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मेरा नाम राहुल बैजल है। मैं कटिहार, बिहार का रहने वाला हूँ और इंजीनियरिंग का छात्र हूँ।
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी मजबूरी मेरी हाइट है – सिर्फ चार फीट नौ इंच।
इस छोटी हाइट की वजह से मुझे हमेशा से ही लोगों का मजाक झेलना पड़ा है।
कॉलेज में मेरे दोस्त मुझे “छोटू” और “बौना” बुलाकर चिल्लाते हैं।
लेकिन किसी को यह नहीं पता कि इस छोटी हाइट के आदमी के पास एक ऐसा हथियार है जो किसी भी सामान्य भारतीय पुरुष से कई गुना बड़ा है।
मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा होने पर ग्यारह इंच लंबा और चार इंच मोटा है।
यह साइज आम तौर पर सिर्फ विदेशी पोर्न वीडियो में देखा जा सकता है।
मैं जब अपने लंड को देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि भगवान ने मेरी हाइट में जो कमी की, उसका बदला मेरी इस नास्तिक शक्ति में पूरा कर दिया है।
मेरी मौसी, जिनका नाम नीतू है, हमेशा से ही मुझ पर हंसी उड़ाती आई हैं।
जब भी कोई पारिवारिक फंक्शन होता है, वह जरूर मेरी हाइट का मजाक उड़ाती हैं।
वह कहती हैं, “अरे राहुल, तुझे तो बच्चों के सेक्शन से कपड़े खरीदने पड़ते होंगे ना?” या फिर “तेरा खड़ा होने पर भी किसी की कमर तक नहीं पहुंचता होगा।”
मेरी माँ बेचारी का भी वह बहुत मजाक उड़ाती हैं, कहती हैं, “ठेपनी माँ का ठेपना बेटा आ गया।”
मौसी की शक्ल बिल्कुल कश्मीर की किसी परी जैसी है। उनकी हाइट पांच फीट पांच इंच है, जिससे मुझसे लगभग आठ इंच ज्यादा है।
उनके स्तन चौंतीस इंच के हैं जो कि एकदम सख्त और उभरे हुए हैं।
उनकी कमर बत्तीस इंच की पतली सी है और उनकी गांड अड़तीस इंच की बड़ी, गोल और मस्त है।
उनका रंग बिल्कुल दूध जैसा गोरा है।
उनकी उम्र पैंतीस साल है और वह शादी-शुदा हैं, लेकिन उनके पति मौसा जी मुंबई में काम करते हैं और महीने में सिर्फ एक बार घर आते हैं।
मैं बचपन से ही उनकी इस खूबसूरती को देखते हुए बड़ा हुआ हूँ।
मैंने हमेशा से ही सोच रखा था कि एक न एक दिन मैं उन्हें अपने इस बड़े लंड से चोदकर उन्हें वह सुख दिलाऊंगा जो शायद उन्होंने आज तक महसूस नहीं किया होगा।
गर्मियों की छुट्टियाँ थीं। मैं इंजीनियरिंग के चौथे साल में था और घर आया हुआ था।
एक दिन दोपहर को जब मैं अपने कमरे में सो रहा था, तब मेरी माँ आई और बोली, “राहुल, तुम्हारी मौसी की तबीयत बहुत खराब है। उसे बुखार है और पेट में बहुत दर्द हो रहा है। मैं और तुम्हारे पिताजी तुम्हारी बहन के रिश्ते के लिए लड़के वालों के यहां जा रहे हैं। तुम प्लीज मौसी को हॉस्पिटल ले जाओ और किसी अच्छे डॉक्टर को दिखवा दो।”
मैं पहले तो मना करने लगा, “नहीं मैं नहीं जाऊंगा, वह हमेशा मेरा मजाक उड़ाती हैं, उन्हें मेरी क्या जरूरत?”
लेकिन माँ ने समझाया, “वह तेरी मौसी हैं राहुल। घर पर कोई और नहीं है उनके देख-भाल के लिए। भूल जा जो कुछ भी हुआ, और चले जा बेटा।”
तभी मेरे दिमाग में एक खयाल आया।
मैंने सोचा, “यही तो मौका है जिसका मैं इंतजार कर रहा था। आज मैं उन्हें उनकी औकात दिखा दूंगा।”
मैंने कहा, “ठीक है माँ, मैं जाता हूँ।”
मैं जल्दी से उठा, नहाया, और अपनी बाइक निकाल कर मौसी के घर गया।
वह दरवाजे पर ही खड़ी थी, बीमार होने के बावजूद भी वह इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मैं उन्हें देखकर ही पागल सा हो गया।
उन्होंने सलवार कमीज़ पहनी हुयी थी जो उनके बदन के साथ चिपक रहा था।
जब उन्होंने मुझे देखा, तो पहले तो उन्होंने मुस्कुराने की कोशिश की, फिर बोली, “अरे राहुल, तू आ गया? चल जल्दी ले चल, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।”
मैंने कहा, “हाँ मौसी, आइए।”
वह बाइक पर बैठीं। जब उन्होंने पीछे से मुझे पकड़ा, उनके स्तन मेरी पीठ से छूने लगे, तो मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया।
उनकी सांस की गर्माहट मेरे गले में महसूस हो रही थी। मैं कंट्रोल करते हुए उन्हें हॉस्पिटल ले गया।
हॉस्पिटल में डॉक्टर ने उनका चेक-अप किया।
डॉक्टर ने कहा, “इनको हॉर्मोनल इम्बैलेंस है। स्ट्रेस की वजह से यह प्रॉब्लम हो गई है। मैं दवा लिख देता हूँ, लेकिन इन्हें आराम की बहुत जरूरत है। कोई इनका ध्यान रखे, पट्टी करे और इन्हें अच्छी नींद दिलवाए।”
मैंने डॉक्टर से कहा, “ठीक है डॉक्टर साहब, मैं संभाल लूंगा।”
वह मुझसे पूछा, “आप इनके पति हैं?”
मैंने झूठ बोलते हुए कहा, “नहीं, मैं इनका भतीजा हूँ, लेकिन मैं इनका पूरा ध्यान रखूंगा।”
डॉक्टर ने कहा, “अच्छा है, लेकिन इन्हें… आहम… फिजिकल रिलैक्सेशन भी चाहिए। उनके पति कहां हैं?”
मैंने कहा, “वह मुंबई में हैं।”
डॉक्टर ने कहा, “तो फिर आपको ही उनका ध्यान रखना होगा। हॉर्मोनल बैलेंस के लिए… समझ रहे हैं ना आप?”
मैंने समझते हुए सिर हिला दिया।
मैं उन्हें वापस उनके घर ले आया।
रास्ते में उन्होंने कहा, “राहुल, आज तू बहुत अच्छा बिहेव कर रहा है। मैं तुझे तंग करती थी, सॉरी।”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं मौसी, आप बस ठीक हो जाओ।”
घर पहुंचकर मैंने उन्हें दवा दी, उनके माथे पर ठंडा पानी की पट्टी की।
वह मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थीं। उनकी आंखों में एक अलग सी चमक थी।
शायद उन्हें एहसास हो रहा था कि मैं अब बच्चा नहीं रहा, एक मर्द बन चुका हूँ।
शाम को मैंने उनके लिए खाना बनाया, उन्हें खिलाया।
रात में जब मैं जाने लगा, तो उन्होंने रोका, “राहुल, रुक जा। आज रात यहीं रुक जा। मुझे अकेला छोड़ कर मत जा। मुझे डर लग रहा है।”
मैंने कहा, “लेकिन मौसी…”
वह बोलीं, “कोई लेकिन-विकिन नहीं। तू यहीं मेरे पास सो जा। मेरे बिस्तर पर ही जगह है।”
मैंने सोचा, “यही मौका है।” मैं रुक गया।
थोड़ी देर बाद हम दोनों एक ही बिस्तर पर थे। वह एक तरफ, मैं दूसरी तरफ।
उन्होंने अपना नाइटी पहना हुआ था और मैं अपनी बनियान और शॉर्ट्स में था। कमरे में अंधेरा था, सिर्फ एक नाइट लैंप जल रहा था।
लगभग रात के दो बजे मेरी आंख खुली। मैंने देखा कि मौसी ने अपना एक हाथ मेरे पेट पर रख दिया है और वह गहरी नींद में हैं।
शायद वह अपने पति के साथ सोने की आदत से ऐसा कर रही थीं। मैं धीरे-धीरे उनकी तरफ मुड़ा।
अब मेरा चेहरा उनके चेहरे के बिल्कुल पास था। उनकी सांसों की खुशबू मुझे पागल बना रही थी।
मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उनके कंधे पर रखा। वह नहीं उठीं।
मैंने धीरे से अपना हाथ उनके गले से होते हुए उनके स्तन की तरफ बढ़ाया।
मेरे हाथ उनके दूध पर पड़े तो मुझे करंट सा लगा। वह इतने नरम, इतने गोल थे कि मैं कंट्रोल नहीं कर पाया।
मैंने दबाव डालना शुरू किया। उनके निप्पल मेरे हाथों के बीच में आ गए। मैं उन्हें मसलने लगा।
वह गहरी सांस ले रही थीं लेकिन उठी नहींं। शायद उन्हें सपना आ रहा था।
मैंने हिम्मत और बढ़ाई। मैंने अपना हाथ उनकी कमर से होते हुए उनकी पीठ के नीचे की तरफ ले गया।
वह पेट की तरफ जा रहा था। मैं उनकी गांड को भी दबाने लगा। वह बड़े-बड़े गोल चूतड़ थे जो कि नाइटी में ही दबाए जा रहे थे।
मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था। मेरे शॉर्ट्स में एक बड़ा सा टेंट बन गया था। मैंने सोचा, “अब और इंतजार नहीं।”
मैंने अपने शॉर्ट्स को नीचे किया और अपना लंड बाहर निकाल लिया। अंधेरे में भी वह काला, मोटा और लंबा दिख रहा था।
मैंने धीरे से मौसी का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। उनकी उंगलियां मेरे लंड की गर्मी को महसूस कर रही थीं।
मैंने उनका हाथ पकड़ कर थोड़ा ऊपर-नीचे करना शुरू किया। लगभग दो मिनट ऐसा करने के बाद, मौसी की आंख खुली।
वह पहले तो कंफ्यूज्ड थीं, फिर जब उन्होंने अपने हाथ में मेरे लंड को पकड़ा हुआ पाया, तो वह एकदम से उठ बैठीं।
उन्होंने झट से अपना हाथ मेरे लंड से हटाया और चिल्लाने वाली थीं, तो मैंने उनका मुंह अपने हाथ से बंद कर दिया।
वह मेरी आंखों में देख रही थीं। मैं उनसे कुछ बोलने वाला था कि उन्होंने मेरा हाथ हटाया और बोली, “यह… यह क्या कर रहा है तू राहुल? यह क्या है? इतना बड़ा?”
मैंने कहा, “मौसी, शांत हो जाओ। मैं आपको कुछ बताना चाहता हूँ।”
वह बोलीं, “यह क्या बताएगा? तू तो मेरा भतीजा है, और तूने यह… यह मेरे हाथ में पकड़ा दिया?”
मैंने कहा, “मौसी, डॉक्टर साहब ने कहा था ना कि आपको हॉर्मोनल प्रॉब्लम है। उन्होंने कहा था कि आपको फिजिकल रिलैक्सेशन चाहिए। मौसा जी तो हैं नहीं, तो मैंने सोचा कि मैं ही आपकी मदद कर देता हूँ।”
वह हैरान थीं, “तू पागल है? मैं तेरी मौसी हूँ!”
मैंने कहा, “हाँ मौसी, लेकिन आप भी तो औरत हैं। और मैं जानता हूँ कि आपको भी चाहिए होता है। आपके चेहरे से दिख रहा है कि आप तड़प रही हैं।”
वह शर्मा गईं, “चुप कर! ऐसा कुछ नहीं है।”
मैंने कहा, “ठीक है, तो फिर मैं चला जाता हूँ। लेकिन सोच लीजिए, आपको इस दर्द से छुटकारा चाहिए या नहीं?”
वह चुप हो गईं। कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने कहा, “लेकिन यह… यह तो बहुत बड़ा है। दिख नहीं रहा था कभी।”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “जब कोई जानेगा तब ना दिखाएंगे। मौसी, आपने हमेशा मेरा मजाक उड़ाया है मेरी हाइट का। लेकिन आपको नहीं पता था कि इस छोटी हाइट के आदमी के पास इतना बड़ा लंड है जो किसी भी औरत को खुश कर सकता है।”
वह मेरी तरफ देख रही थीं। उनकी आंखों में अब डर कम और जिज्ञासा ज्यादा थी।
उन्होंने कहा, “सच में… यह ग्यारह इंच का है?”
मैंने कहा, “हाँ मौसी, और चार इंच मोटा भी। आप ऐसे लंड को सिर्फ ब्लू फिल्म्स में ही देख सकती हैं। आज आपको मौका मिल रहा है इसको अपनी बुर में महसूस करने का।”
वह शर्मा रही थीं, उनके गाल लाल हो गए थे।
उन्होंने कहा, “तू तो बहुत बेशर्म हो गया है। लेकिन… सच में यह इतना बड़ा है। जैसे किसी चॉकलेट की तरह काला और मोटा।”
मैंने कहा, “हाँ मौसी, आप चख कर देख सकती हैं।”
वह कुछ देर सोचती रहीं, फिर बोलीं, “ठीक है, लेकिन कोई आ तो नहीं जाएगा?”
मैंने कहा, “नहीं मौसी, दरवाजा बंद है। और वैसे भी, घर पर तो कोई है नहीं।”
वह मुस्कुराईं और बोलीं, “ठीक है फिर, चल चुदाई करते हैं। लेकिन पहले एक काम करते हैं।”
उन्होंने अपना फोन उठाया और एक रोमांटिक, सेन्सुअल सॉन्ग लगाया।
कमरे में मधुर संगीत भरने लगा। अब वह बिल्कुल बदल गई थीं।
उनकी शर्म हट गई थी और वह एक भूखी औरत बन गई थीं जो अपनी बुर की भूख मिटवाना चाहती थीं।
वह बिस्तर पर बैठ गईं और बोलीं, “आ जा राहुल, आ जा अपनी मौसी के पास। दिखा दे अपना वो जादू जो तूने इतने साल छुपा कर रखा था।”
मैं उठकर उनके पास गया। वह मेरे लंड को देख रही थीं जो उनके चेहरे के बिल्कुल सामने था।
उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया। उनकी उंगलियां उसके इर्द-गिर्द बैठी नहीं थीं क्योंकि वह बहुत मोटा था।
वह बोलीं, “हाय हाय… कितना बड़ा है यह। मैं तो इसको अपने मुंह में भी नहीं ले पाऊंगी।”
मैंने कहा, “कोशिश करो मौसी, धीरे-धीरे आदत पड़ जाएगी।”
उन्होंने अपनी जीभ निकाली और मेरे लंड के सुपाड़े पर चाटना शुरू कर दिया। वह एकदम गर्म था।
उन्होंने धीरे से मुंह खोला और मेरे लंड का टोपा अपने मुंह में ले लिया। वह चूसने लगीं।
“आह्ह्ह… मौसी…” मैं चिल्लाया।
वह बोलीं, “चुप कर साले, अभी तो शुरू हुआ है। तेरी मौसी आज तुझे सुख दिलाएगी।”
उन्होंने मेरे लंड को और अंदर लिया। लगभग चार इंच अंदर चला गया था।
वह उसे चूस रही थीं, अपनी जीभ से चाट रही थीं। मैं उनके मुंह को चोद रहा था। उनके दूध मेरे हाथों में थे, मैं उन्हें दबा रहा था।
“चूस मौसी चूस… चूस मेरा लंड… आह्ह्ह…” मैं चिल्लाता जा रहा था।
वह बोलीं, “साले, कितना टेस्टी है तेरा माल। चल अब मेरी बारी। मेरी बुर को भी तो तरसाया है तूने।”
वह अपनी नाइटी उतारने लगीं। जैसे ही नाइटी उतारी, मैं उनके बदन को देखकर पागल सा हो गया।
उनके स्तन एकदम सख्त थे, निपल्स काला और बड़ा था। उनकी कमर पतली थी और चूत पर हल्की सी शेव की हुई बाल थे।
वह बिस्तर पर लेट गईं और अपने पैर फैला दिए।
उनकी बुर गुलाबी थी, भीगी हुई थी।
वह बोलीं, “आ जा राहुल, आ जा अपनी मौसी की बुर में अपना लंड डाल। आज से तू ही मेरा पति है।”
मैं उनके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उनकी बुर के मुहाने पर था। मैंने धीरे से एक धक्का दिया।
“आह्ह्ह… बहुत बड़ा है… धीरे धीरे डाल…” वह चिल्लाईं।
मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। मेरा लंड उनकी बुर में घुस रहा था। वह बहुत टाइट थी, शायद मौसा जी का इतना बड़ा नहीं था।
“ओह्ह्ह… आह्ह्ह… मौसी… कितनी टाइट है आपकी बुर…” मैं बोला।
वह बोलीं, “साले, चोद दे आज अपनी मौसी को। पूरा डाल दे अंदर। आह्ह्ह… कितना घुस रहा है… मेरी बुर फट जाएगी…”
मैंने जोर से एक धक्का मारा। मेरा आधा लंड अंदर चला गया।
“आह्ह्ह… मां… बहुत दर्द हो रहा है…” वह चिल्लाईं।
मैंने कहा, “सह लो मौसी, थोड़ी देर में मजा आएगा।”
मैं रुक गया और उनके स्तन को चूसने लगा। उनके निपल्स को काटने लगा। वह तड़प रही थीं।
“चोद दे राहुल… अब मत तड़पा… पूरा डाल दे…” वह चिल्लाईं।
मैंने फिर जोर से धक्का दिया। मेरा पूरा ग्यारह इंच का लंड उनकी बुर में समा गया। वह एकदम से चिल्लाईं, “आह्ह्ह… मेरी जान निकल गई… इतना अंदर… कभी नहीं गया था कोई…”
मैं अब उन्हें चोदने लगा। मैं ऊपर-नीचे हो रहा था। उनकी बुर से आवाजें आ रही थीं – “फच फच फच।”
“ओह्ह्ह… आह्ह्ह… चोद साले… चोद अपनी मौसी को… बहुत मजा आ रहा है… आह्ह्ह…” वह चिल्लाईं जा रही थीं।
मैंने उनके दूध को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया। मैं उनके निपल्स को खींच रहा था।
“कैसा लग रहा है मौसी? मेरा छोटा कद और बड़ा लंड?” मैंने पूछा।
वह बोलीं, “साले, तूने तो मुझे पागल कर दिया। तेरी हाइट छोटी है लेकिन लंड बहुत बड़ा है। चोद मुझे… और जोर से चोद… आह्ह्ह…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। मैं उनकी बुर को जोर-जोर से ठोक रहा था। वह अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थीं।
“ओह्ह्ह… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ… राहुल… रुक मत… चोदते रह…” वह चिल्लाईं।
मैं भी अपने क्लाइमैक्स के करीब था। मैंने कहा, “मौसी… मैं भी झड़ने वाला हूँ… कहां झाड़ूं?”
वह बोलीं, “अंदर ही झड़ जा… मेरी बुर में ही डाल दे अपना माल… मैं गोली खा लूंगी… कोई दिक्कत नहीं…”
मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब मैं पूरी स्पीड में था। उनकी बुर से पानी निकल रहा था जो कि उनके ऑर्गेज्म का संकेत था।
“आह्ह्ह… राहुल… आ गया… मेरा निकल गया… ओह्ह्ह…” वह चिल्लाईं और कांपने लगीं।
मैंने भी अपना लंड पूरी तरह से उनकी बुर में घुसा दिया और झड़ गया। मेरा गर्म माल उनकी बुर में छूटा जा रहा था। मैं उनके ऊपर लेट गया, पूरा थका हुआ।
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वह पूरा उनके पानी से भीगा हुआ था। उनकी बुर से मेरा माल और उनका पानी बाहर बह रहा था।
वह मुझे गले लगा कर बोलीं, “राहुल, तूने आज मुझे वह सुख दिया वैसा सुख आज तक आज तक तुम्हारे मौसा जी भी नहीं दे पाये। तेरा लंड तो सच में जादू है।”
मैंने कहा, “मौसी, अब आप हमेशा मेरा मजाक नहीं उड़ाएंगी ना?”
वह हंस कर बोलीं, “नहीं साले, अब तो मैं सिर्फ तुझसे चुदवाऊंगी। मौसा जी से तो कुछ होता ही नहीं है।”
हम दोनों हंसने लगे। उस रात हमने दो बार और सेक्स किया। मौसी ने मुझे अलग-अलग पोजीशन में चुदवाया – पीछे से, ऊपर बैठ कर।
जब सुबह हुई, तो मौसी बिल्कुल ठीक हो गई थीं। उनका चेहरा चमक रहा था। उन्होंने मुझे नाश्ता बनाया और गले लगाया।
उसके बाद से जब भी मौका मिलता, मैं मौसी को चोदने जाता। वह मेरी हाइट का मजाक कभी नहीं उड़ाती थीं, बल्कि वह तो मेरे इस बड़े लंड की दीवानी हो गई थीं।
यह थी मेरी और मेरी मौसी की पहली चुदाई की कहानी, जिसमें मैंने अपने ग्यारह इंच के लंड से उनकी बुर को वह सुख दिया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा।
अगली कहानी में बताऊँगा की कैसे मैंने मौसी जी के इच्छा पर गाँव के पांच मजदूरों को दिनभर के मजदूरी देकर गैंगबैंग करवाया
NEXT PART: मौसी जी के इच्छा पर पांच मजदूरों से गैंगबैंग करवाया
- मैं अपनी माँ को ब्लैकमेल करके रखैल बनाया
- अपनी हॉट सिस्टर को ब्लैकमेल करके चोदा
- 23 साल बाद अपने पिताजी से चुदवाने में सफल हुयी
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Amazing 😍😍🤩 chudai story. Bahut achha badla liya bhai tune
Baat to sahi hai…kaash lko me bhi kisi hot lady se badla lene ko mil jaaye
Bahut hi achhi kahani hai
Bahut badhiya story hai. ❤️
Amazing story…👌👌👌