेप्ड होना हर कपडे में उभर कर नज़र आता है. मेरी कमर पतली और गांड बिलकुल टाइट है जो साड़ी या लेग्गिंग्स में और भी ज़्यादा अट्रैक्टिव लगती है.
मैं अपने लुक्स का ध्यान रखती हूं पर एक डेन्सी और ग्रेस के साथ. घर में सलवार-कुर्ती या कम्फर्टेबल लेग्गिंग्स पहनती हूं अक्सर बिना ब्रा के. बाहर जाते वक़्त जीन्स-टॉप या कभी-कभी एक एलिगेंट साड़ी को चुनना पसंद करती हूं जिसमें मेरी कमर और हिप्स की शेप क्लियर दिखे. मैं यहाँ अपने सास-ससुर, जेठ-जेठानी और उनके दो बच्चों के साथ रहती हूँ मेरा 14 साल का बेटा बोर्डिंग स्कूल में पढता है और उसकी कमी हर दिन महसूस होती है.
पूरा दिन घर के काम रसोई और ज़िम्मेदारियों में गुज़र जाता है. पर जब रात होती है तो अकेलापन चुभने लगता है. मेरे पति मर्चेंट नेवी में है और साल में सिर्फ दो बार कुछ दिनों के लिए घर आते है. वो 10-15 दिन -मेरे लिए एक सपने जैसे होते है. हर रात वो मेरी हर प्यास बुझाते है. मैं उनका प्यार अपने हर अंग से महसूस करती हूँ जब वो मेरे हैवी बूब्स को चाटते है, उनकी जीभ मेरी भीगती चूत पर अपना जादू चलाती है और फिर अपने लंड से मुझे उसी तरह चोदते है जैसे मैं चाहती हु.
एक दिन मैं घर पर बोर हो रही थी और हस्बैंड की गैर-मौजूदगी में सेक्सुअल नीड्स बहुत ज़्यादा महसूस हो रही थी. दोपहर का समय था काम निपटा कर मैं अपने बैडरूम में आयी थोड़ी देर आराम करने. मैं बोर हो रही थी तो मैंने फ़ोन उठाया और नेट पर कुछ रैंडम सर्च करने लगी. कभी शॉपिंग साइट्स कभी यूट्यूब… पर एक बार गलती से एक अजीब सा लिंक क्लिक हो गया.
जैसे ही पेज खुला मैं थोड़ा चौक गयी – एक सेक्स स्टोरी साइट थी. तब से मैंने नेट पर ऐसी स्टोरीज पढ़ना शुरू कर दिया. एक दिन मुझे एक ऐसी स्टोरी मिली जिसमें एक लेडी को उसके जेठ ने चोदा था. वो स्टोरी पढ़ कर मुझे एक अजीब सी झुरझुरी सी हुई. मैंने पहली बार वहां खुद को महसूस किया और मेरे दिमाग में मेरे जेठ नवीन जी का ख़याल आया. मेरी सांसें तेज़ हो गयी थी.
स्टोरी में जब उसका जेठ उसके ब्लाउज के हुक्स खोलता है मैं अपना कुर्ती का गाला नीचे खींच कर अपने बूब्स को हाथ से दबाने लगी. मेरे निप्पल्स आलरेडी सख्त हो चुके थे. एक हाथ से फ़ोन पकडे थी और दूसरा हाथ लेग्गिंग्स के अंदर जा चुका था. मेरी चूत इतनी गीली थी जैसे किसी ने आलरेडी चाट दिया हो. मैं धीरे-धीरे अपनी ऊँगली से चूत मसल रही थी और आँखें बंद करके बस जेठ जी के हाथो को महसूस करने की कोशिश कर रही थी.
5 मिनट भी नहीं लगे और मैं ज़ोर से झड़ गयी. सारा बदन कांप गया. बेड शीट भी हलकी सी भीग गयी थी. उस दिन शाम को जब जेठ जी ऑफिस से आये तो जैसे कुछ पल के लिए मेरी सांस ही रुक गयी. पहले तो मैंने उन्हें हमेशा एक मर्यादा में देखा था अपने पति के बड़े भाई के रूप में. हमेशा रेस्पेक्ट की नज़र से कभी एक पल के लिए भी कोई और सोच नहीं आयी थी. पर आज… आज मैं उन्हें देख कर वही कहानी याद कर बैठी थी जो दोपहर में गलती से पढ़ ली थी.
वो कहानी जो शायद कभी पढ़ना ही नहीं चाहिए था. मेरे अंदर कुछ बदल गया था… कुछ जग गया था. उनका आना वो रोज़ की तरह था – हलकी सी थकान कुछ फाइल्स हाथ में और उनकी कैजुअल सी शर्ट जिसमे कुछ बटन्स खुले थे. पर मुझे आज वो थकान भी सेक्सी लगी… वो पसीना भी एक अजीब सी खुशबू दे रहा था जो सीधा मेरे अंदर तक घुस रही थी. मुझे आज उनके कदम भी मर्द लग रहे थे… वो आँखें वो बॉडी सब कुछ अलग लग रहा था.
मुझे खुद पे यकीन नहीं हो रहा था. ये मैं क्या सोच रही हूँ मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था जैसे उसका हर बीट कह रहा हो गलत है. पर न चाह कर भी मुझे ठीक भी लग रहा था. एक अजीब सी घबराहट थी पर उस घबराहट के पीछे एक छुपी हुई एक्साईटमेंट भी थी. जिस जेठ जी को मैंने हमेशा बड़े भाई का दर्जा दिया था। आज उनकी एक मुस्कान उनकी एक नज़र मुझे कुछ और महसूस करा रही थी. शायद क्यूंकि मैंने दोपहर में वो कहानी सिर्फ पढ़ी नहीं थी जी ली थी. और जो कुछ मेरे जिस्म के साथ हुआ था उससे मैं इग्नोर नहीं कर पा रही थी.
जब उनकी और मेरी आँखें टकराई तो जैसे टाइम रुक गया हो. एक सेकंड… सिर्फ एक सेकंड… पर उस एक पल में जैसे मेरी सारी सोच मेरी सारी मर्यादा मेरी शराफत- सब कुछ बेचैन हो उठी थी. उन्होंने भी मुझे देखा और शायद कुछ अलग महसूस किया. एक नज़र में कुछ तो था. जैसे मैं उनकी आँखों में पहली बार अपने लिए कुछ और ही देख रही थी – न वो बहु वाली रेस्पेक्ट थी न फॉर्मेलिटी. कुछ और था… कुछ मर्द और औरत के बीच का. उस पल के बाद दोनों ने ही नज़र हटा ली. एक अजीब सी हिचकिचाहट थी.
उस दिन के बाद मुझे चैन ही नहीं था. हर दोपहर जब घर के सारे काम निपटा लेती थी तो मैं अपने बैडरूम में चली जाती. दरवाज़ा बंद करके बेड पे लेट जाती और फ़ोन में वही स्टोरीज ढूंढती – भाभी और जेठ की चुदाई वाली कहानियां. जाने क्यों जब भी किसी औरत का अपने जेठ के साथ फिजिकल रिलेशन होता था न तो मेरे अंदर एक अजीब सी गर्मी उठती थी. जिस्म में जलन सी महसूस होती थी और चूत में हल्का सा गीला-पन जैसे मेरी चूत भी किसी के लंड का इंतज़ार कर रही हो.
स्टोरी पढ़ते हुए मैं अपने पैर चादर के अंदर ले जाती थी उन्हें थोड़ा कस के बंद करती जैसे कोई मुझे ज़ोर से पकड़ रहा हो. कभी-कभी मेरी उँगलियाँ अपने आप ही पैंटी के ऊपर से चूत के पास पहुँच जाती थी. बस थोड़ा सा प्रेशर डालती और पूरा जिस्म कांप उठता था.
एक रात तो सब हद पार हो गयी. मैंने सपने में देखा की मैं अपने जेठ जी के साथ बेड पे हूँ मेरी नाइटी घुटनो तक चढ़ी है और उनका लंड मेरी चूत के अंदर धीरे-धीरे घुस रहा है. इतना ठोस इतना भरपूर था वो सपना की मैं नींद में ही झड़ गयी. जब आँख खुली तो मेरी पैंटी पूरी तरह से गीली थी जैसे किसी ने सच में मेरी चूत को चाट दिया हो या फिर अंदर तक भर दिया हो.
मैं थोड़ा हंसी थोड़ा घबराई लेकिन सबसे ज़्यादा मुझे महसूस हुई अपने अंदर एक औरत की असली भूख जो सिर्फ एक मर्द के लंड से ही शांत होती है. मैंने पैंटी बदली लेकिन नींद वापस नहीं आयी. बेड पे लेटी थी पर आँखों के सामने सिर्फ जेठ जी का चेहरा था. उनकी वो गहरी आँखें वो थोड़ा डार्क स्किन जिसमे एक अलग ही रुग्गड़ चार्म था… और सबसे ज़्यादा उनका वो पल जब हमारी नज़र टकराई थी. उस रात मुझे समझ आया… की मेरे अंदर कुछ बदल चुका है.
दुसरे दिन जब मैं बैडरूम से बाहर निकली तो मेरी नज़र सीधा उन पर पड़ी. पता नहीं क्यों लेकिन उनको देखते ही मेरे दिल में एक मीठा सा एहसास जाग गया. जैसे आँखों ने जो देखा हो वो सिर्फ आँखों तक नहीं रुका… उसने दिल को छू लिया हो. मैंने उनको हल्का सा स्माइल दिया और उन्होंने भी मुझे वैसा ही जवाब दिया. लेकिन उनकी आँखों में एक अलग सी चमक थी एक अनजानी सी गर्मी.
उस दिन के बाद जब भी वो घर में होते मैं उन्हें छुप-छुप के देखा करती थी. हर बार उनका बदन, उनकी चाल, उनका अंदाज़ सब कुछ मुझे अपनी तरफ खींचता था. जैसे हर पल हर नज़र मेरी चूत में एक नरमी एक हल्का सा गीला-पन भर देती थी. उनकी हर हरकत चाहे वो ऑफिस जाने के टाइम फॉर्मल पहनते या शाम को घर आने के बाद शॉर्ट्स और टी-शर्ट – मैं सब कुछ नोटिस करती थी. जब मैं कपडे सुखाने के वक़्त उनका अंडरवियर हाथ में लेती थी तो उसमे लंड का अंदाज़ा लगा कर ही मेरी सांस तेज़ हो जाती थी.
मुझे लगता था उनका लंड कैसे दिखता होगा कैसा महसूस होता होगा… ये सोच के ही मेरी चूत भीग जाती थी. मुझे लगता था वो भी ये सब महसूस कर रहे थे. कभी-कभी उनका मुझे लम्बे वक़्त तक देखते रहना मेरी बातों में एक्स्ट्रा इंटरेस्ट लेना… कुछ तो था. लेकिन हम दोनों ने कभी भी कोई लिमिट क्रॉस नहीं की. सब कुछ सिर्फ आँखों तक था. नज़रों की एक ऐसी भाषा जिसमे सब कुछ था डिजायर समझ और थोड़ा सा डर भी.
मैं बहुत कन्फ्यूज्ड थी. क्या ये सिर्फ मेरी तरफ से था? क्या मैं ही ज्यादा सोच रही थी? या फिर उनके दिल में भी कुछ ऐसा था जो उन्होंने छुपा रखा था? हर रोज़ ये सवाल मुझे और बेचैन करता जा रहा था. आगे क्या हुआ जाने कहानी के अगले पार्ट में.
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