मैंने अपने डैड के लंड से चुत चुदवा ली

Beti xxx baap kahani

बेटी Xxx बाप कहानी में मैं मेरी मम्मी पापा की चुदाई देखती थी, मुझे पापा का लंड पसंद था. मम्मी की नाईट ड्यूटी लगी तो डैड को चूत की कमी हो गयी.

मेरे प्यारे दोस्तो, आप सभी को प्यार भरा नमस्कार.

जीवन के कामरस का भरपूर आनन्द लो, क्योंकि मेरी ये टैगलाइन ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ बहुत कुछ कहती है.
इसलिए प्यारे …
‘जीवन के हर मोड़ पर सुनहरी यादों को रहने दो, जुबां पर हर वक्त मिठास रहने दो, ये अंदाज है जीने का … ना रहो उदास और ना किसी को उदास रहने दो!’

दोस्तो, कामरस ही हमारी इस सृष्टि का आधार है. अगर ये कामरस ना होता तो यह सृष्टि भी ना होती, ना हम होते और ना तुम होते.
भगवान द्वारा बनाई गई इस सृष्टि में छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी हर चीज कितनी खूबसूरती से अपनी-अपनी जगह फिट है और इस ब्रह्मांड को कितना खूबसूरत बनाती है.

भगवान की बनाई इस सृष्टि में हम इंसान यानि आदमी और औरत, भगवान का बनाया एक बहुत ही खूबसूरत तोहफा हैं. जिसे भगवान ने सोचने, समझने, महसूस करने, अपनी बात कहने और सुनने की शक्ति दी है. इसलिए मैं अपनी हर स्टोरी में भगवान की बनाई इस कायनात को भरपूर जी लेने की सलाह देता हूँ.

मेरे विचार से चूत और लंड ही जिंदगी का असली आनन्द है इसलिए यह जिंदगी मन मारकर जीने के लिए नहीं है, जैसे-तैसे काटने के लिए नहीं मिली है. बल्कि इसके एक-एक पल को जीने के लिए और उसका भरपूर आनन्द लेने के लिए मिली है.
इस भरपूर आनन्द को लेकर ही इस दुनिया को अलविदा कहना है. इसलिए अपनी जिंदगी को रंगीन बनाइए और जिंदगी के हर उस पल का आनन्द लीजिए जो आपको सुकून दे

मुझे बहुत सारे पाठकों और मेरी प्यारी हसीनाओं के मेल आते हैं.
कुछ मर्द कहते हैं कि उनकी फ़ीमेल पार्टनर सेक्स में मजा नहीं देती.

समय और परिस्थितियों के कारण कुछ कपल्स वह मजा, वह गर्मी नहीं महसूस करते जो शादी के समय महसूस करते थे.

कुछ औरतें बताती हैं कि उनके पार्टनर आते हैं … सीधे ही अपना लंड चूत पर लगाते हैं और बस 4-5 धक्कों में ही खल्लास होकर मुँह मोड़ कर सो जाते हैं. … और औरत प्यासी की प्यासी ही रह जाती है!

दोस्तो, जितनी जरूरत पुरुष को होती है, उतनी ही महिला को भी होती है.
ऐसे लोगों के लिए मेरी सलाह है कि सेक्स एक प्रकार की दवाई है, जो प्यार से और फुल मस्ती से एंजॉय करने पर ही काम करती है.

सभी औरतें जानती हैं कि सिर्फ पति के लंड से नियमित चुदाई का भी अपना एक अलग ही आनन्द होता है, लेकिन नए-नए लंड से चुदने का आनन्द हर बार अलग मिलता है. हर बार एक अलग रोमांच और एक नया शिखर छूने को मिलता है. हर बार एक नई तृप्ति मिलती है.

यही बात मर्दों के लिए भी लागू होती है. जितनी नई-नई चूतें चोदने को मिलें … वह भी आपसी रजामंदी से, जोर-जबरदस्ती से नहीं … उनका आनन्द लेने का कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहिए.

मेरी एक पाठक सलोनी माथुर ने मुझे मेल पर बताया कि उसकी शादी को लगभग 3 साल हो चुके हैं.
वह अपने पति विवेक माथुर के साथ बहुत ही बढ़िया तरीके से अपनी सेक्स लाइफ एंजॉय कर रही है.

परंतु उसके पति विवेक उसे अपने दोस्तों के साथ स्वैपिंग जॉइन करने के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि वह स्वैपिंग की इच्छुक नहीं है.

यहां मेरी सलाह है कि बिना अपने पार्टनर की सहमति के किसी भी प्रकार का दबाव बनाना, अपने वैवाहिक जीवन को संकट में डालना है. कोई भी कार्य बिना सहमति के मजा तो देता ही नहीं है, बल्कि जीवन को ही खराब कर देता है.
इसलिए अपने पार्टनर को भरोसे में लेकर ही कोई भी कार्य किया जाना चाहिए.

मैं यह मानता हूँ कि चोरी-छुपे किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाने का अपना एक अलग रोमांच होता है, लेकिन वैवाहिक जीवन में संदेह और उसके कारण उत्पन्न होने वाले तनाव, पारिवारिक जीवन को तबाह कर देते हैं.

जबकि एकाधिकार की प्रवृत्ति को त्याग कर और अपने जीवन साथी की सहमति से या उसे इस खेल में सम्मिलित करके जो आनन्द उठाया जा सकता है, उसका कोई तोड़ नहीं है.

इसलिए मेरा यही सुझाव है कि अपने दांपत्य जीवन को रसमय बनाने के लिए पति-पत्नी जो भी प्रयोग करें, एक दूसरे को विश्वास में लेकर और एक दूसरे की जानकारी में लाकर करें.
इससे रोमांच का मजा कई गुणा बढ़ जाता है.

मेरे बहुत सारे पाठक मुझे अपनी फैंटेसी और अपनी रियल जिंदगी से रूबरू कराते हैं. सच कह रहा हूँ, क्या-क्या मस्त-मस्त फैंटेसी बताते हैं.
आजकल के नौजवानों की, लड़के, लड़कियों, औरतों, पुरुषों की और यहां तक कि बुजुर्ग आदमियों की भी बड़ी-बड़ी विचित्र-विचित्र फैंटेसी हैं, जो वे लोग मुझे लिखकर भेजते हैं और अपनी-अपनी समस्याएं भी बताते हैं.

आपने मेरी कहानी ‘ये दिल मांगे मोर.’ पढ़ी हो, तो उसमें मैंने कुछ लड़कियों की विचित्र फैंटेसी के बारे में बताया था.
उस सेक्स कहानी में मैंने निधि नाम की लड़की का जिक्र किया था, जो अपने मां-बाप की रासलीला देख-देखकर और अपनी मां की मदभरी सिसकारियां सुन-सुनकर, उसे अपने बॉयफ्रेंड से ही चुदवाने की सोचती है.

कोई लड़का अपनी रियल मां को चोदने की फैंटेसी बताता है, कोई ससुर अपनी बहू की मटकती गांड देख-देखकर उसे चोदने की ख्वाहिश करता है.
और तो और दोस्तो … कोई बेटी अपने खुद के बाप से चुदने के सपने देखती है.

ये कुछ ऐसे ही रिश्ते हैं, जहां आजकल सब कुछ इतना खुला हो गया है कि कोई भी रिश्ता कहीं भी और कुछ भी हो सकता है.

कुछ रिश्ते ऐसी ही परिस्थितियों में बन जाते हैं और उस एक पल में हमारे सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाती है.
हमारे दिमाग पर कामवासना हावी हो जाती है और हम सब कुछ भूल जाते हैं.

उस एक पल में वह सब कुछ हो जाता है, जिसके बारे में कभी हमने न सोचा था और न ही कभी ऐसे रिश्तों की कल्पना की थी.
बस उस एक पल में हमारे दिमाग में यही ख्याल रहता है कि सामने वाली एक सुंदर चूत है या एक सुंदर लंड है, जिसकी एक-दूसरे को बहुत जरूरत है.

मेरी एक पाठिका काव्या, जो अपने रियल बाप से खुद जानबूझकर चुद गई, ने जो मुझे अपनी बेटी Xxx बाप कहानी बताई, उसका कुछ संक्षिप्त रूप आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ.

काव्या ने अपने बारे में मुझे बताया कि वह 18-19 साल की हसीन, कमसिन 32-30-34 वाली एक प्यारी सी लौंडिया है. वह अन्तर्वासना की सेक्स कहानियों को बड़े ही चाव से पढ़ती है.
उसने मुझे बताया कि उसे सभी सेक्स कहानियां बहुत ही मजेदार लगी हैं, खासकर दिशा के गैंग-बैंग वाली सेक्स स्टोरी पढ़कर तो मजा ही आ गया.

काव्या ने मुझसे कहा- अनुराग जी, मैं आपसे एक राज की बात शेयर करना चाहती हूँ. बहुत दिनों से एक बात मेरे मन में खटक रही है कि ये बात किससे शेयर करूँ. आपसे यह बात शेयर करके मेरा दिल और दिमाग थोड़ा हल्का हो जाएगा.
मैंने कहा- यस, काव्या बेबी तुम मुझसे कुछ भी साझा कर सकती हो!

काव्या के शब्दों :

धन्यवाद, मुझे खुद नहीं पता कि कैसे मैं अपने ही रियल डैड से चुद रही हूँ.
डैड इस रिश्ते को सही नहीं मानते, पर पता नहीं मुझे क्या हो जाता है.
मैं खुद ही डैड के बेडरूम में चली जाती हूँ और अपने डैड को मुझे चोदने के लिए खुद इंसिस्ट करती हूँ.

उस वक्त मैं अपने होश-हवास खो बैठती हूँ. जब तक डैड मुझे अच्छे से चोद न लें, मुझे बेचैनी होती रहती है.
और डैड से चुदने के बाद ही मुझे अच्छा लगता है.

मैं अपने मॉम-डैड की इकलौती संतान हूँ. अकेली होने के कारण मैं कितनी जिद्दी और हठी हो गई थी.
अपनी किसी भी फरमाइश को पूरी किए बिना नहीं मानती थी.

कॉन्वेंट में पढ़ने वाली अल्ट्रा मॉडर्न … नई-नई जवानी मुझमें फूट रही थी.
मेरे शरीर में परिवर्तन हो रहा था.

मैंने एक दिन रात को अपने मॉम को डैड के मूसल लंड से चुदते हुए देखा. बस तभी से मैं डैड के लंड की दीवानी हो गई थी. अब मैं चोरी-छिपे अपने मॉम-डैड की चुदाई देखने लगी थी.

डैड मॉम को गालियां बक-बक कर बहुत ही बेरहमी से चोदते थे और मेरी चुदक्कड़ मां भी उछल-उछल कर मेरे डैड से चुदवाती थीं.

मेरी मॉम एक बड़े अस्पताल में नर्स हेड थीं.

पिछले 6 महीने से उनकी ड्यूटी रात की हो गई थी.
मेरे डैड की जॉब दिन की है, इसलिए दोनों के बीच वह गर्मी समाप्त हो गई थी जो एक कपल के बीच होनी चाहिए.

चूत ना मिलने के कारण रात को डैड की उदासी मुझसे देखी नहीं जा रही थी. मेरा और डैड का कमरा लगभग पास-पास ही है.

एक दिन रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं उठी और ऐसे ही डैड की रूम की ओर जाने लगी.

मुझे डैड की धीमी-धीमी आवाज आ रही थी.
वे ‘आह … हह … उह … आह … मालिनी तुम मुझे क्यों तड़पा रही हो, मालिनी … मालिनी …’ कहकर बड़बड़ा रहे थे.

जब मैंने डैड के रूम के दरवाजे से झांककर देखा तो वह अपनी आंखें बंद करके अपने लंबे मोटे लंड को जोर-जोर से आगे-पीछे कर रहे थे और मॉम को याद कर रहे थे.

अचानक से उनके लंड से एक जोरदार फव्वारा निकला … ‘आह … उह … उहह …’ की आवाज करते हुए अपने लंड को हाथ में लिए वहीं बिस्तर पर ही लेट गए.

मैंने पहली बार अपने डैड को ऐसा करते हुए देखा था.
मुझे यह सब देखकर बड़ा अजीब सा लगा.
पर डैड के मोटे लंड को देखकर अनायास ही मेरा हाथ अपनी चूत पर चला गया और मैं ऊपर से ही अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी.

पता नहीं मुझे क्या हो रहा था … एक अलग सी बेचैनी मुझे महसूस हो रही थी और एक अलग प्रकार का आनन्द मुझे महसूस हो रहा था.

मैं भी अब 18 साल की हो चुकी थी … नई-नई जवानी से भरपूर कामयौवना, छरहरी, कॉन्वेंट में पढ़ने वाली चुदने के लिए एकदम रेडी रसभरी लौंडिया बन गई थी.

पता नहीं क्यों, मुझे हर वक्त डैड का वह मूसल लंड महसूस होने लगा था … और मैं हर दूसरे-तीसरे दिन डैड को ऐसे ही मुठ मारते हुए देखने लगी थी.

डैड को मुठ मारते हुए देखते-देखते अनायास ही मेरा हाथ मेरी चूत पर चला जाता और मैं दरवाजे पर खड़ी खड़ी ही अपनी चूत में फिंगरिंग करने लगती थी.

जब तक मैं अपनी चूत से रस नहीं निकाल लेती, मुझे चैन नहीं आता था.
रात-दिन मेरे दिल और दिमाग में हर वक्त मुझे अपने डैड का वह मूसल लंड ही दिखाई देने लगा था. मेरा किसी काम में मन नहीं लग रहा था.

फिर एक दिन मैंने अपने आप को खुद के डैड से चुदने का फैसला लिया.
मेरी और मॉम की शक्ल, कद-काठी लगभग एक जैसी है. इसलिए मैंने मॉम का गाउन पहन लिया और मॉम जैसा ही लाइट मेकअप करके ऐसे ही डैड के कमरे के बाहर आकर झांकने लगी.

डैड ने किसी कपड़े से अपना मुँह ढका हुआ था और वे अपना पाजामा नीचे करके अपने लंड को अपने हाथ से सहला रहे थे.
डैड का लंड एकदम किसी रोड की भांति सीधा तना हुआ था.
साथ ही साथ डैड बड़बड़ा भी रहे थे ‘आह मालिनी … आह … मालिनी … बहनचोद, कुतिया … मेरे लंड को छोड़कर कहां चली जाती है हरामजादी!’

मैंने हिम्मत जुटाकर धीरे से डैड के कमरे का दरवाजा खोला और दबे पांव आकर डैड के मूसल लंड को अपने हाथ में ले लिया और फिर अगले ही पल उसे अपने मुँह में ले लिया.
मैं अपने डैड कर लंड लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

डैड के कमरे की रोशनी बहुत कम थी और डैड को ऐसा लगा जैसे मॉम ही उनके लंड को चूस रही हैं.

डैड- मालिनी … आह … मालिनी … चूसो ना … ऐसे ही … आह बहुत दिन हो गए … तुम्हारे साथ समय बिताए … मेरा यह लंड कब से प्यासा है, मेरी रानी!

दोस्तो, जब कामवासना दिल और दिमाग पर हावी होती है तो आदमी सब कुछ भूल जाता है.

उस वक्त डैड को मैं अपनी मॉम यानि उनकी मालिनी जैसी ही नजर आ रही थी.
मैं चुपचाप डैड का लंड चूस रही थी … और डैड मुझे मॉम ही समझ रहे थे.

‘मालिनी … आह … चूसो मालिनी … मेरा लंड कब से प्यासा है … आह … मालिनी … ऐसे ही … आह … उहह … ऐसे ही मालिनी … आह … आह … उहहह …’

मैंने मॉम का गाउन पहना हुआ था.
डैड ने अपनी आंखें बंद कर रखी थीं.

डैड ने मुझे अपने दोनों हाथों से अपने ऊपर चिपटा लिया और अपने एक हाथ से मेरी चूचियों को टटोलने लगे.

फिर उन्होंने मेरे एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और जबरदस्त तरीके से मेरे निप्पल को चूस कर मजा लेने लगे.
मैं भी डैड का सिर पकड़ कर उनको चूम रही थी.

डैड ने अपने दोनों हाथ मेरी कमर में डालकर मुझे अपने मुँह पर बिठा लिया और मैंने अपनी चूत का मुँह डैड के मुँह पर रख दिया.
अब वह नीचे से अपनी जीभ डालकर मेरी चूत को चूसते हुए चोद रहे थे.

सच बता रही हूँ फ्रेंड्स … मैं पहली बार जीवन का असीम आनन्द प्राप्त कर रही थी.
डैड ने अपनी जीभ से अन्दर तक मेरी कमसिन चूत में खलबली मचा दी थी.

अचानक से मेरी चूत ने भरभरा कर बहुत सारा लसदार पानी छोड़ दिया और जिसने डैड के मुँह को पूरी तरह भिगो दिया.

डैड- आह … मालिनी क्या मस्त जूस है तेरा … मैं कब से तेरे इस जूस का दीवाना हूँ मेरी जान … मेरी रांड … मेरी कुतिया मालिनी!
मैं चुप थी और हांफ रही थी.

‘साली, पता है तुझे कितने दिन हो गए हैं मुझसे चुदे हुए? बहनचोद, आज सारी कसर पूरी कर लूँगा … आज तेरी चूत और गांड दोनों फाड़ ही डालूँगा बहनचोद … मेरे लंड का ध्यान नहीं रखती है तू … साली … कुतिया!’

डैड मुझे अपनी मालिनी समझकर मुझसे अपनी भड़ास निकाल रहे थे।
पर मुझे पता नहीं क्यों, डैड के एक-एक शब्द में बड़ा मजा आ रहा था.

अब डैड उठे, कपड़े से अपना मुँह साफ किया और उन्होंने बिना देखे मुझे सीधा लिटा दिया.
मेरे ऊपर आकर फिर से मेरी चूत के जूस को चाटने लगे … मेरी चूत पर लगे मेरी चुत के रस की एक-एक बूंद को अपनी जीभ से चाट गए.

जिंदगी में पहली बार ऐसा असीम कामसुख मुझे महसूस हो रहा था.

डैड ने मेरी दोनों टांगों को ऊपर किया, मेरी चूत के नीचे तकिया लगाया और अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखकर 2-3 जोरदार शॉट मारे.
फिर अपना मूसल लंड मेरी चूत में अन्दर तक उतार दिया.

डैड का वह मूसल लंड मेरी चूत की दीवारों में घर्षण करता हुआ मेरी झिल्ली को तोड़ता हुआ मेरी बच्चेदानी से जाकर टकरा गया.

डैड के इन जबरदस्त शॉट्स से मेरी जबरदस्त चीख निकल गई- आह … उह … आह … डैड … आह … उह … मार दिया …

मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने मेरी चूत में गर्म सरिया डाल दिया हो.

मेरी चूत की दीवारें ऐसी लग रही थीं, जैसे छिल गई हों. मेरी चूत खून से लथपथ कराह रही थी.

मेरी जोर की चीख सुनकर डैड जैसे एकदम नींद से जाग गए.
वे गुस्से से मुझे डाँटते हुए बोले- यह क्या बकवास है काव्या … तुम यहां? बेवकूफ लड़की, इस हालत में यहां क्यों आई हो?

काव्या- डैड, मुझे आपको इतना उदास देखना अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए मैंने फैसला किया कि मैं आपको खुश करूँगी.
डैड- लेकिन काव्या, तुम जानती हो कि यह अच्छा नहीं है बेबी … तुम मेरी बेटी हो … और यह बेटी Xxx बाप रिश्ता सही नहीं है बेटा!

काव्या- डैड, ऐसा मत सोचो बस इतना सोचो कि मैं एक लड़की हूँ और आप एक मर्द हो. हम दोनों एक-दूसरे को खुश कर सकते हैं.
वे चुप थे.

‘मुझे जोर से चोदो डैड, जैसा आप मॉम को चोदते हो, वैसे ही मुझे भी चोदो डैड … आप कुछ मत सोचो … बस चोदो मुझे!’
डैड- काव्या … काव्या …
काव्या- चोदो मुझे डैड … जोर से चोदो … फक मी हार्ड डैड … चोदो … चोदो मुझे …

इस तरह से उस दिन मैंने अपने डैड को इमोशनल करके उनसे चुदाई का भरपूर मजा लिया.

दोस्तो, ये थी काव्या की संक्षिप्त स्टोरी. अगले पार्ट में आपको काव्या और उसके डैड की पूरी स्टोरी विस्तार से बताऊंगा. बहुत ही मजेदार स्टोरी है. यह तो आपको सेक्स कहानी के इस संक्षिप्त भाग से पता लग ही गया होगा.

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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