mom ass xxx story
मॅाम ऐस्स Xxx स्टोरी में मुझे लंड की जरूरत थी तो मैंने बेटे से सेक्स कर लिया. वो भी मेरे लिए पागल था, उसने मुझे अपनी बीवी बनाकर मेरी गांड मारी और मुझे अपनी गुलाम बना लिया.
दोस्तो, मैं मीनाक्षी आपको अपनी मॉम एंड सन सेक्स कहानी में सुना रही थी कि मैंने किस तरह से अपने बेटे से अपनी चुदाई की सैटिंग की और उससे चुदवाने लगी.
कहानी के पहले भाग मेरे बेटे के बड़े लंड से चूत मरवाने का मजा में अब तक आप पढ़ चुके थे कि उस वक्त मैं अपने ही बेटे से बिंदास चुद रही थी क्योंकि हम दोनों के सिवा घर में कोई तीसरा था ही नहीं.
अब आगे मॅाम ऐस्स Xxx स्टोरी:
उसने करीब दस मिनट तक धक्के लगाए होंगे कि वह अपने चरम पर आ गया और उसने अपने लौड़े का सारा पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया.
उसका वीर्य मेरी चुत को ठंडक दे रहा था.
वह बोला- मॉम, मज़ा आ गया … आपको आया क्या?
मैंने कहा- हां!
वह बोला- बस हां … इसका मतलब आपको ज्यादा मज़ा नहीं आया?
मैंने कहा- हां, मुझे बहुत मज़ा आया.
तो वह बोला- तो फिर इतनी देर क्यों लगा दी … पहले ही नहीं चुदवाई?
मैंने कहा- पागल, मैं कैसे काम करती तेरे साथ? तू मेरा बेटा है!
वह बोला- आज भी तो बेटा ही हूँ!
मैंने कहा- बेटा था, अब नहीं है, अब तू मेरा हसबैंड हो गया!
वह बोला- लेकिन अभी तो कुछ कंडीशंस हैं हसबैंड बनने में!
मैंने पूछा- वे कौन सी?
वह बोला- वह जब हम मैरिज करेंगे, तब बताऊंगा, आज तो हम सिर्फ चुदाई करेंगे!
मैं उसको बार-बार बोल रही थी कि खाना खा लो, खाना खा लो!
वह बोला- चलो आओ, खाना खाते हैं.
वह खाना खाने के लिए बैठ गया.
खाना गर्म होने में दस मिनट लगे तब तक उसका लंड खड़ा हो गया.
वह अपना लंड खड़ा करके चेयर पर टांगें खोल कर बैठ गया.
मैं उसकी थाली में खाना परोस रही थी, तब वह बोला- आप भी इधर आइए न!
चूंकि तब तक हम दोनों नंगे ही थे, वह जैसे ही चेयर पर बैठा, उसका लंड ऊपर को था.
वह बोला- चलो, इस पर बैठो!
इस तरह से बैठना मेरे लिए पहली बार का मसला था.
मैंने अपनी चूत थोड़ी सी फैलाई और उसके लंड पर बैठ गई!
मस्त लगा और वह मेरे दूध दबाते हुए मुझे चोदने लगा.
उस दिन बस दो बार ही चुदाई हुई और हम दोनों सो गए.
ऐसे ही दो-तीन दिन मेरा बेटा मेरी चूत चोदता रहा.
मैं भी खुश थी क्योंकि मुझे एक नया लंड मिल गया था, जिससे मैं बहुत खुश थी.
मेरा बेटा मेरी चुदाई बहुत अच्छे से करता था, उसका लंड मेरे अन्दर तक जाता था.
एक सुबह मुझे जल्दी जाना था, मैं सुबह 6:00 बजे निकल गई और सुबह 11:00 बजे ही वापस आ गई.
अब मैं अपने बेटे के साथ पूरी तरह से ओपन हो गई थी.
उसने मुझे बिकिनी, ब्रा पैंटी और लॉन्जरी गिफ्ट की थी.
उसकी लाई हुई जो ब्रा थी, वह मेरे बूब्स से काफी छोटी थी, मेरे बूब्स उसमें बहुत फँसे हुए दिखते थे!
चुत के लिए पैंटी भी पूरी टाइट थी और उसमें मेरी चूत पूरी अटकी हुई थी.
उस ब्रा पैंटी के सैट के ऊपर से मैंने वह झीनी वाली फ़्रॉक जैसी नाइटी डाली.
फिर जैसे ही बाहर आई, तो मैंने देखा कि मेरे बेटे ने घर को काफी अच्छे से सजाया हुआ था.
मैं उसके पास जैसे ही गई, वह मुझे वासना से घूरने लगा और उससे रहा न गया तो वह मुझे अपनी गोदी में उठा कर हॉल में ले आया.
उधर उसने फोन पर एक गाना चलाया हुआ था!
वह गाना हमारी शादी के समय के मंत्रों वाला था, उसमें करीब आधा घंटा लगा.
उस दौरान उसने मेरे गले में मंगलसूत्र डाला, सिंदूर लगाया और बिंदिया लगाई.
फिर मेरे साथ वह सब किया जो एक कपल करता है.
उसके बाद जैसे ही उस आवाज में पंडित जी बोले- आपकी शादी संपन्न हुई.
तब मेरा बेटा मुझसे बोला- मीनाक्षी! अब बताओ, आप खुश हो न मेरे से शादी करके?
मैं पहली बार अपने बेटे के मुँह से अपना नाम सुन रही थी और मुझे बहुत अच्छा लगा था क्योंकि वह भी जवान था और हर एक औरत की जवान पति पाने की इच्छा होती है.
मैंने कहा- तुम तो मेरी जान हो! तुमको तो मैं पहले भी बहुत प्यार करती थी और अब भी बहुत करती हूँ!
अभी मैं इतना ही बोली थी कि वह उठा (उसने लोअर और टी-शर्ट पहनी थी) और उसने सीधा अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया.
उस वक्त तक मैं बैठी हुई थी और एकदम से यह वाकिया हुआ, जिसे मैं हैंडल नहीं कर पाई.
उसका लंड सीधा मेरे गले में जाकर टकराया और मुझे खांसी होने लगी.
मैंने कहा- जान! क्या कर रहे हो? अभी तो मैं आपकी हूँ, प्यार से करो!
वह बोला- पहले प्यार से था, अब तुम मेरी हो! अब मेरी मर्जी से होगा!
अब वह पूरा लंड मेरे मुँह में देने की कोशिश करने लगा.
करीब 5 मिनट के बाद उसने मुझे उठाया और अपने बेडरूम में ले गया.
यह पहली बार हुआ था कि कोई मुझे उठाकर अपने साथ लेकर गया हो.
बेडरूम में जाकर उसने मुझे बेड पर लुढ़का दिया और फिर से मेरे मुँह में लंड दे दिया.
अब मेरा बेटा मेरे ऊपर था, तो शायद उसके लंड को मेरे दाँत लग रहे थे, जिससे वह थोड़ा खुश नहीं था.
उसने मुझे नीचे बिठाया और फिर से मेरे मुँह में लंड दे दिया.
मैं भी उसके लौड़े को प्यार से चूसती रही.
अब मैं उसका 4 से 5 इंच तक लंड मुँह में आसानी से ले पा रही थी, तो वह भी खुश था.
इस बार वह मेरी गांड चाटने लगा क्योंकि मुझे पता था कि मेरा बेटा मेरी गांड का शौकीन है.
मुझे अच्छा फील होने लगा.
उसने करीब 15 से 20 मिनट मेरी गांड चाटी.
अब मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मैं चाह रही थी कि वह अब बस डाल दे.
उसने अपना लंड निकाला और गांड के छेद पर टिका दिया.
पहले वह उसे ऊपर घिसने लगा … वह गांड के छल्ले में सुपारे को थोड़ा अन्दर करता, फिर बाहर निकाल लेता.
करीब 5 मिनट तक ऐसा ही चला.
मैंने खुद बोल दिया- जान डाल भी दो अब, क्या कर रहे हो?
मेरा बेटा बोला- हां, डालता हूँ जान … इतनी भी क्या जल्दी है!
फिर उसने एक ही झटके में अपना लंड डाल दिया.
अभी उसका टोपा और करीब 2 से 3 इंच ही लंड अन्दर गया था, तो मेरी चीख निकल गई!
मैं उससे बोलने लगी- प्लीज बाहर निकाल लो, निकाल लो … आह बहुत दर्द हो रहा है!
लेकिन उसने मुझे ऐसे जकड़ा हुआ था कि मैं हिल भी नहीं पा रही थी.
थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद उसने थोड़ा बाहर निकाला, तो मुझे अच्छा महसूस हुआ.
फिर उसने मुझे मेरे कंधों से पकड़ा और वापस एक जोरदार झटका मारा.
इस बार उसका 5 से 6 इंच तक मेरे अन्दर चला गया और मेरी इतनी जोर से चीख निकली कि मैं आपको बता नहीं सकती!
मेरी चीख पूरे घर में गूँज गई होगी!
मैंने बहुत कोशिश की कि उससे छूट जाऊं, लेकिन उसने नहीं छोड़ा.
वह फिर से करीब 2-3 मिनट तक रुककर, अपने हाथ मेरी कमर में ऐसे ही डालकर पड़ा रहा.
फिर वह धीरे-धीरे झटके देने लगा और मॅाम ऐस्स Xxx सेक्स के मजे लेने लगा..
तब मुझे इतना दर्द नहीं हुआ, फिर उसने एक जोरदार झटका मारा, जिसमें उसका पूरे का पूरा लंड अन्दर चला गया.
इस बार फिर से मेरी बहुत जोर से चीख निकली.
मैं बोली- जान प्लीज, धीरे करो! मैं कौन सा भाग रही हूँ, अब आपकी ही तो हूँ!
वह बोला- जान, बस आज के दिन गांड मारने का जी कर रहा था, सो वह मैंने मार ली है. अब आप कहीं जाओगी भी नहीं … बार बार मुझसे अपनी गांड और चुत चुदवाने आओगी!
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान तो आई मगर दर्द के कारण मैं खुल कर हंस न सकी.
फिर वह मेरी गांड चोदने लगा.
अब मुझे भी थोड़ा अच्छा महसूस होने लगा.
उसने करीब 20 मिनट तक मेरी गांड चोदी और सारा पानी अन्दर ही छोड़ दिया.
मुझे मेरी गांड में उसके लौड़े से बहुत मज़ा आने लगा था.
वह मेरी गांड मारने के साथ साथ अपनी उंगलियों से मेरी चुत को भी रगड़ रहा था, इससे मैं भी दो बार अपना पानी निकाल चुकी थी.
वह मुझे चूमता हुआ बोला- मीनू मजा आया न!
मैं बोली- बहुत मज़ा आया मेरी जान!
मैं वहीं पर लेट गई और मेरा बेटा मेरे ऊपर ही लेट गया.
हम दोनों कोई 10 मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे.
फिर उसके बाद उसका लंड खड़ा होने लगा.
वह मुझे लिप-लॉक करके किस करने लगा और जब मेरा हाथ उसके लंड पर गया, तो देखा कि वह फिर से खड़ा हो गया है.
मैंने कहा- थोड़ा रेस्ट कर लेते हैं.
मेरा बेटा बोला- बिल्कुल जान, रेस्ट करेंगे हम… लेकिन एक और शॉट लगाने के बाद.
उसने फिर से मेरी गांड पर लंड रख दिया.
गांड में अभी भी दर्द था तो पेलने से थोड़ी चिनमिनाई लेकिन उतना दर्द नहीं हुआ.
इस बार भी उसने मुझे करीब 20 मिनट तक चोदा और झटके भी बहुत जोर जोर से लगाए.
इस बार भी उसने मेरी गांड में ही सारा पानी निकाला.
मैं उसके पानी से अपने आप को गीला सा फ़ील कर रही थी क्योंकि मुझे गांड के अन्दर बहुत अच्छा महसूस हो रहा था.
मैं बहुत खुश थी.
मेरे बेटे ने मुझसे पूछा- मॉम मज़ा आया?
मैं बोली- मुझे मॉम नहीं, मीनाक्षी बोलो!
वह बोला- नहीं! मैं अपनी मां को चोदना चाहता हूँ, किसी मीनाक्षी को नहीं! और यह मेरा ड्रीम भी था!
मैं यह बात सुनकर थोड़ा सा शॉक भी हुई और खुश भी थी कि मेरा बेटा कैसे-कैसे ड्रीम लेकर बड़ा हो रहा है.
मैं बोली- सच में? तुम अपनी मां से इतना प्यार करते हो?
वह बोला- अपनी मां को प्यार करता हूँ, तभी तो उसकी गांड मार रहा हूँ आज. आपकी गांड मारने के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता था मॉम!
उसके मुँह से यह सुनकर मैंने इस बार उसका लंड पकड़ लिया और पूरा मुँह में लेने लगी.
मैं आज बहुत खुश थी, क्योंकि मैं अपने बेटे से गांड मरवा रही थी.
मैं उसका लंड चूसती रही और बेटा भी इस बार मेरे मुँह में बहुत जोर जोर के झटके मार रहा था.
मैं समझ रही थी, उसका पूरा लंड मेरे मुँह में गले के अन्दर तक जा रहा था, लेकिन मज़ा आ रहा था.
इस बार उसने कम से कम 20 मिनट तक मेरे मुँह को चोदा और फिर सारा पानी मेरे मुँह के अन्दर ही छोड़ दिया!
उसके पानी की एक भी बूंद मेरी जीभ से बाहर नहीं गई थी.
चूँकि उसने सारा पानी ही मेरे गले में छोड़ा, तो मुझे थोड़ा सा अजीब भी लगा था. पर फिर सोचा कि जब मेरा बेटा मेरे लिए इतना कर रहा था, तो क्या मैं इतना भी नहीं कर सकती थी?
फिर हम दोनों सुबह 11:00 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक लगातार शारीरिक संबंध बनाते रहे.
उसने दो बार मेरे मुँह को चोदा, पर चूत एक बार भी नहीं चोदी.
मैंने पूछा- बेटे तुझे मेरी चूत नहीं चोदनी क्या?
वह बोला- मॉम, आपकी गांड चोदने में जो मज़ा है ना, वह चूत में नहीं है! सो, जिस दिन मेरा गांड मारने का दिल नहीं करेगा, उस दिन मैं आपकी चूत मारूँगा!
मैंने जवाब दिया- जैसी आपकी इच्छा पतिदेव … अब तो आप मेरे पति हो गए हैं!
वह हंस दिया.
फिर हम दोनों सो गए.
जब हम सोए थे तब रात के करीब 1:00 बजे का समय हो रहा था.
सुबह 5:00 बजे फिर से उठ गए क्योंकि मेरा बेटा पहले उठ गया था और वह मेरी गांड के साथ पंगा ले रहा था.
जैसे ही उसने गांड का छेद खोलकर अपना लंड डाला, मेरी आंख खुल गई.
उसने एक ही दिन में मेरी गांड इतनी ज्यादा खोल दी थी कि उसका 7-8 इंच का लंड बहुत आसानी से अन्दर-बाहर जा रहा था.
जैसे ही उसने अपना प्रोग्राम शुरू किया, मैं भी उठ गई और चिल्ला-चिल्ला कर साथ देने लगी.
वह बोला- बड़ी चिल्ला रही हो मॉम?
मैंने कहा- जो चिल्ला कर मज़ा आता है ना, वह कहीं नहीं है … ज़िंदगी का मज़ा अब जाकर मुझे मिल रहा है, तो मैं क्यों न चिल्लाऊं?
वह बोला- आपको मैं और भी मज़े दूँगा, बस आप मेरे साथ रहिएगा!
मैंने कहा- हां मेरी जान बिल्कुल, मैं तो आपकी ही हूँ. आपके पास ही रहूँगी और कहीं नहीं जाऊंगी!
तब मेरा बेटा बोला- अब हिमांशु को कुछ भी नहीं देने का! अब न उसे चूत देनी है और न ही गांड!
मैंने कहा- ठीक है जान! जैसा आप बोलो वैसा ही होगा. वैसे भी, मैंने आपके अलावा कभी किसी और से गांड नहीं मरवाई थी!
इसके बाद हम चार दिन तक ऐसे ही रहे.
हमने किचन में किया, बाथरूम में किया, हॉल में और रूम में… मतलब घर के एक-एक कोने में हमने सेक्स किया! मैं बहुत खुश थी.
फिर एक दिन जब मेरा बेटा बाज़ार गया हुआ था, तो पीछे से मेरी सहेली साईमा आई.
उस वक्त मैंने कपड़े पहने हुए थे, वरना हम अक्सर घर में नंगे ही रहते थे.
मैंने बहुत टाइट कपड़े पहने थे जो मेरे बेटे को पसंद थे क्योंकि घर में मैं उसकी पसंद के ही कपड़े पहनती थी.
जैसे ही मेरी सहेली घर आई, वह मेरी फ़ूली और फैली हुई गांड देखकर मज़ाक करने लगी.
मैंने उसे सच बताया और कहा- मैं किसी और से गांड नहीं मरवा सकती!
काफी देर हंसने के बाद वह मुझसे बोली- मीनाक्षी! सच में तेरी गांड बहुत बाहर आ गई है! क्या ट्राई करती है? मुझे भी लेना है, बता!
मैंने हंस कर कह दिया- लंड!
तब साईमा बोली- लंड तो मैं बहुत लेती हूँ, लेकिन सभी बूढ़े हैं. कोई जवान मिले जो मेरी गांड फाड़ दे, तो मज़ा आएगा!
मैंने कहा- हां … उसका भी अरेंजमेंट कर दूँगी. बस तू ये बता कि मरवानी है?
वह बोली- हां लेकिन मैं एक शर्त पर मानूँगी!
मैं बोली- हां बोलो, क्या शर्त है?
वह बोली- मेरी गांड का साइज अभी 36 है और एक वीक के अन्दर-अन्दर इसे 40 प्लस करवा दे तो बात बने.
मैंने जवाब दिया- बिल्कुल कर देगा! लेकिन एक वीक तेरे को मेरे पास ही रहना पड़ेगा.
वह बोली- ठीक है, बताओ कब से आऊं?
मैंने कहा- जब तेरा दिल करे! तुम बताओ कब?
वह बोली- मैं तो आज से ही गांड मरवाना चाहती हूँ!
तभी मेरा बेटा आ गया.
हम दोनों रूम में ही थे.
मेरे बेटे ने अपना लोअर उतार दिया था और केवल अंडरवियर और टी-शर्ट पहनी थी क्योंकि बाहर बहुत गर्मी थी.
उसके अंडरवियर में उसका लंड पूरा खड़ा दिख रहा था.
मैंने अपने बेटे को देखकर साईमा को इशारा किया.
तभी बेटा मुझसे बोला- मॉम, मुझे कपड़े देना.
मैंने साईमा से कहा- तुम यहां बैठो, मैं इसे कपड़े देकर आती हूँ.
मैं उसे दूसरे रूम में ले गई, जहां उसने मुझसे अपना लंड चुसवाया.
उसने मुझसे पूछा- यह कौन है?
मैंने कहा- हां बताती हूँ, पहले मुझे तेरे को कुछ बोलना है.
यह कह कर मैंने उसे सारी बात बता दी.
वह बोला- अगर आप दबाव डालोगी, तो मैं इसे बिल्कुल चोदूँगा!
मैंने कहा- लेकिन उसकी एक डिमांड है. उसकी गांड का साइज 36 है और वह चाहती है कि एक वीक में यह 40 प्लस हो जाए. कर दोगे क्या?
तब मेरा बेटा बोला- बिल्कुल-बिल्कुल जान! मैं करूँगा. चार इंच मोटी तो क्या, इसका साइज़ 45 प्लस हो जाएगा, आप देखना तो सही!
तब मैंने कहा- ठीक है, मैं उसका फाइनल करती हूँ. तुम इतनी देर फ्रेश हो जाओ, मैं तुम्हें बताती हूँ.
फिर वह बाथरूम में चला गया और मैं साईमा के पास आ गई.
दोस्तो, आपको मेरी इस मॅाम ऐस्स Xxx स्टोरी में कैसा लग रहा है प्लीज जरूर बताएं.
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